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06 December 2011

अपने पराये की मजबूरी छोड़ कर राष्ट्रवादिता के तहत उन्हें सजा दिलवाओ

मुझे गर्व है मेरे इस देश पर जहां आज़ादी है मस्ती है लेकिन कानून की पाबंदी भी है ....यहाँ अराजकता जब हद से ज्यादा बढ़ जाती है ,, और बेईमानी ,भ्रष्टाचार , अत्याचार , अनाचार हद से ज्यादा बढ़ जाता है ..जब सुनवाई के सभी रास्ते जनप्रतिनिधि खुद अपराधी होने के कारण बंद कर देते हैं ..थानों में रिपोर्ट नहीं होती ...संसद में आवाज़ नहीं उठती ..प्रधानमन्त्री ..राष्ट्रपति और विधानसभाएँ सभी शिकायतों को रद्दी की टोकरियों में डाल देते हैं तब यहाँ मेरे इस देश में अदालतें इंसाफ दिलाती हैं अदालते देश के कानून की पालनाएं करवाती है और आज देख लो .देश में कोई भी कितना ही बढ़ा सिफारिशी कितना ही बढ़ा अपराधी हो वोह सब अदालत के आदेशों से जेल में हैं और सजा भुगत रहे हैं इसलियें कहते हैं के मेरे इस देश में विधानसभा ॥ निकाय ॥ पंचायतें .लोकसभा ॥ राज्यसभा के दरवाज़े चाहे बंद हो गये हों लेकिन कानून और कानून के रखवालों ने कुछ एक अपवादों को छोड़ दें तो इस देश को रक्षा कवच दे रखा है और इसीलियें आज हम कुछ उम्मीद लेकर इंसाफ की लड़ाई लड रहे हैं जो लोग देश के लियें लड़े जिन्होंने पार्टी पोल्तिक्स की लड़ाई लड कर अपने नेता को अच्छा और दुसरे के नेता को चोर बताया उन्होंने तो देश को सच छुपा कर कमजोर किया है लेकिन अदालतें सभी को बराबर देखती हैं कोंग्रेस हो चाहे भाजपा चाहे दूसरी पार्टियाँ हो चाहे अफसर हो चाहे नोकर सभी को एक ही लाठी इन्साफ की लाठी से हांक कर देश को बचाने की कोशिश हो रही है इसलियें चमचागिरी भाई भतीजावाद पार्टी पोलिटिक्स छोडो और देश बचाओं निष्पक्ष बन जाओ कानून जो तोड़ता है अपने पराये की मजबूरी छोड़ कर राष्ट्रवादिता के तहत उन्हें सजा दिलवाओ ॥ जय हिंद जय भारत । अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

सिर्फ हंगामा करना मेरा मकसद नहीं आप लोगों के साथ मिलकर अराजकता फेलाने वालों को सबक सिखाना ही मेरा मकसद

जी हाँ मेरे दोस्तों मेरे ब्लोगर..ट्विटर और फेसबुक ब्रदर्स सिस्टर्स मेरी एक कोशिश एक पहल का कुछ नतीजा सामने आया और इंटरनेट के नाम पर गंदगी फेलाने वालों को सबक सिखाने के मामले में पहल शुरू हुई ......... दोस्तों जो मेरे ब्लॉग पढ़ते हैं जो मुझे जानते हैं जो मुझे मानते हैं उन्हें पता है के इंटरनेट के नाम पर फर्जी आई डी बना कर या फिर खुद की आई डी से किसी भी व्यक्ति का मजाक उडाना किसी के भी धर्म का उपहास उड़ाना देश में साम्प्रदायिक सद्भाव और अमन चेन को बिगाड़ने के लियें कोरी बकवास बाज़ी करा इंटरनेट के कुछ अपराधियों की आदत बन गयी है और उनके दिमाग में सिर्फ एक ही बात है के हम तो अपने कमरे में बेठ कर यह अपराध बढ़ी चालाकी से कर रहे हैं हमे कोन और केसे पकड़ सकेगा ..... मेने पहले भी अपने ऐसे साथियों को चेताया था उनसे हाथ जोड़ कर निवेदन किया था इस के मामले में जो कानून हैं जो सजा के प्रावधान है किन किन को सजा मिली है और कोन है ऐसे बेवकूफ जिन्होंने खेल खेल में ऐसा अपराध कर अपनी जिंदगी बर्बाद कर ली है लेकिन कानून को हंसी खेल समझने वाले लोगों ने सरकार की काहिली का खूब फायदा उठाया .......... दोस्तों चेतावनी के बाद जब सुधार नहीं आया तो मेने आप लोगों की सहमती लेकर इस मामले में दोषी लोगों को सज़ा दिलवाने के लियें कार्यवाही शुरू की मेने इस मामले में प्रधानमन्त्री मनमोहन सिंह ..... सोनिया गाँधी ॥ राहुल गाँधी । कपिल सिब्बल और महामहिम राष्ट्रपति महोदया को पत्र लिखे ओन लाइन शिकायतें दर्ज करवाई शिकायत दर्ज हुई अधिकारी नियुक्त हुए और मेरी शिकायत और कानूनी प्रावधान सही निकलने पर ऐसे लोगों के खिलाफ कार्यवाही के पहले एक चेतावनी देने का निर्णय सरकार ने लिया जो ठीक और स्वागत योग्य था मुझे खुद राहुल गांधी ने धन्यवाद पत्र लिखा और इसे एक अहम सुझाव माँगा अपने एक मित्र से उत्तर प्रदेश में इस मामले में जनहित याचिका लगवाई लेकिन उदयपुर में ऐसे अपराधियों की वजह से हंगामा हुआ उत्तर प्रदेश इन्दोर में तमाशा हुआ राहुल गाँधी के नाम से फर्जी आई डी बनाई गयी और अपराधी पकड़े गये ऐसे हालातों में जो लोग वाक् और अभिव्यक्ति की स्वंत्रता का दुरूपयोग कर देश के कानूनों को तोड़ कर अगर अराजकता फेलाना चाहते है तो वोह देश के दुश्मन है ॥ में या मेरा कोई भी दोस्त समर्थक कभी भी लिखने और बोलने की आज़ादी के खिलाफ नहीं रहे हमेशा इस मामले में मिलकर लड़ाई लड़ी है खुद एक पत्रकार समाजसेवक और वकील के नाते मेने खुद ने कई बढ़ी लडाइयां इस मामले में लड़ी हैं और जीती हैं ..... आप खुद बताएं कोई आप को माँ बहन की गली दे और कहे के यह बोलने की स्वतन्त्रता है कोई आपके नंगे फोटू नकली बनाकर किसी के साथ स्केन कर प्रकाशित करे और कहे के यह तो लिखने और प्रकाशन की स्वंतन्त्रता है तो जनाब इससे बुरा और क्या होगा । जो लोग ऐसा अपराध करते हैं उन्हें हमे और आपको मिलकर बेनकाब करना होगा ताकि हमारा सुकून हमारे लिखें बोलने और पढने की आज़ादी शान्ति सद्भाव बना रहे ... अभी कल ही मेने फेसबुक खोली मेने देखा एक अजमेर के पत्रकार सज्जन ने राहुल गाँधी ॥ मनमोहन और चिदम्बरम के मुखोटे लगाकर नंगे लोगों की अश्लील तस्वीर के साथ जोड़ दिए और उनके हाथ नग्न तस्वीर में उनके लिंग पर लगा दिए अब आप खुद बताइए क्या यह वाक् और अभिव्यक्ति की स्वत्न्र्ता है क्या यह एक सोशल साईट से जुड़े लोगो के साथ मजाक और उनका अपमान नहीं अगर हाँ तो दोस्तों मेने ठानी है के इन जनाब को पहले एक बार इस आलेख के माध्यम से चेताता हूँ के वोह अपनी गलती मानले और सार्वजनिक रूप से एक माफ़ी नाम इस संदेश के साथ के यह गलत बात है और ऐसी गलती के लियें किसी को माफ़ नहीं करना चाहिए प्रकाशित करें वरना कानूनी कार्यवाही अदालत सजा और सुनवाई क्या होती है इसका प्रेक्टिकल जब देखने को मिलेगा तो जिंदगी का आधा वक्त घर परिवार छोड़ कर कोटा की अदालतों में गुजर जाएगा इसलियें कहता हूँ भाई माफ़ करो अपने गुस्से को काबू रखो जानवर मत बनो और इंसान बनकर हमारे देश के इस कानून संविधान की रक्षा करो कानून और संविधान के दायरे में रह कर देश में अराजकता फेलाने वालों से निर्भीक और निडर होकर उनके अपराध उजागर कर उनके खिलाफ मुकदमे दर्ज करवाकर उनसे निपटो किसी का अपमान करने या किसी के धर्म का मजाक उढ़ा लेने से हम महान नहीं बन जाते हमारे शरीर में किसी का गंदा खून बह रहा है सिर्फ ऐसी गलती से हम यही साबित करते है तो दोस्तों आओं एक प्यार भरा सुकून और शांति वाला ज्ञानवर्धक सूचनाओं का आदान प्रदान करने वाला नेटवर्क तय्यार करें जिसमे अगर कोई इतना समझाने पर भी नहीं मानकर कोड में खाज बनता है तो फिर उसे दंडित करवाएं करोगे मेरी मदद या मुझे यूँ ही इस लड़ाई में अकेला रखोगे मेरे भाई मेरी बहनों मेरे बुजुर्गों ............. अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

कैसा भी हो दर्द और सूजन ये देहाती नुस्खा है पक्का शर्तिया इलाज




किसी भी प्रकार की भीतरी और बाहरी सूजन को दूर करने, दर्द और गैस को दूर करने के लिए उपयोगी निर्गुण्डी की जितनी भी तारीफ की जाए वह कम है। इसका पौधा सारे भारत मे, विशेषकर गर्म प्रदेशों में पाया जाता है। आयुर्वेद में कहा गया है-

सिन्दुक: स्मृति दस्तिक कषाय: कटुकोलघु।

केश्योनेत्र हितोहन्ति शूल शोथाम मारुतान्।

कृमि कुष्टारुचि श्लेष्व्रणन्नीला हितद्विधा।।

सिंदुरवारदलं जन्तुवात श्लेष्म हरं लघु।

इस तरह के पौधे की गंध तीव्र और अरूचिकर गंध आती है। इसका सबसे ज्यादा उपयोग सूजन दूर करने में किया जाता है। हर प्रकार की सूजन दूर करने के लिए प्रयोग विधि इस प्रकार है।

प्रयोग- इसके पत्तों को पानी में उबालें। जब भाप उठने लगे तब बरतन पर जाली रख दें। दो छोटे कपड़े पानी में भिगोकर निचोड़ ले। तह करके एक के बाद एक जाली पर रख कर गर्म करें। सूजन या दर्द के स्थान पर रख कर सेंक करें। चोंट मोंच का दर्द, जोड़ों का दर्द, कमर दर्द और वात प्रकोप के कारण होने वाला दर्द दूर करने के लिए यह उपाय बहुत गुणकारी है। कफ,बुखार व फेफड़ों में सूजन को दूर करने के लिए इसके पत्तों का रस निकालकर 2 बड़े चम्मच मात्रा में, 2 ग्राम पिसी पिप्पली मिलाकर दिन में दो बार सुबह शाम पीएं व पत्तों को गर्म कर पीठ पर या छाती पर बांधने से आराम होता है।

तंत्र क्या है, ये कैसे काम करता है?



