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08 अक्तूबर 2020

एक खान , मुन्ना खान ,, जिनकी पत्रकारिता में शाहीअंदाज़ ,यानि रॉयल क़लमकारिता है , जिनके साप्तहिक रॉयल पत्रिका में ,दलित , शोषित ,उत्पीड़ित ,,अल्पसंख्यक ,, छत्तीस क़ौमों की आवाज़ है ,राजस्थान का दर्द ,मार्गदर्शन ,सियासी उठापटक है ,

 एक खान , मुन्ना खान ,, जिनकी पत्रकारिता में शाहीअंदाज़ ,यानि रॉयल क़लमकारिता है , जिनके साप्तहिक रॉयल पत्रिका में ,दलित , शोषित ,उत्पीड़ित ,,अल्पसंख्यक ,, छत्तीस क़ौमों की आवाज़ है ,राजस्थान का दर्द ,मार्गदर्शन ,सियासी उठापटक है ,,निर्भीकता ,निष्पक्षता है ,, निमित्ता है ,,ऐसे मुन्ना भाई जर्नलिस्ट , को मेरा सलाम सेल्यूट है ,,, जी हाँ दोस्तों , मुन्ना खान ,मुन्ना भाई , किसी पहचान के , परिचय के मोहताज नहीं ,जोबनेर भरतपुर से ,खेती बाढ़ी ,, मामले की पढाई में पारंगत होने के बाद ,, मुन्ना भाई ने जब , पत्रकारिता क्षेत्र में , ,गरीबों , दलितों ,मज़दूरों ,कृषकों ,छतीस क़ौमों के साथ नाइंसाफी का खेल देखा ,तो फिर खुद ही ,,पत्रकारिता के क्षेत्र में अपने जोहर दिखाने ,लगे इनकी निष्पक्ष ,निर्भीक क़लम के  पैनेपन से ,  राजधानी जयपुर  कंट्रोल रूम के ज़रिये पुरे राजस्थान की आवाज़ उठाई  जाने लगी ,और मुन्ना भाई के क़लम के जोहर , का ही नतीजा है ,के 14 साल पहले , सो सुनार की ,एक लुहार की कहावत की तर्ज़ पर ,साप्ताहिक रॉयल पत्रिका , का प्रकाशन शुरू हुआ ,, इनकी पत्रकारिता के काल में ,,इनके अख़बार के ज़रिये ,कई सियासी उठापटक का खुलासा हुआ ,दल बदलुओं के कच्चे चिट्ठे सामने आये तो हर अंक , नौकरशाहों के भ्रष्टाचार के खिलाफ निर्भीकता से आवाज़ उठाने का  इतिहास ,है न काहू  से दोस्ती , न काहू से बेर , बस जो सच है ,वोह लिखना ,  वही प्रकाशित करना ,,निर्भीक बनकर ,,बढे बढे सूरमाओं से मुक़ाबला करना इनकी क़लम का स्वभाव है ,,, मुन्ना खान ,, अब मुन्ना भाई रॉयल के नाम से अपनी पहचान बना चुके है ,,इनके अख़बार में ,भाजपा ,कांग्रेस ,सभी तरह की पार्टियों के खिलाफ रिपोर्ट कार्ड होता है ,जनता के दुःख दर्द ,समस्याए , उनके समाधान के सुझाव होते है ,, इनके रॉयल पत्रिका ,,प्रकाशन के लिए कहावत है ,, एक साप्ताहिक सभी दैनिकों पर भारी , सभी न्यूज़ चैनलों से ,सबकी खबर ले ,सबकी खबर दे , की विश्वसनीय ज़िम्मेदारी ,, मुन्ना खान का अख़बार रॉयल पत्रिका ,राजस्थान के हर ज़िले ,हर कस्बे में ,पहुंचता है ,साप्ताहिक अख़बारों में ,सर्वाधिक प्रकाशित होकर ,,सभी पाठकों तक पहुंचना ,इनकी पत्रकारिता का पाठकों के प्रति समर्पण का स्वभाव है ,, मुन्ना भाई ,कई संस्थाओं ,, पत्रकार संगठनों से जुड़कर भी , पत्रकारिता की निष्पक्षता , पत्रकारों के खिलाफ शोषण  के ख़िआलफ ,पत्रकारों के इंसाफ के लिए भी लगातार संघर्ष कर रहे है ,, मुन्ना भाई ने वर्तमान बिगड़े हालातों में जब , कोरोना संक्रमण , से लोग बेहाल है ,,ऐसे में उन्होंने अपने अख़बार के माध्यम से कोरोना के खिलाफ ,, कोरोना गाइड लाइन की पालन को लेकर विशेष प्रचार जागरूकता अभियान भी छेड़ा है ,, इनका इस दौरान ,सामाजिक सरोकार भी रहा ,, लोकडाउन में पीड़ितों के लिए खाने की व्यवस्था करना , तत्काल बीमार मरीज़ों के लिए अस्पताल में चिकित्सकों से बात कर व्यवस्थाएं करवाना , मास्क ,सेनेटाइज़ व्यवस्थित तरीके से  वितरित करवाकर , जागरूकता कार्यक्रम चलाना , इनकी  प्राथमिकता रही है ,, मुन्ना भाई , के अख़बार का शीर्षक भी रॉयल है , रॉयल , यानी शाही ,, और  मुन्ना भाई का पत्रकारिता में खबरों के प्रकाशन ,खबरों के चयन में वही रॉयल वही शाही अंदाज़ है ,, शाही अंदाज़ यानी , निष्क्षता ,निर्भीकता ,न्यायविद व्यवस्था ,, शोषित ,दलित ,उत्पीड़ितों  की सुनवाई में इंसाफ़ाना संघर्ष ,, यही हमारे ,, मुन्ना भाई की ,रॉयल ,शाही ,पहचान है ,   इनकी रॉयल पत्रिका ,राजस्थान पत्रकारिता की शान है ,, इंसाफ की आवाज़ है ,, गरीबों ,शोषितों ,उत्पीड़ितों की धड़कन है ,सियासत में उपेक्षित लोगों की आवाज़ है ,, भ्रष्टाचारियों के खिलाफ एक ललकार , एक यलगार है ,, मुन्ना भाई को ,,बधाई ,, मुबारकबाद ,,, सेल्यूट ,, अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

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