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19 अप्रैल 2018

जिन लोगों ने हमारी आयतों को झुठलाया

फिर अगर वही चाहता तो तुम सबकी हिदायत करता (ऐ रसूल) तुम कह दो कि ( अच्छा) अपने गवाहों को लाकर हाजि़र करो जो ये गवाही दें कि ये चीज़े (जिन्हें तुम हराम मानते हो) खु़दा ही ने हराम कर दी हैं फिर अगर (बिलग़रज़) वह गवाही दे भी दे तो (ऐ रसूल) कहीं तुम उनके साथ गवाही न देना और जिन लोगों ने हमारी आयतों को झुठलाया और आखि़रत पर ईमान नहीं लाते और दूसरों को अपने परवरदिगार का हम सर बनाते है उनकी नफ़सियानी ख़्वाहिशो पर न चलना (151)
(ऐ रसूल) तुम उनसे कहो कि (बेबस) आओ जो चीज़ें ख़ुदा ने तुम पर हराम की हैं वह मैं तुम्हें पढ़ कर सुनाऊँ (वह) यह कि किसी चीज़ को ख़ुदा का षरीक़ न बनाओ और माँ बाप के साथ नेक सुलूक़ करो और मुफ़लिसी के ख़ौफ से अपनी औलाद को मार न डालना (क्योंकि) उनको और तुमको रिज़क देने वाले तो हम हैं और बदकारियों के क़रीब भी न जाओ ख़्वाह (चाहे) वह ज़ाहिर हो या पोशीदा और किसी जान वाले को जिस के क़त्ल को ख़ुदा ने हराम किया है न मार डालना मगर (किसी) हक़ के ऐवज़ में वह बातें हैं जिनका ख़ुदा ने तुम्हें हुक्म दिया है ताकि तुम लोग समझो और यतीम के माल के करीब भी न जाओ (152)
लेकिन इस तरीके पर कि (उसके हक़ में) बेहतर हो यहाँ तक कि वह अपनी जवानी की हद को पहुंच जाए और इन्साफ के साथ नाप और तौल पूरी किया करो हम किसी शख़्स को उसकी ताक़त से बढ़कर तकलीफ नहीं देते और (चाहे कुछ हो मगर) जब बात कहो तो इन्साफ़ से अगरचे वह (जिसके तुम खि़लाफ न हो) तुम्हारा अज़ीज़ ही (क्यों न) हो और ख़ुदा के एहद व पैग़ाम को पूरा करो यह वह बातें हैं जिनका ख़़ुदा ने तुम्हे हुक्म दिया है कि तुम इबरत हासिल करो और ये भी (समझ लो) कि यही मेरा सीधा रास्ता है (153)
तो उसी पर चले जाओ और दूसरे रास्ते पर न चलो कि वह तुमको ख़़ुदा के रास्ते से (भटकाकर) तितिर बितिर कर देगें यह वह बातें हैं जिनका ख़ुदा ने तुमको हक्म दिया है ताकि तुम परहेज़गार बनो (154)
फिर हमनें जो नेक़ी करें उस पर अपनी नेअमत पूरी करने के वास्ते मूसा को कि़ताब (तौरौत) अता फरमाई और उसमें हर चीज़ की तफ़सील (बयान कर दी ) थी और (लोगों के लिए अज़सरतापा(सर से पैर तक)) हिदायत व रहमत है ताकि वह लोग अपनें परवरदिगार के सामने हाजि़र होने का यक़ीन करें (155)
और ये किताब (क़ुरान) जिसको हमने (अब नाजि़ल किया है क्या है-बरक़त वाली किताब) है तो तुम लोग उसी की पैरवी करो (और ख़ुदा से) डरते रहो ताकि तुम पर रहम किया जाए (156)
(और ऐ मुशरेकीन ये किताब हमने इसलिए नाजि़ल की कि तुम कहीं) यह कह बैठो कि हमसे पहले किताब ख़ुदा तो बस सिर्फ दो ही गिरोहों (यहूद व नसारा) पर नाजि़ल हुयी थी अगरचे हम तो उनके पढ़ने (पढ़ाने) से बेखबर थे (157)
