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12 अप्रैल 2019

बात अजीब और कितनी अजीब है

बात अजीब और कितनी अजीब है ,,देशभर में वोटर्स को वोट डालने के लिए जागरूक करने ,सम्पूर्ण देशभर की मतदान प्रक्रिया के इंचार्ज रहे ,,आदरणीय पूर्व चुनाव आयुक्त जी वी जी श्रीकृष्ण मूर्ति का गाज़ियाबाद की चुनाव सूचि में नाम नहीं होने से वोह वोट नहीं डाल सके ,,कहने को यह सिर्फ एक मामूली सी लापरवाही है ,लेकिन इस देश की लोकतान्त्रिक व्यवस्था ,मतदाता जागरूकता ,,और लोकप्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत सरकारी काम काज को बाधित कर ,,कर्मचारियों से चुनाव का काम करवाने के सिस्टम पर यह एक करारा तमाचा है ,,,एक वाद ,,एक भाग संख्या एक बूथ , कहने को सरकारी बी एल ओ ,क्रॉस चेकिंग के लिए निर्वाचन अधिकारी ,,फिर मुख्य निर्वाचन अधिकारी ,राजनितिक स्तर पर ,हर पार्टी के प्रत्येक बूथ के कार्यकर्ता बी एल ऐ ,,खुद मतदाता इन व्यवस्थाओं से जुड़ा है ,फिर भी यह गंभीर गलतियां हमारे चुनावी सिस्टम ,जागरूकता ,क्रॉस चेकिंग पर तमाचा है ,,सामान्य बात हो तो अलग बात है ,,लेकिन देश भर की चुनावी व्यवस्था संभाल चुके जी वी जी कृष्णमूर्ति साहिब का नाम तीस साल से लगातार वोटर लिस्ट में होने के बाद भी काट दिया जाना ,,व्यवस्था की पोल खोलता है ,,खुद कृष्णमूर्ति की जागरूकता पर भी प्रश्न चिन्ह है ,,आज के युग में ऑन लाइन चेकिंग को और आसान बनाने की ज़रूरत है ,,वोटर का नाम काटने के पहले उसे व्यक्तिगत सुचना देकर सुनवाई का अवसर दिए जाने का प्रावधान बनाने की ज़रूरत है ,करोडो करोड़ रूपये चुनाव के नाम पर खर्च और फिर व्यवस्थाओं के नाम पर ऐसा तमाचा हमे ,हमारे चुनावी सिस्टम को शर्मसार करता है ,,आचार संहिता में देख लीजिये जिसकी मर्ज़ी पढ़े उल जलूल बकवास ,,कभी धर्म के नाम पर ,कभी हिंसा के नाम पर ,कभी वर्ग ,जाति ,समाज के नाम पर ,तो कभी लिंग के नाम पर ,,तो कभी भाषा ,,क्षेत्र के नाम पर उलंग्घन है ,राजस्थान का इतना बढ़ा उदाहरण के खुद राज्यपाल कल्याण सिंह एक भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता के रूप में मोदी के लिए वोट मांग रहे ,है ,,जो चुनाव आयुक्त ऐसे लोगो को पद से हटाने में सक्षम है ,उसकी सिफारिश के बाद चुप्पी की वजह से राष्ट्रपति महोदय ने खुद पक्षपात करते हुए बहाने बाज़ी की और ,,राज्यपाल को इस खुले उलंग्घन के लिए अब तक पद से नहीं हटाया है ,,खुद नरेंद्र मोदी ने गत गुजरात विधानसभा चुनाव में प्रचार के दौरान ,,राहुल गाँधी पर खुला पाकिस्तान के लोगों से बैठक करने का आरोप सरेआम लगाया ,जो पूरा झूंठ का पुलंदा था इस तरह के बयान के लिए ,,लोकसभा में खेद तो प्रकट कर दिया ,,लेकिन चुनाव आयुक्त की लापरवाही ,चुप्पी ,,कर्तव्यों के उलंग्घन की वजह से ,नरेंद्र मोदी ने अपने इस बयान से गुजरात की जनता को खूब गुमराह कर ,,वोटर का फायदा उठाया ,,इसी तरह से उत्तर प्रदेश के मुख्यमत्री योगी आदित्य नाथ ,का हाल है का चुनावी बयान बजरंग बलि और अली वाला कितना खतरनाक है ,लेकिन चुनाव आयोग निष्पक्ष नहीं ,सिर्फ सरकार की नौकरी की तरह काम कर रहा है ,,ऐसे में ज़रूरी हो गया है ,चुनाव आयोग स्वतंत्र हो ,खुद का पाना सालाना बजट ,,चुनाव प्रक्रिया के अलग कर्मचारी हो ,,उनकी अपनी पुलिस हो ,,निर्वाचन अपराध की सुनवाई के लिए हर ज़िले में फ़ास्ट ट्रेक कोर्ट हों ,,वैधानिक ज़िम्मेदारी हो सुप्रीमकोर्ट के दायरे में हो ,,सुचना के अधिकार अधिनियम के दायरे में हो ,अगर ऐसा हुआ तभी यह लोकतंत्र बच पायेगा ,,वरना चुनाव आयुक्तों की स्थिति सभी देख रहे है ,,एक कलेक्टर जिसका ट्रांसफर सरकार के मंत्री अपनी मर्ज़ी से करते है ,वही चुनाव अधिकारी भी हो जाता है ,,अब कलेक्टर खुद के खिलाफ तो कार्यवाही करने में सक्षम नहीं है ना ,तो जनाब इस सिस्टम को बदलिए ,,नया सिस्टम ,,ओरिजनल लोकतंत्र मान्यता प्राप्त पार्टियों के संविधान की पदाधिकारियों के लिए पालना सुनिश्चित करना चुनाव आयोग का काम है ,चुनाव आयोग के प्रतिनिधि की उपस्थिति में ऐसी व्यवस्था हो के पार्टी के संविधान के तहत पार्टी के चुनाव हो ,सभी पार्टियों में पार्टी की सदस्य्ता ग्रहण करने के बाद ,विशेष प्रशिक्षण का प्रमाणपत्र प्राप्त करने के बाद ही पार्टी के सिंबल पर कोई भी चुनाव लड़ने की व्यवस्था है ,लेकिन भाजपा से कांग्रेस में ,कांग्रेस से भाजपा में ,,अधिकारी इस्तीफा देकर पार्टी में ,राजा ,महाराजा ,धर्म ,,समाज के आधार पर नेता बने लोग ,फिल्म स्टार ,खिलाड़ी तुरंत पार्टी में शामिल हुए और एक मिनट में उन्हें बिना किसी संवैधानिक व्यवस्था के तुरंत पार्टी का टिकिट मज़ाक़ बन गया है ,,अख्तर खान अकेला कोटा राजस्था

