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07 July 2011

अद्भुत चमत्कार...3 साल ऐसा करके पा सकते हैं, अपनी मौत पर काबू !!

 
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कुछ ऐसी योगिक क्रियाएं हैं जिनके लाभों को सुनकर एकाएक भरोसा नहीं होता। लेकिन जब हम इन क्रियाओं के पीडे छुपे अद्भुत ज्ञान और विज्ञान को जान लेते हैं तो ऐसी आश्वर्यजनक बातों को भी मानना पड़ता है। यहां हम एक ऐसी ही बहुत प्राचीन योग क्रिया- जालंधर बंध के विषय में बात कर रहे हैं।

बंध का सीधा सा मतलब है मजबूत जोड़। जिस जालंधर बध की बात हम कर रहे हैं उसे कहीं-कहीं चिन बंध भी कहा गया है। ऐसी मान्यता है कि  इस बंध का अविष्कार प्रसिद्ध सिद्ध जालंधरिपाद नाथ ने किया था इसीलिए उनके नाम पर इसे जालंधर बंध कहते हैं।

योग से संबंधित प्रसिद्ध पुस्तकों की यह पुख्ता मान्यता है कि यह बंध मौत के जाल को भी काटने की ताकत रखता है। क्योंकि इससे दिमाग, दिल और मेरुदंड की नाडिय़ों में निरंतर रक्त संचार सुचारु रूप से संचालित होता रहता है, और जाहिर है कि रक्त संचरण की ऐसी व्यवस्था ही जीवित अवस्था के लिये सर्वाधिक अनिवार्य होती है।

जालंधर बंध की विधि

किसी भी सुखासन में बैठकर पूरक करके कुंभक करें और ठोड़ी को छाती के साथ दबाएं। इसे जालंधर बंध कहते हैं। सरल शब्दों में कहें तो कंठ को संकुचित करके हृदय में ठोड़ी को मजबूती के साथ लगाने का नाम जालंधर बंध है।

इसे करने के आश्वर्यजनक फायदे

1. योग शास्त्रों की निश्चित मान्यता है कि 3 वर्षों तक इस  बंध विधिवत अभ्यास मौत के जाल को भी काटने की ताकत

   रखता है।

2. इड़ा और पिंगला नाड़ी बंद होकर प्राण-अपान सुषुन्मा नाड़ी में प्रविष्ट होता है। इस कारण मस्तिष्क के दोनों हिस्सों में

   सक्रियता बढ़ती है।

3. इससे गर्दन की मासपेशियों में रक्त का संचार होता है, जिससे उनमें दृढ़ता आती है तथा ताउम्र दर्द या जकडऩ की समस्या



    दूर रहती है।

4. कंठ की रुकावट समाप्त होती है तथा व्यक्ति की बोली में गमक, आकर्षण और प्रभावशीलता बड़ती है।

5. मेरुदंड में खिंचाव होने से उसमें रक्त संचार तेजी से बढ़ता है, जिससे शरीर और मन दोनों को पूर्ण स्वास्थ और तेजस्विता

   प्राप्त होती है।

6. इसके नियमित अभ्यास से सभी रोग दूर होते हैं और व्यक्ति सदा स्वस्थ बना रहता है।



प्रमुख सावाधानियां

-किसी अनुभवी जानकार योग विशेषज्ञ के मार्गदर्शन में ही किसी योगिक क्रिया की शुरुआत करना चाहिये।

-शुरू में स्वाभाविक श्वास ग्रहण करके जालंधर बंध लगाना चाहिए।

-यदि गले में किसी प्रकार की तकलीफ हो तो न लगाएं। शक्ति से बाहर श्वास ग्रहण करके जालंधर न लगाएं।

कैसे पता चलता है यदि कहीं छुपा हो खजाना?

कैसे पता चलता है यदि कहीं छुपा हो खजाना?

 
 
 
खजाना शब्द सुनते ही हमारे दिमाग में हीरे-मोती, सोना-चांदी, धन-दौलत के ढेर का चित्र उभर आता है। शास्त्रों में खजानों के संबंध में कई महत्वपूर्ण बातें बताई गई हैं। आधुनिक युग में बढ़ती आवश्यकताओं के चलते काफी लोगों को कड़ी मेहनत के बाद भी पर्याप्त धन प्राप्त नहीं हो पाता। ऐसे में यदि उस व्यक्ति को खजाना मिल जाए वह पलभर में मालामाल हो सकता है।

ऐसे अनेक किस्से-कहानियां अक्सर सुने या सुनाए जाते हैं जिनमें खजाना के संबंध में जानकारियां होती हैं। अपार धन संपदा कहीं भी दबी हो सकती है और इसे खोजने के प्रयास कई लोगों द्वारा किए जाते हैं। ऐसा माना जाता है कि खजाना हर किसी व्यक्ति को नहीं मिल सकता। जिसकी किस्मत में अचानक अपार धन प्राप्त करने के योग हैं वहीं गुप्त खजाना प्राप्त कर सकता है।

शास्त्रों के अनुसार गुप्त खजाना कहां छिपा होता है? यह मालूम करने के कई उपाय बताए गए हैं। जिस भी स्थान पर अपार धन, सोना-चांदी, हीरे-मोती छिपे या दबे होते हैं वहां सफेद नाग या कोई बहुत पुराना नाग अवश्य दिखाई देता है। इसके अलावा कहीं-कहीं नागों के झूंड भी ऐसे गुप्त खजानों की रक्षा करते हैं। ऐसे नागों का दिखाई देना ही इस बात की ओर इशारा करता है कि उस क्षेत्र में कहीं खजाना दबा हो सकता है। ऐसा खजाना मिलता उसे ही है जिसकी किस्मत में उसे प्राप्त करने का योग है। अन्य लोगों को इस संबंध में कुछ भी हाथ नहीं लगता

2जी घोटाला: इन 3 अफसरों के चलते गई मारन की कुर्सी!

2जी घोटाला: इन 3 अफसरों के चलते गई मारन की कुर्सी!

 
 
नई दिल्ली. टेलीकॉम कंपनी के तीन अफसरों के सीबीआई को दिए बयान पूर्व दूरसंचार मंत्री दयानिधि मारन के ताबूत में अंतिम कील साबित हुए। एक रिटायर्ड और दो वर्तमान अफसरों ने पिछले सप्ताह सीबीआई को दिए बयान में एयरसेल के पूर्व डायरेक्टर सी शिवशंकर के बयान की पुष्टि की कि मारन ने कंपनी को परेशान किया और जानबूझकर उन्हें करीब दो साल तक स्पेक्ट्रम आवंटन और अतिरिक्त लायसेंस नहीं दिए जबकि इन अफसरों ने उन्हें ऐसा करने से रोका भी था।
मारन यूपीए के पहले कार्यकाल में २००४ से २००७ तक दूरसंचार मंत्री थे। ये तीनों अफसर मारन के कार्यकाल में विभाग में उच्च पदों पर थे।
इन अफसरों के बयानों के आधार पर ही सीबीआई प्राथमिक जांच रिपोर्ट को एफआईआर में तब्दील करने जा रही है। सुप्रीम कोर्ट ने इस साल जनवरी में सीबीआई को २जी स्पेक्ट्रम आवंटन की जांच का दायरा बढ़ाने को कहा था और २००१ से २००६ के बीच स्पेक्ट्रम आवंटन को लेकर हुई विभागीय गतिविधियों की भी जांच के आदेश दिए थे। अब सीबीआई जल्दी ही मारन से पूछताछ करेगी।
सीबीआई के वरिष्ठ अफसरों ने संकेत दिए हैं कि वे मारन को नोटिस भेज रहे हैं, जिसमें उनसे पूछताछ के लिए अगले सप्ताह उपलब्ध रहने को कहा जाएगा। अब मारन मंत्री नहीं हैं इसलिए इसके लिए सरकार से इजाजत लेने की कोई आवश्यकता नहीं है।
सीबीआई के सूत्रों के अनुसार मारन के खिलाफ १ फरवरी २००४ से ३० मार्च २००५ के बीच विभाग के सचिव रहे नृपेंद्र मिश्रा, जॉइंट वायरलेस एडवाइजर रामजी सिंह कुशवाहा और और उस समय सीनियर डिप्टी डायरेक्टर जनरल रहे पीके मित्तल के बयान काफी अहम साबित हुए हैं।
मारन ने स्पेक्ट्रम पर कैबिनेट को भी अंधेरे में रखा
इसी बीच खुलासा हुआ है कि दयानिधि मारन ने अपने कार्यकाल में दूरसंचार के लिए बनी कैबिनेट उप समिति को भी स्पेक्ट्रम की कीमतों के मुद्दे पर अंधेरे में रखा। वित्त मंत्रालय के अधिकारियों ने २जी स्पेक्ट्रम घोटाले की जांच कर रही संयुक्त संसदीय समिति को बताया है कि मारन ने  दूरसंचार पर बने मंत्री समूह में भी इस मुद्दे पर चर्चा नहीं होने दी। तत्कालीन वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने उस समय इस पर आपत्ति उठाते हुए कहा था कि पहले इस मुद्दे को मंत्रियों के समूह के सामने रखा जाए और फिर कैबिनेट से पारित कराया जाए। लेकिन मारन इसके लिए कतई तैयार नहीं हुए। मारन का तर्क था कि स्पेक्ट्रम की कीमत निर्धारित करना विभाग का काम है और कैबिनेट का इसमें हस्तक्षेप नहीं होना चाहिए।
कमेटी के चेयरमैन पीसी चाको ने यह जानकारी देते हुए बताया कि इस मुद्दे पर दोनों विभागों के बीच पत्र व्यवहार भी हुआ, लेकिन मारन अपनी जिद पर अड़े रहे।

