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29 अप्रैल 2012

जानिए, हिन्दू धर्म की वे 6 आसान परंपराएं, जिनमें हैं जीवन से जुड़े सारे फायदे..




ईश्वर और धर्म में गहरा विश्वास रखने वाला हर इंसान पाप-पुण्य पर विचार कर उसके मुताबिक अच्छे कर्मों को करने और बुरे कर्म से बचने की कोशिश करता है। जिसके लिए वह धार्मिक कर्म, धर्म ज्ञान, अध्ययन, सत्संग आदि में रुचि रखता है। शास्त्रों में ऐसे ही लोगों की पुण्य और मोक्ष पाने की भावना को सफल बनाकर पापमुक्त जीवन के लिए ही धर्म से जुड़ी 6 विशेष परंपराएं बहुत ही प्रसिद्ध हैं। जिनसे आस्था से जुडऩा न केवल मानसिक, शारीरिक, व्यावहारिक व आध्यात्मिक शांति देने वाली है बल्कि धर्म दृष्टि से मुक्तिदायक है।

जानते हैं पुराणों में बताई ये पुण्यदायी 6 बातें। लिखा है -

विष्णुरेकादशी गीता तुलसी विप्रधेनव:।

असारे दुर्गसंसारे षट्पदी मुक्तिदायिनी।।

जिसका सरल शब्दों में अर्थ है कि भगवान विष्णु, एकादशी व्रत, गीता, तुलसी, ब्राह्मण और गौ ये 6 इस नाशवान संसार में लोगों के लिए मुक्तिदायी है। जानते हैं धर्म व व्यावहारिक नजरिए से इनका महत्व -

विष्णु - भगवान विष्णु परब्रह्म के तीन स्वरुपों में एक व जगतपालक माने गए हैं। वह सत्व गुणों, ऐश्वर्य, सुख, शांति के स्वामी भी हैं। उनकी व विष्णु अवतारों की भक्ति व पूजा धर्म, अर्थ, काम व मोक्ष देने वाली मानी गई है।

एकादशी व्रत- भगवान विष्णु की भक्ति को ही समर्पित एकादशी व्रत संयम, नियम, व्रत-उपवास के द्वारा धर्म और अनुशासन से जोड़कर पुण्य तो देता ही है। साथ ही वैज्ञानिक दृष्टि से भी इस तिथि पर व्रत प्राकृतिक तत्वों के साथ शरीर का तालमेल बैठाकर स्वस्थ्य व दीर्घ जीवन देने वाला होता है।

तुलसी - तुलसी पौराणिक चरित्र है, जिसका पवित्रता के फलस्वरूप ही भगवान विष्णु से संबंध जुड़ा, जो तुलसी-शालिग्राम विवाह के रूप में प्रसिद्ध है। इसलिए तुलसी पूजा सुख-ऐश्वर्यदायी भी मानी गई है। यह वैज्ञानिक दृष्टि से औषधीय पौधा भी है।

ब्राह्मण - ब्राह्मण को ब्रह्म या ईश्वर का ही अंश माना गया है। धार्मिक दृष्टि से ब्राह्मण ब्रह्म से जुडऩे की अहम कड़ी है। इसलिए ईश्वर का ही साक्षात् स्वरूप मानकर ब्रह्मपूजा, दान और सेवा सभी कलह और संताप का अंत करने वाली मानी गई है।

गीता - धार्मिक दृष्टि से गीता ईश्वर का ज्ञानस्वरूप है। इसलिए इसका किसी भी रूप में पाठ, स्मरण या व्यवहार में अपनाना शरीर और आत्मा के लिए सुख और मोक्षदायी ही है।

गौ - धर्म क्षेत्र में गौ यानी गाय को देव स्वरूप माना गया है। अनेक देवी-देवताओं का वास गौ में माना गया है। यही कारण है कि गौ का हर अंश दूध, दही, घी यहां तक कि मूत्र, गोमय भी देव कर्मों के लिए पवित्र और मंगलकारी माने गए हैं। वैज्ञानिक दृष्टि से भी यह शरीर के लिए भी रोगनाशक है।

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