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23 जून 2019

भाई हम जुम्मन मियां ,और हमारा समाज भी अजीब है

भाई हम जुम्मन मियां ,और हमारा समाज भी अजीब है ,,मेहनत करते है ,नारे लगाते है ,,जीत के लिए ज़िंदगी रिश्तों को दांव पर लगाते है ,,जश्न मनाते है ,पागलों से भी ज़्यादा वफादारी निभाते है ,फिर जब हुकूमत में हमारे अपने मौजूद होते है ,तो हुकूमत में शामिल लोगों के आगे,, हाथ पर हाथ , बाँध कर खड़े हो जाते है ,कभी उनकी एक नज़र भर देख लेने को भी तरसते है ,कभी उनकी नज़र के साथ ,मुस्कुराहट को तरसते है ,अगर ऐसा हो जाए,, तो खुद को सबसे ज़्यादा क़िस्मत वाला समझकर, इतराने ,, लगते ,है अजीब हैं ना,,, सभी जुम्मन मिया ,,हम अपना ज़मीर गिरवी रख देते है ,रोज़ ज़मीर को मरता हुआ देखते है ,,लेकिन उफ्फ नहीं करते ,अपने खुद के काम ,अपने परिवार और समाज के काम बताने की हिम्मत तो हम में ,,है ही नहीं ,मस्जिद बनते हुए रुक गयी ,हमारी हिम्मत नहीं, के मस्जिद मरम्मत की क़ानूनी सभी फोर्मलिटी होने के बाद भी,, हमारी हिम्मत नहीं के अपने बंधे हुए हाथ ,गुलामी की मुद्रा ,क्या हुक्म है मेरे आक़ा से हटाकर,, ज़रा मस्जिद की मरम्मत काम शुरू करवाने के लिए, सिफारिश करवा दे ,,खेर कोई बात नहीं ,में एक किताब आयना लिख रहा हूँ ,उसमे तो किरदार होंगे ,नाम होंगे ,खुलासा होगा ,लेकिन अभी सिर्फ,, वक्रोक्ति में जुम्मन मिया और हमारे जुम्मन समाज के कुछ अनुभव,, ताज़ा अनुभव आप तक पहुंचा रहा ,हूँ हो सकता है ,,आपके हौसले बढे ,हो सकता है ,ज़मीर जाग जाए ,हो सकता है ,क्या हुक्म है मेरे आक़ा की जगह ,ज़िद से हक़ से हम अपने काम बताने लग जाए ,,हो सकता है ,हम हमारे अपने नेतृत्व से आँखों में आँखे डालकर ,हाथ पकड़ कर अपना ,अपने भाई ,का अपने दोस्त ,कार्यकर्ता ,,समाज के किसी ,,साथी का काम करवाने की हिम्मत जुटा ले ,हो सकता है इस वक्रोक्ति को लिखने वाले की अंगुलियां काटने का कुछ लोग फरमान जारी करवा दे ,लेकिन कट जाने दो उँगलियाँ ,कहलाने दो बगावत ,,सच बोलना अगर बगावत है,, तो बगावत ही सही ,भाई एक जुम्मन मिया की सुनिए ,,बारां के विधायक ,,बारां के मंत्री के नज़दीक है ,बहुत नज़दीक है ,उनके लिये जान छिड़कते है ,बस एक पत्र लिखवाना था ,बढे जोश से दो जुम्मन मिया ने ज़िम्मेदारी ली, एक से एक जुम्मन मियां हाथ पकड़ कर लिखवाएंगे ,दूसरे मंत्री सहित,, दो से दूसरे जुम्मन मिया लिखवाएंगे ,कहा गया और प्रचार भी यही है ,,हमारा कहा नहीं टलता ,,हमने उनके लिए ज़मीन आसमान एक किया ,है ,खेर एक बार पत्र की ड्राफ्टिंग गुमा दी ,फिर दूसरी बार ,तीसरी बार ,,चौथी बार ,पांचवीं ,,छटी बार ड्राफ्टिंग गायब,, एक महीना ,दो महीना तीन महीना ,बात पांच महीने तक आ पहुंची ,लेकिन इन जनाब जुम्मन भाईजानों की हिम्मत ही नहीं हुई के टेस्ट करते ,,,के जिनके लिए इन लोगों ने