कोटा के एक निजी चिकित्सालय पारिक अस्पताल में बारां के एक व्यक्ति जफर मोहम्मद ने भर्ती के दोरान उसकी किडनी निकाल लेने का आरोप लगाया हे जनकी चिकित्सकों ने इसे मरीज़ की मर्जी से निकलना बताया हे ।
बारां का जफर मोहम्मद गुर्दे में दर्द के कारण कोटा में बसंत विहार स्थित इस चिकित्सालय में भर्ती हुआ जहां भर्ती के बाद मरीज़ के गुर्दे में गीतां होना बताया गया इलाज चला ओर फिर मरीज़ ठीक होकर बारां चला गया कुछ दिनों बाद फिर उसके गुर्दे में दर्द हुआ उसने दुसरे चिकित्सक को दिखाया मरीज़ की सोनोग्राफी की गयी तो पता चला के उसका एक गुर्दा ही गायब हे इस मामले में जफर मोहम्मद ने एक लिखित शिकायत पुलिस अधीक्षक कोटा को दी हे के इलाज के दोरान उसकी बिना अनुमति के उसका गुर्दा निकाल दिया गया हे बस इसी बात को लेकर कल डोक्टर भी नाराज़ हो गये उन्होंने इस मामले में कोई भी कानूनी कार्यवाही करने पर सरकार से निपटने की धमकी दी हे पारिक चिकित्सालय के डोक्टर एस ऍन पारिक का कहना हे के मरीज़ उनके यहाँ भर्ती जरुर हुआ था लेकिन उसके गुर्दे में गिठान होने से उसकी सहमती से उसकी जान की रक्षा के लियें यह गुर्दा निकला गया था जिसकी उसे पूरी जानकारी हे लेकिन ६ माह बाद अब वोह ब्लेकमेल कर रहा हे सच क्या हे वोह तो जनच में सामने आ जाएगा लेकिन डोक्टर एस ऍन परिक पर लगे इन आरोपों पर लोगों को विशवास इसलियें नहीं हो रहा हे क्योंकि उन्होंने अपने जीवन में रूपये से अधिक चिकित्सा व्यवसाय को सेवा का रूप देकर बुलंदियों पर पहुँचाने का प्रयास किया हे इसलियें देखते हें सच क्या निकलता हे । अख्तर खान अकेला कोटा राजथान
तुम अपने किरदार को इतना बुलंद करो कि दूसरे मज़हब के लोग देख कर कहें कि अगर उम्मत ऐसी होती है,तो नबी कैसे होंगे? गगन बेच देंगे,पवन बेच देंगे,चमन बेच देंगे,सुमन बेच देंगे.कलम के सच्चे सिपाही अगर सो गए तो वतन के मसीहा वतन बेच देंगे.
वास्ता है प्यार का> जनाब ! मेरा यह ब्लॉग आप सभी भाईयों का अपना ब्लॉग है. इसमें आपका स्वागत है. इसकी गलतियों (दोषों व कमियों) को सुधारने के लिए मेहरबानी करके मुझे सुझाव दें. मैं आपका आभारी रहूँगा. अख्तर खान "अकेला" कोटा(राजस्थान)
07 February 2011
इलाज के नाम पर किड़नी निकालने का आरोप
मजिस्ट्रेट दहेज़ नहीं लेने संकल्प भरेंगे
राजस्थान में नये हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस ने हाल ही में एक आदेश निकला हे जिसमें सभी नये अविवाहित मजिस्ट्रेटों को निर्देश दिया हे के वोह विवाह के दोरान दहेज़ नहीं लेंगे इस बाबत अपना संकल्प पत्र यानि घोषणा पत्र जमा कराएं ।
पिछले दिनों मध्य प्रदेश में एक घोड़ी पर सवार मजिस्ट्रेट साहब ने दहेज़ की माग को लेकर काफी हंगामा किया और फिर पकड़े जाने पर उनेहं नोकरी से हाथ धोना पढ़ा वेसे राजस्थान में कर्मचारियों और अधिकारीयों के लियें पहले से ही कानून बना हे के वोह दहेज़ नहीं लेंगे और इसीलियें राजस्थान के मुख्य न्यायाधीश ऐ के मिश्रा ने यह आदेश जारी किये हें , राजस्थान के मुख्य न्यायधीश अधिन्ष्ठ न्यायालयों में व्याप्त अनियमितताएं रोकने के प्रयासों में भी जुटे हे इस मामले में वोह रजिस्ट्रार विजिलेंस के माध्यम से शीघ्र ही न्यायालयों में आकस्मिक स्टिंग ओपरेशन करवाने के मुड में हें और अचानक किसी भी जिले में न्यायालयों में आम आदमी की तरह जाकर न्यायालयों की कार्यवाहियों का निरिक्षण के प्रयास सम्भव हे , कल कोटा में पूर्व जज डोक्टर धर्म सिंह मीना और मजिस्ट्रेट रितुमिना सहित कई न्यायिक अधिकारीयों के मामले में विजिलेंस रजिस्ट्रार ने कोटा पहुंच कर बयान रिकोर्ड करवाए और जांच के दोरान आवश्यक पत्रावलियां और उनकी फोटो कोपी प्राप्त की । अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान
पिछले दिनों मध्य प्रदेश में एक घोड़ी पर सवार मजिस्ट्रेट साहब ने दहेज़ की माग को लेकर काफी हंगामा किया और फिर पकड़े जाने पर उनेहं नोकरी से हाथ धोना पढ़ा वेसे राजस्थान में कर्मचारियों और अधिकारीयों के लियें पहले से ही कानून बना हे के वोह दहेज़ नहीं लेंगे और इसीलियें राजस्थान के मुख्य न्यायाधीश ऐ के मिश्रा ने यह आदेश जारी किये हें , राजस्थान के मुख्य न्यायधीश अधिन्ष्ठ न्यायालयों में व्याप्त अनियमितताएं रोकने के प्रयासों में भी जुटे हे इस मामले में वोह रजिस्ट्रार विजिलेंस के माध्यम से शीघ्र ही न्यायालयों में आकस्मिक स्टिंग ओपरेशन करवाने के मुड में हें और अचानक किसी भी जिले में न्यायालयों में आम आदमी की तरह जाकर न्यायालयों की कार्यवाहियों का निरिक्षण के प्रयास सम्भव हे , कल कोटा में पूर्व जज डोक्टर धर्म सिंह मीना और मजिस्ट्रेट रितुमिना सहित कई न्यायिक अधिकारीयों के मामले में विजिलेंस रजिस्ट्रार ने कोटा पहुंच कर बयान रिकोर्ड करवाए और जांच के दोरान आवश्यक पत्रावलियां और उनकी फोटो कोपी प्राप्त की । अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान
गायत्री आश्रम में २१ लाख आहूतिया
बोरखेडा स्थित गायत्री विध्ह्या पीठ साधनाश्रम में २१ लाख आहुतियाँ दी जायेंगी इस की संत महाराज कोशिक जी ने आज बसंत पंचमी पर उत्सव की त्य्यारियों पूरी कर ली हें ।
संत कोशिक जी महाराज ने ग्रहस्थ जीवन में रहते हुए सन्यासाश्रम लिया हे और काम क्रोध ,पीड़ा,लालच,अपराध,धन संग्रह , आलस पन सहित सभी कुरीतियों और बुराइयों को त्याग कर दुसरो के चरित्र निर्माण का इन महाराज ने संकल्प लिया हे आज अपने इस संकल्प में कोशिक जी महाराज शत प्रतिशत सफल हे महाराज लोगों को शाका हारी की तरफ प्रस्थान करने के प्रयासों में जुटे हें जबकि अब तक कंजर जाती के हजारों हजार लोगों का परम्परागत काम चोरी छुडवा कर उन्हें मुख्य धारा में जोड़ दिया गया हे , महाराज के सानिध्य में हजारो हजार लोग शराब का असेवं त्याग चुके हे प्रतिवर्ष इनके इस आश्रम में साधकों का मेला लगता हे और फिर साधक नये सिरे से चरित्र निर्माण का संकल्प लेकर अपने अपने क्षेत्रों में शिक्षा के लियें निकल पढ़ते हें इन महराज का अपना अजीब संकल्प हे यह महाराज खुद को तकलीफ देकर दूसरों को खुश रखने की शिक्षा अपने साधकों को देते हें संसद में अरबों रूपये खर्च कर जूतम पैजार और हो हल्ला ने इन महाराज को आहट किया हे और यह इसीलियें राजनीति के घोर आलोचक हे आज सेकड़ों संत ऐसे हें जो इन संत कोशिक जी महाराज की बढती हुई लोकप्रियता को देख कर हट प्रभ हे और इनका अनुकरण करने के लियें बाध्य हें इसलियें जय हो सनक कोशिक जी महाराज की ............. । अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान
संत कोशिक जी महाराज ने ग्रहस्थ जीवन में रहते हुए सन्यासाश्रम लिया हे और काम क्रोध ,पीड़ा,लालच,अपराध,धन संग्रह , आलस पन सहित सभी कुरीतियों और बुराइयों को त्याग कर दुसरो के चरित्र निर्माण का इन महाराज ने संकल्प लिया हे आज अपने इस संकल्प में कोशिक जी महाराज शत प्रतिशत सफल हे महाराज लोगों को शाका हारी की तरफ प्रस्थान करने के प्रयासों में जुटे हें जबकि अब तक कंजर जाती के हजारों हजार लोगों का परम्परागत काम चोरी छुडवा कर उन्हें मुख्य धारा में जोड़ दिया गया हे , महाराज के सानिध्य में हजारो हजार लोग शराब का असेवं त्याग चुके हे प्रतिवर्ष इनके इस आश्रम में साधकों का मेला लगता हे और फिर साधक नये सिरे से चरित्र निर्माण का संकल्प लेकर अपने अपने क्षेत्रों में शिक्षा के लियें निकल पढ़ते हें इन महराज का अपना अजीब संकल्प हे यह महाराज खुद को तकलीफ देकर दूसरों को खुश रखने की शिक्षा अपने साधकों को देते हें संसद में अरबों रूपये खर्च कर जूतम पैजार और हो हल्ला ने इन महाराज को आहट किया हे और यह इसीलियें राजनीति के घोर आलोचक हे आज सेकड़ों संत ऐसे हें जो इन संत कोशिक जी महाराज की बढती हुई लोकप्रियता को देख कर हट प्रभ हे और इनका अनुकरण करने के लियें बाध्य हें इसलियें जय हो सनक कोशिक जी महाराज की ............. । अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान
नगर विकास न्यास कोटा ने पचास लोगों को बेघर किया
नगर विकास न्यास कोटा ने कल अनन्तपुरा झालावाड रोड पर ५० से भी अधिक परिवारों को पक्के मकानों में से हटा कर मकानों को ध्वस्त कर दिया नगर विकास न्यास की इस कार्यवाही में इन परिवारों का करीब पांच करोड़ रूपये का सीधा नुकसान हुआ हे न्यास इस भूमि पर थाना बनाना चाहता हे ।
अनंत पूरा में इस बस्ती को बसे हुए करीब दस वर्ष हो गये और दस वर्षो में यहा महंगे आधुनिक सुविधा युक्त पक्के मकान बनाये जाते रहे दस वर्षों तक तो यहाँ नगर विकास न्यास इस निर्माण को देख कर खामोश रही निर्माण होते वक्त अतिक्रमियों को खदेड़ा नहीं गया और फिर जब यह निर्माण पूरा हो गया वहन नल बिजली के कनेक्शन हो गये और लोग पूर्ण रूप से स्थापित हो गये तब अचानक आधी रात को इस बस्ती पर नगर विकास न्यास का कहर शर्मनाक ही कहा जा सकता हे जब बस्ती बनी बस्ती बसी तब भी इसी पार्टी कोंग्रेस की सरकार थी तब भी आर दी मीना न्यास के सचिव थे लेकिन तब और अब में जनता को रोंदने का यह कानून केसे बदल गया अब अतिक्रमण के नाम पर प्रशासन ने राथोड़ी कर कई दर्जन लोगों को गिरफ्तार कर जेल में दल दिया हे महिलाएं हें के वोह बस अपने आशियाने उजड़ने पर आंसू बहा रही हे कुछ बच्चे हें के उनके आंसू सुख ही नहीं रहे हें ................. । अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान
अनंत पूरा में इस बस्ती को बसे हुए करीब दस वर्ष हो गये और दस वर्षो में यहा महंगे आधुनिक सुविधा युक्त पक्के मकान बनाये जाते रहे दस वर्षों तक तो यहाँ नगर विकास न्यास इस निर्माण को देख कर खामोश रही निर्माण होते वक्त अतिक्रमियों को खदेड़ा नहीं गया और फिर जब यह निर्माण पूरा हो गया वहन नल बिजली के कनेक्शन हो गये और लोग पूर्ण रूप से स्थापित हो गये तब अचानक आधी रात को इस बस्ती पर नगर विकास न्यास का कहर शर्मनाक ही कहा जा सकता हे जब बस्ती बनी बस्ती बसी तब भी इसी पार्टी कोंग्रेस की सरकार थी तब भी आर दी मीना न्यास के सचिव थे लेकिन तब और अब में जनता को रोंदने का यह कानून केसे बदल गया अब अतिक्रमण के नाम पर प्रशासन ने राथोड़ी कर कई दर्जन लोगों को गिरफ्तार कर जेल में दल दिया हे महिलाएं हें के वोह बस अपने आशियाने उजड़ने पर आंसू बहा रही हे कुछ बच्चे हें के उनके आंसू सुख ही नहीं रहे हें ................. । अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान
सांसदों की तरह में भी भ्रष्ट तो क्या हुआ .. ?
जी हाँ दोस्तों चोरी और सीना जोरी एक तो दागी होने पर दूसरों को दागी साबित करने वाली संस्था केन्द्रीय सुचना आयुक्त के पद पर धोखे से नियुक्त हुए और फिर अब पोल खुलने पर कहते हें के संसद भी तो भ्रष्ट होते हें फिर में क्यूँ इस पद पर नहीं रह सकता ।
केन्द्रीय सुचना आयुक्त पी जे थोमस देश भर में भ्रष्ट लोगों की जांच कर उन्हें दागी साबित करने का काम कर रहे हें लेकिन जब खुद चोर हो तो खुद किसी और को केसे चोर साबित कर सकता हे कहते हें के किसी को चोर कहने से पहले खुद अपने गिरेबान में झांकना चाहिए बस थोमस ने लगातार लग रहे आरोप और सुप्रीम कोर्ट के शिकंजे के बाद खुद के गिरेबान में झाँकने की जगह सांसदों के गिरेबान में झाँका और कहा के जब जब सांस भी भर्स्ट होते हें तो फिर में इन आरोपों के साथ पद पर क्यूँ नहीं रह सकता यह बेशर्मी वाला कथन थोमस ने कहीं किसी मंच या अचोपाल पर नहीं दिया हे यह ठोक के डंके की चोट पर बेशर्मी वाली बात तो थोमस ने देश की शीर्ष अदालत सुप्रीम कोर्ट में कही हे अब देख लो जब भ्रष्टाचार मामलें में येदियुरप्पा से थोमस टक चोरी और सीना जोरी का यह आलम हे तो फिर इस देश का क्या होगा ऐसे लोगों को भी सह कर जब यह देश खड़ा हे तो फिर तो मेरा देश महान ही हुआ ना .......... । अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान
केन्द्रीय सुचना आयुक्त पी जे थोमस देश भर में भ्रष्ट लोगों की जांच कर उन्हें दागी साबित करने का काम कर रहे हें लेकिन जब खुद चोर हो तो खुद किसी और को केसे चोर साबित कर सकता हे कहते हें के किसी को चोर कहने से पहले खुद अपने गिरेबान में झांकना चाहिए बस थोमस ने लगातार लग रहे आरोप और सुप्रीम कोर्ट के शिकंजे के बाद खुद के गिरेबान में झाँकने की जगह सांसदों के गिरेबान में झाँका और कहा के जब जब सांस भी भर्स्ट होते हें तो फिर में इन आरोपों के साथ पद पर क्यूँ नहीं रह सकता यह बेशर्मी वाला कथन थोमस ने कहीं किसी मंच या अचोपाल पर नहीं दिया हे यह ठोक के डंके की चोट पर बेशर्मी वाली बात तो थोमस ने देश की शीर्ष अदालत सुप्रीम कोर्ट में कही हे अब देख लो जब भ्रष्टाचार मामलें में येदियुरप्पा से थोमस टक चोरी और सीना जोरी का यह आलम हे तो फिर इस देश का क्या होगा ऐसे लोगों को भी सह कर जब यह देश खड़ा हे तो फिर तो मेरा देश महान ही हुआ ना .......... । अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान
मोम का तेरा बुत ...
मोम का
तेरा
और तेरी
यादों का
बुत बनाकर
तेज़ धुप में
में
तुझे
पाने के
लियें
क्या बेठा
एक सूरज की धुप
ने तुझे
पिघला दिया
अब बता
इतनी कमजोर
तू मेरी
केसे
हो सकेगी ।
अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान
तेरा
और तेरी
यादों का
बुत बनाकर
तेज़ धुप में
में
तुझे
पाने के
लियें
क्या बेठा
एक सूरज की धुप
ने तुझे
पिघला दिया
अब बता
इतनी कमजोर
तू मेरी
केसे
हो सकेगी ।
अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान
में चला में चला ....
