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17 जुलाई 2019

(उस वक़्त को याद करो) जिस दिन ख़ुदा अपने पैग़म्बरों को जमा करके पूछेगा

ऐ ईमान वालों ऐसी चीज़ों के बारे में (रसूल से) न पूछा करो कि अगर तुमको मालूम हो जाए तो तुम्हें बुरी मालूम हो और अगर उनके बारे में कु़रान नाजि़ल होने के वक़्त पूछ बैठोगे तो तुम पर ज़ाहिर कर दी जाएगी (मगर तुमको बुरा लगेगा जो सवालात तुम कर चुके) ख़ुदा ने उनसे दरगुज़र की और ख़ुदा बड़ा बख़्शने वाला बुर्दबार है (101)
तुमसे पहले भी लोगों ने इस किस्म की बातें (अपने वक़्त के पैग़म्बरों से) पूछी थीं (102)
फिर (जब बरदाश्त न हो सका तो) उसके मुन्किर हो गए ख़ुदा ने न तो कोई बहीरा (कान फटी ऊँटनी) मुक़र्रर किया है न सायवा (साँढ़) न वसीला (जुडवा बच्चे) न हाम (बुढ़ा साँढ़़) मुक़र्रर किया है मगर कुफ़्फ़ार ख़ुदा पर ख़्वाह मा ख़्वाह झूठ (मूठ) बोहतान बाँधते हैं और उनमें के अक्सर नहीं समझते (103)
और जब उनसे कहा जाता है कि जो (क़ुरान) ख़ुदा ने नाजि़ल फरमाया है उसकी तरफ और रसूल की आओ (और जो कुछ कहे उसे मानों तो कहते हैं कि हमने जिस (रंग) में अपने बाप दादा को पाया वही हमारे लिए काफी है क्या (ये लोग लकीर के फकीर ही रहेंगे) अगरचे उनके बाप दादा न कुछ जानते ही हों न हिदायत ही पायी हो (104)
ऐ ईमान वालों तुम अपनी ख़बर लो जब तुम राहे रास्त पर हो तो कोई गुमराह हुआ करे तुम्हें नुक़सान नहीं पहुँचा सकता तुम सबके सबको ख़ुदा ही की तरफ लौट कर जाना है तब (उस वक़्त नेक व बद) जो कुछ (दुनिया में) करते थे तुम्हें बता देगा (105)
ऐ ईमान वालों जब तुममें से किसी (के सर) पर मौत खड़ी हो तो वसीयत के वक़्त तुम (मोमिन) में से दो आदिलों की गवाही होनी ज़रुरी है और जब तुम इत्तेफाक़न कहीं का सफर करो और (सफर ही में) तुमको मौत की मुसीबत का सामना हो तो (भी) दो गवाह ग़ैर (मोमिन) सही (और) अगर तुम्हें हक़ हो तो उन दोनों को नमाज़ के बाद रोक लो फिर वह दोनों ख़ुदा की क़सम खाएँ कि हम इस (गवाही) के (ऐवज़ कुछ दाम नहीं लेंगे अगरचे हम जिसकी गवाही देते हैं हमारा अज़ीज़ ही क्यों न) हो और हम खुदा लगती गवाही न छुपाएँगे अगर ऐसा करें तो हम बेशक गुनाहगार हैं (106)
अगर इस पर मालूम हो जाए कि वह दोनों (दरोग़ हलफ़ी {झूठी कसम} से) गुनाह के मुस्तहक़ हो गए तो दूसरे दो आदमी उन लोगों में से जिनका हक़ दबाया गया है और (मय्यत) के ज़्यादा क़राबतदार हैं (उनकी तरवीद में) उनकी जगह खड़े हो जाएँ फिर दो नए गवाह ख़ुदा की क़सम खाएँ कि पहले दो गवाहों की निस्बत हमारी गवाही ज़्यादा सच्ची है और हमने (हक़) नहीं छुपाया और अगर ऐसा किया हो तो उस वक़्त बेशक हम ज़ालिम हैं (107) ये ज़्यादा क़रीन क़यास है कि इस तरह पर (आख़ेरत के डर से) ठीक ठीक गवाही दें या (दुनिया की रूसवाई का) अन्देषा हो कि कहीं हमारी क़समें दूसरे फरीक़ की क़समों के बाद रद न कर दी जाएँ मुसलमानों ख़ुदा से डरो और (जी लगा कर) सुन लो और ख़ुदा बदचलन लोगों को मंजि़ले मक़सूद तक नहीं पहुँचाता (108)
(उस वक़्त को याद करो) जिस दिन ख़ुदा अपने पैग़म्बरों को जमा करके पूछेगा कि (तुम्हारी उममत की तरफ से तबलीग़े एहकाम का) क्या जवाब दिया गया तो अर्ज़ करेगें कि हम तो (चन्द ज़ाहिरी बातों के सिवा) कुछ नहीं जानते तू तो खुद बड़ा ग़ैब वा है (109)
(वह वक़्त याद करो) जब ख़ुदा फरमाएगा कि ये मरियम के बेटे ईसा हमने जो एहसानात तुम पर और तुम्हारी माँ पर किये उन्हे याद करो जब हमने रूहुलक़ुदूस (जिबरील) से तुम्हारी ताईद की कि तुम झूले में (पड़े पड़े) और अधेड़ होकर (यक सा बातें) करने लगे और जब हमने तुम्हें लिखना और अक़ल व दानाई की बातें और (तौरेत व इन्जील (ये सब चीजे़) सिखायी और जब तुम मेरे हुक्म से मिट्टी से चिडि़या की मूरत बनाते फिर उस पर कुछ दम कर देते तो वह मेरे हुक्म से (सचमुच) चिडि़या बन जाती थी और मेरे हुक्म से मादरज़ाद {पैदायशी} अॅधे और कोढ़ी को अच्छा कर देते थे और जब तुम मेरे हुक्म से मुर्दों को जि़न्दा (करके क़ब्रों से) निकाल खड़ा करते थे और जिस वक़्त तुम बनी इसराईल के पास मौजिज़े लेकर आए और उस वक़्त मैने उनको तुम (पर दस्त दराज़ी करने) से रोका तो उनमें से बाज़ कुफ़्फ़ार कहने लगे ये तो बस खुला हुआ जादू है (110)