दिन रात पसीना बहाया है ,जिनके आगे यह हाथ बांधे खड़े रहते है ,इनका अपना किरदार है ,समाज में प्रभाव है ,इनके अपने समाज के यह प्रमुख पंच है ,फिर समाज के वोट ,,इनके कहने से मिलते है ,फिर भी इन जुम्मन भाईजानों की पत्र लिखने की,, कहने की हिम्मत अभी तक नहीं हो ,पायी ,खेर एक जुम्मन भाई का ज़मीर जागा है ,ईद पर मिठास की जगह,,धोखा मिला फोन करना ,मिलना तो दूर ,फोन तक नहीं उठाये गए दूसरी तरफ,, इन जुम्मन भाइजान को हर साल की तरह,, मुखालिफ भाईजान ने याद दिलाया ,,हम ही आते है ,,आपके पास ईद मिलने आपके अपने ,,जिनके लिए पसीना बहाते हो ,देखो वोह तो आप से अलग थलग गायब है,, आपकी खुशियों से दूर है ,,,, बात यही नहीं ,रुकी जुम्मन मिया से मुखालिफ पार्टी के नेता ने,,, ईद मिलकर ज़बरदस्ती सिवय्यां खायीं और सामने ही,, उनके फोन से जिनके लिए जुम्मन भाईजान ने कई झगड़े मोल लिए ,कई कामकाज छोड़कर अपना पसीना बहाया ,उन दोनों भाईजानों ने ,,बार बार फोन करने पर इनका फोन तक नहीं उठाया ,,बेचारे जुम्मन मियाँ ने इज़्ज़त बचाई ,अभी व्यस्त होंगे ,दुबारा फोन कर लेंगे ,लेकिन जब रात गुज़रने पर भी फोन पलट कर ईद की मिठास की मुबारकबाद का भी नहीं आया,,तो जुम्मन मिया सच में उदास हो गए ,ऐसे में अब वोह ,जो पत्र लिखवाकर देने वाले थे ,,वोह तो गया पानी में ,,,एक जुम्मन मिया उठते ही दस बजे है ,अब उनसे भी चार माह गुज़रने के बाद कोई उम्मीद हो ही नहीं सकती ,,,,खेर अपने शहर की बात करूँ ,यहाँ के जुम्मन मिया अजीब है ,काम बताओ आप जाओ ,आप बात करो ,,खुद की हिम्मत नहीं ,,फिर कैसे जुम्मन मियाँ है ,,भाई आप ,,,,,,,वफादारी ,गुलामी में हमे फ़र्क़ तो समझना ही होगा ,हम जैसे पागल जुम्मन मिया वफादारी में नंबर वन है ,बस वैसे जुम्मन मिया नहीं हाथ बंधते नहीं अदब से अभिवादन के जुड़ते है ,,इसलिए खटकते है ,,एक जुम्मन मिया ,,उनके साथ घूम फिरे रहे एक कार्यकर्ता से पत्र लिखवाने की ज़िम्मेदारी ले चुके थे ,ओहदेदार है ,,वोह सामान्य कार्यकर्ता अब असामान्य होकर विधायक जी बन गए ,लेकिन शायद हिम्म्मत नहीं हुई ,इसलिए उन तक पत्र का मसवदा ही नहीं पहुंचा तो लिखा कैसे जाता ,,,,एक जुम्मन मिया जो राजस्थान घूम घूम कर वफादारी से जुम्मन मियाओं की पार्टी की जीत के लिए सिरमौर बनकर वफ़ादारी से पसीना बहाते रहे ,उन्होंने पहले तो कहा पत्र लिखवा लिया गया ,है फिर कहा साथ चलना होगा ,,पांच माह गुज़र गए ,हम वही जुम्मन मियां के जुम्मन मिया रहे ,,कुछ नहीं हुआ ,,एक जुम्मन मिया ,फिर दूसरे जुम्मन मियां जो ,,इनके अपने हाल ही में सिरमौर बने भाईसाहबों से नज़रें मिलाकर कोई काम नहीं करवा सकते,, तो फिर जुम्मन मिया बताइये ,,हमारे जुम्मन मिया रहने से फायदा किया ,,कुछ जुम्मन मिया जयपुर ,वगेरा के है जो अपनी कोशिशों जुटे है ,लेकिन क़सम से इन जुम्मन भाइयों की सोच हमारे अपने