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07 September 2010

राजस्थान में ११ लाख बच्चे अभी भी शिक्षा से वंचित

राजस्थान में शिक्षा गारंटी योजना लागु होने मदरसा शिक्षा, राजीवगांधी शिक्षा मिशन और संकुल योजना लागू होने के बाद भी यहाँ एक सर्वेक्षण के मुताबिक ११ लाख बच्चे अभी भी निरक्षर हें और शिक्षा से दूर हें । राजस्थान में शिक्षा की बड़ी बड़ी बातें करने वाली इस सरकार के लियें यह एक कलंकित कर देने वाला आंकड़ा हे क्योंकि यह सर्वेक्षण किसी निजी संस्था का नहीं बल्कि सरकारी सर्वेक्षण हे , राजस्थान में इस तरह के शिक्षा के आंकड़े आने के बाद यहाँ इन निरक्षर बच्चों को शिक्षित करने के लियें क्या योजना बनाई जाये इस मामले में सरकार को कोई भविष्य योजना तय्यार करना चाहिए , क्यूंकि ११ लाख निरक्षर बच्चों का यह आंकड़ा राजस्थान में बहुत बढा आंकड़ा हे । अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

अनंत चतुर्दशी की त्य्यारिया पूरी

कोटा में आगामी २२ सितम्बर को निकलने वाले ऐतिहासिक धार्मिक जुलुस और अखाड़े प्रदर्शन की तय्यरियाँ पूरी कर ली गयी हें इस काम को अंजाम देने के लियें कल यहाँ कलेक्ट्रेट में शांति समिति की बैठक भी आयोजित की गयी जिसमें पुराने मार्ग से ही जुलुस निकालने के मामले में आम सहमती बनी हे । इस सहमती के बाद कोटा में सुरक्षा के कड़े प्रबंध करते हुए बाहर से भी अतिरिक्त पुलिस बल बुलाया जा रहा हे साथ ही कोटा में निषेधाज्ञा लगा कर धारा १४४ लागू कर दी गयी हे , यहाँ झांकियों के विसर्जन के लियें विशेष योजना तय्यार कर रही हे पिछले दिनों इस जुलुस को लेकर कोटा में दंगे फसाद का माहोल हो जाने से यहाँ स्थिति तनाव पूर्ण हो गयी थी तब से ही यहाँ कोटा में इस जुलुस के दोरान सुरक्षा के कड़े प्रबंध किये जाते हें और विशेष अह्तियाती कदम उठे जाते हें इस जुलुस के निकलने के बाद प्रशासन राहत की सांस लेता हे। अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

अनंत चतुर्दशी की त्य्यारिया पूरी

कोटा में अनंत चतुर्दर्शी के आगामी २२ सितम्बर को आयोजित होने वाले जुलुस में झांकियों और एनी प्रदर्शन की तय्यारियों ज़ोरों पर हें यहाँ जुलुस और प्रदर्शन की त्य्यारियों को देखते हुए कोटा जिला प्रशासन ने कल शानित समिति की बैठक आयोजित की जिसमें जुलुस पुराने मार्ग से ही निकलने पर आम सहमती बनी इस व्यवस्था को देखते हुए जुलुस मार्ग की सफाई तारों हटाने का कम शरू हो गया हे

राहुल जी की सभा में जूते चप्पलों पर पाबंदी

कोंग्रेस के युवराज राहुल गांधी के महाराष्ट्र में अकोला यात्रा के दोरान महाराष्ट्र सरकार ना जाने किन कारणों से डर गयी और राहुल गाँधी की सभा में सुरक्षा के कड़े प्रबंध करते हुए सभा में आने वाले लोगों के जूतों चप्पलों बेल्ट और जेवरों तक पर पाबंदी लगा दी । हिन्दुस्तान में यह पहला मोका हे के किसिस नेता की ऍम सबा में इस तरह की पाबंदी लगाई गयी हो यह पाबंदी किसी सूचना के चलते लगाई गयी या फिर किसी अह्तियती कदम के तहत यह पाबंदी थी यकीन इस लोकतंत्र में अगर इस तरह का डर खोफ का वातावरण आम जनता के साथ होने वाली जनसभाओं में होने लगी तो फिर तो यह सब देश के लोकतंत्र के लियें खतरा ही कहा जायगा , अब तो ना जाने किन किन सभाओं में इस तरह की पाबन्दिया लगेंगीं । अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

पार्षद को जनता ने घेर कर सफाई करवाई

अपने इलाके में हाथ जोड़ कर वोट लेने और बाद में अपने कर्तव्यों को भूलकर मजे करने वाले जनप्रतिनिधि पार्षद को कल जनता ने सबक सिखा दिया और कोटा नगर निगम के वार २९ के पार्षद जिग्नेश शाह को कल जनता ने घेर कर पहले तो वोह भागने ना पायें इसलियें उनके स्कूटर की हवा निकाल दी फिर उन्हें एक एक कर उनकी गलतिया लापरवाहिया गिना कर उनकी गलतियों का एहसास कराया इस लोकतान्त्रिक विरोध के चलते जनाब पार्षद जी की भी आँखें खुल गयीं उन्होंने खुद जब यह नारकीय माहोल जनता की आँखों से देखा तो वोह खुद परेशान हो चले और अब उन्होंने अपने वार्ड में पुरानी लापरवाही की गलतिया भुला कर फिर से सभी सुख सुविधाओं के लियें संघर्ष करने की शपथ ली हे और अब वोह इस इलाके में सफाई और जनसुविधाएं उपलब्ध करने के लियें भी गम्भीर हें। अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

मीडिया में सरकारी लोगों के आने से चापलूसी बढ़ी

राजस्थान के मीडिया खासकर इलेक्ट्रोनिक मीडिया में रिटायर्ड अधिकारी के आने से चापलूसी चमचागिरी की खबरों में बदोतरी हुई हे हालत यह हें के रोज़ मंत्रियों और अधिकारीयों की बिना किसी बजह के तारीफे देखते देखते कम से कम इ टी वी पर तो जनता को उबकाई आने लगी हे । इ टी वी राजस्थान राजस्थान में बहतरीन प्रदर्शन कर रहा था लेकिन अचानक अप्रत्याशित तरीके से सेवानिव्रत्त आर ऐ एस जो बाद में पदोन्नति होकर आई ऐ एस से सेवानिव्रत्त हुए उनके इस इलेक्ट्रोनिक मिडिया के इंचार्ज बन जाने से मिडिया में रोज़ मर्रा अधिकारीयों और मंत्रियों मुख्यमंत्री की बिना कुछ करे तारीफें शुरू कर दी जाती हें ब्रेर्किंग न्यूज़ के नाम पर इनकी तारीफें इस हद तक बढ़ जाती हें के आखिर दर्शक को चेनल पलटना ही पढ़ता हे कहते हें के इन्सान अपना मूल स्वभाव नहीं बदलता हे और अधिकारी कर्मचारी का जीवन नेताओं और मंत्रियों को यस सर यस सर करता हुआ गुजरता हे ऐसे हालातों में उसे एक सच उजागर कर जनता को इंसाफ की ज़िम्मेदारी भी दी जाती हे तो फिर भी वोह मंत्रियों और सरकार और सरकार के नुमैन्दों के आगे यस सर यस सर ही करेगा इससे चाहे वोह अपने चेनल के लियें व्यापार ले ले लेकिन जनता को तो कोई लाभ नहीं मिल रहा हे सरकार को उसके विभागों के भ्रस्ताचार,अनियमितताओं की खबरें नहीं मिल रही हे सरकार को तो सिर्फ यह दिखया जा रहा हे के सरकार जो कर रही हे वही सही हे और जनता सरकार को भगवान मान रही हे बस यही सरकार के ताबूत में आखरी कील ठोकने के समान हे और पत्रकारिता के मूल्य सिद्धांतों की तो इन्होने ऐसी की तेसी कर के रख ही दी हे वेसे भी आज के माहोल में पत्रकारिता की बात करना एक सपना सा लगता हे जो आज के युग में इतिहास का हिस्सा बन गयी हे। अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

राजस्थान में ७० मोतों का ज़िम्मेदार कोन

राजथान में सरकार की हठधर्मिता और चिकित्सकों की हडताली जिद के कारण जोधपुर जयपुर और कोटा में ७० से भी अधिक मरीजों की म़ोत हो गयी हे , इंसान के भेष में हेवान बने इन चिकित्सकों को खुदा ने तो मसीहा बनाया था लेकिन यही डोक्टर इन निर्दोषों की म़ोत का कारण बन यमराज बन गये । बात कुछ नहीं केवल जिद की थी और राज्य सरकार ने लोगों की बेहिसाब मोतों के बाद डॉक्टरों की सभी मांगें मानकर उन्हें आश्वासन देकर हडताल तुडवा दी , राजस्थान सरकार आखिर हर बार बिना किसी वजह के ऐसे हालात बनाती हे के जिद के कारण हडताल और फिर कानून व्यवथा में बिगाड़ होता हे कुछ दिनों बाद सरकार बातचीत करती हे और फिर हडताल खत्म करवाती हे आखिर राजस्थान सरकार ऐसी असंवेदनशील केसे हो रही हे के वोह किसी भी मुद्दे पर बिना हड़ताल के कोई बात सुनने को तय्यार नहीं हे , राजस्थान में चिकित्सकों का डिमांड चार्टर सरकार को पहले से ही पता था और सरकार चाहती तो बिना चिकित्सकों को हड़ताल के पहले ही बातचीत कर चिकित्सकों को खुश कर सकती थी आखिर जो मनागें ७२ घंटे की चिकित्सकों की हडताल के बाद सरकार ने मानी वही मांगे अगर सरकार बिना हडताल के मान लेती तो सरकार का क्या बिगड़ जाता कमसे कम राजस्थान में ७० बे म़ोत मरे मरीजों की जन तो बचाई जा सकती थी राजस्थान सरकार का दिमाग इन दिनों ना जाने कहां हे स्न्वेद्न्शिलता का नारा देने वाली यह सरकार हर तबके के साथ असंवेदनशीलता बता रही हे वकील हों चाहे ग्रामसेवक हों चाहे मास्टर हों चाहे सरपंच हों चाहे नगर निगम के पार्षद हों सरकार कहीं भी किसी भी तरह खुद आगे रह कर कोई कद नहीं उठा रही हे जब सभी वर्ग को लोग हडताल पर जाते हें तो उन्हें उपेक्षित कर हिंसक हडताल के लियें उकसाया जाता हे और फिर उनसे बात की जाती हे यह केसी संवेदनशीलता के जहाँ हर वर्ग की समस्याओं के कारण और निवारण का खुद सरकार को अपनी सर्वेक्षण विशेषग्य टीम से सर्वेक्षण करवाकर समस्याओं का निराकरण बिना मांगे या हडताल करे करवाना चाहिए वहां अनावश्यक माहोल बिगाड़ कर सरकार ऐसा कर रही हे , राजथान में जहाँ तक डॉक्टरों का सवाल हे डॉक्टरों के खिलाफ फोजदारी मुकदमे दर्ज होने और सरकार ने उच्चतम न्यायालय के दिशा निर्देश के अनुसार पुलिस अधीक्षकों को आवश्यक निर्देश दे रखे हें इतना ही नहीं चिकित्सकों के साथ मारपिटाई के मामले में चिकित्सक सुरक्षा कानून बनाया हे जिसके तहत मारपीट करने वाले के विरुद्ध अजमानतीय अपराध दर्ज होता हे फिर चिकित्सकों को किस मामले में परेशानी हो सकती हे सरकार जिसने बिना किसी वजह इस हडताल को तूल दिया हे और चिकित्सकों ने भी लोगों की जो हत्याएं इलाज नहीं कर की हें इसके लियें सरकार और चिकित्सक दोनों बराबर के दोषी हें लेकिन इन्हें सजा कोन देगा । अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

