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23 जून 2017

पेड़ पोधो को ज़िंदगी देकर ,,इंसानो की ज़िंदगियाँ बचाने का अभियान चलाने वाले ,,पर्यावरण विद ,डॉक्टर लक्ष्मीकांत दाधीच का निधन

पेड़ पोधो को ज़िंदगी देकर ,,इंसानो की ज़िंदगियाँ बचाने का अभियान चलाने वाले ,,पर्यावरण विद ,डॉक्टर लक्ष्मीकांत दाधीच का आज निधन हो गया ,,,उनके निधन के बाद ,,कोटा में पर्यावरण विद का अंतर्राष्ट्रीय विशेषज्ञ अध्याय खत्म सा हो गया है ,,उन्हें श्रद्धांजलि ,, पैढ़ पोधो के विख्यात डॉक्टर ,,लक्ष्मी कान्त दाधीच जो गुरूजी के नाम से भी सम्बोधित थे ,,,,कोटा में रहकर पुख्ता तोर पर राष्ट्रिय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर ,,जल ,,वायु ,,पर्यावरण और प्रदूषण के बचाव को लेकर संघर्षरत थे और वोह अब तक इस संदर्भ में हज़ारो हज़ार जागरूक कार्यक्रम चला चुके थे ,,सेकड़ो लेख लिख चुके थे ,,राष्ट्रिय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर देश विदेश में हज़ारो सेमिनारों में अपना व्याख्यान दे चुके थे ,,कोटा की अज़ीम पर्यावरण विशेषज्ञ ,,विचारक ,,चिंतक शख्सियत डॉक्टर लक्ष्मीकांत दाधीच ,,जिन्होंने बॉटनी ,,यानि फूल पत्तियों में डॉक्टरेट करने के बाद पैढ़ पोधो से प्यार कर लिया ,,वोह इस सच को समझ गए थे के पैढ़ पोधे ही इस दुनिया को खुशहाल ,,ज़िंदा रखने में विशेष अहमियत रखते है ,,बस इसीलिए डॉक्टर लक्ष्मी कान्त दाधीच पेड़ पोधे पढने वाले छात्र फिर पढ़ाने वाले प्रोफ़ेसर बन गए ,,,हज़ारो हज़ार पेढ़ पोधो के बारे में बारीकियों से जानकारी रखने वाले डॉक्टर लक्ष्मी कान्त दाधीच ,,पर्यावरण के साथ साथ प्रदूषण को लेकर भी चिंतित रहे थे ,,इसलिए यह ग्रीनरी बचाओ के साथ साथ प्रदूषण नियंत्रण के लिए भी विशेष अभियान चलाते रहे थे ,,,,,,, राजकीय महाविद्यालय में बॉटनी के प्रोफ़ेसर के साथ साथ ऍन सी सी एयरफोर्स के प्रभारी होने के नाते ,,यह समाजसेवा ,,श्रमदान ,,स्काउट जैसे कार्यक्रमों से भी जुड़े रहे ,,,बहतरीन अनुशासित कैडेट तय्यार करने के साथ साथ ,,सोलो फ्लाइट के प्रशिक्षक डॉक्टर लक्ष्मीकांत दाधीच के प्रशिक्षित ऍन सी सी कैडेट हर बार किसी न किसी कार्यक्रम में राष्ट्रपति द्वारा सम्मानित होते रहे है ,,ज़िम्मेदारियाँ बढ़ी ,,प्रोफेसर से राजकीय महाविद्यालय ,,जानकी देवी बजाज महाविद्यालय के प्रिंसिपल बने ,,कुशल प्रशासन ,,पर्यावरण संरक्षण के पैगाम के साथ साथ ,,समाजसेवा से संबंधित सभी गतिविधिया जारी रखी गई ,,रक्तदान ,,चिकित्सा शिविर ,,पर्यावरण संरक्षण सेमीनार ,,जागरूकता कार्यक्रम ,,प्रदूषण नियंत्रण के मामले में विशेष कार्य्रकम ,,,आंदोलन ,,,शिक्षा जागृति कार्यक्रम ,,,मतदाता जागरूकता कार्यक्रम ,,रोटरी क्लब ,,लॉयन्स क्लब ,,किसी भी क्षेत्रीय ,,राज्य ,,राष्ट्रिय ,,अंतर्राष्ट्रीय संस्था का समाजसेवा से जुड़ा काम हो डॉक्टर लक्ष्मी कान्त दाधीच सबसे आगे खड़े नज़र आते थे ,,,,पर्यावरण संरक्षण पर सेकड़ो पत्रवाचन के अलावा आपने कई पुस्तके भी लिखी थीं ,,,हज़ारो हज़ार छात्र छात्राओ में पर्यावरण प्रेम की जागरूकता है नहीं बल्कि उन्हें खुद एक