पत्रकार होना ही नहीं ,पत्रकार दिखना भी , चाहिए ,,पत्रकार के लिए खबर को
रोचक ,बनाने के लिए अल्फ़ाज़ और घटनाक्रम को अल्फ़ाज़ों में पिरोना भी आना ही
चाहिए ,पत्रकार को निष्पक्ष ,निर्भीक ,,विज्ञापन निति के आगे भटकने वाला
नहीं होना चाहिए ,,यही सोच मेरे बढे भाई ,ओरिजनल ,,ओरिजनल मतलब जो देखा ,
जो सोचा ,जो सच रहा बस वही लिखा ,,यही विश्वसनीयता मुल्कराज अरोड़ा का इस
पत्रकारिता के युग के मुल्क में उन्हें राजा बनाकर ,,पत्रकारिता की दुनिया
का मुल्कराज बनाते है ,अलग थलग शख्सियत बनाती है ,,आपात काल के वक़्त की
लिखा छिपी वाली पत्रकारिता हो ,सेंसरशिप हो ,दंगे फसाद में कर्फ्यू के
हालात हों ,वर्तमान में कोरोना माहामारी के हालात हों ,हर युग में ,भाई
मुल्कराज की पत्रकारिता का अंदाज़ विश्वसनीय रहा ,,लोकप्रिय अविस्मरणीय है
,,, एक क़लम ,,जिसके इशारे पर ,,अलफ़ाज़ थिरकते है ,,,कुछ ,,कोमा ,,कुछ
फुलिस्टॉप ,,कुछ घटनाएं ,,कुछ अलफ़ाज़ मिलते है ,,और एक लज़ीज़ व्यंजन भरा लेखन
,,जो आँखों के ज़रिये दिमाग में जाकर ,,दिल पर लगता है ,, इन्हे पढ़कर दिल
से आह ,,सिर्फ ,वाह या फिर आह निकलती है ,,जी हाँ दोस्तों ,,में बात कर रहा
हूँ ,,एक खामोश पत्रकार ,,मूल ओरिजनल पत्रकार ,,क़लम के धनी,,, भाई मुलकराज
अरोड़ा की ,,यह शख्सियत लोगो के लिए ,,कहने को तो विशिष्ठ है ,,लेकिन यकीन
मानिए ,यह ,सभी के दिलो के करीब है ,, अनूठे है ,,नायाब है ,,,अपने स्व
अनुशासन ,,अपने स्वाभिमान के साथ , ,,शेर की तरह,,, ज़िंदगी जीने वाले ,,भाई
मुलकराज अरोड़ा ,,,लोगो से अपनी शर्तों पर मिलते है ,,अपनी सिर्फ ,,अपनी
बात ,,,न तेरी न मेरी ,,न लफ़्फ़ाज़ी , न किसी की बुराई ,,न तू कहो ,,न तू
कहलवऔ ,सिर्फ तुम्हारी और हमारी बात ,,,सिर्फ आप कहो ,,आप कहलवाओ ,,,चेहरे
से सख्त ,,दिखने वाले ,,,भाई मुलकराज अरोड़ा,, दयालु भी है और अंदर से
विनम्र भी है ,,खुशमिजाज़ भी है ,,लेकिन लेखन के धनी,, ऐसे के शायद ही
,,उनके मुक़ाबिल ,,अक्षरों को,,, अपने इशारे पर नचाकर ,,,किसी भी घटना को
,,,लज़ीज़ ,,लज़्ज़त दार ,,,बनाने का हुनर,,, किसी और के पास हो ,,मुलकराज
अरोड़ा ,,,,,बहतरीन स्टेनो ,,बेहतरीन स्पीड से टाइप करने वाले हुनर मंद है
,,और इसीलिए यह घटना को दिमाग में रखते है ,,कागज़ लिखते नहीं है ,,सीधे
इनका टाइपराइटर जो अब कम्प्यूटर का रूप ले चुका है ,,अल्फाज़ो को उगलता है
और घटना बेहद दिलचस्प कहानी के रूप में हमारे सामने आ जाती है ,,उस पर जब
यह गागर में सागर भरने वाला ,,लुभावना ,,लगाकर लोगो को परोसते है,, तो सच
,,यह घटना लोगो के लिए अविस्मरणीय ,,यादगार सी बन जाती है ,,,,,,राष्ट्रदूत
,,पुराना ,,राष्ट्रदूत जो दैनिक के रूप में सिर्फ एक अख़बार ही प्रकाशित
होता था ,, उस राष्ट्रदूत अख़बार में मुलकराज अरोड़ा प्रबंधक सम्पादक भी रहे
,,कलमकार पत्रकार भी रहे हैं ,,,फिर मुलकराज अरोड़ा ,,कोटा रिपोर्टर के
