हमें चाहने वाले मित्र

10 मार्च 2011

ब्लॉग दुनिया के माई लोर्ड भाई दिनेश द्विवेदी

ब्लॉग दुनिया के सरताज भाई दिनेश द्विवेदी

जी हाँ, दोस्तों! बारा जिले में एक पंडित परिवार में जन्मे दिनेश राय द्विवेदी का बचपन से ही पढ़ने और लिखने का शौंक रहा है. इसीलिए विचारों की इनकी स्वतन्त्रता, भूख और गरीबी के प्रति इनके इस दर्द ने आपको पंडित से कोमरेड बना दिया. प्रारम्भ की शिक्षा बरान में पूरी करने के बाद आपने कोटा से वकालत की परीक्षा पास की. आपने पहले पत्रकारिता शुरू की.फिर कवि और लेखक बने.तत्पश्चात मजदूर नेता के रूप में कोमरेड की पहचान बनाई और अब वकालत कर रहे हैं. अरे! हाँ, एक बात तो मैं भूल ही गया था. इस बीच भाई द्विवेदी जी पुत्र से पति और फिर एक पुत्र व एक पुत्री के पिता बन गये.विचारों से हमेशा स्वतंत्र रहने वाले खुद की सोच स्थापित रखने वाले श्री द्विवेदी जी अपनी बात बेबाकी से कहने के लिए मशहूर है. वैसे मैं मेरा भाई द्विवेदी जी से अपने पत्रकारिता के कार्यकाल से ही एक मजदूर नेता,एक वकील,एक पत्रकार,एक कवि और एक जनवादी लेखक के रूप में ही कई वर्षों का सम्पर्क था. मगर जब ब्लोगिंग की दुनिया में आया.तब मैं नोसिखिया था और मैंने ब्लॉग पर जब आपका काम देखा. फिर मेरी आँखें फटी की फटी रह गयीं एक वकील और पत्रकार होने के नाते में खूब जानता था कि-वकील की कितने व्यस्ताये होती है और कितनी मर्यादाएं होती है.फिर इन सब के बावजूद भी आपने ब्लॉग की दुनिया में चमत्कार कर रखा था.हर ब्लॉग पर आपकी जय-जयकार थी और अदालत से अदालत तक के ब्लॉग के सफर के बाद देशभर के कानूनों को आपने ब्लॉग की दुनिया में लिख डाला.इनके ब्लॉग पर कानून की सभी तरह की जानकारी मिलती है और हर विभाग का लिंक बनाया गया है.फिर आपने ब्लॉग "तीसरा खम्बा"ऐसा बनाया.जिसपर ब्लॉग की दुनिया को आप खड़ा करते गये और फिर पीछे मुड़कर आपने नहीं देखा.ब्लॉग की दुनिया में इंटरनेट के जरिये लोगों के विधिक सवालों के जवाब देने वाले भाई द्विवेदी पहले इंटरनेट ब्लॉगर बने.आज कई विधिक सवाल इनके पास लोग अपनी जिज्ञासा या परेशानियां दूर करने के लिए भेजकर उनका समाधान खोजते हैं. श्री द्विवेदी जी ने ब्लॉग " अनवरत" शुरू किया और फिर अनवरत जारी रहा.इस ब्लॉग में बेहतरीन लेख व सुझाव जब लिखे गये. तब यह ब्लोगिंग की दुनिया के हर दिल अज़ीज़ हो गये.भाई दिनेश जी ब्लॉग की दुनिया में खुशदीप जी, शाहनवाज़ जी, सतीश सक्सेना, ललित शर्मा जी सहित कई ब्लोगरों से बहुत प्रभावित है.इनका ब्लॉग मायद हाडोती हाडोती की संस्कृति की याद दिलाता है.अब तक हजारों पोस्ट/ब्लॉग लिखने वाले भाई द्विवेदी जी के मकान का काम बारा रोड,कोटा(राजस्थान) में चल रहा है.इस काम की व्यस्तता के बाद भी आप हमारी सादा जीवन उच्च विचार वाली भाभी जी के साथ मिलकर ब्लोगिंग करते हैं और अब आप सभी विधा में पारंगत हो जाने के बाद ब्लॉग गुरु भी बन गये है.आपके लेखों में जितनी गम्भीरता,जितना ज्ञान है. गौरतलब है कि-द्विवेदी जी इतने ही खुश-मिजाज़ एक- दुसरे के मददगार है, हर किसी के सुख-दुःख में साथ रहते है और उनकी ब्लोगिंग कला की वजह से ही आपको पिछले दिनों "हमारीवाणी" का सलाहकार बनाया गया है. ब्लॉग की दुनिया को द्विवेदी जी से बहुत उम्मीदें है और आप ब्लोगर्स व प्रशंसकों की हर कसोटी पर खरा उतर रहे है.उनकी एक ख़ास बात वो बहुत कम प्रभावित होते है और जब पूरी तरह से संतुष्ट हो जाते हैं.फिर वो उसी के हो जातेहै यानी हर काम आप ठोक बजाकर करना चाहते है और इसीलिए आप बुलंदियों पर है. आप अपनी हर वो बात दमदारी से कहने के लिए विख्यात है फिर चाहे कोई उनकी बात से कोई सहमत हो या नहीं. उनकी इस साफ़गोई की वजह से कई बार उनसे कुछ लोगों का अनावश्यक टकराव भी हो जाताहै, उनकी इन खूबियों ने उन्हें ब्लॉग दुनिया में एक सरताज बना दिया है. आपके आशीष का अभिलाषी-अख्तर खान "अकेला"कोटा-राजस्थान