उसने
जो फेरी
नज़रें मुझ से
नजरें झुकाए
में ऐसे चला
आवाज़ दी उन्होंने
तो भी
में
ना सुन सका
ना पलट कर
उन्हें
फिर से
देख सका
बस इसीलियें
आज भी में
अकेला सिर्फ अकेला हूँ ।
अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान
जो फेरी
नज़रें मुझ से
नजरें झुकाए
में ऐसे चला
आवाज़ दी उन्होंने
तो भी
में
ना सुन सका
ना पलट कर
उन्हें
फिर से
देख सका
बस इसीलियें
आज भी में
अकेला सिर्फ अकेला हूँ ।
अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान
06 February 2011
राजस्थान में थानेदारों की सेटिंग हे मुख्यमंत्री जानते हें
राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत यहाँ की पुलिस के सारे माजने जानते हें लेकिन एक मुख्यमंत्री अगर पुलिस के सारे कुकिर्तय जान ले और फिर कुच्छ भी न कर सके तो फिर ऐसे मुख्यमंत्री को बेबस और लाचार से ज्यादा क्या कहा जा सकता हे ।
कल मुख्यमंत्री जी ने एक बयान में साफ़ तोर पर कहां के थानेदार लोगों का चोरों के साथ सम्बन्ध हें यह लोग शुरू में तो इलाके में गश्त करते हे फिर धीरे धीरे इनकी इलाके के चोरों से सेटिंग हो जाती हे और थाने सिपाहियों के हवाले कर यह घरों पर सोते हें । गहलोत का यह तल्ख बयान पहली बार नहीं दिया गया हे गहलोत यह बयान इसके पहले भी कई बार दे चुके हे लेकिन पुलिस आचरण सुधार के लियें सुप्रीम कोर्ट के प्रकाश सिंह वाले मामले के दिशा निर्देशों की पालना नहीं की हे सरकार ने राजस्थान में पुलिस अधिनियम तो बना लिया हे लेकिन इस अधिनियम की पलना नहीं की हे अधिनियम के तहत पुलिस आयोग.पुलिस कल्याण आयोग और जिला,सम्भाग,राज्य स्तर की निगरानी समितियों के गठन का आवश्यक प्रावधान हे जिसमें जनता के वोह लोग शामिल होंगे जिनका राजनीती से कोई सीधा सम्बन्ध नहीं होगा बस इसी लियें सरकार पीछे हे के अगर वोह पार्टी के पार्षद कार्यकर्ताओं को इसमें जगह नहीं दे सकती हे तो फिर वोह केसे किसी नियुक्ति करे अब जब पुलिस अधिनियम की पालना नहीं होगी पुलिस पर नकेल नहीं कसी जायेगी पुलिस के खिलाफ शिकायतों का निस्तारण नहीं होगा तो फिर पुलिस तो पुलिस हे मजे लेगी हे और फिर उन्हें गहलोत की क्या प्रवाह केवल जुबान से ही तो कहते हें ऐसे लोगों के खिलाफ कोई कार्यवाही तो नहीं की गयी इसलियें पुलिस निश्चिन्त हें के यह बयान शायद राजनितिक बयान हो और यही कारण हें के खाकी जी नीचे इ उपर टक मजे कर रहे हें राजनीति का एय्ह हल हे के किसी अधिकारी को दो वर्ष से पूर्व नहीं हटाया जा सकता लेकिन गहलोत ने तो आई जी तक के अधिकारीयों को दो वर्ष पहले ही इधर उधर कर दिया हे तो फिर जब खुद दूध के धुले नहीं हें तो पुलिस तो पुलिस हे कुछ भी कह लो ऐसे ही करेगी । अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान
कल मुख्यमंत्री जी ने एक बयान में साफ़ तोर पर कहां के थानेदार लोगों का चोरों के साथ सम्बन्ध हें यह लोग शुरू में तो इलाके में गश्त करते हे फिर धीरे धीरे इनकी इलाके के चोरों से सेटिंग हो जाती हे और थाने सिपाहियों के हवाले कर यह घरों पर सोते हें । गहलोत का यह तल्ख बयान पहली बार नहीं दिया गया हे गहलोत यह बयान इसके पहले भी कई बार दे चुके हे लेकिन पुलिस आचरण सुधार के लियें सुप्रीम कोर्ट के प्रकाश सिंह वाले मामले के दिशा निर्देशों की पालना नहीं की हे सरकार ने राजस्थान में पुलिस अधिनियम तो बना लिया हे लेकिन इस अधिनियम की पलना नहीं की हे अधिनियम के तहत पुलिस आयोग.पुलिस कल्याण आयोग और जिला,सम्भाग,राज्य स्तर की निगरानी समितियों के गठन का आवश्यक प्रावधान हे जिसमें जनता के वोह लोग शामिल होंगे जिनका राजनीती से कोई सीधा सम्बन्ध नहीं होगा बस इसी लियें सरकार पीछे हे के अगर वोह पार्टी के पार्षद कार्यकर्ताओं को इसमें जगह नहीं दे सकती हे तो फिर वोह केसे किसी नियुक्ति करे अब जब पुलिस अधिनियम की पालना नहीं होगी पुलिस पर नकेल नहीं कसी जायेगी पुलिस के खिलाफ शिकायतों का निस्तारण नहीं होगा तो फिर पुलिस तो पुलिस हे मजे लेगी हे और फिर उन्हें गहलोत की क्या प्रवाह केवल जुबान से ही तो कहते हें ऐसे लोगों के खिलाफ कोई कार्यवाही तो नहीं की गयी इसलियें पुलिस निश्चिन्त हें के यह बयान शायद राजनितिक बयान हो और यही कारण हें के खाकी जी नीचे इ उपर टक मजे कर रहे हें राजनीति का एय्ह हल हे के किसी अधिकारी को दो वर्ष से पूर्व नहीं हटाया जा सकता लेकिन गहलोत ने तो आई जी तक के अधिकारीयों को दो वर्ष पहले ही इधर उधर कर दिया हे तो फिर जब खुद दूध के धुले नहीं हें तो पुलिस तो पुलिस हे कुछ भी कह लो ऐसे ही करेगी । अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान
कोटा मेला भ्रस्ताचार रिपोर्ट में लिपा पोती
कोटा में वर्ष २०१० के मेला आयोजन में जब खुल कर भ्रस्ताचार और बन्दर बाँट हुई तो बस अख़बार चीखे जनता चीखी और सरकार इस मामले में जाँच के लियें मजबूर हुई सोचा अपने अधीनस्थ अधिकारीयों से जांच करवाते हें लीपा पोती हो जाएगी लेकिन सरकार का यह दाव उल्टा पढ़ गया और अब मामले में लीपापोती जारी हे ।
कोटा के मेले भ्रटाचार की जांच स्वायत शासन मुख्य सचिव जी एस संधू ने कोटा कलेक्टर टी रविकांत से करवाने के निर्देश दिए अब टी रविकान्त तो राजस्थान के बेस्ट कलेक्टर थे वोह किसी का दबाव इस जांच में केसे बर्दाश्त कर सकते थे सो उन्होंने सारे कागजात मंगवाए बयान रिकोर्ड किये और वही किया जो उन्हें पत्रावलियों में दिखा फिर शुरुर हुआ कलेक्टर टी रविकांत पर राजनितिक दबाव का खेल लेकिन जनता का रुपया ऐसे ही लुटा देने वालों को टी रविकांत माफ़ करने को तय्यार नहीं थे इसलियें सरकार ने उन्हें कोटा कलेक्टर के पद से हटा दिया लेकिन वोह तो अपनी जाँच रिपोर्ट तय्यार कर सरकार को पहले ही भेज चुके थे बस फिर किया था कोटा महापोर सहित कुछ अधिकारियों की जान पर बन आई और मामला ठंडे बसते में डाल दिया गया जो अब टक ठंडे बसते में हें ।
कल स्वायत शासन मंत्री जी से जब इस रिपोर्ट के बारे में पूंछा गया तो उन्होंने कहा रिपोर्ट गलत हे दुबारा से जांच होगी फिर बतायेंगे क्या हुआ पहले की रिपोर्ट क्यूँ गलत हे इस मामले में उनके पास कोई भी जवाब नहीं था और वोह निरुत्तर से पत्रकारों को बिना जवाब दिए चल दिए ................... । अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान
कोटा के मेले भ्रटाचार की जांच स्वायत शासन मुख्य सचिव जी एस संधू ने कोटा कलेक्टर टी रविकांत से करवाने के निर्देश दिए अब टी रविकान्त तो राजस्थान के बेस्ट कलेक्टर थे वोह किसी का दबाव इस जांच में केसे बर्दाश्त कर सकते थे सो उन्होंने सारे कागजात मंगवाए बयान रिकोर्ड किये और वही किया जो उन्हें पत्रावलियों में दिखा फिर शुरुर हुआ कलेक्टर टी रविकांत पर राजनितिक दबाव का खेल लेकिन जनता का रुपया ऐसे ही लुटा देने वालों को टी रविकांत माफ़ करने को तय्यार नहीं थे इसलियें सरकार ने उन्हें कोटा कलेक्टर के पद से हटा दिया लेकिन वोह तो अपनी जाँच रिपोर्ट तय्यार कर सरकार को पहले ही भेज चुके थे बस फिर किया था कोटा महापोर सहित कुछ अधिकारियों की जान पर बन आई और मामला ठंडे बसते में डाल दिया गया जो अब टक ठंडे बसते में हें ।
कल स्वायत शासन मंत्री जी से जब इस रिपोर्ट के बारे में पूंछा गया तो उन्होंने कहा रिपोर्ट गलत हे दुबारा से जांच होगी फिर बतायेंगे क्या हुआ पहले की रिपोर्ट क्यूँ गलत हे इस मामले में उनके पास कोई भी जवाब नहीं था और वोह निरुत्तर से पत्रकारों को बिना जवाब दिए चल दिए ................... । अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान
टाइम्स सर्वे में गांधी सबसे उपर
विश्व में शांति और अह्निसा का परचम लहरा कर भारत में भूख हडताल , लाठी और लंगोटी के बल पर छेड़े गये वैचारिक युद्ध से अंग्रेजों को भारत छोड़ने पर मजबूर करने वाले राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को टाइम्स मैगज़ीन ने अपने सर्वे में विश्व के महान लोगों में सरवोछ स्थान पर रखा हे । अलेक्ज़ेन्द्र दी ग्रेट भी दुसरे नम्बर पर हे जबकि अब्राहम लिंकन और अकबर दी ग्रेट का नम्बर गांधी से बहुत पीछे हे । सही बात भी हे गांधी एक त्याग की मूर्ति एक विचार एक शिक्षा का नाम हे जबकि दुसरे लोग खुद के लियें जिए हें उन्होंने जनता के लियें देश के लियें एकता के लियें कुछ खास त्याग नहीं किया हे , विश्व में गान्धीवादी विचारधारा की इस लोक्र्प्रियता को देख कर अमेरिका में गांधी की स्मिरती चीजें जो उनके पास रखी हें उन्हें नीलाम करने का मानस बनाया हे इसकी जानकारी भारत सरकार को हे गाँधी जी के प्रंशसकों को हे लेकिन आज तक इन लोगों ने गाँधी की यादों से जुडी महत्वपूर्ण वस्तुं को देश में लाने के कोई भी राजनितिक या कुटनीतिक प्रयास तेज़ नहीं किये हें तेज़ करना तो दूर की बात अभी तो इस मामले में कोई प्रयास ही नहीं किये हें ऐसे में इस देश और इस देश के गांधी जी के प्रशंसकों में गुस्सा फूटना तो वाजिब हे । अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान
अमेरिका में भारतियों पर संकट
देश की वीजा निति और कबूतर बाजों की धर पकड़ में ढिलाई बरती जाने से देश के कई लोग आज अमेरिका में बिना वीजा के रह रहे हें और वहन उन्हें परेशानी के दोर से गुजरना पढ़ रहा हे । हाल ही में फर्जी वीजा के कारण देश के नोंइहालों को अमेरिका में कोलर रेडियों बाँध कर बंधक बनाया गया था ।
देश में कबूतर बाज़ी और व्यवसाय के नाम पर विदेश भेजने वालों ने अपना व्यवसाय तेज़ी से बढ़ाया हे और आज के शिक्षा के नाम पर बहर भेजने वालों की संख्या में व्रद्धी हुई हे देश के विदेश मंत्रालय और गृह मंत्रालय की इस पर पकड़ कमजोर होने और राजनितिक लोगों की इस मामले में सांठ गाँठ होने से हालात और बिगड़ गये हें गुजरात और पंजाब के सेकड़ों नो जवना आज अमेरिका की प्रताड़ना सिर्फ इसलियें झेल रहे हें के वहां उन्हें धोके से पढाई का या नोकरी का वीजा देकर भेजा गया हे नतीजन कई लोगों को इधर उधर छुपना पढ़ता हे और फिर अमेरिका उनके खिलाफ मुकदमे दर्ज कर उनसे सख्ती करता हे जबकि अमेरिका का कोई भी आदमी भारत या पाक में किसी भी अपराध में अगर पकड़ा जाता हे तो वहां का मंत्रालय कुछ वक्त बाद ही इस मामले में हस्तक्षेप कर अपने केडी अपराधी को छुडा कर ले जाता हे यही तो फर्क हे अमेरिका और भारत में खुद के नागरिकों की सुरक्षा के प्रति सरकार के समर्पण में । अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान
देश में कबूतर बाज़ी और व्यवसाय के नाम पर विदेश भेजने वालों ने अपना व्यवसाय तेज़ी से बढ़ाया हे और आज के शिक्षा के नाम पर बहर भेजने वालों की संख्या में व्रद्धी हुई हे देश के विदेश मंत्रालय और गृह मंत्रालय की इस पर पकड़ कमजोर होने और राजनितिक लोगों की इस मामले में सांठ गाँठ होने से हालात और बिगड़ गये हें गुजरात और पंजाब के सेकड़ों नो जवना आज अमेरिका की प्रताड़ना सिर्फ इसलियें झेल रहे हें के वहां उन्हें धोके से पढाई का या नोकरी का वीजा देकर भेजा गया हे नतीजन कई लोगों को इधर उधर छुपना पढ़ता हे और फिर अमेरिका उनके खिलाफ मुकदमे दर्ज कर उनसे सख्ती करता हे जबकि अमेरिका का कोई भी आदमी भारत या पाक में किसी भी अपराध में अगर पकड़ा जाता हे तो वहां का मंत्रालय कुछ वक्त बाद ही इस मामले में हस्तक्षेप कर अपने केडी अपराधी को छुडा कर ले जाता हे यही तो फर्क हे अमेरिका और भारत में खुद के नागरिकों की सुरक्षा के प्रति सरकार के समर्पण में । अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान
दागियों को मंत्री बनाने पर जजों की गर्जना
देश में गम्भीर किस्म के आरोपियों के खिलाफ जांच का कोई बी नतीजा निकले बगेर उन्हें केंद्र या राज्य सरकारों द्वारा महत्वपूर्ण पदों पर बिठा देने से देश के शीर्ष कोर्ट के जज साहब नाराज़ हें और महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री विलास राव देशमुख के दागी होने के बाद भी उन्हें केंद्र में पंचायत मंत्री बनाये जाने पर उन्हें सार्वजनिक तोर पर इस परम्परा का अविरोध करना पढ़ा हे ।
देश की शीर्ष कोर्ट के जज ऐ के गांगुली ,जी एस सिंघवी ने कल एक निजी समारोह में भ्र्स्ताचारियों को ऊँचे ओहदे पर बिठाने की परम्परा को आड़े हाथों लेते हुए सरकार की खुले आम खिंचाई की उन्होंने साफ़ शब्दों में विलास राव देशमुख का उदाहरण देकर ऊँगली उठाई जजों की इस साफ़ गोई से कोंग्रेस और दुसरे जो आरोपी दागी लोग हे वोह तिलमिला गये हें और शीघ्र ही जजों की हदबंदी कानून की तय्यारी तेज़ कर दी हे इस मामले में प्रधानमन्त्री जी तो खुद कहते रहे हें के जजों को अपनी हद में रहना चाहिए लेकिन अब सभी सांसद इस मामले में एक मत लग रहे हे वेसे कल जज लोगों ने जो भी कहा सच कहा इसका जनता को समर्थन करना चाहिए वरना संसद,मंत्रालय और प्रसाद पर्यन्त पदों पर भ्रष्ट लोगों की जो बाढ़ आ गयी हे उसे रोक पाना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन हो जाएगा । अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान
देश की शीर्ष कोर्ट के जज ऐ के गांगुली ,जी एस सिंघवी ने कल एक निजी समारोह में भ्र्स्ताचारियों को ऊँचे ओहदे पर बिठाने की परम्परा को आड़े हाथों लेते हुए सरकार की खुले आम खिंचाई की उन्होंने साफ़ शब्दों में विलास राव देशमुख का उदाहरण देकर ऊँगली उठाई जजों की इस साफ़ गोई से कोंग्रेस और दुसरे जो आरोपी दागी लोग हे वोह तिलमिला गये हें और शीघ्र ही जजों की हदबंदी कानून की तय्यारी तेज़ कर दी हे इस मामले में प्रधानमन्त्री जी तो खुद कहते रहे हें के जजों को अपनी हद में रहना चाहिए लेकिन अब सभी सांसद इस मामले में एक मत लग रहे हे वेसे कल जज लोगों ने जो भी कहा सच कहा इसका जनता को समर्थन करना चाहिए वरना संसद,मंत्रालय और प्रसाद पर्यन्त पदों पर भ्रष्ट लोगों की जो बाढ़ आ गयी हे उसे रोक पाना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन हो जाएगा । अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान
तेरी याद फिर आ गयी ..
आज
खुशबु देते
खिले फूलों के बाग़ में
घूमते वक्त
एक बार फिर
कांटा मेरे पैर में चुभा
और
इस चुभन के
साथ ही
मुझे
ना जाने क्यूँ
तेरी याद आगयी ।
अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान
खुशबु देते
खिले फूलों के बाग़ में
घूमते वक्त
एक बार फिर
कांटा मेरे पैर में चुभा
और
इस चुभन के
साथ ही
मुझे
ना जाने क्यूँ
तेरी याद आगयी ।
अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान
कोटा में बूचड़ खाने का विवाद खत्म
कोटा में महापोर रत्ना जेन हें , स्वायत शासन मंत्री ओसवाल जेन शांति कुमार धारीवाल हें ,इधर देश भर में और राजस्थान में नगर पालिका कानून में हर जिले में बूचड़ खाने बनाने के कानूनी प्रावधान हें और इन प्रावधानों की क्रियान्विति ने राजस्थान हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट ने सरकारों को विशेष दिशा निर्देश जारी किये हें , कोटा में निगम की प्रथम महापोर श्रीमती सुमन श्रंगघी के कार्यकाल में यहाँ बूचड़ खाना खोलने की कवायद शुरू हुई थी लेकिन अब तक इस नाम पर राजनीती के अलावा कुछ नहीं हुआ हे ।
अभी हाल ही में कोटा में नये आधुनिक बूचड़ खाने का प्रस्ताव रखा कसाई और खटीक चाहते थे के बूचड़ खाना नहीं खुले उन्होंने अपने जेन भाई मित्रों से कहा खटिक भाइयों ने अपनी पार्टी से जुड़े भाइयों से कहा और कोटा में केवल बूचड़ खाने की कागज़ी योजना पर ही जबर्दस्त विरोध शुरू हो गया विरोध भी ऐसा के राजनीतिकरण से धार्मिकी कारण हो गया और साधू संत जेन साधू महाराज विरोध करने लगे महापोर जी महाराज के पास गयीं और कहा के में जेन हूँ लेकिन कोटा की महापोर होने के कारण विधि नियमों से बंधी हूँ बात खामोश होती इसके पहले ही आज स्वायत शासन मंत्री शांति कुमार धारीवाल ने पल्टी खाली धारीवाल जी ने आनन फानन में प्रेस कोंफ्रेंस बुलाई और कोटा में कभी भी बूचड़ खाना नहीं खुलेगा इसका एलान कर दिया इतना ही नहीं प्रेस कोंफ्रेंस में उनके साथ बेठी महापोर पर सारा दोष लगते हुए कहा के महापोर ने यह गलती की हे और अगर यह प्रस्ताव सरकार के पास भिजवा भी देतीं तो भी में इसे पारित नहीं होने देता बस इस तरह से कोटा में पिछले एक माह से चल रहे इस विवाद को राजनितिक आधार पर राजनीति के जरिये ही खत्म करने का प्रयास किया गया ।
यह तो बूचड़ खाने का राजनितिक पहलु हुआ लेकिन दूसरा पहलु यह हे के जनता जगह जगह विधि विरुद्ध मांस काटे जाने पर बेचे जाने से दुखी हे इसकी गंदगी कहां जाती हे सब जानते हें कई गलियों में लोगों का रहना दुश्वार हे तो कई गलियों में से लोगों का गुजरना मुश्किल हे अब हालात यह हें के कोंग्रेस सरकार ने इस मामले में थूक कर चाट लिया हे ... । अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान
अभी हाल ही में कोटा में नये आधुनिक बूचड़ खाने का प्रस्ताव रखा कसाई और खटीक चाहते थे के बूचड़ खाना नहीं खुले उन्होंने अपने जेन भाई मित्रों से कहा खटिक भाइयों ने अपनी पार्टी से जुड़े भाइयों से कहा और कोटा में केवल बूचड़ खाने की कागज़ी योजना पर ही जबर्दस्त विरोध शुरू हो गया विरोध भी ऐसा के राजनीतिकरण से धार्मिकी कारण हो गया और साधू संत जेन साधू महाराज विरोध करने लगे महापोर जी महाराज के पास गयीं और कहा के में जेन हूँ लेकिन कोटा की महापोर होने के कारण विधि नियमों से बंधी हूँ बात खामोश होती इसके पहले ही आज स्वायत शासन मंत्री शांति कुमार धारीवाल ने पल्टी खाली धारीवाल जी ने आनन फानन में प्रेस कोंफ्रेंस बुलाई और कोटा में कभी भी बूचड़ खाना नहीं खुलेगा इसका एलान कर दिया इतना ही नहीं प्रेस कोंफ्रेंस में उनके साथ बेठी महापोर पर सारा दोष लगते हुए कहा के महापोर ने यह गलती की हे और अगर यह प्रस्ताव सरकार के पास भिजवा भी देतीं तो भी में इसे पारित नहीं होने देता बस इस तरह से कोटा में पिछले एक माह से चल रहे इस विवाद को राजनितिक आधार पर राजनीति के जरिये ही खत्म करने का प्रयास किया गया ।
यह तो बूचड़ खाने का राजनितिक पहलु हुआ लेकिन दूसरा पहलु यह हे के जनता जगह जगह विधि विरुद्ध मांस काटे जाने पर बेचे जाने से दुखी हे इसकी गंदगी कहां जाती हे सब जानते हें कई गलियों में लोगों का रहना दुश्वार हे तो कई गलियों में से लोगों का गुजरना मुश्किल हे अब हालात यह हें के कोंग्रेस सरकार ने इस मामले में थूक कर चाट लिया हे ... । अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान
05 February 2011
यूँ आंसुओं पर ना जाओ मेरे ..