तंत्र, तांत्रिक या टोने-टोटके का नाम सुनते ही हर आदमी के मन में एक जिज्ञासा उठती है कि आखिर यह तंत्र होता क्या है? तंत्र केवल अनिष्ट कार्यों के लिए ही नहीं होता बल्कि यह एक तरह की ऐसी विद्या है जो व्यक्ति के शरीर को अनुशासित बनाती है, शरीर पर खुद का नियंत्रण बढ़ाती है।

मोटे तौर पर देखा जाए तो तंत्र की परिभाषा बहुत सीधी और सरल है। सामान्य शब्दों में कहें तो तंत्र शब्द का अर्थ तन यानी शरीर से जुड़ा है। ऐसी सिद्धियां जिन्हें पाने के लिए पहले तन को साधना पड़े, या ऐसी सिद्धियां जिन्हें शरीर की साधना से पाया जाए, उसे तंत्र कहते हैं।

तंत्र एक तरह से शरीर की साधना है। एक ऐसी साधना प्रणाली जिसमें केंद्र शरीर होता है। तंत्र शास्त्र का प्रारंभ भगवान शिव को माना गया है। शिव और शक्ति ही तंत्र शास्त्र के अधिष्ठाता देवता हैं। शिव और शक्ति की साधना के बिना तंत्र सिद्धि को हासिल नहीं किया जा सकता है। तंत्र शास्त्र के बारे में अज्ञानता ही इसके डर का कारण हैं।

दरअसल तंत्र कोई एक प्रणाली नहीं है, तंत्र शास्त्र में भी कई पंथ और शैलियां होती हैं। तंत्र शास्त्र वेदों के समय से हमारे धर्म का अभिन्न अंग रहा है। वेदों में भी इसका उल्लेख है और कुछ ऐसे मंत्र भी हैं जो पारलौकिक शक्तियों से संबंधित हैं इसलिए कहा जा सकता है कि तंत्र वैदिक कालीन है।

सिब्‍बल ने चेताया- भारतीयों का अपमान नहीं होने देंगे


नई दिल्‍ली. सोशल साइट्स, खास कर फेसबुक और गूगल पर कंटेंट को लेकर सरकार की आपत्ति की खबरों के बीच दूरसंचार मंत्री कपिल सिब्‍बल ने सफाई दी है। उनका कहना है कि प्रधानमंत्री या कांग्रेस अध्‍यक्ष का नाम नहीं लिया गया था, बल्कि सोशल साइट्स पर देवी-देवताओं के अपमान का मसला उठाया गया था। सरकार इन साइट्स पर लोगों की धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाली टिप्‍पणियों से नाराज है।

सिब्‍बल ने मंगलवार को नई दिल्‍ली में प्रेस कांफ्रेंस कर कहा कि करीब तीन महीने पहले सोशल साइट्स पर ऐसी तस्‍वीरें छपी जो हिंदुस्‍तान के किसी भी व्‍यक्ति को अपमानित करती हैं। ये लोगों की धार्मिक भावनाओं के साथ खिलवाड़ है। सरकार ने गूगल, याहू, माइक्रोसॉफ्ट और फेसबुक के प्रतिनिधियों से इस समस्‍या के हल के लिए रास्‍ता निकालने को कहा। इन कंपनियों को 3 अक्‍टूबर को पहली बार चिट्ठी लिखी गई। 19 अक्‍टूबर को रिमाइंडर भेजा गया लेकिन कोई जवाब नहीं आने पर 4 नवंबर को संचार सचिव ने इन प्रतिनिधियों की मीटिंग बुलाई और फैसला किया गया कि आपत्तिजनक कंटेंट के मामले में आचार संहिता के लिए फ्रेमवर्क तैयार किया जाएगा।

संचार मंत्री ने कहा, ‘इन साइट्स के प्रतिनिधि हमारी कुछ मांगों पर मौखिक तौर पर राजी भी हुए। फिर सरकार ने 29 नवंबर को सुझाव मांगने के लिए मीटिंग बुलाई लेकिन वो नहीं आए। फिर पांच दिसंबर को इन कंपनियों ने लिखित तौर पर साफ कर दिया कि वो हमारी बात नहीं मानेंगे।’ सिब्‍बल ने कहा, ‘मैंने इस कंपनियों से कहा कि वो कोई ऐसा उपाय सुझाएं जिससे ऐसे कंटेंट की जानकारी मिलते ही उन्‍हें तुरंत हटाया जा सके। देश की संस्‍कृति का सम्‍मान करना चाहिए। लोगों की भावनाओं की कद्र करनी चाहिए। हम इस तरह का अपमान नहीं होने देंगे।’
कपिल सिब्‍बल ने प्रेस कांफ्रेंस में मौजूद पत्रकारों को अलग से वो 'आपत्तिजनक तस्‍वीरें' भी दिखाईं जिन पर ऐतराज जताते हुए उन्‍होंने ऐसी सामग्री अपलोड होने से रोकने का तरीका निकालने की बात कही है। उन्‍होंने कहा कि ऐसी तस्‍वीरों का प्रसारण करने की इजाजत न तो टीवी, प्रिंट या ऑनलाइन मीडिया में है। उन्‍होंने कहा, ‘सरकार सेंसरशिप में यकीन नहीं रखती है और सोशल मीडिया की आजादी में कोई दखल नहीं दिया जाएगा। लेकिन मेरा मानना है कि देश के लोगों की भावनाओं की कद्र करने वाला कोई भी व्‍यक्ति ऐसे कंटेट को ‘पब्लिक डोमेन’ में देखना नहीं चाहेगा।’
सिब्‍बल ने कहा कि सरकार सोशल मीडिया पर पोस्‍ट किए जाने वाले कंटेंट पर निगरानी रखने के लिए 'गाइडलाइन' पर काम करेगी। उन्‍होंने कहा 'ऐसी व्‍यवस्‍था हो कि आपत्तिनजक कंटेंट को ऑनलाइन मीडिया में डालने से रोका जा सके। यदि कोई इस तरह की आपत्तिजनक सामग्री हटाना नहीं चाहता तो सरकार को इस बारे में कुछ करना होगा।’ हालांकि सिब्‍बल ने मीडिया में आ रही इन खबरों का भी खंडन किया कि सरकार अन्‍ना हजारे के आंदोलन से डरकर सोशल मीडिया पर अंकुश लगाने की तैयारी में है।

सिब्‍बल के बयान पर फेसबुक ने प्रतिक्रिया जाहिर की है। फेसबुक का कहना है कि वो ऐसे कंटेंट अपनी साइट से हटा देगा जो कंपनी के शर्तों के खिलाफ हैं। कंपनी का कहना है कि वह भारत सरकार की ओर से सोशल मीडिया पर पोस्‍ट किए जाने वाले कंटेंट की निगरानी करने के प्रस्‍ताव में दिलचस्‍पी रखती है।

सिब्‍बल के बयान पर प्रतिक्रिया जाहिर करते हुए भाजपा नेता तरुण विजय ने कहा कि असल मुद्दों से लोगों का ध्‍यान हटाने की सरकार की यह एक और कोशिश है। कपिल सिब्‍बल को इसमें महारत हासिल है।
कांग्रेस सांसद शशि थरुर ने कहा, ‘मैं समझ सकता हूं कि फेसबुक उन आपत्तिजनक कंटेंट को हटाने की प्रक्रिया में है जो कपिल सिब्‍बल ने दिखाए थे। लेकिन दुख की बात यह है कि लोगों ने ऐसे कंटेंट पर आपत्ति नहीं जताई है।’
जम्‍मू कश्‍मीर के सीएम उमर अब्‍दुल्‍ला ने कहा है, ‘मैं सेंसरशिप के बिल्‍कुल खिलाफ हूं लेकिन मैंने खुद देखा है कि फेसबुक और यू ट्यूब पर कितने खतरनाक और आपत्तिजनक कंटेट डाले जाते हैं।’
अमेरिकी अखबार 'न्‍यूयॉर्क टाइम्‍स' के मुताबिक कपिल सिब्बल ने गूगल, माइक्रोसॉफ्ट, फेसबुक और याहू के अधिकारियों की एक बैठक बुला कर कहा था कि धर्म से जुड़े लोगों, प्रतीकों के अलावा भारत के प्रधानमंत्री और कांग्रेस अध्यक्ष जैसी राजनीतिक हस्तियों के खिलाफ अपमानजनक सामग्री की निगरानी करें। सिब्बल ने यह भी कहा कि निगरानी के लिए सिर्फ तकनीक पर निर्भर न रहें बल्कि इसके लिए लोगों को लगाएं

05 December 2011

..इसलिए चढ़ गए टंकी पर

कोटा वार्ड 33 में विकास कार्य नहीं होने से खफा वार्ड पार्षद अपने दो समर्थकों के साथ केरोसिन भरी बोतल हाथ में ले सोमवार को पानी की 70 फीट ऊंची टंकी पर चढ़ गए। करीब सवा 2 घंटे तक चले हंगामे के बाद यूआईटी उपसचिव आनंदी लाल वैष्णव के आश्वासन पर वे नीचे उतरे। नीचे आते ही पुलिस ने सभी को आत्महत्या के प्रयास और शांतिभंग के आरोप में गिरफ्तार कर लिया।

यूआईटी प्रशासन पर भेदभाव का आरोप लगाते हुए सोमवार सुबह 11.30 बजे पार्षद गिर्राज महावर अपने समर्थकों पूर्व पार्षद राजेंद्र सिंह हाड़ा, भाजपा कार्यकर्ता दीपक शर्मा व नरेंद्र शर्मा के साथ गोविंदनगर स्थित पानी की टंकी पर चढ़ गए। यह देख अन्य भाजपा कार्यकर्ता व वार्डवासी भी टंकी के नीचे जमा होने लगे। सूचना मिली तो डीएसपी ठाकुर चंद्रशील व सीआई विजयशंकर शर्मा लवाजमे के साथ मौके पर पहुंच गए। सीआई ने कांफ्रेंसिंग के जरिए पार्षद से न्यास सचिव की बात भी कराई, लेकिन पार्षद नीचे उतरने को तैयार नहीं हुए और अधिकारियों को मौके पर बुलाने की मांग पर अड़ गए।

इस बीच भाजपा के अन्य पार्षद प्रतिपक्ष नेता बृजमोहन सेन, साबिर भाटी, शरणजीत कौर, रिया चौरसिया मौके पर पहुंच गई। कुछ देर बाद यूआईटी उपसचिव आनंदीलाल वैष्णव व स्थानीय जेईएन कमल मीणा मौके पर पहुंचे। उपसचिव ने बताया कि उनके वार्ड के लिए 50 लाख रुपए पांच दिन पहले ही स्वीकृत किए जा चुके हैं। इसके बाद पार्षद महावर अपने समर्थकों के साथ नीचे उतरने को तैयार हो गए। बाद में सहायक अग्निशमन अधिकारी राकेश व्यास, अमजद व पार्षद साबिर भाटी ऊपर गए और चारों को उतार कर नीचे लाए। नीचे आते ही पहले से ही तैयार खड़ी पुलिस ने चारों को गिरफ्तार किया और थाने ले गए। डीएसपी ठाकुर के अनुसार चारों को आत्महत्या का प्रयास व शांतिभंग के आरोप में गिरफ्तार किया गया है।

‘६ माह से पत्र लिख रहा हूं’
गिर्राज महावर का कहना है कि वार्ड में पिछले 2 सालों में नगर निगम ने 15 व यूआईटी ने 14 लाख रुपए का काम कराया है। जबकि, आसपास के वार्डो में 1 करोड़ रुपए से अधिक के काम हो चुके हैं। स्वायत्त शासन मंत्री भी वार्ड 33 को छोड़कर शेष जगह समस्याएं देख जाते हैं और उनका समाधान भी करते हैं। वार्ड में रेलवे लाइन के पास अंडर ब्रिज बनाने, गलियों में सीसी रोड बनाने व वार्ड वासियों को पट्टे वितरित सहित कई काम बाकी हैं। नीचे आए पार्षद गिर्राज महावर ने आरोप लगाया कि यूआईटी को पिछले 6 माह से वे पत्र लिख रहे हैं, लेकिन कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा। महावर ने बताया कि औद्योगिक क्षेत्र के 4 कांग्रेसी पार्षदों के वार्डो में तो विकास कार्य हो रहे हैं, लेकिन वार्ड 33 के साथ भेदभाव किया जा रहा है।

दिखी सवाईमाधोपुर की दहशत
पार्षद व भाजपाइयों के टंकी पर चढ़ते ही पुलिस अधिकारियों को पिछले दिनों सवाईमाधोपुर में एक व्यक्ति के टंकी पर चढ़कर आग लगाने और फिर सीआई को जिंदा जलाने की घटना याद आ गई। ऐसे में यहां पुलिस ने अपनी तरफ से एहतियातन हर काम किए और वहां मौजूद मीडिया को दिखा-दिखाकर किए। ऊपर चढ़े लोगों को माइक से चेतावनी दी गई। वहां जमा भीड़ को भी चेतावनी दी कि वे उन्हें उकसाए नहीं, अन्यथा उन पर भी मुकदमा दर्ज किया जाएगा। उच्च अधिकारियों को सूचना दी। पुलिस लाइन से अतिरिक्त जाब्ता बुलवाया। फायरबिग्रेड को सीढ़ियां, रस्से व जाल लेकर बुलवाया।


॥‘पार्षद गिर्राज महावर ने यूआईटी सचिव को जो भी मांग पत्र दिया था। उस पर 5 दिन पूर्व ही स्वीकृति जारी की जा चुकी है। उसकी स्वीकृति के आदेश जेईएन कमल मीणा को दे दिए हैं और साथ ही पार्षद महावर को भी इस बारे में सूचित किया जा चुका है। फिर भी वे टंकी पर क्यों चढ़े समझ से परे हैं।’
- आनंदी लाल वैष्णव, उप सचिव यूआईटी

॥‘क्षेत्र में विकास कार्य करवाने के लिए मैंने 6 माह पूर्व यूआईटी सचिव को पत्र दिया। 2 माह पूर्व भी उनसे मिला। अभी 5 दिन पहले फिर उन्हें पत्र देकर अवगत करवाया, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई। काम नहीं होने के कारण जनता हमारे घर पर प्रदर्शन करती है। इससे परेशान होकर मैंने यह कदम उठाया। यूआईटी ने कोई काम स्वीकृत नहीं किए हैं न ही मुझे सूचना दी।’
- गिर्राज महावर, पार्षद

गीता का संदेश .