राम जी की कृपा ऐसी हो

    चैत्रे नवम्यां प्राक् पक्षे दिवा पुण्ये पुनर्वसौ ।
    उदये गुरुगौरांश्चोः स्वोच्चस्थे ग्रहपञ्चके ॥
    मेषं पूषणि सम्प्राप्ते लग्ने कर्कटकाह्वये ।
    आविरसीत्सकलया कौसल्यायां परः पुमान्
महाकाव्य रामायण के अनुसार अयोध्या के राजा दशरथ की तीन पत्नियाँ थीं लेकिन बहुत समय तक कोई भी राजा दशरथ को संतान का सुख नहीं दे पायी थी। जिससे राजा दशरथ बहुत परेशान रहते थे। पुत्र प्राप्ति के लिए राजा दशरथ को ऋषि वशिष्ठ ने कमेष्टि यज्ञ कराने को विचार दिया। इसके पश्चात् राजा दसरथ ने महर्षि रुशया शरुंगा से यज्ञ कराया।
यज्ञ समाप्ति के बाद महर्षि ने दशरथ की तीनों पत्नियों को एक-एक कटोरी खीर खाने को दी। खीर खाने के कुछ महीनों बाद ही तीनों रानियाँ गर्भवती हो गयीं। ठीक 9 महीनों बाद राजा दशरथ की सबसे बड़ी रानी कौशल्या ने राम को जो भगवान विष्णु के सातवें अवतार थे, कैकयी ने भरत को और सुमित्रा ने जुड़वा बच्चों लक्ष्मण और शत्रुघ्न को जन्म दिया। भगवान राम का जन्म धरती पर दुष्ट प्राणियों को खत्म करने के लिए हुआ था। मर्यादा पुरुषोत्तम राम के जन्म दिवस पर सभी को बधाई मुबारकबाद ,,राम जी की कृपा ऐसी हो के इस देशवासियों को ,,उनके उपासको को ,राम जी के बताये हुए मर्यादित ,सैद्धांतिक  चलने की तौफ़ीक़ अता हो ,,मर्यादाओं में रहकर दुश्मन का अंत हो ,,,ज्ञानी दुश्मन से भी उसके ज्ञान की सीख का संदेश ,माता के प्रति ताबेदारी ,,पिता के प्रति वफ़ादारी ,पत्नी के प्रति प्रेम का भाव हो ,,भाइयों के प्रति प्रेम ,,प्रजा के प्रति इन्साफ हो ,बिना किसी भेदभाव ,बिना किसी पक्षपात ,,बेईमानी के सभी के लिए इंसाफ ,सभी के लिए राज्य की सुविधाएं हो ,,,यानी राम राज हो ,राम राज हो ,रावण का कुम्भकर्ण का ,,अंत हो ,अंत हो ,,एक बार फिर भाइयों को बधाई ,,अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

लेकिन क्या वह लोग (इतना भी) नहीं जानते

मूसा ने कहा खु़दा ज़रूर फरमाता है कि वह गाय न तो इतनी सधाई हो कि ज़मीन जोते न खेती सीचें भली चंगी एक रंग की कि उसमें कोई धब्बा तक न हो, वह बोले अब (जा के) ठीक-ठीक बयान किया, ग़रज़ उन लोगों ने वह गाय हलाल की हालाँकि उनसे उम्मीद न थी वह कि वह ऐसा करेंगे (71)
और जब तुमने एक शख़्स को मार डाला और तुममें उसकी बाबत फूट पड़ गई एक दूसरे को क़ातिल बताने लगा जो तुम छिपाते थे (72)