स्वायत्त शासन मंत्री ने कोटा का हाल देख कर तीन इंजीनियरों को निलम्बित किया

कोटा के कोंग्रेस जिला अध्यक्ष , कोटा के विधायक और राजस्थान सरकार में गृह मंत्री स्वायत्त शासन शहरी विकास मंत्री ने कल लगातार भास्कर में छप रही खबरों से प्रभावित होकर शहर की सडकें और गंदगी के हालत का निरिक्षण किया, शहर की सडकों के निर्माण की ज़िम्मेदारी नगर विकास न्यास और नगर निगम की हे साथ ही साफ सफाई की ज़िम्मेदारी और आवारा मवेशियों को पकड़ने की ज़िम्मेदारी भी नगर निगम की हे , धारीवाल जी जब अपने अमले के साथ शहर की सडकों का निरिक्षण करने निकले तो वोह और उनके साथ गये अधिकारी गड्डों में सडकें तलाशते रहे लेकिन कई स्थानं पर सडकें मिली ही नहीं और गड्डों ने जनाब धारीवाल जी को भी तंग कर दिया चारों तरफ गंदगी के ढेर और बार बार उनकी कार के आगे आवारा जानवरों के आ जाने से उन्होंने शहर की नारकीय स्थिति से खुद आमना सामना क्या बस फिर क्या था आग बबूला न्त्री जी ने इसके लियें ज़िम्मेदार तीन अधिशासी अभियंता महेंद्र माथुर ,औ पी वर्मा,भूपेन्द्र माथुर को तुरंत निलम्बित कर जयपुर हाजरी देने के लियें निर्देशित क्या हे । इतना सब होने के बाद भी कोटा में सडकों का रख रखाव केसे हो , सफाई व्यवस्था केसे सुचारू हो और आवारा जानवरों की समस्या से केसे निजत पायें इस मामले में अभी भी महापोर या कोटा कलेक्टर नें कोई कारगर कदम नहीं उठाये हें देखते हें मंत्री जी के इस गुस्से से शहर की हालत सुधरती हे या नहीं वेसे तो शहर की इस दुर्दशा के लियें सीधे तोर पर नगर विकास न्यास के अध्यक्ष जो खुद कलेक्टर हें और नगर निगम की महापोर खुद रत्ना जेन हें लेकिन उनके लियें तो कहावत हे जब कोतवाल ही अपने हें तो फिर डर काहे का ? अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

मेरे ब्लॉग भी हूए हजार

मेरे दोस्तों ,भाईयों,बहनों,माताओं,बुजुर्गों ,दुश्मनों आज मुझे आप लोगो के आशीर्वाद से पुरे एक हजार ब्लॉग लिख कर ह्जार्र ब्लोगर्स यूनियन में शामिल होने का अवसर मिला हे , आज का दिन मेरे लियें रमजान का महीना, शबे कद्र इबादत की रात,और जन्माष्टमी का अवसर होने से मेरी ख़ुशी का एहसास और बढा देता हे । मेरे दोस्तों बुजुर्गों मेने अप्रेल महीने में ब्लॉग लिखने की शुरुआत की थी में हिंदी टाइपिंग का थोडा भी जानकार नहीं हूँ ब्लॉग ट्रान्सलेशन की सुविधा का मेने फायदा उठाया और लिखना शुरू कर दिया मुझे ब्लॉग लिखने और पोस्ट करने के अलावा बहुत कुछ नहीं आता हे उझे यह भी पता नहीं की ब्लॉग को चिट्ठा जगत, ब्लोग्वानी और दुसरे ब्लॉग पर रजिस्ट्रेशन कराने की क्या प्रक्रिया हे इसीलियें मेरा ब्लॉग सिर्फ फोलोवर्स साथियों के भरोसे चला लेकिन मुझे गर हे के चार माह के इस सफर में मेरा ब्लोगर की दुनिया के सभी साथियों ने दिल से साथ दिया कुछ एक अहंकारी लोगों को अगर छोड़ दें तो अधिकतम लोगों भाइयों और बहनों का मुझे आशीर्वाद मिला उन्होंने मेरा कदम कदम पर उत्साहवर्द्धन और मार्गदर्शन किया कुछ लोगों ने तो मेरी गलती पर मुझे डाट भी लगाई मुझे बुरा नहीं लगा में एक अकेला खुशनसीब था जिसे इस ब्लोगर की दुनिया में जब महाभारत छिड़ा था एक दुसरे को नीचा दिखाने की बीमारी का सिंड्रोम ब्लोगर दुनिया में फेल गया था कुछ लोग ब्लोगर की दुनिया में भन्न का अपमान कर रहे तहे तो कुछ अपनी फितरत के मुताबिक इस दुनिया में साम्प्रदायिकता की गंदगी फेला रहे थे लेकिन यह ब्लोगर की डी उनिया अब दश का पांचवां स्तम्भ बन गया हे और इसे प्रित्न मिडिया ने भी अहमियत देना शुरू कर दिया हे में जानता हूँ के अपने इन हजार ब्लोगों में मेने लाखों गलतियाँ की हें लेकिन मेरा जूनून हे जो मुझे रमजान के महीने में पुरे एक हजार ब्लॉग का आंकड़ा पार करने की जिद पैदा किये हूए था दोस्तों मेने अपनी वकालत के वक्त में से काफी कुछ वक्त इस ब्लोगर की दुनिया के लियें चुराया और कच्चे पक्के ब्लॉग लिखने की शुरुआत कर कुछ बहुत बहुत अच्छे ब्लॉग भी लिखे हें में अपने मुंह मिया मिट्ठू बनना नहीं चाहता मेरे साथिग्द इस चचाई को शायद जानते हें , मेरी मेरे साथियों से अपील हे के इस ब्लोगर की दुनिया में छोटा बढा ,अपना पराया,अमीर गरीब,हिन्दू मुस्लिम, हिंदी भाषी गेर हिन्दीभाषी का विवाद छोड़ कर इस दुनिया को खुबसूरत बनाये इस परिवार को भाईचारे सदभावना की खाद से सींच कर स्वर्ग बना डालें , मेने हजार ब्लॉग जब लिखे तब एक मोलवी हजार मोतियों वाली माला लेकर खुदा का नाम लेने के लियें जब पढाई कर रहे थे तो उन्होंने कहा के में हज़ा पढ़ रहा हूँ यानी खुदा का नाम हजार बार लेने की मालाएं भी बनी हें और इसे गिन कर नाम लेने की प्रक्रिया को हजारा पढना कहते हें मेने सोचा चलो मेने भी ब्लॉग की दुनिया में सेंचुरी लगाकर हजारा पढने की नहीं तो हजार ब्लॉग लिखने की हसरत तो पूरी कर ली और में इस मोके पर खुदा का शुक्र भी अदा करूंगा क्योंकि खुदा ने मुझे ताकत दी जिंदगी दी लिखने का एहसास दिया और आप जेसे प्यारे प्यारे बहन भाई दोस्त दुश्मन माताएं बुजुर्गों का साथ दिया नहीं तो जिंदगी तो चिराग हे खड़ा कब इसे बुझा देता और हसरत दिल की दिल में रह जाती । मेरी फ़ालतू की बकवास आपने धेर्य और नीम से पढ़ी इसके लियें भी में आपका शुक्रगुज़ार हूँ । अख्तर कहां अकेला कोटा राजस्थान

06 September 2010

पंवार के बाद अब मनमोहन सिंह कहते हें मुफ्त गेहूं नहीं देंगे

देश में गोदामों में अरबों रूपये का गेहूं सड रहा हे , लगातार गेहूं सड़ने की घटना पर सरकारी कुप्रबंध के चलते आखिर सुप्रीम कोर्ट को इस मामले की समीक्षा कर सरकार को निर्देश देना पढ़े के गोदामों में गेहूं सडाओ मत बलके गरीबों में मुफ्त बाँट दो , सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश से गरीब बहुत खुश थे और इस इन्तिज़ार में थे के उन्हें कमसे कम कुछ दिन तो मुफ्त गेहूं मिल जाएगा लेकिन क्रषि मंत्री शरद पंवार ने सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की धज्जियां ही नहीं उडायीं बल्की सुप्रीम कोर्ट का आदेश मानने से इनकार कर दिया बस इस बयान को सुनकर सुनकर सुप्रीमकोर्ट का गुस्सा वाजिब था सुप्रीम कोर्ट ने दो तुक शब्दों में पंवार से कहा के यह कोई निर्देश नहीं बलके पालना करने के लीयें आदेश हे सुप्रीमकोर्ट की इस सख्त लताड़ से एक बार तो शरद पंवार की घिग्गी बंध गयी क्यूंकि देश के गोदामों में रखा अनाज अगर सडाया नहीं जाता हे और गरीबों में मुफ्त बांटा जाता हे तो देश में अनाज की खपत कम होने से अनाज के मूल्य कम होने की पूरी सम्भावना थी और इससे जनता को फायदा और व्यापारियों और कालाबाजारियो को भयंककर नुकसान था , बस इसी लियें शरद पंवार घबरा गये लेकिन अब उनके इस घोटाले में प्रधानमन्त्री मनमोहन सिंह खुल कर सामने आ गये हें मनमोहन सिंह नहीं चाहते के अनाज गरीबों में बांटे वोह कहते हें के अनाज गोदामों में सड जाये लेकिन गरीबों के पास मुफ्त नहीं जाये क्योंकि एक अर्थशास्त्री होने के नाते वोह खूब जानते हें के अरबों रूपये का अनाज अगर मुफ्त में बाजारों में चला गया तो देश में अचानक खाद्य पदार्थों के मूल्य कम हो जायेंगे और व्यापारियों को अरबों रूपये का गोदामों में पढ़ा अनाज कोडियों के दाम बेचना पढ़ेगा मनमोहन ने शायद व्यापारियों से पूर्व समझोता कर रखा हे इसी लियें वोह इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के आदेशों को भी खुलेआम मानने से इनकार करते हुए ऐसे आदेशों को अमर्यादित तरीके से ललकार रहे हें और ख रहे हें के सुप्रीम कोर्ट को नीतिगत निर्णयों में दखल नहीं देना चाहिए में पुन्चता हूँ क्या देश के अनाज को गोदामों में सड़ा कर फेक देना सरकार का नीतिगत निर्णय हे अगर नहीं तो फिर इस आदेश को मानने में क्या बुराई हे , सुप्रीम कोर्ट के आदेश नहीं मानने के मामले में अब मनमोहन ने विश्व हिन्दू परिषद की बराबरी कर ली हे अयोध्या मामले में भाजपा और विश्व हिन्दू परिषद अदालत का आदेश मानने से इनकार करते हें तो हमारे मनमोहन जी गेंहूँ सड़ने से पहले ही गरीबों को बाटने का आदेश मानने से इंकार करते हें वाह भाई वाह मनमोहन जी देश के दुसरे मामलों में आपने लाखों कामों को जो गरीबों के हित में हे अदालतों के आदेश का बहाना बनाकर अटका रखा हे एक मुफ्त गेहूं बांटने का आदेश आपके चहेते व्यापारियों को नुकसान पहुंचा रहे हें तो आप सुप्रीम कोर्ट को ललकारने लगे हे । अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

नक्सलियों ने तीनों बंधक छोड़े शुक्र हे खुदा का

बिहार में अपह्रत तिन पुलिस कर्मी आज नक्सली गिरफ्त से रिहा हो गये उन्हें सुरक्षित रिहा देख कर सभी लोगों ने राहत की साँस ली हे कल नितीश ने इस मामले में सर्वदलीय बैठक बुलाई थी और उसमें बंधकों को चुदवाने पर आम सहमती बनी थी । एक बधक की नक्सलियों ने बेरहमी से हत्या कर अपना संदेश रिहा किये गये बाक़ी तीनों बंधकों की भी हत्या कर देने के मामले में भी छोड़ा था,बंधकों की रिहाई त्योहारों के इस मोके पर ख़ुशी की बात हे इस मामले में खुदा का जितना भी शुक्र अदा करें वोह कम हे लेकिन बंधों की नाटकीय रिहाई देश के लोगों के गले नहीं उतर रही हे आखिर जो नक्सली अपने साथियों की रिहाई की मांग को लेकर खफा तहे और उन्होंने गुस्से में अपह्रत जवानों में से एक की निर्मम हत्या कर दी फिर सर्वदलीय बैठक के बाद आखिर ऐसा कोनसा जादू हो गया के चुनाव आचार संहिता लगने के एक दिन पहले खतरनाक नक्सली बड़े प्यार से अपह्रत तीनों पुलिस कर्मियों को सुरक्षित छोड़ देते हें बस इसी मामले को लेकर आज देश असमंजस में हे और इन सवालों के जवाब तलाश रहा हे लेकिन ख़ुशी इस बात की हे के बंधक सुरक्षित लोट आये हें। अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

