हमें चाहने वाले मित्र

24 सितंबर 2018

बेशक जिन लोगों ने झूठी तोहमत लगायी वह तुम्ही में से एक गिरोह है

बेशक जिन लोगों ने झूठी तोहमत लगायी वह तुम्ही में से एक गिरोह है तुम अपने हक़ में इस तोहमत को बड़ा न समझो बल्कि ये तुम्हारे हक़ में बेहतर है इनमें से जिस शख़्स ने जितना गुनाह समेटा वह उस (की सज़ा) को खुद भुगतेगा और उनमें से जिस शख़्स ने तोहमत का बड़ा हिस्सा लिया उसके लिए बड़ी (सख़्त) सज़ा होगी (11)
और जब तुम लोगो ने उसको सुना था तो उसी वक़्त इमानदार मर्दों और इमानदार औरतों ने अपने लोगों पर भलाई का गुमान क्यो न किया और ये क्यों न बोल उठे कि ये तो खुला हुआ बोहतान है (12)
और जिन लोगों ने तोहमत लगायी थी अपने दावे के सुबूत में चार गवाह क्यों न पेश किए फिर जब इन लोगों ने गवाह न पेश किये तो ख़ुदा के नज़दीक यही लोग झूठे हैं (13)
और अगर तुम लोगों पर दुनिया और आखि़रत में ख़ुदा का फज़ल (व करम) और उसकी रहमत न होती तो जिस बात का तुम लोगों ने चर्चा किया था उस की वजह से तुम पर कोई बड़ा (सख़्त) अज़ाब आ पहुँचता (14)
कि तुम अपनी ज़बानों से इसको एक दूसरे से बयान करने लगे और अपने मुँह से ऐसी बात कहते थे जिसका तुम्हें इल्म व यक़ीन न था (और लुत्फ़ ये है कि) तुमने इसको एक आसान बात समझी थी हालांकि वह ख़ुदा के नज़दीक बड़ी सख़्त बात थी (15)
और जब तुमने ऐसी बात सुनी थी तो तुमने लोगों से क्यों न कह दिया कि हमको ऐसी बात मुँह से निकालनी मुनासिब नहीं सुबहान अल्लाह ये बड़ा भारी बोहतान है (16)
ख़ुदा तुम्हारी नसीहत करता है कि अगर तुम सच्चे इमानदार हो तो ख़बरदार फिर कभी ऐसा न करना (17)
और ख़ुदा तुम से (अपने) एहकाम साफ साफ बयान करता है और ख़ुदा तो बड़ा वाकि़फकार हकीम है (18)
जो लोग ये चाहते हैं कि इमानदारों में बदकारी का चर्चा फैल जाए बेशक उनके लिए दुनिया और आखि़रत में दर्दनाक अज़ाब है और ख़ुदा (असल हाल को) ख़ूब जानता है और तुम लोग नहीं जानते हो (19)
और अगर ये बात न होती कि तुम पर ख़ुदा का फ़ज़ल (व करम) और उसकी रहमत से और ये कि ख़ुदा (अपने बन्दों पर) बड़ा शफीक़ मेहरबान है (20)