‘चंदा’ की रवानगी एस्कॉर्ट ने रोकी

 
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कोटा. जयपुर चिड़ियाघर से कोटा में आने वाली ‘चंदा’ की रवानगी एस्कॉर्ट (वाहन व संसाधन) सुविधा के अभाव में अटकी हुई है। कोटा चिड़ियाघर से रीना शेरनी को जयपुर भेजने की एवज में केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण, नई दिल्ली से दो माह पहले यहां चंदा बाघिन लाने की परमिशन मिल चुकी है।

जयपुर चिड़ियाघर भी बाघिन यहां भेजने को तैयार हैं। चंदा को कोटा लाने के लिए वन विभाग (वाइल्ड लाइफ) एक कैंटर वाहन उपलब्ध करवा रहा है। इस एक वाहन से उसे यहां लाना डॉक्टर उचित नहीं मान रहे हैं। उनका कहना है कि कैंटर गाड़ी में मेडिकल स्टॉफ के अलावा केयर टेकर, केटल गार्ड, ट्रांक्यूलाइजिंग गन, रस्सी, पानी व भोजन सुविधा व पूरा स्टॉफ आना मुश्किल काम है।

जयपुर से बाघिन लाने के लिए दो माह पहले ही स्वीकृति मिल चुकी है। एस्कॉर्ट के लिए वाहन सुविधा नहीं मिल रही है। इस सुविधा के लिए वाइल्ड लाइफ विभाग को लिखा है। - डॉ. अखिलेश पांडे, चिकित्सक चिड़ियाघर

जयपुर चिड़ियाघर से यहां बाघिन लाने के लिए एस्कॉर्ट सुविधा नहीं मिल पा रही है। डॉक्टर को कैंटर से उसे यहां लाने के लिए निर्देश दिए है। शीघ्र ही चंदा को यहां लाने के प्रयास होंगे। - मदनलाल कुलदीप, रेंजर चिड़ियाघर कोटा

तुमसे मिलन की आस में ...

तुम ही बताओं
आखिर कब तक
हाँ
आखिर कब तक
जियूं में
तुमसे मिलन की आस में ...
हां तुम ही बताओं
आखिर
तुम्हारी चाहत के लियें
में
कब तक सहूँ
इस दोज़क से
तड़पती जिंदगी को ..
हां तुम ही बताओं
इतने सालों से
जो तड़प तड़प कर
जी रहा हूँ
में सिर्फ और सिर्फ
तुमसे मिलन की आस में
अगर आखरी वक्त में भी
तुम न मिले
तो फिर क्या होगा .............अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

06 July 2011

जयपुर समेत 23 पीएफ दफ्तरों पर सीबीआई छापे

जयपुर समेत 23 पीएफ दफ्तरों पर सीबीआई छापे


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जयपुर। केन्द्रीय भविष्य निधि और कर्मचारी भविष्य निधि विभाग में 169 करोड़ रूपए का घोटाला सामने आया है। घोटाले में सीबीआई ने बुधवार को विभाग से जुड़े नौ आला अफसरों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। सीबीआई ने जयपुर समेत देश के 23 शहरों में स्थित केन्द्रीय भविष्य निधि (पीएफ) कार्यालयों पर छापे डाले। सीबीआई ने आरोपियों के कार्यालय कक्षों और उनके आवास पर कार्रवाई की और पूछताछ की है।

सीबीआई सूत्रों के मुताबिक, करोड़ों रूपए के भविष्य निधि घोटाले में केंद्रीय भविष्य निधि और कर्मचारी भविष्य निधि के तत्कालीन सहायक उपायुक्त समेत नौ आला अफसरों पर आपराधिक षड्यंत्र रचकर धोखाधड़ी करने और सरकार को नुकसान पहुंचाने का मामला दर्ज हुआ। आरोपियों ने दिल्ली की एक निजी फर्म के साथ आपराधिक षड्यंत्र रचा और गलत तरीके से 169 करोड़ रूपए हासिल करने के लिए सार्वजनिक धन का गबन किया।
आरोपियों ने फर्म के साथ मिलकर कर्मचारियों और उनकी कार्य अवधि के गलत आंकडे पेश किए। सेवानिवृत्त कर्मचारियों का आंकड़ा भी बढ़ा-चढ़ा दर्शा दिया। भविष्य निधि की देय राशि में भी उलटफेर किया गया। सीबीआई (दिल्ली) की प्रवक्ता धारिणी मिश्रा ने बताया कि दिल्ली, चंडीगढ़, लुधियाना, गाजियाबाद, फरीदाबाद, गुड़गांव, नोएडा समेत 23 स्थानों पर छापे की कार्रवाई की गई। आरोपियों की चल-अचल संपत्ति से जुड़े दस्तावेज भी बरामद किए गए हैं। बरामद दस्तावेजों की सीबीआई पड़ताल कर रही है।
हड़कम्प मचा : जयपुर में तीन-चार घण्टे चली कार्रवाई के दौरान टीम ने दस्तावेज खंगाले। कार्रवाई की सूचना पर विभाग में हड़कम्प मच गया। दोपहर को कार्रवाई पूरी कर टीम दिल्ली रवाना हो गई।
जयपुर में भी तलाशी : सीबीआई ने सुबह 11 बजे जयपुर पीएफ कार्यालय में पदस्थापित सहायक आयुक्त सी.एस.गोगना के ऑफिस तथा विभाग के ज्योतिनगर स्थित पेइंग गेस्ट हाउस के उस कक्ष की तलाशी ली, जिसमें गोगना ठहरते हैं। गोगना से पूछताछ भी की। वे करीब एक साल पहले दिल्ली से जयपुर आए।

ट्रेन से टकराई बरातियों की बस, 37की मौत

ट्रेन से टकराई बरातियों की बस, 37की मौत


37 killed in bu-trai collision
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के काशीरामनगर में  गुरूवार तड़के हुए एक बस हादसे में 37लोगों के मारे जाने और 35 के घायल होने की खबर है।

 सूत्रों के मुतबिक उत्तर प्रदेश के काशीरामनगर में रात करीब दो बजे बरातियों से खचाखच भरी एक बस मानवरहित रेलवे क्रॉसिंग से गुजरते वक्त तेज गति से आ रही मथुरा-छपरा एक्सप्रेस से टकरा गई। ट्रेन करीब 500 मीटर तक बस को घसीटते हुए ले गई जिससे बस के परखच्च्चे उड़ गए।

जिला मुख्यालय के आघिकारिक सूत्रों के अनुसार अब तक 37 लोगों की मौत हो चुकी है तथा 35 लोग घायल हैं। इनमें से अघिकतर की हालत गंभीर बताई जा रही है। घायलों को एटा के जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। सभी मृतक एटा जिले के रहने वाले हैं।

प्रधानमंत्री ने घटना पर शोक जताते हुए मृतकों के परिजनों को 2-2 लाख रूपए, व गंभीर रूप से घायलों को 50 -50 हजार रूपए व मामूली रूप से घायल लोगों को 10-10 हजार रूपए के मुआवजे की घोषणा की है।

रेलवे प्रशासन का कहना है कि  हादसा बस चालक की गलती से हुआ । घटना की सूचना मिलते ही पुलिस व प्रशासन के आला अधिकारी घटनास्थल पहुंचे। डीएम और एसएसपी घटनास्थल पर पहुंचे हैं। राहत व बचाव कार्य पूरा कर लिसया है और रेलवे ट्रैक साफ कर दिया गया है। है। रेल राज्य मंत्री एस मुनियप्पा भी घटनास्थल के लिए रवाना हो चुके हैं।

धरी रही बंदिशें, हो गया ब्याह

धरी रही बंदिशें, हो गया ब्याह


state news

नैनवां/तलवास(बूंदी)। प्रशासन व वन विभाग का अमला तलवास के बजरंगधाम पर बैठा रह गया और आयोजकों ने आंतरी के जंगल में चिंकी बंदरिया का राजा बंदर से ब्याह करा दिया। अघिकारियों ने बुधवार को तलवास में शादी रूकवाने की तैयारियां कर रखी थी, लेकिन अधिकारियों के पहुंचने से पहले ही जंगल में दोनों का विवाह हो गया।
टोंक जिले के बनेठा गांव से राजा का पालनकर्ता तड़के पांच बजे ही बारात लेकर आंतरी के जंगल में पहुंच गया। जहां चिंकी का पालनकर्ता पहले से मौजूद था। बुधवार सुबह दोनों के विवाह की रस्म पूरी करके राजा एवं चिंकी को आजाद कर दिया। बाद में अघिकारियों ने चिंकी व राजा को पकड़ कोटा चिडियाघर भेज दिया।