(जीवात्मा का विषय)
श्रीभगवानुवाच
ममैवांशो जीवलोके जीवभूतः सनातनः ।
मनः षष्ठानीन्द्रियाणि प्रकृतिस्थानि कर्षति ॥
भावार्थ : इस देह में यह जीवात्मा मेरा ही सनातन अंश है (जैसे विभागरहित स्थित हुआ भी महाकाश घटों में पृथक-पृथक की भाँति प्रतीत होता है, वैसे ही सब भूतों में एकीरूप से स्थित हुआ भी परमात्मा पृथक-पृथक की भाँति प्रतीत होता है, इसी से देह में स्थित जीवात्मा को भगवान ने अपना 'सनातन अंश' कहा है) और वही इन प्रकृति में स्थित मन और पाँचों इन्द्रियों को आकर्षित करता है॥7॥
शरीरं यदवाप्नोति यच्चाप्युत्क्रामतीश्वरः ।
गृहीत्वैतानि संयाति वायुर्गन्धानिवाशयात्‌ ॥
भावार्थ : वायु गन्ध के स्थान से गन्ध को जैसे ग्रहण करके ले जाता है, वैसे ही देहादिका स्वामी जीवात्मा भी जिस शरीर का त्याग करता है, उससे इन मन सहित इन्द्रियों को ग्रहण करके फिर जिस शरीर को प्राप्त होता है- उसमें जाता है॥8॥
श्रोत्रं चक्षुः स्पर्शनं च रसनं घ्राणमेव च ।
अधिष्ठाय मनश्चायं विषयानुपसेवते ॥
भावार्थ : यह जीवात्मा श्रोत्र, चक्षु और त्वचा को तथा रसना, घ्राण और मन को आश्रय करके -अर्थात इन सबके सहारे से ही विषयों का सेवन करता है॥9॥
उत्क्रामन्तं स्थितं वापि भुञ्जानं वा गुणान्वितम्‌ ।
विमूढा नानुपश्यन्ति पश्यन्ति ज्ञानचक्षुषः ॥
भावार्थ : शरीर को छोड़कर जाते हुए को अथवा शरीर में स्थित हुए को अथवा विषयों को भोगते हुए को इस प्रकार तीनों गुणों से युक्त हुए को भी अज्ञानीजन नहीं जानते, केवल ज्ञानरूप नेत्रों वाले विवेकशील ज्ञानी ही तत्त्व से जानते हैं॥10॥
यतन्तो योगिनश्चैनं पश्यन्त्यात्मन्यवस्थितम्‌ ।
यतन्तोऽप्यकृतात्मानो नैनं पश्यन्त्यचेतसः ॥
भावार्थ : यत्न करने वाले योगीजन भी अपने हृदय में स्थित इस आत्मा को तत्त्व से जानते हैं, किन्तु जिन्होंने अपने अन्तःकरण को शुद्ध नहीं किया है, ऐसे अज्ञानीजन तो यत्न करते रहने पर भी इस आत्मा को नहीं जानते॥11॥

कुरान का संदेश

मोक्षदा एकादशी आज: मोक्ष प्राप्त होता है इस व्रत से




मार्गशीर्ष (अगहन) मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को मोक्षदा एकादशी का व्रत किया जाता है। इस बार 6 दिसंबर, मंगलवार को यह व्रत है। धर्म ग्रंथों के अनुसार इसी तिथि को भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को गीता का ज्ञान दिया था, जो मोक्ष प्रदान करता है। इसी कारण इस एकादशी को मोक्षदा एकादशी कहते हैं। इसकी विधि इस प्रकार है-

मोक्षदा एकादशी (6 दिसंबर, मंगलवार) के दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर सबसे पहले व्रत का संकल्प करें। इसके पश्चात शौच आदि से निवृत्त होकर शुद्ध जल से स्नान करें। इसके पश्चात धूप, दीप, नैवेद्य आदि सोलह चीजों से भगवान श्रीकृष्ण का पूजन करें और रात को दीपदान करें। रात में सोए नहीं। सारी रात भजन-कीर्तन आदि करना चाहिए। जो कुछ पहले जाने-अनजाने में पाप हो गए हों, उनकी क्षमा माँगनी चाहिए।

सुबह पुन: भगवान श्रीकृष्ण की पूजा करें व योग्य ब्राह्मणों को भोजन कराकर यथा संभव दान देने के पश्चात ही स्वयं भोजन करना चाहिए। धर्म शास्त्रों के अनुसार इस व्रत का फल हजारों यज्ञों से भी अधिक है। रात्रि को भोजन करने वाले को उपवास का आधा फल मिलता है जबकि निर्जल व्रत रखने वाले का माहात्म्य तो देवता भी वर्णन नहीं कर सकते।

एंटीबायोटिक भी कुछ नहीं लगते खराश मिटाने वाले इन रामबाण उपायों के आगे



गले में खराश की समस्या सामान्य रूप से वाइरस या बैक्टिरिया के संक्रमण के कारण होती है। कभी - कभी एंटिबायोटिक्स लेने पर भी खराश पीछा नहीं छोड़ती है। माना जाता है ऐसा पेट के एसिड में अनैसर्गिक कमी होने का कारण हो सकता है। ऐसे में घरेलु उपचार ही सबसे कारगर होते हैं। अगर लंबे समय से गले की खराश से परेशान हैं तो नीचे लिखे उपाय जरूर अपनाएं।

- 1-2 लहसुन की कलियाँ और 2लोंग ले कर उसका पेस्ट बनाये और उसे 1 कप मधु के साथ मिलाएं। इस घोल का 1 चम्मच सुबह शाम सेवन करें।
- गरम दूध में जरा सा हल्दी पावडर मिला के सोने से पहले सेवन करने पर भी आराम मिलता है।
- एक पूरा प्याज को थोड़े से पानी में उबालें।उसके बाद उसे पीस कर उसमे थोड़ा मक्खन नमक मिला ले और इस पेस्ट का सेवन करें। एक बार में ही आराम मिल जायेगा।
- शहद में अदरक का रस मिलाकर सेवन करें।
- सौंफ चबाने से भी गले की खराश दूर होती है।
- तुलसी की पत्तियों को उबालकर पीने से गले की खराश दूर हो जाती है।

गीता जयंती आज: निष्काम कर्म करने की शिक्षा देता है यह ग्रंथ


मार्गशीर्ष (अगहन) मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को गीता जयंती का पर्व मनाया जाता है। धर्म शास्त्रों के अनुसार इसी तिथि पर भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को गीता का शिक्षा दी थी। इस बार गीता जयंती का पर्व 6 दिसंबर, मंगलवार को है।

जब महाभारत का युद्ध प्रारंभ होने वाला था। तब अर्जुन ने कौरवों के साथ भीष्म, द्रोणाचार्य, कृपाचार्य आदि श्रेष्ठ महानुभावों को देखकर तथा उनके प्रति स्नेह होने पर युद्ध करने से इंकार कर दिया था। तब भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को गीता का उपदेश दिया था जिसे सुन अर्जुन ने न सिर्फ महाभारत युद्ध में भाग लिया अपितु उसे निर्णायक स्थिति तक पहुंचाया।

गीता को आज भी हिंदू धर्म में बड़ा ही पवित्र ग्रंथ माना जाता है। गीता के माध्यम से ही श्रीकृष्ण ने संसार को धर्मानुसार कर्म करने की प्रेरणा दी। वास्तव में यह उपदेश भगवान श्रीकृष्ण कलयुग के मापदंड को ध्यान में रखते हुए ही दिया है। कुछ लोग गीता को वैराग्य का ग्रंथ समझते हैं जबकि गीता के उपदेश में जिस वैराग्य का वर्णन किया गया है वह एक कर्मयोगी का है। कर्म भी ऐसा हो जिसमें फल की इच्छा न हो अर्थात निष्काम कर्म।

गीता में यह कहा गया है कि निष्काम काम से अपने धर्म का पालन करना ही निष्कामयोग है। इसका सीधा का अर्थ है कि आप जो भी कार्य करें, पूरी तरह मन लगाकर तन्मयता से करें। फल की इच्छा न करें। अगर फल की अभिलाषा से कोई कार्य करेंगे तो वह सकाम कर्म कहलाएगा। गीता का उपदेश कर्मविहिन वैराग्य या निराशा से युक्त भक्ति में डूबना नहीं सीखाता वह तो सदैव निष्काम कर्म करने की प्रेरणा देता है।

महिला के गर्भ में दो 'कैची' देख सभी हुए हैरान-परेशान



रायपुर/कवर्धा।रविवार की रात पंडरिया सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में प्रसव के लिए पहुंची धनबाई के पेट में नर्स ने दो कैचियां छोड़ दीं। यहां कुशालबंद पारा में रहने वाले डब्बू श्रीवास की पत्नी धनबाई की तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें रायपुर ले जाने की सलाह दी गई थी पर उनकी हालत को देखते हुए कवर्धा के ही एक निजी अस्पताल में इलाज कराया गया तो इस लापरवाही का पता चला।

बताया गया कि स्वास्थ्य केंद्र में जचकी के दौरान बच्चे के साथ प्लेसेंटा का पूरा हिस्सा नहीं निकल पाया था। नर्स ने बच्चे की नाभी से लगेप्लेसेंटा की नली बीच से ही काट दी। इसी दौरान दो कैंचिया महिला के गर्भाशय में रह गई। डब्बू श्रीवास ने बताया कि बच्चे के होने के बाद नर्स ने धनबाई की तबीयत बिगड़ने का कारण प्लेसेंटा के पूरी तरह से नहीं निकल पाने को बताया था। रात लगभग 2 बजे उन्हें रायपुर जाने को कहा गया।

उन्होंने बताया कि प्लेसेंटा नहीं निकलने की जानकारी निजी नर्सिग होम के डाक्टर को दी गई। वहां इलाज के दौरान इंजेक्शन लगाने के कुछ देर बाद महिला के गर्भाशय से प्लेसेंटा के साथ दो कैंचियां भी बाहर निकलीं। डब्बू श्रीवास ने पंडरिया के डाक्टरों पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए मुआवजे की मांग की है।

संजीवनी का काम सही :आधी रात को धनबाई की तबियत बिगड़ने पर तुरंत संजीवनी एंबुलेंस सेवा को बुलाया गया। फोन करने के बाद 15 मिनट बाद ही एंबुलेंस पहुंच गई थी। संजीवनी एक्सप्रेस से ही महिला को स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया था।

जान का खतरा

विशेषज्ञों के अनुसार इस लापरवाही से महिला की जान भी जा सकती थी। क्षेत्र में स्वास्थ्य केंद्रों की व्यवस्था पर कई सवाल हैं। इससे पहले भी कई गंभीर मामले सामने आ चुके हैं लेकिन कार्रवाई नहीं होती।

गर्भाशय में कैंची जाना डाक्टरों की गंभीर लापरवाही को दर्शाता है। मामले की जांच सीएमएचओ से कराई जाएगी। दोषी नर्स और डाक्टरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

- मुकेश बंसल, कलेक्टर

दुश्मन को मटियामेट करने अकेले ही कुलाचे भर रहा यह जांबाज!


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जयपुर.देखने में तो यह किसी दूसरे ग्रह का खूंखार जानवर प्रतीत होता है, लेकिन वास्तव में यह तस्वीर एक भारतीय की जांबाज है जो दुश्मन को मटियामेट करने के लिए अकेले ही कुलाचे भरते हुए आगे बढ़ रहा है। मौका है राजस्थान के मरुस्थल में चल रहे सबसे बड़े युद्धाभ्यास का जिसे ‘सुदर्शन शक्ति’ नाम दिया गया है।

जिसमें थल सेना और वायु सेना एक साथ हिस्सा ले रही है।

उद्देश्य -नए सिरे से विकसित किए गए राडार, यान, गाइडेड मिसाइल, बम और अंतरिक्ष उपकरणों का परीक्षण करना।

विशेषता - यह पहला मौका है जब युद्धाभ्यास में थल व वायु सेना एक साथ भाग ले रही है। युद्धाभ्यास रात में भी जारी है, ताकि रात्रिकालीन युध्द में महारथ हासिल हो सके।

नक्सलियों की कथित सपोर्टर सोनी के गुप्तांग में एसपी ने भरे थे पत्थर!