जांबाज़ पत्रकार बने ,,फिर अधिकार ,,देश की धरती ,,आपका साक्षी के रिपोर्टर
बने ,,मुलकराज अरोड़ा की लेखनी की क्षमता को देखकर ,,कई बढे अख़बार के
सम्पादक ,,मालिकों ने भी,,, इन्हे अपने साथ काम करने के लिए प्रस्ताव दिए
,,लेकिन अपनी शर्तों पर,,, क़लम को सिर्फ,,, अपने हुनर से निष्पक्ष
निर्भीकता से चलाकर,,, लोगो तक पहुंचाने का शोक ,,,रखने वाले मुलकराज अरोड़ा
व्यवसायिक नहीं बने सिर्फ और सर्फ ,,पत्रकार ही रहे ,,इन्होने पत्रकारिता
को,,, पेट पालने का ज़रिया ,,,कभी नहीं बनाया ,,लोगो तक घटनाएं,,, दिलचस्प
अंदाज़ में,,, कैसे पहुंचे,,, बस इसी में मुलकराज अरोड़ा ने ,,,अपनी
पत्रकारिता के हुनर को ,,,समर्पित किया ,,इनकी लेखनी पर ,,किसी सम्पादक की
विज्ञापन पॉलिसी सेंसरशिप के तहत ,,कैंची चले ,,यह इन्हे ,,कतई मंज़ूर नहीं
और ,,,इसीलिए सिर्फ और सिर्फ,,, अपनी शर्तों पर,,, यह पत्रकारिता करते रहे
,,वर्तमान में ,, काफी समझाइश के बाद ,,लोगो के चाहने पर ,,मुलकराज अरोड़ा
ने ,,,खुद के सम्पादक प्रबंधन में ,,एक रोमांचक अख़बार,,, कोटा रेंज
रिपोर्टर ,, का प्रकाशन शुरू किया है ,, जिसकी लेखनी ,,जिसके शीर्षक और
सजावट,,,, खुद आकर्षक होने से,,यह अख़बार पाठको की ज़रूरत बनता जा रहा है
,,,,,,,कोटा में अपराध की खबरें ,,अपराध की खबरों का ,,,फोलोअप
,,हार्डकोर,,सफेदपोश ,,अपराधियों की ज़मानत ,,उनके फैसले के मामले में अछूती
थी ,,उपेक्षित थी ,,कोटा में दैनिक जननायक ,,दैनिक राष्ट्रदूत ,,दैनिक
नवज्योति ,,अधिकार ,, देश की धरती जैसे अख़बार थे ,,राजस्थान पत्रिका
,,दैनिक भास्कर,, जब कोटा में प्रकाशन होने के लिए आये,,, तो सर्वप्रथम
,,राजस्थान पत्रिका के संस्थापक ,,पत्रकारिता के भीष्मपितामह ,,,कपूरचंद
कुलीश ने ,,,मुझे भी पत्रकारिता के लिए,,, पत्रिका में काम करने का ऑफर
दिया था ,,में जननायक अख़बार का ,,,हॉल सोल,,, सम्पादकीय के फैसले लेने वाला
था ,,तब उन्होंने,,, मुझ से मेरे इंकार के बाद कहा था ,,के कोटा में तुम
और एक मुलकराज अरोड़ा ,,,अजीब है ,,जो अपनी क़लम पर,,, किसी की कैंची,,,
बर्दाश्त नहीं करपांने के कारण ,,पत्रकारिता के महासमुंद्र से दूर होते जा
रहे हो ,,उस वक़्त मेने आदरणीय कुलीश जी से,,, हाथ जोड़कर निवेदन किया था,,,
के वर्तमान में हम लोग अदालतों ,,अपराध से जुडी खबरों से ,,,अपने पाठको को
खबरदार करते है ,,जो अभी ,,इन बढे समाचार पत्रों में ,,,नहीं हो पा रहा
है,,, यह आमलोगों की पसंद और उनकी जनचेतना से दूर है ,,तब कुलीश साहब ने
साफ़ कहा था ,,के पाठक वर्ग को अपराध और अदालतों के निर्णयों की खबरों से
कोई वास्ता नहीं है,,, इसीलिए हम इस मामले में खबरों को परोसने को लेकर,,,
सावधानी बरतते है ,,लेकिन एक वर्ष बाद ,,,जब ,,राजस्थान पत्रिका ,,दैनिक
भास्कर ,,नवज्योति सहित ,,,सभी अखबारों को ,,अदालत और क्राइम से संबंधित
