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18 जून 2020

उनकी ज़ुबान हलक़ में जो अटकी ,है , उनका एक भी अलफ़ाज़ ,, अमिश देवगन ,,, संबंधित चैनल की इस भद्दी जुबांन के खिलाफ नहीं निकला है ,ऐसे लोगों के लिए अब तो हमें आँखे खोलना होंगे

ख्वाजा गरीब नवाज़ की खुली तोहीन के बावजूद ,भी , जो सियासी मौलवी ,सियासी मौलाना ,सियासी मुस्लिम लीडर , या सियासी दलों  के लीडर सिर्फ ,,हर साल वहां अक़ीदत की चादर पेश करने की गंदी सियासत करते है ,, उनकी ज़ुबान हलक़ में जो अटकी ,है , उनका एक भी अलफ़ाज़ ,, अमिश देवगन ,,, संबंधित चैनल की इस भद्दी जुबांन के खिलाफ नहीं निकला है ,ऐसे लोगों के लिए अब तो हमें आँखे खोलना होंगे , ऐसे लोग जो हम पर सियासत करते ,है ऐसे लोग जो वली ऐ हिन्द , के नाम की चादर पोशी के नाम पर सियासत की तिजारत करते ,है , उनकी ख़ामोशी उन्हें चाहे सरकार में ,हुकूमत में , कुर्सियां दे दे ,गाड़ियां, ड्राइवर ,बंगले दे दे , लेकिन कॉम की इज़्ज़त , आख़ेरत की इज़्ज़त से वोह कोसों से भी कोसों दूर हो गए है ,, दोस्तों ऐसे चेहरों को पहचानों जो हर साल सिर्फ , ख्वाजा गरीब नवाज़ की सियासी चादर पोशी की सियासत करते ,है और अब जब इस मौके पर ख्वाजा गरीब नवाज़ का अपमान हुआ ,उन्हें आततायी ,लुटेरा बताया गया , तो इन लोगों का  दोहरा चरित्र सामने आया ,है किसी के हलक़ से एक आवाज़ भी नहीं निकली ,ऐसे में हमे , आपको ,,थोड़े से फायदे के ,लिए एक छोटी सी कुर्सी ,एक छोटे से ओहदे के लिए , अपने निजी लालचों की लपलपाहट को अब कचरे के डब्बे में डालना होगा ,अपना स्वाभिमान ज़िंदा करना होगा ,सिर्फ साथ अल्लाह के रहो ,सिर्फ साथ उसी के रहो जो ,मुश्किल घडी में ,,इधर उधर , दांये बांये नहीं ,रहे खुल कर कंधे से कंधा मिलाकर आपके साथ ,,खड़ा मिले ,वरना आपके लिए कोई भी हो ,चोर चोर सब मोसेरे भाई है ,, मोत बरहक़ ,है ,, इज़्ज़त ज़िल्ल्त अल्लाह के हाथ में है , जो इस मौके पर , ख्वाजा गरीब नवाज़ के इस मान मर्दन के अल्फ़ाज़ों के खिलाफ हमारे साथ खड़े दिखे ,है जिन्होंने अमिश देवगन के खिलाफ क़ानूनी हरकत की ,है या उनकी  जुबान हलक़ में नहीं अटकी ,है उन्हें सेल्यूट ,,निहायत अदब विनम्रता के साथ उनका सम्मान , वर्ना जो लोग गिरगिट रंग वाले ,है , जो लोग दोहरे चरित्र वाले ,है जो लोग आपको हमे टिश्यू पेपर समझने , वाले ,है जो लोग ओहदों की सियासत के नाम पर हमारे  अपने लोगों से , हमारे खिलाफ ही हमारे अपनों से गद्दारी करवाने वाले है ,,ऐसे लोगों से हमे क्या लेना ,ऐसे लोगों से हमे क्या देना ,ख्वाजा गरीब नवाज़ , वली ऐ हिन्द , के अपमान के खिलाफ संघर्ष के मामले में ,सच बोलने पर ,केसा डर केसा खौफ ,, इस मामले में कोई भी नुकसान होता हो तो हो जाए ,,यह आयना है जनाब , सियासत नहीं ,इसमें वही दिखेगा जो सच्ची , जो नंगी तुम्हारी तस्वीर है ,, अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

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