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08 अक्तूबर 2019

एक रावण जो महापंडित ,,महाज्ञानी

एक रावण जो महापंडित ,,महाज्ञानी
एक रावण जो महापंडित ,,महाज्ञानी ,,अपने धर्म से भटक कर ,,एक महिला का अपरहर्ता बनता है ,,उस महिला को वोह छूता भी नहीं ,,लेकिन इस बुराई इस ज़िद के लिए वोह अपना घर ,परिवार ,,राजपाठ ,,यहां तक ,खुद को भी क़ुर्बान कर देता है ,,इस लीला के पीछे ,,,जो भी है एक महाशक्ति ,एक ईश्वरीय शक्ति ही है ,,बुराई के जो साथ था वोह बेमौत मारा गया ,,,बुराई के खिलाफ जो खड़ा हुआ ,,चाहे वोह अकेला ही था ,लेकिन ,,वोह विभीषण आज भी ज़िंदा है ,उसे राजपाठ भी मिला ,,लेकिन भाई से गद्दारी के कारण उसका इतिहास उसके बाद खत्म हुआ है ,,खेर यह लीला है ,लेकिन एक सीख भी है ,,हम क्या सीखते है ,,हर साल सरकारी ,,गैर सरकारी खर्च पर इस रावण वध के नाम पर धार्मिकता कम ,,सियासत ज़्यादा करें ,,बुराई के इस खात्मे में बुराई ज़िंदा रखे ,,सभी जानते है ,,सरकारी रावणो में ,,उनके टेंडरो में ,,क्या घपले घोटाले होते है ,यह सही है ,,हिन्दुस्तान के हर रावण का पुतला बनाने वाला मुसलमान ही होता है ,लेकिन उस रावण बनाने वाले कारीगर से ज़रा पूंछो ,,उसे रूपये कितने मिलते ही ,,उसे इस टेंडर को हांसिल करने में कितनी जुगत ,,कितनी भेंट पूजा करना पढ़ती ,है ,,फिर जिस रावण का वध ,,राम ने क्या हो ,,एक बुराई का वध ,,अच्छाई के रचियता ने क्या हो ,,उसे दोहराने के लिए हम ,सियासत के नाम पर इस बुराई के संकेत को मारने ,जलाने के लिए ,ऐसे शख्स को राम ,,बनाकर पेश करते ही जिसका अतीत ,,इस बुराई पर अच्छाई की जीत के संदेश को धुंधला कर देता है ,,हम कहते है ,,अख़बार लिखते है ,,न्यूज़ चैनल चिल्लाते है ,,गुरु अपने बच्चो को ज्ञान देते है ,,माता पिता बच्चो को समझाते है ,रावण वध ,बुराई पर अच्छाई की जीत का जश्न है ,,,रावण तो हर साल मरता है ,,लेकिन उसे बनाने ,,उसे स्थापित करने ,,उसकी मोत पर जश्न मनाने के वक़्त जो मेला ,जो दशहरा भरने का सिस्टम ,,जो खर्च होता है ,उसमे क्या रावण नहीं होता ,,,रावण को मारने उसे जलाने के लिए जिस शख्स के हाथ में कमान होती है ,उसमे क्या रावण नहीं होता ,,तो फिर रावण क्यों मरेगा ,,किसलिए मरेगा ,जब रावण आपके दिलों में ,दिमागों में ,घर घर ,,दफ्तरों में भ्रस्टाचार ,,नफरत ,,सियासत ,,बुरे व्यक्ति से रावण की हत्या करवाने का प्रतीकात्मक संदेश हो तो फिर रावण तो रावण है वोह तो यूँ ही ज़िंदा रहेगा ,,इसे सदियों तक मारने की हम नौटंकी भी कर ले तो क्या ,,अगर हमे इसे मारना है तो ,अपने अंदर के रावण को मारे ,,इसके पुतले में ज़रा भी भ्र्ष्टाचार न हो ,,इसके मारने वाला पूरा राम नहीं तो राम की तरह चरित्रवान तो हो ,,इसकी मोत पर जश्न मनाने के मेले दशहरे में ज़रा भी भ्रष्टाचार न हो तभी हम इसे मार सकेंगे वरना यह रस्म हम यूँ ही निभाए जायेंगे ,,और रावण ,उसके परिजन है के यूँ ही हर साल ,,,बुराई बनकर हमे तबाह करते जाएंगे ,,,अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

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