यूँ
सूखे हुए
आंसुओं पर
न जाओ मेरे
कभी हम भी थे
जो हर
रोते हुए को
हंसाया करते थे ,
आज मिल कर उनसे
खुद को भी
मुस्कुराए हुए
बरस हो गये हें ...... ।
अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान
सूखे हुए
आंसुओं पर
न जाओ मेरे
कभी हम भी थे
जो हर
रोते हुए को
हंसाया करते थे ,
आज मिल कर उनसे
खुद को भी
मुस्कुराए हुए
बरस हो गये हें ...... ।
अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान
में जिसकी राह देखता हूँ ............ .
में जिसे
यूँ प्यार से
निहारता था
जिसके एक
इशारे पर
अपना सब कुछ
यूँ ही
न्योछावर करता था
आज वोह
उठ कर
चल दिए हें
कुदरत का
मुझ पर कहर देखिये
जिन्हें चाहा
जिंदगी से ज्यादा
जिंदगी भर मेने
आज वोह
मेरी तरफ
मूढ़ कर भी
नहीं देखते हें
और हम हें के
बस
उन्हीं उनकी
राह तकते हें ............. ।
अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान
यूँ प्यार से
निहारता था
जिसके एक
इशारे पर
अपना सब कुछ
यूँ ही
न्योछावर करता था
आज वोह
उठ कर
चल दिए हें
कुदरत का
मुझ पर कहर देखिये
जिन्हें चाहा
जिंदगी से ज्यादा
जिंदगी भर मेने
आज वोह
मेरी तरफ
मूढ़ कर भी
नहीं देखते हें
और हम हें के
बस
उन्हीं उनकी
राह तकते हें ............. ।
अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान
घर जला हुआ ...
में आज फिर
अपने
जले हुए घर को
देख रहा था
उस घर की चीखें
उस घर की चीत्कार
सुन सुन कर सिहर रहा था
सुने से , टूट कर बिखरे
इस घर को
फिर से
संवारने की
सोच रहा था
के बस
फिर वही
सामने आ गये
जिन्होंने
मेरे इस खुशहाल घर को
राख के ढेर में बदला था
मेरे जले हुए घर को
फिर से
आबाद करने की कोशिश
और
इस घर जलाने वाले
की आँखों की चमक
मुझे बताओ
में असमंजस में हूँ
ऐसे में
अब में क्या करूं ।
अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान
अपने
जले हुए घर को
देख रहा था
उस घर की चीखें
उस घर की चीत्कार
सुन सुन कर सिहर रहा था
सुने से , टूट कर बिखरे
इस घर को
फिर से
संवारने की
सोच रहा था
के बस
फिर वही
सामने आ गये
जिन्होंने
मेरे इस खुशहाल घर को
राख के ढेर में बदला था
मेरे जले हुए घर को
फिर से
आबाद करने की कोशिश
और
इस घर जलाने वाले
की आँखों की चमक
मुझे बताओ
में असमंजस में हूँ
ऐसे में
अब में क्या करूं ।
अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान
दुश्मन ऐसे न जला ...
ऐ मेरी
जान और
प्यार के दुश्मन
हम तो
फूलों की छुहन से
यूँ ही जल जाते हें
हमें
यूँ
आग के शोलों में
ना जला ।
अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान
जान और
प्यार के दुश्मन
हम तो
फूलों की छुहन से
यूँ ही जल जाते हें
हमें
यूँ
आग के शोलों में
ना जला ।
अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान
प्यार में क्या ऐसा होता हे
मेने
जब भी
जिस किसी को भी
प्यार का
फरिश्ता माना हे
सच कहूँ
मुझे उससे
गम और नफरत के सिवा
कुछ ना मिला
आप तो
अनुभवी हे
बतलाओ ना
क्या
प्यार में
यही सब
होता हे ।
अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान
जब भी
जिस किसी को भी
प्यार का
फरिश्ता माना हे
सच कहूँ
मुझे उससे
गम और नफरत के सिवा
कुछ ना मिला
आप तो
अनुभवी हे
बतलाओ ना
क्या
प्यार में
यही सब
होता हे ।
अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान
महा कवि सूर्य मल मिश्रण ...
हाडोती में बहादुरों की धरती बूंदी के वीर रस कवि जो बाद में महा कवि कहलाये महा कवि सूर्य मल मिश्रण के बारे में देनिक अंगद के सम्पादक आदरणीय मदन मदिर ने काव्य टिप्पणी की हे जिसमें बूंदी की वीरता का उल्लेख हे जो प्रस्तुत हे ।
जिन कलमों में तलवारों को
लहू पिलाने की ताकत हे
जिन कवियों में राजपाट पर हुकुम
चलाने की आदत हे
सूर्यमल्ल की जन्म भूमि में
सूर्यवंशियों का स्वागत हे
पर प्रतिमा के पीछे गरिमा का
तस्कर व्यापा न हो
सत्ता की माया की कवि की
महिमा पर अधिकार न हो
चोराहे पर रोप दिया जो वंश भास्कर
चेताता हे
खुली धुप के रंग मंच पर
अंधकार का नाच ना हो .......... ।
संकलन ..... अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान
जिन कलमों में तलवारों को
लहू पिलाने की ताकत हे
जिन कवियों में राजपाट पर हुकुम
चलाने की आदत हे
सूर्यमल्ल की जन्म भूमि में
सूर्यवंशियों का स्वागत हे
पर प्रतिमा के पीछे गरिमा का
तस्कर व्यापा न हो
सत्ता की माया की कवि की
महिमा पर अधिकार न हो
चोराहे पर रोप दिया जो वंश भास्कर
चेताता हे
खुली धुप के रंग मंच पर
अंधकार का नाच ना हो .......... ।
संकलन ..... अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान
राजस्थान मुख्यमंत्री हटते ही पत्रावलियां नष्ट होती हे .?
राजस्थान में सरकार बदलते ही मुख्यमंत्री की समस्त पत्रावलियां नष्ट हो जाती हे यह कोई कानून नहीं फिर भी सरकार ने यह बचकाना आदेश एक परम्परा बना रखा हे । अभी हाल ही में सरकार ने एक सुचना के अधिकार अधिनियम के प्रार्थना पत्र पर यह जवाब दिया हे
राजस्थान में मुख्यमंत्री का कारायाली अलग से स्थापित होता हे जहां उनके अपने वफादार कर्मचारी होते हे और अधिकारी भी मन चाहे लगाये जाते हें करोड़ो अरबों रूपये जनता की शिकायते सुनने के नाम पर खर्च होते हे और फिर अगर उनका रिकोर्ड खत्म कर दिया जाए तो फिर तो यह जनता के साथ विश्वास घाट ही कहलायेगा इसीलियें राजस्थान में इस मामले को लेकर जनता में असंतुष्टि हे जयपुर में वर्ष २००८ के मामलों की नकल में वर्तमान मुख्यमंत्री जी के स्टाफ ने जब यह जवाब दिया तो यहाँ कानून के जानकार और पूर्व मुख्य सचिव सहित सभी अधिकारीयों को ताज्जुब हुआ अब इस मामले में जब सरकार के गेर कानूनी तोर तरीकों की पोल खुल गयी हे तब तो सरकार को कानून कायदे से चलने के लियें भविष्य के लियें रिकोर्ड सुरक्षित रखना ही होगा ॥ अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान
राजस्थान में मुख्यमंत्री का कारायाली अलग से स्थापित होता हे जहां उनके अपने वफादार कर्मचारी होते हे और अधिकारी भी मन चाहे लगाये जाते हें करोड़ो अरबों रूपये जनता की शिकायते सुनने के नाम पर खर्च होते हे और फिर अगर उनका रिकोर्ड खत्म कर दिया जाए तो फिर तो यह जनता के साथ विश्वास घाट ही कहलायेगा इसीलियें राजस्थान में इस मामले को लेकर जनता में असंतुष्टि हे जयपुर में वर्ष २००८ के मामलों की नकल में वर्तमान मुख्यमंत्री जी के स्टाफ ने जब यह जवाब दिया तो यहाँ कानून के जानकार और पूर्व मुख्य सचिव सहित सभी अधिकारीयों को ताज्जुब हुआ अब इस मामले में जब सरकार के गेर कानूनी तोर तरीकों की पोल खुल गयी हे तब तो सरकार को कानून कायदे से चलने के लियें भविष्य के लियें रिकोर्ड सुरक्षित रखना ही होगा ॥ अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान
मुस्कानों का ताज महल ......
दोस्तों हाडोती में बूंदी के विख्यात पत्रकार जनाब मदन मदिर जो आपात काल के सिपाही भी रहे हें उन्होंने अपने संघर्ष के दोरान सिर्फ और सिर्फ बुराई के खिलाफ लढना सीखा हे उन्होंने कभी किसी के आगे घुटने नहीं टेके कभी कवि से अपने जीवन की शुरात करने वाले यह सियासी समाजवादी आज बूंदी से प्रकाशित देनिक अंगद के प्रधान सम्पादक और मालिक हें पिछले दिनों इन जनाब की एक नई पुस्तक शब्द यात्रा का दिलचस्प विमोचन हुआ उसमें से केवल एक छोटी सी कविता मेरे ब्लोगर भाइयों की सेवा में पेश हे जिसका शीर्षक उन्होंने मुस्कानों का ताजमहल रखा हे .................................
यूँ तो अंतर की धरती पर
कई महल आशाओं के
सुख सम्पन्न कई मीनारें
विजयोल्लास मयी प्राचीरें
स्नेह प्रीति की कई सुरंगें
सुख सुविधा के अगिन झरोखे
सोने चांदी की दीवारे
स्वाभिमान के लोह स्तम्भ
धेर्य दुर्ग साहसिक कंगूरे
टूट टूट कर
ढह ढह कर
बन गये खंडहर
लेकिन अधरों की जमना पर
मुस्कानों का ताजमहल
अब तक जीवित हे ।
संकलन अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान
यूँ तो अंतर की धरती पर
कई महल आशाओं के
सुख सम्पन्न कई मीनारें
विजयोल्लास मयी प्राचीरें
स्नेह प्रीति की कई सुरंगें
सुख सुविधा के अगिन झरोखे
सोने चांदी की दीवारे
स्वाभिमान के लोह स्तम्भ
धेर्य दुर्ग साहसिक कंगूरे
टूट टूट कर
ढह ढह कर
बन गये खंडहर
लेकिन अधरों की जमना पर
मुस्कानों का ताजमहल
अब तक जीवित हे ।
संकलन अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान
04 February 2011
सारी राजनतिक पार्टियां काले धन से चलती हे ... .
देश में राज स्थापित कर कुर्सी हडपने की दोड में लगी सभी राजनितिक पार्टियां काले धन को प्राप्त कर अपना काम चलाती हे यह कथन किसी एरे गेरे का नहीं बलके इस अपराध में शामिल एक उद्योगपति सांसद राहुल बजाज का हे जिस की सत्यता पर कोई शक करने का आधार नहीं हे ।
देश के बढ़े उद्योगपतियों में से एक राहुल बजाज इन दिनों सांसद हे और वोह काले धन पर बोल रहे थे उन्होंने साफ़ शब्दों में कहा के राजनितिक पार्टियां चुनाव के दिनों में उद्योगपतियों से काला धन प्राप्त करती हें पर चुनाव उसी आधार पर लढा जाता हे , राहुल बजाज व्यवाहारिक हें वोह खुद भी सियासी पार्टियों को काले धन का चंदा देने वालों को इसुची में रहे होंगे लेकिन उहोने जो सच उगला हे उससे देश के सामने एक सवाल खड़ा हो गया हे के जब राजनितिक पार्टियां कुर्सी हथियाने के लियें काले धन और काले लोगों का सहारा लेती हे तो फिर कुर्सी मिलने के बाद वोह जनता की कम और ऐसे काले धन कमाने वालों की रक्षक ज्यादा बन जाती हे राजनितिक पार्टियां अब नई कहावत बना चुकी हे जेसे लोग कहते हें के तुम एक पैसा दोगे तो भगवान एक लाख देगा उसे अब नेताओं एन बदल दिया काले धन वालों से पार्टियां कहती हे के तुम हमें एक पैसा दोगे तो सरकार तुम्हे एक करोड़ कमाने का मोका देगी अब इससे अच्छा उद्योग कोनसा होगा झना अनुपातिक तोर पर एक पैसा लगाने पर एक करोड़ मिल रहे हें फिर जब सियासी पार्टी ने अगर वायदा कर लिया हे तो फिर पूरा तो करना ही हे और आज देश में जो कुछ भी हो रहा हे वोह इसी वायदे को निभाने के कारण जनता को बली का बकरा बना कर कसाई उद्योगपतियों,जमाखोरों,मुनाफाखोरों और भर्स्ट लोगों के सामने तदपने बिलखने सिसकने के लियें डाल दिया गया हे शायद इन दिनों लोकतंत्र की यही परिभाषा हो गयी हे .............. । अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान
देश के बढ़े उद्योगपतियों में से एक राहुल बजाज इन दिनों सांसद हे और वोह काले धन पर बोल रहे थे उन्होंने साफ़ शब्दों में कहा के राजनितिक पार्टियां चुनाव के दिनों में उद्योगपतियों से काला धन प्राप्त करती हें पर चुनाव उसी आधार पर लढा जाता हे , राहुल बजाज व्यवाहारिक हें वोह खुद भी सियासी पार्टियों को काले धन का चंदा देने वालों को इसुची में रहे होंगे लेकिन उहोने जो सच उगला हे उससे देश के सामने एक सवाल खड़ा हो गया हे के जब राजनितिक पार्टियां कुर्सी हथियाने के लियें काले धन और काले लोगों का सहारा लेती हे तो फिर कुर्सी मिलने के बाद वोह जनता की कम और ऐसे काले धन कमाने वालों की रक्षक ज्यादा बन जाती हे राजनितिक पार्टियां अब नई कहावत बना चुकी हे जेसे लोग कहते हें के तुम एक पैसा दोगे तो भगवान एक लाख देगा उसे अब नेताओं एन बदल दिया काले धन वालों से पार्टियां कहती हे के तुम हमें एक पैसा दोगे तो सरकार तुम्हे एक करोड़ कमाने का मोका देगी अब इससे अच्छा उद्योग कोनसा होगा झना अनुपातिक तोर पर एक पैसा लगाने पर एक करोड़ मिल रहे हें फिर जब सियासी पार्टी ने अगर वायदा कर लिया हे तो फिर पूरा तो करना ही हे और आज देश में जो कुछ भी हो रहा हे वोह इसी वायदे को निभाने के कारण जनता को बली का बकरा बना कर कसाई उद्योगपतियों,जमाखोरों,मुनाफाखोरों और भर्स्ट लोगों के सामने तदपने बिलखने सिसकने के लियें डाल दिया गया हे शायद इन दिनों लोकतंत्र की यही परिभाषा हो गयी हे .............. । अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान
कोटा में चम्बल एडवेंचर फेस्टिवल आज से . ....
कोटा में चम्बल एडवेंचर फेस्टिवेल के तहत आज से तीन दिन टक चम्बल में खेल कूद के अलावा दूसरी रोमांचक प्रतियोगिताएं आयोजित की जा रही हे । कोटा में चम्बल का वरदान हे और चम्बल के कारण कोटा में जो खुशहाली हरियाली हे उसे याद करने के लियें गत कई वर्षों से ५ फरवरी से चम्बल फेस्टिवल कोटा में मनाया जा रहा हे ।
कोटा में इस दोरान प्रशासन और आयोजन समिति की तरफ से कई कार्यक्रम आयोजित किये जाते हें और रचनात्मक रोमांचक कार्यक्रम जेसे रस्सा कशी , बेलून उड़ाना , पहाड़ी और कन्दराओं में रस्सों के बल पर चढना , नोकायाना , वाटर पोलो सहित कई प्रतियोगिताये होती हे ।
चम्बल के तट पर बसे इस कोटा शहर को चम्बल ने वरदान दिया हे इस अवसर पर चम्बल की पूजा भी होती हे और चम्बल को मां का दर्जा देकर इसे चुनरी वगेरा उढाई जाती हे लेकिन दोस्तों यह चम्बल जहां कोटा के लियें वरदान हे वहीं भ्र्स्ताचारियों के लियें महा वरदान हे यहाँ कोटा में नहर मरम्मत के नाम पर चम्बल शुद्धिकरण के नाम पर किये गये ५० सालों के भ्रस्ताचार का हिसाब लगायें तो यकीन मानिए देश का पूरा कर्ज़ उतर जाए इतना भ्रटाचार हो चुका हे और वोह आज भी यथावत जारी हे लेकिन भाई यह चम्बल हे यहाँ कोटा को वरदान हे तो चम्बल के नाम पर आने वाली योजनाओं के खर्च में नेताओं से लेकर ठेकेदार इंजीनियर और अधिकारीयों के लियें भी भ्रस्ताचार का वरदान हे ............ । अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान
कोटा में इस दोरान प्रशासन और आयोजन समिति की तरफ से कई कार्यक्रम आयोजित किये जाते हें और रचनात्मक रोमांचक कार्यक्रम जेसे रस्सा कशी , बेलून उड़ाना , पहाड़ी और कन्दराओं में रस्सों के बल पर चढना , नोकायाना , वाटर पोलो सहित कई प्रतियोगिताये होती हे ।
चम्बल के तट पर बसे इस कोटा शहर को चम्बल ने वरदान दिया हे इस अवसर पर चम्बल की पूजा भी होती हे और चम्बल को मां का दर्जा देकर इसे चुनरी वगेरा उढाई जाती हे लेकिन दोस्तों यह चम्बल जहां कोटा के लियें वरदान हे वहीं भ्र्स्ताचारियों के लियें महा वरदान हे यहाँ कोटा में नहर मरम्मत के नाम पर चम्बल शुद्धिकरण के नाम पर किये गये ५० सालों के भ्रस्ताचार का हिसाब लगायें तो यकीन मानिए देश का पूरा कर्ज़ उतर जाए इतना भ्रटाचार हो चुका हे और वोह आज भी यथावत जारी हे लेकिन भाई यह चम्बल हे यहाँ कोटा को वरदान हे तो चम्बल के नाम पर आने वाली योजनाओं के खर्च में नेताओं से लेकर ठेकेदार इंजीनियर और अधिकारीयों के लियें भी भ्रस्ताचार का वरदान हे ............ । अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान
कोटा कलेक्टर हाई कोर्ट को कुछ नहीं समझते .....