खु़दा को उसका ज़ाहिर करना मंजू़र था बस हमने कहा कि उस गाय को कोई टुकड़ा लेकर इस (की लाश) पर मारो यूँ खु़दा मुर्दे को जि़न्दा करता है और तुम को अपनी कु़दरत की निशानियाँ दिखा देता है (73)
ताकि तुम समझो फिर उसके बाद तुम्हारे दिल सख़्त हो गये बस वह पत्थर के मिस्ल (सख़्त) थे या उससे भी ज़्यादा (सख्त़) क्योंकि पत्थरों में बाज़ तो ऐसे होते हैं कि उनसे नहरें जारी हो जाती हैं और बाज़ ऐसे होते हैं कि उनमें दरार पड़ जाती है और उनमें से पानी निकल पड़ता है और बाज़ पत्थर तो ऐसे होते हैं कि खु़दा के ख़ौफ से गिर पड़ते हैं और जो कुछ तुम कर रहे हो उससे खु़दा ग़ाफिल नहीं है (74)
(मुसलमानों) क्या तुम ये लालच रखते हो कि वह तुम्हारा (सा) ईमान लाएँगें हालाँकि उनमें का एक गिरोह साबिक़ में (पहले) ऐसा था कि खु़दा का कलाम सुनता था और अच्छी तरह समझने के बाद उलट फेर कर देता था हालाँकि वह खू़ब जानते थे और जब उन लोगों से मुलाक़ात करते हैं (75)
जो ईमान लाए तो कह देते हैं कि हम तो ईमान ला चुके और जब उनसे बाज़-बाज़ के साथ तखि़लया (अकेले) में मिलते हैं तो कहते हैं कि जो कुछ खु़दा ने तुम पर (तौरेत) में ज़ाहिर कर दिया है क्या तुम (मुसलमानों को) बता दोगे ताकि उसके सबब से कल तुम्हारे खु़दा के पास तुम पर हुज्जत लाएँ क्या तुम इतना भी नहीं समझते (76)
लेकिन क्या वह लोग (इतना भी) नहीं जानते
कि वह लोग जो कुछ छिपाते हैं या ज़ाहिर करते हैं खु़दा सब कुछ जानता है (77)
और कुछ उनमें से ऐसे अनपढ़ हैं कि वह किताबे खु़दा को अपने मतलब की बातों के सिवा कुछ नहीं समझते और वह फक़त ख़्याली बातें किया करते हैं, (78)
बस वाए हो उन लोगों पर जो अपने हाथ से किताब लिखते हैं फिर (लोगों से कहते फिरते) हैं कि यह खु़दा के यहाँ से (आई) है ताकि उसके ज़रिये से थोड़ी सी क़ीमत (दुनयावी फ़ायदा) हासिल करें बस अफसोस है उन पर कि उनके हाथों ने लिखा और फिर अफसोस है उनपर कि वह ऐसी कमाई करते हैं (79)
और कहते हैं कि गिनती के चन्द दिनों के सिवा हमें आग छुएगी भी तो नहीं (ऐ रसूल) इन लोगों से कहो कि क्या तुमने खु़दा से कोई इक़रार ले लिया है कि फिर वह किसी तरह अपने इक़रार के खि़लाफ़ हरगिज़ न करेगा या बे समझे बूझे खु़दा पर बोहतान जोड़ते हो (80)