या ये कहने लगो कि अगर हम पर किताबे (ख़़ुदा नाजि़ल होती तो हम उन लोगों से कहीं बढ़कर राहे रास्त पर होते तो (देखो) अब तो यक़ीनन तुम्हारे परवरदिगार की तरफ से तुम्हारे पास एक रौषन दलील है (किताबे ख़़ुदा) और हिदायत और रहमत आ चुकी तो जो शख़्स ख़़ुदा के आयात को झुठलाए और उससे मुँह फेरे उनसे बढ़ कर ज़ालिम कौन है जो लोग हमारी आयतों से मुँह फेरते हैं हम उनके मुँह फेरने के बदले में अनक़रीब ही बुरे अज़ाब की सज़ा देगें (ऐ रसूल) क्या ये लोग सिर्फ उसके मुन्तिज़र है कि उनके पास फ़रिश्ते आएं (158)
या तुम्हारा परवरदिगार खुद (तुम्हारे पास) आये या तुम्हारे परवरदिगार की कुछ निशानियाँ आ जाएं (आखि़रकार क्योकर समझाया जाए) हालांकि जिस दिन तुम्हारे परवरदिगार की बाज़ निशानियाँ आ जाएंगी तो जो शख़्स पहले से ईमान नहीं लाया होगा या अपने मोमिन होने की हालत में कोई नेक काम नहीं किया होगा तो अब उसका ईमान लाना उसको कुछ भी मुफ़ीद न होगा - (ऐ रसूल) तुम (उनसे) कह दो कि (अच्छा यही सही) तुम (भी) इन्तिज़ार करो हम भी इन्तिज़ार करते हैं (159)
बेशक जिन लोगों ने आपने दीन में तफरक़ा डाला और कई फरीक़ बन गए थे उनसे कुछ सरोकार नहीं उनका मामला तो सिर्फ ख़ुदा के हवाले है फिर जो कुछ वह दुनिया में नेक या बद किया करते थे वह उन्हें बता देगा (उसकी रहमत तो देखो) (160)

18 अप्रैल 2018

कर्नाटक बार कौंसिल निर्वाचन ट्रिब्यूनल ने सुनवाई के बाद ,,बार कौंसिल चुनावों के नतीजे निरस्त

कर्नाटक बार कौंसिल के हाल ही में सम्पादित चुनाव में निर्वाचन अधिकारी और अन्य लोगो ने निर्वाचन को निष्पक्ष रखने के लिए बार कौंसिल ऑफ़ इंडिया और निर्वाचन निर्देशों की पालना सुनिश्चित नहीं की ,,इसी मामले में कर्नाटक बार कौंसिल निर्वाचन ट्रिब्यूनल ने सुनवाई के बाद ,,बार कौंसिल चुनावों के नतीजे निरस्त करते हुए ,,15 मई के पहले फिर से निर्देशों की पालना करते हुए चुनाव करवाने के निर्देश जारी किये है ,,राजस्थान बार कौंसिल में निर्वाचन और वोटो की गिनती प्रक्रिया में बार कौंसिल ऑफ़ राजस्थान ,,निर्वाचन नियम ,,निर्वाचन मार्गनिर्देशनो की पालना सुनिश्चित नहीं हुई है ,यहां पेटियों में फ़टे हुए मत पत्र निकले है ,,तो मत पत्रों पर व्हाइटनर लगाने की गंभीर घटनाये सामने आयी ,है ,,,मतपत्रों की सुरक्षा पुलिस की निगरानी में नहीं रखी गयी ,ऐसे के बार कौंसिल ऑफ़ राजस्थान ,,बार कौंसिल ऑफ़ कर्नाटक की मतपत्रों ,,मतपेटियों की प्रक्रिया ,,लापरवाही ,,नाफ़रमानियां एक जैसी होने से राजस्थान की वोटो की गिनती और चुनाव निरस्त होना चाहिए ,,यहां भी दुबारा चुनाव होना चाहिए ,,,An Election Tribunal has set aside the Karnataka State Bar Council elections held last month, owing to several noted irregularities brought to its attention.