रायपुर/कोलकाता। एस्सार मामले में माओवादियों का कथित रुप से सहयोग करने के मामले में जेल में बंद आदिवासी शिक्षिका सोनी सोरी के गुप्तांगों में कंकड़-पत्थर मिले हैं। साथ ही पुलिस हिरासत के दौरान सोरी को प्रताडित किए जाने की भी पुष्टि भी हुई है।

उल्लेखनीय है कि सोनी के मेडिकल रिपोर्ट को जांच के लिए कोलकाता के एनआरएस अस्पताल में भेजा गया था,जिसके रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक सोनी सोरी के गुप्तांग में कंकड़ मिले जिन्हें डॉक्टरों के पैनल ने बाहर निकाल दिया। यह रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट को सौंप दिया गया है।

ज्ञात हो कि सोनी सोरी ने सुप्रीम कोर्ट में शपथ-पत्र देकर पुलिस हिरासत के दौरान गुप्तांग में कंकड़-पत्थर डालने और पुलिस द्वारा प्रताड़ित किए जाने की शिकायत की थी। जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों के दो सदस्यीय खंडपीठ ने मेडिकल रिपोर्ट के बाद सुनवाई की बात कही थी। वहीं सुप्रीम कोर्ट ने रिपोर्ट को देखने के बाद सोनी सोरी को जेल में ही रखने का आदेश दिया और छत्तीसगढ़ सरकार से 45 दिनों में जवाब मांगा है।

फेसबुक, गूगल, याहू, माइक्रोसॉफ्ट को भारत सरकार की चेतावनी




नई दिल्ली. सरकार इंटरनेट कंपनियों से नाराज है। सरकार ने सोशल वेबसाइटों और इंटरनेट पर लगाम लगाने के लिए दबाव बनाना शुरू कर दिया है। केंद्रीय दूरसंचार और मानव संसाधन एवं विकास मंत्री कपिल सिब्बल ने गूगल, माइक्रोसॉफ्ट, फेसबुक और याहू के अधिकारियों की एक बैठक बुलाकर कहा है कि धर्म से जुड़े लोगों, प्रतीकों के अलावा भारत के प्रधानमंत्री और कांग्रेस अध्यक्ष जैसी राजनीतिक हस्तियों के खिलाफ अपमानजनक सामग्री की निगरानी करें। सिब्बल ने यह भी कहा कि निगरानी के लिए सिर्फ तकनीक पर निर्भर न रहें बल्कि इसके लिए लोगों को लगाएं।

लेकिन इंटरनेट कंपनियों के अधिकारियों ने सिब्बल को दिए गए दो टूक जवाब में कहा है कि वे ऐसा नहीं कर सकते हैं क्योंकि भारत में इंटरनेट पर सामग्री की भरमार है और इसे रोकना नामुमकिन है। इंटरनेट कंपनियों ने कहा है कि अगर किसी विशेष मामले में शिकायत की जाएगी तो वे उस पर कार्रवाई करने के लिए तैयार हैं। कंपनियों का यह भी कहना है कि यह तय करना काफी मुश्किल है क्या आपत्तिजनक है और क्या नहीं। गौरतलब है कि भारत में करीब ढाई करोड़ फेसबुक और १० करोड़ लोग गूगल का इस्तेमाल करते हैं।

सूत्र बताते हैं कि इन कंपनियों के जवाब से सिब्बल उखड़ गए। सिब्बल इस बात से भी नाराज हो गए कि अमेरिकी दूतावास के अधिकारी ने इस पूरे मामले में भारतीय रुख पर नाराजगी जाहिर करने के लिए अतिरिक्त सचिव स्तर के अधिकारी को बुला लिया।
मंत्रालय के एक शीर्ष अधिकारी ने कहा, 'यह हमें मंजूर नहीं है। दूतावास का इस मामले में कोई काम नहीं है।'

बैठक के दौरान सिब्बल ने कंपनी के अधिकारियों को फेसबुक पर सोनिया गांधी की कुछ आपत्तिजनक तस्वीरें दिखाईं। बैठक के दौरान उन्होंने कहा, 'आप लोग प्रोफेट मोहम्मद, प्रधानमंत्री और कांग्रेस अध्यक्ष की आपत्तिनजक तस्वीरों पर क्या सोचते हैं? इन तस्वीरों को देखकर किसी को भी बुरा लगेगा। भारत सरकार सेंसरशिप में यकीन नहीं रखता है। लेकिन विभिन्न समुदायों की भावनाओं को चोट नहीं लगने दिया जा सकता है। वे (इंटरनेट कंपनी) इन वेबसाइटों को चलाती हैं और उन्हें रेगुलेट करना चाहिए।'

सूत्रों के मुताबिक सिब्बल पिछले तीन महीनों से इस मुद्दे को इंटरनेट कंपनियों के सामने उठाते रहे हैं, लेकिन अभी तक उन्हें कामयाबी नहीं मिली है।

इतिहास को बुरा सपना समझ कर भुलाओ भाई से भाई बनकर हाथ मिलाओ नया भारत नया देश बनाओ

लम्हे की कहता और उम्र भर का दाग जी हाँ में बात कर रहा हूँ बाबरी मस्जिद के आरोपियों की जिन्होंने कायदे कानून ताक में रख कर जानवरों सा बर्ताव कर दिया था ॥ देश में अराजकता फेलाने के लियें ऐसे आतताइयों ने खुद को देश का अलमबरदार बता कर देश की तहज़ीब को तार तार कर दिया था ॥ नतीजा आपके सामने है जिस प्रधानमन्त्री के काल में यह सब हुआ उसकी लाश भी सही तरह से ना जल पायी ....... जिस मुख्यमंत्री के काल में यह अपराध हुआ आज उन्हें लोग ढूंढते रहे हैं ॥ कुल मिलाकर सभी अपराधी किसी न किसी परेशानी से जूझ रहे है यह तो बात हुई अपराधियों की उनकी खुदा की तरफ से तय की गयी सजा की लेकिन आज हम बात करेंगे इस मामले को एक कडवा सच होने पर भी हर बार याद कर खुद को तकलीफ पहुँचाने से बचाने की ॥ में कहता हूँ जो हुआ सो हुआ उसे भूलो आगे बढो हर साल यह दिन आता है लेकिन इसका मतलब नहीं के इसे याद कर दुक्ख और तकलीफों को बढाओ देश और देश की तरक्की के बारे में सोचो ॥ दोषियों को केसे सजा मिले इस मामले में अपनी बात कहो ॥ भविष्य में ऐसी हरकतें न हो इसका प्लान तय्यार करो । देश केसे एक जुट हो देश में केसे भाईचारा सद्भावना अपनापन बढ़े जरा इसके बारे में भी सोचो लकीर के फकीर बन कर ऐतिहासिक बात को लेकर खुद के आज को दुःख देने से क्या फायदा

इस जानवर को देख लोग अलग अलग ज़ात के जानवर है लेकिन इनका प्यार इनका अपनापन खुद देख कर कुछ सीख लो । दोस्तों जब जानवर जानवर से प्यार कर सकता है तो हमे तो भगवान ने इंसान बनाया है यारों यह ज़ात पात यह धर्म अधर्म की दीवार तोड़ दो और इन जानवरों की तरह से प्यार और इंसाफ के अलमबरदार बन जाओ कहो ऐसा कर सकोगे ॥ तो आओ हम सब मिलकर आधुनिक भारत का निर्माण करें ... अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

करोड़ों रूपए खर्च हो चुके हैं अयोध्या के विवादित परिसर की सुरक्षा पर



अयोध्या.अयोध्या में छह दिसम्बर 1922 को विवादित ढांचा गिराए जाने के बाद से अब तक विवादित परिसर की सुरक्षा पर ही करोड़ों रूपए खर्च किए जा चुके हैं।

आधिकारिक सूत्नों के अनुसार परिसर की पाइप बैरीकेडिंग और तार लगाने पर ही करीब तीन करोड़ रूपए खर्च किए गए हैं। कैम्पिंग साइट पर लगभग आठ लाख रूपए,निगरानी टावरों पर 25 लाख से ज्यादा रूपए तथा करोड़ों रूपए खर्च कर परिसर में सुरक्षा सम्बन्धी अन्य निर्माण कराए गए हैं जिनमें प्रमुख रुप से सुरक्षाकर्मियों के लिए बनाए गए बैरक,आवास आदि शामिल हैं।

सूत्नों के मुताबिक परिसर में बिजली की आपूर्ति बनाए रखने के लिए करीब चार लाख रूपए की लागत से खरीदे गए जनरेटर की मौजूदगी के बावजूद करीब तीन लाख रुपया प्रतिमाह बिजली के बिल पर खर्च किया जाता है।

सूत्नों ने बताया कि परिसर की सफाई आदि पर ही वर्ष 1992 से अब तक पचास लाख रूपए से ज्यादा खर्च हो जाने का अनुमान है१ परिसर में सुरक्षा के लिए बुलेटप्रूफ गाड़ियों पर भी लाखों रूपए खर्च हुए हैं।

परिसर की सुरक्षा के लिए बनी स्थायी समिति की बैठकों पर भी अच्छा खासा व्यय होता है। क्योंकि उस समिति में दिल्ली और लखनऊ से कई वरिष्ठ अधिकारी भाग लेने आते हैं।

समिति में खुफिया ब्यूरो(आईबी)के भी अधिकारी शामिल हैं। सूत्नों ने बताया कि इसके अलावा विभिन्न मौकों पर अयोध्या की सुरक्षा में किलेबंदी करनी पड़ती है जिस पर लाखों रूपए खर्च होते हैं।

उसका अपना मान सम्मान और अपमान बढ़ता है

आज तक कोई भी
किसी महान आदमी को
अपमानित कर महान नहीं बन सका है ।
कुछ लोग जो ना कुछ होते हैं
वोह अगर ऐसा समझते हैं तो
गलत समझते हैं
क्योंकि
महान बनने के लियें तो खुद को ही
महान कार्य करना पढ़ते हैं
और खुद के किये गये कामों से ही
उसका अपना मान सम्मान और अपमान बढ़ता है ............ अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

मोक्षदा एकादशी 6 को, पुनर्जन्म से मुक्ति दिलाता है यह व्रत



मार्गशीर्ष (अगहन) मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को मोक्षदा एकादशी कहते हैं। इस दिन श्रद्धालु व्रत के साथ भगवान दामोदर की पूजा करते हैं। इस बार यह एकादशी 6 दिसंबर, मंगलवार को है।

धर्म ग्रंथों के अनुसार महाभारत के युद्ध के समय जब अर्जुन मोहग्रस्त हो गया था तब भगवान श्रीकृष्ण ने गीता का उपदेश देकर अर्जुन के मोह का निवारण किया था। उस दिन मार्गशीर्ष मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी थी तभी से इस एकादशी को मोक्षदा एकादशी कहा जाता है।

शास्त्रों के अनुसार इस दिन भगवान दामोदर की विधि-विधान से पूजा करने पर मोक्ष की प्राप्ति होती है। मोक्षदा एकादशी पर श्रीकृष्ण द्वारा कहे गए गीता के उपदेश से जिस प्रकार अर्जुन का मोहभंग हुआ था, वैसे ही इस एकादशी के प्रभाव से व्रती को लोभ, मोह, द्वेष और समस्त पापों से छुटकारा मिल जाता है।

पद्म पुराण में ऐसा उल्लेख आया है कि इस एकादशी के व्रत के प्रभाव से जाने-अनजाने में किए गए सभी पाप नष्ट हो जाते हैं, पुनर्जन्म से मुक्ति मिलती है और पितरों को सद्गति मिलती है। माना जाता है कि इस व्रत की केवल कथा सुनने से ही हजारों यज्ञ का फल मिलता है।


घर से निकलने से पहले कुछ मीठा जरुर खाना चाहिए, क्योंकि...


कहा जाता है कि किसी भी शुभ कार्य को करने से पहले मुंह मीठा करना चाहिए, कोई मिठाई या दही, शकर खाना चाहिए। यह परंपरा भी पुराने समय से ही चली आ रही है। आज भी कई लोग घर से निकलने के पूर्व कुछ मीठा खाते हैं।

हम जब भी किसी परीक्षा या किसी शुभ कार्य के लिए घर से निकलते हैं तो हमारे बुजुर्ग कुछ मीठा खाकर जाने की बात कहते हैं। आखिर इससे फायदा क्या होता है?

ऐसा माना जाता है मीठा खाकर कुछ भी कार्य करने से हमें सफलता मिलती है। मीठा खाने से हमारा मन शांत रहता है। हमारे विचार भी मिठाई की तरह ही मीठे हो जाते हैं। हमारी वाणी में मिठास आ जाती है। यदि हमारा मन किसी दुखी करने वाली बात में उलझा हुआ है और हम मीठा खा लेते हैं तुरंत ही मन प्रसन्न हो जाता है। मीठा खाने के बाद हम किसी भी कार्य को ज्यादा अच्छे से कर सकते हैं।

साथ ही घर से निकलते समय मीठा खाने से हमारे सभी नकारात्मक विचार समाप्त हो जाते हैं और हमारे अंदर सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। कुछ लोग दही और शकर खाकर किसी भी शुभ कार्य की शुरूआत करते हैं। दही में खटास होती है और शकर में मिठास। इस खट्टे-मीठे स्वाद से हमारा मन तुरंत ही दूसरे सभी बुरे विचारों से हट जाता है। मीठा खाने से रक्त संचार बढ़ जाता है। एनर्जी मिलती है।

शुभ कार्य के पहले मीठा खाना चाहिए परंतु ज्यादा मीठा स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है।


क्या आप जानते हैं, कर्बला का पहला शहीद कौन था?

