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07 अक्तूबर 2020

अनुकरणीय सेवा,प्रेरणामयी व्यक्तित्व तीन बार प्लाज्मा डोनेट कर धीरज गुप्ता कर चुके हैं 88 बार रक्तदान

 

अनुकरणीय सेवा,प्रेरणामयी व्यक्तित्व
तीन बार प्लाज्मा डोनेट कर धीरज गुप्ता कर चुके हैं 88 बार रक्तदान
डॉ. प्रभात कुमार सिंघल, कोटा
लेखक एवं पत्रकार
समाज में कुछ व्यक्ति ऐसे होते हैं जो अपने कार्यों से न केवल अनुकरणीय सेवा कर लोगों का जीवन बचाते हैं वरण उनका व्यक्तित्व प्रेरणामयी बन जाता हैं। अपने कार्यों से समाज में आदर्श प्रस्तुत कर एक मिसाल बन जाते हैं। राजस्थान में कोटा के धीरज गुप्ता यूं तो पत्रकार हैं और सक्रिय पत्रकारिता से जुड़े हैं। युवा अवस्था से ही रक्तदान को सबसे बड़ा दान मानने लगे क्योंकि इस से किसी की जिंदगी बचती हैं।
आज कोरोना जैसी गम्भीर बीमारी में जब कि रोगी को कोरोना से स्वास्थ्य हुए व्यक्ति के प्लाज़्मा की जरूरत पड़ रही हैं उन्होंने 15 से 20 दिन के अंतराल पर 3 बार प्लाज़्मा दान कर तीन जिंदगियों को बचाया, और अपार खुशी का अनुभव कर रहे हैं।कहते हैं मैंने तीनों बार प्लाज़्मा देकर अपने हीमोग्लोबिन की जांच कराई जो 14 से 15 रहा। इससे किसी प्रकार की कमजोरी भी महसूस नहीं कर रहा हूं। उनके छोटे भाई पंकज गुप्ता ने भी इनसे प्रेरित होकर तीन बार प्लाज़्मा दान किया। शायद राजस्थान में यह पहला उदाहरण होगा, तीन-तीन बार प्लाज्मा दान और दो भाइयों का एक साथ होना। वे संकल्पित हैं कि आगे भी वे प्लाज़्मा देते रहेंगे जब तक कि चिकित्सक ही मना नहीं कर देगा।
धीरज ने बताया कि उन्होंने जीवन में 19 वर्ष की आयु में प्रथम बार रक्तदान किया। न कोई झिझक थी,न कोई डर। रक्तदान किया ,सब कुछ ठीक रहा,हौसला बढ़ा तो रक्तदान का सिलसिला ऐसा चला कि 30 वर्षों में अब तक 88 बार रक्तदान एवं 2 बार प्लेटरेट दान कर चुके हैं। सामान्य रूप से ये प्रचार-प्रसार से दूर रहते हैं, कोई पत्रकार मित्र स्वयं ही पहल कर लिखदे तो बात अलग हैं। कहते हैं दान तो ऐसा हो इस हाथ से करो तो दूसरे हाथ को पता नहीं हो। मुझे भी काफी विनय के बाद जानकारी देने को तैयार हुए। उनका तो समाज के लोगों को यही कहना हैं रक्तदान से बड़ा कोई दान नहीं हैं। बिना रुपये खर्च के किसी की जिंदगी बचाने में अपने शरीर से सहयोग हो जाए तो इस से बड़ी बात क्या हो सकती हैं।जब कि दान किया गया रक्त 24 घण्टें में फिर बन जाता हैं। इनसे प्रेरित हो कर भाई पंकज भी 55 बार रक्तदान कर चुके हैं। हमें इन दोनों भाइयों पर गर्व है रक्तदान एवं प्लाज़्मा दान में न केवल राजस्थान वरण देशवासियों के लिए प्रेरणापुंज बने। कोरोना की जंग में गर्व से देश भर में कोटा का सर ऊँचा कर देता है इनका सेवा भाव।
धीरज कहते हैं यह तो शुरुआत है, और भी ऐसे लोगों को आगे आना चाहिए जिन्हें ईश्वर ने सक्षम बनाया है, ताकि हमारा देश कोरोना से अपनी जंग को जीतने में जल्दी ही कामयाबी हासिल करे। इस पुनीत कार्य के लिए परिवार जनो का भी पूरा सहयोग है । अपने पिता श्री की प्रेरणा ,पत्नी एडवोकेट नोटेरी अनीता गुप्ता और बच्चों के सहयोग को अपना संबल मानते हैं। इन्होंने कई संस्थाओ से जुड़ कर स्वयं भी रक्तदान किया , रक्तदान शिविर लगाए और रक्तदान एक महादान का नारा देकर कोटा में जन्मदिन और धार्मिक कार्यक्रमों के दौरान आम लोगो में रक्तदान का जज़्बा पैदा किया । छात्र जीवन से ही ये समाजसेवा क्षेत्र से जुड़े रहे हैं। यह सांस्कृतिक कार्यक्रमो में भी आगे रहते हैं।इन्होंने एन. सी. सी. में रहकर भी एक अनुशासित केडेट के रूप में समाजसेवा के कई कार्य किये।
पत्रकारिता में मुखर धीरज गुप्ता तेज राजस्थान सरकार में कोटा सम्भाग से जन अभाव अभियोग निराकरण समिति में प्रभारी सदस्य भी रहे है । वह दूरसंचार समिति ,रेलवे परामर्शदात्री समिति ,पत्रकार एवं साहित्यकार कल्याण समिति के सदस्य भी रहे हैं। कोटा प्रेस क्लब को संभाला और समर्थ बनाया। मीडिया प्रबंधन में भी कुशल हैं।

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