शिक्षक के रूप में तय्यार करने वाले डॉक्टर लक्ष्मीकांत दाधीच जब अपने पढ़ाये हुए बच्चो को जागरूकता कार्यक्रम में लगे हुए देखते थे तो उनकी छाती गर्व से फूल जाती थी ,,,,,,,डॉक्टर लक्ष्मी कान्त दाधीच ने पर्यावरण ,,पेढ़ पोधो को आयुर्वेद चिकित्सा से भी जोड़ा है ,,,,इतना ही नहीं पैढ पोधो का धर्म मज़हब से भी इन्होने जुड़ाव कर एक विशिष्ठ पहचान बनाई है ,,,धर्म के हिसाब से रामायण ,,महाभारत सहित कई धर्मग्रंथो में जिन वनस्पतियो ,,पोधो का ज़िक्र हुआ है ,,उन पैढ़ पोधो को इकट्ठा कर डॉक्टर लक्ष्मीकांत दाधीच ने वाटिकाए तय्यार की है ,,इसी तरह हुज़ूर स अ व पैगंबर मोहम्मद साहब के काल में जो पेड़ पोधे ,,जो वनस्पत्ति थी ,,जिन पोधो का ,,जिन पेड़ो का क़ुरान मजीद में ज़िक्र आया है ,,पुरे अध्ययन के बाद उन पैढ़,, .पोधो की एक वाटिका अलग से तय्यार की गई , ,,,,जिसमे इन वनस्पतियो के आम जीवन में क्या फायदे है वोह भी बताये गए थे ,,वनस्पति से इलाज ,,सुबह की खुशनुमा हवा तो है ही सही साथ ही जल स्तर के संतुलित रहने से मौसम ,,वातावरण भी खुशनुमा रहता है ,,वनस्पति होगी तो जीव जंतु होंगे ,,,मानव होगा ,,मानवीयता होगी ,,अगर वनस्पति खत्म हुई तो सब कुछ तबाह हो जाएगा इसकी जागरूकता डॉक्टर लक्ष्मी कांत दाधीच लगभग चालीस सालों से कर रहे थे ,,,जो तेज़ाबी वर्षा ,,ज़हरीली धुंए का प्रदूषण ,,,पेड़ो की कटाई ,,वनस्पति की तबाही की तस्वीर आज है ,,इसके लिए डॉक्टर लक्ष्मी कान्त चालीस सालों से चिंता करते रहे ,,कार्य करते रहे थे ,,,,उद्योगो की ज़हरीली हवा ,,,वनो का कटाव ,,खानो की तोड़फोड़ की वजह से कोटा तबाही के निशाने पर ,, लेकिन सच ,,कड़वा सच यही है ,,के इस कोटा को इस तबाही ,,इस ज़हरीले वातावरण से जितना भी बचाया जा सका है उसके हीरो एक मात्र डॉक्टर लक्ष्मीकांत दाधीच ही थे ,,और डॉक्टर लक्ष्मी कांत दाधीच आज कोटा ,,राजस्थान ,,हिन्दुस्तान सहित विदेशो के कई प्रमुख शहरो में पर्यावरण संरक्षण कार्यक्रमों में अपने व्याख्यान देकर कोटा का गौरव बढ़ा रहे थे , ,,यह चंद पंक्तियाँ जो भी उनके लिखी गई है ,,उनकी शख्सियत के बखान का आगे ऊंट के मुंह में जीरा भी नहीं ,,लेकिन फिर भी में सूरज को दिया दिखाने की हिमाक़त की है ,,,,प्रोफेसर ,,गुरु ,,डॉक्टर ,,मज़हबी वनस्पति विशेषज्ञ ,,समाजसेवक ,,लेखक ,,,व्याख्याता ,,पत्रकार ,,,प्रमोटर ,,,ऍन सी सी इंस्ट्रक्टर सहित ना जाने कितनी खूबियों के धनी ,,,डॉक्टर लक्ष्मीकांत दाधीच का सूरज आज खुदा ने गुरुब कर दिया है ,,कोटा शहर ,,देश और विदेश के पर्यावरण विद डॉक्टर लक्ष्मीकांत दाधीच के इस निधन से आहत है ,,सदमे में है ,ईश्वर ,,खुदा ,,लक्ष्मीकांत दाधीच को जन्नत में आला मुक़ाम आता फरमाए ,,लक्ष्मीकांत दाधीच की अंतिम इच्छा पर्यावरण जागरूकता के लिए सभी का उत्साहवर्धन ,,क़ौमी एकता का संगम सहित प्रतिदिन हरे पेड़ लगाना और उनका संरक्षण करना था ,,ऐसे पर्यावरण विद को सच्ची श्रद्धांजलि पर्यावरण संरक्षण क्षेत्र में सभी लोगो का एक नया संकल्प ,,एक नया क़दम उनको सच्ची श्रद्धांजलि होगी ,, ,,,,,,,अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