इस्लामी कैलेंडर का पहला महीना मुहर्रम इमाम हुसैन की याद दिलाता है। इमाम हुसैन ने खुदा की राह पर चलते हुए बुराई के खिलाफ कर्बला की लड़ाई लड़ी थी, जिसमें इमाम हुसैन अपने साथियों के साथ शहीद हुए थे। इस लड़ाई की सबसे पहला शहीद था इमाम हुसैन का छ: माह का बेटा अली असगर।

जब याजीदी फौज ने कर्बला की बस्ती के पास बहने वाली फुरात नदी के पानी पर पहरा लगा दिया गया तो इमाम हुसैन के साथियों तथा परिवार का पानी के बिना बुरा हाल हो गया लेकिन नेकी की राह से नहीं हटे। इमाम हुसैन के 6 माह के बेटे अली असगऱ का जब प्यास से बुरा हाल हो गया तब अली असगऱ की मां सय्यदा रबाब ने इमाम से कहा की इसकी तो किसी से कोई दुश्मनी नहीं है शायद इसको पानी मिल जाए। जब इमाम हुसैन बच्चे को लेकर निकले और याजीदी फौज से कहा की कम से कम इसको तो पानी पिला दो।

इसके जवाब में याजीद के फौजी हरमला ने इस 6 माह के बच्चे के गले का निशाना लगा कर ऐसा तीर मारा कि हजऱत अली असगऱ के हलक को चीरता हुआ इमाम हुसैन के बाज़ू में जा लगा। बच्चे ने बाप के हाथ पर तड़प कर अपनी जान दे दी। इमाम हुसैन के काफिले का यह सबसे नन्हा व पहला शहीद था।

ईरान पर शिकंजा कसेगा अमेरिका


तेहरान. ईरान और अमेरिका के बीच तनाव कम नहीं हो रहा है। अमेरिका के ड्रोन विमान पर हमले के बाद अमेरिका ने ईरान पर पाबंदियों का दायरा बढ़ाने की तैयारी शुरू कर दी है। अमेरिकी विदेश मंत्रालय के एक आला अधिकारी ने सहयोगी देशों से ईरान पर प्रतिबंधों का दायरा बढ़ाने का अनुरोध किया है। परमाणु अप्रसार और हथियार नियंत्रण मामलों के विशेष सलाहकार रॉबर्ट एनहॉर्न ने सोमवार को दक्षिण कोरिया और अन्‍य सहयोगी देशों से ईरान के खिलाफ और प्रतिबंध लगाने का अनुरोध किया। अमेरिकी अधिकारी ने कहा कि सहयोगी देशों को ‘साफ और एकीकृत संदेश’ देना चाहिए।

इससे पहले ईरान के सैन्य अधिकारी ने दावा किया कि ईरान ने अमेरिका के एक ड्रोन विमान को मार गिराया है। ईरान की आधिकारिक समाचार एजेंसी इरना से बातचीत में इस अधिकारी ने कहा है कि अगर अमेरिका आगे ऐसी कोई हरकत करता है तो उसका मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा। इरना ने अधिकारी के हवाले से कहा, 'ईरानी वायुसीमा में घुसे एक आधुनिक आरक्यू 170 मानवरहित अमेरिकी जासूसी विमान को ईरान की सेना ने मार गिराया। विमान को हल्का नुकसान हुआ है और अब यह हमारे कब्जे में है।'

लेकिन अमेरिका ने ईरान के इन दावों पर सवाल उठाते हुए कहा है कि ऐसा कोई संकेत नहीं मिला है, जिससे यह साफ हो सके कि कोई विमान मार गिराया गया है। नाम सार्वजनिक न करने की शर्त पर एक अमेरिक अधिकारी ने कहा, 'ऐसा कोई संकेत अब तक नहीं मिला है।'

ईरान के इस दावे के बाद अफगानिस्तान में तैनात नाटो इंटरनेशनल सिक्योरिटी असिस्टेंस फोर्स के प्रवक्ता ने कहा, 'पिछले हफ्ते पश्चिमी अफगानिस्तान के ऊपर उड़ रहा है एक ड्रोन विमान नियंत्रण से बाहर हो गया था। हो सकता है कि यह वही विमान हो, जिसे ईरान मार गिराने का दावा कर रहा है।' ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर अमेरिका समेत कई पश्चिमी देश आशंकाए जाहिर करते रहे हैं। इन देशों का आरोप है कि ईरान बड़े पैमाने पर परमाणु हथियार बना रहा है जबकि ईरान की सफाई है कि वह बिजली और चिकित्सा क्षेत्र में इस्तेमाल के लिए परमाणु कार्यक्रम पर काम कर रहा है। राजनियक स्तर पर कामयाबी न मिलने की सूरत में अमेरिका और इजराइल ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम के खिलाफ सैन्य कार्रवाई से इनकार नहीं किया है।
हाल के दिनों में ईरान और पश्चिमी देशों के बीच तनाव बढ़ गया है। ईरान खुद ड्रोन विमान पर जोर दे रहा है। तीन साल पहले ईरान ने घोषणा की थी कि उसने 600 मील के रेंज वाले एक मानवरहित विमान का निर्माण किया है। ईरान ऐसे टोही विमानों को मार गिराने का दावा पहले भी कर चुका है। इस साल जनवरी में भी ईरान ने खाड़ी में दो टोही मानवरहित विमानों को मार गिराने का दावा किया था। जबकि जुलाई में ईरान ने कहा था कि फोर्दू नाम के परमाणु ठिकाने के नजदीक कोम नाम के धार्मिक तौर पर पवित्र माने जाने वाले शहर के ऊपर उड़ रहे एक टोही विमान को उसने मार गिराया गया था।

सौ प्रतिशत कामयाब नुस्खा: ये कर देगा हाइब्लडप्रेशर और अनिद्रा की छुट्टी


व्यस्त, तनावग्रस्त और अनियमित दिनचर्या की वजह से स्वास्थ्य को बिगाडऩे वाले अनेक रोग आज बहुतयात में लोगों को परेशान किए हुए है। आमतौर पर देखा जाता है कि जब कोई व्यक्ति ऐसे किसी रोग से पीडि़त हो जाता है, तो अन्य कई बिमारीयां उसे घेर लेती हैं।

आयुर्वेद में कई ऐसी जड़ी-बूटियां हैं, जो इन रोगों पर प्रभावी नियंत्रण करके शरीर को स्वस्थ बनाती है। कुछ ऐसी ही जड़ी बूटियों के मिश्रण से तैयार नुस्खा यहां बताया जा रहा है, जो उच्चरक्तचाप, अनिद्रा, मानसिक तनाव, दिल की धड़कनों का बढऩा, शरीर में जलन सी रहना आदि व्याधियों पर बहुत असरकारक है।

सामग्री- अश्वगंधा, जटामांसी, नागरमोथा, ब्राह्मी, शंखपुष्पी, पुष्कर मूल, तगर, कपूर कचरी और बड़ी इलायची।

बनाने की विधि- इन सबकी बराबर-बराबर मात्रा लेकर कूट-पीसकर कपड़े से छान कर महीन चूर्ण तैयार कर लें। बस तैयार है, अनमोल नुस्खा। इसे साफ -सूखी शीशी में भरकर रख दें। रोग तथा रोगी की स्थिति के अनुसार डेढ़ से 3 ग्राम तक की मात्रा में रात में सोने से पहले पानी से लें। यदि रोग बढ़ा हुआ है, तब दिन में भी एक बार इतनी ही मात्रा में और ले सकते हैं। आयुर्वेदिक पद्धति पर आधारित उक्त नुस्खा भले ही तुरंत असर न दिखाए लेकिन यह रोग की जड़ पर प्रहार कर धीरे-धीरे उसे खत्म कर देता है।

कुंवारे लोग ऐसी चीजें अपने पलंग के नीचे नहीं रखना चाहिए, क्योंकि

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सामान्यत: घरों में पलंग के नीचे कुछ न कुछ सामान अवश्य ही रखा जाता है। पलंग या बेड का हमारे जीवन में महत्वपूर्ण होता है। 24 घंटे में से कम से कम 6-8 घंटे हम सोते हैं। इस बात से स्पष्ट है कि अच्छी नींद के लिए अच्छा बेड होना बहुत जरूरी है।

वास्तु शास्त्र के अनुसार यदि बेड भी अच्छा हो लेकिन फिर भी उस पर सोने वाले लड़के या लड़की की शादी नहीं हो रही है या अन्य कोई परेशानियां चल रही है तो निश्चित ही उन युवाओं के पलंग के नीचे वास्तुदोष उत्पन्न करने वाली वस्तुएं रखी हुई हो सकती हैं। वास्तुदोष उत्पन्न करने वाली वस्तुओं में लोहे का सामान, पुराना कबाड़ा आदि शामिल है। विवाह योग्य लड़के और लड़किया जिस पलंग पर सोते हों उसके नीचे लोहे की वस्तुएं या व्यर्थ का सामान नहीं रखना चाहिए। इनसे वास्तुदोष उत्पन्न होता है।

वास्तु शास्त्र सकारात्मक और नकारात्मक ऊर्जा के सिद्धांत पर कार्य करता है। अत: ऐसी वस्तुओं से नकारात्मक प्रभाव बढ़ता है जिससे युवाओं के विचारों में भी नकारात्मकता पैदा होती है। उनका मन व्यर्थ की बातों में भटकने लगता है और उन्हें मानसिक शांति नहीं मिल पाती। इसी वजह से पलंग के नीचे एकदम साफ रखना चाहिए। वहां कोई भी सामान रखने से बचें।

सरोगेट मदर’ से पैदा हुआ आमिर खान का बेटा

मुंबई. बॉलीवुड अभिनेता आमिर खान और उनकी पत्‍नी किरण राव को बेटा हुआ है। बेटे का जन्‍म मुंबई के एक प्राइवेट अस्‍पताल में एक दिसंबर को आईवीएफ तकनीक के जरिये ‘सरोगेट मदर’ की कोख से हुआ है।
आमिर ने कहा, ‘स्‍वास्‍थ्‍य संबंधी दिक्‍कतों के चलते डॉक्‍टरों ने हमें आईवीएफ-सरोगेसी की सलाह दी। बेटे के जन्‍म से हम बेहद खुश हैं। बेटा हमें काफी प्रिय है क्‍योंकि बहुत मुश्किलों से हमने इसे पाया है। हम अपने शुभचिंतकों का शुक्रिया अदा करते हैं।’ गौरतलब है कि 2009 में रॉव का गर्भपात (मिसकैरेज) हो गया था। उस वक्‍त उनके पेट में तीन महीने का बच्‍चा था।
किरण रॉव आमिर खान की दूसरी बीवी हैं। पहली पत्‍नी रीना दत्‍त से आमिर को बेटा जुनैद और बेटी इरा हैं। आमिर खान की 18 अप्रैल 1986 को रीना दत्‍ता से शादी हुई थी। रीना ने फिल्‍म ‘कयामत से कयामत तक’ में छोटा सा किरदार निभाया था। रीना बहुत थोड़े समय के लिए आमिर के कॅरियर से भी जुड़ी रहीं और उन्‍होंने ‘लगान’ में बतौर प्रोड्यूसर काम किया।
हालांकि दिसम्‍बर 2002 में रीना और आमिर का तलाक हो गया। दोनो बच्‍चों जुनैद और इरा की कस्‍टडी भी रीना को सौंपी गई। 28 दिसंबर 2005 को आमिर खान ने किरण रॉव से शादी की जिन्‍होंने ‘लगान’ फिल्‍म में निर्देशक आशुतोष गोवारिकर की असिस्‍टेंट के तौर पर काम किया था। किरण ने आमिर की फिल्‍म ‘धोबी घाट’ में बतौर निर्देशक काम किया था।

कश्‍मीर: पाकिस्‍तानी सैनिकों की फायरिंग में टूटी मस्जिद की छत


श्रीनगर. पाकिस्‍तान के सैनिकों ने नियंत्रण रेखा (एलओसी) पर फिर से युद्धविराम का उल्‍लंघन किया है। आधिकारिक सूत्रों ने सोमवार को बताया कि पाकिस्‍तानी सैनिकों ने सीमा से लगते कुपवाड़ा जिले के करना इलाके में स्थित भारतीय सेना की चौकियों पर फायरिंग की। इस फायरिंग में एक मस्जिद की छत क्षतिग्रस्‍त हो गई। सूत्रों के मुताबिक इस मस्जिद की छत पर सोलर लाइट लगाने का काम चल रहा था।

घटना श्रीनगर से 140 किलोमीटर दूर करना कस्‍बे में हुई। आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक भारतीय सैनिकों ने जवाब में गोलीबारी की और कई मिनटों तक दोनों तरफ से फायरिंग चलती रही।

पिछले तीन महीने में कश्‍मीर घाटी में एलओसी पर पाकिस्‍तानी सैनिकों की ओर से युद्धविराम उल्‍लंघन की यह पहली घटना है। बीते अगस्‍त और सितंबर में पाकिस्‍तानी सैनिकों ने कई बार युद्धविराम का उल्‍लंघन किया। इन घटनाओं में भारतीय सेना के एक जूनियर कमीशन अधिकारी और पाकिस्‍तान के तीन सैनिक मारे गए।