23 सितंबर 2018

बेशक ख़ुदा बड़ा बख़्शने वाला मेहरबान है

खुदा के नाम से शुरु करता हूँ जो बड़ा मेहरबान रहम वाला है
(ये) एक सूरा है जिसे हमने नाजि़ल किया है और उस (के एहकाम) को फर्ज़ कर दिया है और इसमें हमने वाज़ेए व रौशन आयतें नाजि़ल की हैं ताकि तुम (ग़ौर करके) नसीहत हासिल करो (1)
ज़िना करने वाली औरत और जि़ना करने वाले मर्द इन दोनों में से हर एक को सौ (सौ) कोडे़ मारो और अगर तुम ख़ुदा और रोजे़ आखि़रत पर इमान रखते हो तो हुक्मे खुदा के नाफिज़ करने में तुमको उनके बारे में किसी तरह की तरस का लिहाज़ न होने पाए और उन दोनों की सज़ा के वक़्त मोमिन की एक जमाअत को मौजूद रहना चाहिए (2)
जि़ना करने वाला मर्द तो जि़ना करने वाली औरत या मुशरिका से निकाह करेगा और जि़ना करने वाली औरत भी बस जि़ना करने वाले ही मर्द या मुशरिक से निकाह करेगी और सच्चे इमानदारों पर तो इस कि़स्म के ताल्लुक़ात हराम हैं (3)
और जो लोग पाक दामन औरतों पर (जि़ना की) तोहमत लगाएँ फिर (अपने दावे पर) चार गवाह पेश न करें तो उन्हें अस्सी कोड़ें मारो और फिर (आइन्दा) कभी उनकी गवाही कु़बूल न करो और (याद रखो कि) ये लोग ख़ुद बदकार हैं (4)
मगर हाँ जिन लोगों ने उसके बाद तौबा कर ली और अपनी इसलाह की तो बेशक ख़ुदा बड़ा बख़्शने वाला मेहरबान है (5)
और जो लोग अपनी बीवियों पर (जि़ना) का ऐब लगाएँ और (इसके सुबूत में) अपने सिवा उनका कोई गवाह न हो तो ऐसे लोगों में से एक की गवाही चार मरतबा इस तरह होगी कि वह (हर मरतबा) ख़ुदा की क़सम खाकर बयान करे कि वह (अपने दावे में) ज़रूर सच्चा है (6)
और पाँचवी (मरतबा) यूँ (कहेगा) अगर वह झूट बोलता हो तो उस पर ख़ुदा की लानत (7)
और औरत (के सर से) इस तरह सज़ा टल सकती है कि वह चार मरतबा ख़ुदा की क़सम खा कर बयान कर दे कि ये शख़्स (उसका शौहर अपने दावे में) ज़रुर झूठा है (8)
और पाँचवी मरतबा यूँ करेगी कि अगर ये शख़्स (अपने दावे में) सच्चा हो तो मुझ पर खु़दा का ग़ज़ब पड़े (9)
और अगर तुम पर ख़ुदा का फज़ल (व करम) और उसकी मेहरबानी न होती तो देखते कि तोहमत लगाने वालों का क्या हाल होता और इसमें शक ही नहीं कि ख़ुदा बड़ा तौबा क़ुबूल करने वाला हकीम है (10)

21 सितंबर 2018

तुम ज़मीन पर कितने बरस रहे

(जहाँ) क़ब्रों से उठाए जाएँगें (रहना होगा) फिर जिस वक़्त सूर फूँका जाएगा तो उस दिन न लोगों में क़राबत दारियाँ रहेगी और न एक दूसरे की बात पूछेंगे (101)
फिर जिन (के नेकियों) के पल्लें भारी होगें तो यही लोग कामयाब होंगे (102)
और जिन (के नेकियों) के पल्लें हल्के होंगें तो यही लोग है जिन्होंने अपना नुक़सान किया कि हमेशा जहन्नुम में रहेंगे (103)
और (उनकी ये हालत होगी कि) जहन्नुम की आग उनके मुँह को झुलसा देगी और लोग मुँह बनाए हुए होगें (104)
(उस वक़्त हम पूछेंगें) क्या तुम्हारे सामने मेरी आयतें न पढ़ी गयीं थीं (ज़रुर पढ़ी गयी थीं) तो तुम उन्हें झुठलाया करते थे (105)
वह जवाब देगें ऐ हमारे परवरदिगार हमको हमारी कम्बख़्ती ने आज़माया और हम गुमराह लोग थे (106)
परवरदिगार हमको (अबकी दफ़ा ) किसी तरह इस जहन्नुम से निकाल दे फिर अगर दोबारा हम ऐसा करें तो अलबत्ता हम कुसूरवार हैं (107)
ख़ुदा फरमाएगा दूर हो इसी में (तुम को रहना होगा) और (बस) मुझ से बात न करो (108)
मेरे बन्दों में से एक गिरोह ऐसा भी था जो (बराबर) ये दुआ करता था कि ऐ हमारे पालने वाले हम इमान लाए तो तू हमको बक्श दे और हम पर रहम कर तू तो तमाम रहम करने वालों से बेहतर है (109)
तो तुम लोगों ने उन्हें मसख़रा बना लिया-यहाँ तक कि (गोया) उन लोगों ने तुम से मेरी याद भुला दी और तुम उन पर (बराबर) हँसते रहे (110)
मैने आज उनको उनके सब्र का अच्छा बदला दिया कि यही लोग अपनी(क़ातिर ख़्वाह) मुराद को पहुँचने वाले हैं (111)
(फिर उनसे) ख़ुदा पूछेगा कि (आखि़र) तुम ज़मीन पर कितने बरस रहे (112)
वह कहेंगें (बरस कैसा) हम तो बस पूरा एक दिन रहे या एक दिन से भी कम (113)
तो तुम शुमार करने वालों से पूछ लो ख़ुदा फरमाएगा बेशक तुम (ज़मीन में) बहुत ही कम ठहरे काश तुम (इतनी बात भी दुनिया में) समझे होते (114)
तो क्या तुम ये ख़्याल करते हो कि हमने तुमको (यूँ ही) बेकार पैदा किया और ये कि तुम हमारे हुज़ूर में लौटा कर न लाए जाओगे (115)
तो ख़ुदा जो सच्चा बादशाह (हर चीज़ से) बरतर व आला है उसके सिवा कोई माबूद नहीं (वहीं) अर्शे बुज़ुर्ग का मालिक है (116)
और जो शख़्स ख़ुदा के साथ दूसरे माबूद की भी परसतिश करेगा उसके पास इस शिर्क की कोई दलील तो है नहीं तो बस उसका हिसाब (किताब) उसके परवरदिगार ही के पास होगा (मगर याद रहे कि कुफ़्फ़ार हरगिज़ फलाह पाने वाले नहीं) (117)
और (ऐ रसूल) तुम कह दो परवरदिगार तू (मेरी उम्मत को) बक्श दे और तरस खा और तू तो सब रहम करने वालों से बेहतर है (118)