An order to this effect was passed by Chairman and former Chief Justice of the Karnataka High Court Justice SK Mukherjee, along with former Gujarat High Court judge Justice RD Vyas and former Patna High Court judge Justice Mridula Mishra yesterday, following examination of several complaints made by two Advocate-candidates, HR Durgaprasad and HC Shivaramu.
Arguments were made for the complainants by Advocates Saurabh Agarwal and Komal Mundhra. The Special Committee to the Karnataka Bar Council was represented by Advocate Sreenidhi V.
“The Election of the Karnataka State Bar Council reveals a very sorry state of affairs,” remarks the Tribunal, before detailing the various deficiencies and illegalities that vitiated the Bar Council elections.
The noted irregularities include the following.
Failure to appoint impartial overseeing authorities
The Bar Council of India (BCI) had issued instructions last February directing State Bar Councils to appoint a former High Court judge as Returning Officer (RO) and/or Observer.
On the contrary, the RO appointed for the Karnataka Bar Council elections this year was the Secretary to the incumbent State Bar Council.
Further, the Additional Advocate General was appointed the Assistant RO. On this, the Election Tribunal comments,
“The reverse could still be conceived. We cannot as to how Learned Additional Advocate General could as the Assistant Returning Officer under the Secretary of the Bar Council, who is a permanent staff of the Bar Council.”
Private agencies employed to handle ballot papers
Private agencies were engaged to transport ballots to different polling stations after the elections with no safety or security. This was in direct violation of the BCI’s directions, which had stipulated that the same be handled with the support of proper police forces and escorts.
“But these norms have been given a complete go-bye,” notes the Tribunal.
Also highlighted is the reluctance of the Karnataka Bar Council to approach the Tribunal or other authorities for aid when police protection was apparently not forthcoming from the government. There was no material record to show that any authority was properly approached for aid before the private agency was engaged.
“It appears that just for a sheer formality, the Special Committee has sent a letter, but it was never followed up and it appears that purposely no step was taken for safe transportation of Ballot Papers and/or to depute police forces on polling booths.”
Lack of seal in strong rooms with ballot papers
The Tribunal expresses its disapproval over the lax security for the strong room meant to store ballot papers after the election.
“This so-called strong room was found to be without any seal. A simple lock was there.”
Complaints were also made to the Tribunal that the room was opened on several occasions by staff members of the Special Committee and election candidates who are “men of Members of Special Committee.”
A report by former Karnataka High Court judge Justice Anand Byrareddy, appointed as Observer by the Tribunal after the complaints initially emerged, also indicated that there was no seal or signature of either the RO or the ARO n the door of the strong room.
Ballot papers were changed/tampered
It was submitted that the ballot papers were circulated with the signature and seal of the RO even before polling, indicating that the papers were not at all safe and secured.
An attempt was made to counter this allegation, arguing that sample ballot papers were circulated prior to the elections. However, no answer was forthcoming as to how such “samples” could bear the sign and seal of the RO.
CCTV cameras not employed as directed
The complainants submitted that CCTV cameras were also manipulated to suit sinister purposes.
This apart, BCI directions were also flouted when neither the Special Committee nor the RO arranged for CCTV coverage or video coverage for recording the polling process even at the sensitive polling booths. None of five identified sensitive polling booths were monitored by CCTV cameras.
An attempt was made to present a defence that in three of the sensitive areas i.e. Chikkodi, Kudligi and Jamkhandi, “local Observers” were told to take photographs of the polling process as far as possible. Unimpressed, the Tribunal wonders in the order,
“What does he mean by word ‘Local Observers’ we fail to understand.”
Altogether, the Election Tribunal noted that Directions numbered 1, 3, 5 and 7 of the instructions issued by the BCI on February 22 for the conduct of Bar Council elections were flouted.
Special Committee pulled up
The lapses on the part of the Special Committee in securing the safe storage of the ballot paper was the primary factor that prompted the Tribunal to quash the elections.
The Tribunal observed,
“All these go to establish that elections have been held in an unfair manner, and the Special Committee has acted in a most casual and careless manner…
…such a serious and obvious lapse is certainly raising a big question mark on the fairness of the RO and Special Committee in the conduct of elections and it cannot be overlooked or ignored.