4 टिप्‍पणियां:

  1. I’ve been following and enjoying your blog for a while now and would like to invite you to visit and perhaps follow me back. Sorry I took so long for the invitation.

    उत्तर देंहटाएं
  2. श्रीमान अख्तर खान अकेला जी, आपके ब्लॉग पर श्री द्विवेदी जी के विषय में लेख पढ़ा था. आपकी अनुमति के अनुसार मैंने कुछ संपादन किया है. जैसी मुझे जानकारी थी. उसी के आधार पर शब्दों का उच्चारण सही किया है. किसी प्रकार की कोई गलती रह गई हो तो अवगत जरुर करवाएं. श्री द्विवेदी जी के इस नाचीज़ शिष्य ने एक छोटी-सी कोशिश की. अपने गुरुवर को खुश करने की या यह कहे थोडा-सा अमूल का मक्खन लगाने की. मैं यहाँ पर अपना अनुभव बाँट रहा हूँ कि-मेरे ब्लॉग की रचना(स्थापना या निर्माण) भी उनके ब्लॉग को पढ़कर मिली जानकारी से हुई है. जब हालत बहुत खराब थें तब ही उनका ब्लॉग पढ़ा और अपनी अनेकों समस्याओं का निवारण मिला. एक के बाद एक प्रश्नों का उत्तर देकर मेरी बहुत मदद की है. मैं बहुत ज्यादा जिज्ञासु प्रवृति का होने के कारण ही अपने गुरुवर श्री दिनेश द्विवेदी जी को आये दिनों परेशान करता रहता हूँ. मेरे प्रश्नों के उत्तर पर मेरे गुरुवर को सबसे ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है. इसलिए मेरे प्रश्नों का उत्तर देने में गुरुवर अक्सर एक-दो महिना का समय लेते हैं. जब उत्तर देते हैं तब जवाब न होकर एक नई ही दिशा(कानून) से अवगत करवाते हैं.

    उत्तर देंहटाएं
  3. इस टिप्पणी को एक ब्लॉग व्यवस्थापक द्वारा हटा दिया गया है.

    उत्तर देंहटाएं
  4. श्री द्विवेदी जी पर सुन्दर आलेख के लिए बधाई...

    उत्तर देंहटाएं

दोस्तों, कुछ गिले-शिकवे और कुछ सुझाव भी देते जाओ. जनाब! मेरा यह ब्लॉग आप सभी भाईयों का अपना ब्लॉग है. इसमें आपका स्वागत है. इसकी गलतियों (दोषों व कमियों) को सुधारने के लिए मेहरबानी करके मुझे सुझाव दें. मैं आपका आभारी रहूँगा. अख्तर खान "अकेला" कोटा(राजस्थान)

Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...