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14 अक्तूबर 2020

अलग़रज जब सब जादूगर आ गये तो जादूगरों ने फ़िरऔन से कहा कि अगर हम ग़ालिब आ गए तो हमको यक़ीनन कुछ इनाम (सरकार से) मिलेगा

 अलग़रज जब सब जादूगर आ गये तो जादूगरों ने फ़िरऔन से कहा कि अगर हम ग़ालिब आ गए तो हमको यक़ीनन कुछ इनाम (सरकार से) मिलेगा (41)
फ़िरऔन ने कहा हाँ (ज़रुर मिलेगा) और (इनाम क्या चीज़ है) तुम उस वक़्त (मेरे) मुक़र्रेबीन (बारगाह) से हो गए (42)
मूसा ने जादूगरों से कहा (मंत्र व तंत्र) जो कुछ तुम्हें फेंकना हो फेंको (43)
इस पर जादूगरों ने अपनी रस्सियाँ और अपनी छडि़याँ (मैदान में) डाल दी और कहने लगे फ़िरऔन के जलाल की क़सम हम ही ज़रुर ग़ालिब रहेंगे (44)
तब मूसा ने अपनी छड़ी डाली तो जादूगरों ने जो कुछ (शोबदे) बनाए थे उसको वह निगलने लगी (45)
ये देखते ही जादूगर लोग सजदे में (मूसा के सामने) गिर पडे़ (46)
और कहने लगे हम सारे जहाँ के परवरदिगार पर इमान लाए (47)
जो मूसा और हारुन का परवरदिगार है (48)
फ़िरऔन ने कहा (हाए) क़ब्ल इसके कि मै तुम्हें इजाज़त दूँ तुम इस पर इमान ले आए बेशक ये तुम्हारा बड़ा (गुरु है जिसने तुम सबको जादू सिखाया है तो ख़ैर) अभी तुम लोगों को (इसका नतीजा) मालूम हो जाएगा कि हम यक़ीनन तुम्हारे एक तरफ़ के हाथ और दूसरी तरफ़ के पाँव काट डालेगें और तुम सब के सब को सूली देगें (49)
वह बोले कुछ परवाह नही हमको तो बहरहाल अपने परवरदिगार की तरफ़ लौट कर जाना है (50)

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