इदारों के बाहर नहीं निकली है ,बस क़ब्रिस्तान की हिफाज़त मांग रहे है ,कुछ हमारे अपने इदारों तक ही सीमित है ,,खेर जुम्मन मिया का अपना समाज ,है कोई बागी जुम्मन मिया है ,कोई क्या हुक्म है मेरे आक़ा की बंदिशों में बंधा जुम्मन मिया है कोई वफादार जुम्मन मिया तो है ,लेकिन अपने समाज की उन्हें फ़िक्र है इसलिए वोह लिखते रहते है ,बोलते रहते है ,हाथ नमस्ते के लिए बांधते है ,गुलामी के लिए नहीं,,, यह अपनी हिस्सेदारी चाहते है ,भीख नहीं,,,, ऐसे लोग ,ऐसे जुम्मन मिया तो गेट आऊट होना ही चाहिए ,एक जुम्मन मिया तो अपनी मादरी ज़ुबान के फरोग के नाम पर ,,,बहादुरी दिखाते हुए,, छह महीने पहले लिखा ज्ञापन ही बिना सोचे समझे दे आये ,,तहरीर ,तारीख तक नहीं बदली ,,,जयपुर के कुछ जुम्मन मिया का तो क्या कहना ,,हदें ही पार कर दीं ,बस घूमते है ,देखते है ,नेता की झलक पाकर खुश होकर घर आ जाते है ,कोई पत्र नहीं ,कोई काम नहीं बस यूँ ही ,ऐसे ही एक जुम्मन भाईजान ओर है ,दिल्ली वाले जुम्मन मियाओं की दास्तान तो आप लोगों से छुपी नहीं है ,क्या कुछ चल रहा है ,जुम्मन मिया के समाज की खैरख्वाही के लिए कभी कोई आवाज़ उठाई हो ,ज़िम्मेदारी दिखाई हो ,अगर आपको याद हो तो बताइये ज़रुर ,,हाल ही में रमज़ान के महीने में पुलिस की पिटाई से एक जुम्मन मिया रमज़ान की गर्दन की हड्डी टूटने चोटें आने से अस्पताल में ज़ेर ऐ इलाज कस्टोडियल डेथ हो गयी ,हमारी राजस्थान की सबसे बढ़ी पंचायत में हमारे अपने सात प्लस एक कुल आठ जुम्मन मिया है ,,दो हमारे अपने जुम्मन मियाओं से मेने और मुझ जैसे कुछ जुम्मन मियाओं ने इल्तिजा की ,,एक जो अलग दूसरे सीगे से इत्तेफ़ाक़ से जीत कर आये है उन जुम्मन मिया ने पहले तो खुद फोन करके पहल की जानकारी चाही ,,मृतक रमज़ान के परिजनों को इन्साफ दिलाने का वायदा किया ,लेकिन यह जुम्मन मिया राजस्थान की पंचायत शुरू होने में तीन दिन बाक़ी है और गायब है ,,आधा अधूरा ,क़ब्रिस्तानों के रख रखाव का प्रबंधन वहां अल्पमत के जुम्मन मिया जो खेल खेल रहे है ,ऑडियो , वीडियो में उनकी वाह वाही के बाद भी वोह सभी जुम्मन मियाओं को लाइन लगाकर ज़ोर करा रहे है जुम्मन भाइयों की पढ़ाई लिखाई के इदारे के सख्त क़ानून बन रहे है ,उसमे अनावश्यक इंटरफियर दूसरे लोगों का रखा जाएगा ,,जुम्मन मिया की मादरी जुबांन का अपना विभाग अपना निदेशालय के बारे में किसी जुम्मन मियां ने याद तो दिलाया ही नहीं ,आँखों में आँखे डाल ,कर इस हक़ की लड़ाई को आगे भी नहीं बढ़ाया ,,,,खेर ,,,पता नहीं इस लेख को लिखने वाले की उँगलियाँ काटीं जाएंगी ,या फिर इस लिखने वाले जुम्मन मिया के सभी जुम्मन भाई दुश्मन हो जाएंगे ,या फिर जुम्मन भाई गले लग कर अपने मजबूरी बताएँगे ,या फिर एक होकर ,वफादारी के सुबूत के साथ ,,अपने ,अपने भाइयों ,जुम्मन समाज के लिए ,उनके विकास के लिए,, उनके भाइयों