16 जुलाई 2019

तुमसे पहले भी लोगों ने इस किस्म की बातें (अपने वक़्त के पैग़म्बरों से) पूछी थीं

ऐ ईमान वालों ऐसी चीज़ों के बारे में (रसूल से) न पूछा करो कि अगर तुमको मालूम हो जाए तो तुम्हें बुरी मालूम हो और अगर उनके बारे में कु़रान नाजि़ल होने के वक़्त पूछ बैठोगे तो तुम पर ज़ाहिर कर दी जाएगी (मगर तुमको बुरा लगेगा जो सवालात तुम कर चुके) ख़ुदा ने उनसे दरगुज़र की और ख़ुदा बड़ा बख़्शने वाला बुर्दबार है (101)
तुमसे पहले भी लोगों ने इस किस्म की बातें (अपने वक़्त के पैग़म्बरों से) पूछी थीं (102)
फिर (जब बरदाश्त न हो सका तो) उसके मुन्किर हो गए ख़ुदा ने न तो कोई बहीरा (कान फटी ऊँटनी) मुक़र्रर किया है न सायवा (साँढ़) न वसीला (जुडवा बच्चे) न हाम (बुढ़ा साँढ़़) मुक़र्रर किया है मगर कुफ़्फ़ार ख़ुदा पर ख़्वाह मा ख़्वाह झूठ (मूठ) बोहतान बाँधते हैं और उनमें के अक्सर नहीं समझते (103)
और जब उनसे कहा जाता है कि जो (क़ुरान) ख़ुदा ने नाजि़ल फरमाया है उसकी तरफ और रसूल की आओ (और जो कुछ कहे उसे मानों तो कहते हैं कि हमने जिस (रंग) में अपने बाप दादा को पाया वही हमारे लिए काफी है क्या (ये लोग लकीर के फकीर ही रहेंगे) अगरचे उनके बाप दादा न कुछ जानते ही हों न हिदायत ही पायी हो (104)
ऐ ईमान वालों तुम अपनी ख़बर लो जब तुम राहे रास्त पर हो तो कोई गुमराह हुआ करे तुम्हें नुक़सान नहीं पहुँचा सकता तुम सबके सबको ख़ुदा ही की तरफ लौट कर जाना है तब (उस वक़्त नेक व बद) जो कुछ (दुनिया में) करते थे तुम्हें बता देगा (105)
ऐ ईमान वालों जब तुममें से किसी (के सर) पर मौत खड़ी हो तो वसीयत के वक़्त तुम (मोमिन) में से दो आदिलों की गवाही होनी ज़रुरी है और जब तुम इत्तेफाक़न कहीं का सफर करो और (सफर ही में) तुमको मौत की मुसीबत का सामना हो तो (भी) दो गवाह ग़ैर (मोमिन) सही (और) अगर तुम्हें हक़ हो तो उन दोनों को नमाज़ के बाद रोक लो फिर वह दोनों ख़ुदा की क़सम खाएँ कि हम इस (गवाही) के (ऐवज़ कुछ दाम नहीं लेंगे अगरचे हम जिसकी गवाही देते हैं हमारा अज़ीज़ ही क्यों न) हो और हम खुदा लगती गवाही न छुपाएँगे अगर ऐसा करें तो हम बेशक गुनाहगार हैं (106)