19 सितंबर 2018

भरतपुर ज़िले के कामां क्षेत्र में न्यायिक अधिकारीयों के साथ मारपीट

आदरणीय विधि विभाग से जुड़े ,पीड़ित ,शोषित लोगो को तत्काल न्याय दिलाने के लिए नियुक्त आदरणीय भाइयों ,,भरतपुर ज़िले के कामां क्षेत्र में न्यायिक अधिकारीयों के साथ मारपीट ,,अभद्रता ,फिर पुलिस अधिकारी की उपेक्षित कार्यवाही ,शर्मनाक और अफसोसनाक घटना है ,खेर पुलिस एक्शन में आयी ,अधिकारी एक्शन में आये ,अख़बारों में खबर ,छपी ,कार्यवाही शुरू हो ,गयी और थाना जुरहरा के सुखवीर सिंह को पुलिस अधीक्षक ने फिलहाल लाइन हाज़िर कर दिया ,अपराधियों का क्या होगा ,,,किन धाराओं में कार्यवाही होगी ,यह भी तय होना है ,लेकिन मेरी एक इल्तिजा ,एक सवाल ,,देश के सभी वकीलों ,न्यायिक अधिकारीयों ,सिस्टम में बैठे वरिष्ठ अधिकारीयों ,सुप्रीमकोर्ट के न्यायविदों से भी है ,,एक बेरियर ,,एक रोक ,,किसी फरियादी द्वारा शिकायत दर्ज कराने पर क्यों लगाई जाती है ,,,एक फरियादी अपनी शिकायत लेकर थाने पहुंचे ,,ललिता कुमारी में दिए गए उच्च न्यायलय के निर्देश के बाद भी कोई एफ आई आर दर्ज नहीं होती ,फिर अगर वोह पुलिस अधीक्षक के पास जाए तो कार्यवाही नहीं ,अगर वोह अदालत जाए तो पहले सो फोरम्लीटीज़ ,,थानाधिकारी के पास गए क्या ,फिर एस पी के पास गए क्या ,,ऐसा सब कर भी लिया तो बस वकील परिवाद पेश करे तो पुलिस अधिकारी अगर दोषी हो तो 197 सी आर पी सी की स्वीकृति नहीं है ,सरकार की स्वीकृति चाहिए ,परिवाद थाने जांच के लिए नहीं भेजेंगे ,अदालत में ही बयांन होंगे ,,पहले परिवादी को परीक्षित कराओ ,फिर गवाहान को लगातार बुलाओ ,नहीं तो जो परिवाद थाने 156 (3 ) सी आर पी सी में नहीं भेजा गया फिर उसी परिवाद को थाने में 202 सी आर पी सी के तहत जांच के लिए भेजा जाएगा ,अरे जनाब मुक़दमा दर्ज ,होगा ,नतीजा जो भी होगा सामने आएगा ,,लेकिन क्या गरिजियन होने के बाद ,परिवादी को ऐसा भटकाना चाहिए ,पुलिस अधिकारी या सरकारी अधिकारी या फिर अपराधी को ऐसे खुले में घूमने की इजाज़त मिलना चाहिए ,,अंग्रेज़ों ने जो सी आर पी सी बनाई ,उसमे कभी परिवादी को इंसाफ देने से नहीं ,रोका ,संविधान ने परिवादी को अधिकार दिए ,क़ानून बना ,अधिकारी ने शिकायत दर्ज नहीं की तो सिर्फ 166 आई पी सी विधि की अवज्ञा का तुच्छ ,अपराध ,वोह भी दर्ज होना मुश्किल ,,फिर नए नए व्याख्यात्मक आदेश ,,अधिसंस्थ न्यायालयों के लिए मुक़दमा दर्ज करने के पहले बेरियर बन गए ,,क्या ऐसा पुलिस अधिकारी जिसने ,न्यायिक अधिकारीयों के साथ अभद्रता होते ,देखी कोई एक्शन नहीं लिया ,विधि की अवज्ञा का अपराधी नहीं ,उसके खिलाफ फौजदारी मुक़दमा दर्ज नहीं होना चाहिए ,,,आखिर एक चोर ,बेईमान पुलिस अधिकारी या कोई भी अधिकारी हो उसे उसके कार्य संचालन में भ्रष्ट आचरण के बाद भी मुक़दमा नहीं चलाने जैसा प्रोटेक्शन क्यों ,,अदालत कोई ही यह देखने का हक़ क्यों नहीं ,सरकार की मंज़ूरी की मजबूरी क्यों ,फिर सरकार अपने गुलाम ,इशारों पर अपराध करने वाले ,सरकार को दो नंबर की कमाई देने वाले ऐसे अधिकारी कर्मचारियों के खिलाफ स्वीकृति क्यों देगी ,,समय कोई कोई पाबंदी नहीं ,स्वीकृति नहीं दी तो ज़िम्मेदार अधिकारी के खिलाफ कार्यवाही का कोई क़ानून नहीं ,कोई ज़िम्मेदारी तय नहीं ,तो जनाब हज़ारो हज़ार परिवादियों की पीड़ा सोचना ज़रूर ,जो परिवादी पीटते भी है ,ज़ुल्म का शिकार भी होते है ,आधे से ज़्यादा तो ,शिकायत करने की हिम्मत ही नहीं करते ,जो हिम्मत करते है ,उनका अब न्याय क्षेत्र में क्या हश्र होने लगा है ,उन्हें प्रताड़ित करने वालों को अव्यवहारिक कवच पहनाकर किस तरह से सुरक्षित किया गया है देश जानता है ,,आज इंटरनेट का युग है ,,एक परिवादी थानाधिकारी को इ मेल करे ,व्हाट्स एप्प करे तो संज्ञेय अपराध होने पर मुक़दमा दर्ज होना चाहिए ,,नहीं तो ऐसे टालमटोल अधिकारी को नौकरी पर रहने का अधिकार नहीं ,शिकायत झूंठी निकले तो क़ानून में 182 आई पी सी सहित दूसरे अपराधों में ऐसे शख्स को सजा देने का प्रावधान है न ,लेकिन क़ानून तोड़ने वाला कोई भी हो ,आम आदमी ,राजा ,फ़क़ीर ,पुलिस अधिकारी सभी के खिलाफ त्वरित कार्यवाही होना चाहिए ,ज़रा कल्पना कीजिये जो घटना ,कामा, भरतपुर में आदरणीय अधिकारीयों के साथ गुज़री है ,उनकी अदालत में ही अगर ऐसी घटना का पीड़ित ,एक परिवाद लेकर पहुंचता तो उसे किस किस तरह की ,परेशानियों ,पूंछतांछ से गुज़रना पढ़ता ,फिर अगर थानाधिकारी द्वारा विधि की अवज्ञा का प्रश्न भी आ जाता तो क्या नतीजा निकलता ,इस पर विचार कर हमे सभी को ,जो क़ानून के मुहाफ़िज़ है ,,खुद को बदलना होगा ,अपने अंतर्मन से सवालात करना होंगे ,,करेंगे न हम ऐसा ,इन्साफ देने के तरीके में जो बाधाएं सो कोल्ड तरीके से बना दी गयी है ,उन्हें रोकेंगे न हम सभी नीचे से ऊपर तक के कढ़ी से कढ़ी जुड़े लोग ,,देखते है इस घटना का सबक़ एक ब्रेक के बाद ,,,अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