के लिए हाथ पकड कर काम करवाने की हिम्मत लाएंगे ,,वफादारी हमारे खून में है , सब्र हमे सिखाया है ,लेकिन इतना भी नहीं,,, के दो दशक की वफ़ादारी रोने लगे ,,इतना भी नहीं,, के बंधे हुए हाथ खुले ही नहीं ,इतना भी नहीं,, के वफादारी ,वफादारी से बढ़कर जी हुज़ूरी कही जाने लगे ,इसलिए प्लीज़ अन्यथा न लें,, सभी जुम्मन भाई एक बार अपने दिल पर हाथ रख कर ज़रूर सॉचें ,वफादारी हमारे खून में ,है ,हम जुम्मन मिया जान की बाज़ी लगाकर वफादारी निभाते है ,लेकिन आखिर कब तक ,किन क़ुर्बानियों के साथ ,क्या हमे अपने रुके हुए काम नहीं करवाना ,क्या हमे हमारे मज़हबी स्थलों के रुके हुए मरम्मत काम नहीं करवाना ,अपने वफादार साथियों को एडजस्ट नहीं करवाना ,, क्या हमे हमारी मादरी जुबांन के फरोग के लिए हक़ संघर्ष नहीं करना ,,,एक बार बस एक बार अपने धड़कते दिल से पूंछना ज़रूर और प्लीज़ बताना ज़रूर ,,,,हम कोन से किस केटेगरी के जुम्मन मिया है ,,तोड़ दो रस्सियां गुलामी की ,वफादारी की सीढ़ी पर खड़े तो रहो ,लेकिन अपने हक़ ,,अपने हुक़ूक़ अपने स्वाभिमान के साथ ,,अपने भाइयों के इन्साफ के संघर्ष के साथ ,,, अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

और ख़ुदा ही की इबादत करो और किसी को उसका शरीक न बनाओ

जिन कामों की तुम्हें मनाही की जाती है अगर उनमें से तुम गुनाहे कबीरा से बचते रहे तो हम तुम्हारे (सग़ीरा) गुनाहों से भी दरगुज़र करेगें और तुमको बहुत अच्छी इज़्ज़त की जगह पहुँचा देंगे (31)
और ख़ुदा ने जो तुममें से एक दूसरे पर तरजीह दी है उसकी हवस न करो (क्योंकि फ़ज़ीलत तो आमाल से है) मर्दो को अपने किए का हिस्सा है और औरतों को अपने किए का हिस्सा और ये और बात है कि तुम ख़ुदा से उसके फज़ल व करम की ख़्वाहिश करो ख़ुदा तो हर चीज़े से वाकि़फ़ है (32)
और माँ बाप (या) और क़राबतदार (ग़रज़) तो शख़्स जो तरका छोड़ जाए हमने हर एक का (वाली) वारिस मुक़र्रर कर दिया है और जिन लोगों से तुमने मुस्तहकम {पक्का} एहद किया है उनका मुक़र्रर हिस्सा भी तुम दे दो बेशक ख़ुदा तो हर चीज़ पर गवाह है (33)
मर्दो का औरतों पर क़ाबू है क्योंकि (एक तो) ख़ुदा ने बाज़ आदमियों (मर्द) को बाज़ आदमियों (औरत) पर फ़ज़ीलत दी है औेर (इसके अलावा) चूकी मर्दो ने औरतों पर अपना माल ख़र्च किया है बस नेक बख़्त बीवियाँ तो शौहरों की ताबेदारी करती हैं (और) उनके पीठ पीछे जिस तरह ख़ुदा ने हिफ़ाज़त की वह भी (हर चीज़ की) हिफ़ाज़त करती है और वह औरतें जिनके नाफरमान सरकश होने का तुम्हें अन्देशा हो तो पहले उन्हें समझाओ और (उसपर न माने तो) तुम उनके साथ सोना छोड़ दो और (इससे भी न माने तो) मारो मगर इतना कि खू़न न निकले और कोई अज़ो न (टूटे) बस अगर वह तुम्हारी मुतीइ हो जाए तो तुम भी उनके नुक़सान की राह न ढूढो ख़ुदा तो ज़रूर सबसे बरतर बुजु़र्ग है (34)