The purpose of election is to get the true representatives of the Advocates. Here, in the present case, the Special Committee and its staff seem to have acted in most arbitrary and unfair manner.”
The complaints had prompted the Tribunal to order a stay on the counting of votes earlier this month, pending its decision in the matter.
Before rendering its verdict, the Tribunal also takes a note of allegations that the Observer, Justice Byrareddy, was very close to the Members of the Special Committee. It was therefore contended that the report prepared by Justice Byrareddy was totally partial and made to favour the Special Committee and the candidates, who have been succeeded in managing the show.
However, the Tribunal found it unnecessary to go into such vague and bald allegations, particularly given that there are sufficient reasons otherwise to cast doubt on the elections. Therefore, the Tribunal decided,
“We are not going to express any opinion on such vague and bald allegations. But as noted earlier, even that report of Mr. Justice Anand Byrareddy has established that the strong room was unsealed and that itself has materially affected the entire process of election.”
Fresh Election to be held from Polling stage
Ultimately, the Tribunal set aside the entire election of the Karnataka State Bar Council, given the noted serious lapses. Instead, a BCI-constituted Special Committee has been tasked with conducting the election anew from the stage of polling after printing fresh ballot papers.
Further, the BCI is also expected to appoint a former judge as Returning Officer and another former judge from another state as an Observer for the elections. May 15 has been fixed as the date by which the elections should ideally be completed. The Tribunal has accordingly ordered,
“The Council should, also, request the Hon’ble Chief Justice of Karnataka High Court to direct the police to co-operate with the Returning Officer and the Observer. Bar Council of India is to take necessary steps for conducting, completing the elections at the earliest preferably before May 15, 2018.
अख्तर खान प्रत्याक्षी बार कौंसिल ऑफ़ राजस्थान मत पत्र क्रमांक 54 कोटा राजस्थान मोबाइल 9829086339

बेशक जिन लोगों ने अपनी औलाद को बे समझे बूझे बेवकूफी से मार डाला

बेशक जिन लोगों ने अपनी औलाद को बे समझे बूझे बेवकूफी से मार डाला और जो रोज़ी ख़ुदा ने उन्हें दी थी उसे ख़ुदा पर इफ़तेरा (बोहतान) बाँध कर अपने ऊपर हराम कर डाला और वह सख़्त घाटे में है ये यक़ीनन राहे हक़ से भटक गऐ और ये हिदायत पाने वाले थे भी नहीं (141)