देश के सभी अख़बारों में कोटा के कोचिंग इंस्टीट्यूट्स की फेंका फेंकी संबंधित करोडो करोड़ के विज्ञापन

भावी डॉक्टर्स बनाने के लिए नीट का परीक्षा परिणाम आ गया है ,,कल शनिवार को ,,देश के सभी अख़बारों में कोटा के कोचिंग इंस्टीट्यूट्स की फेंका फेंकी संबंधित करोडो करोड़ के विज्ञापन होंगे ,,अख़बार और इलेक्ट्रॉनिक मिडिया की क्या मजाल के वोह इस मामले में कोचिंग व्यवसायिक व्यस्था ,,को लेकर ज़रा भी निष्पक्ष चिंतन रिपोर्ट दिखा सके ,,ताज्जुब है देश भर में टॉपर की फेंका फेंकी करने वाले कोचिंग ,टॉपर्स के लिए अपनी अपनी कोचिंग की दावेदारी दिखाते है ,,फ़र्ज़ी और झूंठी दावेदारियों के विज्ञापन छापे और दिखाए जाते है ,टॉपर्स को प्रलोभन दिया जाता है ,,दोस्तों बात सच्ची लेकिन कड़वी ज़रूर है ,,यह कोचिंग अगर को तराश कर हीरा बनाने का हुनर रखते है ,,तो फिर टॉपर इनके अपने ज़िले कोटा के क्यों नहीं ,होते ,चलो कोटा छोटी जगह है तो फिर राजस्थान राज्य से यह टॉपर क्यौं नहीं होते ,,बात साफ़ है ,,कोचिंग के आसपास से भी अगर कोई टॉपर छात्र छात्रा गुज़र जाए तो बस यह कोचिंग अपनी व्यवसायिक प्रणाली के तहत ,,उस छात्र छात्रा पर अपनी दावेदारी जता देते है ,,दोस्तों में आपको कोटा के कोचिंगों का नज़ारा हाल ही में जारी नीट के परिणाम के आयने में दिखाता हूँ ,,दोस्तों कोटा में लाखों छात्र छात्रों की करोडो करोड़ फीस वसूली के साथ कोचिंग ,,हिस्सेदारी अख़बार ,,इलेक्ट्रॉनिक मिडिया की भी विज्ञापन प्रतिशत के आधार खामोशी के प्रतिफल के बदले है ,,वर्तमान घोषित नीट परिणाम में कोटा का एक भी छात्र नहीं है ,,पुरे पच्चीस की टॉपर लिस्ट में राजस्थान की एक छात्रा छवि हरकाबत सत्रहवें नंबर पर आयी है ,,जबकि पहले नंबर पर पंजाब दूसरे व् तीसरे नंबर पर मध्य्प्रदेश के छात्र है ,,फिर कोटा ,,राजस्थान राज्य अपनी छाती पर इन कोचिंगों को लूट की मूंग क्यौं दलने दे ,,यहां के बच्चो पर विशेष ध्यान क्यों नहीं दिया जाता ,,यहां के बच्चो को विशेष कोचिंग क्यों नहीं दी जाती ,,हकीक़त यह है के कोचिंग गुरु ,गुरु नहीं ,,व्यापारी है उन्हें अपने कोटा ,,कोटावासियों ,,राजस्थानियों से कोई प्यार ,,कोई हमदर्दी नहीं ,सिर्फ यहां की सहूलियतें लेकर यह करोडो करोड़ रूपये का व्यापार मिडिया को विज्ञापन पार्टनर बनकर करते रहे है ,,सुसाइड सीटी ,,का दर्द हम झेलें ,,बाहर से आने वाले शरारती बच्चो की आपराधिक गतिविधियों के शिकार हम हो ,,हमारी सहूलियतों में से कटौती कर हम इन्हे ऐश ओ आराम दे और हमारे बच्चो पर कोई विशेष तरजीह नहीं ,,ऐसा हम हरगिज़ हरगिज़ नहीं होने देंगे ,,अख़बार व्यापारी हो सकते है ,,लेकिन अब इस लड़ाई को हम समाजसेवी संस्थाओ के ज़रिये ,,सोशल मीडीया के ज़रिये उठाएंगे ज़रूर ,,कूल पच्चीस की मेरिट में सिर्फ एक राजस्थान का बच्चा ,,,कोटा उसमे से गायब ,,,मध्य प्रदेश ,,केरल के तीन तीन छात्र ,पंजाब ,,हरियाणा,, उत्तर प्रदेश ,,,,दिल्ली गुजरात ,,तेलगाना के दो दो छात्र ,,और देश के सबसे बढे राज्य ,,देश का सबसे बढ़ा कोचिंग हब कोटा राजस्थान से सिर्फ एक छात्र मेरिट में आना कोचिंग गुरुओं के लिए भी शर्मनाक