और ऐ हुक्काम (वक़्त) अगर तुम्हें मियाँ बीवी की पूरी नाइत्तेफ़ाक़ी का तरफै़न से अन्देशा हो तो एक सालिस (पन्च) मर्द के कुनबे में से एक और सालिस औरत के कुनबे में मुक़र्रर करो अगर ये दोनों सालिस दोनों में मेल करा देना चाहें तो ख़ुदा उन दोनों के दरमियान उसका अच्छा बन्दोबस्त कर देगा ख़ुदा तो बेशक वाकि़फ व ख़बरदार है (35)
और ख़ुदा ही की इबादत करो और किसी को उसका शरीक न बनाओ और माँ बाप और क़राबतदारों और यतीमों और मोहताजों और रिश्तेदारों पड़ोसियों और अजनबी पड़ोसियों और पहलू में बैठने वाले मुसाहिबों और पड़ोसियों और ज़र ख़रीद लौन्डी और गुलाम के साथ एहसान करो बेशक ख़ुदा अकड़ के चलने वालों और शेख़ीबाज़ों को दोस्त नहीं रखता (36)
ये वह लोग हैं जो ख़ुद तो बुख़्ल करते ही हैं और लोगों को भी बुख़्ल का हुक्म देते हैं और जो माल ख़ुदा ने अपने फ़ज़ल व (करम) से उन्हें दिया है उसे छिपाते हैं और हमने तो कुफ़राने नेअमत करने वालों के वास्ते सख़्त जि़ल्लत का अज़ाब तैयार कर रखा है (37)
और जो लोग महज़ लोगों को दिखाने के वास्ते अपने माल ख़र्च करते हैं और न खुदा ही पर ईमान रखते हैं और न रोजे़ आख़ेरत पर ख़ुदा भी उनके साथ नहीं क्योंकि उनका साथी तो शैतान है और जिसका साथी शैतान हो तो क्या ही बुरा साथी है (38)
अगर ये लोग ख़ुदा और रोज़े आखि़रत पर ईमान लाते और जो कुछ ख़ुदा ने उन्हें दिया है उसमें से राहे ख़ुदा में ख़र्च करते तो उन पर क्या आफ़त आ जाती और ख़ुदा तो उनसे ख़ूब वाकि़फ़ है (39)
ख़ुदा तो हरगिज़ ज़र्रा बराबर भी ज़ुल्म नहीं करता बल्कि अगर ज़र्रा बराबर भी किसी की कोई नेकी हो तो उसको दूना करता है और अपनी तरफ़ से बड़ा सवाब अता फ़रमाता है (40)

22 जून 2019

अलीगढ मुस्लिम यूनिवर्सिटी छात्रसंघ के पूर्व कोर्ट सदस्य हाजी अरशान

अलीगढ मुस्लिम यूनिवर्सिटी छात्रसंघ के पूर्व कोर्ट सदस्य ,राष्ट्रिय अल्पसंख्यक विभाग कांग्रेस कमेटी की तरफ से पूर्व विधानसभा चुनाव में कोटा ज़िले के बनाये गए प्रभारी हाजी अरशान तीन दिवसीय कोटा प्रवास पर रहे ,हाजी अरशान ने कोटा में अल्पसंख्यकों की समस्याएं उनके समाधान के प्रयास तलाशे ,,इस क्रम में हाजी अरशान ने अलग अलग क्षेत्रों में जाकर लोगों से मुलाक़ात भी की ,,,हाजी अरशान अलीगढ मुस्लिम युनिवर्सीटी छात्र संघ के दो बार कोर्ट मेंबर निर्वाचित रहे ,है ,,यह कुशल वक्ता है इसीलिए हाजी अरशान को कांग्रेस अल्पसंख्यक विभाग हाईकमान इन्हे चुनाव प्रचार के वक़्त अलग अलग क्षेत्रों में चुनाव प्रचार प्रभारी बनाकर भी कार्य लेती रही ,है ,राष्ट्रिय अल्पसंख्यक विभाग के अध्यक्ष नदीम जावेद ने हाजी अरशान को पूर्व में कोटा ज़िले की सभी विधानसभा क्षेत्रों का प्रभारी बनाकर भेजा था ,बाद में मेरठ ,हरियाणा ,,उत्तरप्रदेश के कई ज़िलों के यह प्रचार प्रभारी रहे ,,हाजी अरशान अपने क्षेत्र में अपने लोगों