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04 दिसंबर 2016

दोस्तों एक काल्पनिक नाम ,

दोस्तों एक काल्पनिक नाम ,,से जुडी महिला और उसके समाज को उजागर करने वाला गोत्र जोड़कर ,,एक महिला को बेवफा बताकर ,,बदनाम करने की साज़िश रची जा रही है ,,ज़रा सोचो ,,इस नाम से मिलती जुलती महिलाओ का ,,बेवफाई के इस जुमले के प्रचार होने से ,,उनके दिल पर क्या गुज़र रही होगी ,,तो जनाब मेरी गुज़ारिश है ,,ऐसे किसी भी महिला का नाम ,,चाहे काल्पनिक हो ,,वोह बन्द कर दे ,,बेवफा जिसका नाम प्रचारित है ,,,उसके बारे में अगर बढे नेता के पुराने नज़दीकी लोगो के कार्यालय देखरेख वालो की कहानी समझेंगे तो समझ में आ जाएगा ,,लेकिन सही तो यह है ,,औरत कभी बेवफा नहीं होती ,,उसके साथ धोखा होता है ,,सिर्फ धोखा ,,वोह तो ऐसे में सिर्फ दया की पात्र बन जाती है और किसी शरारती तत्व ने इस काल्पनिक नाम को उछालकर ,,ऐसे नाम से जुडी माँ ,,बहनो के लिए मुसीबते खडी कर दी है ,,इसलिए प्लीज़ अब बस करो ,,किसी का नाम लेकर यूँ उसे बदनाम न करो ,,,अख्तर

चोर बहुत होशियार होते हैं

चोर बहुत होशियार होते हैं , जब भैंस चुराते हैं तो सबसे पहले भैंस का घंटा खोलते हैं , एक चोर घंटा बजाते हुए पश्चिम की ओर जाता है बाकी भैंस को पूरब की ओर ले जाते हैं
गाॅव के लोग घंटा की आवाज सुनकर पश्चिम की ओर भागते हैं आगे जाकर चोर घंटा फेंक कर भाग जाता है
इस प्रकार गाँव वालों के हाथ लगता है घंटा !
चोर माल पार कर देते हैं , यही हो रहा है , माल पार हो रहा है , जनता घंटा के पीछे भाग रही है
नोट- चोर , माल , घंटा का किसी से संबंध नहीं है खासकर नोटबंदी , मोदी या किसी से नहीं

क़ुरआन का सन्देश

  

03 दिसंबर 2016

में तो मुर्दा ,

में तो मुर्दा ,
में तो ज़िंदा लाश हूँ ,,
तुम ज़िन्दगी हो ,,
चाहो तो
जाना फूंक दो
चाहो तो ,,
हमेशा के लिए
सुपुर्द ऐ खाक कर दो ,,अख्तर

क़ुरआन का सन्देश

   
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