,,,अलग बीट बनाकर ,,,रिपोर्टर नियुक्त करने पर,,, मजबूर होना पढ़ा ,,तो
जयपुर में ,,,वेदप्रताप वैदिक के साथ ,,पत्रकारिता की डिग्री ,,,वितरण
समारोह में ,,,जब में डिग्री लेने गया ,,,तब मेने आदरणीय कुलिश जी को
,,उनकी कही बात ,,,याद दिलाते हुए कहा था ,,के मुलकराज अरोड़ा और हमारी
खबरों की स्टाइल ,,,आपने भी अपने अख़बार की बना ली है ,,उन्होंने मुसकुरा कर
कहा था ,,हम पाठको की ज़रूरत के गुलाम है ,,पाठक यह सब जानकारिया चाहता है
,,इसलिए हमारी यह ज़िम्मेदारी हमे मानने से इंकार नहीं है ,,उन्होंने उस
वक़्त जब डी डी वन चैनल था ,,,तब ही संकेत दिए थे के ,आनेवाले कल में अगर
इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का जमावड़ा हुआ तो इन खबरों के प्रति देखने वालो का
आकर्षण होगा ,,,,,,,और कुलीश सर की भविष्यवाणी दूरंदेशी आज सही साबित हुई
है ,,खेर में बात कर रहा हूँ भाई मुलकराज अरोड़ा की पत्रकारिता की शैली
,,उनकी लाइफ स्टाइल ,,खबरों को चयनित करना ,,खबरों को खोजना ,,फिर कुछ
खबरें एक्सक्लूज़िव के रूप में अपने पाठको के लिए आकर्षक बनाकर पेश करना
इनका अनूठा ,,लाजवाब ,,अनुकरणीय अंदाज़ है ,,बातों ही बातों में इन्हे खबरें
निकालना आता है ,,एक वक़्त जब पुलिस से संबंधित और थानों में घटने वाले
अपराधों पर अघोषित सेंसर सा लगा था ,,तब सिर्फ मुल्क राज अरोड़ा ही ऐसे थे
जिनके पास ,,अपराध की खबरों का ज़खीरा होता था ,,और पुलिस अधीक्षक रोज़ सोचते
थे के ऐसी सावधानी के बाद भी सम्पूर्ण खबर अरोड़ा के अख़बार में कैसे आती है
,,यही इनका हुनर ,,इनकी खोजपूर्ण खबर चयन का सलीक़ा था, जिसका लोहा एक छोटे
से पाठक से लेकर, बढे से बढ़ा, बुद्धिजीवी अधिकारी भी मानता रहा है ,,,में
जानता हूँ, मेरे बढे भाई मुलकराज अरोड़ा मेरे इन अल्फ़ाज़ों से नाराज़ होंगे
,,उन्होंने मुझे खुद का फोटो तक नहीं लेने दिया ,,लेकिन में भी मुलकराज
अरोड़ा का छोटा भाई हूँ ,, मेने भी उनसे सीना तानकर ,,मुस्कुराते हुए कहा था
,,में तो मेरे अल्फ़ाज़ों से गुस्ताखी करुगा ,,फिर चाहे आप इस जुर्म में
मुझे फांसी पर चढ़ा देना ,,,करीब चार दशक से पत्रकारिता के अनुभव से जुड़े
,,भाई मुलकराज अरोड़ा ,,नाराज़ हो तो हों ,,लेकिन उनके लिए ,उनकी शख्सियत के
लिए कुछ छोटे से अलफ़ाज़ लिखते हुए में खुद को गौरवान्वित महसूस कर रहा हूँ
,,एक कपड़े का थैला ,,पहले हीरो हौंडा पर था ,,अब स्कूटर पर है, इस थैले में
,,मछलियों के लिए आटा ,,कबूतरों के लिए चुग्गा ,,गांय के लिए रोटी ,,और
कुत्तो के लिए बिस्किट ब्रेड होते है ,,,मुलकराज अरोड़ा की खबरों से पुलिस
ने कई अंधी गुत्थियां भी खोलकर, हार्डकोर अपराधियों को जेल का रास्ता
दिखाया है ,,ऐसे भाई मुलकराज अरोड़ा को सेल्यूट ,,सलाम ,,,,,अख्तर खान अकेला
कोटा राजस्थान

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