में हर दिल अज़ीज़ रहे है ,यह हमेशा साक्षरता ,क़ौमी एकता ,शिक्षा को स्वरोज़गार से जोड़ने को अपने अभियान में शामिल रहते है ,,हाजी अरशान हाल ही में मुंबई एक शैक्षणिक सेमीनार कार्यक्रम थे जहाँ से कोटा के हम साथियों ने हाजी अरशान से कोटा रूककर जाने का आग्रह किया जो उन्होंने स्वीकार कर कोटा प्रवास किया ,,हाजी अरशान ने कोटा के कुछ शैक्षणिक इदारों का भी दौरा किया ,,यहाँ की समस्याओं और समाधान के लिए एक रिपोर्ट तैयार करने के लिए अलग अलग लोगों से मुलाक़ात की उन्होंने प्रदेश कांग्रेस कमेटी सदस्य डॉक्टर ज़फर से हालात जाने ,अल्पसंख्यकों की समस्याओं उनके समाधान ,कार्यक्रमों को लेकर ,कोटा संभाग अल्पसंख्यक विभाग के संभाग अध्यक्ष प्रदेश कांग्रेस कमेटी सदस्य एडवोकेट अख्तर खान अकेला से हालात जाने ,हाजी अरशान ने वक़्फ़ सम्पत्तियों के रख रखाव ,,चार्मिक स्थलों के अधूरे ,बेवजह रुके हुए कार्यों का भी जायज़ा लिया ,हाजी अरशान ने उर्दू फरोग के लिए दूरस्थ शिक्षा कॉलेज के मुफ़्ती शमीम अशरफ से भी उर्दू ,मदरसा तालीम ,,दारुल उलूम और सामूहिक विवाह सम्मेल तोर तरीकों के बारे में जानकारी ली ,,,हाजी अरशान यूथ समस्याओं को लेकर अशफ़ाक़ कुरैशी बाबा ,,,इरफ़ान भाई , तबरेज़ पठान संगठन सचिव देहात कांग्रेस सहित कई साथियो से मिले ,,,,हाजी अरशान अल्पसंख्यक साक्षरता कार्यक्रम ,स्वरोजगार कार्यक्रम के प्रेरक भी है ,वोह अलीगढ़ क्षेत्र में स्कूली मदरसा शिक्षा ,स्वरोजगार शिक्षा के तहत शैक्षणिक संस्थाओं के भी निगराकार है ,, हाजी अरशान अलीगढ युनिवर्सीटी में मुख्य वक्ता ,छात्रनेता के रूप में अपनी अलग ही पहचान रखते है ,यह ऐसी शख्सियत है जो अलीगढ यूनिवर्सिटी में दो बार कोर्ट मेंबर रहे है ,,,कोर्ट मेंबर यूनिवर्सिटी प्रंबधन समिति का महत्वपूर्ण हिस्सा है ,,हाजी अरशान कुशल वक्ता होने से छात्रों का हर बार अपने उद्बोधन से हवा का रुख मोड़ने का हुनर रखते हुए लोकप्रिय वक्ता रहे है ,,,,,हाजी अरशान वर्जिलियस हैरी ,राजेंद्र सलूजा सहित कई अन्य साथियों से भी मिले ,,,,अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

 

यूआईटी की 6 योजनाओं के 3201 आवासों का कब्जा वितरण

यूआईटी की 6 योजनाओं के 3201 आवासों का कब्जा वितरण
प्रदेश की सरकार ने किरायेदारों को बनाया मकान मालिक-धारीवाल
कोटा  जून। स्वायत्त शासन, नगरीय विकास एवं आवासन मंत्री शांति धारीवाल ने कहा कि प्रदेश की सरकार इस बात के लिए संकल्पबद्ध है कि हर जरूरतमंद परिवार के पास उसका मकान हो। इसी उद्धेश्य को लेकर सरकार ने कोटा में विभिन्न योजनाओं में 3201 परिवारों को आवासों का आवंटन किया है जिनका कब्जा वितरण समारोहपूर्वक किया गया है।