जी हाँ दोस्तों कोटा कलेक्टर और उनके अधीनस्थ अधिकारी पटवारी हाईकोर्ट और हाईकोर्ट के निर्देशों को कुछ नहीं समझते हें हालात यह हें के न्यायालय की अवमानना याचिका के बाद भी इन जनाब अधिकारियों ने परकोटे के पास के खाली जमीन पर निर्माण करवाने के लियें सरकार की तरफ से जमीन नीलाम कर दी हे ।
कोटा कलेक्टर और इनके अधीनस्थ उप जिला कलेक्टर ने कोटा के ऐतिहासिक बुर्ज और दरवाज़े सूरजपोल के पास की जमीन को नीलाम करने के लियें नजूल सम्पत्ति बताकर अख़बार में विज्ञापन दिया लोगों ने बोली लगाई और फिर भाजपा के कुछ लोगों ने इस सम्पत्ति को खरीद लिया , लेकिन प्रशासन और निगम को पता हे के यह भूमि किसी भी तरह से बेचीं नहीं जा सकती य्हना किसी भी प्रकार का निर्माण वर्जित हे एक तरफ तो पुरातत्व सम्पत्ति की रक्षा करने वाली संस्था इंटेक ऐसी सम्पत्तियों को बचाने के लियें संघर्ष कर रही हे और दूसरी तरफ जब राजस्थान हाई कोर्ट ने कोटा की ऐतिहासिक धरोहर परकोटे के आसपास की खूबसूरती को बचाने के लियें आदेश और निर्देश दिए हें के परकोटे के १०० गज की दुरी पर कोई निर्माण की अनुमति नहीं दी जायेगी तो फिर परकोटे से अडवान या फिर कहिये के परकोटे का ही हिस्सा सरकार कुछ लाख रूपये कमाने के लियें भाजपा के कुछ बोलीदाताओं से सांठ गाँठ कर केसे बेच सकती हे अब कोटा कलेक्टर ने डंके की चोट पर यह गलती तो कर दी हे लेकिन शिकायत के बाद लीपा पोती की की कार्यवाही चल रही हे ................... । अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान
कोटा कलेक्टर और इनके अधीनस्थ उप जिला कलेक्टर ने कोटा के ऐतिहासिक बुर्ज और दरवाज़े सूरजपोल के पास की जमीन को नीलाम करने के लियें नजूल सम्पत्ति बताकर अख़बार में विज्ञापन दिया लोगों ने बोली लगाई और फिर भाजपा के कुछ लोगों ने इस सम्पत्ति को खरीद लिया , लेकिन प्रशासन और निगम को पता हे के यह भूमि किसी भी तरह से बेचीं नहीं जा सकती य्हना किसी भी प्रकार का निर्माण वर्जित हे एक तरफ तो पुरातत्व सम्पत्ति की रक्षा करने वाली संस्था इंटेक ऐसी सम्पत्तियों को बचाने के लियें संघर्ष कर रही हे और दूसरी तरफ जब राजस्थान हाई कोर्ट ने कोटा की ऐतिहासिक धरोहर परकोटे के आसपास की खूबसूरती को बचाने के लियें आदेश और निर्देश दिए हें के परकोटे के १०० गज की दुरी पर कोई निर्माण की अनुमति नहीं दी जायेगी तो फिर परकोटे से अडवान या फिर कहिये के परकोटे का ही हिस्सा सरकार कुछ लाख रूपये कमाने के लियें भाजपा के कुछ बोलीदाताओं से सांठ गाँठ कर केसे बेच सकती हे अब कोटा कलेक्टर ने डंके की चोट पर यह गलती तो कर दी हे लेकिन शिकायत के बाद लीपा पोती की की कार्यवाही चल रही हे ................... । अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान
प्रणव दा का अलादीन का चिराग ...
केंद्र सरकार को पूरी तरह से भ्रस्टाचार और महंगाई में डुबो देने के बाद केन्द्रीय मंत्री प्रणव मुखर्जी अब बिहार की तर्ज़ पर बंगाल को डूबा देने की तय्यारी में हे और इस दोरान केंद्र की महंगाई के मामले में जब उनसे सवाल पूंछा गया तो वो नाराज़ हो गये और कहने लगे के मेरे पास कोई अलादीन का चिराग नहीं हे जो में महंगाई कम कर दूंगा । सही भी हे प्रणव जी और कोंग्रेस इतिहास में अब तक की सबसे अक्षम सरकार साबित हुई हे प्रणव जी का कहना हे के वोह बेबस हे अलादीन का चिराग उनके पास नहीं हे तो भाई राष्ट्र हित में वोह पद छोड़ दे और कुछ केवल कुच्छ दिनों के लियें हमारे ब्लोगर भाइयों में से किसी एक को यह पद दे दें फिर देख लें किस तरह से अलादीन का चिराग महगाई नियंत्रित करने के लियें आ जाता हे हाँ बस जिन लोगों से महंगाई बढाने और मुनाफा कमवाने के लियें इस सकरार ने रिश्वत ली हे बस वोह सब लोग जेल में होंगे और जो जो रिश्वत खोर होगा उसे भी जेल जाना होगा खुद बा खुद देश में मूल्य व्रद्धी रुक जायेगी जमाखोरी कम होगी तो मुनाफाखोरी रुकेगी वायदा व्यापार रुकेगा तो खाध्य पदार्थों के भाव गिरेंगे लेकिन यह प्रणव दा हे समझदार हें समझ गये हें के कोंग्रेस हाईकमान जो लोग भ्रष्ट और जनविरोधी फेसले करते हें उसे ही प्रधानमन्त्री बनाता हे बस इसलियें प्रणव दा भी खुद को प्रधानमन्त्री बनाये जाने का सपना देख रहे हें । वेसे भी देश में बी राज्यों के चुनाव आ रहे हें और इसीलियें बिहार में जेसे कोंग्रेस खत्म की हे वेसे ही बंगाल में भी कोंग्रेस के खात्मे की योजना बनाई जा रही हे ........... ।
इधर हमारे प्रधानमन्त्री जी भ्रस्टाचार के मुद्दे पर खामोश तमाशा देखते रहे और जब खुद के सर पर बन आई खुद के विभाग से निकली पत्रावलियों में भ्रस्ताचार खुल कर बोलने लगा तब कहीं बोले हे के अब तो शर्म करो भाई प्रधान मंत्री जी जब आप को शर्म नहीं हे तो आपके अधीनस्थ पागल हे जो शर्म करेंगे इसलियें देश की अगर चिंता हे तो खुद को अपनी नादानियों,नाकामयाबियों के लियें कानून के हवाले करो और जनता को आमंत्रित कर खुद जनता की अदालत से सजा पाने का एलान करो ताकि आखरी वक्त में थोड़े बहुत पाप धूल जायेंगे ....... । अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान
इधर हमारे प्रधानमन्त्री जी भ्रस्टाचार के मुद्दे पर खामोश तमाशा देखते रहे और जब खुद के सर पर बन आई खुद के विभाग से निकली पत्रावलियों में भ्रस्ताचार खुल कर बोलने लगा तब कहीं बोले हे के अब तो शर्म करो भाई प्रधान मंत्री जी जब आप को शर्म नहीं हे तो आपके अधीनस्थ पागल हे जो शर्म करेंगे इसलियें देश की अगर चिंता हे तो खुद को अपनी नादानियों,नाकामयाबियों के लियें कानून के हवाले करो और जनता को आमंत्रित कर खुद जनता की अदालत से सजा पाने का एलान करो ताकि आखरी वक्त में थोड़े बहुत पाप धूल जायेंगे ....... । अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान
03 February 2011
मजाक मजाक में दुल्हा दुल्हन रूठ गये रिश्ते टूट गये .....
शादी ब्याह के रस्मों रिवाज में मजाक का रिश्ता कोटा सम्भाग के झालावाड जिले के मनोहरथाना कस्बे में ग्राम तलवाडा में इतना महंगा पढ़ा के वहां बारात बिना दुल्हन के वापस गयी और एक मधुर रिश्ता बनने के पहले ही टूट गया ।
शादी ब्याह में रस्मों रिवाज के तहत एक दुसरे से हंसी मजाक की अलग अलग समाजों ,जातियों और स्थानों पर अनेक रस्में हे इसी रस्म के तहत तलावडा गाँव में जब एक बारात आई तो किसी ने शादी ब्याह का बंधन होने के बाद विदाइगी के पहले एक रस्म में दुल्हे से मजाक करते हुए उसके खुजली की फली याने कोंच की फली लगा दी बस फिर क्या था दुल्हा के खुजली चली और दुल्हा ने खुजली के मारे कत्थक शुरू कर दिया यह मजाक दुल्हा और दूल्हा के रिश्तेदारों को केसे पसंद आ सकता था लिहाजा शिकवे शिकायत से बात तू तडाक और फिर धक्का मुक्की मार पिटाई तक पहुंच गयी हालत जो खुशियों के थे वोह नफरत और गुस्से में बदल गये और दुल्हा ने दुल्हन को ले जाने से और दुल्हन ने दूल्हा के साथ जाने से इनकार कर दिया काफी समझायश हुई लेकिन सब बेकार अब बारात इस मजाक के खातिर बिना दुल्हन के वापस गयी हे और एक मधुर रिश्ता रस्मों के बंधन में बनने के बाद भी किनारे पर आकर टूट गया हे , इसलियें कहते हें के रिश्ते बहुत मजबूत भी होते हें तो रिश्ते बहुत नाज़ुक भी होते हें इन रिश्तो को बचाए रखें के लियें इनकी मर्यादा रखना बहुत जरूरी हे और शादी ब्याहों में मर्यादित आचरण ही ठीक रहता हे तब कहीं रिश्ते कडवाहट से बचाए जा सकते हें अन्यथा नतीजा सामने हे ... । अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान
शादी ब्याह में रस्मों रिवाज के तहत एक दुसरे से हंसी मजाक की अलग अलग समाजों ,जातियों और स्थानों पर अनेक रस्में हे इसी रस्म के तहत तलावडा गाँव में जब एक बारात आई तो किसी ने शादी ब्याह का बंधन होने के बाद विदाइगी के पहले एक रस्म में दुल्हे से मजाक करते हुए उसके खुजली की फली याने कोंच की फली लगा दी बस फिर क्या था दुल्हा के खुजली चली और दुल्हा ने खुजली के मारे कत्थक शुरू कर दिया यह मजाक दुल्हा और दूल्हा के रिश्तेदारों को केसे पसंद आ सकता था लिहाजा शिकवे शिकायत से बात तू तडाक और फिर धक्का मुक्की मार पिटाई तक पहुंच गयी हालत जो खुशियों के थे वोह नफरत और गुस्से में बदल गये और दुल्हा ने दुल्हन को ले जाने से और दुल्हन ने दूल्हा के साथ जाने से इनकार कर दिया काफी समझायश हुई लेकिन सब बेकार अब बारात इस मजाक के खातिर बिना दुल्हन के वापस गयी हे और एक मधुर रिश्ता रस्मों के बंधन में बनने के बाद भी किनारे पर आकर टूट गया हे , इसलियें कहते हें के रिश्ते बहुत मजबूत भी होते हें तो रिश्ते बहुत नाज़ुक भी होते हें इन रिश्तो को बचाए रखें के लियें इनकी मर्यादा रखना बहुत जरूरी हे और शादी ब्याहों में मर्यादित आचरण ही ठीक रहता हे तब कहीं रिश्ते कडवाहट से बचाए जा सकते हें अन्यथा नतीजा सामने हे ... । अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान
महंगाई मुद्रा स्फीति में भारत का विश्व रिकोर्ड ......
अल्प समय में देश भर में कई गुना अधिक महंगाई और वोह भी रोज़ मर्रा खाने पीने के काम आने वाली वस्तुओं के दामों में भरी व्रद्धी के मामले में हमारा देश विश्व भर में पहले स्थान पर आ गया हे और इस मामले में अतर्राष्ट्रीय स्तर पर एक मंच भारत के प्रधानमन्त्री मनमोहन सिंह को सम्मानित करने का न्योता भी दे चूका हे जबकि एक अन्य सन्गठन इस महंगाई को खामोशी से बर्दाश्त करने के लिए भारत की जनता को शांत गांय का खिताब दे चूका हे ।
दोस्तों सुनने में अजीब लगता हे लेकिन देश की महंगाई के आंकड़े कुछ दिनों मह ही जब १७ प्रतिशत यानी खाने पीने की व्स्तुप्न के मूल्य कई गुना ज्यादा बढाये जाते हें और जनता खामोश सहती हे सरकार बेबस होने का नारा देती हे तो भारत और भारत का गणित चाहे कुछ भी कहे लेकिन अंतर्राष्ट्रीय गणित तो इस साज़िश को समझ कर अपनी टिप्पणी करता ही हे विश्व में इससे भी कम मुद्रास्फीति की बढ़ोतरी सोवियत संघ में हुई थी वहां मिखाइल गोर्बाच्योव जी थे उसके बाद सोवियत संघ तबाह और बर्बाद हो गया महंगाई ने ही सोवियत संघ में ऐसी क्रान्ति पैदा की के आज सोवियत संघ इतिहास बन कर रह गया हे अब हमारा भारत देश जो बेचारा यह सब महंगाई ख़ामोशी से सह रहा हे तो फिर तो हमारा देश इन दिनों विश्व का सबसे महान देश और यहाँ की जनता महा महान ही कहलाएगी लेकिन इस महंगाई के जनक सूत्रधार अर्थ शास्त्री आदरणीय डोक्टर मनमोहन सिंह जी तो इस काम के लिए महा महा महा महान बन गये हें और विश्व के सबसे कमजोर सबसे तेज़ी से महंगाई बढाने वाले प्रधानमन्त्री की सूचि में सबसे पहले ऐतिहासिक प्रधानमन्त्री जी बन गये हें ........... । अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान
दोस्तों सुनने में अजीब लगता हे लेकिन देश की महंगाई के आंकड़े कुछ दिनों मह ही जब १७ प्रतिशत यानी खाने पीने की व्स्तुप्न के मूल्य कई गुना ज्यादा बढाये जाते हें और जनता खामोश सहती हे सरकार बेबस होने का नारा देती हे तो भारत और भारत का गणित चाहे कुछ भी कहे लेकिन अंतर्राष्ट्रीय गणित तो इस साज़िश को समझ कर अपनी टिप्पणी करता ही हे विश्व में इससे भी कम मुद्रास्फीति की बढ़ोतरी सोवियत संघ में हुई थी वहां मिखाइल गोर्बाच्योव जी थे उसके बाद सोवियत संघ तबाह और बर्बाद हो गया महंगाई ने ही सोवियत संघ में ऐसी क्रान्ति पैदा की के आज सोवियत संघ इतिहास बन कर रह गया हे अब हमारा भारत देश जो बेचारा यह सब महंगाई ख़ामोशी से सह रहा हे तो फिर तो हमारा देश इन दिनों विश्व का सबसे महान देश और यहाँ की जनता महा महान ही कहलाएगी लेकिन इस महंगाई के जनक सूत्रधार अर्थ शास्त्री आदरणीय डोक्टर मनमोहन सिंह जी तो इस काम के लिए महा महा महा महान बन गये हें और विश्व के सबसे कमजोर सबसे तेज़ी से महंगाई बढाने वाले प्रधानमन्त्री की सूचि में सबसे पहले ऐतिहासिक प्रधानमन्त्री जी बन गये हें ........... । अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान
कोटा महापोर को गुस्सा क्यूँ आता हे ........ .
कोटा में इन दिनों कोंग्रेस या भाजपा के पार्षदों और आम जनता में एक कहावत अल्बर्ट मिनटों को गुस्सा क्यूँ आता हे बदल दी गयी हे और कहावत बनाई गयी हे के ; कोटा की महापोर रत्ना जेन को गुस्सा क्यूँ आता हे ; इस कहावत पर कुछ लोगों का कहना हे के कहावत ग़लत हे क्योंकि महापोर जी को तो हमेशा ही गुस्सा रहता हे इसलियें उन्हें गुस्सा आने का सवाल ही नहीं रहता उनकी नाक पर गुस्सा और जुबां पर तल्खी ,व्यवहार में कडवाहट तो हेमेशा ही रहती हे ऐसे में कभी कभी गुस्सा आने वाली बात गलत हे ।
महापोर रत्ना जेन जी अभी कुछ दिनों से बाहर थी और उनके पीछे से उनके ही नजदीकी समाज से जुड़े लोगों ने बूचड़ खाने को लेकर एक आन्दोलन छेड़ दिया कहा गया के रत्ना जेन और मंत्री शांति कुमार धारीवाल समाज के विपरीत विचार धारा वाले हें इसलियें इन लोगों के सडकों पर लगता र पुतले जलाए जा रहे हें कल जब महापोर साहिबा आयीं तो उन्होंने निगम के अधिकारीयों और इस से सम्बन्धित समितियों से जुड़े लोगों को फटकर लगाई के में अगर बहर थी तो तुम तो यहाँ कोटा में थे कोटा में मंत्री जी का लगातार विरोध होता रहा और कोई इस स्थिति से निपटने आगे नहीं आया महापोर जी ने कई लोगों को खरी खोटी भी सुनाई और स्पष्टीकरण दिया के इस मामले को समिति में तय किया जाएगा , देश में बूचड़ खाने बनाने का काम किसी समिति का नहीं हे किसी धर्म जाती का नहीं हे यह देश के हर जिले की जरूरत और कानूनी मजबूरी हे क्योंकि इस मामले में संविधान भी हुक्म देता हे और पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट ने सभी सरकारों और निकायों को बूचड़ खाने बनाने के आवश्यक निर्देश जारी किये हें । अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान
महापोर रत्ना जेन जी अभी कुछ दिनों से बाहर थी और उनके पीछे से उनके ही नजदीकी समाज से जुड़े लोगों ने बूचड़ खाने को लेकर एक आन्दोलन छेड़ दिया कहा गया के रत्ना जेन और मंत्री शांति कुमार धारीवाल समाज के विपरीत विचार धारा वाले हें इसलियें इन लोगों के सडकों पर लगता र पुतले जलाए जा रहे हें कल जब महापोर साहिबा आयीं तो उन्होंने निगम के अधिकारीयों और इस से सम्बन्धित समितियों से जुड़े लोगों को फटकर लगाई के में अगर बहर थी तो तुम तो यहाँ कोटा में थे कोटा में मंत्री जी का लगातार विरोध होता रहा और कोई इस स्थिति से निपटने आगे नहीं आया महापोर जी ने कई लोगों को खरी खोटी भी सुनाई और स्पष्टीकरण दिया के इस मामले को समिति में तय किया जाएगा , देश में बूचड़ खाने बनाने का काम किसी समिति का नहीं हे किसी धर्म जाती का नहीं हे यह देश के हर जिले की जरूरत और कानूनी मजबूरी हे क्योंकि इस मामले में संविधान भी हुक्म देता हे और पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट ने सभी सरकारों और निकायों को बूचड़ खाने बनाने के आवश्यक निर्देश जारी किये हें । अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान
कोटा में हेलमेट सभी का मिशन बना ......