बिहार में चुनाव की घोषणा

देश के सबसे खतरे वाला राज्य माने जाने वाले बिहार में चुनाव की घोषणा होने से सभी पार्टियाँ जोड़ तोड़ में लग गयी हें , बिहर की २४३ विधानसभा सीटों के लियें इस बार कुल ६ चरणों में पुरे डेड माह में चुनाव होंगे , इस दोरान राज्य की कानून व्यवस्था देखते हुए वहां चुनाव आयोग सुरक्षा के कड़े प्रबंध करने के मुड में हे बिहार में आज से ही चुनाव आचार संहिता लग गयी हे , चुनाव की घोषणा के बाद नितीश और भाजपा गठ्बन्धन अपनी पुरानी लड़ाई को भुला कर फिर से नई पारी खेलने की कोशिश में लगा हे जबकि कोंग्रेस अपनी अकेले की ताकत के बल पर लालू और पासवान गठ्बन्धन का खेल बिगाड़ने के मुड में हे बिहार में इस बार सबसे ज्यादा नक्सली मुद्दा छाया रहेगा और अगर सितम्बर में अयोध्या का फेसला आ जाता हे तो फिर भाजपा एक बार फिर इस नाम पर वोटों की राजनीति करने के मुड में हे कुल मिला कर इस बार कोंग्रेस के अकेले चुनाव लड़ने से नितीश भाजपा गठ्बन्धन को फायदा तो होगा लेकिन फिर भी लालू और पासवान गठ्बन्धन से उनकी कड़ी टक्कर हे वहां हिंसा की घटनाओं की पूर्व सूचनाएं होने से कानून व्यवस्था को लेकर चुनाव आयोग प्रूर्ण रूप से चोकस हे। अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

घर से निकलते ही आवारा जानवर और गड्डे मिल गये

कोटा में पहले भाजपा का महापोर था
में और मेरी तरह कई लोग
घर से
इसलियें नहीं निकलते तहे
क्यूंकि
भाजपा बोर्ड में शहर की सडकें खुदी थीं
सडको पर आवारा जानवरों का उत्पात था
चुनाव हुए हमने मेंहनत की
कोंग्रेस की दिल्ली जयपुर की सरकार देख कर
कोटा में भी कोंग्रेस की माह्पोर हो
इसलियें कड़ी से कड़ी जोड़ने के लियें मेहनत की
हमारी मेहनत रंग लायी कड़ी से कड़ी जुड़ गयी और महापोर कोंग्रेस की बन गयीं
फिर कड़ी से कड़ी जुडी
कोटा के मंत्री जी को स्वायत्त शासन यानि शहरी विकास मंत्रालय मिल गया
में बहुत खुश हुआ
सोचा चलो अबतो कड़ी से कड़ी जुड़ गयी हे
मंत्री भी अपने सरकर भी अपनी महापोर भी अपनी
अब तो शहर इ सफाई सड़के सब चका चक होंगी
दोस्तों में बाहर निकला मोटर साइकल ली
और सडक पर चल दिया
पहले तो एक नाली पर पत्थर ना था वहां धम से गिरा
फिर उठा आगे गंदगी का ढेर था उसमें मोटर साइकल का पहिया फिसल गया
फिर उठा थोडा चलता खड्डे में मोटर साइकल सहित गिर गया
टूटी मोटर साइकल बिगड़ी शक्ल लेकर में डरा सहमा
घर की तरफ मुडा सोचा घर चलो
बस फिर क्या था दो लावारिस गायें लडती हुई आयीं
मेंने बचने की कोशिश की लेकिन वोह मुझसे टकराई
में फिर गिरा धडाम से एक गएँ मुझे कुचलती हुई निकल गयी
में कराहता रहा चिलाता रहा
चेहरे और बदन पर ज़ख्म ही ज़ख्म थे
मोटर साइकल टूटी थी
में चुप छाप उठा और घर चल दिया
में सोचता के कहीं लोग नगर निगम की लाईट में मेरी यह दुर्दशा ना देख लें
सो में कपट छुपता जाने की सोचने लगा लेकिन भला हो नगर निगम का
जो मेरी लुटी पिटी हालत लोग ना देख सकें इसलियें नगर निगम की लाइटें
हमेशां की तरह बंद मिली मेने तसल्ली की सोचा
चलो मुझे इस हालत में
भाजपा के नेताओं ने तो नहीं देखा
नहीं तो बताओ में उन्हें
कड़ी से कड़ी जोड़ने और शहर सुधारने की डींगें मारने का क्या जवाब देता
मेने दिल ही दिल नगर निगम की महापोर को धन्यवाद दिया
सोचा चलो हमेशां की तरह रत की रोड लाइटें बंद थीं
वरना लोग मुझे इस हालत में देखते तो
मेरी सरकार की दरिंदगी के चलते
में तो शर्म से ही मर जाता
सोचा चलो जान बची लाखों पाए
लोट के बुद्धू घर को ए।
अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

रघु शर्मा ने भरत सिंह को फिर मानसिक रोगी बताया

कोंग्रेस में विधायक रघु शर्मा और राजस्थान सरकार में मंत्री भरत सिंह के बीच वाक् युद्ध थमने का नाम नहीं ले रहा हे कभी अशोक गहलोत के खासम खास रहे रघु शर्मा अब अशोक गहलोत की आँख की किरकिरी बन गये हें इसलियें रघु शर्मा को खुद की उपस्थिति का एहसास कराने के लियें कुछ ना कुछ जतन करना पढ़ता हे इसी क्रम के चलते हाल ही में विधानसभा में कोंग्रेस विधायक रघु शर्मा ने मंत्री भरत सिंह को मानसिक रोगी बताते हुए इनका इलाज डोक्टर से कराने की सलाह दी थी भरत सिंह उस वक्त तो खामोश रहे लेकिन कल शिक्षक दिव के अवसर पर उन्होंने अपनी भडास निकालते हुए कहा के आज के शिक्षक सही नेतिक शिक्षा नहीं दे रहे हें और इसीलियें ऐसी शिक्षा के चलते लोग मेरे खिलाफ इस तरह का बयान दे रहे हें मंत्री भरत सिंह के इस बयान से रघु शर्मा और भडक गये हें और उन्होंने कल फिर आपा खोते हुए कह डाला के में सही कहा था क्यूँ की मेने भरत सिंह के लियें जो कहा था विधानसभा में कहा था वहां उन्होंने जवाब नहीं दिया और बाहर आज बयान दे रहे हें इसलिए भरत सिंह का मानसिक इलाज जरूरी हो गया हे इस मामले में सी पी जोशी ने पिछले दिनों एक रोजा आफ्टर कार्यक्रम में इस बयानबाज़ी को गभीरता से लेकर इसे गलत बताते हुए ऐसी बयाना बजी से बचने की सलाह दी थी लेकिन देखों कोंग्रेस के अध्यक्ष की बात ना तो भरत सिंह मानते हें ना ही विधायक रघु शर्मा उनकी कोई बात को तवज्जो देते हें इसीलियें सार्वजनिक रूप से इस तरह की बयानबाज़ी की जा रही हे जिससे अनुशासन टूट रहा हे। अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

कोंग्रेस के जवाहर जेन का निधन

राजस्थान के कोंग्रेस में पूर्व प्रदेश कोषाध्यक्ष और वरिष्ट कोंग्रेसी नेता जवाहर जेन का कल एक सडक दुर्घटना में घायल होने के बाद कोटा में निधन हो गया । उनके निधन पर राजस्थान के गृह मंत्री और कोटा जिला कोंग्रेस के अध्यक्ष शांति कुमार धारीवाल ने उनके पार्थिव शरीर पर पुष्प चक्र अर्पित कर अफ़सोस जताया । जवाहर जेन पूर्व केन्द्रीय मंत्री भुवनेश चतुवेदी और मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के नजदीकियों में से रहे हें उन्होंने कोंग्रेस सन्गठन का काम बड़ी इमानदारी से क्या हे , आज कोंग्रेस को उनका योगदान हमेशां यद् रहेगा लेकिन अफ़सोस इस बात पर हे के उनके निधन पर मुख्यमंत्री कार्यालय से अफ़सोस का संदेश भी नहीं आ पाया हे । अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

05 September 2010

आज मस्जिदें सजेंगी कब्रिस्तानों में होगी रौशनी

आज विश्व भर के मुसलमान अपने गुनाहों से तोबा और इबादत की बेशकीमती रात में रात भर खुदा से अपने गुनाहों की तोबा कर इबादत करेंगे शबे कद्र यानी इज्जत वाली रत और इसी रात को मुस्लिम धर्म की आयतें जिन्हें बाद में करान मजीद हुआ अवतरित हुआ था मुसलमान मुकम्मल मुसलमान हुआ था उसे खुदाई कानून और हुक्म के जरियेदुनियावी कायदे कानून और हुदा के हुक्म के बारे मन जानकारी हुई थी जिब्रील अलेहस्स्लाम ने इस मोके पर पूरा करान मजीद हुजुर सल्लाल लाहो अलेह व्स्ल्लल्म को सुनाया था , इबादत की इस रात को लोग अपने पूर्वजो को याद करने के लियें कब्रिस्तानों में जाकर दुआ मांगते हें और मस्जिद हो चाहे हो कब्रिस्तान या हो मजार वहां रौशनी लगा कर उस जगह को रोशन करते हें और इस मुकद्दस रात को पूरी रात इबादत करते हें ।
हमारे मुस्लिम कुछ नेताओं ने इस मुकद्दस रात को भी राजनीति से जोड़ दिया हे और राजनीति में लगे मोलवी मोलाना इस रात को किसी भी मजार या कब्रिस्तान में कोई ना कोई कार्यक्रम आयोजित कर अख़बार वालों को बुलाकर फोटो खिचवाते हे और फिर इसकी राजनितिक खबरें बनवा कर उनके साथ कितने मुसलमान हें यह खबरे लेजाकर हाईकमान को बताते हें यह एक अफ्सोसो नाक पहलु हे। अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

हथियार पकड़ने गये थे हथियार गुमा बेठे

कोटा के विज्ञानं नगर पुलिस के अधिकारी पिछले दिनों एक सुचना पर झालावाड रोड हथियार पकड़ने के लियें खुद सरकारी पिस्तोल और दस गोलियां मालखाने से इश्यु करा कर ले गये थे और उन्होंने मोके पर जाकर एक जीप को जब्त भी क्या , लेकिन जब तने पर वापस लोटे तो उनके पास पिस्टल तो थी लेकिन पिस्टल में दस राउंड गोलिया गायब थीं अब कोटा के वरिष्ट पुलिस अधिकारी लक्ष्मण गोड इस मामले की जांच कर रहे हें और थानाधिकारी के नाम से इश्यु इस पितोल और कारतूस मामले में ऐ एस आई को बली का बकरा बनाने की तय्यारी चल रही हे । हे ना मजेदार बात हथियार पकड़ने गयी पुलिस खुद का हथियार ही सुरक्षित नहीं रख सकी अब ऐसी उलिस को क्या खे कोई आगे मुठभेड़ का वक्त आ जाता तो क्या होता सब जानते हें । अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

वसुंधरा की सुरक्षा हटाई अधिकारीयों को पता ही नहीं

राजस्थान पुलिस भी अजीब हे नेताओं को यहाँ सुरक्षा दी जाती हे और बिना किसी सरकारी आदेश के पुलिस महानिरीक्षक और सरकार के मंत्रियों की जानकारी में मामला लाये बगेर उनकी सुरक्षा नेताओं को पूर्व सुचना दिए बगेर अचानक हटा ली जाती हे वोह भी ऐसे बक्त पर जब नेताओं को जान का खतरा बना हुआ हे , जिन नेताओं को पहले किसी ना किसी वजह के चलते सुरक्षा उपलब्ध कराई हे आखिर उनकी सुरक्षा अचानक किन कारणों से किस अधिकारी के आदेश से हटाई गयी इसे कोई स्वीकार करने को तय्यार नहीं हे , राजस्थान के पुलिस महानिदेशक कहते हें के मुझे इस बारे में कोई जानकारी नहीं , नेता कहते हें के सुरक्षा हटाने के पहले हेमन सूचित नहीं क्या गया सरकार के अधिक्रत मंत्री कहते हें के मुझे कोई जानकारी नहीं तो क्या यह किसी आतंकवादी का खेल हे जो धोके से सुरक्षा हटाकर किसी नेता की हत्या करना चाहता हे , राजस्थान में पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा सिंधिया,डोक्टर किरोड़ीलाल मीणा , भजपा के ओम माथुर की सुरक्षा अचानक हटाने से भाजपा के नेताओं और विपक्ष में हडकम्प मचा हे साथ ही जनता के सामने सरकार के गेर जिम्मेदाराना रवय्ये के मामले में एक सवाल खड़ा हो गया हे । अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