है ,,कोचिंग गुरुओ को राजस्थान से प्यार करना होगा ,,कोटा और कोटावासियों से विशेष प्यार करना होगा ,,उन पर विशेष पैकेज की व्यवस्था देकर उन्हें अव्वल लाने के प्रयास करना होंगे ,,,वरना आंध्र प्रदेश ,,पश्चिम बंगाल ,,बिहार महाराष्ट्र के भी एक एक छात्र तो मेरिट में आये ही है ,,,देश के चार सो सत्तर मेडिकल कॉलेजों की एम बी बी एस की पैसठ हज़ार एक सो सत्तर सीटों और पच्चीस हज़ार सात सो तीस डेंटल सीसीटों के लिए अब घमासान होगा ,लूटमार होगी ,,और कोटा के छात्र छात्राओं ,,राजस्थान के छात्र छात्राओं को कोटा के कोचिंग गुरु ,,कौन्सिलिंग मैनेजमेंट की सहूलियत भी नहीं दे सकने से ,,कई छात्र छात्राये चाहकर भी योग्य होने पर भी प्रवेश नहीं ले सकेंगे और फिर दुबारा रिपीटर के रूप में कोचिंग लूट का शिकार होकर ,,डिप्रेशन का शिकार होकर इनके कोचिंग में पढ़ने के लिए ख़ामोशी से चले जायेंगे ,,क्यौंकि मीडिया पार्टनर ,,अख़बार पार्टनर ,एक सच ,,एक आयना ,,एक सच्चा पहलु जो आपके सामने मेने रखा है ,,,विज्ञापन के मुनाफे के कारण न तो दिखाना चाहते है ,न खबर बनाना चाहते है ,,अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

क़ुरआन का सन्देश

और (ऐ रसूल) अगर तुम उनको उस वक़्त देखते (तो ताज्जुब करते) जब वे लोग ख़ुदा के सामने खड़े किए जाएगें और ख़ुदा उनसे पूछेगा कि क्या ये (क़यामत का दिन) अब भी सही नहीं है वह (जवाब में) कहेगें कि (दुनिया में) इससे इन्कार करते थे (31)
उसकी सज़ा में अज़ाब (के मजे़) चखो बेषक जिन लोगों ने क़यामत के दिन ख़़ुदा की हुज़ूरी को झुठलाया वह बड़े घाटे में हैं यहाँ तक कि जब उनके सर पर क़यामत नागहा (एक दम आ) पहँचेगी तो कहने लगेगें ऐ है अफसोस हम ने तो इसमें बड़ी कोताही की (ये कहते जाएगे) और अपने गुनाहों का पुश्तारा अपनी अपनी पीठ पर लादते जाएगे देखो तो (ये) क्या बुरा बोझ है जिसको ये लादे (लादे फिर रहे) हैं (32)
और (ये) दुनियावी जि़न्दगी तो खेल तमाषे के सिवा कुछ भी नहीं और ये तो ज़ाहिर है कि आखि़रत का घर (बेहिष्त) परहेज़गारो के लिए उसके बदर व (कई गुना) बेहतर है तो क्या तुम (इतना भी) नहीं समझते (33)
हम खूब जानते हैं कि उन लोगों की बकबक तुम को सदमा पहुँचाती है तो (तुम को समझना चाहिए कि) ये लोग तुम को नहीं झुठलाते बल्कि (ये) ज़ालिम (हक़ीक़तन) ख़ुदा की आयतों से इन्कार करते हैं (34)
और (कुछ तुम ही पर नहीं) तुमसे पहले भी बहुतेरे रसूल झुठलाए जा चुके हैं तो उन्होनें अपने झुठलाए जाने और अज़ीयत (व तकलीफ) पर सब्र किया यहाँ तक कि हमारी मदद उनके पास आयी और (क्यों न आती) ख़ुदा की बातों का कोई बदलने वाला नहीं है और पैग़म्बर के हालात तो तुम्हारे पास पहुँच ही चुके हैं (35)
अगरचे उन लोगों की रदगिरदानी (मुँह फेरना) तुम पर याक ज़रुर है (लेकिन) अगर तुम्हारा बस चले तो ज़मीन के अन्दर कोई सुरगं ढूढ निकालो या आसमान में सीढ़ी लगाओ और उन्हें कोई मौजिज़ा ला दिखाओ (तो ये भी कर देखो) अगर ख़ुदा चाहता तो उन सब को राहे रास्त पर इकट्ठा कर देता (मगर वह तो इम्तिहान करता है) बस (देखो) तुम हरगिज़ ज़ालिमों में (शामिल) न होना (36)