अगर इस पर मालूम हो जाए कि वह दोनों (दरोग़ हलफ़ी {झूठी कसम} से) गुनाह के मुस्तहक़ हो गए तो दूसरे दो आदमी उन लोगों में से जिनका हक़ दबाया गया है और (मय्यत) के ज़्यादा क़राबतदार हैं (उनकी तरवीद में) उनकी जगह खड़े हो जाएँ फिर दो नए गवाह ख़ुदा की क़सम खाएँ कि पहले दो गवाहों की निस्बत हमारी गवाही ज़्यादा सच्ची है और हमने (हक़) नहीं छुपाया और अगर ऐसा किया हो तो उस वक़्त बेशक हम ज़ालिम हैं (107) ये ज़्यादा क़रीन क़यास है कि इस तरह पर (आख़ेरत के डर से) ठीक ठीक गवाही दें या (दुनिया की रूसवाई का) अन्देषा हो कि कहीं हमारी क़समें दूसरे फरीक़ की क़समों के बाद रद न कर दी जाएँ मुसलमानों ख़ुदा से डरो और (जी लगा कर) सुन लो और ख़ुदा बदचलन लोगों को मंजि़ले मक़सूद तक नहीं पहुँचाता (108)
(उस वक़्त को याद करो) जिस दिन ख़ुदा अपने पैग़म्बरों को जमा करके पूछेगा कि (तुम्हारी उममत की तरफ से तबलीग़े एहकाम का) क्या जवाब दिया गया तो अर्ज़ करेगें कि हम तो (चन्द ज़ाहिरी बातों के सिवा) कुछ नहीं जानते तू तो खुद बड़ा ग़ैब वा है (109)
(वह वक़्त याद करो) जब ख़ुदा फरमाएगा कि ये मरियम के बेटे ईसा हमने जो एहसानात तुम पर और तुम्हारी माँ पर किये उन्हे याद करो जब हमने रूहुलक़ुदूस (जिबरील) से तुम्हारी ताईद की कि तुम झूले में (पड़े पड़े) और अधेड़ होकर (यक सा बातें) करने लगे और जब हमने तुम्हें लिखना और अक़ल व दानाई की बातें और (तौरेत व इन्जील (ये सब चीजे़) सिखायी और जब तुम मेरे हुक्म से मिट्टी से चिडि़या की मूरत बनाते फिर उस पर कुछ दम कर देते तो वह मेरे हुक्म से (सचमुच) चिडि़या बन जाती थी और मेरे हुक्म से मादरज़ाद {पैदायशी} अॅधे और कोढ़ी को अच्छा कर देते थे और जब तुम मेरे हुक्म से मुर्दों को जि़न्दा (करके क़ब्रों से) निकाल खड़ा करते थे और जिस वक़्त तुम बनी इसराईल के पास मौजिज़े लेकर आए और उस वक़्त मैने उनको तुम (पर दस्त दराज़ी करने) से रोका तो उनमें से बाज़ कुफ़्फ़ार कहने लगे ये तो बस खुला हुआ जादू है (110)