मौतों पर मुआवज़ा

सुप्रीम कोर्ट ने सड़को पर हो रहे गड्डो के कारण होने वाली दुर्घटनाओं से होने वाली मौतों पर मुआवज़ा देने के निर्देशों के मामले में गठित समिति को एक नवम्बर तक का समय दिया है ,,,मंगलवार को सुप्रीमकोर्ट में सुनवाई के दौरान सुप्रीमकोर्ट ने कहा के रिपोर्ट के अनुसार ,,रोज़ सड़को पर गड्डो के कारण हो रही मोतो की संख्या ,आतंकवाद व् अन्य करने से हो रही मौतों से कहीं ज़्यादा ,,सरकारी सड़क विभाग के आंकड़े के अनुसार वर्ष 2017 में गड्डो से होने वाली दुर्घटना से देश भर में एक साल में 3500 से अधिक मौतें हुई है ,सुप्रीमकोर्ट ने इसे गंभीरता से लेते हुए ,,सरकार के विभागों द्वारा सरकार के अधिकृत विभाग द्वारा दिए गए इस आंकड़े पर अविश्वास करने पर आश्चर्य व्यक्त करते हुए कहा ,,इस मामले में गड्डो से होने वाली मृत्यु पर क्षतिपूर्ति राशि देने को लेकर एक नंवबर तक अपनी रिपोर्ट पेश करे ,,,अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान
Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...