स्वायत्त शासन मंत्री शनिवार को नगर विकास न्यास द्वारा आयोजित मोहनलाल सुखाडिया आवासीय योजना में 3201 परिवारों को आवंटित आवासों के कब्जा वितरण समारोह में संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि यूआईटी की विभिन्न 6 आवासीय योजनाओं में 3201 आवंटित आवासों का कब्जा वितरण किया जा रहा है। उन्होंने इस मौके पर मुख्य अतिथि के रूप में अनेक लोगों को योजनाओं में आवंटित आवासों के कब्जों का वितरण भी किया। उन्होंने कब्जा प्राप्त करने वालों को बधाई देते हुए कहा कि जिन्हें कब्जे मिल गये हैं वे परिवार यहां आकर रहें ताकि आवासों की स्थिति ठीक रह सके। उन्होंने कहा कि यहां निर्मित आवासों में सभी आवश्यक मूलभूत सुविधाएं विकसित की गई है जिनका सदुपयोग होना चाहिये।

ख़ुदा तुम्हारी औलाद के हक़ में तुमसे वसीयत करता है

(मुसलमानों) ख़ुदा तुम्हारी औलाद के हक़ में तुमसे वसीयत करता है कि लड़के का हिस्सा दो लड़कियों के बराबर है और अगर (मय्यत की) औलाद में सिर्फ लड़कियां ही हों (दो) या (दो) से ज़्यादा तो उनका (मक़र्रर हिस्सा) कुल तरके का दो तिहाई है और अगर एक लड़की हो तो उसका आधा है और मय्यत के बाप माँ हर एक का अगर मय्यत की कोई औलाद मौजूद न हो तो तरके के माल में से मुअय्यन (ख़ास चीज़ों में) छटा हिस्सा है और अगर मय्यत के कोई औलाद न हो और उसके सिर्फ माँ बाप ही वारिस हों तो माँ का मुअय्यन (ख़ास चीज़ों में) एक तिहाई हिस्सा तय है और बाक़ी बाप का लेकिन अगर मय्यत के (हक़ीक़ी और सौतेले) भाई भी मौजूद हों तो (अगरचे उन्हें कुछ न मिले) उस वक़्त माँ का हिस्सा छठा ही होगा (और वह भी) मय्यत नें जिसके बारे में वसीयत की है उसकी तालीम और (अदाए) क़र्ज़ के बाद तुम्हारे बाप हों या बेटे तुम तो यह नहीं जानते हों कि उसमें कौन तुम्हारी नाफ़रमानी में ज़्यादा क़रीब है (फिर तुम क्या दख़ल दे सकते हो) हिस्सा तो सिर्फ ख़ुदा की तरफ़ से मुअय्यन होता है क्योंकि ख़ुदा तो ज़रूर हर चीज़ को जानता और तदबीर वाला है (11)
और जो कुछ तुम्हारी बीवियां छोड़ कर (मर) जाए बस अगर उनके कोई औलाद न हो तो तुम्हारा आधा है और अगर उनके कोई औलाद हो तो जो कुछ वह तरका छोड़े उसमें से बाज़ चीज़ों में चौथाई तुम्हारा है (और वह भी) औरत ने जिसकी वसीयत की हो और (अदाए) क़र्ज़ के बाद अगर तुम्हारे कोई औलाद न हो तो तुम्हारे तरके में से तुम्हारी बीवियों का बाज़ चीज़ों में चैथाई है और अगर तुम्हारी कोई औलाद हो तो तुम्हारे तरके में से उनका ख़ास चीज़ों में आठवाँ हिस्सा है (और वह भी) तुमने जिसके बारे में वसीयत की है उसकी तामील और (अदाए) क़र्ज़ के बाद और अगर कोई मर्द या औरत अपनी मादरजिलों (ख़्याली) भाई या बहन को वारिस छोड़े तो उनमें से हर एक का ख़ास चीजों में छठा हिस्सा है और अगर उससे ज़्यादा हो तो सबके सब एक ख़ास तिहाई में शरीक़ रहेंगे और (ये सब) मय्यत ने जिसके बारे में वसीयत की है उसकी तामील और (अदाए) क़र्ज़ के बाद मगर हाँ वह वसीयत (वारिसों को ख़्वाह मख़्वाह) नुक़्सान पहुँचाने वाली न हो (तब) ये वसीयत ख़ुदा की तरफ़ से है और ख़ुदा तो हर चीज़ का जानने वाला और बुर्दबार है (12)
