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20 फ़रवरी 2011

पाबला जी पाबला जी पाबला जी

दोस्तों! आज मेरी 2200 वीं पोस्ट में लिख रहा हूँ. सोचा कि-क्या लिखूं! फिर सोचा कि-ब्लोगिंग की दुनिया को नई जिंदगी, नई पहचान, भाईचारा सद्भावना का पैगाम देने वाले किसी बंदे को चुना जाए. तब जनाब यकीन मानिये-मेरे जहन में सिर्फ और सिर्फ एक ही नाम जनाब बी.एस.बावला जी का आया.मैंने उनके बारे में खोजबीन शुरू की. तब लगा कि-उनके लियें कुछ भी लिखने की कोशिश बहुत कम है, क्योंकि आप(बी.एस.बावला)किसी लेखन, किसी परिचय के मोहताज नहीं है बल्कि उनसे जुडकर लोग दूसरों से परिचित होते हैं. आप ब्लोगिंग की दुनिया के नींव का पत्थर है. आपने अपनी ब्लॉग कला से कई लोगों को बौना बना दिया है।
कोटा में पिछले दिनों ब्लोगर भाई ललित शर्मा जी आये थे. उनकी जुबान पर मुलाक़ात के दोरान कई दर्जन बार जब आपका नाम आया तो मुझे लगा कि-आप कुछ नहीं, बहुत कुछ हटकर है और सच मानिए भाई दिनेशराय द्विवेदी जी ब्लोगर ने जब मुझे आपके बारे में बताना शुरू किया.तब वक्त कब निकल गया पता ही नहीं चला. मगर तब लगा कि-पावला जी ही ब्लोगिंग दुनिया की आन-बान और शान है। आप ही है जो ब्लॉग की दुनिया में लोगों के जन्मदिन, लोगों की वैवाहिक वर्षगाँठ की याद दिलाते हैं और फिर बधाइयों के सिलसिले से एक दुसरे से मुलाक़ात कराते हैं. एक-दुसरे से भाईचारा, सद्भावना और प्यार के साथ ही विश्वास बढ़ाने का काम करते हैं और इससे बेहतर काम क्या हो सकता है. जो किसी दुसरे के लिए प्यार बांटता है, उसे खुदा नवाजता है. इसीलिए आप आज देश में ही नहीं अंतर्राष्ट्रीय ब्लॉग मंच पर भी छा रहे है. ब्लॉग लेखन और ब्लॉग तकनीक साज-सज्जा में अव्वल रहने वाले जब खुद लिखते हैं तब प्रिंट मीडिया इनके आलेखों को अपने अख़बारों में छापने के लिये मजबूर हो जाती है.रोज़मर्रा इनके कई लेख विभिन्न समाचार पत्रों मैंने छपे हुए देखे हैं. यह ब्लोगिंग दुनिया के लिए गौरव की बात है कि-प्रिंट मीडिया अब ब्लोगिंग दुनिया का मोहताज रहने लगी है ।
आप जिंदगी के मेले, ब्लॉग बुखार, कल की दुनिया से लेकर दर्जनों ब्लॉग के मालिक है और सेकड़ों, हजारों ब्लोगों की अपने घर बैठे ही ठोक-बजाकर मरम्मत करके उसे नई रंगत देने के लिए मशहूर है. अब बताओं पाबला जी की शान में यह चंद अल्फाज़ सूरज को "दिया" दिखाने के समान ऊंट के मुंह में जीरा नहीं तो क्या है. लेकिन यकीन मानिये जब भी पाबला जी से मुलाक़ात होगी तो बस जी भर कर उनके बारे में जानूंगा और लिखने का प्रयास करूंगा. अभी तो बस इतना ही जान पाया हूँ कि-आप भिलाई इस्पात संयत्र में कार्यरत है और यहीं हाई स्कुल में पढ़े. फिर रायपुर से लुधियाना में जमे है, अब आप ब्लॉग की दुनिया में सभी छोटे-बड़े ब्लोगर के दिलों के शहंशाह और हर दिल अज़ीज़ बने हुए है। ऐसा लगता है शायद किसी शायर ने आपके लिए ही इन पक्तियों को कहा है कि- ...खुदा नहीं न सही, आदमी का ख्वाब सही. कोई हसीन नजारा तो है नजर के लिए.
दर्शनाभिलाषी-अख्तर खान अकेला,कोटा (राजस्थान)

2 टिप्‍पणियां:

  1. अब तो पाबला जी को कोटा आने का प्रोग्राम बना लेना चाहिए।

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  2. पाबला जी के बारे में जितना कहा जाए कम है।
    ऐसे जिन्दादिल लोग दुनिया में बहुत कम मिलते हैं।

    उत्तर देंहटाएं

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