04 December 2011

कोटा दक्षीण विधायक ओम बिरला का जन्म दिन कल रक्तदान दिवस के रूप में मनाया

जी हाँ दोस्तों कोटा दक्षिण के विधायक ओम बिरला जो अपने निष्पक्ष समाज सेवा कार्यों से आम जनता के बीच हर दिल अज़ीज़ बन गये हैं कल उनका जन्म दिन कोटा के कार्यकर्ताओं ने रक्तदान दिवस के रूप में मनाया । ओम बिरला हाल ही में जयपुर में करंट लगने से बीमार हो गये थे जिन्हें लोगों की दुआओं से पुनर्जीवन मिला है ...... दोस्तों ओम बिरला किसी राजनितिक पार्टी के नेता या कार्यकर्ता का नाम नहीं है यह एक समाज सेवी छवि से जुड़े ऐसे कार्यकर्ता का नाम है जिसके नाम की छाप कोंग्रेसियों के दिलों में भी है और भाजपा का कार्यकर्ता होने के बाद भी मुस्लिम मतदाताओं में भी इनकी अपनी पेठ बनी हुई है ... कारण साफ़ है ओम बिरला ने कभी खुद को राजनितिक नहीं समझा केवल एक समाज सेवा की द्रष्टि से जो ही उनके पास काम लेकर आया उनका काम करते गये और गरीबों पीड़ितों में अपनी पहचान बनाने के लियें उन्होंने पहले सभी के दुक्ख दर्द को समझा और फिर अब अलग अलग माध्यमों से लोगों के दुःख दूर कर रहे हैं॥ भूखों को खाना देने के लियें ओम जी बिरला ने प्रसादी योजना चलाई और हर गली मोहल्लों में भूखों के लियें खाने के शिविर लगवाये ॥ नंगों को कपड़ा पहनाने के लियें इन्होने पड़ा बेंक खोला और सभी को कपड़े पहनाने का अभियान चलाया ॥ स्कूली बच्चों को किताबें कोपियों देने का अभियान चलाया ...बीमार के लियें दवा बेंक बनाया ..... पीड़ितों के लियें रक्तदान शिविर लगवा कर ब्लड बेंक में ब्लड जमा करवाया ....... जरूरत मंद को दानवीर की तरह से आर्थिक मदद दिलवाई और जब जहां जनता को दुःख दर्द में इनकी जरूरत पढ़ी इन्हें वहां अपनी कसोटी पर खुद उपस्थिति देकर सक्रिय भूमिका निभाने पर खरा पाया ...सहकारिता का क्षेत्र हो चाहे चिक्तिसा सेवा का चाहे साक्षरता का हर क्षेत्र में ओम जी बिरला के जिंदाबाद के नारे लगे है ऐसे में जहाँ यह जाते हैं वहां इन्हें एक धुन्धों हजार कार्यकर्ता मिलते हैं इनकी छवि पार्टी से अलग हठ कर खुद की समाज सेवी कार्यों से विशिष्ठ बनी है ऐसे हर दिल अज़ीज़ भाजपा विधायक ओम बिरला को अपने गृह जिले से कोन चुनाव हरा सकेगा यह देखने की बात है ओम जी बिरला को उनके जन्म दिन पर बधाई वोह जनता के दुःख दर्द हरे समाज सेवा कार्यों में लगे रहें इसी उम्मीद के साथ ,............... अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

यह है गीता का ज्ञान

(संसार वृक्ष का कथन और भगवत्प्राप्ति का उपाय)
श्रीभगवानुवाच
ऊर्ध्वमूलमधः शाखमश्वत्थं प्राहुरव्ययम्‌ ।
छन्दांसि यस्य पर्णानि यस्तं वेद स वेदवित्‌ ॥
भावार्थ : श्री भगवान बोले- आदिपुरुष परमेश्वर रूप मूल वाले (आदिपुरुष नारायण वासुदेव भगवान ही नित्य और अनन्त तथा सबके आधार होने के कारण और सबसे ऊपर नित्यधाम में सगुणरूप से वास करने के कारण ऊर्ध्व नाम से कहे गए हैं और वे मायापति, सर्वशक्तिमान परमेश्वर ही इस संसाररूप वृक्ष के कारण हैं, इसलिए इस संसार वृक्ष को 'ऊर्ध्वमूलवाला' कहते हैं) और ब्रह्मारूप मुख्य शाखा वाले (उस आदिपुरुष परमेश्वर से उत्पत्ति वाला होने के कारण तथा नित्यधाम से नीचे ब्रह्मलोक में वास करने के कारण, हिरण्यगर्भरूप ब्रह्मा को परमेश्वर की अपेक्षा 'अधः' कहा है और वही इस संसार का विस्तार करने वाला होने से इसकी मुख्य शाखा है, इसलिए इस संसार वृक्ष को 'अधःशाखा वाला' कहते हैं) जिस संसार रूप पीपल वृक्ष को अविनाशी (इस वृक्ष का मूल कारण परमात्मा अविनाशी है तथा अनादिकाल से इसकी परम्परा चली आती है, इसलिए इस संसार वृक्ष को 'अविनाशी' कहते हैं) कहते हैं, तथा वेद जिसके पत्ते (इस वृक्ष की शाखा रूप ब्रह्मा से प्रकट होने वाले और यज्ञादि कर्मों द्वारा इस संसार वृक्ष की रक्षा और वृद्धि करने वाले एवं शोभा को बढ़ाने वाले होने से वेद 'पत्ते' कहे गए हैं) कहे गए हैं, उस संसार रूप वृक्ष को जो पुरुष मूलसहित सत्त्व से जानता है, वह वेद के तात्पर्य को जानने वाला है। (भगवान्‌ की योगमाया से उत्पन्न हुआ संसार क्षणभंगुर, नाशवान और दुःखरूप है, इसके चिन्तन को त्याग कर केवल परमेश्वर ही नित्य-निरन्तर, अनन्य प्रेम से चिन्तन करना 'वेद के तात्पर्य को जानना' है)॥1॥
अधश्चोर्ध्वं प्रसृतास्तस्य शाखा गुणप्रवृद्धा विषयप्रवालाः ।
अधश्च मूलान्यनुसन्ततानि कर्मानुबन्धीनि मनुष्यलोके ॥
भावार्थ : उस संसार वृक्ष की तीनों गुणोंरूप जल के द्वारा बढ़ी हुई एवं विषय-भोग रूप कोंपलोंवाली ( शब्द, स्पर्श, रूप, रस और गन्ध -ये पाँचों स्थूलदेह और इन्द्रियों की अपेक्षा सूक्ष्म होने के कारण उन शाखाओं की 'कोंपलों' के रूप में कहे गए हैं।) देव, मनुष्य और तिर्यक्‌ आदि योनिरूप शाखाएँ (मुख्य शाखा रूप ब्रह्मा से सम्पूर्ण लोकों सहित देव, मनुष्य और तिर्यक्‌ आदि योनियों की उत्पत्ति और विस्तार हुआ है, इसलिए उनका यहाँ 'शाखाओं' के रूप में वर्णन किया है) नीचे और ऊपर सर्वत्र फैली हुई हैं तथा मनुष्य लोक में ( अहंता, ममता और वासनारूप मूलों को केवल मनुष्य योनि में कर्मों के अनुसार बाँधने वाली कहने का कारण यह है कि अन्य सब योनियों में तो केवल पूर्वकृत कर्मों के फल को भोगने का ही अधिकार है और मनुष्य योनि में नवीन कर्मों के करने का भी अधिकार है) कर्मों के अनुसार बाँधने वाली अहंता-ममता और वासना रूप जड़ें भी नीचे और ऊपर सभी लोकों में व्याप्त हो रही हैं। ॥2॥
न रूपमस्येह तथोपलभ्यते नान्तो न चादिर्न च सम्प्रतिष्ठा ।
अश्वत्थमेनं सुविरूढमूल मसङ्‍गशस्त्रेण दृढेन छित्त्वा ॥
भावार्थ : इस संसार वृक्ष का स्वरूप जैसा कहा है वैसा यहाँ विचार काल में नहीं पाया जाता (इस संसार का जैसा स्वरूप शास्त्रों में वर्णन किया गया है और जैसा देखा-सुना जाता है, वैसा तत्त्व ज्ञान होने के पश्चात नहीं पाया जाता, जिस प्रकार आँख खुलने के पश्चात स्वप्न का संसार नहीं पाया जाता) क्योंकि न तो इसका आदि है (इसका आदि नहीं है, यह कहने का प्रयोजन यह है कि इसकी परम्परा कब से चली आ रही है, इसका कोई पता नहीं है) और न अन्त है (इसका अन्त नहीं है, यह कहने का प्रयोजन यह है कि इसकी परम्परा कब तक चलती रहेगी, इसका कोई पता नहीं है) तथा न इसकी अच्छी प्रकार से स्थिति ही है (इसकी अच्छी प्रकार स्थिति भी नहीं है, यह कहने का प्रयोजन यह है कि वास्तव में यह क्षणभंगुर और नाशवान है) इसलिए इस अहंता, ममता और वासनारूप अति दृढ़ मूलों वाले संसार रूप पीपल के वृक्ष को दृढ़ वैराग्य रूप (ब्रह्मलोक तक के भोग क्षणिक और नाशवान हैं, ऐसा समझकर, इस संसार के समस्त विषयभोगों में सत्ता, सुख, प्रीति और रमणीयता का न भासना ही 'दृढ़ वैराग्यरूप शस्त्र' है) शस्त्र द्वारा काटकर (स्थावर, जंगमरूप यावन्मात्र संसार के चिन्तन का तथा अनादिकाल से अज्ञान द्वारा दृढ़ हुई अहंता, ममता और वासना रूप मूलों का त्याग करना ही संसार वृक्ष का अवान्तर 'मूलों के सहित काटना' है।)॥3॥
ततः पदं तत्परिमार्गितव्यं यस्मिन्गता न निवर्तन्ति भूयः ।
तमेव चाद्यं पुरुषं प्रपद्ये यतः प्रवृत्तिः प्रसृता पुराणी ॥
भावार्थ : उसके पश्चात उस परम-पदरूप परमेश्वर को भलीभाँति खोजना चाहिए, जिसमें गए हुए पुरुष फिर लौटकर संसार में नहीं आते और जिस परमेश्वर से इस पुरातन संसार वृक्ष की प्रवृत्ति विस्तार को प्राप्त हुई है, उसी आदिपुरुष नारायण के मैं शरण हूँ- इस प्रकार दृढ़ निश्चय करके उस परमेश्वर का मनन और निदिध्यासन करना चाहिए॥4॥
निर्मानमोहा जितसङ्गदोषाअध्यात्मनित्या विनिवृत्तकामाः ।
द्वन्द्वैर्विमुक्ताः सुखदुःखसञ्ज्ञैर्गच्छन्त्यमूढाः पदमव्ययं तत्‌ ॥
भावार्थ : जिनका मान और मोह नष्ट हो गया है, जिन्होंने आसक्ति रूप दोष को जीत लिया है, जिनकी परमात्मा के स्वरूप में नित्य स्थिति है और जिनकी कामनाएँ पूर्ण रूप से नष्ट हो गई हैं- वे सुख-दुःख नामक द्वन्द्वों से विमुक्त ज्ञानीजन उस अविनाशी परम पद को प्राप्त होते हैं॥5॥
न तद्भासयते सूर्यो न शशाङ्को न पावकः ।
यद्गत्वा न निवर्तन्ते तद्धाम परमं मम ॥
भावार्थ : जिस परम पद को प्राप्त होकर मनुष्य लौटकर संसार में नहीं आते उस स्वयं प्रकाश परम पद को न सूर्य प्रकाशित कर सकता है, न चन्द्रमा और न अग्नि ही, वही मेरा परम धाम ('परम धाम' का अर्थ गीता अध्याय 8 श्लोक 21 में देखना चाहिए।) है॥6॥

कुरान का संदेश


जानें, क्या हैं सफल जीवन के लिए शिव, शम्भु व शंकर नाम के मायने?