15 जुलाई 2019

इंसानियत से कभी मत गिरना

यह मंदिर
यह मस्जिद
यह मदरसे
यह पाठशालाये
यह गुरुकुल
यह इबादत घर
यह गुरुद्वारे
यह चर्च
सभी तो
मोहब्बत सिखाते है
ईमानदारी से
प्यार से
मोहब्बत से
जीना सिखाते है
फिर तुम क्यों
इन इबादत घरों की इबादत से
इन पाठशालालों
इन मदरसों से
पढ़कर हैवान हो रहे
इंसान होकर भी
इंसान को काट रहे हो
हो सके तो
अपना धर्म
अपना मज़हब
एक बार फिर पढ़ लो
या तो तुम
हिन्दू हो जाओ
या तो मुस्लिम हो जाओ
जो चाहो वोह तुम हो जाओ
बस ध्यान रखना
इंसानियत से कभी मत गिरना
तुम मानोगे न
तुम बदलोगे न
तुम मोहब्बत के
तुम भाईचारा सद्भावना के
मॉडल बनोगे ना बनोगे ना ,,अख्तर

ऐ ईमानदार जो पाक चीज़े ख़ुदा ने तुम्हारे वास्ते हलाल कर दी हैं उनको अपने ऊपर हराम न करो

और अगर ये लोग ख़ुदा और रसूल पर और जो कुछ उनपर नाजि़ल किया गया है इमान रखते हैं तो हरगिज़ (उनको अपना) दोस्त न बनाते मगर उनमें के बहुतेरे तो बदचलन हैं (81)
(ऐ रसूल) ईमान लाने वालों का दुशमन सबसे बढ़के यहूदियों और मुशरिकों को पाओगे और ईमानदारों का दोस्ती में सबसे बढ़के क़रीब उन लोगों को पाओगे जो अपने को नसारा कहते हैं क्योंकि इन (नसारा) में से यक़ीनी बहुत से आमिल और आबिद हैं और इस सबब से (भी) कि ये लोग हरगिज़ शेख़ी नहीं करते (82)
और तू देखता है कि जब यह लोग (इस कु़रान) को सुनते हैं जो हमारे रसूल पर नाजि़ल किया गया है तो उनकी आँखों से बेसाख़्ता (छलक कर) आँसू जारी हो जातें है क्योंकि उन्होंने (अम्र) हक़ को पहचान लिया है (और) अर्ज़ करते हैं कि ऐ मेरे पालने वाले हम तो ईमान ला चुके तो (रसूल की) तसदीक़ करने वालों के साथ हमें भी लिख रख (83)
और हमको क्या हो गया है कि हम ख़ुदा और जो हक़ बात हमारे पास आ चुकी है उस पर तो ईमान न लाएँ और (फिर) ख़ुदा से उम्मीद रखें कि वह अपने नेक बन्दों के साथ हमें (बेहिष्त में) पहुँचा ही देगा (84)
तो ख़ुदा ने उन्हें उनके (सदक़ दिल से) अर्ज़ करने के सिले में उन्हें वह (हरे भरे) बाग़ात अता फरमाए जिनके (दरख़्तों के) नीचे नहरें जारी हैं (और) वह उसमें हमेशा रहेंगे और (सदक़ दिल से) नेकी करने वालों का यही ऐवज़ है (85)
और जिन लोगों ने कुफ्र एख़्तेयार किया और हमारी आयतों को झुठलाया यही लोग जहन्नुमी हैं (86)
ऐ ईमानदार जो पाक चीज़े ख़ुदा ने तुम्हारे वास्ते हलाल कर दी हैं उनको अपने ऊपर हराम न करो और हद से न बढ़ो क्यों कि ख़ुदा हद से बढ़ जाने वालों को हरगिज़ दोस्त नहीं रखता (87)
और जो हलाल साफ सुथरी चीज़ें ख़ुदा ने तुम्हें दी हैं उनको (शौक से) खाओ और जिस ख़ुदा पर तुम ईमान लाए हो उससे डरते रहो (88)
ख़ुदा तुम्हारे बेकार (बेकार) क़समों (के खाने) पर तो ख़ैर गिरफ्तार न करेगा मगर बाक़सद {सच्ची} पक्की क़सम खाने और उसके खि़लाफ करने पर तो ज़रुर तुम्हारी ले दे करेगा (लो सुनो) उसका जुर्माना जैसा तुम ख़ुद अपने एहलोअयाल को खिलाते हो उसी कि़स्म का औसत दर्जे का दस मोहताजों को खाना खिलाना या उनको कपड़े पहनाना या एक गु़लाम आज़ाद करना है फिर जिससे यह सब न हो सके तो मैं तीन दिन के रोज़े (रखना) ये (तो) तुम्हारी क़समों का जुर्माना है जब तुम क़सम खाओ (और पूरी न करो) और अपनी क़समों (के पूरा न करने) का ख़्याल रखो ख़ुदा अपने एहकाम को तुम्हारे वास्ते यूँ साफ़ साफ़ बयान करता है ताकि तुम शुक्र करो (89)
ऐ ईमानदारों शराब, जुआ और बुत और पाँसे तो बस नापाक (बुरे) शैतानी काम हैं तो तुम लोग इससे बचे रहो ताकि तुम फलाह पाओ (90)