राजस्व मण्डल में काम शुरू

राजस्व मण्डल में काम शुरू


अजमेर। सम्भागीय आयुक्तों को राजस्व मंडल सदस्य के समकक्ष दर्जा दिए जाने के प्रस्ताव के विरोध में  पिछले 27 दिन से हड़ताल पर चल रहे राजस्व अधिवक्ता मंगलवार को काम पर लौट आए।
 इससे राजस्व मण्डल व राजस्व अधीनस्थ अदालतों में फिर से रौनक लौट आई तथा न्यायिक कार्य सुचारू रूप से चालू हो गया। मंगलवार को नियमित रूप से मुकदमों की सुनवाई भी हुई। अधिवक्ताओं ने बड़ी संख्या में स्थगन आदेश बढ़ाने के लिए के लिए अर्जियां पेश कीं। हालांकि सदस्यों की कमी के कारण डीबी-2 में सिर्फ तारीखें ही दी गई।
दूसरे संभाग अडे
राजस्व बार एसोसिएशन ने मामले को लेकर भले ही केंद्रीय सूचना प्रौद्योगिकी एवं संचार राज्यमंत्री सचिन पायलट के आश्वासन पर हड़ताल खत्म कर दी हो, लेकिन अब शेष अन्य संभागों के अधिवक्ताओं ने राज्य सरकार के संभागीय आयुक्तों को राजस्व मण्डल सदस्यों के समान अधिकार दिए जाने के प्रस्ताव की प्रशंसा करते हुए इसे लागू करने की मांग शुरू कर दी है। इस मामले को लेकर बुधवार को अन्य संभाग के अधिवक्ताओं ने राजस्व मण्डल अध्यक्ष से मुलाकात भी की।
21 सदस्यीय संघर्ष समिति गठित
संभागीय स्तर पर राजस्व बोर्ड का गठन करने, बोर्ड सदस्यों की नियुक्ति में 60 प्रतिशत अधिवक्ता कोटा निर्धारित करने तथा राजस्व मण्डल के विकेन्द्रीकरण के लिए जयपुर में अन्य संभाग के अधिवक्ता बैठक कर चुके हैं। जयपुर में दी बार एसोसिएशन जयपुर के अध्यक्ष राममनोहर शर्मा की अध्यक्षता में हुई बैठक में जयपुर, जोधपुर, बीकानेर, उदयपुर, भरतपुर तथा कोटा संभाग की बार एसोसिएशन के पदाधिकारी शामिल हुए। इस दौरान प्रस्ताव पारित किए गए तथा इसके लिए 21 सदस्यीय संयुक्त संघर्ष समिति का गठन किया गया। जयपुर बार अध्यक्ष राममनोहर शर्मा को समिति का संयोजक तथा बार काउंसिल ऑफ राजस्थान के पूर्व सदस्य आर.के.दास को सह संयोजक बनाया गया है।

बीस साल के अंदर धरती पर उतरेंगे एलियंस!

बीस साल के अंदर धरती पर उतरेंगे एलियंस!

 

 
 
 
 
मॉस्को.दुनिया भर में आज सबसे बड़ा सवाल बन कर रह गए एलियंस को लेकर रूस के एक शीर्ष विज्ञानी ने बेहद सनसनीखेज खुलासा किया है। रूसी विज्ञान अकादमी के निदेशक अंद्रेई फिन्केल्सटेन ने दावा किया है कि मनुष्य का सामना एलियंस से मात्र 20 वर्षों के अंदर हो जायेगा।
रूस की सरकारी संवाद समिति ‘इंटरफैक्स’ ने रूसी विज्ञान अकादमी के अंतरिक्ष संस्थान के एक शीर्ष वैज्ञानिक के हवाले से खबर दी है कि पृथ्वी से इतर अन्य ग्रहों पर निश्चित रूप से जीवन है और संभावना है कि धरती के मनुष्य का अगले दो दशकों में उन प्राणियों से आमना-सामना हो जाएगा।
यही नहीं अंद्रेई का मानना है कि बाहरी ग्रहों के प्राणियों के भी पृथ्वी के मनुष्य की तरह ही दो हाथ, दो पैर और एक सिर हैं।

पद्मनाभ मंदिर: खजाने का बनेगा वीडियो, सुप्रीम कोर्ट ने मांगी रिपोर्ट

पद्मनाभ मंदिर: खजाने का बनेगा वीडियो, सुप्रीम कोर्ट ने मांगी रिपोर्ट


 
 
 
 
नई दिल्ली/कोच्चि. तिरुअनंतपुरम के पद्मनाभ स्वामी मंदिर में मिले करीब १ लाख करोड़ के खजाने पर आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। कोर्ट ने मंदिर प्रबंधन समिति, खजाना निकालने के लिए बनी निगरानी कमेटी के सदस्यों और मामले से जुड़े हुए वकीलों को निर्देश दिए कि वे इस बारे में मीडिया से कोई भी चर्चा न करें। कोर्ट ने खजाने की सुरक्षा को लेकर भी रिपोर्ट मांगी है। मंदिर के पांच तहखाने खोले जा चुके हैं और छठवां तहखाना शुक्रवार को खोला जाएगा। इसी बीच उड़ुपी के श्रीकृष्ण मंदिर में भी इसी तरह का खजाना होने की चर्चा शुरु हो गई है। इस मंदिर का इतिहास करीब ८०० साल पुराना है।
कुछ महीनों पहले केरल हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिए थे कि वह मंदिर का प्रबंधन अपने हाथों में ले ले। लेकिन मंदिर प्रबंधन कमेटी ने इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की, जिसके बाद हाई कोर्ट के आदेश पर स्टे दे दिया गया। मामले की आज सुनवाई हुई। सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने इस बात पर नाराजगी जताई कि कुछ लोग, बिना प्रमाणिकता के खजाने की कीमत के बारे में बातचीत कर रहे हैं। कोर्ट ने खजाने को निकालने के लिए बनाई गई कमेटी से खजाने की सुरक्षा को लेकर भी रिपोर्ट मांगी है।
कोर्ट ने खजाना निकालने की वीडियोग्राफी करने के भी निर्देश दिए। कोर्ट ने खजाने के मालिकाना हक को लेकर उठे विवाद पर भी गंभीर चिंता जताई। कोर्ट ने संपत्ति को सुरक्षित रखने के लिए किसी म्यूजियम के क्यूरेटर की नियुक्ती का भी प्रस्ताव दिया। कोर्ट ने कहा कि वे विशेषज्ञों से बातचीत कर, शुक्रवार को इस पर निर्णय देंगे। कोर्ट ने कहा कि वे इस पर भी निर्णय लेंगे कि कौन से सामान को म्यूजियम में रखा जाए और किसे सुरक्षित स्थानों पर।  कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि कोई खजाने पर मालिकाना हक का दावा करता है तो इसके गंभीर परिणाम निकलेंगे।
इसी बीच नई दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री पी चिदंबरम ने बुधवार को कहा कि राज्य सरकार ने मंदिर की सुरक्षा को लेकर केंद्र से कोई चर्चा नहीं की है। उन्होंने उम्मीद जताई कि राज्य सरकार मंदिर और खजाने की सुरक्षा करने में सक्षम है।  
जस्टिस राजन ने कहा, कभी कीमत सार्वजनिक नहीं की
इसके पहले सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित कमेटी के  सदस्य जस्टिस सीएस राजन ने अपनी बात से मुकरते हुए कहा कि उन्होंने कभी भी खजाने की कीमत सार्वजनिक नहीं की है। उन्होंने कहा कि उन्होंने केवल इतना कहा कि खजाने का देखने के बाद वे आश्चर्यचकित रह गए थे।   राजन ने कहा कि उनका मानना है कि खजाना मंदिर के ही पास रहना चाहिए, क्योंकि यह पूर्ववर्ती त्रावणकोर शासकों ने भगवान को समर्पित किया था। यह खजाना ट्रेजरार ट्रोव एक्ट के अंतर्गत नहीं आता। हालांकि इस बारे में वे अंतिम रिपोर्ट कोर्ट को सौंपेंगे और इसी के बाद इस पर निर्णय होगा। लेकिन कुछ लोगों का मानना है कि यह खजाना राज्य सरकार के पास जाना चाहिए। 
खजाने के अंतिम तहखाने को खोलने का काम रोक दिया गया है लेकिन इसे शुक्रवार को खोला जाएगा। माना जा रहा है कि अपशकुन की आशंका के चलते यह निर्णय लिया गया था। जस्टिस राजन ने इस बारे में कहा कि इस बारे में मंदिर के मुख्य पुजारी से बातचीत की जाएगी। माना जा रहा है कि सबसे ज्यादा कीमती सामान इसी में रखा गया है। जस्टिस राजन ने कहा कि इस अंतिम तहखाने को खोलने में काफी दिक्कतें हैं लेकिन जैसा कि कहा जा रहा था कि इस तहखाने से एक सुरंग समुद्र तक गई है, इसकी अभी तक पुष्टि नहीं हुई है।
उन्होंने कहा कि खजाने का रिकॉर्ड पूरी तरह वैज्ञानिक तरीके से रखा जा रहा है और इसकी वास्तविक कीमत, मीडिया में छप रही कीमत से भिन्न हो सकती है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने मुझे खजाने की कीमत के आंकलन के बारे में निर्देश नहीं दिए हैं। जस्टिस ने  कहा कि वे सुप्रीम कोर्ट को खजाने के बारे में अपनी अंतरिम रिपोर्ट जल्दी ही सौंप देंगे। लेकिन कोर्ट में चल रहा मामला संपत्ति पर कब्जे को लेकर है।
सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त की गई कमेटी की बैठक शुक्रवार को होने की संभावना है, जिसके बाद ही अंतिम तहखाना खोलने का निर्णय लिया जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट के याचिकाकर्ता की नाराजगी
याचिका दाखिल करने वाले टीपी सुंदरराजन ने इस पर नाराजगी जाहिर की कि खजाने को निकालने वाले कुछ सदस्य इसकी कीमत को सार्वजनिक कर रहे हैं। उनके अनुसार सेवानिवृत्त हाई कोर्ट जज सीएस राजन, जो खजाना निकाल रही कमेटी के सदस्य हैं ने कहा कि खजाना देखकर वे आश्चर्यचकित रह गए। किसी ने भी इतने हीरे और आभूषण जीवन में नहीं देखें होंगे। यह वाकई एक अनोखा अनुभव था। उन्होंने यह भी कहा कि यह खजाना नहीं है बल्कि राजसी परिवार का मंदिर को सालों से दी जा रही संपत्ति है। राजसी परिवार के सदस्य सुंदरराजन ने इस पर आपत्ति करते हुए कहा कि किसी को भी इस मामले में टिप्पणी नहीं करना चाहिए क्योंकि मामला कोर्ट में है।
नायर समाज ने कहा खजाने पर दावे को लेकर भ्रामक प्रचार
केरल के प्रभावशाली नायर समाज ने आरोप लगाया है कि संपत्ति पर कब्जे को लेकर कई लोग भ्रम फैला रहे हैं। नायर सर्विस सोसायटी (एनएसएस) के महासचिव जी सुकुमारन नायर ने कहा कि राज्य सरकार ने यह मान लिया है कि खजाना मंदिर की संपत्ति है, फिर भी इस पर विवाद खड़ा किया जा रहा है।