जोधपुर में डॉक्टरों की हडताल से ६ बच्चों की म़ोत

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के ग्रह जिले में डॉक्टरों की हड़ताल पर हाईकोर्ट की पाबंदी के बाद भी बिना किसी कारण के डोक्टर हडताल पर चले गये और हडताल इतनी बेरहम की ६ नजात शिशु और असंख्य मरीज़ तडपते रहे लेकिन डोक्टर हेवान से इंसान नहीं बने और नतीजा मुख्यमंत्री के गर जिले में ६ नवजात बच्चों की म़ोत का कलंक मुख्यमंत्री के सर मंड गया ।
डॉक्टरों की हडताल एक गम्भीर बात हे और उससे ज़्यादा क्षेत्रीय प्रशासन की ढिलाई हे जो वैकल्पिक व्यवस्था करने में असमर्थ रहती हे हडताल किल भी करत हें लेकिन कोई भी हड़ताल हो पर्दे के पीछे जेल में बंद लोगों को केसे ना केसे छुड़ाने की जुगत में वकील अवश्य लगे रहते हें डॉक्टर्स की तरह मरणासन्न मरीज़ को खुदा के भरोसे कभी भी नहीं छोड़ते , जोधपुर में मासूम बच्चों की अकाल म़ोत सरकार की उस लापरवाही की भी पोल खोलती हे जिसमें राजस्थान हाईकोर्ट ने एक वर्ष पहले सरकार को डॉक्टरों की हडताल रोकने इससे निपटने और कार्यवाही करने के लियें कानून नियम बनाने के निर्देह दिए तहे लेकिन एक तरफ जहां राजस्थान में स्वेन फ्ल्यू की महामारी हे वही दूसरी तरफ आवश्यक सेवाओं के नियमों के तहत पाबन्द डॉक्टर्स की हडताल अमानवीय और उनकी डिगरिया छिनने के लियें काफी हे जोधपुर की गूंज कोटा में भी सुनाई दी हे और यहाँ के चिकित्सक भी हडताल पर चले गये हें वरिष्ट चिकित्सक आज से हडताल पर जाने की योजना बना रहे हें कोटा में स्वेन फ्ल्यू से अब तक अध दर्जन लोगों की म़ोत हो गयी हे और मोसम के चलते हजारों लोग खांसी ज़ुकाम की चपेट में हे जबकि सेकड़ों लोगों के टेस्ट के बाद स्वाइन फ्ल्यू पोजेटिव आया हे ऐसी विकट परिस्थितियों में चिकित्सकों की हडताल उन्हें जानवर नहीं तो क्या कहने को मजबूर करती हें। अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

कीमत आंसुओं की

आंसुओं की कीमत
सिर्फ वही लोग जानेंगे
जो हर वक्त
किसी को
याद रखते हें
दिल के गम
वोह जानेंगे
जो किसी की याद
हमेशां
अपने दिल में
रखेंगे
रिश्ते क्या होते हें
रिश्तों को तो बस
वही निभा पायेंगे
जो किसी को
अपना बनायेंगे।
अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

ब्रिटेन के हुक्मरान टोनी ब्लेर के जूते पढ़े

इराक युद्ध में अमेरिका के जोर्ज बुश के साथ कंधे से कंधा मिला कर अमानवीय कृत्य कर मानव नरसंहार करने वाले ब्रिटेन के तात्कालिक हुक्मरान टोनी ब्लेर को आज अर्जेन्टाइना में जूते चप्पल और अंडे टमाटर कहां पढ़े ,टोनी ब्लेयर जो मानवता के नाम पर कलंक रहे हें और जोर्ज बुश के साथ हिन्दुस्तानी नीतियों के मामले में पकिस्तान को भडका कर भारत पर अपना रोब जताने की कोशिश करते रहे हें उसी ब्लेर पर जब जूते चप्पल और अंडे टमाटर पधर रहे तहे तो विश्व का अमन पसंद तबका इसे देख कर खुशियाँ मना रहा था और खुदा का शुक्र अदा कर रहा था , कहते हें न जेसी करनी वेसी भरनी अभी तो आगे आगे देखिये होता हे क्या। अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

इंसान के जिस्म में शेतान

जिस्म इंसानी
आत्मा शेतानी
ऐ नक्सली
तुम केसे हिन्दुस्तानी ,
बिना किसी बात के
खून अपने भाइयों का
बहाते हो ,
मां की गोद उजाड़ते हो
तो दूसरी तरफ जवान महिलाओं को
विधवा बनाते हो ,
ऐ नक्सलियों
क्यूँ नाहक
निर्दोषों का खून बहाते हो ,
बात जो तुम्हारी हे
मांग जो तुम्हारी हे
जनता के जरिये
सरकार को क्यूँ नहीं बताते हो
नहीं सुनती गर सरकार तुम्हारी
तो फिर इस लोकतंत्र में
तुम क्यूँ अपना हक नहीं जताते हो
अरे दूसरी पार्टियों के देने से समर्थन
तो यह अच्छा हे
मुख्य धारा में जुड़ जाओ तुम
चुनाव तुम लड़ो
जित कर सरकार बनाओ तुम
फिर क्यूँ तुम अपनी
मांगें नहीं बताते हो
जो ज़िम्मेदार हें
तुम्हारी इस हालत के लियें
सबक उन्हें सिखाना हे
चेहरे उनके देश को दिखाना हे
ऐ नक्सलियों उठों खुद को खुद से मिलाओ
नजर जरा जिन्हें विधवा तुमने किया हे
उनसे आकर मिलाओ
निकल कर फेंक दो
आत्मा तुम्हारे अंदर घुसी राक्षसी
अब तुम भी आम हिन्दुस्तानी बन जाओ
इंसान बनो इंसानियत लाओ।
अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

04 September 2010

ठाकरे ने कोंग्रेस को सोनिया का पान का ठेला बताया , खुद ने खुद के गिरेबान में नहीं झाँका

सोनिया गाँधी के चोथी बार कोंग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने पर शिवसेना के बाल ठाकरे के पेट में दर्द होने लगा हे और इसका नतीजा यह रहा के इन जनाब ने अपने खुद के समाचार पत्र सामना में कोंग्रेस को सोनिया गाँधी की चाय का ठा बताया हे सामना में ठाकरे ने लिखा हे के कोंग्रेस की चाय का ठेला पहले तो नेहरु फिर इंदिरा और फिर राजीव गाँधी ने चलाया हे और अब १२ साल से सोनिया गांधी चला रही हें । अब हम शिवसेना सुप्रीमो बाल ठाकरे की बात करते हें ठाकरे जो खुद को सत्यवादी,राष्ट्रवादी,न्यायवादी,सिद्धांतवादी कहते हें वोह शिवसेना जब से बनी हे उसके सुप्रीमों बने हें शिवसेना में पदों की लड़ाई के मामले में पुत्र मोह के चलते उन्होंने शिवसेना को अपने खून से सींचने वाले राज ठाकरे को बाहर का रास्ता दिखा दिया जिन्हें आखिर में मनसे पार्टी बनाना पढ़ी , भाई अगर शिवसेना सुप्रीमों में जरा भी नेतिकता होती तो वोह जनाब पहले शिवसेना के प्रबन्धन के बारे में खुद के गिरेबान में झांक कर देखते और फिर खुद की पार्टी में आंतरिक लोकतंत्र ठीक करते फिर कहीं उन्हें कोंग्रेस और कोंग्रेस की विरासत अध्यक्षता पर टिप्पणी करने का अधिकार था लेकिन भाई ठाकरे हो चाहे सोनिया नेतिकता कहाँ हे ताज्जुब तो यह हे के सामना की इस खबर को दुसरे अखबारों ने बढ़े चटखारे ले लेकर छापी हे जबकि उन्हें भी शिवसेना को गिरेबान में झाँकने की सलाह देना चाहिए थी । अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

भाजपा राजस्थान प्रवक्ता भवानी सिंह का जन्म दिन

राजस्थान सरकार में संसदीय सचिव रहे भाजपा विधायक भवानी सिंह का आज जन्म दिन हे वोह भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता भी हें आज से तिन साल पहले इसी जन्म दिन को उनके सत्ता में रहने के दोरान उनके बरसाती मेंडक समर्थकों ने इस दिन को उत्सव के रूप में मनाया था । हजारों की तादाद में भीड़ को अखाट्टी कर जब तक सूरज चाँद रहेगा भवानी सिंह राजावत तेरा नाम रहेगा लेकिन आज वोह सत्ता में नहीं हे वोह लम्बी खतरनाक बिमारी से इलाज करा कर भी लोटे हें लेकिन उनके समर्थक डूबता जहाज़ से जेसे चूहे कूद कर भागते हें ऐसे एक एक कर भाग गये हें उनके पास आज केवल गिनती के लोग ही हें जिन्होंने राजावत के जन्म दिन को हजारों की भीड़,शोरशराबा और उत्सव से घटा कर केवल अकबार के बधाई संदेश तक ही सिमित कर दिया हे हे ना वक्त वक्त की बात सत्ता और सत्ता से नीचे उतरने के बाद भीड़ में कितनी कमी आ जाती हे यह देखने की बात हे कल जो लोग भवेन की जयजयकार कर रहे तहे आज ही लोग धारीवाल मंत्रीजी के इशारे पर जान देने को तय्यार बेठे हें । अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

भाजपा अध्यक्ष गडकरी का मुस्लिम प्रेम

भाजपा के गडकरी जो मुस्लिमों के वोट बटोरने के नाम पर कोंग्रेस के खिलाफ तुष्टिकरण का आरोप लगाते रहे हें आज उनको संघ की कट्टरता त्याग कर खुद पार्टी के दस प्रतिशत बढने की मुहीम में उस्ल्मानों की तारीफ में कसीदे पढना पढ़े हें गडकरी ने रायपुर में आयोजित एक सभा में कहा के भाजपा मुस्लिम विरोधी नहीं हे लेकिन कोंग्रेस ने मुसलमानों को केवल ठगा हे इतने वर्ष के कोंग्रेस के शासन में कोंग्रेस ने मुसलमानों को केवल कबाड़ी,मिस्त्री ही बनाया हे ,गडकरी ने उदाहरण दिया के मेरा निजी स्कुल हे जिसमे से अब तक ६००० मुस्लिम छात्र छात्राएं इंजीनियर बन चुके हें , गडकरी का भाजपा के दस प्रतिशत वोट बढाने की मुहीम के दोरान उपजा मुस्लिम प्रेम कोई नई बात नहीं हे मुस्लिम तो वोट बेंक हे कभी भाजपा तो कभी कोंग्रेस तो कभी सपा जो भी हो वोट लेती हे और फिर मुलिमों को ५ साल के लियें सत्ता में आने के बाद हर पार्टी उन्हें खूंटी पर टांक देती हें , गडकरी का अचानक भडका मुस्लिम प्रेम कहीं पार्टी के कट्टर पंथियों के चलते उनके लियें नई म्सिब्तें खड़ी नहीं कर दे यह तो वक्त ही बताएगा । अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