(तुम्हारा कहना तो) सिर्फ वही लोग मानते हैं जो (दिल से) सुनते हैं और मुर्दो को तो ख़ुदा क़यामत ही में उठाएगा फिर उसी की तरफ लौटाए जाएगें (37)
और कुफ़्फ़ार कहते हैं कि (आखि़र) उस नबी पर उसके परवरदिगार की तरफ से कोई मौजिज़ा क्यों नहीं नाजि़ल होता तो तुम (उनसे) कह दो कि ख़ुदा मौजिज़े के नाजि़ल करने पर ज़रुर क़ादिर है मगर उनमें के अक्सर लोग (ख़ुदा की मसलहतों को) नहीं जानते (38)
ज़मीन में जो चलने फिरने वाला (हैवान) या अपने दोनों परों से उड़ने वाला परिन्दा है उनकी भी तुम्हारी तरह जमाअतें हैं और सब के सब लौह महफूज़ में मौजूद (हैं) हमने किताब (क़ुरान) में कोई बात नहीं छोड़ी है फिर सब के सब (चरिन्द हों या परिन्द) अपने परवरदिगार के हुज़ूर में लाए जायेंगे। (39)
और जिन लोगों ने हमारी आयतों को झुठला दिया गोया वह (कुफ्र के घटाटोप) अॅधेरों में गुगें बहरे (पड़े हैं) ख़़ुदा जिसे चाहे उसे गुमराही में छोड़ दे और जिसे चाहे उसे सीधे ढर्रे पर लगा दे (40)
(ऐ रसूल उनसे) पूछो तो कि क्या तुम यह समझते हो कि अगर तुम्हारे सामने ख़ुदा का अज़ाब आ जाए या तुम्हारे सामने क़यामत ही आ खड़ी मौजूद हो तो तुम अगर (अपने दावे में) सच्चे हो तो (बताओ कि मदद के वास्ते) क्या ख़ुद़ा को छोड़कर दूसरे को पुकारोगे (41) (दूसरों को तो क्या) बल्कि उसी को पुकारोगे फिर अगर वह चाहेगा तो जिस के वास्ते तुमने उसको पुकारा है उसे दफा कर देगा और (उस वक़्त) तुम दूसरे माबूदों को जिन्हे तुम (ख़ुदा का) शरीक समझते थे भूल जाओगे (42)
और (ऐ रसूल) जो उम्मतें तुमसे पहले गुज़र चुकी हैं हम उनके पास भी बहुतेरे रसूल भेज चुके हैं फिर (जब नाफ़रमानी की) तो हमने उनको सख़्ती (43)
और तकलीफ़ में गिरफ़्तार किया ताकि वह लोग (हमारी बारगाह में) गिड़गिड़ाए तो जब उन (के सर) पर हमारा अज़ाब आ खड़ा हुआ तो वह लोग क्यों नहीं गिड़गिड़ाए (कि हम अज़ाब दफा कर देते) मगर उनके दिल तो सख़्त हो गए थे ओर उनकी कारस्तानियों को शैतान ने आरास्ता कर दिखाया था (फिर क्योंकर गिड़गिड़ाते) (44)
फिर जिसकी उन्हें नसीहत की गयी थी जब उसको भूल गए तो हमने उन पर (ढील देने के लिए) हर तरह की (दुनियावी) नेअमतों के दरवाज़े खोल दिए यहाँ तक कि जो नेअमते उनको दी गयी थी जब उनको पाकर ख़ुश हुए तो हमने उन्हें नागाहाँ (एक दम) ले डाला तो उस वक़्त वह नाउम्मीद होकर रह गए (45)

22 जून 2017

,किसी विषय पर सारगर्भित रूप से एक नहीं कई पुस्तक लिख देना ,,आज के इस भागमभाग के वातावरण में कमाल का ही काम है ,,पुलिस अधीक्षक अंशुमन सिंह

कितना ही विद्वान लेखक ,,कितना ही विद्वान पत्रकार हो ,,उनके लिए एक रचनात्मक लेख लिखना भी चुनौतीपूर्ण होता है ,ऐसे में ,,,किसी विषय पर सारगर्भित रूप से एक नहीं कई पुस्तक लिख देना ,,आज के इस भागमभाग के वातावरण में कमाल का ही काम है ,,उक्त उदगार प्रकट करते हुए कोटा शहर पुलिस अधीक्षक अंशुमन सिंह भोमिया ने डॉक्टर प्रभात कुमार सिंघल द्वारा लिखित पुस्तक ,,आराध्य तीर्थ ,,का विमोचन करते हुए कहा के इस पुस्तक में राजस्थान सहित देश भर के तीन सो के लगभग धार्मिक ऐतिहासिक स्थलों की महत्ता ,,उनका इतिहास लिखकर देश के पर्यटकों