दोस्तों कोटा में इनदिनों हेलमेट पत्रकारों,पुलिसकर्मियों, हेलमेट विक्रेताओं और जनता के लियें एक मिशन बन गया हे यहाँ चारों तरफ माहोल हेल्मेटी बन गया हे ।
कोटा के लियें एक खुश खबरी हे के देश भर में मोटरवाहन कानून कार,बस,ट्रक,जीप,ट्रेक्टर,जुगाड़ ,ओवरलोड कानून सहित हेलमेट कानूनों में से केवल एक हेलमेट कानून लागु करने वाला पहला शहर बन गया हे देश के दुसरे सभी जिलों और राज्यों में मोटर वाहन कानून केवल हेलमेट के लियें ही नहीं बलके समानता के अधिकार के तहत सभी वाहनों के लियें अभियान बना हुआ हे लेकिन यहाँ मोटर वाहन कानून के सभी धाराओं को तो पुलिस और प्रशासन ने ताक में रख दिया हे और केवल एक मात्र धारा हेलमेट चालान पर अपना ध्यान केन्द्रिक्र्त कर दिया हे कोटा के दो बढ़े अख़बार वालों के कई संवाददाता सुबह सवेरे सम्पादक मीटिंग में सम्पादक की नहीं प्रबन्धक की डांट खाते हें जी हाँ कोटा के कुछ पत्रकार ऐसे हें जो सम्पादक के निर्देश से नहीं प्रबन्धक यानी विज्ञापन प्रबन्धक के निर्देशों से चलते हें और अगर वोह पत्रकारिता की अक्ल दिखाएँ तो बेचारों को घर का रास्ता दिखाया जाता हे इसलियें इन पत्रकारों को पत्रकार से अलग हट कर व्यापारिक तोर पर निर्देश मिलते हें और यह प्रेस फोटो ग्राफर और पत्रकार सुबह सवेरे से बिना कुछ खाए पिए ट्रेफिक चालान केन्द्रों पर आ धमकते हें और दिन भी तस्वीरें खेंचना और हेलमेट खरीद प्रमोट का काम करते हें फिर खबर तय्यार करते हें अगर इन बेचारे पत्रकारों के जमीर जाग जाने से कोई खबर इमादारी की होती हे तो वोह एडिट होती हे और जेसी व्यापारिक खबर प्रकाशित करना होती हे वेसी ही खबर प्रकाशित की जाती हे , कोटा में दुरी पुलिस हे जो अपने सारे काम छोड़ कर पत्रकारों के साथ मिल कर पत्रकार यानी लिखने वाले पत्रकार नहीं व्यापारिक समूह से जुड़े सो कोल्ड पत्रकारों के साथ शहर में ट्रेफिक पॉइंट बनाते हे अवरोधक ट्रकों में भरवाते हें दुसरे ट्रकों में हेलमेट भरवाते हें और फिर जहां यह ट्रेफिक अवरोधक लगा कर जांच की जाती हे वहां हेलमेट के ट्रक खली होते हें हेलमेट बेचे जाते हें हेलमेट जो कहने भर के हेलमेट हे टोपे हें कोई आई एस आई नहीं हे हेड गियर की परिभाषा में नहीं आते हें २५ रूपये का टोपा दिल्ली से लाकर १५० से ३०० रूपये तक बेचे जा रहे हें और बस कोटा के सडकों पर हेलमेट का खुला तमाशा हे ।
सब जानते हें के कोटा की कहावत हे के कोटा में कचोरी कभी खत्म नहीं हो सकती , २४ घंटे नल आना बंद नहीं हो सकते और यहाँ कभी अव्यवहारिक ट्रेफिक होने से हेलमेट लागू नहीं हो सकते और इस बात का इतिहास गवाह हे कोटा के दो बढ़े अखबार इस मामले में जब से कोटा से छपने लगे हें २० वर्षों से भी अधिक वक्त से अपना सब कुछ छोड़ कर इस अभियान में लगे हुए हें लेकिन हर बार उन्हें मुंह की खाना पढ़ी हे और खांए भी क्यूँ नहीं क्योंकि जो काम इमादारी और निष्पक्षता से होता हे वोह कामयाबी से होता हे लेकिन जिस काम में बेईमानी, व्यापार शामिल हो और निजी स्वार्थ हो निष्पक्षता नहीं हो अमीरों के लियें कानून नहीं और गरीबों के लियें कानून हो तो फिर कानून कानून नहीं मजाक बन कर रह जाता हे और ऐसी रिपोर्टिंग ऐसी पत्रकारिता शर्मनाक इतिहास बन कर रह जाता हे जिस मामले में सोचने में भी शर्म आती हे .... । अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान
कोटा के लियें एक खुश खबरी हे के देश भर में मोटरवाहन कानून कार,बस,ट्रक,जीप,ट्रेक्टर,जुगाड़ ,ओवरलोड कानून सहित हेलमेट कानूनों में से केवल एक हेलमेट कानून लागु करने वाला पहला शहर बन गया हे देश के दुसरे सभी जिलों और राज्यों में मोटर वाहन कानून केवल हेलमेट के लियें ही नहीं बलके समानता के अधिकार के तहत सभी वाहनों के लियें अभियान बना हुआ हे लेकिन यहाँ मोटर वाहन कानून के सभी धाराओं को तो पुलिस और प्रशासन ने ताक में रख दिया हे और केवल एक मात्र धारा हेलमेट चालान पर अपना ध्यान केन्द्रिक्र्त कर दिया हे कोटा के दो बढ़े अख़बार वालों के कई संवाददाता सुबह सवेरे सम्पादक मीटिंग में सम्पादक की नहीं प्रबन्धक की डांट खाते हें जी हाँ कोटा के कुछ पत्रकार ऐसे हें जो सम्पादक के निर्देश से नहीं प्रबन्धक यानी विज्ञापन प्रबन्धक के निर्देशों से चलते हें और अगर वोह पत्रकारिता की अक्ल दिखाएँ तो बेचारों को घर का रास्ता दिखाया जाता हे इसलियें इन पत्रकारों को पत्रकार से अलग हट कर व्यापारिक तोर पर निर्देश मिलते हें और यह प्रेस फोटो ग्राफर और पत्रकार सुबह सवेरे से बिना कुछ खाए पिए ट्रेफिक चालान केन्द्रों पर आ धमकते हें और दिन भी तस्वीरें खेंचना और हेलमेट खरीद प्रमोट का काम करते हें फिर खबर तय्यार करते हें अगर इन बेचारे पत्रकारों के जमीर जाग जाने से कोई खबर इमादारी की होती हे तो वोह एडिट होती हे और जेसी व्यापारिक खबर प्रकाशित करना होती हे वेसी ही खबर प्रकाशित की जाती हे , कोटा में दुरी पुलिस हे जो अपने सारे काम छोड़ कर पत्रकारों के साथ मिल कर पत्रकार यानी लिखने वाले पत्रकार नहीं व्यापारिक समूह से जुड़े सो कोल्ड पत्रकारों के साथ शहर में ट्रेफिक पॉइंट बनाते हे अवरोधक ट्रकों में भरवाते हें दुसरे ट्रकों में हेलमेट भरवाते हें और फिर जहां यह ट्रेफिक अवरोधक लगा कर जांच की जाती हे वहां हेलमेट के ट्रक खली होते हें हेलमेट बेचे जाते हें हेलमेट जो कहने भर के हेलमेट हे टोपे हें कोई आई एस आई नहीं हे हेड गियर की परिभाषा में नहीं आते हें २५ रूपये का टोपा दिल्ली से लाकर १५० से ३०० रूपये तक बेचे जा रहे हें और बस कोटा के सडकों पर हेलमेट का खुला तमाशा हे ।
सब जानते हें के कोटा की कहावत हे के कोटा में कचोरी कभी खत्म नहीं हो सकती , २४ घंटे नल आना बंद नहीं हो सकते और यहाँ कभी अव्यवहारिक ट्रेफिक होने से हेलमेट लागू नहीं हो सकते और इस बात का इतिहास गवाह हे कोटा के दो बढ़े अखबार इस मामले में जब से कोटा से छपने लगे हें २० वर्षों से भी अधिक वक्त से अपना सब कुछ छोड़ कर इस अभियान में लगे हुए हें लेकिन हर बार उन्हें मुंह की खाना पढ़ी हे और खांए भी क्यूँ नहीं क्योंकि जो काम इमादारी और निष्पक्षता से होता हे वोह कामयाबी से होता हे लेकिन जिस काम में बेईमानी, व्यापार शामिल हो और निजी स्वार्थ हो निष्पक्षता नहीं हो अमीरों के लियें कानून नहीं और गरीबों के लियें कानून हो तो फिर कानून कानून नहीं मजाक बन कर रह जाता हे और ऐसी रिपोर्टिंग ऐसी पत्रकारिता शर्मनाक इतिहास बन कर रह जाता हे जिस मामले में सोचने में भी शर्म आती हे .... । अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान
मोबाइल टॉवर सहत के लियें खतरनाक ....
देश में मोबाइल और उसके टॉवर से निकलने वाली किरणे लोगों के जीवन के लियें खतरनाक हें और इसी खतरे को देखते हुए जन हित में इस मामले में नया कानून बनाने की जरूरत पढ़ गयी हे जबकि देश में मोबाइल विकिरण से बचाने के लियें अब बचाव उपकरण भी बेचे जा रहे हें ।
मोबाइल टॉवर आज कल लोगों द्वारा थोड़े रुपयों के लालच में घर घर लगाये जा रहे हें जबकि हर एक शख्स के पास दो और दो से अधिक मोबाईल हें जिसका उपयोग सभी लोगों द्वारा किया जा रहा हे ऐसे में वैज्ञानिक शोध से लोगों की सहत को काफी नुकसान हो रहा हे एक अध्ययन के बाद देश के स्वास्थ मंत्रालय , पर्यावरण मंत्रालय और विधि मंत्रालय ने संयुक्त बैठक रखने का प्रस्ताव तो किया था लेकिन जन हित में आज तक एक भी बैठक आयोजित नहीं की गयी हे हालत यह हें के इन दिनों देश भर में मोबाइल के प्रभाव से लोगों में चिढ चिढापन ,भूख नहीं लगना , चक्कर आना , ब्लड प्रेशर सहित सेकड़ों असाध्य बीमारियाँ हो रही हें अब देखते हें जनता के स्वास्थ्य के लियें सरकार क्या नये नियम बनती हे और जो पुराने नियम हें उनकी पालना करवाती हे या नहीं वेसे देश को मोबाइल और उसके टॉवर से निकलने वाली विकिरणों के दुश प्रभाव के खतरों और उनसे बचने के तरीकों के मामले में साक्षरता की जरूरत आन पढ़ी हे लेकिन सरकार को क्या उसे तो घोटाले और कमी से मतलब हे । अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान
मोबाइल टॉवर आज कल लोगों द्वारा थोड़े रुपयों के लालच में घर घर लगाये जा रहे हें जबकि हर एक शख्स के पास दो और दो से अधिक मोबाईल हें जिसका उपयोग सभी लोगों द्वारा किया जा रहा हे ऐसे में वैज्ञानिक शोध से लोगों की सहत को काफी नुकसान हो रहा हे एक अध्ययन के बाद देश के स्वास्थ मंत्रालय , पर्यावरण मंत्रालय और विधि मंत्रालय ने संयुक्त बैठक रखने का प्रस्ताव तो किया था लेकिन जन हित में आज तक एक भी बैठक आयोजित नहीं की गयी हे हालत यह हें के इन दिनों देश भर में मोबाइल के प्रभाव से लोगों में चिढ चिढापन ,भूख नहीं लगना , चक्कर आना , ब्लड प्रेशर सहित सेकड़ों असाध्य बीमारियाँ हो रही हें अब देखते हें जनता के स्वास्थ्य के लियें सरकार क्या नये नियम बनती हे और जो पुराने नियम हें उनकी पालना करवाती हे या नहीं वेसे देश को मोबाइल और उसके टॉवर से निकलने वाली विकिरणों के दुश प्रभाव के खतरों और उनसे बचने के तरीकों के मामले में साक्षरता की जरूरत आन पढ़ी हे लेकिन सरकार को क्या उसे तो घोटाले और कमी से मतलब हे । अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान
तम्बाकू प्लास्टिक पेक से सुप्रीम कोर्ट नाराज़
देश में तम्बाकू पेक प्लास्टिक के पाउच आवश्यक निर्देश जारी करने के बाद भी केंद्र सरकार द्वारा बंद नहीं करवाए जाने से सुप्रीमकोर्ट सख्त नाराज़ हे और सुप्रीम कोर्ट ने अब इन पाउचों को बंद करने के लियें तुरंत सख्ती से अल्टीमेटम दे दिया हे ।
सब जानते हें के पर्यावरण की द्रष्टि से और लोगों के स्वास्थ्य की द्रष्टि से प्लास्टिक पोलीथिन के पाउच खतरनाक हे और इसीलियें एक सुनवाई में विशेषग्य और कानून विदों की राय जानने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने तम्बाकू उत्पादकों को तुरंत प्रभाव से प्लास्टिक के पाउच बंद करने के निर्देश देते हुए डेड लाइन जारी की थी लेकिन नेताओं की जेबें भरने वाले जहर बात रहे इन उद्द्योग्प्तियों ने सुप्रीम कोर्ट के आदेशों को ताक में रख कर मनमानी जारी रखी और निर्धारित समयावधि तय करने के बाद भी पाउच बंद नहीं किये नतीजन कल सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में उत्पादकों और सरकार से कड़ी नाराजगी ज़ाहिर की हे और कहा हे के अगर एक हफ्ते में यह बंद नहीं हुए तो फिर इसका परिणाम भुगतना होगा अब देखते हें के सरकार इस जहर में भरे तम्बाकू जगर को केसे रुक्वाती हे ।
अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान
सब जानते हें के पर्यावरण की द्रष्टि से और लोगों के स्वास्थ्य की द्रष्टि से प्लास्टिक पोलीथिन के पाउच खतरनाक हे और इसीलियें एक सुनवाई में विशेषग्य और कानून विदों की राय जानने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने तम्बाकू उत्पादकों को तुरंत प्रभाव से प्लास्टिक के पाउच बंद करने के निर्देश देते हुए डेड लाइन जारी की थी लेकिन नेताओं की जेबें भरने वाले जहर बात रहे इन उद्द्योग्प्तियों ने सुप्रीम कोर्ट के आदेशों को ताक में रख कर मनमानी जारी रखी और निर्धारित समयावधि तय करने के बाद भी पाउच बंद नहीं किये नतीजन कल सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में उत्पादकों और सरकार से कड़ी नाराजगी ज़ाहिर की हे और कहा हे के अगर एक हफ्ते में यह बंद नहीं हुए तो फिर इसका परिणाम भुगतना होगा अब देखते हें के सरकार इस जहर में भरे तम्बाकू जगर को केसे रुक्वाती हे ।
अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान
तम्बाकू प्लास्टिक पेकिंग पर सुप्रीम कोर्ट नाराज़
देश में प्लास्टिक से जनता दुखी हे यहाँ पर्यावरण कानून में अब प्लास्टिक का कानून
02 February 2011
संतों को भी प्रचार के लियें गिफ्टों की जरूरत
देश में संतों को अपने प्रचार प्रसार के लियें विज्ञापन एलान की तो जरूरत रही हे लेकिन अब नये फेशन के मुताबिक संतों ने प्रेस में अपनी खबरें प्रचारित करने के लियें पत्रकारों को गिफ्टें देना प्रारम्भ कर दिया ।
कल कोटा प्रेस क्लब में वरिष्ट पत्रकार राजस्थान पत्रिका के स्तम्भ रहे आदरणीय स्वर्गीय चन्द्र भान जी को श्रधान्जली देने के लियें प्रेस क्लब के लोग एकत्रित हुए थे वहां दो प्रेस कोंफ्रेस्न्से थीं एक तो दवा विक्रेताओं की और एक कबीर आश्रम के संत महाराज की दवा विक्रेताओं की प्रेस कोंफ्रेंस में तो गिफ्ट संस्क्रती कोई नई बात नहीं हे लेकिन संत महाराज ने जब अपने प्रवचन के प्रचार प्रसार के लियें अख़बार वालों को एक पम्पलेट पेन डायरी फोल्डर दिया तो कुछ अचम्भा सा लगा लेकिन इसके बाद गिफ्ट दिए जाने पर तो बस बात साफ़ हो गयी के प्रेस वार्ताओं के प्रचार प्रसार के लियें गिफ्ट संस्क्रती एक जरूरत बन गयी हे और प्रेस कोंफ्रेंस चाहे धर्म की हो चाहे साधू संत मोलवियों की प्रेस के लोग इनसे भी गिफ्ट लेने में गुरेज़ नहीं करते इसलियें साधू संतों के द्वारा गिफ्ट दिया जाना मजबूरी हो गयी हे हालात यह हे के लगभग तीन सो रूपये प्रति पत्रकार पर खर्च करने के बाद भी इन महाराज संत असंग स्वामी की खबर कोटा आंवली गाँव में ४ फरवरी से सत्संग शुरू जेसी लाइनों में सिमट गयी हे अब जरा सोचो अगर यह संत स्वामी बिना गिफ्ट की प्रेस कोंफ्रेस के अगर यह खबर छपवाते तो क्या यह खबर छपती और अगर छपती तो कितनी छपती इस पर तो प्रेस वालों को चिन्तन और मंथन की अब जरूरत होना ही चाहियें । अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान
कल कोटा प्रेस क्लब में वरिष्ट पत्रकार राजस्थान पत्रिका के स्तम्भ रहे आदरणीय स्वर्गीय चन्द्र भान जी को श्रधान्जली देने के लियें प्रेस क्लब के लोग एकत्रित हुए थे वहां दो प्रेस कोंफ्रेस्न्से थीं एक तो दवा विक्रेताओं की और एक कबीर आश्रम के संत महाराज की दवा विक्रेताओं की प्रेस कोंफ्रेंस में तो गिफ्ट संस्क्रती कोई नई बात नहीं हे लेकिन संत महाराज ने जब अपने प्रवचन के प्रचार प्रसार के लियें अख़बार वालों को एक पम्पलेट पेन डायरी फोल्डर दिया तो कुछ अचम्भा सा लगा लेकिन इसके बाद गिफ्ट दिए जाने पर तो बस बात साफ़ हो गयी के प्रेस वार्ताओं के प्रचार प्रसार के लियें गिफ्ट संस्क्रती एक जरूरत बन गयी हे और प्रेस कोंफ्रेंस चाहे धर्म की हो चाहे साधू संत मोलवियों की प्रेस के लोग इनसे भी गिफ्ट लेने में गुरेज़ नहीं करते इसलियें साधू संतों के द्वारा गिफ्ट दिया जाना मजबूरी हो गयी हे हालात यह हे के लगभग तीन सो रूपये प्रति पत्रकार पर खर्च करने के बाद भी इन महाराज संत असंग स्वामी की खबर कोटा आंवली गाँव में ४ फरवरी से सत्संग शुरू जेसी लाइनों में सिमट गयी हे अब जरा सोचो अगर यह संत स्वामी बिना गिफ्ट की प्रेस कोंफ्रेस के अगर यह खबर छपवाते तो क्या यह खबर छपती और अगर छपती तो कितनी छपती इस पर तो प्रेस वालों को चिन्तन और मंथन की अब जरूरत होना ही चाहियें । अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान
शिकार में मारी गयी बाघिन फिर से जीवित हुई
राजस्थान में आज से दो साल पहले आठ शिकारियों द्वारा एक शेरनी को मारने की खबर से सनसनी फेल गयी पुलिस और वन अधिकारीयों ने इन शिकारियों को पकड़ा जेल भेजा चालान बनाया शेरनी का पोस्ट मार्टम की रिपोर्ट तय्यार की और शिकारियों को जेल भेजा जिनकी जमानत हाईकोर्ट ने भी ख़ारिज कर दी यह शिकारी अभी जेल में हें ।
लेकिन राजस्थान के वन और पुलिस के अधिकारीयों की लापरवाही का नतीजा जब आमने आया तब वन अधिकारी जी का तबादला हुआ और नये वन अधिकारी जी ने जंगल की ख़ाक छानी तो उन्होंने देखा के जिस शेरनी को रिकोर्ड में दो साल पहले मरा हुआ घोषित किया गया हे वोह शेरनी तो जीवित जंगल में विचरण कर रही हे रेडियो कोलर और दुसरे दर्ज पहचान चिन्हों से कन्फर्म किया गया तो यह वही शेरनी निकली जिसे रिकोर्ड में शिकारियों द्वारा मरना बताया गया हे और जिसकी हत्या के जुर्म में आठ लोग जेल में हे अब राजस्थान के वन और पुलिस अधिकारीयों की जब यह पोल खुली तो वोह अगल बगल झांक रहे हें और उनसे जवाब नहीं बन पढ़ रहा हे जो शिकारी बिना वजह जीवित शेरनी की हत्या के जुर्म में दो साल से सजा भुगत रहे हें अब उनकी जेल की सियाह काली रातों का क्या होगा इसका अज्वाब देने वाला भी कोई नहीं हे तो जनाब ऐसे हें हमारे राजस्थान के वन और पुलिस कर्मी ...................... । अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान
लेकिन राजस्थान के वन और पुलिस के अधिकारीयों की लापरवाही का नतीजा जब आमने आया तब वन अधिकारी जी का तबादला हुआ और नये वन अधिकारी जी ने जंगल की ख़ाक छानी तो उन्होंने देखा के जिस शेरनी को रिकोर्ड में दो साल पहले मरा हुआ घोषित किया गया हे वोह शेरनी तो जीवित जंगल में विचरण कर रही हे रेडियो कोलर और दुसरे दर्ज पहचान चिन्हों से कन्फर्म किया गया तो यह वही शेरनी निकली जिसे रिकोर्ड में शिकारियों द्वारा मरना बताया गया हे और जिसकी हत्या के जुर्म में आठ लोग जेल में हे अब राजस्थान के वन और पुलिस अधिकारीयों की जब यह पोल खुली तो वोह अगल बगल झांक रहे हें और उनसे जवाब नहीं बन पढ़ रहा हे जो शिकारी बिना वजह जीवित शेरनी की हत्या के जुर्म में दो साल से सजा भुगत रहे हें अब उनकी जेल की सियाह काली रातों का क्या होगा इसका अज्वाब देने वाला भी कोई नहीं हे तो जनाब ऐसे हें हमारे राजस्थान के वन और पुलिस कर्मी ...................... । अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान
९२ साल की एक विधवा और पेंशन के ६१ साल
देश की सरकारें केसी ही य्हना दलित,गरीबों,विधवाओं और तलाक शुदा के साथ केसा सुलूक होता हे यह तो सब जानते हें लेकिन डियूटी पर मरने वाले एक थानेदार जी की विधवा को पारिवारिक पेंशन के लियें ६१ साल टक इन्तिज़ार करना पढ़ा जिसे कल हाईकोर्ट ने न्याय दिलवाया हे , इस बीच राजस्थान में पुलिस नोकरी से निकले भेरो सिंह जी शेखावत भी मुख्यंत्री रह चुके थे ।
राजस्थान में वर्ष १९४९ में एक थानेदार जी की के दोरान म्रत्यु हो गयी थी उनकी विधवा श्रीमती लाल कंवर पारिवारिक पेंशन की हकदार थीं लेकिन उन्हें सरकार ने पेंशन नहीं दी यह विधवा अपने पति की पुलिस नोकरी का पट्टा लिए डर डर की ठोकरें खाती रही लेकिन इसे न्याय नहीं मिला आखिर इस विधवा ने राजस्थान के सभी मुख्यमंत्रियों राजनेतिक पार्टियों ने जब मुंह मोड़ लिया तो हाई कोर्ट का सहारा लिया और जयपुर हाईकोर्ट में इस मामले में मुकदमा दायर कर दिया दोस्तों इस विधवा का सफर यहीं खत्म नहीं हुआ यहाँ भी सरकार की लापरवाही से उसे तारीख पर तारीख मिलती रही लेकिन विधवा ने हिम्मत नहीं हारी और कानूनी लढाई जारी रखी कल यह पत्रावली राजस्थान हाईकोर्ट जयपुर खंड पीठ के जस्टिस रफीक साहब के हाथ में जब आई तो उन्हें ताज्जुब हुआ और उन्होंने इस विधवा को न्याय देते हुए इसकी पेंशन तुरंत देने के आदेश दिए , दोस्तों यह विधवा ६१ साल तक अपनी कानूनी पेंशन के लियें संघर्ष करती रही और इस विधवा ने अपनी जवानी के कई साल इसी लड़ाई में गंवा दिए आज यह विधवा ९२ साल की हे लेकिन ६१ साल के इस खतरनाक सफर का सुखद अंत देख कर इस विधवा लाल कंवर के चेहरे की झुर्रियों की मुस्कान देखने लायक थी , यह न्याय और सरकारी हठधर्मिता का एक किस्सा हे कई फाइलें तो सरकार और अदालत की ऐसी हें के न्याय के इन्तिज़ार में प्रार्थी की म्रत्यु हो जाने से बंद हो गयी हे लाल कंवर की इस फ़ाइल का जिस तरह से और जिस धीमी गति से निस्तारण हुआ हे उससे देश को देश की न्यायिक व्यवस्था को देश की प्रसासनिक व्यवस्था को सोचने को मजबूर होना पढ़ा हे ना जाने कितनी विधवाएं आज भी ऐसे ही अदालतों में चक्कर काट कर अपना जीवन गुज़र रही हें ............... । अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान
राजस्थान में वर्ष १९४९ में एक थानेदार जी की के दोरान म्रत्यु हो गयी थी उनकी विधवा श्रीमती लाल कंवर पारिवारिक पेंशन की हकदार थीं लेकिन उन्हें सरकार ने पेंशन नहीं दी यह विधवा अपने पति की पुलिस नोकरी का पट्टा लिए डर डर की ठोकरें खाती रही लेकिन इसे न्याय नहीं मिला आखिर इस विधवा ने राजस्थान के सभी मुख्यमंत्रियों राजनेतिक पार्टियों ने जब मुंह मोड़ लिया तो हाई कोर्ट का सहारा लिया और जयपुर हाईकोर्ट में इस मामले में मुकदमा दायर कर दिया दोस्तों इस विधवा का सफर यहीं खत्म नहीं हुआ यहाँ भी सरकार की लापरवाही से उसे तारीख पर तारीख मिलती रही लेकिन विधवा ने हिम्मत नहीं हारी और कानूनी लढाई जारी रखी कल यह पत्रावली राजस्थान हाईकोर्ट जयपुर खंड पीठ के जस्टिस रफीक साहब के हाथ में जब आई तो उन्हें ताज्जुब हुआ और उन्होंने इस विधवा को न्याय देते हुए इसकी पेंशन तुरंत देने के आदेश दिए , दोस्तों यह विधवा ६१ साल तक अपनी कानूनी पेंशन के लियें संघर्ष करती रही और इस विधवा ने अपनी जवानी के कई साल इसी लड़ाई में गंवा दिए आज यह विधवा ९२ साल की हे लेकिन ६१ साल के इस खतरनाक सफर का सुखद अंत देख कर इस विधवा लाल कंवर के चेहरे की झुर्रियों की मुस्कान देखने लायक थी , यह न्याय और सरकारी हठधर्मिता का एक किस्सा हे कई फाइलें तो सरकार और अदालत की ऐसी हें के न्याय के इन्तिज़ार में प्रार्थी की म्रत्यु हो जाने से बंद हो गयी हे लाल कंवर की इस फ़ाइल का जिस तरह से और जिस धीमी गति से निस्तारण हुआ हे उससे देश को देश की न्यायिक व्यवस्था को देश की प्रसासनिक व्यवस्था को सोचने को मजबूर होना पढ़ा हे ना जाने कितनी विधवाएं आज भी ऐसे ही अदालतों में चक्कर काट कर अपना जीवन गुज़र रही हें ............... । अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान
मिस्र में जनता माई बाप .......
दोस्तों मेरा हिन्दुस्तान मेरा भारत महान विश्व का सबसे बढा लोकतंत्र कहलाता हे यहाँ नेता को जनता एक बार चुनती हे जो लोग नेता को चुनते हें उनकी मर्जी के बगेर वही नेता जनता के खिलाफ विचारधारा वाली पार्टी की गोद में जाकर बेठता हे और सरकार में शामिल हो जाता हे देश का यह भ्रम लोकतंत्र हे और इसी ने सियासत में सोदेबाज़ी को बढ़ावा दिया हे , चुनाव आयोग हे के चुनाव निष्पक्ष कराने के लियें एक बहुत बढा बजट और देश के कर्मचारियों को काम में लेता हे लेकिन चुनाव के वक्त कार्यवाही टांय टांय फीस रहती हे वजह चुनाव आयोग के क्म्च्री जनता टक पर्चियां नहीं पहुंचाते हें कर्मचारी सही काम करते हें खर्चे गलत बताये जाते हें मतदाता सूचि में मनमाने नाम होते हे और चुनाव हर बार प्रभावित होता हे हमारा लोकतंत्र भीड़ तन्त्र बन जाता हे अनचाहे लोग कुछ वोटों से जीत कर आजाते हें ।
दोस्तों एक तरफ हमारा देश और दूसरी तरफ मिस्र हे हम हमारे देश में कई वर्षों से नेता को जनता के हित में काम नहीं करने पर वापस से बर्खास्त करने के कानून पर विचार कर रहे हें लेकिन आज तक विचार से ज्यादा कुछ नहीं कर सके हें एक तरफ मिस्र हे जहां जनता को लगा के मुबारक हुसेन अब पद के लायक नहीं रहे हे तो बस जनता एक जुट हुई सडकों पर उतरी और खुद ने प्रदर्शन कर मुबारक हुसेन को मजबूर कर दिया के वोह पस से इस्तीफा देने की बात स्वीकारें कई नेताओं , अधिकारीयों को बर्खास्त किया गया और आज वहां जनता का शासन स्थापित हे सरकार के सेना के टेंक हथियार और फोजें इस लोकतंत्र के आगे बेबस हें जनता और जनता का शासन सर्वोपरी हे तो दोस्तों जहां जनता में हिम्मत होती हे लोकतंत्र वहां होता हे केवल किताबों में लिख देने से लोकतंत्र स्थापित नहीं होता जेसे केवल राष्ट्र भक्ति की बात करने वाला राष्ट्र भक्त नहीं हो सकता जब तक वोह खुद ऐसा कर्म करके नहीं दिखाए इसी तरह लोकतंत्र के लियें जनता को साहसिक बनना पढ़ेगा और हमारे देश की मुर्दा सोई हुई जनता को मिस्र की जनता से सबक लेना होगा जब मिस्र में हमारे देश का दो प्रतिशत भी भ्रस्ताचार नहीं हे और वहां की महंगाई आर्थिक निति अराजकता हमारे देश से आधी से भी कम हे तब वहां की जनता सडकों पर शीर्ष पद के लोगों को सबक सिखाने उतर आई हे तो फिर आज़ादी की लड़ाई लढने वाले मेरे इस देश के लोगों को क्या हो गया हे क्यों यह देश के गद्दारों और भ्रष्ट राजनेताओं के पिछ लग्गू बन गये हें क्या इनके लिये देश से बढा जाती,समाज,पार्टी हे जो यह चापलूस चमचे बन कर देश को बर्बाद होते तमाशा देख रहे हें । अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान
दोस्तों एक तरफ हमारा देश और दूसरी तरफ मिस्र हे हम हमारे देश में कई वर्षों से नेता को जनता के हित में काम नहीं करने पर वापस से बर्खास्त करने के कानून पर विचार कर रहे हें लेकिन आज तक विचार से ज्यादा कुछ नहीं कर सके हें एक तरफ मिस्र हे जहां जनता को लगा के मुबारक हुसेन अब पद के लायक नहीं रहे हे तो बस जनता एक जुट हुई सडकों पर उतरी और खुद ने प्रदर्शन कर मुबारक हुसेन को मजबूर कर दिया के वोह पस से इस्तीफा देने की बात स्वीकारें कई नेताओं , अधिकारीयों को बर्खास्त किया गया और आज वहां जनता का शासन स्थापित हे सरकार के सेना के टेंक हथियार और फोजें इस लोकतंत्र के आगे बेबस हें जनता और जनता का शासन सर्वोपरी हे तो दोस्तों जहां जनता में हिम्मत होती हे लोकतंत्र वहां होता हे केवल किताबों में लिख देने से लोकतंत्र स्थापित नहीं होता जेसे केवल राष्ट्र भक्ति की बात करने वाला राष्ट्र भक्त नहीं हो सकता जब तक वोह खुद ऐसा कर्म करके नहीं दिखाए इसी तरह लोकतंत्र के लियें जनता को साहसिक बनना पढ़ेगा और हमारे देश की मुर्दा सोई हुई जनता को मिस्र की जनता से सबक लेना होगा जब मिस्र में हमारे देश का दो प्रतिशत भी भ्रस्ताचार नहीं हे और वहां की महंगाई आर्थिक निति अराजकता हमारे देश से आधी से भी कम हे तब वहां की जनता सडकों पर शीर्ष पद के लोगों को सबक सिखाने उतर आई हे तो फिर आज़ादी की लड़ाई लढने वाले मेरे इस देश के लोगों को क्या हो गया हे क्यों यह देश के गद्दारों और भ्रष्ट राजनेताओं के पिछ लग्गू बन गये हें क्या इनके लिये देश से बढा जाती,समाज,पार्टी हे जो यह चापलूस चमचे बन कर देश को बर्बाद होते तमाशा देख रहे हें । अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान
देश की जनगणना ९ फरवरी से ....
देश की जनसंख्या की गणना अब ९ फरवरी से २८ फरवरी तक होगी इस दिन जो फ़ोरम जनगणना विभाग द्वारा बनाया गया हे उसकी समस्त जानकारी जनता के भविष्य में काम आएगी ।
देश में जाती के आधार पर जनगणना पर लोगों ने एतराज़ जताया लेकिन रोज़ देश के आंकड़े बताते हें के फलां जाती के इतने लोग हे फलन जाती के इतने बढ़ गये हें और भविष्य में इतनी संख्या हो जाएगी तो फिर यह आंकड़े खाना से आते हे , एक तरफ तो जातीय आधार पर जनगणना का विरोध और दूसरी तरफ जातीय आधार की राजनीती ऐसे में दो पहलु एक साथ नहीं चल सकते , अब देश में एक योजना बनाकर जनगणना की शुरुआत हो रही हे देश के सभी लोग इस मामले में सहयोग करें जो भी कोलम में जानकारीचाही गयी हे सब ठीक तरह से भरवाए और इसी आधार पर देश की आर्थिक योजनाएं तय्यार होना चाहियें इन आंकड़ों को सियासी लोग चोरी करके देश में अराजकता फेलाने और चुनावी गणित बिठाने में ज़्यादा लगाते हें जाती समाज संख्या बल के आधार पर अपने अपने हक की मांग करता हे । दोस्तों अभी देश में आरक्षण की आग से देश जल रहा हे आत्माएं झुलस रही हें लेकिन देश समझ नहीं पा रहा हे अगर जनता अब अंगडाई ले और देश से आरक्षण का बवाल खत्म करवा दे तो देश में काफी समस्याओं का समाधान हो जाएगा देश की जनता के साथ समान व्यवहार जरूरी हे और इसीलियें देश में अब संविधान में जो आरक्षण केवल दस वर्ष के लियें दिया गया था उसे किसी भी तरह से ६६ साल बाद बढाना नहीं चाहिए तभी हमारा देश वापस से एकता के सूत्र में बंध कर तरक्की कर सकेगा वरना जो खायी सियासत ने तय्यार की हे वोह हरी कब्रें बनते देर नहीं करेंगी । अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान
देश में जाती के आधार पर जनगणना पर लोगों ने एतराज़ जताया लेकिन रोज़ देश के आंकड़े बताते हें के फलां जाती के इतने लोग हे फलन जाती के इतने बढ़ गये हें और भविष्य में इतनी संख्या हो जाएगी तो फिर यह आंकड़े खाना से आते हे , एक तरफ तो जातीय आधार पर जनगणना का विरोध और दूसरी तरफ जातीय आधार की राजनीती ऐसे में दो पहलु एक साथ नहीं चल सकते , अब देश में एक योजना बनाकर जनगणना की शुरुआत हो रही हे देश के सभी लोग इस मामले में सहयोग करें जो भी कोलम में जानकारीचाही गयी हे सब ठीक तरह से भरवाए और इसी आधार पर देश की आर्थिक योजनाएं तय्यार होना चाहियें इन आंकड़ों को सियासी लोग चोरी करके देश में अराजकता फेलाने और चुनावी गणित बिठाने में ज़्यादा लगाते हें जाती समाज संख्या बल के आधार पर अपने अपने हक की मांग करता हे । दोस्तों अभी देश में आरक्षण की आग से देश जल रहा हे आत्माएं झुलस रही हें लेकिन देश समझ नहीं पा रहा हे अगर जनता अब अंगडाई ले और देश से आरक्षण का बवाल खत्म करवा दे तो देश में काफी समस्याओं का समाधान हो जाएगा देश की जनता के साथ समान व्यवहार जरूरी हे और इसीलियें देश में अब संविधान में जो आरक्षण केवल दस वर्ष के लियें दिया गया था उसे किसी भी तरह से ६६ साल बाद बढाना नहीं चाहिए तभी हमारा देश वापस से एकता के सूत्र में बंध कर तरक्की कर सकेगा वरना जो खायी सियासत ने तय्यार की हे वोह हरी कब्रें बनते देर नहीं करेंगी । अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान
एक बिलखती होस्टल वाली बच्ची ...