बूंदी ऐ डी जे की पिटाई किसी ने नहीं बचाया

बूंदी में अपर जिला जज के पद पर कार्यरत अनवर को बूंदी से कोटा आते वक्त दो युवकों ने सीट के माले में झगड़ा कर पीट दिया इतना ही नहीं उन्हें बस से बाहर भी फेकने का प्रयास किया बूंदी से कोटा का सफर करीब ४५ मिनट का हे इस सफर में लगातार झगड़ा होता रहा और असंवेदनशील समाज में से बीच बचाव के लियें ना तो कोई सवारी बोली और न ही ड्राइवर कन्डक्टर ने इस मामल में कोई बीच बचाव की पहल की ,अपर जिला जज से मारपिटाई करने वाले तो बस से उतर कर ओटो में बेठ कर भाग ही गये तहे लेकिन वोह तो जज साहब की सूझ बुझ ने दिमाग लगाया और वोह भी साथ ही उतर गये उन्होंने तूर्ण पुलिस को खुद का परिचय देकर सुचना दी और पुलिसकर्मी की मोटर साइकल पर उसका पीछा क्या आखिर दोनों शरारती लडके पकड़ में आ गये अब दोनों लडके जेल की हवा खा रहे हें दोस्तों इस घटना एन कहने को तो साधारण मारपिटाई का अमले हे लेकिन समाज की कायरता का नंगा स्चुरी भरी बस में इस तरह की हरकते करीब ४५ मिनट तक होती रहीं और किसी भी सवारी ड्राइवर कंडक्टर कोई बीच बचाव नहीं क्या इस मामले में सवारियां तो खेर नेतिकता की दोषी हें लेकिन ड्राइवर और कन्डक्टर के खिलाफ भी इस मामले में कार्यवाही होना चाहिए क्योंकि उन्होंने खुद का कृत्य नहीं निभाया हे। अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

मत झाँक दूसरों के घरों में

दूसरों के घरों में
झाँकने से
तुझे हासिल
क्या होगा
मत झाँक
दूसरों के घरों में
झांकना हे
तो झाँक
तेरे खुद के
गिरेबान में
खुद बा खुद
तू अपनी
नजरों से
गिर जाएगा ।
अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

मेरा सब कुछ अच्छा हे

मेरा हर दिन
तेरी हर रात से
अच्छा हे ,
मेरा हर गीत
तेरे हर जज्बात
से अच्छा हे
तू दुल्हन बनी हे
मगर
तेरी डोली से
आज
मेरा जनाज़ा
अच्छा हे ।
अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

कभी महसूस तो कर

खामोश रहकर
हम तेरी
महफ़िल में
बस तेरे लियें
ही तो रहते थे
तुझे किया
तू तो बस बेखबर हे
हमारे आने से
खुदा करे
तुझे भी
महसूस हो कभी
किसी की अनदेखी
महफिल में उसे बुलाकर
करने पर
खुद के दिल को
क्या तकलीफ देती हे।
अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

कोटा से जयपुर बस का सफर

वोह और में
घर से साथ निकले
वोह सस्ते किराए में
जयपुर जाने के लियें
डीलक्स प्राइवेट बस में बेठे
बस नई ,खुबसुरत,वातानुकूलित थी
बस किराया मात्र १५० रूपये
में ठहरा जिद्दी हिन्दुस्तानी
सोचा चलो सरकार की कमाई करे जाए
सो प्राइवेट बस छोड़ कर
बस स्टेंड चल दिया
वहां एक टूटी फूटी बस खड़ी थी
नाम राजस्थान परिवहन डीलक्स लिखा था
टिकिट की खिड़की पर जब में गया
तो मुझसे डीलक्स सेवा हे
इसलियें २५० रुए मांगे
मेने सोचा चलो छोड़ो
प्राइवेट में १५० सरकार में २५० हे तो क्या हुआ
हम तो जिद्दी हिंद्स्तानी हें
इसलियें सरकार की कमाई करानी हे
बस चली खटर खटर
खिड़कियाँ दरवाजे हिल रहे थे
ड्राइवर जनाब बस को गड्डों में कूदा रहे थे
स्पीड ब्रेकर हो चाहे हो नाला
बस उस पर सर्कस की तरह उछाल रहे थे
खुदा खुदा करके जब पहुंचे हम जयपुर
तो वोह जनाब मेरी हालत पर मुस्कुरा रहे थे
वोह १५० रूपये में जयपुर पहुंचे
लेकिन पुरे के पुरे फ्रेश थे
में दो घंटे बाद पहुंचा
लेकिन मेरी हालत ऐसी थी
मानो मेरे साथ किसी ने बलात्कार किया हो
सोचा ऐसी की तेसी ऐसे जिद्दी हिन्दुस्तानी की
रोडवेज़ ना सुधरेगी ना इसकी बसें सुधरेंगी
में भी सो रुपुये किराया बचाऊंगा
आराम और ठाठ से वापस प्राइवेट बस में जाऊँगा ।
अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

पूर्व केन्द्रीय मंत्री भुवनेश चतुर्वेदी को कोटा अभिभाषक परिषद से निकाला

कोटा से कई बार विधायक और राज्यसभा में सदस्य रहे वरिष्ट कोंग्रेसी ,वरिष्ट पत्रकार और पूर्व केन्द्रीय मंत्री भुवनेश चतुर्वेदी को आज कोटा अभिभाषक परिषद से तीन साल के लियें निलम्बित कर दिया हे , भुवनेश चतुर्वेदी पर आरोप हे के उन्होंने अभिभाषक परिषद के महासचिव मनोजपुरी के साथ अकारण ही अभद्रता की और उन्हें अपशब्द कहे ।
भुवनेश चतुर्वेदी कोंग्रेस सरकार में नर्सिंग्घा राव सरकार में प्रधानमन्त्री कार्यालय में राज्य मंत्री थे और राजस्थान ही नहीं देश की राजनीति में वोह विशेष अहमियत रखते हें कोटा अभिभाषक परिषद में वोह करीब ५२ वर्ष से सदस्य रहे हें वोह किसी भी पद पर रहे हों लेकिन कोटा बार में वोह लगातार सदस्य के रूप में उपस्थित रहे हें , उनके सांसद कार्यकाल में उनके सांसद कोष से कोटा अभिभाषक परिषद में न्यायालय के भवन , जन सुविधाएं , और अभिभाषक परिषद का पुस्तकालय भवन बनाया गया हे इसके अलावा कोटा बार में अनेक बार वी वी आई पी को वोह लेकर आये हें कोटा अभिभाषक परिषद ने उन्हें निकालने के पहले साधारण सभा के पूर्व निर्णय अनुसार कारण बताओ नोटिस भी नहीं दिया हे , भुवनेश चतुर्वेदी पिछले दिनों रोज़ की तरह कोटा अभिभाषक परिषद में उपस्थित थे लेकिन एक मामले को लेकर उनकी महासचिव मनोजपुरी से गरमा गर्मी हो गयी मनोज पूरी ने पदाधिकारी होने के नाते उन्हें समझाने की कोशिश की लेकिन उन्होंने उनके हाथ में हमेशां रहने वाला डंडा जब मनोजपुरी की तरफ किया तो यह उनसे बर्दाश्त नहीं हुआ आज इस मामले को अभिभाषक परिषद की कार्यकारिणी में रखा गया जहां किसी भी पदाधिकारी के साथ अभद्रता को गम्भीरता से लिया और कहा गया की आरोपी चाहे कितना ही बढा हो उसके खिलाफ कार्यवाही होना चाहिए और बस फिर सर्वसम्मती से भुवनेश चतुर्वेदी को कोटा अभिभाषक परिषद से तीन साल के लियें निलम्बित करने का निर्णय लिया गया कोटा के वकीलों का यह अब तक का ऐतिहासिक कठोर निर्णय हे इसके पूर्व कोटा अभिभाषक के पुर अध्यक्ष रमेश कुशवाह और पूर्व उपाध्यक्ष को कोट अभिभाष परिषद से तीन वर्षों के लियें निष्कासित कर दिया गया हे । अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

03 September 2010

कल शिक्षक दिवस हे पर रविवार होने से आज ही मनेगा

स्वर्गीय राधाकृष्ण की याद में ५ सितम्बर को मनाया जाने वाला शिक्षक दिवस अवकाश होने से स्कूलों में शनिवार को ही मनाया जा रहा हे शिक्षक यानी गुरु यानी उस्ताद इस मामले में सर्वप्रथम एक कथा गुरुद्रोनाचार्य और एकलव्य की हे जिसने अपने शिष्यों में भेदभाव बरत कर एकलव्य की तीरंदाजी देख गुरुद्क्षना में उसका अंगूठा मांग लिया था और एकलव्य ने अपने गुरु को बिना किसी हिल हुज्जत के अंगूठा काट कर दे दिया था , दूसरी तरफ अर्जुन तहे जिन्होंने धर्मयुद्ध के चलते अपने शिक्षक गुरु द्रोणाचार्य के खिलाफ युद्ध लढ़ा । तो दोस्तों शिक्षक किसिस भी समाज देश के निर्माता होते हें बच्चे के पैदा होने के बाद एक मान ही उसकी पहली शिक्षक होती हे जो उसे बोलना,चलना,खाना,पीना सिखाती हे फिर एक निश्चित आयु होने पर बाहर के शिक्षक के हवाले वही मान अपने बच्चे को करती हे लेकिन माँ की शिक्षा,दादा दादी की शिक्षा और स्कुल या गुरुकुल के शिक्षक में ज़मीं आसमां का फर्क हे पहले शिक्षा को मिशन समझ कर कम किया जाता था लेकिन अब शिख्शा को व्यवसाय समझा जाता हे , आज शिक्षक को १० लाख रूपये प्रतिमाह कोचिंगों में दिए जा रहे हें आज के शिक्षक स्कूलों में बच्चों को नोकरी प्राप्त करने की जहनियत तो दे रहे हें लेकिन बच्चे मानवीय संवेदनाओं से दूर हें उन्हें रिश्ते नाते यद् नहीं हे बस उनमें जो शिक्षा हे वोह सिर्फ रूपये कमाने की धुन हे उन्हें आज किसी से कोई सामजिक सरोकार नहीं हे इन सब परिस्थतियों में स्कूलों में शिक्षक दिवस का सरोकार भी कुछ ख़ास नहीं लगता हे , आज शिक्षकों को सरकारी स्तर पर कहने को तो निकम्मा साबित किया जाता हे लेकिन सरकारी स्कूलों में जन बुझ कर शिक्षकों को दुसरे कामों में लगाकर पीड़ित किया जाता हे ताकि यह लोग स्कुल के परिणाम सही नहीं दे सकें और फिर बच्चे निजी स्कूलों में जाकर पढाई करें आज शिक्षा गारंटी कानून चाहे आ गया हे लेकिन सरकार और शिक्षक इस मामले में गम्भीर नहीं हे , दोस्तों इस दिवस की अपनी एहमियत हे हमारे देश में कहावत हे के गुरु गोविन्द दोउ खड़े काके लागे पाऊं गुरु बलिहारी आपने इसका मतलब शिक्षक का दर्जा इश्वर से भी बढा हे शिक्षक का दर्जा जन्मदाता माता पिता से भी बढ़ा हे ऐसे में इस पद की गरिमा खुद शिक्षकों को ही बनाना पढ़ेगी फिर भी शिक्षक दिवस पर देश के सभी शिक्षकों को माता शिक्षकों को अग्रिम बधाई और ब्लोगर्स साथियों में जो भी शिक्षक हों उनको भी बधाई । अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

तेरे लियें


हे कोई जो तेरे लियें
फूलों में खुशबु लिए
चलता रहा हे कोई
चाँद सूरज की तरह
छुपता रहा हे
तेरे लियें कोई
दास्ताँ जीवन की
लिखता रहा हे
तेरे लियें कोई चुपचाप
तेरे लियें नदियों की कलकल में
मचलता रहा हे कोई
तेरे लियें मचला हे
कितनी बार दिल
शुरू कहां से करूं यह दास्तान
सिलसिलों की सजधज में
भलता रहा हे तेरे लियें कोई
खुद की जिंदगी की
किताबों के पन्ने
पलटता रहा हे तेरे लियें कोई।
हर कदम पर लड़ ख्डाया हे
ठोकरे कहा खाकर भी
सम्भलता रहा हे फिर भी
तेरे लियें कोई
म़ोत आई सेकड़ों बार
आगोश में लेने उसे
तुझे पाने की हसरत में
जिंदा रहा हे
तेरे लियें कोई।
अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

यह रिश्ते अजीब होते हें

यह रिश्ते भी अजीब हें
बहुत याद आयेंगे यह रिश्ते
मोम की तरह हें
जल जायेंगे रिश्ते
तपन पढ़ी सूरज की
तो पिघल जायेंगे रिश्ते
जब भी तुम उन्हें
देखोगे हसरत से
ज्ब्राख के ढेर में
बदल जायेंगे रिश्ते
धागे की तरह हें कमजोर
नाखेंचों इन्हें इतना
टूट गये अगर
तो नफरत में बदल जायेंगे
उलझा के रखा रिश्तों को
तो कुछ दिन ही चलेंगे
सुलझेंगे अगर
तो जिंदगी भर
चल जायेंगे रिश्ते
पाकीज़ा मोहब्बत की
खुशबु आयेगी इन रिश्तों से
वफाओं के सांचे में
जो ढल जायेंगे रिश्ते
यकीन हे तो रहेगा रिश्ता
शक करोगे तो बस
दुश्मनी में बदल जायेंगे रिश्ते।
अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

