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21 जून 2021

अंगदान महादान विषय पर प्रतियोगिता में बच्चों ने जीते पुरुस्कार

 

अंगदान महादान विषय पर प्रतियोगिता में बच्चों ने जीते पुरुस्कार 


वैश्विक बीमारी कोरोना के कारण ज्यादातर सामाजिक संस्थाओं ने ऑनलाइन प्लेटफार्म से लोगों में नैत्रदान, अंगदान, देहदान के प्रति लोगों में जागरूकता बनाये रखने का पूरा प्रयास किया है ।

बीते सप्ताह,अंगदान महादान अभियान में काफ़ी समय से कार्य कर ही दिल्ली का सेवाभावी संगठन "राइड ऑफ लाइफ़" और "नई सोच नया आरंभ फाउंडेशन" की ओर से,आमजन में अंगदान के प्रति-जागरूकता बढ़ाने के लिये राष्ट्रीय स्तर पर ऑनलाइन स्लोगन प्लेकार्ड प्रतियोगिता आरंभ की गई थी ।

इस ऑनलाइन स्लोगन प्रतियोगिता में पूरे भारतवर्ष से काफ़ी संख्या में बच्चों और बड़ों ने भाग लिया था । देश भर के बच्चों से प्राप्त स्लोगन को पढ़कर ज्यूरी के सभी सदस्यों को आश्चर्य हुआ कि,बच्चे भी अंगदान के बारे में कितनी सही व सटीक जानकारी रखते हैं ।

राइड ऑफ लाइफ़ अभियान के संस्थापक राजीव मैखुरी का कहना है,की 6 से 18 वर्ष की उम्र के बच्चों में नई चीज़ों को जानने की सीखने की इच्छा रहती है । इस उम्र में यदि बच्चों को नैत्रदान-अंगदान-देहदान के बारे में बताया जाये तो यह ज्ञान उनके साथ ता-उम्र रहता है। 

देश भर में आयोजित इस प्लेकार्ड प्रतियोगिता में राजस्थान से 160 प्रतियोगीयों ने भाग लिया था। जिसमें  11 से 18 वर्ष के वर्ग में प्रथम स्थान पर कोटा से अग्रिमा द्विवेदी और 5 से 10 वर्ष के वर्ग में दैविक जोशी प्रथम स्थान पर रहें ।

(बेहिश्त के) बाग़ों में गुनेहगारों से बाहम पूछ रहे होंगे

 (बेहिश्त के) बाग़ों में गुनेहगारों से बाहम पूछ रहे होंगे (40)
कि आखि़र तुम्हें दोज़ख़ में कौन सी चीज़ (घसीट) लायी (41)
वह लोग कहेंगे (42)
कि हम न तो नमाज़ पढ़ा करते थे (43)
और न मोहताजों को खाना खिलाते थे (44)
और एहले बातिल के साथ हम भी बड़े काम में घुस पड़ते थे (45)
और रोज़ जज़ा को झुठलाया करते थे (और यूँ ही रहे) (46)
यहाँ तक कि हमें मौत आ गयी (47)
तो (उस वक़्त) उन्हें सिफ़ारिश करने वालों की सिफ़ारिश कुछ काम न आएगी (48)
और उन्हें क्या हो गया है कि नसीहत से मुँह मोड़े हुए हैं (49)
गोया वह वहशी गधे हैं (50)