और वह तो वही ख़ुदा है जिसने बहुतेरे बाग़ पैदा किए (जिनमें मुख़्तलिफ दरख़्त हैं - कुछ तो अंगूर की तरह टट्टियों पर) चढ़ाए हुए और (कुछ) बे चढ़ाए हुए और खजूर के दरख़्त और खेती जिसमें फल मुख़्तलिफ़ किस्म के हैं और ज़ैतून और अनार बाज़ तो सूरत रंग मज़े में, मिलते जुलते और (बाज़) बेमेल (लोगों) जब ये चीज़े फलें तो उनका फल खाओ और उन चीज़ों के काटने के दिन ख़ुदा का हक़ (ज़कात) दे दो और ख़बरदार फज़ूल ख़र्ची न करो - क्यों कि वह (ख़ुदा) फुज़ूल ख़र्चे से हरगिज़ उलफत नहीं रखता (142)
और चारपायों में से कुछ तो बोझ उठाने वाले (बड़े बड़े) और कुछ ज़मीन से लगे हुए (छोटे छोटे) पैदा किए ख़ुदा ने जो तुम्हें रोज़ी दी है उस में से खाओ और शैतान के क़दम ब क़दम न चलो (143)
(क्यों कि) वह तो यक़ीनन तुम्हारा खुला हुआ दुश्मन है (ख़ुदा ने नर मादा मिलाकर) आठ (कि़स्म के) जोड़े पैदा किए हैं - भेड़ से (नर मादा) दो और बकरी से (नर मादा) दो (ऐ रसूल उन काफिरों से) पूछो तो कि ख़ुदा ने (उन दोनों भेड़ बकरी के) दोनों नरों को हराम कर दिया है या उन दोनों मादनियों को या उस बच्चे को जो उन दोनों मादनियों के पेट से अन्दर लिए हुए हैं (144)
अगर तुम सच्चे हो तो ज़रा समझ के मुझे बताओ और ऊँट के (नर मादा) दो और गाय के (नर मादा) दो (ऐ रसूल तुम उनसे) पूछो कि ख़ुदा ने उन दोनों (ऊँट गाय के) नरों को हराम किया या दोनों मदनियों को या उस बच्चे को जो दोनों मादनियों के पेट अपने अन्दर लिये हुए है क्या जिस वक्त ख़ुदा ने तुमको उसका हुक्म दिया था तुम उस वक़्त मौजूद थे फिर जो ख़ुदा पर झूठ बोताहन बाधें उससे ज़्यादा ज़ालिम कौन होगा ताकि लोगों के वे समझे बूझे गुमराह करें ख़ुदा हरगिज़ ज़ालिम क़ौम में मंजि़ले मक़सूद तक नहीं पहुचाता (145)
(ऐ रसूल) तुम कहो कि मै तो जो (क़ुरान) मेरे पास वही के तौर पर आया है उसमें कोई चीज़ किसी खाने वाले पर जो उसको खाए हराम नहीं पाता मगर जबकि वह मुर्दा या बहता हुआ ख़़ून या सूअर का गोश्त हो तो बेशक ये (चीजे़) नापाक और हराम हैं या (वह जानवर) नाफरमानी का बाएस हो कि (वक़्ते जि़बहा) ख़ुदा के सिवा किसी और का नाम लिया गया हो फिर जो शख़्स (हर तरह) बेबस हो जाए (और) नाफरमान व सरकश न हो और इस हालत में खाए तो अलबत्ता तुम्हारा परवरदिगार बड़ा बख़्शने वाला मेहरबान है (146)
और हमने यहूदियों पर तमाम नाख़ूनदार जानवर हराम कर दिये थे और गाय और बकरी दोनों की चरबियां भी उन पर हराम कर दी थी मगर जो चरबी उनकी दोनों पीठ या आतों पर लगी हो या हड्डी से मिली हुयी हो (वह हलाल थी) ये हमने उन्हें उनकी सरक़षी की सज़ा दी थी और उसमें तो षक ही नहीं कि हम ज़रूर सच्चे हैं (147)
(ऐ रसूल) पर अगर वह तुम्हें झुठलाए तो तुम (जवाब) में कहो कि (अगरचे) तुम्हारा परवरदिगार बड़ी वसीह रहमत वाला है मगर उसका अज़ाब गुनाहगार लोगों से टलता भी नहीं (148)
अनक़रीब मुशरेकीन कहेंगें कि अगर ख़ुदा चाहता तो न हम लोग शिर्क करते और न हमारे बाप दादा और न हम कोई चीज़ अपने ऊपर हराम करते उसी तरह (बातें बना बना के) जो लोग उनसे पहले हो गुज़रे हैं (पैग़म्बरों को) झुठलाते रहे यहाँ तक कि उन लोगों ने हमारे अज़ाब (के मज़े) को चख़ा (ऐ रसूल) तुम कहो कि तुम्हारे पास कोई दलील है (अगर है) तो हमारे (दिखाने के) वास्ते उसको निकालो (दलील तो क्या) पेश करोगे तुम लोग तो सिर्फ अपने ख़्याल ख़़ाम की पैरवी करते हो और सिर्फ अटकल पच्चू बातें करते हो (149)