11 अप्रैल 2019

(तब वह लोग कहने लगे कि (अच्छा) तुम अपने खु़दा से दुआ करो

(और वह वक़्त भी याद करो) जब तुमने मूसा से कहा कि ऐ मूसा हमसे एक ही खाने पर न रहा जाएगा तो आप हमारे लिए अपने परवरदिगार से दुआ कीजिए कि जो चीज़े ज़मीन से उगती है जैसे साग पात तरकारी और ककड़ी और गेहूँ या (लहसुन) और मसूर और प्याज़ (मन व सलवा) की जगह पैदा करें (मूसा ने) कहा क्या तुम ऐसी चीज़ को जो हर तरह से बेहतर है अदना चीज़ से बदलन चाहते हो तो किसी शहर में उतर पड़ो फिर तुम्हारे लिए जो तुमने माँगा है सब मौजूद है और उन पर ज़िल्लत रूसवाई और मोहताजी की मार पड़ी और उन लोगों ने क़हरे खु़दा की तरफ पलटा खाया, ये सब इस सबब से हुआ कि वह लोग खु़दा की निशानियों से इन्कार करते थे और पैग़म्बरों को नाहक शहीद करते थे, और इस वजह से (भी) कि वह नाफ़रमानी और सरकशी किया करते थे (61)
बेशक मुसलमानों और यहूदियों और नसरानियों और लामज़हबों में से जो कोई खु़दा और रोज़े आख़ेरत पर ईमान लाए और अच्छे-अच्छे काम करता रहे तो उन्हीं के लिए उनका अज्र व सवाब उनके खु़दा के पास है और न (क़यामत में) उन पर किसी का ख़ौफ होगा न वह रंजीदा दिल होंगे (62)
और (वह वक़्त याद करो) जब हमने (तामीले तौरेत) का तुमसे एक़रार लिया और हमने तुम्हारे सर पर तूर से (पहाड़ को) लाकर लटकाया और कह दिया कि तौरेत जो हमने तुमको दी है उसको मज़बूत पकड़े रहो और जो कुछ उसमें है उसको याद रखो (63)
ताकि तुम परहेज़गार बनो फिर उसके बाद तुम (अपने एहदो पैमान से) फिर गए बस अगर तुम पर खु़दा का फज़ल और उसकी मेहरबानी न होती तो तुमने सख़्त घाटा उठाया होता (64)
और अपनी क़ौम से उन लोगों की हालत तो तुम बखू़बी जानते हो जो शम्बे (सनीचर) के दिन अपनी हद से गुज़र गए (कि बावजूद मुमानिअत शिकार खेलने निकले) तो हमने उन से कहा कि तुम राइन्दे गए बन्दर बन जाओ (और वह बन्दर हो गए) (65)
बस हमने इस वाक़ये से उन लोगों के वास्ते जिन के सामने हुआ था और जो उसके बाद आनेवाले थे अज़ाब क़रार दिया, और परहेज़गारों के लिए नसीहत (66)
और (वह वक़्त याद करो) जब मूसा ने अपनी क़ौम से कहा कि खु़दा तुम लोगों को ताकीदी हुक्म करता है कि तुम एक गाय जि़बाह करो वह लोग कहने लगे क्या तुम हमसे दिल्लगी करते हो मूसा ने कहा मैं खु़दा से पनाह माँगता हूँ कि मैं जाहिल बनूँ (67)
(तब वह लोग कहने लगे कि (अच्छा) तुम अपने खु़दा से दुआ करो कि हमें बता दे कि वह गाय कैसी हो मूसा ने कहा बेशक खु़दा ने फरमाता है कि वह गाय न तो बहुत बूढ़ी हो और न बछिया बल्कि उनमें से औसत दरजे की हो, ग़रज़ जो तुमको हुक्म दिया गया उसको बजा लाओ (68)
वह कहने लगे (वाह) तुम अपने खु़दा से दुआ करो कि हमें ये बता दे कि उसका रंग आखि़र क्या हो मूसा ने कहा बेशक खु़दा फरमाता है कि वह गाय खू़ब गहरे ज़र्द रंग की हो देखने वाले उसे देखकर खु़श हो जाए (69)
तब कहने लगे कि तुम अपने खु़दा से दुआ करो कि हमें ज़रा यह तो बता दे कि वह (गाय) और कैसी हो (वह) गाय तो और गायों में मिल जुल गई और खु़दा ने चाहा तो हम ज़रूर (उसका) पता लगा लेगे (70)

