हमें चाहने वाले मित्र

30 सितंबर 2020

कानून अंधा क्यों! आखिर कौन थी ये देवी जिसकी आंखों पर पट्टी और हाथ में है तराजू

 

कानून अंधा क्यों! आखिर कौन थी ये देवी जिसकी आंखों पर पट्टी और हाथ में है तराजू
नई दिल्ली: आप कानून को तो जानते ही होंगे, बचपन से ही हमें इसके बारे बताया जाता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि न्यायालयों में आंखों पर पट्टी बांधे और हाथ में तराजू लिए खडी एक महिला आखिर कौन है जिसे न्याय की देवी कहा जाता है, तो आइए आज हम आपको इसके बारे में बताते हैं…
क्या कहते हैं पुराण?
पौराणिक कथाओं के अनुसार न्याय की देवी की अवधारणा यूनानी देवी डिकी की कहानी पर आधारित है। कलात्मक दृष्टि से डिकी को हाथ में तराजू लिए दर्शाया जाता था। डिकी ज़्यूस की पुत्री थीं और मनुष्यों का न्याय करती थीं। वैदिक संस्कृति में ज्यूस को द्योस: अर्थात् प्रकाश और ज्ञान का देवता अर्थात् बृहस्पति कहा गया है। उनका रोमन पर्याय थीं जस्टिशिया देवी, जिन्हें आंखों पर पट्टी बाँधे दर्शाया जाता था।
क्या है हाथ में तराजू लेने और आंख पर पट्टी बांधने का रहस्य
न्याय को तराजू से जोड़ने का विचार इससे कहीं अधिक पुराना है। यह विचार मिस्र की पौराणिक कथाओं से निकल कर यूनानी कथाओं और वहां से ईसाई आख्यानों तक जा पहुंचा, जहां स्वर्गदूत माइकल (एक फरिश्ता) को हाथ में तराजू लिए हुए दिखाया जाता है। मान्यता ये है कि पाप से हृदय का भार बढ़ जाता है और पापी नरक में जा पहुंचता है। इसके विपरीत, पुण्य करने वाले स्वर्ग में जाते हैं। आंखों पर पट्टी यह दर्शाने के लिए थी कि ईश्वर की तरह कानून के समक्ष भी सब समान है,,
कर्मों का लेखा-जोखा रखने की न्यायिक प्रणाली कई प्राचीन समाजों में भी दिखाई देती है। इनमें भारत भी शामिल है, जहां चित्रगुप्त पुण्य और पाप का लेखा-जोखा रखते हैं। तराजू इसी का प्रतीक है।
सुप्रीम कोर्ट को भी नहीं है इनके बारे में जानकारी
दरअसल, आरटीआई कार्यकर्ता दानिश खान ने सूचनाधिकार के तहत राष्ट्रपति के सूचना अधिकारी से न्याय की देवी के बारे में जानकारी मांगी थी। लेकिन जवाब में सुप्रीम कोर्ट ने भी उक्त जानकारी होने से इंकार कर दिया। इसके बाद दानिश ने सुप्रीम कोर्ट के रजिस्ट्रार को पत्र लिख कर ‘न्याय की प्रतीक देवी’ के बारे में जानकारी मांगी।
जवाब में कहा गया कि इंसाफ का तराजू लिए, आंखों पर काली पट्टी बांधे देवी के बारे में कोई लिखित जानकारी उपलब्ध नहीं है। आरटीआई के जवाब में यह भी कहा गया कि संविधान में भी न्याय के इस प्रतीक चिह्न के बारे में कोई जानकारी दर्ज नहीं है। यह बात खुद मुख्य सूचना आयुक्त राधा कृष्ण माथुर ने वीडियो कान्फ्रेंसिंग के जरिए दानिश खान को बताई और कहा कि ऐसी किसी तरह की लिखित जानकारी नहीं है

कोई टिप्पणी नहीं:

टिप्पणी पोस्ट करें

दोस्तों, कुछ गिले-शिकवे और कुछ सुझाव भी देते जाओ. जनाब! मेरा यह ब्लॉग आप सभी भाईयों का अपना ब्लॉग है. इसमें आपका स्वागत है. इसकी गलतियों (दोषों व कमियों) को सुधारने के लिए मेहरबानी करके मुझे सुझाव दें. मैं आपका आभारी रहूँगा. अख्तर खान "अकेला" कोटा(राजस्थान)

Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...