हमें चाहने वाले मित्र

10 अक्तूबर 2020

जवानी, हुस्न, मयखाने

 

जवानी, हुस्न, मयखाने, लबो रुखसार बिकते हैं
हया के आईने भी सब सरे बाज़ार बिकते हैं।
शराफ़त, ज़र्फ़,हमदर्दी दिलों से हो गयी रुखसत
जहाँ दौलत चमकती है वहीं किरदार बिकते हैं

कोई टिप्पणी नहीं:

टिप्पणी पोस्ट करें

दोस्तों, कुछ गिले-शिकवे और कुछ सुझाव भी देते जाओ. जनाब! मेरा यह ब्लॉग आप सभी भाईयों का अपना ब्लॉग है. इसमें आपका स्वागत है. इसकी गलतियों (दोषों व कमियों) को सुधारने के लिए मेहरबानी करके मुझे सुझाव दें. मैं आपका आभारी रहूँगा. अख्तर खान "अकेला" कोटा(राजस्थान)

Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...