राजस्थान सरकार कोटा की जनता के सब्र का इम्तिहान ना ले और ऐसे बदतमीज़ पुलिस अधिकारियों को कोटा से हटा दे

Hi Akhtar Khan,   दोस्तों कोटा राजस्थान में तेनात एक आई पी एस अपनी वर्दी के नशे में इतने चकना चूर हो गए है के वोह मरकने बेल की तरह जिसको चाहे उसे मरने के लियें निकल पढ़े हैं कई जन प्रतिनिधि और पत्रकार उनकी बदतमीज़ी के शिकार हो गए है ..गृह मंत्री के इस कोटा शहर में ऐसा पहली बार हुआ है जब सडकों पर किसी पुलिस अधिकारी का आतंक हो ..पंकज चोधरी आई पी एस ने कल राजस्थान पत्रिका के राजेश तिरपाठी जो काफी सुलझे हुए व्यक्तित्व के है उनके साथ अभद्रता कर दी तो समझ लीजिये के ऐसे अधिकारी को कोटा रहने का कोई हक नहीं बचा है ..राजस्थान पत्रिका का चाहे निजी हित के कारण ऐसे अधिकारीयों से कोई गुप्त समझोता हो जाये लेकिन जनता के हित में तो ऐसे अधिकारीयों का कोटा से कृष्ण मुख होना ज़रूरी है वरना कोटा की जनता जितना सब्र करना  जानती है उतना ही बेसब्री होने के बाद अधिकारियों की बेहद बेक़द्री करती है इसलियें वक़्त से पहले ही राजस्थान सरकार को इस मामले में खुद की इन्तिलिजेंस सर्विस से जानकारी लेकर इस मुसीबत से छुटकारा लेना चाहिए और फुल मोहमद सी आई को ज़िंदा जला देने  जेसी घटनाओं से बचने के लियें सर्कार को बहुत बहुत अहतियात की जरुररत है ....इस मामले में कल की घटना पर मेरे अनुज भाई रमेश चन्द्र सिरफिरा  जी ने  अपने उद्गार प्रकट किये हैं जो साथ में पेश हैं ..........................अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान 

Ramesh Kumar Sirfiraa commented on your note "'एनकाउंटर' की धमकी".
Ramesh Kumar wrote: "आजकल पुलिस द्वारा पत्रकारों के साथ किये जा रहे दुर्व्यवहार के समाचार बहुत सुनने को मिल रहे हैं, पुलिस अधिकारी अपनी दुश्मनी निकालने के कहीं-कहीं पर फर्जी केसों में फंसा रहे हैं या अवसर मिलने पर एनकाउन्टर करने की धमकी दे रहे हैं. मेरे विचार में उपरोक्त घटना में अगर आईपीएस अधिकारी पंकज चौधरी दोषी साबित होते हैं.तब इनसे शरीर पर खाकी वर्दी पहनने का अधिकार वापिस ले लेना चाहिए. इससे पुलिस अधिकारीयों यह अहसास हो जाए कि-यह खाकी वर्दी का ही सम्मान करते हैं और इसकी साफ़-सफाई का खर्च भी जनता की जेब से आता है. अगर तुम्हारा व्यवहार जनता के प्रति ठीक नहीं होगा तब तुम्हारा अंजाम भी यहीं होगा. अगर "कोटा", राजस्थान, राजस्थान पत्रिका और पूरे देश के पत्रकार यह न करें. तब उनकी सच्ची पत्रकारिता पर लानत है.जब तुम अपने भाई कहूँ या परिवार के एक सदस्य के लिए नहीं लड़ सकते हो. तब "आम-आदमी" के लिए क्या खाक लड़ोंगे? यह मत देखो कि-यह उस "दल" के लिए, यह उस "दल" के लिए लिखता है और यह पागल "सिरफिरा" तो आम आदमी के लिखता है. आज पत्रकारों को अपना स्वार्थ छोड़कर एवं भौतिक वस्तुओं का मोह त्यागकर देश व समाज के साथ ही आम-आदमी के प्रति हो रहे अन्याय के खिलाफ एक "जन आंदोलन" चलाने की आवश्कता है. मेरे कुछ पत्रकारिता के नाम पर वेश्यावृति करने वाले पत्रकार भाइयों से निवेदन है कि-मेरे भाई जब आप अपना स्वार्थ एवं भौतिक वस्तुओं का मोह ही नहीं त्याग कर सकते हो.तब ज़माने में बहुत से "काम" है करने को. फिर क्यों इस सम्मानजनक "पत्रकारिता" को बदनाम करते हो? पैसा तो एक वेश्या भी कमाती हैं लेकिन बदनाम होकर.क्या हम उस वेश्या से गए गुजरे है? क्या हम ऐसा करके "आम-आदमी" के अधिकारों और देश की इज्जत नहीं बेच रहे हैं? मत बेचों मेरे दिशाहीन पत्रकार भाइयों इस देश की इज्जत को.मेरे विचार में जो सत्य लिखने से डरते हैं,वह मृतक के समान है. और फिर मत भूलो कि-गगन बेच देंगे, पवन बेच देंगे,चमन बेच देंगे,सुमन बेच देंगे! कलम के सिपाही गर सो गए तो वतन के मसीहा "वतन"बेच देंगे!!"

'पापा और भैया के लिए यह तूने क्या कर डाला मंपी'

'पापा और भैया के लिए यह तूने क्या कर डाला मंपी'


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नादिया (पश्चिम बंगाल). कहते हैं परिवार की जिम्मेदारी बड़े ही उठाते हैं। आगे बढ़कर जिम्मेदारी निभाने के लिए बड़े क्या से क्या कर देते हैं। लेकिन यहां तो एक 12 साल की बच्ची ने अपने परिजनों के लिए वह किया जिसे सुनकर आपके रोंगटे खड़े हो जाएंगे।
12 साल की मंपी से परिवार के लोगों ने तो कुछ नहीं कहा, लेकिन सभी परेशान थे। मंपी को यह जानकारी हो गई थी कि उसके बीमार पिता की आंखों की रोशनी जा रही है। दुख इतना ही नहीं था उसके भाई की किडनी भी खराब थी। अब परिजनों के लिए आंख और भाई के लिए किडनी की व्यवस्था करना संभव नहीं था।
परिवार की परेशानी को कैसे हल किया जाए। इसकी चिंता में डूबी रहती थी मंपी। आखिरकार उसने अपनी जिंदगी खत्म कर समस्या का समाधान निकाला। उसकी योजना के मुताबिक उसकी मौत के बाद दहेज का पैसा बच जाएगा और उसके अंग बीमार बाप और भाई के काम आ जाएगा। लेकिन कुदरत को तो कुछ और ही मंजूर था। मंपी द्वारा अपनी मां को लिखा गया यह पत्र उसके अंतिम संस्कार के बाद परिवार वालों को मिला।
मंपी के पिता मृदुल सरकार दिहाड़ी मजदूर हैं। मृदुल सरकार ने बताया कि सुसाइड नोट को उसकी मौत के अगले दिन पाया गया। उसका अंतिम संस्कार 27 जून को किया गया।
स्थानीय धनतल पंचायत के प्रधान तपस तरफदार ने बताया कि मंपी ने अपनी बहन मनिका के साथ खुदकुशी करने पर चर्चा की ताकि उनके अंग पिता और भाई के काम आ सके। हालांकि मनिका ने इस विचार को खारिज कर दिया और स्कूल चली गई जिसके बाद मम्पी ने खुदकुशी करने का फैसला किया।

कुरान के अपमान को लेकर यूपी में पुलिस-पब्लिक के बीच गोलीबारी, डीआईजी समेत पांच घायल


कुरान के अपमान को लेकर यूपी में पुलिस-पब्लिक के बीच गोलीबारी, डीआईजी समेत पांच घायल

 

 
 
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मुरादाबाद. उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में उस समय माहौल हिंसक हो गया जब छेड़खानी के एक आरोपी को गिरफ्तार करने गई पुलिस पर ग्रामीणों ने हमला कर दिया।

हिंसक वारदात में पुलिस की एक जीप भी फूंक दी गई और ग्रामिणों और पुलिस के बीच हुई गोलीबारी में मुरादाबाद के डीआईजी समेत चार  युवकों के घायल होने की खबर है। घायल युवकों की हालत चिंताजनक बताई जा रही है।

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक थाना मैनाठेर के सैफियों वाली बघा निवासी एक व्यक्ति ने थाने में अज्ञात लोगों के खिलाफ छेड़खानी का मामला दर्ज कराया था। इस मामले में गांव में दबिश देने पहुंची पुलिस ने एक घर में सामान बाहर फेंक दिया जिसमें मुसलमानों का पवित्र धर्मग्रंथ कुरान भी गिर गया। ग्रामीणों ने कुरान फेंकने का विरोध किया तो पुलिसवालों गांव वालों से भिड़ गए।

