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22 अक्तूबर 2020

देश में चुनाव है , चुनाव आयोग के नियम , क़ायदे ,क़ानून ,प्रक्रिया , तोर तरीके है ,बढे आराम के साथ ,

 देश में चुनाव है , चुनाव आयोग के नियम , क़ायदे ,क़ानून ,प्रक्रिया , तोर तरीके है ,बढे आराम के साथ , जी हाँ दोस्तों देश भर के हर तरह के चुनाव , चुनाव आयोग ही सम्पादित करवाने के लिए ज़िम्मेदार है ,जबकि देश के राष्ट्रिय , राज्य स्तर के राजनितिक संगठनों को मान्यता देना , उनके संविधान के हिसाब से , उनकी आंतरिक लोकतंत्र के तहत चुनाव प्रक्रिया ,और कार्यव्यवहार होना भी , निर्वाचन आयोग ही नियंत्रित करता है , लेकिन क्या निर्वाचन विभाग यह सब कर पाता है , क्या राजनितिक पार्टियों का आंतरिक लोकतंत्र उनके संवैधानिक दायरे में है ,, यह सब निर्वाचन विभाग कभी देखता है , सोचने की बात है , निर्वाचन विभाग अभी हाल ही में राजस्थान नगर पालिका के चुनाव में छह नगर निगम के चुनाव करवा रहा है , दुसरे चुनावों में से अलग , यह चुनाव इसलिए है के यहाँ कोरोना गाइड लाइन के साथ चुनाव हो रहे है ,अच्छी बात है , लेकिन चुनाव आयोग अनावश्यक आदेशों के माध्यम से , लोगों के लिए मुसीबत भी पैदा करता है ,सुप्रीमकोर्ट , हाईकोर्ट का सख्त आदेश है के , किसी भी व्यक्ति को अगर लाइसेंसी हथियार दिए गये है , तो उसके खिलाफ , हथियार के दुरूपयोग की शिकायत नहीं होने तक उसके हथियार जमा नहीं करवाए जाए ,, लेकिन चुनाव आयोग ,कलेक्टर्स रटा रटाया पुराना आदेश ,सभी लोग थाने में हथियार जमा कराये ,अब एक तरफ तो हाईकोर्ट का मार्गदर्शन का खुला उन्लंग्घन है ,दूसरी बात , जब ,,किसी व्यक्ति को आत्मसुरक्षा के लिए हथियार दिया है ,तो उसका हथियार ऐसे मौके पर जमा कराना क्या विधि सम्मत है ,, दूसरी बात , कोरोना गाइड लाइन में ,हर लाइसेंस धारी अपना हथियार लेकर ,,थाने में भीड़ जमा करे ,थाने के कई कर्मचारी , पहले तो , हथियार जमा करने की फोर्मलिटी करे , नियमित रिपोर्ट भेजें , रसीदें दें , फिर हथियारों की रखवाली करे ,और जब चुनाव खत्म हो तो फिर इन हथियारों को वापस लोटाये , कूल मिलाकर हर थाने के दो तीन आदमियों का प्रतिदिन अनावश्यक कामकाज बढ़ गया , और नतीजा कुछ भी नहीं ,क्योंकि लाइसेंसी हथियार से , कभी कोई अपराध होता भी नहीं , पुलिस , प्रशासन ,सी आए डी सूक्ष्म परीक्षण के बाद ही ऐसे लाइसेंस जारी करती है ,,, फिर कोरोना संकट काल में , अनावश्यक लोगों की थाने में भीड़ भी विधि सम्मत नहीं है ,,,, यह चुनाव आयोग का लाइसेंसधारी हथियारों को थाने में जमा कराने के हाईकोर्ट के मार्गदर्शन का खुला उलंग्घन है ,,,, इसी तरह , वोटर लिस्ट ,, चनावी पर्चियों को लेकर भी , चुनाव आयोग फेल्यूओर ही साबित रहता है ,, चुनाव आयोग ,,वोह चुनाव आयोग ,,जिसकी वोटरलिस्ट भी पूरी सही नहीं बन पाती है ,,वोह चुनाव् आयोग जिसकी ई वी एम मशीने भी कई बार खराब हो जाती है ,,वोह चुनाव आयोग ,,जो आम पब्लिक को ठगने के लिए ,,झूँठ और ठगी के पुलन्दे ,,चुनावी घोषणापत्रों पर कोई कार्यवाही नहीं कर पाता है ,,वोह चुनाव आयोग जो इलेक्ट्रॉनिक चेनल की पेड़ खबरे ,,पेड़ इंटयरव्यू ,,पेड़ बढ़ी खबर ,पेड़ खुली बहस ,,जो सिर्फ और सिर्फ ,,मुख्य मुद्दों से आम वोटर्स को भटकाकर गुमराह करने के लिए करवाये जाते है ,,नफरत फैलाने वाले बयान ,,जो सिर्फ हिंसा भड़काकर वोट बटोरना चाहते है ,,मन्दिर मस्जिद की बात कर वोट मांगे जाते है ,,वोह चुनाव यहॉ जो प्रधानमंत्री की सभाओ के खर्च ,,उनकी सुरक्षा खर्च दूसरे खर्चो को प्रत्याक्षी के खर्च में नहीं जोड़ पाते है , ,,खेर ,,चुनाव आयोग को सलाम ,,सेल्यूट ,,कुछ तो किया ,,,,वरना देश में स्वच्छ निष्पक्ष ,,निर्भीक सस्ती चुनाव प्रणाली के लिए चुनाव आयोग को एक रिपोर्ट तैयार करवाकर उस पर जनमत संग्रह करवाकर राष्ट्रपति को क़ानून बनाने के लिए देना चाहिए ,,,,,,,,,अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

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