पुराणों में शिव महिमा उजागर करती है कि काल पर शिव का नियंत्रण है, न कि शिव काल के वश में। इसलिए शिव महाकाल भी पुकारे जाते हैं। ऐसे शिव स्वरूप में लीन रहकर ही काल पर विजय पाना भी संभव है।

सांसारिक जीवन के नजरिए से शिव व काल के संबंधों से जुड़ा गूढ़ संकेत यही है कि काल यानी वक्त की कद्र करते हुए उसके साथ बेहतर तालमेल व गठजोड़ ही जीवन व मृत्यु दोनों ही स्थिति में सुखद है। जिसके लिए शिव भाव में रम जाना ही अहम है। शिव भाव से जुडऩे के लिए वेदों में आए शिव के अलावा अन्य दो नामों शम्भु व शंकर के मायनों को भी समझना जरूरी है-

वेदों के मुताबिक शम्भु मोक्ष और शांति देने वाले हैं। वहीं शंकर शमन करने वाले और शिव मंगल और कल्याण कर्ता। इस तरह शम्भु नाम यही भाव प्रकट करता है कि शांति की चाहत के लिए अशुभ से परे रहें और शुभ से जुड़े। जिसके लिए क्षमा की तरह अच्छे भाव व कर्मों को अपनाए। जिससे मन दोषरहित होने से भय-रोगों से मुक्त रहेगा और मनचाहे लक्ष्य को पाना संभव होगा।

शंकर का मतलब है शमन करने वाला। यह नाम स्मरण यही भाव जगाता है कि मन को हमेशा शांत, संयमित व संकल्पित रखें, ठीक शंकर के योगी स्वरूप की तरह। संकल्पों से मन को जगाए रखने से ही सारे कलहों का शमन यानी शांति होती रहेगी और सफलता का रास्ता भी साफ दिखाई देगा।

शंभु व शंकर के साथ शिव नाम का अर्थ व भाव है - मंगल या कल्याणकारी। इसके पीछे कर्म, भाव व व्यवहार में पावनता का संदेश है। जिसके लिए जीवन में हर तरह से पवित्रता, आनन्द, ज्ञान, मंगल, कुशल व क्षेम को अपनाएं ताकि स्वयं के साथ दूसरों का भी शुभ हो। क्योंकि शिव नाम के साथ मंगल भावों से जुडऩे से मन की अनेक बाधाएं, विकार, कामनाएं और विकल्प नष्ट हो जाते हैं।

इस तरह शिव, शंभु हो या शंकर नाम हमेशा जीवन में निर्मलता, सफलता और महामंगल ही लाने वाले हैं।

जानिए, क्यों निकाले जाते हैं ताजिए

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मुहर्रम मुस्लिम कैलेण्डर का पहला महीना है। यह पर्व मूलत: इमाम हुसैन की शहादत की याद में मनाया जाता है। सऊदी अरब में मक्का में कर्बला की घटना की याद में यह पर्व मनाया जाता है जिसमें अल्लाह के देवदूत मोहम्मद साहब की पुत्री फातिमा के दूसरे बेटे इमाम हुसैन का निर्दयतापूर्वक कत्ल कर दिया गया था।

यजीद की सेना के विरुद्ध जंग लड़ते हुए इमाम हुसैन के पिता हजरत अली का संपूर्ण परिवार मौत के घाट उतार दिया गया था और मुहर्रम के दसवे दिन इमाम हुसैन भी इस युद्ध में शहीद हो गए थे। मुहर्रम के दसवें दिन ही मुस्लिम संप्रदाय द्वारा ताजिए निकाले जाते हैं। लकड़ी, बांस व रंग-बिरंगे कागज से सुसज्जित ये ताजिए हजरत इमाम हुसैन के मकबरे के प्रतीक के रूप में माने जाते हैं।

इसी जुलूस में इमाम हुसैन के सैन्य बल के प्रतीकस्वरूप अनेक शस्त्रों के साथ युद्ध की कलाबाजियां दिखाते हुए चलते हैं। मुहर्रम के जुलूस में लोग इमाम हुसैन के प्रति अपनी संवेदना दर्शाने के लिए बाजों पर शोक-धुन बजाते हैं और शोक गीत(मर्शिया) गाते हैं। मुस्लिम संप्रदाय के लोग शोकाकुल होकर विलाप करते हैं और अपनी छाती पीटते हैं। इस प्रकार इमाम हुसैन की शहादत की याद में यह पर्व मनाया जाता है।

कड़वा काढ़ा नहीं घर का ये टेस्टी शर्बत करेगा सर्दी-खांसी,एसीडिटी का इलाज


बदलते मौसम के कारण सर्दी-खांसी, पेट खराब होना, एसीडिटी होना एक आम समस्या होती है। जिसका इलाज करने के लिए अधिकतर लोग घरेलु काढ़ा या कड़वी दवाईयां लेते हैं। अगर आप भी इन समस्याओं का इलाज करने के लिए कड़वी दवाईयां लेकर थक चूके हैं तो अपनाइए नीचे लिखा ये टेस्टी इलाज।

तुलसी की पत्तियों और गुड़, नीबू के साथ मिलकर स्वादिष्ट पेय तुलसी सुधा बनाया जाता है। यह स्वादिष्ट होने के साथ साथ जुकाम, खांसी, सिरदर्द और पेट के गैस और एसीडिटी रोगों को खत्म करता है, पाचन के लिये अच्छा होता है और शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को बढा़ता है।

सामग्री- तुलसी की पत्तियां आधा कप,गुड़ - 3/4 कप, नीबू - 5 नीबू का रस (मध्यम आकार के)छोटी इलाइची 10, पानी 10 कप।

विधि - तुलसी की पत्तियों व नीबू का रस निकाल लीजिए। तुलसी की पत्तियां और इलाइची को नीबू के रस के साथ बारीक पीस लीजिये। पानी को गुड़ डालकर उबलने रख दीजिये, पानी में उबाल आने और गुड़ घुलने के बाद गैस बन्द बन्द कर दीजिये। पानी जब थोड़ा गरम रह जाय, तब गुड़ घुले पानी में तुलसी और इलाइची का पेस्ट जो नीबू के रस के साथ बानाया है, मिला कर 2 घंटे के लिये ढक कर रख दीजिये।

अच्छी तरह ठंडा होने के बाद तुलसी का शर्बत छान लीजिये, स्वादिष्ट तुलसी सुधा तैयार है। गर्मी के मौसम में ठंडा या नार्मल तापमान पर तुलसी सुधा पीजिये और सर्दियों में गरम गरम चाय की तरह से तुलसी सुधा पीजिये। तुलसी सुधा पेय को आप फ्रिज में रखकर 15 दिन तक पी सकते हैं।

ये है बिना दवाई, जवान रहने का अनोखा और कमाल का आसान तरीका,

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अगर आप बिना दवाई के हमेशा जवान बनें रहना चाहते है तो आपके लिए सबसे आसान और बिना खर्च का तरीका बताया जा रहा है। इस अनोखे तरीके से आप हमेशा जवान बने रहेंगे। ये आयुर्वेद का खास तरीका है। इसे करने में आपको परेशानी भी नहीं होगी न ही किसी प्रकार का कोई खर्च आपको करना पड़ेगा। इस प्रयोग से आपके चहरे पर हमेशा जवानी की चमक बनी रहेगी।



इस अनोखे तरीके में आपको सीत्कार का शब्द करते हुए सांस लेना है। इस अनोखे तरीके में आपको नाक से सांस नहीं लेना है बल्कि मुंह और होठों को गोलाकार बनाना है। जीभ के दाएं और बाएं के दोनों किनारों को इस प्रकार मोडऩा है कि जीभ का आकार गोलाकार हो जाए। इस गोलाकार जीभ को गोल किए गए होठों से मिलाकर इसके कोने को तालू से लगाना है। अब सीत्कार के समान आवाज करते हुए मुंह से सांस लें। फिर सांस रोक के नाक के दोनों छेदों से सांस छोड़ें । बार बार इस क्रिया को दोहराएं। इसे बैठकर या खड़े होकर भी किया जा सकता है। इस तरीके को आयुर्वेद में सीत्कारी प्राणायाम कहा जाता है।

क्या फायदा होता है इससे : इस अनोखे तरीके से आपके चेहरे पर चमक उत्पन्न हो जाती है। दिनभर स्फूर्ति और उत्साह बना रहता है। इसके नियमित अभ्यास से अनेक प्रकार की सिद्धियां प्राप्त होती है। नींद न आना, आलस और भूख-प्यास की समस्या खत्म हो जाती है। चेहरे की झुर्रियां समाप्त होकर त्वचा सुंदर बन जाती है।

शायद इसी को कहते हैं जाको रखे साईयां मार सके ना कोये!

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जयपुर.सोढ़ाला सब्जी मंडी में होलसेल दुकानदार बबलू सैनी की कार स्वेज फार्म नाले किनारे स्थित वेद विला कॉलोनीमें घर के बाहर खड़ी थी। ढलान के कारण अचानक वह लुढ़कने लगी और दो फुट ऊंची दीवार तोड़ती हुई नाले के पास ढलान में मकान के चबूतरे पर जा टिकी। क्रेन की सहायता से कार को निकाला गया।

यूं बची कार

कार का अगला हिस्सा चबूतरे पर टिक गया और ड्राइवर साइड का टायर हवा में लटक गया, जबकि दूसरी तरफ का टायर दीवार पर टिका रह गया। पिछला हिस्सा सीढ़ियों पर टिकने से वह पचास फुट गहरे नाले में जाने से बच गई।

दोबारा कार देखकर चिल्लाने लगा

कार जहां गिरी, वहीं चार साल का आयूष खेल रहा था और बड़ी बहन नेहा कपड़े सुखा रही थी। कार गिरती देख नेहा नाले में कूद गई। पत्थर गिरने से आयुष के पैर पर हल्की चोट आई। बाद में आयुष को बहन कार के पास ले आई तो वह चिल्लाने लगा। पहले वह आराम से खेल रहा था।

इस वजह से लुढक सकती है कार

एक्सपर्ट का मानना है कि ढलान में खड़ी कार हैंड ब्रेक नहीं लगाने या हैंड ब्रेक सही नहीं लगने से लुढ़क सकती है। इसके लिए कार को ढलान में खड़ी करने से पहले यह अच्छी तरह से जांच लें कि हैंड ब्रेक सही तरीके से लगे हैं या नहीं।

क्या आपको लकवा है? यह टोटके करके देखें

वर्तमान की भागदौड़ भरी जिंदगी में कब कोई इंसान किस बीमारी की चपेट में आ जाए, कहना मुश्किल है। लकवा ऐसी ही एक बीमारी है जो अचानक ही किसी हंसते-खेलते व्यक्ति को अपनी चपेट में ले लेती है। मेडिकल साइंस के इस दौर में लकवा का ईलाज भी संभव है। यदि ईलाज करवाने के साथ-साथ नीचे लिखे कुछ टोटके भी करें तो संभव है लकवा से पीडि़त व्यक्ति और भी जल्दी ठीक हो जाए।

टोटके

- एक काले कपड़े में पीपल की सूखी जड़ को बांधकर लकवा से पीडि़त व्यक्ति के सिर के नीचे रखें तो कुछ ही दिनों में इसका असर दिखने लगेगा।

- प्रत्येक शनिवार के दिन एक नुकीली कील द्वारा लकवा पीडि़त अंग को आठ बार उसारकर शनिदेव का स्मरण करते हुए पीपल के वृक्ष की मिट्टी में गाड़ दें। साथ ही यह निवेदन करें कि जिस दिन अमुक रोग दूर हो जाएगा, उस दिन कील निकाल लेंगे। जब लकवा ठीक हो जाए तब शनिदेव व पीपल को धन्यवाद देते हुए वह कील निकालकर नदी में प्रवाहित कर दें।

- लकवे से पीडि़त व्यक्ति को लोहे की अंगूठी में नीलम एवं तांबे की अंगूठी में लहसुनिया जड़वाकर क्रमश: मध्यमा और कनिष्ठा अंगुली में पहना दें। इससे भी लकवा रोग में काफी लाभ होगा।

गीता जयंती 6 को, मानव जाति की अनमोल धरोहर है यह ग्रंथ

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विश्व के किसी भी धर्म या संप्रदाय में किसी भी ग्रंथ की जयंती नहीं मनाई जाती। हिंदू धर्म में भी सिर्फ गीता जयंती मनाने की परंपरा पुरातन काल से चली आ रही है क्योंकि अन्य ग्रंथ किसी मनुष्य द्वारा लिखे या संकलित किए गए हैं जबकि गीता का जन्म स्वयं श्रीभगवान के श्रीमुख से हुआ है-

या स्वयं पद्मनाभस्य मुखपद्माद्विनि:सृता।।

श्रीगीताजी का जन्म धर्मक्षेत्र कुरुक्षेत्र में मार्गशीर्ष मास में शुक्लपक्ष की एकादशी को हुआ था। यह तिथि मोक्षदा एकादशी के नाम से विख्यात है। गीता एक सार्वभौम ग्रंथ है। यह किसी काल, धर्म, संप्रदाय या जाति विशेष के लिए नहीं अपितु संपूर्ण मानव जाति के लिए हैं। इसे स्वयं श्रीभगवान ने अर्जुन को निमित्त बनाकर कहा है।

इसलिए इस ग्रंथ में कहीं भी श्रीकृष्ण उवाच शब्द नहीं आया है बल्कि श्रीभगवानुवाच का प्रयोग किया गया है। इसके छोटे-छोटे अठारह अध्यायों में इतना सत्य, ज्ञान व गंभीर उपदेश भरे हैं जो मनुष्यमात्र को नीची से नीची दशा से उठाकर देवताओं के स्थान पर बैठाने की शक्ति रखते हैं।

सूअर ने आश्यचर्यजनक रूप से अपने अगले पैरों पर चलना सीख लिया

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शारीरिक रूप से अक्षम पैदा हुए एक सूअर ने आश्यचर्यजनक रूप से अपने अगले पैरों पर चलना सीख लिया है।

पूर्वी चीन के अन्हुल प्रांत में जुलाई माह में पैदा हुए इस सूअर के पिछले दो पैर नहीं हैं। इसके मालिक के अनुसार जन्म के बाद कुछ दिनों तक इसे चलने में काफी तकलीफ हुई।