कुरान के अपमान को लेकर कुछ लोगों ने थाना मैनाठेर के बाहर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों के उग्र होने पर पुलिस ने फायरिंग कर दी जिसमें चार युवकों के गंभीर रूप से घायल होने की खबर है। पुलिस और ग्रामीणों के बीच हुई हिंसक झड़प में मुरादाबाद के डीआईजी के भी घायल होने की खबर है जो फिलहाल अस्पताल में भर्ती हैं।

मायावती-बिल्‍डर साठगांठ पर सुप्रीम कोर्ट सख्‍त, 50000 परिवारों को झटका


मायावती-बिल्‍डर साठगांठ पर सुप्रीम कोर्ट सख्‍त, 50000 परिवारों को झटका


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नई दिल्‍ली. सुप्रीम कोर्ट ने उत्‍तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा में किसानों की जमीन लेने से जुड़े इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले को सही ठहराया है। शीर्ष अदालत ने इस जमीन को सात बिल्‍डरों को दिए जाने पर भी रोक लगाई है। कोर्ट ने ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी पर बिल्‍डरों से साठगांठ होने का आरोप लगाते हुए अथॉरिटी पर 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है।
सुप्रीम कोर्ट ने आज इस मामले की सुनवाई करते हुए ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी को निर्देश दिए हैं कि वो किसानों और गांववालों की जमीन लौटा दे। अदालत ने कहा कि ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी ने बिल्‍डरों से साठगांठ कर सार्वजनिक उद्देश्‍य के लिए पहले तो किसानों की जमीन खरीदी  फिर इन्‍हें नियमों का उल्‍लंघन करते हुए बिल्‍डरों को ट्रांसफर कर दिया।

जस्टिस जी एस सिंघवी और जस्टिस ए के गांगुली की बेंच ने यह फैसला सुनाया है। बेंच के मुताबिक अथॉरिटी से सरकार की मंजूरी मिलने से पहले ही इस जमीन को कुछ बिल्‍डरों को आवंटित कर दिया। अदालत ने कहा है कि वह अपने इस फैसले की वजह का ब्‍यौरा बाद में देगा।
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने ग्रेटर नोएडा के साहबेरी गांव में किसानों से ली गई 156 हेक्‍टेयर ज़मीन लौटाने के आदेश दिए थे जिसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी। कोर्ट ने ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी और रियल एस्‍टेट डेवलपर्स और बिल्‍डरों की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए यह फैसला सुनाया।
सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश से ग्रेटर नोएडा, नोएडा एक्‍सप्रेस वे में बन रहे 50 हजार फ्लैट खरीदने वाले परिवारों की जान सांसत में आ गई होगी।
नोएडा एक्‍सप्रेस वे और ग्रेटर नोएडा उन लोगों के लिए घर का सपना पूरा कर रहा है जो दिल्‍ली में महंगी जमीन नहीं खरीद सकते। 2010 के आखिर तक एनसीआर के समूचे प्रॉपर्टी मार्केट में नोएडा की हिस्‍सेदारी करी

05 July 2011

सेहरा नोंचा और पोंछी मेहंदी

सेहरा नोंचा और पोंछी मेहंदी


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 टोंक /बनेठा। सिर के सेहरे व हाथों की मेहंदी पर जालिम दुनिया की नजर लग गई। धूमधाम के साथ उछलते कूदते तोरण मारने ससुराल जाने की तैयारी कर रहे दूल्हे राजकुमार (बंदर) पर कानून ने ऎसा फंदा कसा कि वह दुल्हनियां लाने बारात लेकर जाने की बजाए पिता (मालिक) के साथ फरार हो गया। उधर, दुल्हन चिंकी (बंदरिया) के साथ भी यही हुआ। वह सजना के गले में मेहंदी लगे हाथों से वरमाला डालने की बजाए गायब हो गई।
धूमधाम, अब सुनसान
बनेठा गांव के रमेश चंद सैनी के मानस पुत्र के तौर पर पल रहे बंदर राजकुमार की शादी बुधवार 6 जुलाई को बूंदी जिले के तलवास गांव की पालतू बंदरिया चिंकी के साथ होनी थी। मंगलवार को राजकुमार की निकासी निकाली जानी थी। निकासी के बाद राजकुमार के मामा (रमेश सैनी के ससुरालजन) भात भी पहनाने वाले थे।
 इसके साथ ही पूरे गांव को स्वादिष्ट पकवानों की दावत भी उड़ानी थी। बनेठा में रमेश सैनी के घर में सुबह राजकुमार की निकासी और शाम को चाक-भात की तैयारियां हो रही थी। अचानक प्रशासनिक और पुलिस अघिकारियों के जा धमकने और वन्यजीव को प्रताडित करने का नोटिस थमा देने से हर कोई भौचक रह गया।

पत्रकार को पुलिस अधिकारी ने दी 'एनकाउंटर' की धमकी

 पत्रकार को पुलिस अधिकारी ने दी 'एनकाउंटर' की धमकी


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कोटा। कोटा में हेलमेट नहीं लगाने वाले लोगों से मारपीट करने की शिकायत की हकीकत जानने पहुंचे राजस्थान पत्रिका के दो संवाददाताओं के साथ मंगलवार शाम एक प्रशिक्षु आईपीएस अधिकारी पंकज चौधरी ने दुर्व्यवहार किया और जबरन अवैध हिरासत में रखा।
चौधरी ने संवाददाताओं को एनकाउन्टर करने की धमकी दी। सूचना मिलने पर शहर के पत्रकारों में रोष फैल गया। वे पुलिस अधीक्षक से मिले। शहर पुलिस अधीक्षक की दखल के बाद पत्रकारों का गुस्सा शांत हुआ। एसपी ने पूरे प्रकरण की जांच एएसपी हनुमान मीणा को सौंपी है।
यह थी शिकायत
कुन्हाड़ी थाने में तैनात प्रशिक्षु आईपीएस अधिकारी पंकज चौधरी के बारे में लगातार शिकायत मिल रही थी कि वे रोजाना शाम को कोटा बैराज पर हेलमेट जांच अभियान चलाते हैं और बिना हेलमेट वालों को बेरहमी से पीटते हैं। कई बुजुर्गो व महिलाओं के साथ जा रहे लोगों से भी उन्होंने ऎसा ही बर्ताव किया। अपराधियों के साथ पुलिस की सख्ती समझ में आती है, लेकिन आम जनता के साथ कानून हाथ में लेने से पुलिस की गलत छवि जनता में जाती है।
पत्रकारों में रोष, एसपी से मिले
घटना की सूचना मिलने के बाद पत्रिका ने पुलिस अधीक्षक प्रफुल्ल कुमार को वाकया बताया। चंद मिनटों में ही यह खबर शहर के पत्रकारों में भी आग की तरह फैल गई। पुलिस अधीक्षक ने चौधरी से बात की, लेकिन चौधरी नहीं माना और दोनों संवाददाताओं को लेकर कुन्हाड़ी थाने चला गया।
बाद में एसपी ने पुलिस उपाधीक्षक संजय गुप्ता को कुन्हाड़ी थाने भेजा और दोनों संवाददाताओं को नयापुरा थाने पर बुलवा लिया। इसी बीच, शहर के तमाम पत्रकार थाने पहुंच गए और चौधरी को मौके पर बुलाने की बात कही तो एसपी ने चौधरी को तलब कर लिया। पत्रकारों के प्रतिनिधिमण्डल से वार्ता के बाद जांच बैठा दी गई। विधायक ओम बिड़ला, भवानीसिंह राजावत, प्रदेश कांगे्रस प्रवक्ता पंकज मेहता, प्रेस क्लब अध्यक्ष धीरज गुप्ता, सचिव हरिमोहन शर्मा, जार के अध्यक्ष नीरज गुप्ता ने घटना की निंदा की।
'संवाददाताओं की ओर से लिखित में शिकायत दी गई है। शिकायत को गंभीरता से लिया गया है और जांच एएसपी को सौंपी गई है। जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसके अनुरूप कार्रवाई होगी।'
-प्रफुल्ल कुमार, पुलिस अधीक्षक [शहर]
इसलिए गए थे पत्रकार
शिकायत की हकीकत जानने के लिए मंगलवार शाम को पत्रिका के दो संवाददाता सकतपुरा में जल संसाधन विभाग कार्यालय के पास पहुंचे। करीब आधे घंटे तक दोनों भीड़ में ही खड़े रहे। संवाददाताओं की मौजूदगी की भनक चौधरी को लगी तो उन्होंने दो कांस्टेबल भेजकर संवाददाताओं को पकड़ कर अपने पास बुलवा लिया।
संवाददाता ने अपना परिचय दिया, लेकिन चौधरी अभद्रता करते हुए बोले, 'तुम पिटाई का स्टिंग ऑपरेशन करने आए हो, मैं तुम्हारा एनकाउन्टर कर दूंगा। इसके बाद उन्होंने दोनों को जिप्सी में बैठा दिया। इस दौरान चौधरी हंगामा करता रहा व जिप्सी में घुस कर एक संवाददाता से मारपीट कर दी।

वन विभाग ने रोकी बंदर-बंदरिया की शादी

वन विभाग ने रोकी बंदर-बंदरिया की शादी



 