दोस्तों मेरे भाई साहित्यकार कवि ने मुझे बढ़े प्रेम से एक होस्टल की दुनिया मेर रहने वाली बच्ची के तडपन और बिलखना एक कविता के माध्यम से भेजी हे उनसे इजाजत मिलने पर में उसे आप टक पहुंचा रहा हूँ ..............जो उन्हीं के शब्दों में हे .. मित्र ,आपके पास एक छोटी बच्ची जो हॉस्टल मे भेज दी गई है उसका दर्द भेज रहा हूँ आपकी प्रतिक्रिया चाहता हूँ|
मेरा दिल है बड़ा उदास|
आओ पापा मेरे पास
मेरा दिल है बड़ा उदास
मम्मी की भी याद सताती
भैया को मैं भूल न पाती|
तुमसे मैं कुछ न मांगूगी
पढने मे प्रथम आउंगी
रखो मुझको अपने पास
मेरा दिल है बड़ा उदास|
नहीं सहेली संग खेलूंगी
गुडिया को भी बंद कर दूंगी
बैठूंगी भैया के पास
मेरा दिल है बड़ा उदास|
जाओगे जब कल्ब मे आप
मम्मी को ले कर के साथ
रह लुंगी दादी के पास
मेरा दिल है बड़ा उदास|
नहीं चाहिए चोकलेट टाफी
नहीं चाहिए मुझको फ्राक
मम्मी पापा मुझे चाहिए
मेरा दिल है बड़ा उदास|
राजा रानी के किस्से
भगवान की प्यारी बात
दादी हमको रोज सुनाती
आती मुझको उनकी याद|
बुआ से छोटी करवाना
चाचा के संग बाज़ार जाना
जिद नहीं मैं कभी करुँगी
पापा मुझको घर ले जाना|
कहना मानूँ दूध पिऊँगी|
घर की छत पर नहीं चढूँगी
घर ले जाओ मुझको पापा
हॉस्टल मे मैं नहीं पढूंगी|
अ.कीर्तिवर्धन
09911323732
मेरा दिल है बड़ा उदास|
आओ पापा मेरे पास
मेरा दिल है बड़ा उदास
मम्मी की भी याद सताती
भैया को मैं भूल न पाती|
तुमसे मैं कुछ न मांगूगी
पढने मे प्रथम आउंगी
रखो मुझको अपने पास
मेरा दिल है बड़ा उदास|
नहीं सहेली संग खेलूंगी
गुडिया को भी बंद कर दूंगी
बैठूंगी भैया के पास
मेरा दिल है बड़ा उदास|
जाओगे जब कल्ब मे आप
मम्मी को ले कर के साथ
रह लुंगी दादी के पास
मेरा दिल है बड़ा उदास|
नहीं चाहिए चोकलेट टाफी
नहीं चाहिए मुझको फ्राक
मम्मी पापा मुझे चाहिए
मेरा दिल है बड़ा उदास|
राजा रानी के किस्से
भगवान की प्यारी बात
दादी हमको रोज सुनाती
आती मुझको उनकी याद|
बुआ से छोटी करवाना
चाचा के संग बाज़ार जाना
जिद नहीं मैं कभी करुँगी
पापा मुझको घर ले जाना|
कहना मानूँ दूध पिऊँगी|
घर की छत पर नहीं चढूँगी
घर ले जाओ मुझको पापा
हॉस्टल मे मैं नहीं पढूंगी|
अ.कीर्तिवर्धन
09911323732
क्या मिला ...
क्या मिला
ऐ
मजनू
तुझे
लेला के
प्यार में ,
क्या मिला
ऐ
फरहाद
तुझे
शीरीं के
प्यार में
में बताऊं
मुझे
सब कुछ मिला
मेरे
इस
ज़ालिम दिल बर
से
हुई तकरार में
आज
देख लो
तुम्हारा तो
सिर्फ
नाम हे
तुम्हारा तो सिर्फ
इतिहास हे
लेकिन
सुखी तो
सिर्फ
में ही हूँ
उसके साथ
आज
इस संसार में ।
अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान
तेरे इश्क ने ........

तेरे
इश्क ने
मुझे ख़ास से
आम कर दिया ,
तू ना मिली मुझे
कोई बात नहीं
लेकिन
तुझे
चाहते रहने के
मेरे
अंदाज़ ने
मुझे दुनिया में
नई पहचान देकर
दुनिया में
मेरा नाम कर दिया ।
अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान
एवोकेट मिश्र को गीत चांदनी निराला सम्मान
वरिष्ठ साहित्यकार रघुनाथ मिश्र को 'गीत चाँदनी निराला सम्मान
कोटा। शहर
के जाने माने वरिष्ठ साहित्यकार और जनकवि श्री रघुनाथ मिश्र का हैदराबाद की प्रख्यात साहित्यिक संस्था ‘गीत चाँदनी’ द्वारा वर्ष 2011 के लिए निराला सम्मान के लिए चयन किया है। यह सम्मान नगरद्वय सिकन्दराबाद-हैदराबाद के कवियों की संस्था ‘गीत चाँदनी’ द्वारा प्रतिवर्ष वसंत पंचमी पर उन साहित्यकारों को दिया जाता है जिन्होंने 60 वसंत देखे हों। इस वर्ष से इस संस्थान ने नगरद्वय के स्थान पर सम्पूर्ण भारतवर्ष से चुनिंदा कवियों को चुना है।
इस संदर्भ में श्री रघुनाथ मिश्र का चयन होने पर कोटा के जनवादी लेखक संघ परिवार में हर्ष की लहर दौड़ गयी। शहर के वरिष्ठ साहित्यकारों ने श्री मिश्र को बधाइयाँ दी। पूरे भारतवर्ष से श्री मिश्र को बधाइयों का ताँता लगा हुआ है। कोटा शहर जलेस इकाई अध्यक्ष ‘आकुल’ ने बताया कि श्री मिश्र 4 फरवरी को हैदराबाद के लिए रवाना हो रहे हैं। यह सम्मान उन्हें हैदराबाद में एक भव्य समारोह में 8फरवरी को दिया जायेगा। संस्था ‘गीत चाँदनी’द्वारा आमंत्रण पत्र श्री मिश्र को मिल चुका है और उन्होंने इसकी स्वीकृति भी भिजवा दी है।
हैदराबाद से प्रकाशित प्रख्यात साहित्यिक मासिक पत्रिका ‘गोलकोण्डा दर्पण’के सम्पादक श्री गोविन्द अक्षय ने श्री मिश्र को बताया कि समारोह में देश के अनेकों साहित्यकारों को सम्मानित किया जा रहा है। इससे हैदराबाद में एक ही मंच पर साहित्यकार समागम का विहंगम दृश्य देखने को मिलेगा। हैदराबाद इस समरोह का बेसब्री से इंतज़ार कर रहा है और संस्था गीत चाँदनी भी इसे भव्यता और उच्च स्तर पर आयोजन कर रही है। इस आयोजन पर शहर के सम्माननीय नागरिक, अधिकारी, प्रतिष्ठिति व्यक्तियों, उद्यमी-व्यवसायियों और कवियों-साहित्यकारों में बेहद उत्साह है।
साहित्यकारों को प्रशस्ति पत्र, स्मृति चिह्न, शाल व पुष्प दे कर सम्मानित किया जायेगा। साहित्यकारों व कवियों का लाभ लेने हेतु एक अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का भी आयोजन किया गया है। यह कवि सम्मेलन हैदराबाद के राजस्थानी स्नातक भवन आबिड्स, हैदराबाद में आयोजित किया जायेगा। श्री मिश्र गीत चाँदनी निराला सम्मान पाने वाले कोटा के पहले वरिष्ठ साहित्यकार हैं। श्री मिश्र हैदराबाद की अपनी यात्रा से 11 फरवरी को कोटा लौटेंगे और अपनी या्त्रा के अपने अविस्मरणीय क्षणों का जलेस बैठक में वर्णन करेंगे। सान्निध्य ब्लॉग पर उनका यात्रा वृत्तांत सचित्र प्रकाशित किया जायेगा।
के जाने माने वरिष्ठ साहित्यकार और जनकवि श्री रघुनाथ मिश्र का हैदराबाद की प्रख्यात साहित्यिक संस्था ‘गीत चाँदनी’ द्वारा वर्ष 2011 के लिए निराला सम्मान के लिए चयन किया है। यह सम्मान नगरद्वय सिकन्दराबाद-हैदराबाद के कवियों की संस्था ‘गीत चाँदनी’ द्वारा प्रतिवर्ष वसंत पंचमी पर उन साहित्यकारों को दिया जाता है जिन्होंने 60 वसंत देखे हों। इस वर्ष से इस संस्थान ने नगरद्वय के स्थान पर सम्पूर्ण भारतवर्ष से चुनिंदा कवियों को चुना है।इस संदर्भ में श्री रघुनाथ मिश्र का चयन होने पर कोटा के जनवादी लेखक संघ परिवार में हर्ष की लहर दौड़ गयी। शहर के वरिष्ठ साहित्यकारों ने श्री मिश्र को बधाइयाँ दी। पूरे भारतवर्ष से श्री मिश्र को बधाइयों का ताँता लगा हुआ है। कोटा शहर जलेस इकाई अध्यक्ष ‘आकुल’ ने बताया कि श्री मिश्र 4 फरवरी को हैदराबाद के लिए रवाना हो रहे हैं। यह सम्मान उन्हें हैदराबाद में एक भव्य समारोह में 8फरवरी को दिया जायेगा। संस्था ‘गीत चाँदनी’द्वारा आमंत्रण पत्र श्री मिश्र को मिल चुका है और उन्होंने इसकी स्वीकृति भी भिजवा दी है।
हैदराबाद से प्रकाशित प्रख्यात साहित्यिक मासिक पत्रिका ‘गोलकोण्डा दर्पण’के सम्पादक श्री गोविन्द अक्षय ने श्री मिश्र को बताया कि समारोह में देश के अनेकों साहित्यकारों को सम्मानित किया जा रहा है। इससे हैदराबाद में एक ही मंच पर साहित्यकार समागम का विहंगम दृश्य देखने को मिलेगा। हैदराबाद इस समरोह का बेसब्री से इंतज़ार कर रहा है और संस्था गीत चाँदनी भी इसे भव्यता और उच्च स्तर पर आयोजन कर रही है। इस आयोजन पर शहर के सम्माननीय नागरिक, अधिकारी, प्रतिष्ठिति व्यक्तियों, उद्यमी-व्यवसायियों और कवियों-साहित्यकारों में बेहद उत्साह है।
साहित्यकारों को प्रशस्ति पत्र, स्मृति चिह्न, शाल व पुष्प दे कर सम्मानित किया जायेगा। साहित्यकारों व कवियों का लाभ लेने हेतु एक अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का भी आयोजन किया गया है। यह कवि सम्मेलन हैदराबाद के राजस्थानी स्नातक भवन आबिड्स, हैदराबाद में आयोजित किया जायेगा। श्री मिश्र गीत चाँदनी निराला सम्मान पाने वाले कोटा के पहले वरिष्ठ साहित्यकार हैं। श्री मिश्र हैदराबाद की अपनी यात्रा से 11 फरवरी को कोटा लौटेंगे और अपनी या्त्रा के अपने अविस्मरणीय क्षणों का जलेस बैठक में वर्णन करेंगे। सान्निध्य ब्लॉग पर उनका यात्रा वृत्तांत सचित्र प्रकाशित किया जायेगा।
बोस जीने नहीं देता गहलोत पीने नहीं देता ...
दोस्तों मेने शराब माफिया के मटके में से ८१ लाकह रूपये बरामद होने की खबर सुबह अपने ब्लॉग पर लिखी थी कुछ ने पढ़ी कुछ ने तवज्जो नहीं दी लेकिन मेरे एक मित्र भाई अतुल श्रीवास्तव ने छत्तीस गढ़ में बेठे ही बेठे एक ऐसा सच बताया जो में आप टक पहुंचा रहा हूँ ।
दोस्तों राजस्थान में गहलोत जब विपक्ष में थे तो वसुंधरा सरकार की शराब निति के खिलाफ गहलोत जम कर बरसते थे और मुख्यमंत्री भवन का १० तो ८ का वक्त बता कर इसके बाद नहीं हे सी एम का नारा देते थे फिर गहलोत मुख्यमंत्री बन गये गहलोत ने राजस्थान में शराब के मामले में निति बनाई और फिर सख्ती की कोंग्रेस अध्यक्ष और केन्द्रीय मंत्री जो एक वोट से विधानसभा चुनाव हरे थे उन सी पी जोशी जी के इलाके उदयपुर में मेरे भाई अतुल श्रीवास्तव का जाना हुआ तो वहां उन्होंने देखा के लोगों का नया नारा हे उनका कहना हे के लोग कहते हे के ; कमबख्त बोस ऑफिस में जीने नहीं देता और गहलोत रात को आठ बजे बाद पीने नहीं देता ; मेरे भाई अतुल जी ने अपनी टिप्पणी में वही याद ताज़ा की हे लेकिन इसी बीच इन सख्तियों के बाद भी खुद मुख्यमंत्री गहलोत जी के इलाके में शराब दुखान्तिका मन झकझोर देने वाली हे ।
दोस्तों यह तो एक बात हुई दूसरी बात यह हे के मेरे भाई कोटा का नाम रोशन कर सेकड़ों लोगों को लाइलाज बीमारी केंसर से नुजात दिलाने वाले मुनीर खान के बेटे जनाब सरोश खान जो कोटा शहर की गलियों के लिएँ आज भी सरोश कहां हे लेकिन एक फिल्म पे बेक ने उन्हें स्टार बना दिया हे आज वोह फ़िल्मी दुनिया में जम गये हें और कोटा में ही उन्होंने उनकी फिल्म पे बेक का प्रीमियर भी किया था भाई सरोश कहां ने भी शिला की जवानी के मामले को खूब बहतर तरीके से परिष्क्र्त,बहिश्क्र्ट और परिभाषित किया हे हो सके तो आप जरुर देखने की कोशिश करना जो उनके ब्लॉग और फेसबुक पर भी देखा जा सकता हे । जय सरोज भाई जय हो । अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान
दोस्तों राजस्थान में गहलोत जब विपक्ष में थे तो वसुंधरा सरकार की शराब निति के खिलाफ गहलोत जम कर बरसते थे और मुख्यमंत्री भवन का १० तो ८ का वक्त बता कर इसके बाद नहीं हे सी एम का नारा देते थे फिर गहलोत मुख्यमंत्री बन गये गहलोत ने राजस्थान में शराब के मामले में निति बनाई और फिर सख्ती की कोंग्रेस अध्यक्ष और केन्द्रीय मंत्री जो एक वोट से विधानसभा चुनाव हरे थे उन सी पी जोशी जी के इलाके उदयपुर में मेरे भाई अतुल श्रीवास्तव का जाना हुआ तो वहां उन्होंने देखा के लोगों का नया नारा हे उनका कहना हे के लोग कहते हे के ; कमबख्त बोस ऑफिस में जीने नहीं देता और गहलोत रात को आठ बजे बाद पीने नहीं देता ; मेरे भाई अतुल जी ने अपनी टिप्पणी में वही याद ताज़ा की हे लेकिन इसी बीच इन सख्तियों के बाद भी खुद मुख्यमंत्री गहलोत जी के इलाके में शराब दुखान्तिका मन झकझोर देने वाली हे ।
दोस्तों यह तो एक बात हुई दूसरी बात यह हे के मेरे भाई कोटा का नाम रोशन कर सेकड़ों लोगों को लाइलाज बीमारी केंसर से नुजात दिलाने वाले मुनीर खान के बेटे जनाब सरोश खान जो कोटा शहर की गलियों के लिएँ आज भी सरोश कहां हे लेकिन एक फिल्म पे बेक ने उन्हें स्टार बना दिया हे आज वोह फ़िल्मी दुनिया में जम गये हें और कोटा में ही उन्होंने उनकी फिल्म पे बेक का प्रीमियर भी किया था भाई सरोश कहां ने भी शिला की जवानी के मामले को खूब बहतर तरीके से परिष्क्र्त,बहिश्क्र्ट और परिभाषित किया हे हो सके तो आप जरुर देखने की कोशिश करना जो उनके ब्लॉग और फेसबुक पर भी देखा जा सकता हे । जय सरोज भाई जय हो । अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान
राजा का बज गया बाजा ..........