मिलावट मामले में राजस्थान हाईकोर्ट गम्भीर

राजस्थान में खाध्य पार्थो में मिलावट मामले में राजस्थान हाईकोर्ट ने मुख्य सचिव से जवाब तलब किया हे के वोह मिलावट को रोकने के लियें किया कदम उठा रहे हें इसी मामले में हाईकोर्ट की कठोरता को देख कर मुख्य सचिव ने कहा हे के सरकार कठोर कार्यवाही कर रही हे लेकिन कहना और करना दोनों अलग अलग बात हे , राजस्थान में इन दिनों जिधर जाओ उधर मिलावट का बोलबाला हे और जिलों में अह्बरी खबर तो हे लेकिन चिकित्सा विभाग में स्वास्थ्य निरीक्षक और प्रयोगशालाएं तक नहीं हे ऐसे में राजस्थान की जनता मिलावटखोरों के हवाले हे। अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

राजस्थान में भाजपा और कोंग्रेस में आरपार की लढाई की शुरुआत

राजस्थान में सरपंचों को चोर कहने और उनके अधिकारों में अलोकतांत्रिक तरीके से कटोती के खिलाफ आंदोलनरत सरपंचों के महापड़ाव को असफल करने के लियें कोंग्रेस ने लाठी गोली और दमन का जो चक्र चलाया हे उससे आज राजस्थान में कोंग्रेस और भाजपा के बीच जबर्दस्त लढाई छिड गयी हे इस लड़ाई में खबरे मेनेज कर लोगों को दिखाने के मामले में एक तिव चेनल की सोदेबाज़ी के किस्से भी आम होने लगे हें । जयपुर में दो दिन पहले सरपंचों की भीड़ पर पुलिस ने लाठिवार किया था और उन्हें भगा भगा कर मारा था । कोंग्रेस के विधायक रघु शर्मा ने सरपंचों की मांगों की उपेक्षा के मामले में पंचायत मंत्री भरत सिंह को दिमागी बीमार कहकर डोक्टर को दिखाने की सलाह तक दे डाली थी उसी के बाद भरत सिंह ने पहले तो समिति का गठन किया फिर सरपंचों को चो नहीं कहने के मामले में सफाई दी । सरपंचों पर पुलिस लाठिवार के बाद भाजपा विधायकों ने सरपंचों की दद की और उनके हने पीने की व्यवस्था की बस मुद्दा कहीं भाजपा के पास नहीं चला जाए इसी लियें आज जयपुर में सुबह सवेरे पुलिस ने अलोकतांत्रिक प्रक्रिया अपना कर नंगा खेल किया सरपंचों और उनके समर्थकों विद्धाकों और संसद किरोड़ीलाल मीणा को भी गिरफ्तार कर लिया गया जहां धरना प्रदर्शन रेली का कार्यक्रम था उसे प्रतिबंधित इलाका घोषित कर कर्फ्यू जेसा माहोल बना दिया गया कुल मिला कर सरपंचों की रेली फ्लॉप हो गयी और इस के विरोध में जब पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा सिंधिया ने राज्यपाल को ग्यापने देने जाना चाह तो उन्हें भी गिरफ्तार कर लिया गया बाद में उन्हें पूर्व में गिरफ्तार विधायकों को छोड़ने की शर्त पर रिह किया गया । जयपुर में इस घटना के बाद कोंगरे और भाजपा में भिर्कुतियाँ तन गयी हें आस्तीनें चद गयी हें और वाकयुद्ध ज़ोरों पर हे कोंग्रेस ने मेनेज कर एक टीवी चेनल को खरीदा और पहले मुख्यमंत्री फिर प्रयत्न मंत्री बिना काक फिर ग्रहमंत्री शान्ति धारीवाल की धमाकेदार प्रेस कोंफ्रेंस दिखाई गयी आधी अधूरी खबर दिखाई खबर में भाजपा को राज्य में अराजकता फेला कर हिंसा फेल्वाने का आरोप लगाया गया समाज कंटकों को भेज कर सरपंचों को भडकाने का आरोप लगाया गया और कोंग्रेस को ही एक मात्र सरपंचों की रक्षक पार्टी बताया गया इधर भाजपा अचानक इस हमले से संस्त में थी लेकिन अब वोह वापस सामान्य हो गयी हे और वः भी अपने मिडिया कर्मियों के माध्यम से सरकार की काली करतूतों को उजागर करने के मुड में हे ,
राजनितिक विश्लेषक कोंग्रेस के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की इस कदम को जायज़ नहीं मानते उनका मानना हे इसे राज्य और कोंग्रेस का भला होने अल नहीं हे पहले के कार्यकाल में गहलोत ने कर्मचारियों को नराज़ किया था जो कर्मचारियों ने गहलोत की जीती हुई बाज़ी हार में बदल कर गहलोत को पटखनी दी थी उसके बाद गहलोत इस कार्यकाल में कर्मचारियों को माई बाप समझ रहे हें लेकिन लगता हे अगली बार गहलोत को सरपंच चाहे कोंग्रेस के हों चाहे भाजपा के सबक सिखा कर रहेंगे और इसका नुकसान चुनावों में कोंग्रेस को हर हाल में भुगतना होगा । अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

महिला एस पी को उन्हीं के पुलिस कर्मियों ने कुचलना चाहा

उत्तर प्रदेश में बरेली यातायात पुलिस की एस पी कल्पना सक्सेना की जान आज उन्हीं के जवानों ने आफत में डाल दी , कल्पना सक्सेना को किसी ने सुचना दी की कुछ पुलिस कर्मी यातायात नाके पर अवेध चोथ वसूली कर रहे हें बस फ़िल्मी अंदाज़ में पुलिस कर्मियों को रंगे हाथों पकड़ने के लियें एस पी साहिबा प्राइवेट कार लेकर केवल ड्राइवर के साथ निकल पढ़ीं मोके पर चोथ वसूली करते पुलिस कर्मियों को जब उन्होंने पकड़ना चाहा तो उन्होंने भी फ़िल्मी अद्नाज़ में एसपी साहिबा पर जानलेवा हमला कर दिया और उन्हें गाड़ी के नीचे दबा कर कुचलने का प्रयास किया इस उहापोह में एस पी साहिबा तो बच गयीं लेकिन उन्होंने शायद म़ोत को इतनी नजदीक से पहली बार देखा था इसलियें सदमे में आ गयी और अस्पताल में काफी देर तक इलाज के बाद वोह नोर्मल हो सकी हें । अब वेसे तो उत्तर प्रदेश में इन जानलेवा हमला करने वाले पुलिसकर्मियों को गिरफ्तार कर लिया गया हे लेकिन अधिकारी पर इस तरह जानलेवा हमला करने की कोशिश की इस कार्यवाही ने देश भर में सनसनी फेला दी हे। अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

सोनिया जी कोंग्रेस की चोथी बार फिर अध्यक्ष बनीं

सोनिया गाँधी देश की सबसे बढ़ी पार्टी कोंग्रेस की आज फिर चोथी बार राष्ट्रिय अध्यक्ष बन गयी हें , सोनिया गांधी देश के लियें ऐसा नाम हे जिसने कदम कदम पर यहाँ अनेकों उतार चढाव देखे हें । कोंग्रेस , भाजपा और दूसरी पार्टियों में जिस अलोकतांत्रिक तरीके से दिखावे के तोर पर चुनाव होते हें उसी तरह से इन चुनावों में फिर से सोनिया गाँधी की कोंग्रेस राष्ट्रिय अध्यक्ष पद पर ताजपोशी की गयी हे , इटली में जन्मी सोनिया ने सोचा भी नहीं था के जिस पायलेट राजीवगांधी से उसे प्यार हुआ हे वोह देश का ही नहीं विश्व की इतनी बढ़ी ताकत बनेगा के विरासत में उन्हें भी ताजपोशी मिलेगी , देश में बहु बन कर आने के बाद एक प्रधान मंत्री की बहु होने पर भी सोनिया की सादगी देश भर को याद हे ना कोई गुरुर न कोई घमंड जरा भी इतने बढ़े परिवार की बहु होने का कोई गुमान उन्हें नहीं रहा । सास की हत्या के बाद एक यही ऐसी बहु थीं जिन्होंने अपने पति राजिव गांधी के साथ सत्ता सम्भाली , सोनिया अपने पति स्वर्गीय राजिव गांधी के कार्यकाल में हर पल हर क्षण उनके साथ उनके अधिकतम फेसलों में शामिल रहीं और एक दिन पति की निर्मम हत्या के बाद राजनीति से जब उनका मन उचट गया और वोह खुद डॉ और खोफ के वातावरण में जीने लगीं तब देश का हर शख्स उनेह चाहता था के वोह इस देश की बागडोर सम्भालें लेकिन सोनिया एक ऐसी महिला थीं जिन्होंने बार सर पर पहनाया जाने वाला ताज ठुकरा दिया और आखिर नर्सिंग्ग्घा राव ने बड़ी चतुरता से कुर्सी हथिया ली फिर केसरी सिंह और नर्सिंग्घा राव के बीच खूब तमाशे हुए सोनिया को सत्ता और सन्गठन से दूर रखने के लियें काफी कोशिशें की गयीं आज जो सोनिया गांधी के दरबारी हें उनमे से कई नर्सिंग्घा राव के दरबारी होने के कर्ण सोनिया से कन्नी काटते थे लेकिन सोनिया का रहन सहन चाल ढल हिन्दुस्तानी बहु की तरह थी हर शख्स हर महिला सोनिया को इज्जत की निगाह से देखने लगी और डूबती कोंग्रेस को बचाने के लियें एक बार फिर देश में गांधी परिवार के नाम पर सोनिया गांधी का सहारा लेना पढ़ा जब सोनिया राजनीति में आयीं तो देश ही नहीं विश्व की राजनीति में एक बढा तूफ़ान खड़ा हुआ यहाँ सोनिया से डॉ कर शरद पंवार ,संगमा,नारायण दत्त तिवारी , नजमा हेपतुल्ला ,अर्जुन सिंह सहित कई लोगों ने कोंग्रेस में बगावत कर दी और सोनिया को विदेशी चिड़िया , इटली की एजेंट ख कर दुष्प्रचार किया लेकिन वक्त बुलंद था आखिर ऐसे हालत बने के फिरस इ देश के इन लोगों को सोनिया की चोखट पर नाक रगड़ने जाना पढ़ा , सोनिया जब राहुल गाँधी को कोंग्रेस सन्गठन की मजबूती के लियें लायीं तो ऐसा लगता था के अब देश की बुलंदी चरम सीमा पर होगी खुद सोनिया ने एक बार फिर प्रधानमन्त्री बनने की घोषणा कर विश्व में खुद की छवि पूजनीय बना ली हिंदी सीखी राजनीति सीखी लेकिन अफ़सोस के आज वही सोनिया जिससे देश को बहुत उम्मीदें थी फिर से किसी ना किसी वजह से कुछ गिनती के चापलूस दरबारियों में घिर गयी हें और दरबारियों ने इन कुछ सालों में कोंग्रेस को जो कलंकित किया हे देश में कोंग्रेस की छवि को जो तबाह और बर्बाद किया हे उसको सोनिया और उनके पुत्र राहुल मिलकर भी नहीं रोक पाए हें , कोंग्रेस में सोनिया फिर से स्थापित हें लेकिन अगर आज भी उन्होंने देश और कोंग्रेस हित में चिन्तन मंथन कर कोंग्रेस शुद्धिक्र्ण योजना नहीं बनाई तो देश र कोंग्रेस सन्गठन का अल्लाह ही मालिक हे । अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