सूअर के मालिक और किसान गे जिपिंग ने इसकी तकलीफ को देखते हुए शुरूआती कुछ दिनों अगले पैरों पर चलने में इसकी मदद की, लेकिन कुछ ही दिनों में यह इसमें इतना कुशल हो गया कि बिना किसी सहारे के अगले दो पैरों पर चलने में सक्षम हो गया है। फिलहाल यह सूअर स्वस्थ है और इसका वजन 30 किलोग्राम है।

गौरतलब है कि यह पहला मामला नहीं है जब लोगों के सामने ऐसा मामला आया है। पिछले वर्ष भी हेनान प्रांत में एक दो पैरों वाला सूअर पैदा हुआ था, जो सामान्य रूप से अपना जीवन जी रहा है और दो पैरों पर ही चलता है।

03 December 2011

कब्रिस्तान में मुर्दों पर जजिया कर मामले में यूँ हुआ समझोता

जी हाँ दोस्तों इंसानों को जीते जी तो क्या मरने के बाद भी टेक्स देना पढ़ता है और वोह भी जबरिया टेक्स जिस मामले में वसूली करने वाले लोग हैं के मानने को ही तय्यार नहीं होते हैं। श्मशानों में तो मुर्दा टेक्स का ता नहीं लेकिन कब्रिस्तानों में तो प्रबन्धन और खुदाई के नाम पर मजदूरी और जजिया कर वसूली होती ही है । दोस्तों कोटा जिला वक्फ कमेटी में मुझे नायब सदर विधि सलाहकार बनाया गया है............. करोड़ों की वक्फ सम्पत्ति हमारे अपने इस्लाम के कथित अलमबरदारों के पास कोडियों के दाम पर किराए पर है और राजस्थान में वक्फ किराया कानून लागू हो जाने के बाद सभी किरायेदारों का नया किराया निर्धारण कर नोटिस दिया जाना जरूरी था बस नोटिस जाते ही इन कोम के अलमबरदार किरायेदारों के तोते कूच कर गये एक तरफ तो इस्लाम के नाम पर सब कुछ कुर्बान कर देने के जज्बे का प्रचार और दूसरी तरफ अल्लाह की राह में समर्पित वक्फ सम्पत्ति का कब्जा या कोडियों में किराया इस दोहरी व्यस्था के तहत ऐसे अलंबरदारों ने हर बार की तरह इस बार भी वक्फ कमेटी को ब्लेकमेल कर अपनी किरायेदारी मामले को नज़र अंदाज़ करने के मामले को लेकर कुछ लोगों के जरिये कब्रिस्तान में मुर्दों से जजिया कर का मामला उठाया एक अवेध किरायेदार जिसकी किरायेदारी ख़ारिज की गयी थी उसके नेतृत्व में करीब पचास लोग अवेध रूप से वक्फ कमेटी कोटा के कार्यालय में घुसे और कब्रिस्तान में कब्र खोदने के नाम पर लूट की बात करने लगे । इन लोगों का अंदाज़ गलत था तरीका बद्तमिजाना लेकिन बात वाजिब थी ॥ दफ्तर में वक्फ कमेटी सदर अज़ीज़ अंसारी सचिव आबिद हुसेन अब्बासी और में नायब सदर की हेसियत से मोजूद था हमने उनकी शिकायते लिखीं और सभी कब्रिस्तान में कब्र खोदने और प्रबन्धन कार्य में लगे लोगों को नोटिस जारी कर कोटा शहर काजी की मध्यस्थता से काजी साहब की उपस्थिति में समझोता वार्ता करने का निर्णय लिया ............. कल शनिवार की शाम सभी लोग जिनमे एक पक्ष वक्फ कमेटी कोटा की तरफ से में नायब सदर की हेसियत से । सचिव आबिद हुसेन अब्बासी । सदर अज़ीज़ अंसारी थे जबकि मध्यस्थ शहर काजी अनवार अहमद थे दूसरी तरफ से शाह अंजुमन के जमील भाई ॥ अज़ीज़ भाई..... उम्र भाई ॥ कल्लू भाई ..बाबु भाई सुलतान भाई वगेरा थे चर्चा शुरू हुई कब्रिस्तानों के बुरे हालातों और प्रबन्धन पर चर्चा हुई और फिर कब्र खोदने और दफनाने पर चर्चा शुरू हुई कब्रिस्तान में कब्र खोदने के प्रबंधकों का काम देखने वालों का कहना था ke कब्र खोदने में छ सो रूपये की मजदूरी लगती है और कातले सात सो रूपये के लगते हैं जबकि प्रबन्धन शुल्क हजार रूपये तो कमसे कम हम लेंगे ही । .खेर हमने कहा के प्र्न्धक शुल्क किया है तो उनका कहना था के यह तो हदिया है हम तो कुछ लेते ही नहीं हमने कहा के जब आप खिदमत कर रहे हो तो फिर शुल्क किस बात का उनका कहना था के इमाम भी तो खुद की नमाज़ पढने के साथ साथ जब नमाज़ पड़ता है तो उसे हदिया शुल्क दिया जाता है खेर आखिर में काफी हुज्जत के बाद तय किया के कब्र के सात सो रूपये और के हदिया चार सो रूपये मिल जायेंगे इस तरह से कुल ग्यारा सो रूपये होना थे इसके अलावा पत्थर एहले मय्यत को लाना होगा बैठक में यह भी तय हुआ के कोई पक्की कब्र नहीं बनाएगा .बैठक के दोरान शाह समाज की दिलचस्प दलीलें थी उनका कहना था के हम रात दिन कब्रिस्तान में रह कर खिदमद करते हैं कई बार कब्रों में से लोग नाराज़ होकर हमारे झान्पट मार देते हैं ॥ उनका कहना था आधी रात को भी म्य्यतें आती हैं हम बीवी के पहलु में सोते होते हैं हमे जगाया जाता है हमारा दिन और रात इस मामले में खराब रहता है कब्रिस्तान की जानवरों से हिफाजत और ओघाद बाबा स्मेक्चियों से हम ही हिफाजत करते हैं ...... अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

यह है गीता का ज्ञान

(भगवत्प्राप्ति का उपाय और गुणातीत पुरुष के लक्षण)
नान्यं गुणेभ्यः कर्तारं यदा द्रष्टानुपश्यति ।
गुणेभ्यश्च परं वेत्ति मद्भावं सोऽधिगच्छति ॥
भावार्थ : जिस समय दृष्टा तीनों गुणों के अतिरिक्त अन्य किसी को कर्ता नहीं देखता और तीनों गुणों से अत्यन्त परे सच्चिदानन्दघनस्वरूप मुझ परमात्मा को तत्त्व से जानता है, उस समय वह मेरे स्वरूप को प्राप्त होता है॥19॥
गुणानेतानतीत्य त्रीन्देही देहसमुद्भवान्‌ ।
जन्ममृत्युजरादुःखैर्विमुक्तोऽमृतमश्नुते ॥
भावार्थ : यह पुरुष शरीर की (बुद्धि, अहंकार और मन तथा पाँच ज्ञानेन्द्रियाँ, पाँच कर्मेन्द्रियाँ, पाँच भूत, पाँच इन्द्रियों के विषय- इस प्रकार इन तेईस तत्त्वों का पिण्ड रूप यह स्थूल शरीर प्रकृति से उत्पन्न होने वाले गुणों का ही कार्य है, इसलिए इन तीनों गुणों को इसी की उत्पत्ति का कारण कहा है) उत्पत्ति के कारणरूप इन तीनों गुणों को उल्लंघन करके जन्म, मृत्यु, वृद्धावस्था और सब प्रकार के दुःखों से मुक्त हुआ परमानन्द को प्राप्त होता है॥20॥
अर्जुन उवाच
कैर्लिङ्‍गैस्त्रीन्गुणानेतानतीतो भवति प्रभो ।
किमाचारः कथं चैतांस्त्रीन्गुणानतिवर्तते ॥
भावार्थ : अर्जुन बोले- इन तीनों गुणों से अतीत पुरुष किन-किन लक्षणों से युक्त होता है और किस प्रकार के आचरणों वाला होता है तथा हे प्रभो! मनुष्य किस उपाय से इन तीनों गुणों से अतीत होता है?॥21॥
श्रीभगवानुवाच
प्रकाशं च प्रवृत्तिं च मोहमेव च पाण्डव ।
न द्वेष्टि सम्प्रवृत्तानि न निवृत्तानि काङ्‍क्षति ॥
भावार्थ : श्री भगवान बोले- हे अर्जुन! जो पुरुष सत्त्वगुण के कार्यरूप प्रकाश (अन्तःकरण और इन्द्रियादि को आलस्य का अभाव होकर जो एक प्रकार की चेतनता होती है, उसका नाम 'प्रकाश' है) को और रजोगुण के कार्यरूप प्रवृत्ति को तथा तमोगुण के कार्यरूप मोह (निद्रा और आलस्य आदि की बहुलता से अन्तःकरण और इन्द्रियों में चेतन शक्ति के लय होने को यहाँ 'मोह' नाम से समझना चाहिए) को भी न तो प्रवृत्त होने पर उनसे द्वेष करता है और न निवृत्त होने पर उनकी आकांक्षा करता है। (जो पुरुष एक सच्चिदानन्दघन परमात्मा में ही नित्य, एकीभाव से स्थित हुआ इस त्रिगुणमयी माया के प्रपंच रूप संसार से सर्वथा अतीत हो गया है, उस गुणातीत पुरुष के अभिमानरहित अन्तःकरण में तीनों गुणों के कार्यरूप प्रकाश, प्रवृत्ति और मोहादि वृत्तियों के प्रकट होने और न होने पर किसी काल में भी इच्छा-द्वेष आदि विकार नहीं होते हैं, यही उसके गुणों से अतीत होने के प्रधान लक्षण है)॥22॥
उदासीनवदासीनो गुणैर्यो न विचाल्यते ।
गुणा वर्तन्त इत्येव योऽवतिष्ठति नेङ्‍गते ॥
भावार्थ : जो साक्षी के सदृश स्थित हुआ गुणों द्वारा विचलित नहीं किया जा सकता और गुण ही गुणों में बरतते (त्रिगुणमयी माया से उत्पन्न हुए अन्तःकरण सहित इन्द्रियों का अपने-अपने विषयों में विचरना ही 'गुणों का गुणों में बरतना' है) हैं- ऐसा समझता हुआ जो सच्चिदानन्दघन परमात्मा में एकीभाव से स्थित रहता है एवं उस स्थिति से कभी विचलित नहीं होता॥23॥
समदुःखसुखः स्वस्थः समलोष्टाश्मकाञ्चनः ।
तुल्यप्रियाप्रियो धीरस्तुल्यनिन्दात्मसंस्तुतिः ॥
भावार्थ : जो निरन्तर आत्म भाव में स्थित, दुःख-सुख को समान समझने वाला, मिट्टी, पत्थर और स्वर्ण में समान भाव वाला, ज्ञानी, प्रिय तथा अप्रिय को एक-सा मानने वाला और अपनी निन्दा-स्तुति में भी समान भाव वाला है॥24॥
मानापमानयोस्तुल्यस्तुल्यो मित्रारिपक्षयोः ।
सर्वारम्भपरित्यागी गुणातीतः सा उच्यते ॥
भावार्थ : जो मान और अपमान में सम है, मित्र और वैरी के पक्ष में भी सम है एवं सम्पूर्ण आरम्भों में कर्तापन के अभिमान से रहित है, वह पुरुष गुणातीत कहा जाता है॥25॥
मां च योऽव्यभिचारेण भक्तियोगेन सेवते ।
स गुणान्समतीत्येतान्ब्रह्मभूयाय कल्पते ॥
भावार्थ : और जो पुरुष अव्यभिचारी भक्ति योग (केवल एक सर्वशक्तिमान परमेश्वर वासुदेव भगवान को ही अपना स्वामी मानता हुआ, स्वार्थ और अभिमान को त्याग कर श्रद्धा और भाव सहित परम प्रेम से निरन्तर चिन्तन करने को 'अव्यभिचारी भक्तियोग' कहते हैं) द्वारा मुझको निरन्तर भजता है, वह भी इन तीनों गुणों को भलीभाँति लाँघकर सच्चिदानन्दघन ब्रह्म को प्राप्त होने के लिए योग्य बन जाता है॥26॥
ब्रह्मणो हि प्रतिष्ठाहममृतस्याव्ययस्य च ।
शाश्वतस्य च धर्मस्य सुखस्यैकान्तिकस्य च ॥
भावार्थ : क्योंकि उस अविनाशी परब्रह्म का और अमृत का तथा नित्य धर्म का और अखण्ड एकरस आनन्द का आश्रय मैं हूँ॥27॥
ॐ तत्सदिति श्रीमद्भगवद्गीतासूपनिषत्सु ब्रह्मविद्यायांयोगशास्त्रे श्रीकृष्णार्जुनसंवादे गुणत्रयविभागयोगो नामचतुर्दशोऽध्यायः॥14॥

कुरान का संदेश ....




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