14 जुलाई 2019

तुम मुट्ठी भर लोग ,जो विदेशी ताक़तों के इशारे पर ,,भारत देश में अराजकता फैलाकर ,यहां के पर्यटन ,व्यापार उधोग को नुकसान पहुंचाकर भारत की विकास दर को कम रखना चाहते हो

तुम मुट्ठी भर लोग ,जो विदेशी ताक़तों के इशारे पर ,,भारत देश में अराजकता फैलाकर ,यहां के पर्यटन ,व्यापार उधोग को नुकसान पहुंचाकर भारत की विकास दर को कम रखना चाहते हो ,अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारत को बदनाम करना चाहते हो ,सुन लो ,जिस दिन देश के यह सो रहे सवा सो करोड़ लोग जाग गए ना उस दिन यही लोग ,तुम्हे सड़को पर दोढा दोढा कर मारेंगे ,, इसलिए कहते है प्लीज़ सुधर जाओ ,,बदल लो खुद को ,एक दूसरे के दुःख दर्द में काम आना शुरू करो ,कुछ वेतन पाकर देश के लिए नफरत की सौदेबाज़ी मत करो ,नफरतबाज़ी के टिप्पणीकार ,प्रेरक मत बनो ,,देश जानता है ,देश में कुछ मुट्ठीभर लोग आज भी कंस ,,,,रावण ,,कौरव ,फिरओन ,,यज़ीद ,,जैसे ज़ालिमों अधर्मियों के वंशज मौजूद है , जिनका काम देश में अराजकता सिर्फ अराजकता फैलाना है ,देश उनके लिए कुछ नहीं ,देश की सुख शान्ति ,,देश का क़ानून ,देश का संविधान इनके लिए कुछ नहीं ,ऐसे लोगों को कुछ कुर्सी के लालची लोग भी पनाह देकर देश के साथ गद्दारी कर रहे है ,,,,महाभारत में नीतियों को त्यागकर जिस तरह से ज़ालिमों ने अकेले अभिनमन्यु को निहत्था होने पर भी बेरहमी से क़त्ल कर दिया था ,जिस तरह यज़ीद ने निहत्थे इंसाफ के अलम्बरदार लोगों को बेरहमी से क़त्ल किया था ,, कंस ,रावण ,फिरओन ,, हिरणाकश्यप ,,यज़ीद जैसे , ज़ालिमों की तर्ज़ पर सभी नीतिया त्याग कर नामर्द ,कायरों की तरह से यह हमले इस देश में विदेशी ताक़तों के इशारे पर भारत के अंतर्राष्ट्रीय व्यापार ,ख्याति को नुकसान पहुंचाने के लिए योजनाबद्ध तरीके से किये जा रहे है ,, कुछ लोग मीडिया में ,सोशल मीडिया में थोड़े से वेतन के लिए नफरत फैला रहे है ,,कोई मंदिर की पोस्टों को बनाकर भेजता है ,तो कोई मस्जिद की पोस्टों को बनाकर भेजता है कोई अल्लाह हो अकबर ,जय श्रीराम ,जय भीम जैसे नारों को लोकतंत्र के सबसे बढे मंदिर लोकसभा में गुंजाता है ,,देश के लिए सिर्फ कुर्सी हांसिल करने के लिए नफरत का यह माहौल ,सिर्फ ओहदे हांसिल करने के लिए हिंसा ,फसादात ,वाद विवाद ,,डर खौफ का माहौल ,,हिन्दू में से हिन्दू निकल जाए सिर्फ लड़ाकू व्यवहार ,नफरत का व्यवहार रह जाए ,मुसलमान में से मुसलमानियत निकल जाए सिर्फ नफरत ,गुस्सा ,,हिंसा रह जाए ,यह परवरिश हमारी नहीं है ,,एक हिन्दू भाई के पास हथियार बरामद होते है ,,हिन्दू भाई किसी बलात्कार ,हिंसा ,,राजद्रोह ,राष्ट्रद्रोह जासूसी जैसे अपराध में शामिल होता है ,तो मुस्लिम समाज में बैठे विदेशी एजेंटों में से कोई एक पोस्ट बनाता है ,विडिओ एडिट करता है और यह पोस्ट हम जैसे बेवक़ूफ़ ,,मुर्ख लोग सोशल मीडिया पर शेयर ,शेयर करते रहते ,,,है ,,,किसी मदरसे में हथियार बरामद ,,किसी मुस्लिम की जासूसी ,बलात्कार ,राजद्रोह में गिरफ्तारी बस हमारे यही एजेंटों में से कोई हिन्दू भाई एक पोस्ट बनाता है एडिट करता है और शुरू हो जाते है दे धनाधन ,,शेयर फिर शेयर ,किसी को भीड़ घेर कर अल्लाह हो अकबर ,किसी को भीड़ घेर कर जय श्रीराम कहलवा ले तो वोह बहादुर नहीं हो जाता ,,वोह सिर्फ सिर्फ देश के मुखालिफ अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर एक योजनाबद्ध तरीके से काम करने वाला एक विदेशी एजेंट से ज़्यादा कुछ नहीं जो ,देश को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बदनाम कर यहाँ के पर्यटन ,सहित सभी तरह के उद्योगो को नुकसान पहुंचा कर भारत की विकास दर बढ़ने से रोकने की साज़िश में शामिल होता है ,,देश में अगर मज़हब को सियासत से जोड़ने वाले ,नफरत फैलाने वाले ,मज़हबी हिंसा में शामिल होने वाले ,,,लिखकर ,बोलकर ,,नारेबाजी कर नफरत फैलाने वाले ,भीड़ को उकसाकर मज़हब के नाम पर किसी की हत्या करने हमला करने वाले ,,लोगों को नामज़द कर ,,उन्हें गिरफ्तार कर पूंछ तांछ की जाए तो यह लोग या तो कुर्सी के लालचियों के कहने पर या फिर भारत के दुश्मन विदेशी किसी ताक़त के कहने पर ऐसा करते हुए पाए जाना साबित हो जाएंगे ,,ऐसे कोई अपराधी जिनके खिलाफ ऐसे अपराधों में शामिल होने का सुबूत हो ,अगर उन्हें किसी भी तरह के छोटे बढे लोकतांत्रिक चुनाव ,,पंच ,सरपंच ,जिला परिषद ,,वार्ड पार्षद ,पालिका चेयरमेन ,विधायक ,,सांसद ,राज्य सभा ,, का चुनाव लड़ने पर रोक हो जाए ,,और लोकतंत्र प्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत मान्यता प्राप्त किसी भी पार्टी में अगर ऐसे अपराध में शामिल लोगों को पद या टिकिट दिया जाए तो ऐसे राजनीतिक दल की भी मान्यता रद्द करने का प्रावधान हो जाए ,तो वोटों के लिए नफरत फैलाकर जीतने का शॉर्टकट खत्म हो जाएगा ,नफरत खत्म नहीं होगी तो कम हो जायेगी ,क्योंकि अब तक नफरतबाज़ पदों पर जाते है ,फिर नफरतबाज़ों के मसीहा बनाकर देश में खुलेआम नफरत