02 September 2010

आज शबे कद्र और जुम्मा हे

आज शबे कद्र यानी इबादत की ख़ास रात हे रमजान के महीने में यह रात जुमे के दिन आना और अहमियत रखती हे वेसे तो यह जुमा अलविदा का जुम्मा हो सकता हे या नहीं यह तो कुदरत पर निर्भर हे क्योंकि ईद का चाँद अगर वक्त पर दिखता हे तो आज का जुमा अलविदा का जुम्मा हे नही तो फिर अगला जुम्मा ही अलविदा का जुम्मा खा जा सकेगा लेकिन शबे कद्र की यह कीमती इबादति रात आज मुसलमानों के जीवन को जन्नत का मजा देगी , दोस्तों इस्लाम के लिहाज़ से रमजानुल मुबारक के महीने में इस रात को करान मजीद का अवतरण और इसका पुन स्मरण होने से इस रात की अहमियत और बढ़ गयी हें इस्लाम में कहा गया हे के कई हजार रातों की इबादत और इस एक रात की इबादत बराबर हे यानि इस रात की इबादत जिसने की मानों वोह मालामाल हो गया हे , आज के दिन मुसलमान हर हल में मस्जिद में जाकर पूरी रात इबादत करने की कोशिश करते हें इस इबादत से मुसलमानों का ईमान मजबूत होता हे जबकि उनके रहन सहन में भी मुस्ल्मानिय्त का जज्बा आने से नेकी और इंसानियत की राह में उनका आचरण बनता हे और इससे देश समाज को फायदा मिलता हे , अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

बारूद घोटाला किंग दम्पत्ति गिरफ्तार

राजस्थान के भीलवाडा में १६४ बारूद के ट्रकों का घोटाला कर गायब करने के आरोपी हेडा दम्पत्ति को कल अहमदाबाद से गिरफ्तार कर लिया गया देश भर में तबाही मचाने की ताकत रखने वाला यह बारूद यह विस्फोटक कहां गया किसी को पता नहीं चल पा रहा हे इस मामले में कलेक्टर,एस पी ,एनी प्रशासनिक अधिकारी अपनी अपनी जिम्मेदारियों से हाथ ऊँचे कर रहे हें लेकिन यह एक सामान्य बात नहीं हे देश की आंतरिक सुरक्षा का कठोर मामला हे , ताज्जुब इस बात पर हे के केंद्र सरकार इस मामले की गम्भीरता भांपने बाद भी चुप्पी साढ़े बेठी हे और उसने कोई निगरानी कार्यक्रम नहीं बनाया हे , लेकिन केंद्र सरकार इस मामले में अगर सी बी आई से जाँच कराती हे तो इसें राजस्थान के कई बढ़े व्यापारी,कई बढ़े नेता और कई बढ़े अधिकारी जेल जा सकते हें शायद इसी लियें राजस्थान सरकार इस जाँच में धीमी गति बताकर केवल जाँच की रस्म अदायगी कर रही हे। अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

मुख्य मंत्री गहलोत का रोजा अफ्तार या फिर मजाक

राजस्थान में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की तरफ से कल ४ सितम्बर को रोजा अफ्तार जयपुर मुख्य मंत्री भवन में रखा गया हे जिसमें जयपुर सहित विभिन्न जिलों से सम्बन्धित ओगों को भी बुलाया गया हे लेकिन मुख्यमंत्री कार्यालय में बेठे प्रबंधकों ने रोज़े अफ्त्तार के कार्ड जिला प्रशासनिक अधिकारियों के माध्यम से जो भेजे हें उसमें उन्होंने जिनको आमंत्रित किया गया हे उनकी सूचि और खाली कार्ड तो जिला प्रशासन को भेज दिए हें लेकिन जिला प्रशासन ने उन कार्डों पर जिनको आमंत्रित किया गया हे खुद नाम भी लिखवाना मुनासिब नहीं समझा और खाली कार्ड अधिसूचित सूचि के लोगों को पहुंचाए गये हें जबकि अगर लोगों को इज्जत से आमंत्रित करना था तो मुख्य मंत्री भवन से ही ऐसे कार्ड लिख कर भेजे जाते या फिर जिला कलेक्टरों को ऐसे लोगों के नाम लिखकर भेजना चाहिए थे आखिर खाली कार्डों पर कोन इज्जतदार आदमी रोजा इफ्तार कार्यक्रम में जाना पसंद करेगा यह देखने की बात हे मुख्यमंत्री जी को अपने जिला कलेक्टरों और अधिनस्थों को इस मामले में आवश्यक निर्देश देना जरूरी हो गया हे वरना फिर इस तरह की रस्म अदायगी को बंद कर देना चाहिए । अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

जाती प्रमाण पत्र का फर्जीवाड़ा

देश में और खासकर राजस्थान में इन दिनों जाति प्रमाणपत्रों का फर्जीवाड़ा तेज़ी से चल रहा हे अपात्र लोग खुद को पात्र बनाने के लियें नकली जाति प्रमाण पत्र बना रहे हें , राजस्थान में अनुसूचित जाति जन जाति आयोग ने भी इ मामले में राजस्थान सरकार से एतराज़ जता कर ऐसे मामलों की जांच करने की सिफारिश की हे पिछली दिनों एक एम एल ऐ के खिलाफ फर्जी जाति प्रमाणपत्र बनवाकर चुनाव लड़ने का आरोप हे जबकि कई अधिकारी,कई कर्मचारी आज भी फर्जी जाति प्रमाण पत्रों पर नोकरी कर रहे हें कई परिवार ऐसे हें के बाप के पास दूसरी जाति का प्रमाण पत्र हे तो बेटे के पास दूसरी जाति का प्रमाण पत्र हे , राजस्थान सरकार ने अभी तक इस मामले को गम्भीरता से नहीं लिया हे और शायद इसीलियें इन म्ममलों की जांच करवाकर सभी जिला कलेक्टरों को इस फर्जीवाड़े को रोकने के लियें आवश्यक निर्देश भी जारी नहीं किये गये हें। अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

बेरहम नक्सली और संवेदन हीन सरकार

दश में बेरहम नक्सली और संवेदन हीन सरकार के होने से रोज़ पुलिस जनों की हत्याएं हो रही हें सरकार में बेठे मंत्री रोज़ नक्सलियों की पीठ थपथपा रहे हें इधर मुठभेड़ में पुलिस जवान बे म़ोत मारे जा रहे हें लेकिन इन सब के बावजूद भी पटना बिहार में अपह्रत चार पुलिस कर्मियों को जिंदा छुड़ाने के मामले में केंद्र और बिहार सरकार गम्भीर नहीं रही हे, आखिर कहां गया हमारा सुचना तन्त्र, कहाँ गये हमारे कमांडो, कहाँ गये प्रशिक्षित जासूस, कहा हें जांबाज़ सिपाही फोज जो कुछ गिनती के सिरफिरे नक्सलियों को काबू नहीं कर पा रहे हें काबू करना तो दूर की बात आज तक वोह अपह्रत जवानों को पता नहीं लगा पाए हें एक की हत्या कर दी गयी हे तीन जवानों की जिंदगी आज सुबह दस बजे पर टिकी हे , बिहार के मुख्य मंत्री बयान देते हें के बातचीत का रास्ता खुला हे नक्सलियों ने मुठभेड़ में जवान मारे थे इन्हें भी मार देते अपहरण क्यूँ किया यानी बिहार के मुख्य मंत्री को जवानों की चिंता नहीं अफ़सोस इस बात का हे के नक्सलियों ने जवानों का जिंदा अपहरण क्यूँ किया मुठभेड़ में मारा क्यूँ नहीं ।
केंद्र हो चाहे मध्य प्रदेश,आंध्र,बिहार,पश्चिमी बंगाल की सरकारे हों किसी ने भी ना तो नक्सली लोगों की समस्याओं ,उनकी मांगों,उनके आतंकवादी होने के पीछे उपजी परिस्थितियों का अध्ययन नहीं किया हे आखिर किया वजह हे के गाँव के गाँव नक्सली बन गये आतंकवादी बन गये उनका सरकार और कानून से विश्वास उठ गया उन्होंने हिंसा का रास्ता अपना लिया मरते वोह भी हे म़ोत का डॉ उन्हें भी सता रहा हे तो फिर आखिर बार बार वार्ता का नाटक करने वाली यह सरकारें खुद नक्सली समस्या कारण और निवारण पर समीक्षा आयोग गठित कर उनकी वाजिब मांगों को मान कर उनके कल्याण,सुरक्षा और भविष्य के लियें एक पैकेज जारी नहीं करती लेकिन बात साफ़ हे राज्य सरकारें और केंद्र सरकार उनकी समस्याओं और समाधान मामले में गम्भीर नहीं हे नेताओं को तो उम्स्ययें किया हें , क्यूँ उन्होंने ब्न्दुकं उठायी वोह सरकार से क्या चाहते हें उनकी नाराज़गी की वजह किया हे इस बारे में भी जानकारी नहीं हे क्योंकि सरकार खुद ऐसा नहीं चाहती सिर्फ हिंसा और बातचीत के नाम पर राजनीति करना चाहती हे अगर नहीं संभाल पा रही हे सरकार तो छोड़े गद्दी और सम्भला दे हम ब्लोगर्स को फिर हम खुद समस्याओं का समाधान मिल बेठ कर कर लेंगे सरकारों को तो खुद के मंत्रियों की सुरक्षा की फ़िक्र हे उन्हें जनता की समस्या और सुरक्षा से कोई लेना देना नहीं हे । अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

भरे पढ़े हें बेशर्मी के किस्से

किस्से क्या सुनाऊं
में तुम्हें
भरे पढ़े हें यहाँ
नेताओं और जनता के
बेशर्मी के करोड़ों किस्से ,
काण्ड हादसों घोटालों से,
फिक्सिंग और हवालों से
भरे पढ़े हें करोड़ों किस्से
क्या सुनाऊं में तुम्हें
यहाँ के नेताओं की
बेशर्मी के किस्से ,
जब से खेल खेले हें
गेहूं सडाने के मंत्री पंवार ने
क्या उम्मीद करें
न्याय की न्यायमूर्ति से
वोह भी अब तो
मंत्रियों के आगे आंसू बहाने लगे हें
भूल जा पुराने देश और देशभक्ति का जज्बा रखने वाले लोगों को
य्हाना कभी मानव अंग
कभी मानव बम
कभी मानव तस्करी
के नाम पर कबूतरबाजी होती हे
लुटती हें बालाएं घर में
जलती हें बहें ससुरालों में
सडकों पर जाने गिरती हें
यहाँ हर तरफ दरिंदगी दिखती हे
अब उठेंगी माताएं
लेंगी अंगडाइयां
बच्चे फिरजनेंगी
इस देश को बचाने को
किस्से क्या सुनाऊं में अभी
छोड़ों बच्चे जो जने हें अभी माताओं ने
बढ़े उनको होने दो
शायद वोह कुछ ऐसा कर जाएँ
के किस्से बन जाएँ
मेरे पास तुम्हें
गोरव से सुनाने को ।
अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

तुम भुला ना पाओगे


सोच लो
तुम मुझे हरगिज़
भुला ना पाओगे ,
रात को ख़्वाबों में
और हर सुबह
सूरज की तरह
रोशन पाओग,
क्या करूं ना भुला पाना मुझको
किसी के बस की बात नहीं
जब भी मुस्कुराओगे
मुझे हर पल हर क्षण
अपने साथ पाओगे,
देह्ता हूँ
मुझे तुम
केसे भुला पाओगे,
लाख दिल से भुलाने
की कर लो कोशिश
आँखे जब भी बंद करोगे तो ख़्वाबों में
खोलोगे तो सामने
सिर्फ और सिर्फ हमें ही पाओगे,
जा रहा हूँ तुझ से दूर
भूली हुई यादों की तरह
ज़िंदा अगर लोटा
तो बस सामने अपने पाओगे,
आप जरा अपना रहबर तो बनाएं हमें
हर कदम हर पल हर एहसास में
बस हमें और बस हमें ही पाओगे
ना करो बेकार कोशिश
हम कहते हें
तुम हमे भुला न पाओगे ।
अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