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नैनवां/तलवास (बूंदी). तलवास गांव में बुधवार को होने वाली चिंकी बंदरिया और राजू बंदर की प्रस्तावित शादी पर वन विभाग ने रोक लगा दी। आयोजन को रोकने के लिए तलवास गांव में भारी तादाद में पुलिस बल तैनात किया गया है। रोक के बाद से ही तलवास से चिंकी बंदरिया उसके संरक्षक निरंजन निर्मोही और बनेठा गांव में रमेश कुमार राजू बंदर के साथ भूमिगत हो गए।

वन विभाग के निर्णय से नाराज ग्रामीणों ने देरशाम बूंदी आकर कलेक्टर आरती डोगरा से मुलाकात की, लेकिन प्रशासन ने भी वन विभाग के निर्णय को उचित बताते हुए उन्हें वापस लौटा दिया। इस अनोखी शादी को लेकर दोनों गांवों में पूरे दिन उत्साह का माहौल बना रहा। चिंकी के गांव में तो शादी से पहले की सारी रस्में पूरी की गई। ग्रामीणों ने वन विभाग की कार्रवाई पर आक्रोश जताते हुए कहा कि शादी कार्यक्रम की घोषणा कई दिन पहले कर दी थी। ऐन वक्त पर वन विभाग द्वारा रोक लगाना न्यायसंगत नहीं है।

इसलिए नहीं हो सकता विवाह: वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि बंदर शैड्यूल सैकंड पार्ट फर्स्ट के वन्यजीव हैं। उन्हें इस तरह कैद करके नहीं रखा जा सकता। ऐसे आयोजन वन विभाग की नजर में गैरकानूनी है।

वन्यजीवों की शादी न करने के लिए नैनवां एसडीएम के माध्यम से तलवास के आयोजकों को नोटिस दिया गया है। साथ ही वहां पहुंचकर भी समझाइश की गई है। फिलहाल बंदरिया और उसके पालनहार भूमिगत हो गए। कानून तोड़कर यदि शादी की जाती है तो उसी के अनुरूप कार्रवाई होगी। इसमें गिरफ्तारी भी हो सकती है। - राजेंद्र सिंह नाथावत,डीएफओ, वन विभाग, बूंदी

फिर भट्टा पारसौल गांव पहुंचे राहुल

फिर भट्टा पारसौल गांव पहुंचे राहुल


rahul gandhi
लखनऊ। आगामी विधानसभा चुनाव के मद्देनजर उत्तर प्रदेश में राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई है। कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी मंगलवार सुबह करीब पांच बजे भट्टा गांव पहुंचे। यहां उन्होंने घर घर जाकर लोगों से मुलाकात की। इसके बाद राहुल गांधी ग्रामीणों के साथ पैदल ही पारसौल और रूस्तमपुर गांव गए। वहां उन्होंने किसानों के साथ पंचायत की।
किसान महापंचायत से पहले राहुल गांधी का यह दौरा काफी अहम माना जा रहा है। रूस्तमपुर के बाद राहुल गांधी मिर्जापुर, रौसा और भाईपुर गांव गए। वहां भी उन्होंने किसानों के साथ बातचीत की। इस दौरान राहुल गांधी ने उत्तर प्रदेश सरकार पर जमकर निशाना साधा। राहुल गांधी ने कहा कि मायावती सरकार किसानों पर अच्याचार कर रही है।
यूपी कांग्रेस की अध्यक्ष रीता बहुगुणा जोशी ने कहा कि राहुल गांधी ने भट्टा पारसौल का दौरा कर किसानों से किया गया वादा पूरा किया है। राहुल गांधी इससे पहले जब भट्टा पारसौल गांव गए थे तब उन्होंने ग्रामीणों से वादा किया था कि वह उनको अकेला नहीं छोड़ेंगे। गौरतलब है कि जब राहुल गांधी पहली बार भट्टा पारसौल गांव गए थे। उस वक्त राहुल गांधी के साथ कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह भी थे। दोनों गांव में ही धरने पर बैठ गए थे। प्रशासन ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया था और दिल्ली-यूपी बॉर्डर पर छोड़ दिया था।

मनमोहन सिंह ने राहुल गाँधी की महनत पर पानी फेरा

कोंग्रेस के ही नहीं पुरे देश के युवराज युवा शक्ति राहुल गांधी ने एक आंधी चला कर मुर्दा कोंग्रेस में जान फूंकने के लियें जी जान एक कर डाली लेकिन अफ़सोस उनकी ही टीम के मनमोहन सिंह जी ने उन्हें बोल्ड कर दिया और उनकी करी कराइ महनत पर पानी फेरते हुए कोंग्रेस जहां से कड़ी हुई थी वही ला खड़ा किया ...कोंग्रेस का एक बढ़ा तबका ऐसे लोगों को तरजीह देने की खिलाफ रहा है जिनका कोई जनाधार नहीं रहा है जो चुनाव जितने की क्षमता नहीं रखते हैं और बेक डोर एंट्री  से चमचा गिरी के बल पर कुर्सी हथिया लेकते हैं और फिर कालीदास की तरह जिस डाली पर बैठते हैं उसी को काटते रहते हैं ........राहुल गाँधी ने जब कोंरेस की प्रचार कमान संभाली थी जब कोंग्रेज़ जीरो से थोड़ी ऊपर थी लेकिन राहुल गाँधी ने अपने राजनितिक दाव पेंच से देश भर में कोंग्रेस को फिर से मुक़ाबिल ला खड़ा किया और देश का सबसे बधा संगठन बना दिया उत्तर प्रदेश में कोंग्रेज़ को राहुल ने नयी जिंदगी दी ......यहाँ तक के राहुल गांधी ने कोंग्रेस को जिंदा रखने के लियें खुद अपने निजी जज्बातों की कुर्बानी दी और आज भी दे रहे हैं लेकिन उनके घर को घर के चिराग से ही आग लग रही है और इसे कोंग्रेस का कोई भी नेता नहीं समझ पा रहा हैं ..जिस तरह से मछली पानी में रहते हुए कब पानी पी जाती है किसी को पता नहीं चल पाता है इसी तरह से मनमोहन सिंह सहित कई ऐसे लोग कोंग्रेस में हैं जो कब कोंग्रेस को कमज़ोर करने की कोशिश कर बैठते हैं नेताओं और संगठन से जुड़े लोगों को पता भी नहीं चल पाता है ..अगर वक्त रहते राहुल गान्धी और सोनिया गाँधी ने खुद कोंग्रेस के आस्तीन के साँपों को तलाश कर नहीं अलग किया तो कोंग्रेस फिर से जीरो हो जायेगी ..................अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान
8 जिलों को छोड़कर शेष जिलाध्यक्षों की घोषणा


congress
जयपुर। कांग्रेस ने मंगलवार को राजस्थान के 8 जिलों को छोड़कर शेष जिलों में पार्टी के जिलाध्यक्षों की घोषणा कर दी। काफी समय
से यह मामला लटका हुआ था। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की मंजूरी के बाद मंगलवार को जिलाध्यक्षों की घोषणा कर दी गई। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डॉ चन्द्रभान ने जिला अध्यक्षों और 377 ब्लॉक अध्यक्षों की भी घोषणा की गई है। कांग्रेस ने जिलाध्यक्षों की सूची में सभी करीब करीब सभी जातियों को प्रतिनिधित्व दिया गया है। महिलाओं और अल्पसंख्यकों को भी प्रतिनिधित्व दिया गया है।

जिलाध्यक्षों की सूची इस प्रकार है
जिला    नाम
बाड़मेर    फतेह खां
भरतपुर    गिरीश चौधरी
बूंदी    सीएल प्रेमी
चित्तौड़गढ़    शिवदयाल
धौलपुर    महावीर
हनुमानगढ़    सुरेन्द्र दादरी
सीकर    गोविन्द सिंह टोडासरा
अलवर    अशोक दीक्षित
झालावाड़    मददलाल वर्मा
नागौर    मंजू मेघवाल
करौली    अलका मीणा
राजसमंद    देवकीनंदन काका
भीलवाड़ा    अनिल डांगी
श्रीगंगानगर    कुलदीप इंदौरा
जैसलमेर    रेवतराम मेघवाल
प्रतापगढ़    भानू प्रताप सिंह
जयपुर (देहात)    लालचंद कटारिया
जयपुर (शहर)     सलीम कागजी
अजमेर(शहर)    महेन्द्र सिंह रलावत
अजमेर(ग्रामीण)    नाथूराम सिनोदिया
कोटा (ग्रामीण)    रूकमणी मीणा
कोटा(शहर)     गोविंद
उदयपुर (शहर)    नीलीमा सुखाडिया
उदयपुर (ग्रामीण)लाल सिंह झाला
टोंक     रामविलास चौधरी
बारां     निजामुद्दीन
झंझुनू    महेन्द्र झझोडिया
जालौर    नैन सिंह राजपुरोहित
सिरोही     गंगा बेन

बाल ठाकरे सोने का अंडा देने वाली मुर्गी

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वाशिंगटनलश्कर-ए-तैयबा ने शिवसेना प्रमुख बाल ठाकरे की हत्या की साजिश नहीं रची थी। पाकिस्तानी मूल के आतंकी डेविड हेडली ने यह खुलासा किया है। हालांकि उसने कहा कि लश्कर ठाकरे को अमेरिका बुलाना चाहता था ताकि उनकी भड़काऊ टिप्पणियों से आईएसआई को फायदा हो सके। भारत में शिवसेना को एक प्रभावी संगठन करार देते हुए हेडली ने कहा कि ठाकरे की हत्या करना एक बेवकूफी भरा कदम होता और ऐसा करना सोने का अंडा देने वाली मुर्गी को मारने जैसा होता।