20 जून 2021

और हमने जहन्नुम का निगेहबान तो बस फरिश्तों को बनाया है

और हमने जहन्नुम का निगेहबान तो बस फरिश्तों को बनाया है और उनका ये शुमार भी काफ़िरों की आज़माइश के लिए मुक़र्रर किया ताकि एहले किताब (फौरन) यक़ीन कर लें और मोमिनो का ईमान और ज़्यादा हो और अहले किताब और मोमिनीन (किसी तरह) शक न करें और जिन लोगों के दिल में (निफ़ाक का) मर्ज़ है (वह) और काफ़िर लोग कह बैठे कि इस मसल (के बयान करने) से ख़ुदा का क्या मतलब है यूँ ख़ुदा जिसे चाहता है गुमराही में छोड़ देता है और जिसे चाहता है हिदायत करता है और तुम्हारे परवरदिगार के लशकरों को उसके सिवा कोई नहीं जानता और ये तो आदमियों के लिए बस नसीहत है (31)
सुन रखो (हमें) चाँद की क़सम (32)
और रात की जब जाने लगे (33)
और सुबह की जब रौशन हो जाए (34)
कि वह (जहन्नुम) भी एक बहुत बड़ी (आफ़त) है (35)
(और) लोगों के डराने वाली है (36)
(सबके लिए नही बल्कि) तुममें से वह जो शख़्स (नेकी की तरफ़) आगे बढ़ना (37)
और (बुराई से) पीछे हटना चाहे हर शख़्स अपने आमाल के बदले गिर्द है (38)
मगर दाहिने हाथ (में नामए अमल लेने) वाले (39)
(बेहिश्त के) बाग़ों में गुनेहगारों से बाहम पूछ रहे होंगे (40)

19 जून 2021

ये मयंक उम्मीद जगाते हैं

ये मयंक उम्मीद जगाते हैं !
मयंक जैन के लिए रसूख/अकूत कमाई से ज्यादा जरूरी है सुकून । इसीलिए तो थर्ड ग्रेड टीचर से नायब तहसीलदार बने मयंक ने सरकार से गुजारिश कर फिर थर्ड ग्रेड टीचर बनने का रास्ता तलाश लिया ।
नायब तहसीलदार के बाद व्यक्ति RTS-तहसीलदार बनता है फिर RAS-राजस्थान प्रशासनिक सेवा का अधिकारी । करप्ट व्यक्ति की पांचों अंगुली घी में होती है और ईमानदार की निगाहें फाइलों में । लगता है मयंक सिस्टम में कसमसा रहे थे । अब उन्हें पढ़ाने में जो सुकून मिलेगा वह शायद ही कहीं मिले ।
रिश्ते में मेरे एक बहनोई ने भी ऐसा ही किया था । वह आरएएस अलाइड सर्विस में चुने गये । स्कूल लेक्चरर से जिला उद्योग अधिकारी बने फिर वापस स्कूल लेक्चरर की नौकरी में लौट आये । बोले-"बच्चों के साथ पढ़ने-पढ़ाने में जो सुकून था वो गाड़ी-घोड़े-दफ्तर वाली उस नौकरी में नहीं ।"
पुलिस इंटेलिजेंस में इंस्पेक्टर विक्रम सिंह जी भी आरएएस परीक्षा के जरिये देवस्थान में अधिकारी बने । पहली ही पोस्टिंग में पता चला कि दीये बाती में भी करप्शन का खेल बड़ा है,मंदिरों पर कब्जे की माफिया सरीखी कहानी और राजनीतिक संरक्षण अलग । विक्रम जी ने भी एक पायदान पीछे खिसक सुकून तलाशने का फैसला लिया और लग गये अपनी पुरानी ड्यूटी में ।
कुल मिलाकर बात यह है कि "करप्ट" या "करप्ट सिस्टम में एडजस्ट" होना भी हर किसी के बूते की बात नहीं ।

 

सुकूं इश्क है.

 

ये बेकरारी ये कसक
ये जुनूं इश्क है..
वो तेरी बांहो का
सुकूं इश्क है..
वो मेरा मिलने को
तरसना इश्क है..
और तेरा खुल के
बरसना इश्क है..
मेरा इंतज़ार मे
बिख़रना इश्क है..
और तेरे दीद पे
निख़रना इश्क है..
तेरा बात बात पर
खफ़ा हो जाना इश्क हैं..
और मेरा मुस्कुरा कर
नाज़ उठाना इश्क है..
मेरा लिख लिख के
मिटाना इश्क है..
और तेरा अनकही
सुन पाना इश्क हैं...!!
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