दोस्तों यह हिन्दुस्तान हे यहाँ के लोग महान हे य्हना आगर पीछे पढ़ जाए तो सभी बहाने धरे के धरे रह जाते हें और जो लोग चोरों को बचना चाहते हे वही लोग चोरों को पकड़ कर खुद को साहूकार भी साबित करने का प्रयास करते हें यही मेरे इस देश के प्रधानमन्त्री और उसकी रिमोट कंट्रोलर ने घोटाला मंत्री ऐ राजा को आज गिरफ्तार कर साबित कर दिया हे ।
पूर्व संचार मंत्री ऐ राजा चाहे कोंग्रेस पार्टी के नहीं हे लेकिन सरकार में विश्वसनीय होने के कारण वोह प्रधानमन्त्री सहित कई दिग्गजों के निकटतम थे और उन्होंने जो कुछ भी किया वोह सब प्रधानमन्त्री जी सहित कई लोगों की जानकारी में था इसीलियें पहली बार जब इनका घोटाला पकड़ा गया तो फिर प्रधानमन्त्री से लेकर सभी लोग इनके बचाव में आ गये आरोप और सी वी सी की रिपोर्ट और सी ऐ जी रिपोर्ट को फर्जी आंकड़ों का भ्रम करार दिया बात बढ़ी संसद तक पहुंची मामला सुप्रीम कोर्ट में था इसलियें मजबूरी में बात कोंग्रेस के लोग दबा नहीं सके और ऐ राजा से इस्तीफा दिलवा दिया विपक्ष जे पी सी की मनाग करता रहा पूरी संसद निकल गयी लेकिन कोंग्रेस ने जे पी सी का गठन नहीं किया प्रधानमन्त्री से लेकर कोंग्रेस के प्रवक्ता तक विपक्ष के आरोपों को नकारते रहे और धन डकारते रहे कोंग्रेस ने सोचा था के बात हमेशा की तरह ठंडे बसते में बंद हो जाएगी लेकिन एक के बाद एक भ्रस्ताचार की कहानी कोंग्रेस सरकार की जुबानी चलती रही बात बिगड़ गयी और फिर संसद का बजट स्तर सर पर था आखिर कोंग्रेस को खुद को दुद्ध का धुला साबित करने के लियें ठुक कर चाटना पढ़ा और जिस राजा जी को कोंग्रेस निर्दोष कहकर सर पर बिठाये बेठी थी उन राजा जी को आज कोंग्रेस के इंस्ट्रूमेंट सी बी आई ने गिरफ्तार कर लिया ।
कोंग्रेस को पता नहीं के राजा जी गिरफ्तार होने के पहले किस किस से मिले सब को पता हे और फिर राजा जी का जब बाजा बज ही गया हे तो फिर जो इनकी बारात में शामिल थे और जो घोड़ी पर दूल्हा बन कर सवार थे अब वोह भी नहीं बच सकेंगे देखते हें के आखिर बकरे की मां कब तक खेर मनाएगी इस देश को सरकार घुन की तरह कब तक खाएगी सरकार रहेगी या फिर नया प्रधानमन्त्री जी आएंगे और तब कहीं शायद देश के सिसकते लोग चेन को इब्न्सी बजायेंगे । अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान
पूर्व संचार मंत्री ऐ राजा चाहे कोंग्रेस पार्टी के नहीं हे लेकिन सरकार में विश्वसनीय होने के कारण वोह प्रधानमन्त्री सहित कई दिग्गजों के निकटतम थे और उन्होंने जो कुछ भी किया वोह सब प्रधानमन्त्री जी सहित कई लोगों की जानकारी में था इसीलियें पहली बार जब इनका घोटाला पकड़ा गया तो फिर प्रधानमन्त्री से लेकर सभी लोग इनके बचाव में आ गये आरोप और सी वी सी की रिपोर्ट और सी ऐ जी रिपोर्ट को फर्जी आंकड़ों का भ्रम करार दिया बात बढ़ी संसद तक पहुंची मामला सुप्रीम कोर्ट में था इसलियें मजबूरी में बात कोंग्रेस के लोग दबा नहीं सके और ऐ राजा से इस्तीफा दिलवा दिया विपक्ष जे पी सी की मनाग करता रहा पूरी संसद निकल गयी लेकिन कोंग्रेस ने जे पी सी का गठन नहीं किया प्रधानमन्त्री से लेकर कोंग्रेस के प्रवक्ता तक विपक्ष के आरोपों को नकारते रहे और धन डकारते रहे कोंग्रेस ने सोचा था के बात हमेशा की तरह ठंडे बसते में बंद हो जाएगी लेकिन एक के बाद एक भ्रस्ताचार की कहानी कोंग्रेस सरकार की जुबानी चलती रही बात बिगड़ गयी और फिर संसद का बजट स्तर सर पर था आखिर कोंग्रेस को खुद को दुद्ध का धुला साबित करने के लियें ठुक कर चाटना पढ़ा और जिस राजा जी को कोंग्रेस निर्दोष कहकर सर पर बिठाये बेठी थी उन राजा जी को आज कोंग्रेस के इंस्ट्रूमेंट सी बी आई ने गिरफ्तार कर लिया ।
कोंग्रेस को पता नहीं के राजा जी गिरफ्तार होने के पहले किस किस से मिले सब को पता हे और फिर राजा जी का जब बाजा बज ही गया हे तो फिर जो इनकी बारात में शामिल थे और जो घोड़ी पर दूल्हा बन कर सवार थे अब वोह भी नहीं बच सकेंगे देखते हें के आखिर बकरे की मां कब तक खेर मनाएगी इस देश को सरकार घुन की तरह कब तक खाएगी सरकार रहेगी या फिर नया प्रधानमन्त्री जी आएंगे और तब कहीं शायद देश के सिसकते लोग चेन को इब्न्सी बजायेंगे । अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान
01 February 2011
जनता से पुलिस की गांधीगिरी अख़बारों को रास नहीं आई
दोस्तों कोटा में कल यानि गुज़रे हुए कल एक फरवरी से मोटर व्हीकल एक्ट के पुरे कानून में से केवल एक अंश यानि दुपहिये वाहन चालकों के लियें हेलमेट नियम लागू किया जाना था बस पुलिस ने कल से सख्ती की जाँच की लम्बी बढ़ी सडकें जहां वहन चालक तेज़ गति से वाहन चला सकता हे वहां हेलमेट चेकिं शुरू की कुछ को रोका कुछ को टोका कुच्छ का चालान बनाया कुछ को घर वापस हेलेम्त लेने के लियें दोड़ाया लेकिन जनता परेशान नहीं हुई पुलिस और जनता की भिडंत नहीं हुई तो फिर अख़बार वाले खासकर दो अखबार भास्कर और पत्रिका जो हेलमेट विक्रेताओं के एजेंन्ट और विज्ञापन दाता हें वोह इस शान्ति पूर्ण व्यवस्था को केसे पसंद करते उन्होंने तो खुद हेलमेट पहने हेलमेट कहां से खरीदे अगर इसकी रसीद उनसे मांगेंगे तो किसी अख़बार वाले के पास नहीं मिलेगी क्योंकि जनता जानती हे उनके पास हेलमेट कहां से केसे और किसलियें आते हें हाँ कुछ साधू पत्रकार हें जो इस खेरात के झंझट से दूर भी रहते हे ।
तो दोस्तों में बात कर रहा था मोटर व्हीकल कानून में से केवल गरीबों दुपहिये वाहन चालकों के खिलाफ लागू किये गये कानून की बस पुलिस ने गलियों में घरों के आस पास दुपहिये वाहनों पर घुमने वालों को छोड़ कर जब व्यवस्था बनाई तो फिर इन अख़बार वालों के पेट में दर्द होने लगा कहते हें पुलिस ने तो गलियों में चलन नहीं बनाये यानि यह हेलमेट के दल्ले चाहते हें के जनता को घर में भी हेलमेट पहनाया जाए घर से बाहर निकलते ही गली में भी हेलमेट पहनाया जाए और इसीलियें आज कोटा में बढ़े अखबार जी पुलिस के खिलाफ गुसे से भरे पढ़े हें लेकिन जनता का कहना हे के कुत्ते भोंकते रहते हें पहले भी कई बार भोंके आज टक तो कुछ हुआ नहीं आगे क्या होगा क्योंकि निस्वार्थ भाव से जो बात लिखी जाए वोह तो लागू होती हे और अगर स्वार्थ भाव से लिखी जाए तो शेम शेम ही होती हे । अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान
तो दोस्तों में बात कर रहा था मोटर व्हीकल कानून में से केवल गरीबों दुपहिये वाहन चालकों के खिलाफ लागू किये गये कानून की बस पुलिस ने गलियों में घरों के आस पास दुपहिये वाहनों पर घुमने वालों को छोड़ कर जब व्यवस्था बनाई तो फिर इन अख़बार वालों के पेट में दर्द होने लगा कहते हें पुलिस ने तो गलियों में चलन नहीं बनाये यानि यह हेलमेट के दल्ले चाहते हें के जनता को घर में भी हेलमेट पहनाया जाए घर से बाहर निकलते ही गली में भी हेलमेट पहनाया जाए और इसीलियें आज कोटा में बढ़े अखबार जी पुलिस के खिलाफ गुसे से भरे पढ़े हें लेकिन जनता का कहना हे के कुत्ते भोंकते रहते हें पहले भी कई बार भोंके आज टक तो कुछ हुआ नहीं आगे क्या होगा क्योंकि निस्वार्थ भाव से जो बात लिखी जाए वोह तो लागू होती हे और अगर स्वार्थ भाव से लिखी जाए तो शेम शेम ही होती हे । अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान
राजस्थान वक्फ बोर्ड ब्यूरोक्रेट्स के हवाले ..
संवेधानिक संस्था राजस्थान वक्फ बोर्ड जहां कई माह बाद राष्ट्रपति के दबाव से चुनाव हुए और भाजपा के बोर्ड चेयरमेन को हटा कर पूर्व पुलिस अधिकारी को चेयरमेन बनाया गया कोई बात नहीं जनप्रतिनिधियों का विरोध कम था इसलियें अफसर शाही हावी रही लेकिन अब ;लोकतंत्र प्रणाली के बाद फिर से यहाँ ब्यूरोक्रेट्स को हावी कर दिया गया हे ।
राजस्थान वक्फ बोर्ड के गठन के बाद अब तक कुछ नहीं हुआ लेकिन ३१ जनवरी को आयोजित बैठक में पहली बार आर ऐ एस अधिकारी को वक्फ बोर्ड की जिला कमेटियों के गठन के लियें इख्तियार दिया गया अब तक यह पावर निर्वाचित या मनोनीत सदस्यों के पास ही रहती थी लेकिन अधिकारीयों को यह इख्तियार देकर सरकार ने यह साबित करने का प्रयास क्या हे के वफ़ बोर्द्फ़ जनप्रतिनिधियों से ज्यादा ब्यूरोक्रेट्स के कब्जे में , राजस्थान के जिलों में कस्बों में गाँवों में भाजपा की काबिनाएं बेठी हे वोह मनमानी कार्यवाहिया कर रही हें लेकिन राजस्थान वक्फ बोर्ड की बचकाना हरकत हे के अब तक नई जिला और कस्बे स्तर की काबिनाये गठित नहीं की गये हें इस गठन के लियें कोई सिद्धांत भी तय नहीं किये हें और हालात यह हें के अरबों रूपये की वक्फ सम्पत्तियां बर्बाद हो रही हें , लोग हे के राजनितिक लोगों के तलवे इस पद को पाने के लियें चाट रहे हें वक्फ सम्पत्तियों के कब्जेदार हर जिले में इतने सक्षम हे के उन्होंने वक्फ सम्पत्तियों पर करोड़ों रूपये के जो कब्जे किये हें उसे बचाने के लियें वोह स्थानीय सियासी लोगों से मिलकर अपने चमचों को जिला कमेटियों में बनाना चाह रहे हे ताकि कब्जेदार अपने कब्जे बरकरार रख सकें अब राजस्थान का मुस्लिम इस राजनीती को समझ भी नहीं रहा हे देखते हें के जिलों में अब यह सरकार क्या गुल खिलाती हे । अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान
राजस्थान वक्फ बोर्ड के गठन के बाद अब तक कुछ नहीं हुआ लेकिन ३१ जनवरी को आयोजित बैठक में पहली बार आर ऐ एस अधिकारी को वक्फ बोर्ड की जिला कमेटियों के गठन के लियें इख्तियार दिया गया अब तक यह पावर निर्वाचित या मनोनीत सदस्यों के पास ही रहती थी लेकिन अधिकारीयों को यह इख्तियार देकर सरकार ने यह साबित करने का प्रयास क्या हे के वफ़ बोर्द्फ़ जनप्रतिनिधियों से ज्यादा ब्यूरोक्रेट्स के कब्जे में , राजस्थान के जिलों में कस्बों में गाँवों में भाजपा की काबिनाएं बेठी हे वोह मनमानी कार्यवाहिया कर रही हें लेकिन राजस्थान वक्फ बोर्ड की बचकाना हरकत हे के अब तक नई जिला और कस्बे स्तर की काबिनाये गठित नहीं की गये हें इस गठन के लियें कोई सिद्धांत भी तय नहीं किये हें और हालात यह हें के अरबों रूपये की वक्फ सम्पत्तियां बर्बाद हो रही हें , लोग हे के राजनितिक लोगों के तलवे इस पद को पाने के लियें चाट रहे हें वक्फ सम्पत्तियों के कब्जेदार हर जिले में इतने सक्षम हे के उन्होंने वक्फ सम्पत्तियों पर करोड़ों रूपये के जो कब्जे किये हें उसे बचाने के लियें वोह स्थानीय सियासी लोगों से मिलकर अपने चमचों को जिला कमेटियों में बनाना चाह रहे हे ताकि कब्जेदार अपने कब्जे बरकरार रख सकें अब राजस्थान का मुस्लिम इस राजनीती को समझ भी नहीं रहा हे देखते हें के जिलों में अब यह सरकार क्या गुल खिलाती हे । अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान
शराब की मटकी में ८१ लाख
जी हाँ दोस्तों कहते हें राजस्थान बीमारू राज्य हे यहाँ गरीबी हे लेकिन यहाँ तेनत अधिअक्रियों के लोक्रों में करोड़ों रूपये मिलते हें तो शराब के तस्करों की मटकियों में छुपे लाखों रूपये बरामद होते हें ।
जोधपुर में पिछले दिनों मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के गृह जिले में शराब माफियाओं की तस्करी के चलते शराब दुखान्तिका हुई दर्जनों लोगों की म़ोत हुई और अब जांच चल रही हे पुलिस ने वहां एक तस्कर कालूराम को गिरफ्तार किया हे उसके घर से लाखो रूपये और सोना बरामद करने के बाद पुईस ने जब उसकी सुचना पर रिश्तेदार के घर में मटके में छुपा कर रखे नोटों को तलाश की किया तो मटके में ८१ लाख रूपये देख कर पुलिस चकित रह गयी कहने को तो पुलिस की यह बहुत बढ़ी उपलब्धी हे लेकिन राजस्थान में कई अधिकारीयों,व्यापारियों ,नेताओं ने अपने आने रिश्तेदारों के यहाँ गुप्त स्थानों पर आज भी करोड़ों करोड़ रूपये छुपा रखे हें अब बताओ यह राजस्थान जहां की धरती मटकी और लोकर करोड़ों लाखों रूपये उगल रहे हें तो फिर यहाँ की आर्थिक स्थिति की कमजोरी के पीछे किस की लापरवाही हे । अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान
जोधपुर में पिछले दिनों मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के गृह जिले में शराब माफियाओं की तस्करी के चलते शराब दुखान्तिका हुई दर्जनों लोगों की म़ोत हुई और अब जांच चल रही हे पुलिस ने वहां एक तस्कर कालूराम को गिरफ्तार किया हे उसके घर से लाखो रूपये और सोना बरामद करने के बाद पुईस ने जब उसकी सुचना पर रिश्तेदार के घर में मटके में छुपा कर रखे नोटों को तलाश की किया तो मटके में ८१ लाख रूपये देख कर पुलिस चकित रह गयी कहने को तो पुलिस की यह बहुत बढ़ी उपलब्धी हे लेकिन राजस्थान में कई अधिकारीयों,व्यापारियों ,नेताओं ने अपने आने रिश्तेदारों के यहाँ गुप्त स्थानों पर आज भी करोड़ों करोड़ रूपये छुपा रखे हें अब बताओ यह राजस्थान जहां की धरती मटकी और लोकर करोड़ों लाखों रूपये उगल रहे हें तो फिर यहाँ की आर्थिक स्थिति की कमजोरी के पीछे किस की लापरवाही हे । अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान
बेरोजगारों की म़ोत का ठुमका बरेली के बाज़ार में ...
उत्तर प्रदेश के बरेली सहित दुसरे जिलों में कल बेरोजगारों की म़ोत के बाद मचाये गये उत्पात से केंद्र या राज्य सरकार ने कोई सीख नहीं ली हे हालत यह हें के इतने बढ़े हादसे के बाद भी केंद्र और उत्तर प्रदेश राज्य एक दुसरे पर आरोप प्रत्यारोप लगा रहे हें ।
उत्तर प्रदेश के बरेली में कल आई टी बी पी की परीक्षा होना थी पद गिनती के ४०० और बेरोजगार उम्मीदवारों की संख्या लाखों में सरकार पहले से तय्यार नहीं नतीजन बेरोजगारों को ट्रेन को छतों पर विधि विरुद्ध तरीके से सफर करना पढ़ा ट्रेने चली और फिर अलग अलग दो स्थानों पर १५ लोगों की मोतें इन मोटों के बाद केंद्र और राज्य के बीच आरोप प्रत्यारोप और फिर बेरोजगार छात्रों का हंगामा तोड़ फोड़ ट्रेन में आग जनी सब एक तमाशा बन गयी अब ऐसे में बताओ मरने वालों के परिजनों का क्या कुसूर था , इसके पहले राजस्थान में सिपाही भर्ती परीक्षा में अजमेर में बढा हादसा हो चूका था फिर भी रेलवे ने और रेलवे सुक्ष पुलिस ने कोई सुद्ध नहीं ली ।
देश में बेरोज़गारी का यह आलम के एक अनार सो बीमार वाली कहावत अब बदल गयी हे यहाँ एक अनार हे तो लाखों बीमार हें सरकार इस व्यवस्था को जानती हे लेकिन इसके पहले किसी भी तरहे की कोई पूर्व सुरक्षा व्यवस्था नहीं करती हे और इन सभी मोतों के लियें सरकार सिर्फ सरकार ही ज़िम्मेदार हे केंद्र हो चाहे राज्य सरकार जो भी हादसा हुआ हे उसमें अब घर के बिछड़े लालों को तो वापस लाना सम्भव नहीं हे हाँ कुछ मुआवज़े से उनके अनसु पोंछ भी दिए तो क्या फायदा । अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान
उत्तर प्रदेश के बरेली में कल आई टी बी पी की परीक्षा होना थी पद गिनती के ४०० और बेरोजगार उम्मीदवारों की संख्या लाखों में सरकार पहले से तय्यार नहीं नतीजन बेरोजगारों को ट्रेन को छतों पर विधि विरुद्ध तरीके से सफर करना पढ़ा ट्रेने चली और फिर अलग अलग दो स्थानों पर १५ लोगों की मोतें इन मोटों के बाद केंद्र और राज्य के बीच आरोप प्रत्यारोप और फिर बेरोजगार छात्रों का हंगामा तोड़ फोड़ ट्रेन में आग जनी सब एक तमाशा बन गयी अब ऐसे में बताओ मरने वालों के परिजनों का क्या कुसूर था , इसके पहले राजस्थान में सिपाही भर्ती परीक्षा में अजमेर में बढा हादसा हो चूका था फिर भी रेलवे ने और रेलवे सुक्ष पुलिस ने कोई सुद्ध नहीं ली ।
देश में बेरोज़गारी का यह आलम के एक अनार सो बीमार वाली कहावत अब बदल गयी हे यहाँ एक अनार हे तो लाखों बीमार हें सरकार इस व्यवस्था को जानती हे लेकिन इसके पहले किसी भी तरहे की कोई पूर्व सुरक्षा व्यवस्था नहीं करती हे और इन सभी मोतों के लियें सरकार सिर्फ सरकार ही ज़िम्मेदार हे केंद्र हो चाहे राज्य सरकार जो भी हादसा हुआ हे उसमें अब घर के बिछड़े लालों को तो वापस लाना सम्भव नहीं हे हाँ कुछ मुआवज़े से उनके अनसु पोंछ भी दिए तो क्या फायदा । अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान
क्यूँ देखता हूँ तुम्हे .................
जिन पत्थरों को हटाया वही मेरे घर उछले हें .....

कल
रास्ते में
रोड़ा बने
जिन पत्थरों को
लोगों को
ठोकरों से
बहाने के लियें
मेने
एक तरफ किया था
आज
उन्हीं पत्थरों को
राह चलते
लोगों ने
मेरे घर पर
उछाला हे ........................ ।
अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान
यह क्या कर डाला ..

मोहब्बत करके
तुने ऐ दिल
खुद को मुसीबत में हे डाला ,
क्यूँ कर डाली
तुने
कम बख्त मोहब्बत
तुने तो
खुद को
जीते जी मार डाला ,
कोन नहीं जानता
एक मुहब्बत ही तो हे
जो जिंदगी की
सबसे बढ़ी आज़माइश हे
इस कहावत को
मोहब्बत करने से पहले
तुने भुला क्यूँ डाला ।
अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान
सदस्यता लें
संदेश (Atom)