(ऐ रसूल) तुम कहो कि (अब तुम्हारे पास कोई दलील नहीं है) ख़ुदा तक पहुंचाने वाली दलील ख़ुदा ही के लिए ख़ास है (150)

17 अप्रैल 2018

रामगोपाल चतुर्वेदी यूँ तो चारों वेदो के ज्ञाता है

दोस्तों आप है एडवोकेट रामगोपाल चतुर्वेदी ,,हंसना ,हंसाना ,,,,यारों से यारी निभाना ,बोझिल माहौल को ठहाकों में बदल देना इनकी पहचान है ,,आज इनका जन्म दिन है ,,इन्हे बधाई ,,मुबारकबाद ,,,रामगोपाल चतुर्वेदी यूँ तो चारों वेदो के ज्ञाता है ,,इनकी प्रारम्भिक पढ़ाई पहले सवाई माधोपुर फिर टोंक में हुई ,,कोटा की एक फैक्ट्री में आप प्रशासनिक अधिकारी थे ,,इनके कार्यकाल में श्रमिकों को उनकी हिस्सेदारी ज़िम्मेदारी इंसाफ़ाना तरीके से मिली ,उद्योगों पर संकट मंडराने के बाद जब फैक्ट्री बंद हुई ,,तो रामगोपाल चतुर्वेदी हिम्मत नहीं हारे और सत्ताईस साल;पहले वकालत में आये ,,वकालत के व्यवसाय के दौरान ,,रामगोपाल चतुर्वेदी ने क़ानूनी मामलों की पेचीदगियों को सुलझाकर कई मामलो में अपना नाम कमाया ,,वित्तीय संस्थाओ सहित सभी प्रकार के प्रकरणो की सफलता पूर्वक पैरवी की ,वर्तमान में रामगोपाल चतुर्वेदी कोटा अभिभाषक परिषद के स्थाई ,,एकाउंटेंट हो गए है खुद तो तीन बार अभिभाषक परिषद में निर्वाचित कोषाध्यक्ष रहे है ,इनके कार्यकाल में अभिभाषक परिषद का कोष प्रबंधन व्यवस्थित हुआ ,हिसाब किताब का स्थाई समाधान हुआ ,,बिजली कनेक्शन की व्यवसायिक वसूली पर रोक लगी ,,,अब पद पर कोई भी रहे लेकिन कोष व्यवस्था में इनकी हुनर मंदी के चलते हर साल अंतिम रूप से इनकी राय महत्ता रखती है ,,यह बिना किसी टालम टोल के कई सालों से इस व्यवस्था को अघोषित रूप से संभाल रहे है ,चुनाव में अगर रामगोपाल चतुर्वेदी के चुटकुले न हो तो चुनाव ही बेमज़ा होते है ,,खुद को मज़ाक़ में शामिल कर मज़ाक़ करना इनकी खूबी खासियत है ,इसलिए इनके इर्द गिर्द हंसी मज़ाक़ के माहौल में दोस्तों का जमावड़ा इनकी कमाई है ,,रामगोपाल चतुर्वेदी समझौता मामले में ऐ डी आर सदस्य होने से एक नया अनुभव लेकर सामने आये है ,,किसी भी तरह के विवाद हो ,,पारिवारिक विवाद हो ,श्रमिक विवाद हो ,,चेक अनादरण या कोई दूसरे सिविल मामलों के विवाद हो ,,समझौता लोक अदालतों में अगर समझाइश इनके हाथ में आयी ,,तो यक़ीनन न किसी की जीत न किसी की हार के नारे को बुलंद करते हुए दोनों पक्षों को राज़ी कर हंसी हंसी में यह उनका समझौता करा देते है ,,कोटा में समझाइश से समझौते से मुक़दमो के निस्तारण में इनका नंबर अव्वल है ,,,रामगोपाल चतुर्वेदी को जन्म दिन की लाख लाख बधाइयां ,,मुबारकबाद ,,,अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

तुम्हारा परवरदिगार उससे बेख़बर नहीं