सहित विदेशी पर्यटकों के लिए यह उपयोगी शोधग्रन्थ तैयार किया है ,,पुलिस अधीक्षक अंशुमन भोमिया ने ऐसी उपयोगी जानकारी को अंग्रेजी अनुवाद करवाकर ,,अंतर्राष्ट्रीय पर्यटकों के लिए भी इसे उपयोगी बनाने का सुझाव दिया ,,,क़रीब तीन सो पृष्ठ की इस पुस्तक में डॉक्टर प्रभात कुमार सिंघल ने अपनी लेखन विधा से इस पुस्तक में सर्वधर्म सम्भाव की तर्ज़ पर ,,हिन्दू ,,मुस्लिम ,,सिक्ख ,ईसाई के प्रमुख धार्मिक स्थलों का ज्ञानवर्धक ,,आस्थवान लेखन किया है ,,इस पुस्तक में सभी धर्मो और स्थलों के बारे में ऐतिहासिक महत्व के साथ लोककथाओं की भी जानकारी है ,, पुलिस अधीक्षक अंशुमान सिंह भोमिया ने डॉक्टर प्रभात कुमार सिंघल ,,,प्रकाशन विधि सलाहकार अख्तर खान अकेला सहित सभी प्रकाशन टीम को मुबारकबाद देते हुए कहा ,,यह एक रचनात्मक ,सकारात्मक लेखन है ,, उन्होंने कहा ,,,के डॉक्टर प्रभात कुमार सिंघल ने ,,,अंग्रेजी कार्यकाल और वर्तमान आज़ाद भारत की,,, पुलिस प्रणाली के बदलते परिदृश्य में ,,,रिसर्च लिखकर डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त की है ,,हम कभी हमारे पुलिस जवानों की जानकारी बढ़ाने के लिए,,, कार्यक्रम आयोजित कर उन्हें व्याख्यान के लिए आमंत्रित भी करेंगे ,,,,पुलिस अधीक्षक अंशुमान भोमिया ने ,,इसी कार्यक्रम में भीलवाड़ा निवासी ,,,,शिखा अग्रवाल द्वारा स्वास्थ्य को लेकर,,, लिखित पुस्तक,,हेल्थ केयर ,, का भी विमोचन किया ,,,उन्होंने कहा वर्तमान माहौल में ,,,,जब विभिन्न प्रकार की,,, नई नई बिमारियों का दौर चल रहा है ,,,,,ऐसे में वर्तमान बीमार हालातों में ,,पुस्तक हेल्थ केयर ,,प्रत्येक व्यक्ति के लिए ,,,एक घरेलु चिकित्सा का दस्तावेज साबित होगा ,,,,,उन्होंने कहा पुस्तक में एलोपेथी ,,आयुर्वेदिक ,,यूनानी ,,होम्योपैथिक ,,प्राकृतिक ,,एक्यूप्रेशर ,,सहित चिकित्सा की सभी विधाये ,,निरोगी काया बनाये रखने के लिए महत्वपूर्ण आलेखों के साथ सजोयी गयी है ,,इसके लिए लेखिका शिखा अग्रवाल और उनकी सहयोगी टीम बधाई की पात्र है ,,,कार्यक्रम का संचालन करते हुए प्रकाशन के विधि सलाहकार ,,एड्वोेकेट अख्तर खान अकेला ने कहा ,मुख्य अतिथि पुलिस अधीक्षक ने पुलिस अधिकारी के पुत्र,,, डॉक्टर प्रभात कुमार सिंघल ,,,जिन्होंने पुलिस विषय पर ही डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त की है ,,उनकी पुस्तक के विमोचन के लिए अल्पसमय में ही विमोचन की स्वीकृति दी है ,,जबकि उनके वैज्ञानिक , एवं सूक्ष्म अनुसंधान के चलते ,,उनकी अधीनस्थ टीम ने हाल ही में ,,,कई लुटेरों ,,चोर ,,उचक्कों को तत्काल गिरफ्तार करने में ,,,सफलता हांसिल कर चमत्कारिक तरीके से कार्य किया है ,,,, अख्तर खान अकेला ने कहा ,,,अंशुमान सिंह भोमिया के लिए ,,,वर्तमान स्विफ्ट कार के लुटेरों को पकड़ना ,,समुन्द्र में से सुई तलाशने जैसा था ,,लेकिन इस असम्भव कार्य को अंशुमान सिंह और उनकी अधीनस्थ पुलिस टीम ने ,,,सम्भव कर दिखाया है ,,पुस्तक के लेखक डॉक्टर प्रभात कुमार सिंघल के बारे में बोलते हुए ,,अख्तर खान अकेला ने कहा के डॉक्टर प्रभात कुमार सिंघल कोटा में ही जनसम्पर्क अधिकारी बने और