दरअसल, लश्कर के अपने साथियों के साथ बातचीत में हेडली ने ठाकरे की हत्या के बारे में यह मजाक किया था। पाकिस्तानी मूल के एक अन्य संदिग्ध आतंकी तहव्वुर हुसैन राणा के खिलाफ सुनवाई के दौरान हेडली से वकील ने पूछा, ‘क्या लोगों की हत्या के बारे में लश्कर के लोग मजाक करते हैं?’ इस सवाल के जवाब में हेडली ने कहा, ‘हां। लश्कर के लोग ऐसा करते हैं। वे लोगों की हत्या करते हैं और इस बारे में मजाक भी करते हैं।’ हेडली से शिवसेना के राजा रेगे के साथ कथित मित्रता के संदर्भ में सवाल-जवाब करते समय ठाकरे की हत्या की साजिश का जिक्र आया था।

बकौल हेडली शिवसेना प्रमुख को अमेरिका बुलाने की साजिश रची गई थी। वकील ने हेडली से पूछा कि क्या यह सोचकर ठाकरे को अमेरिका बुलाने की योजना बनाई थी कि वह कुछ भड़काऊ बयान देंगे आईएसआई को फायदा मिलेगा? हेडली ने कहा- हां। ठाकरे के बयान वाले वीडियो का इस्तेमाल आईएसआई यह कहकर करती कि अमेरिका आतंकियों की मेहमान नवाजी कर रहा है। वकील ने पूछा, ‘जब ठाकरे को यहां लाने की कोशिश की जा रही थी तो क्या तुम लोग उनकी हत्या नहीं करते?’

हेडली ने कहा, ‘नहीं, अगर ऐसा मैं चाहता भी तो इसे अंजाम देना मूर्खतापूर्ण कदम होता। किसी को धन खर्च कर यहां लाया जाए और फिर उसे मार दिया जाए, यह कदम बेवकूफी भरा होता।’ हेडली ने कहा- हमारी योजना ठाकरे को मारने की नहीं थी, बल्कि हम उनके संगठन को नुकसान पहुंचाना चाहते थे

दर्द से तड़पती रही 'गर्भवती', और पैसे मांगते रहे 'बेदर्द' डॉक्टर

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कन्नौज।जिला चिकित्सालय कन्नौज में एक गर्भवती महिला प्रसव पीड़ा से कराह रही थी। उस समय अस्पताल स्टाफ उसकी मदद करने की बजाय पैसों की मांग करने में लगा हुआ था। आखिरकार जब महिला के पति ने पैसे दिए तब जाकर उसका प्रसव कराया गया।

जानकारी के मुताबिक, सुशील कुमार जाटव की पत्नी ममता देवी दो जुलाई की रात्रि संयुक्त जिला चिकित्सालय कन्नौज में प्रसव पीडा होने पर भर्ती के लिए आयी थीं, लेकिन उनकी भर्ती नहीं की गयी और उनसे धन की मांग की गयी थी।

 इस संबंध में प्रदेश सरकार ने संयुक्त जिला चिकित्सालय कन्नौज के नर्सो को प्रसव पीडा से कराहती युवती से पैसा मांगने के आरोप में निलम्बित कर और महिला चिकित्सक को हटा दिया।

आधिकारिक प्रवक्ता ने आज यहां बताया कि नर्स शान्ति देवी, कांती देवी एवं सुश्री समता देवी को प्रसव के लिए आयी श्रीमती ममता से धन की मांग करने और न दिये जाने पर भर्ती करने से इन्कार की शिकायत की जांच में दोषी पाये जाने पर निलम्बित कर दिया।

इसी क्रम में चिकित्सालय में तैनात महिला चिकित्सक डा.इन्दू कटियार को लापरवाही बरतने के आरोप में संयुक्त जिला चिकित्सालय औरैया स्थानान्तरित कर दिया गया है।

लोकपाल पर सरकार देगी लॉलीपॉप 

 
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नई दिल्ली सर्वदलीय बैठक में केंद्र सरकार विपक्ष और अपने ही घटक दलों के निशाने पर भले ही रही, किंतु वह जो चाहती थी सबकुछ उसी तर्ज पर होने की खुशी सत्ता पक्ष में है। केंद्र सरकार ने सर्वदलीय बैठक के एक दिन बाद ही अपने तेवर से साफ भी कर दिया कि सभी दलों की ओर से अन्ना और उनकी टीम के जनलोकपाल विधेयक को खारिज किए जाने के बाद अब वह जनलोकपाल विधेयक को बहुत तरजीह नहीं देगी। सरकार अब अपने लोकपाल विधेयक के प्रारुप में सर्वदलीय बैठक के इनपुट को भी शामिल करते हुए संशोधित विधेयक तैयार करेगी।

केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल ने बताया कि सर्वदलीय बैठक में मिले सुझावों को डीओपीटी के पास भेजा जा रहा है। सरकार वादे के मुताबिक इस विधेयक को संसद के मानसून सत्र में पेश करेगी। हालांकि सरकार ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि विधेयक को मानसून सत्र में पेश करने का वादा था, लेकिन पारित कराने के लिए समयसीमा निर्धारित नहीं की गई थी। सर्वदलीय बैठक के नतीजों एवं उसके बाद सरकार की रणनीति का खुलासा करने के लिए केंद्रीय गृहमंत्री पी. चिदंबरम, दूरसंचार मंत्री कपिल सिब्बल और संसदीय कार्य मंत्री पीके बंसल ने सोमवार को पत्रकारों से चर्चा की। चिदंबरम ने कहा कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह द्वारा बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में संसदीय प्रक्रिया के महत्व पर जोर दिया गया।

सरकार की तरफ से कहा गया कि अगर अन्ना के जनलोकपाल विधेयक ड्राफ्ट पर अमल किया गया तो संविधान बदलना पड़ेगा। चिदंबरम ने कहा कि यह फिर से संविधान लिखने का समय नहीं है।

विरोधी दलों का भी बचाव: चिदंबरम ने कहा, ‘कई पार्टियों ने संसद में विधेयक पेश होने तक अपना रुख सुरक्षित रखा है, जो वैध और मान्य है।’ सिब्बल ने कहा, ‘हो सकता है कि प्रावधानों पर राय बनाने के लिए भाजपा को और समय की जरूरत हो।’ दो पार्टियों ने यह सुझाव दिया कि विधेयक को संसद के शीतकालीन सत्र में पारित किया जा सकता है।

बदल सकता है पार्टियों का रुख : प्रधानमंत्री को लोकपाल के दायरे में शामिल करने के कुछ पार्टियों के रुख पर मंत्रियों ने कहा कि यह प्रारंभिक विचार हैं। जब हम आगे बढ़ेंगे तो सभी पक्ष विवादित मुद्दों पर सर्वसम्मत हो जाएंगे।’ द्रमुक के रुख पर चिदंबरम ने कहा कि विभिन्न पार्टियों की अपनी अलग राय हो सकती है।

अनशन पर गोलमाल जवाब : अन्ना हजारे के 16 अगस्त से प्रस्तावित अनशन पर उठे सवालों का मंत्रियों ने सीधा जवाब नहीं दिया। चिदंबरम ने कहा कि हम यह मानकर नहीं चल सकते कि 16 अगस्त से अनशन होगा ही।


सिब्बल के मुताबिक, सर्वदलीय बैठक में कई राजनीतिक दलों के नेताओं ने सिविल सोसायटी की परिभाषा पर हैरानी जताई। सरकार की ओर से सफाई पेश करते हुए सिब्बल ने कहा कि सरकार ने कभी भी सिविल सोसायटी शब्द का प्रयोग नहीं किया था। बल्कि जिनसे बात हुई वे अन्ना हजारे के प्रतिनिधि थे। चिदंबरम ने कहा कि तबकी परिस्थिति ऐसी थी। माना गया कि अन्ना हजारे की टीम को साथ लेने से कानून का मसौदा बेहतर बनाया जा सकता है।

04 July 2011

तलाश सुकून की ......

सुकून 
ढूंढते फिरते हैं 
हम बहारों में ..
नज़रों में ..
इसकी तलाश में 
जा पहुंचते हैं 
चाँद और तारों में 
मगर यह 
इन चीजों में 
कहीं नहीं मिलेगा 
अगर मिलेगा सुकून तुम्हे 
तो तलाशो इसे 
गीता के श्लोकों और कुरान के तीस पारों में .....
अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

महिलाकर्मी बच्चा गोद लेगी तो 180 दिन का अवकाश

महिलाकर्मी बच्चा गोद लेगी तो 180 दिन का अवकाश


state news

जयपुर। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सरकारी महिला कर्मचारी के एक वर्ष से कम उम्र का बच्चा गोद लेने पर 180 दिन का मातृत्व अवकाश प्रदान करने की घोषणा की है। उन्होंने इस आशय के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।
अब तक ऎसा प्रावधान नहीं था। वित्त विभाग की ओर से भेजे गए प्रस्ताव पर मुख्यमंत्री ने गम्भीरतापूर्वक विचार कर यह माना कि एक वर्ष से कम उम्र के बच्चे का पालन-पोषण करने में महिला को उसी तरह की देखभाल करनी होती है जैसे बच्चे को जन्म देने वाली मां करती है।