10 अप्रैल 2019

आज कलम का कागज से "" मै दंगा करने वाला हूँ,""

*सलीमखान (सलमान के पिता) द्वारा पत्रकारोको/मिडियाको करारा थप्पड़..*
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आज कलम का कागज से ""
मै दंगा करने वाला हूँ,""
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मीडिया की सच्चाई को मै ""
नंगा करने वाला हूँ ""
.
मीडिया जिसको लोकतंत्र का
चौंथा खंभा होना था,""
.
खबरों की पावनता में ""
.जिसको गंगा होना था ""

आज वही दिखता है हमको ""
वैश्या के किरदारों में,""
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बिकने को तैयार खड़ा है ""
गली चौक बाजारों में""
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दाल में काला होता है ""
तुम काली दाल दिखाते हो,""
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सुरा सुंदरी उपहारों की ""
खूब मलाई खाते हो""
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गले मिले सलमान से आमिर,""
ये खबरों का स्तर है,""
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और दिखाते इंद्राणी का ""
कितने फिट का बिस्तर है ""
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म्यॉमार में सेना के ""
साहस का खंडन करते हो,""
.
और हमेशा दाउद का""
तुम महिमा मंडन करते हो""
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हिन्दू कोई मर जाए तो ""
घर का मसला कहते हो,""
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मुसलमान की मौत को ""
मानवता पे हमला कहते हो""
.
लोकतंत्र की संप्रभुता पर ""
तुमने कैसा मारा चाटा है,""
.
सबसे ज्यादा तुमने हिन्दू ""
मुसलमान को बाँटा है""
.
साठ साल की लूट पे भारी ""
एक सूट दिखलाते हो,""
.
ओवैसी को भारत का तुम ""
रॉबिनहुड बतलाते हो""
.
दिल्ली में जब पापी वहशी ""
चीरहरण मे लगे रहे,""
.
तुम एश्श्वर्या की बेटी के ""
नामकरण मे लगे रहे""
.
'दिल से' दुनिया समझ रही है "'"
खेल ये बेहद गंदा है,""
.
मीडिया हाउस और नही कुछ""
ब्लैकमेलिंग का धंधा है""
.
गूंगे की आवाज बनो ""
अंधे की लाठी हो जाओ,""
सत्य लिखो निष्पक्ष लिखो ""
और फिर से जिंदा हो जाओ
( this is perfect msg to be circulated.
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