यही से ,,,सहायक निदेशक जनसम्पर्क पद से सेवानिवृत्त हुए ,, डॉक्टर सिंघल ने,, दो दर्जन से भी अधिक,,, पुस्तकों का लेखन सम्पादन किया ,,हर विषय पर,,, इनका लेखन है ,,क़रीब दो हज़ार से भी अधिक,,, इनके लेख,,, देश की ख्यातनाम पत्र पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुके है ,,डॉक्टर सिंघल ,,राजस्थान सरकार द्वारा अनुकरणीय लेख्नन कार्यो के लिए पांच बार सम्मानित हो चुके है ,,रचनात्मक ,,सकारात्मक ,,ज्ञानवर्धक लेखन ही,,, डॉक्टर प्रभात की विधा है ,,जिसे सभी लोग सराहते है ,,,कार्यक्रम में स्वागत भाषण में बोलते हुए ,,डॉक्टर प्रभात कुमार सिंघल ने मुख्य अतिथि अंशुमान सिंह भोमिया ,,वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ,डॉक्टर्स ,,समाजसेवक और पत्रकारों को धन्यवाद दिया ,,डॉक्टर प्रभात कुमार सिंघल का इस अवसर पर एसोसिएशन ऑफ़ इंडियन वर्किंग जर्नलिस्ट के राष्ट्रिय महासचिव ओमेंद्र सक्सेना ने सम्मान किया ,,,कार्यकम के अंत में हेल्थ केयर ,पुस्तक की लेखिका ,सम्पादक श्रीमती शिखा अग्रवाल ने सभी को धन्यवाद देते हुए ,स्वम अपने स्वास्थ के प्रति कैसे जागरूक रहकर घरेलू चिक्तिसा कर निरोगीकाया बनाये रखे इस बारे में भी जानकारी दी ,,,,कार्यकम में उपनिदेशक जनसम्पर्क हरिओम गुर्जर ,,प्रेसक्लब के अध्यक्ष गजेंद्र व्यास ,,प्रेस क्लब कार्यकारिणी सदस्य नितिन शर्मा ,,राजेंद्र सिंह हाड़ा ,,वरिष्ठ पत्रकार पूर्व प्रेस क्लब के अध्यक्ष पद्युम्न शर्मा ,,डॉक्टर रूचि गोयल ,,डॉक्टर अमित गोयल ,,वरिष्ठ मनोचिकित्स्क डिप्रेशन कौंसिलर ,,नशामुक्ति विशेषज्ञ डॉक्टर एम एल अग्रवाल ,,हिंदुस्तान टाइम्स के आबशार क़ाज़ी ,,दैनिक भास्कर के अनील शर्मा ,,राजस्थान पत्रिका के राजकुमार ,,प्रेस फोटोग्राफर हाबुलाल ,,इमरान भाई ,,अशफ़ाक़ भाई ,,वरिष्ठ पत्रकार भाजपा आई टी सेल के प्रभारी प्रणय विजय ,,हिन्दू मुस्लिम एकता समिति के अध्यक्ष तबरेज़ पठान ,,,राष्ट्रीय सहारा के के डी अब्बासी ,,राजस्थान कर्मचारी प्रगतिशील संघ की प्रदेश अध्यक्ष श्रीमती हंसा त्यागी ,,,इमरान भाई ,,, सहित सभी पत्रकार साथियों ,,,समाज सेवको ,,चिकित्स्कों ने पुलिस अधीक्षक अंशुमान सिंह भोमिया का पुष्प गुच्छ भेंट कर ,,माल्यार्पण कर ऐतिहासिक स्वागत किया इस अवसर पर पत्रकार ,,लेखक ,,चित्रकार अखिलेश बेगरी ने पुलिस अधीक्षक अंशुमान भोमिया का सम्मान करते हुए उन्हें पुस्तक और चित्र कलाकार्तियाँ प्रतीक चिन्ह के रूप में भेंट की ,,,,,,अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

क़ुरआन का सन्देश

ऐ रसूल) तुम कहो कि अगर मैं नाफरमानी करुँ तो बेषक एक बड़े (सख़्त) दिल के अज़ाब से डरता हूँ (16)
उस दिन जिस (के सर) से अज़ाब टल गया तो (समझो कि) ख़ुदा ने उस पर (बड़ा) रहम किया और यही तो सरीही कामयाबी है (17) और अगर ख़ुदा तुम को किसी कि़स्म की तकलीफ पहुचाए तो उसके सिवा कोई उसका दफा करने वाला नहीं है और अगर तुम्हें कुछ फायदा) पहुॅचाए तो भी (कोई रोक नहीं सकता क्योंकि) वह हर चीज़ पर क़ादिर है (18)
वही अपने तमाम बन्दों पर ग़ालिब है और वह वाकि़फकार हकीम है (19)