बांटते है ,यह देश रोज़ देखता है ,तो दोस्तों तुम में से मुझ में से हिन्दुओं में से हिंदुत्व जो निकल गया है ,मुझ में से मुसलमानियत जो निकल गयी है ,उसे फिर से अंगीकार करे ,, हिंदुस्तानी बने ,देश के बारे में सोचें ,, किसी निहत्थे ,मुस्लिम या निहत्थे हिन्दू भाई को पीटता हुआ देख उस पर ज़ुल्म होता देख ,तालियां ठोक कर बहादुरी मानकर खुश होने से बाज़ आये ,, ,किसी माँ ,,बहन, बेटी पर अत्याचार ,,छेड़छाड़ ,बलात्कार की घटना को देखकर तालियां मत बजाओ ऐसा करने वाले नामर्दों को हीरो मत बनाओ यह धर्म के भी दुश्मन है ,देश के भी दुश्मन है ,जो लोग ऐसे लोगों को उकसाते है ,नफरत की टिप्पणियां कर नफरत भड़काते ,,है ,,ऐसे लोगों के साथ मिलकर शेयर शेयर का खेल मत खेलों ऐसे लोगों के खिलाफ एक जुट हो ,जाओ ऐसे लोगों को देश में प्रचलित क़ानून के तहत मुक़दमा दर्ज करवाकर गिरफ्तार करवाओ ,यही तुम्हारा हिंदुत्व ,यही तुम्हारा मुसलमानियत ,यही तुम्हारा अल्लाह हो ,अकबर ,यही तुम्हारा जय श्रीराम ,,यही तुम्हारा ,कशी ,काबा ,मंदिर ,मस्जिद ,पूजा ,इबादत ,आख़िरत का सामान है ,यही तुम्हारा ओरिजनल हिंदुस्तान है ,यही तुम्हारा मेरा भारत महान है ,,मुझे पता है मेरे पांच नफरत बाज़ दोस्त इस पोस्ट को आधी अधूरी पढ़कर नफरत सिर्फ नफरत का मोडिफिकेशन एक वेतन भोगी कर्मचारी की तरह से टिप्पणी कर कर पल्ला झाड़ लेंगे ,एक मोहब्बत ,प्यार के पैगाम के साथ वोह कभी भी हरगिज़ हरगिज़ कोई सकारात्मक टिप्पणी नहीं कर पाए है लेकिन वेतन ,रुपया नफरत फैलाने के नाम पर कुछ नहीं होता है जनाब ,इसलिए प्लीज़ अपनी अंतरात्मा से पूँछिये वेतन भोगी नफरत एक तरफा टिप्पणीकार से बदल लीजिये कुछ को कभी कुछ देश ,सुख शान्ति ,अमन ,,सुकून ,तरक़्क़ी ,,भाईचारा ,सद्भावना ,इन्साफ के लिए भी कुछ लिख दीजिये प्लीज़ आप साथ आये तो यक़ीनन फिर से मेरा यह हिंदुस्तान ,मेरा यह भारत महान सोने की चिड़िया हो जाएगा भाईजान आइये मेरी बाहें आपके इस्तक़बाल के लिए आपके स्वागत के लिए खुली है ,आइये ,मोहब्बत निभाइये ,मोहब्बत निभाइये ,जो सच है वोह लिखिए ,जो सच है वही दिखाइए ,जो अच्छे है उन्हें गले लगाइये जो बुरे है उनके खिलाफ उन्हें सजा दिलवाने के लिए आगे क़दम बढ़ाइए फिर वोह चाहे में ,मेरा ,,भाई ,मेरी कॉम ,आप ,आपका भाई ,आपकी कॉम में से ही कोई क्यों न हो ,,,,,,अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान
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