यह ख़ुदा की (मुक़र्रर की हुयी) हदें हैं और ख़ुदा और रसूल की इताअत करे उसको ख़ुदा आख़ेरत में ऐसे (हर भरे) बाग़ों में पहुँचा देगा जिसके नीचे नहरें जारी होंगी और वह उनमें हमेशा (चैन से) रहेंगे और यही तो बड़ी कामयाबी है (13)
और जिस शख़्स से ख़ुदा व रसूल की नाफ़रमानी की और उसकी हदों से गुज़़र गया तो बस ख़ुदा उसको जहन्नुम में दाखि़ल करेगा (14)
और वह उसमें हमेशा अपना किया भुगतता रहेगा और उसके लिए बड़ी रूसवाई का अज़ाब है और तुम्हारी औरतों में से जो औरतें बदकारी करें तो उनकी बदकारी पर अपने लोगों में से चार गवाही लो और फिर अगर चारों गवाह उसकी तसदीक़ करें तो (उसकी सज़ा ये है कि) उनको घरों में बन्द रखो यहाँ तक कि मौत आ जाए या ख़ुदा उनकी कोई (दूसरी) राह निकाले (15)
और तुम लोगों में से जिनसे बदकारी सरज़द हुयी हो उनको मारो पीटो फिर अगर वह दोनों (अपनी हरकत से) तौबा करें और इस्लाह कर लें तो उनको छोड़ दो बेशक ख़ुदा बड़ा तौबा कुबूल करने वाला मेहरबान है (16)
मगर ख़ुदा की बारगाह में तौबा तो सिर्फ उन्हीं लोगों की (ठीक) है जो नादानिस्ता (अंजाने में) बुरी हरकत कर बैठे (और) फिर जल्दी से तौबा कर ले तो ख़ुदा भी ऐसे लोगों की तौबा क़ुबूल कर लेता है और ख़ुदा तो बड़ा जानने वाला हकीम है (17)
और तौबा उन लोगों के लिये (मुफ़ीद) नहीं है जो (उम्र भर) तो बुरे काम करते रहे यहाँ तक कि जब उनमें से किसी के सर पर मौत आ खड़ी हुयी तो कहने लगे अब मैंने तौबा की और (इसी तरह) उन लोगों के लिए (भी तौबा) मुफ़ीद नहीं है जो कुफ़्र ही की हालत में मर गये ऐसे ही लोगों के वास्ते हमने दर्दनाक अज़ाब तैयार कर रखा है (18)
ऐ ईमानदारों तुमको ये जायज़ नहीं कि (अपने मुरिस की) औरतों से (निकाह कर) के (ख़्वाह मा ख़्वाह) ज़बरदस्ती वारिस बन जाओ और जो कुछ तुमने उन्हें (शौहर के तरके से) दिया है उसमें से कुछ (आपस से कुछ वापस लेने की नीयत से) उन्हें दूसरे के साथ (निकाह करने से) न रोको हाँ जब वह खुल्लम खुल्ला कोई बदकारी करें तो अलबत्ता रोकने में (मज़ाएक़ा {हर्ज} नहीं) और बीवियों के साथ अच्छा सुलूक करते रहो और अगर तुम किसी वजह से उन्हें नापसन्द करो (तो भी सब्र करो क्योंकि) अजब नहीं कि किसी चीज़ को तुम नापसन्द करते हो और ख़ुदा तुम्हारे लिए उसमें बहुत बेहतरी कर दे (19)
और अगर तुम एक बीवी (को तलाक़ देकर उस) की जगह दूसरी बीवी (निकाह करके) तबदील करना चाहो तो अगरचे तुम उनमें से एक को (जिसे तलाक़ देना चहाते हो) बहुत सा माल दे चुके हो तो तुम उनमें से कुछ (वापस न लो) क्या तुम्हारी यही गै़रत है कि (ख़्वाह मा ख़्वाह) बोहतान बाॅधकर या सरीही जुर्म लगाकर वापस ले लो (20)
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