(ऐ रसूल) तुम पूछो कि गवाही में सबसे बढ़के कौन चीज़ है तुम खुद ही कह दो कि मेरे और तुम्हारे दरम्यिान ख़ुदा गवाह है और मेरे पास ये क़ुरान वही के तौर पर इसलिए नाजि़ल किया गया ताकि मैं तुम्हें और जिसे (उसकी) ख़बर पहुँचे उसके ज़रिए से डराओ क्या तुम यक़ीनन यह गवाही दे सकते हो कि अल्लाह के साथ और दूसरे माबूद भी हैं (ऐ रसूल) तुम कह दो कि मै तो उसकी गवाही नहीं देता (तुम दिया करो) तुम (उन लोगों से) कहो कि वह तो बस एक ही ख़ुदा है और जिन चीज़ों को तुम (ख़ुदा का) शरीक बनाते हो (20)
मै तो उनसे बेज़र हूँ जिन लोगों को हमने किताब अता फरमाई है (यहूद व नसारा) वह तो जिस तरह अपने बाल बच्चों को पहचानते है उसी तरह उस नबी (मोहम्मद) को भी पहचानते हैं (मगर) जिन लोगों ने अपना आप नुक़सान किया वह तो (किसी तरह) इमान न लाएगें (21)
और जो शख्स़ ख़ुदा पर झूठ बोहतान बाधें या उसकी आयतों को झुठलाए उससे बढ़के ज़ालिम कौन होगा और ज़ालिमों को हरगिज़ नजात न होगी (22)
और (उस दिन को याद करो) जिस दिन हम उन सबको जमा करेंगे फिर जिन लोगों ने शिर्क किया उनसे पूछेगें कि जिनको तुम (ख़ुदा का) शरीक ख़्याल करते थे कहाँ हैं (23)
फिर उनकी कोई शरारत (बाक़ी) न रहेगी बल्कि वह तो ये कहेगें क़सम है उस ख़ुदा की जो हमारा पालने वाला है हम किसी को उसका शरीक नहीं बनाते थे (24)
(ऐ रसूल भला) देखो तो ये लोग अपने ही ऊपर आप किस तरह झूठ बोलने लगे और ये लोग (दुनिया में) जो कुछ इफ़तेरा परदाज़ी (झूठी बातें) करते थे (25)
वह सब ग़ायब हो गयी और बाज़ उनमें के ऐसे भी हैं जो तुम्हारी (बातों की) तरफ कान लगाए रहते हैं और (उनकी हठ धर्मी इस हद को पहुँची है कि गोया हमने ख़ुद उनके दिलों पर परदे डाल दिए हैं और उनके कानों में बहरापन पैदा कर दिया है कि उसे समझ न सकें और अगर वह सारी (ख़़ुदाई के) मौजिज़े भी देखे लें तब भी ईमान न लाएगें यहाँ तक (हठ धर्मी पहुची) कि जब तुम्हारे पास तुम से उलझे हुए आ निकलते हैं तो कुफ़्फ़ार (क़़ुरान लेकर) कहा बैठे है (कि भला इसमें रखा ही क्या है) ये तो अगलों की कहानियों के सिवा कुछ भी नहीं (26)
और ये लोग (दूसरों को भी) उस के (सुनने से) से रोकते हैं और ख़ुद तो अलग थलग रहते ही हैं और (इन बातों से) बस आप ही अपने को हलाक करते हैं और (अफसोस) समझते नहीं (27)
(ऐ रसूल) अगर तुम उन लोगों को उस वक़्त देखते (तो ताज्जुब करते) जब जहन्नुम (के किनारे) पर लाकर खड़े किए जाओगे तो (उसे देखकर) कहेगें ऐ काष हम (दुनिया में) फिर (दुबारा) लौटा भी दिए जाते और अपने परवरदिगार की आयतों को न झुठलाते और हम मोमिनीन से होते (मगर उनकी आरज़ू पूरी न होगी) (28)
बल्कि जो (बेइमानी) पहले से छिपाते थे आज (उसकी हक़ीक़त) उन पर खुल गयी और (हम जानते हैं कि) अगर ये लोग (दुनिया में) लौटा भी दिए जाए तो भी जिस चीज़ की मनाही की गयी है उसे करें और ज़रुर करें और इसमें शक नहीं कि ये लोग ज़रुर झूठे हैं (29) और कुफ्फार ये भी तो कहते हैं कि हमारी इस दुनिया जि़न्दगी के सिवा कुछ भी नहीं और (क़यामत वग़ैरह सब ढकोसला है) हम (मरने के बाद) भी उठाए ही न जायेंगे (30)
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