इस देश में कोई सरकार नहीं हे

वोह कोन हे आज इस देश में
जो ज़ुल्म व् सितम का शिकार नहीं हे
देख लो ज़ालिम तो फिर भी
गिरफ्तार नहीं हे ,
खून,लुट,दंगे फसादात ,भ्रष्टाचार
यही सब सुर्खियाँ हें
आज के टी वी और अखबार में ,
अब तो लगता हे शायद
इस देश में कोई सरकार नहीं हे।
मजहब,जात और भाषा के नाम पर
बिगड़े हें चारों तरफ के हालात
हर तरफ लुट हत्या और हे बलात्कार
देखों फिर भी
यहाँ सजा में कोई गुनाहगार नहीं हे
लगता हे मेरे देश में '
कोई सरकार नहीं हे ,
जरा महंगाई को तो देखो
हर चीज़ की कीमतें हें
काबू से बाहर
रिश्वत को बिना कोई अफसर
काम करने को तय्यार नहीं हे,
अब असल कोई चीज़ नहीं हे
सभी चीजों में हे मिलावट
कानून को तो देखो
किताबों में तो लिखा हे
लेकिन इसे आजमाने को
कोई तय्यार नहीं हे
इस देश में लगता हे
अब कोई सरकार नहीं हे,
अब आओ हिन्दू हो चाहे मुस्लिम
सीख हो चाहे इसाई
सम्प्रदाय,जाती या भाषा का हो झगड़ा
सब भुला कर करें एहसास ,
क्या हमारा इस मुल्क के लियें
इतना सा फर्ज़ भी यार नहीं हे
आओ जगाए सोते हुए लोगों को
जिन्हें तबाही बर्बादी के इस देश का
एहसास अब तक यार नहीं हे
लगता हे देखो
इस देश में कोई
सरकार नहीं हे।
अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

शेतान और इंसानियत

एक राय बन गयी हे
आज के हेवानों में
कुछ हें ऐसे लोग
इंसानियत बची हे
जिन इंसानों में
चारों तरफ बढ़ गयी हे
इस हद की दहशत गर्दी
जिससे बचा नहीं कोई महफूज़
शरीफ इंसानों में
किसी भी अजनबी चीज़ को
छूना हे गुनाह
ना जाने कहा रखा हो
बम सामानों में
घूमते फिरते हें आज़ाद मुलजिम यहाँ
मजलूम बंद नजर
आते हें थानों में
खोल दो आज सब मिलकर
मोहब्बत ,प्यार ,अमन के रास्ते
यार खड़े हें
सीना तान अपने अपने
आशियाने में।
अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

01 September 2010

तेरा इन्तिज़ार

बरसों से
करते हुए
तेरा इन्तिज़ार
आज मेरी यह
हालत हुई
चटकी कोई
नाज़ुक कली
सोचा मेने
तुम आगये
फुल पर शबनम गिरी
सोचा मेने
तुम आगये
कोयल कुकी
अम्बा की डाली हिली
सोचा तुम आगये
पत्ते हिले
तिनका गिरा
शाख पे चिड़िया बेठी
जब भी आई
कोई आहत
समझा तुम आगये
इन्तिज़ार में तेरे
नम हुई आँखे मेरी
फिर गिरने लगे आंसूं
आंसू बने अमृतधारा
मेने सोचा तुम आगये ।
अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

गूगल पर भी केन्द की नजर

देश में इंटरनेट प्रेमियों को पूरी सुविधा देने वाले सर्वर सम्पर्क गूगल पर सरकार निगरानी के प्रयास तेज़ कर रही हे इसके पूर्व ब्लेक बी पर निगरानी की कार्यवाही हो चुकी हे , देश इ अमन चेन और सुरक्षा के लियें यह बहुत जरूरी भी हे कोन कोन इसका उपयोग कर रहा हे और देश में क्या कानूनी और क्या गेर्कानुनी उपयोग कर रहा हे ओई फर्जी आई डी बना कर अश्लीलता,साम्प्रदायिकता,नफरत तो नहीं फेला रहा आतंकवादियों को कोई मददगार तो नहीं इसकी जानकारी और निगरानी केंद्र सरकार को किया जाना आवश्यक हे यह ब्लोगर्स दुनिया केलियें एक अच्छे शुभ संकेत हें क्योंकि अगर ऐसा होता हे तो फ़ालतू बकवास करने वाले अपराधी मानसिकता के समाज कंटकों को ब्लोगर की दुनिया में गंदगी फेलाने पर द्बूचने का मोका मिलेगा और ब्लोगर्स की दुनिया साफ़ सुथरी और सुकून की हो जाएगी । अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

रुचिका के आरोपी राठोड को कड़ा सबक

नाबालिग टेनिस खिलाडी रुचिका गिरिहोत्रा को १९९० में छेद छाड़ की कोशिशें कर उसे परेशान करने और फिर उसका स्कुल से एडमिशन ख़ारिज करा देने के बाद रुचिका को आत्महत्या के लियें मजबूर करने के मामले में चंडीगढ़ के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी डी जी पुलिस राठोड के जमानत पर छुटने के मंसूबों पर पानी फिर गया हे अब उन्हें पुरे डेढ़ साल तक जेल में रहना पढ़ेगा , उच्च न्यायालय ने निचली अदालत के फेसले को बहाल रखा हे अब यह जनाब न्याय के लियें पेसे वाला होने के कारण सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा खट खटाएंगे देखना हे के इन्साफ की इस लड़ाई में अब क्या होता हे लेकिन राठोड की गिरफ्तारी उसको सजा इस देश के कानून के लियें एक बहुत बढ़ा सबक हे । अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

कोटा में पायरेसी ८० हजार सीडियां पकड़ीं

राजस्थान सरकार ने हरकोर क्रिमनल्स पर नजर रखने और निरंतर बढ़ रहे खतरनाक अपराधों की रोकथाम के लियें बनाये गये एस ओ जी पुलिस ग्रुप ने कोटा में इस ग्रुप के गठन के बाद नकली इदियाँ पकड़ने के आलावा कोई दुसरा काम नहीं किया हे । लोग कहते हें की सीडी कम्पनियां इलाकों में नकली सीडी पकड़ने पर सम्बन्धित पुलिसकर्मियों को निजी तोर पर गुप्त पुरस्कार भी देती हें शायद इसीलियें एस ओ जी सभी काम काज छोड़ कर नकली सीडी पकड़ने का रिकोर्ड बनाने में लगी हे , वेसे नकली सीडी का क्रोब्र क्या कोटा और क्या देश का कोई भी कोना सभी स्थानों पर ज़ोरों पर चल रहा हे इस कानून की खामी की वजह से इस में पकड़े गये आरोपी छुट जाते हें अब इस कारोबार को खत्म करने के लियें कोपीराईट कानून में बदलाव जरूरी हो गया हे ताकि नकली सीडी बेचने वालों के खिलाफ एक तो सख्ती हो दुसरे पुलिस और मालिकों की सांठ गांठ से मालिकों को निकाल कर नोकरों को मुलजिम बनाने का जो इल्सिला हे उस पर भी रोक लगे। अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

गेर कानूनी वाहनों में बच्चों का जीवन संकट में

स्कूलों और परिवहन विभाग की लापरवाही से राजस्थान और देश भर में बच्चों की जिंदगी संकट भरे माहोल में गुजर रही हे कोटा हो चाहे देश का कोई भी जिला हो वहन स्कूलों में लेन ले जाने के लियें ओटो ,टेम्पो,बसें जो भी हो उनमें बच्चों को भेड़ बकरियों की तरह से भरा जाता हे दुसरे ड्राइवरों का चलाने का ढंग और बेतरतीब होता हे ऐसे में बच्चों का जीवन संकटमय होता जा रहा हे , देश में और खासकर राजस्थान में बच्चों को और सवारियों को लाने ले जाने के लियें वाहनों के नियम बने हें लेकिन कोई भी शहर के अधिकारी या परिवहन मंत्री इन नियमों का पालन नहीं करते हें पहले तो माँ बाप संकट भरे माहोल में स्कुल भेजते हें दुसरे स्कुल प्रशासन उन्हें इस हालत में स्कुल आता देख कर नजर अंदाज़ कर देता हे तीसरे परिवहन विभग के अधिकारी भी भेड़ बकरियों की तरह भरे बच्चों के इस वाहनों के मामले में कोई कार्यवाही नहीं करते हें , हाल ही में कल बूंदी में स्कुल की एक वेन में जब बच्चे स्कुल से आरहे थे तब अचानक वेन में लगे गेस सिलेंडर में बदबू आई और आग का खतरा पैदा हो गया वोह तो कुछ बच्चे थोड़े समझदार थे इसलियें वोह वेन का र्वाज़ा खोलकर कूद भागे संकट देखकर छोटे बच्चों को राहगीरों ने सुरक्षित निकल लिया वरना बूंदी में कोई बढ़ा हादसा हो सकता था लेकिन सरकार की आँखें अभी भी नहीं खुली हें। अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

न्यायालय में फेसले या मजाक

कत्ल के न्यायालय में वहां के न्यायधीश ने एक दिन में १४८ फेसले करके रिकोर्ड कायम करने की कोशिश की हे न्यायधीशों में जल्दी और अधिकतम फेसले सुनाने की होड़ देश और समाज की न्यायिक व्यवस्था के लियें ठीक नहीं हे ऐसा आदेश जो अपील में जाकर उल्ट जाए उसे दें से न्यायधीश को बचना चाहिए कोई भी आदेश घन चिन्तन मनन और अध्ययन के बाद ही लिखा जाना चाहिए , खुद मिडिया इस तरफ ध्यान दें सम्बन्धित इलाकों के उच्चतम न्यायालय को जो निरीक्षक न्यायधीश हें वोह इस तरफ सोचें उन पत्रावलियों का निरिक्षण करें जिसमें गिनती से ताबड़तोड़ फेसले दिए गये हें उनकी गुणवत्ता विधिकता परखें और फिर सम्बन्धित जल्द बाज़ न्याय्ध्शों के खिलाफ कार्यवाही भी करें हमे राजस्थान में कई जल्दबाज़ न्यायधीश के फ़सलों में गडबडी के कर्ण उनके खिलाफ कार्यवाही हुई और अब उन्हें नोकरी से निकल कर जबरी सेवानिव्र्त्ति दी गयी हे न्यायालय फ़सलों के लियें होते हें ना की गिनीज़ रिकोर्ड बनाने के लियें न्यायधीशों के इस रवय्ये पर रोक होना आवश्यक हे क्यूंकि यह सब देश और समाज के लियें घातक हे। अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

आँखों में नमी

आँखों में
नमी सी हे
चेह पे उदासी हे
लगता हे
मेरी दुनिया
अब मुझ से
खफा सी हे
यह केसा शहर
हे मेरा
हर रोज़ नये फितने
हर रोज़ सितम ताज़ा
यह हालात
बस एक वोट
ठीक तरह से
नहीं देने की
सजा सी हे ।
अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

खामोश गुलशन

बताओं क्यूँ
छाई हे खामोशी
इस खुशनुमा
गुलशन में
कल जहाँ थे
फल खुशबूदार
आज वोह फुल
क्यूँ हे कुम्लाहे हुए
कलियाँ जो थीं खिलने को
वोह क्यूँ हे मुरझाई हुई
भरोसे जिसके छोड़ा था
यह गुलशन मेने
आज कहां हे उसकी मसीहाई
ना खुशबु बचा सके
न बचा सके
फूलों और कलियों को
बताओ केसी हे उनकी
यह बे हयाई ,
आमद की हमारे
अब फिर से
चेह्की हें चिड़ियें
महकी हे खुशबु
खिले हें यह फुल
खिल खिलाई हे कलियाँ
मुस्कुराए हें फुल ।

अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

तूफान का क्या हे

तूफ़ान का क्या हे
तूफ़ान की सदाओं से
तो हम घर बसायेंगे
तूफ़ान
दरिया में हो
या समुन्द्र में
हम तो
दरिया के किनारे ही
घर मनाएंगे।
तू मिले
या ना मिले
बस तुझे
पाने का ख्वं
हम अपनी
आँखों में
जरुर जायेंगे।
तेरे जो बेवफा
दोस्त हें
वोह तो हर साल
मोसों की तरह से
आयेंगे जायेंगे
बस हम ही हें
जो तेरे पास
केदी की तरह
ठहर जायेंगे ।
अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

मसीहा आये तो क्या हुआ

मसीहा आये तो आने दो
उनके आने से हांसिल
क्या हुआ
ना दवा ने किया कुछ असर
ना ही दुआ ने काम किया
बस एक नजर देखि जो उसने
शरारत से
मरीज़ बिस्तर से उठ कर काफूर हुआ ।
अख्तर खान अकेला कटा राजस्थान