सीने से चिपकाकर लगा ली आग

सीने से चिपकाकर लगा ली आग


jaipur news

जयपुर। राजधानी के रेलवे स्टेशन के समीप स्थित बड़ोदिया बस्ती में सोमवार रात एक महिला ने अपने एक बेटे व बेटी के साथ केरोसीन छिड़ककर आग लगा ली। जिससे तीनों की मौत हो गई। सदर थाना क्षेत्र में हुए इस सनसनीखेज घटनाक्रम में आत्महत्या के कारणों का खुलासा नहीं हो पाया है। पुलिस ने तीनों के शव को एसएमएस अस्पताल के मुर्दाघर में रखवाया है, जहां मंगलवार को उनका पोस्टमार्टम किया जाएगा।
पुलिस और प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार हरिचरण गुर्जर हवा सड़क स्थित मोबाइल कंपनी में काम करता है और पंचायती धर्मशाला के पास स्थित बड़ोदिया बस्ती में प्लॉट नंबर-94 में पत्नी शीला, बेटे युवराज और बेटी अभिलाष्ाा के साथ रहता था। बताया जाता है कि शाम करीब साढ़े सात बजे मकान से धुआं उठता देख पड़ोसियों ने पुलिस को सूचना दी।
 इसके बाद पुलिस व पड़ोसी हरिचरण के मकान में घुसे। कमरे का दरवाजा तोड़कर अंदर देखा तो शीला, युवराज और अभिलाष्ाा के जले हुए शव फर्श पर पड़े थे। पुलिस ने तीनों शव को कब्जे में लेकर उन्हें एसएमएस अस्पताल पहुंचाया। इधर जानकारी मिलने पर हरिचरण समेत परिवार के अन्य लोग मौके पर पहुंचे।
मरने के बाद भी चिपका रहा
पुलिस और प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि जब वे दरवाजा तोड़कर अंदर घुसे तो युवराज का शरीर अपने मां के शरीर से चिपका हुआ था। संभवत: आग लगने के बाद शरीर जलने से वह घबराकर अपनी मां के सीने से चिपट गया था। जिसके चलते मौत के बाद भी वह अपनी मां से चिपका रहा।
पहले बना लिया था मन : बताया जाता है कि युवराज कॉलोनी में एक शिक्षक के यहां ट्यूशन पढ़ने जाता था। शाम करीब पांच बजे दूध लेकर घर लौटी शीला ने बेटी अभिलाष्ाा को भेजकर युवराज को ट्यूशन से जल्दी बुला लिया था। माना जा रहा है कि शीला ने बच्चों के साथ खुद को आग लगाने का मन बना लिया था।
भतीजा व भाई रहते थे साथ : पुलिस ने बताया कि बांदीकुई के पास स्थित विजयपुरा गांव के रहने वाले हरिचरण के मां-बाप गांव में रहते थे। हरिचरण के यहां पत्नी व बच्चों के अलावा उसका एक भतीजा विक्रम और शीला का भाई भी रहते हैं। घटना के वक्त ये दोनों भी बाहर थे।
परिवार में तीसरा हादसा : पड़ोसियों ने बताया कि करीब बीस साल पहले हरिचरण के बड़े भाई शिवचरण की पत्नी ने भी आत्महत्या की थी। इसके बाद शिवचरण की दूसरी पत्नी की भी मौत किसी जहरीले जानवर के काटने से हुई बताई जाती है

चूहे कुतर रहे 'प्रिंसिपल' की देह

चूहे कुतर रहे 'प्रिंसिपल' की देह


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जयपुर। जीवन के करीब 54 साल चिकित्सकीय सेवा में गुजारने वाले सवाई मानसिंह मेडिकल कॉलेज के पूर्व प्राचार्य डॉ. रामेश्वर शर्मा ने करीब साढ़े चार साल पहले देहदान कर मिसाल कायम की थी लेकिन उनका यह जज्बा उनके ही कॉलेज के कर्ता-धर्ताओं की लापरवाही की भेंट चढ़ गया। बी.सी रॉय अवार्ड से सम्मानित शर्मा की देह एसएमएस मेडिकल कॉलेज में चूहे कुतर रहे हैं।
 4 जनवरी 2007 को डॉ. शर्मा की मृत्यु हुई थी। अंतिम इच्छा के मुताबिक उनकी देह एसएमएस मेडिकल कॉलेज को दान कर दी गई लेकिन तब से आज तक यह देह यहां के शवगृह में बिना देखरेख ऎसे ही पड़ी है। एनाटोमी के विभागाध्यक्ष भी इससे अनजान हैं कि साढ़े चार साल से स्ट्रेचर पर पड़ी यह देह आखिर है किसकी? उनके हिसाब से डॉ.शर्मा की देह महात्मा गांधी मेडिकल कॉलेज भेज दी गई थी।
उधर, विभाग की एक अन्य प्रोफेसर डॉ. संगीता चौहान के अनुसार देह शर्मा की है, जिसे सरफेस मार्किग के हिसाब से सूखने के लिए रखा गया है।
क्या है सरफेस मार्किग? : एनाटोमी विभाग के प्रो. डॉ. धीरज बताते हैं कि सरफेस मार्किग के लिए मृत्यु के बाद देह सुखाई जाती है। इसका ममीफिकेशन होता है जिससे शरीर के आंतरिक भाग का सरफेस से पता लगाया जा सकता है। देह सूखने के बाद उसे केमिकली पेंट कर दिया जाता है ताकि खराब ना हो। आम तौर पर सूखे मौसम में देह को सूखने में दो से तीन महीने लगते हैं।
सिर्फ 25 बॉडी : एसएमएस कॉलेज प्रशासन अक्सर शोध व अध्ययन के लिए देह की कमी का रोना रोता है, लेकिन इस मामले में लापरवाही से सवाल उठता है कि जब प्रिंसिपल की देह का यह हाल है तो अन्य लोग कैसे आगे आएंगे? अभी कॉलेज में 25 देह हैं और इस साल तो मात्र दो देह आई हैं। अंदाजा लगा सकते हैं कि देह का कितना टोटा है। शिक्षकों के हिसाब से सालाना करीब 20 देह की जरूरत होती है। अघिक मृत देह आने पर अन्य कॉलेजों में भिजवाई जाती है।
मुझे अभी ज्वॉइन किए दो साल ही हुए हैं। जहां तक मुझे पता है डॉ. शर्मा की बॉडी महात्मा गांधी मेडिकल कॉलेज भेज दी गई थी।
डॉ. जी. सी. अग्रवाल, विभागाध्यक्ष एनाटॉमी , एसएमएस मेडिकल कॉलेज
किस काम आएगी!
सर्दी का मौसम होने के कारण परिजनों ने डॉ. शर्मा की देह को जिस कम्बल में सहेजकर दिया था, वह आज भी उसी में लिपटी हुई है। देह को बचाने के नाम पर उस पर सिर्फ रसायन का लेप किया हुआ है। इतने सालों में चूहों ने देह को इस तरह कुतर दिया कि उसकी तरफ देख पाना भी मुश्किल लगता है। ऎसे में सवाल उठता है कि यह छात्रों के पढ़ाई के क्या काम आएगी? 
पापा की थी इच्छा
पापा जब प्रिंसिपल थे, तब स्टूडेंट्स यह समस्या लेकर आते थे कि एनाटोमी विभाग में बॉडीज की कमी रहती है। यही वजह है कि उन्होंने अपनी बॉडी कॉलेज को डोनेट करने की इच्छा जताई। वे कहते थे कि मैं जो कुछ हूं, इसी कॉलेज की वजह से हूं इसलिए कॉलेज के लिए कुछ करके जाना मेरा सौभाग्य होगा।
डॉ. प्रदीप शर्मा, पुत्र स्व. डॉ. रामेश्वर शर्मा

शिक्षा जगत शर्मसार: स्कूल में शिक्षिका की घिनौनी हरकत


शिक्षा जगत शर्मसार: स्कूल में शिक्षिका की घिनौनी हरकत

 

 
 
 
 
मजहर पठान, अहमदाबाद। अहमदाबाद के शाहपुर में स्थित एक स्कूल में एक शिक्षिका द्वारा दूसरी कक्षा की छात्राओं को क्लास में नग्र करने की घटना सामने आई है। यह बात जब छात्राओं के परिजनों को हुई तो उन्होंने स्कूल में तोडफ़ोड़ मचा दी और पूरे इलाके में घंटों तक हंगामा मचा रहा। पुलिस के हस्तक्षेप के बाद ही मामला शांत हो पाया।

शिक्षा जगत को शर्मसार कर देने वाली यह घटना बीते शुक्रवार की है, जब शाहपुर मिल कंपाउंड में स्थित 'द इस्लामिक स्कूलÓ में दूसरी कक्षा की कुछ छात्राओं को स्कूल की एक शिक्षिका ने नग्र कर क्लास में घुमाया और इसके बाद छात्राओं से स्कूल का टॉयलेट भी साफ कराया। इतना ही नहीं कुछ छात्राओं को तो टॉयलेट में कुछ देर के लिए बंद भी कर दिया था। छात्राओं के अनुसार शिक्षिका ने उन्हें यह सजा होमवर्क न करने पर दी थी।

जब बच्चे घर पहुंचे तो उन्होंने डर के मारे यह बात घर पर नहीं बताई, लेकिन जब दूसरे दिन एक छात्रा ने स्कूल न जाने की जिद की तो उसके पिता ने इसका कारण पूछा तब एक बच्ची ने यह घटना उन्हें बता दी। इसके बाद ही यह बात अन्य छात्राओं के परिजनों तक पहुंची तो सब स्कूल जा पहुंचे और स्कूल में तोडफ़ोड़ मचा दी। स्कूल के ट्रस्टी इकबाल पटेल से भी कुछ व्यक्तियों की झड़प हो गई। घटना की जानकारी मिलते ही मौके पर पहुंची पुलिस ने स्थिति को संभाला और स्कूल प्रबंधन के खिलाफ शिकायत दर्ज की।
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