प्रदेश कोंग्रेस अध्यक्ष गोविंद जी डोटासरा की भाजपा शिक्षक मनमानी ट्रांसफर लिस्ट पर खरी खरी, बड़ी विडंबना है कि माननीय हाईकोर्ट की सख्त फटकार के बावजूद प्रदेश में शिक्षा को खुला व्यापार बनाकर राजनीतिक दुर्भावना के साथ खिलवाड़ और मज़ाक किया जा रहा है।
6521 में से 1283 व्याख्याता यानी का औसतन 20% प्रशासनिक ट्रांसफर हैं, कांग्रेस सरकार में केवल 2% था। मेरे विधानसभा क्षेत्र लक्ष्मणगढ़ में 143 व्याख्याता में से 122 यानी 85% ट्रांसफर प्रशासनिक बताकर राजनीतिक बदले और वसूली का खेल खेला गया है, जबकि कांग्रेस सरकार क्षेत्र में 1 भी ट्रांसफर प्रशासनिक नहीं हुआ था।
भाजपा सरकार में ये प्रशासनिक नहीं, सुनियोजित सत्ता का दुरुपयोग, पढ़ाई की जगह भ्रष्टाचार की कमाई और शिक्षकों की प्रताड़ना है। विभाग पूरी तरह निकम्मा और दिशाहीन है, रोज़ अदालतों में सरकार की थू-थू हो रही है, बच्चों का भविष्य कुचला जा रहा है और स्कूले खाली पड़ी हैं।
3 दिन पहले संस्कृत और माध्यमिक शिक्षा के 738 शिक्षकों का ट्रांसफर किया गया, सितंबर में भी राजनीति द्वेषता से 4527 शिक्षकों को इधर-उधर किया गया, जिसमें से 50% कोर्ट की शरण में हैं। प्रशासनिक के नाम पर आए दिन ट्रांसफर के आदेश निकल रहे हैं। स्कूलें जर्जर हालत में हैं, शिक्षकों के 1.5 लाख पद रिक्त पड़े हैं, बिना शिक्षकों के बच्चों का भविष्य खराब हो रहा है, कई संवर्गों में DPC बकाया है, योजनाएं बंद पड़ी हैं, शिक्षक संघ सड़क उतरने की चेतावनी दे रहे हैं, लेकिन कोई सुनने वाला नहीं है। स्वयं मुख्यमंत्री जी भी दु:खी हैं, लेकिन RSS के दबाव में उनके हाथ भी बंधे हैं।
इस सरकार में नीतिगत निर्णय नहीं, राजस्थान की जानबूझकर साज़िशन शिक्षा व्यवस्था को तबाह किया जा रहा है।

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