(फिर हम पूछेंगे कि क्यों) ऐ गिरोह जिन व इन्स क्या तुम्हारे पास तुम ही में के पैग़म्बर नहीं आए जो तुम तुमसे हमारी आयतें बयान करें और तुम्हें तुम्हारे उस रोज़ (क़यामत) के पेश आने से डराएँ वह सब अर्ज़ करेंगे (बेशक आए थे) हम ख़ुद अपने ऊपर आप अपने (खि़लाफ) गवाही देते हैं (वाकई) उनको दुनिया की (चन्द रोज़) जि़न्दगी ने उन्हें अँधेरे में डाल रखा और उन लोगों ने अपने खि़लाफ आप गवाही दीं (131)
बेशक ये सब के सब काफिर थे और ये (पैग़म्बरों का भेजना सिर्फ) उस वजह से है कि तुम्हारा परवरदिगार कभी बस्तियों को ज़ुल्म ज़बरदस्ती से वहाँ के बाशिन्दों के ग़फलत की हालत में हलाक नहीं किया करता (132)
और जिसने जैसा (भला या बुरा) किया है उसी के मुवाफि़क हर एक के दरजात हैं (133)
और जो कुछ वह लोग करते हैं तुम्हारा परवरदिगार उससे बेख़बर नहीं और तुम्हारा परवरदिगार बे परवाह रहम वाला है - अगर चाहे तो तुम सबके सबको (दुनिया से उड़ा) ले लाए और तुम्हारे बाद जिसको चाहे तुम्हार जानशीन बनाए जिस तरह आखि़र तुम्हें दूसरे लोगों की औलाद से पैदा किया है (134)
बेशक जिस चीज़ का तुमसे वायदा किया जाता है वह ज़रूर (एक न एक दिन) आने वाली है (135)
और तुम उसके लाने में (ख़ुदा को) आजिज़ नहीं कर सकते (ऐ रसूल तुम उनसे) कहो कि ऐ मेरी क़ौम तुम बजाए ख़़ुद जो चाहो करो मैं (बजाए ख़़ुद) अमल कर रहा हूँ फिर अनक़रीब तुम्हें मालूम हो जाएगा कि आख़ेरत (बेहष्त) किसके लिए है (तुम्हारे लिए या हमारे लिए) ज़ालिम लोग तो हरगिज़ कामयाब न होंगे (136)
और ये लोग ख़ुदा की पैदा की हुयी खेती और चैपायों में से हिस्सा क़रार देते हैं और अपने ख़्याल के मुवाफिक कहते हैं कि ये तो ख़़ुदा का (हिस्सा) है और ये हमारे शरीकों का (यानि जिनको हमने ख़़ुदा का शरीक बनाया) फिर जो ख़ास उनके शरीकों का है वह तो ख़़ुदा तक नहीं पहुँचने का और जो हिस्सा ख़ुदा का है वो उसके शरीकों तक पहुँच जाएगा ये क्या ही बुरा हुक्म लगाते हैं और उसी तरह बहुतेरे मुष्रकीन को उनके शरीकों ने अपने बच्चों को मार डालने को अच्छा कर दिखाया है (137)
ताकि उन्हें (बदी) हलाकत में डाल दें और उनके सच्चे दीन को उन पर मिला जुला दें और अगर ख़ुदा चाहता तो लोग ऐसा काम न करते तो तुम (ऐ रसूल) और उनकी इफ़तेरा परदाजि़यों को (ख़़ुदा पर) छोड़ दो और ये लोग अपने ख़्याल के मुवाफिक कहने लगे कि ये चैपाए और ये खेती अछूती है (138)
उनको सिवा उसके जिसे हम चाहें कोई नहीं खा सकता और (उनका ये भी ख़्याल है) कि कुछ चारपाए ऐसे हैं जिनकी पीठ पर सवारी लादना हराम किया गया और कुछ चारपाए ऐसे है जिन पर (जि़बह के वक़्त) ख़़ुदा का नाम तक नहीं लेते और फिर यह ढकोसले (ख़ुदा की तरफ मनसूब करते) हैं ये सब ख़ुदा पर इफ़तेरा व बोहतान है ख़ुदा उनके इफ़तेरा परदाजि़यों को बहुत जल्द सज़ा देगा (139)
और कुफ़्फ़ार ये भी कहते हैं कि जो बच्चा (वक़्त ज़बाह) उन जानवरों के पेट में है (जिन्हें हमने बुतों के नाम कर छोड़ा और जि़न्दा पैदा होता तो) सिर्फ हमारे मर्दों के लिए हलाल है और हमारी औरतों पर हराम है और अगर वह मरा हुआ हो तो सब के सब उसमें शरीक हैं ख़ुदा अनक़रीब उनको बातें बनाने की सज़ा देगा बेशक वह हिकमत वाला बड़ा वाकि़फकार है (140)
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