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01 अगस्त 2019

तलाक़ क़ानून जम्मू कश्मीर के अलावा पूरे भारत में लागू है

कुछ लोग ज़िद्दी होते है ,ज़िद में अच्छा बुरा ,दूरगामी परिणाम नहीं देखते ,,अपनी ज़िद पूरी करने के लिए वोह देश के अरबों रूपये खर्च कर देते है , लेकिन फिर भी आधा अधूरा क़ानून बनाकर खुश होते ,है ,,हमारे देश में ट्रिपल तलाक़ का उदाहरण सामने है ,तीन साल की मशक़्क़त ,,सिर्फ क़ानून बनाने की ज़िद ,पहले सुप्रीमकोर्ट की जनहित याचिकाओं में ,,याचिकाओं में करोड़ों करोडो रूपये के सरकारी वकीलों पर खर्च ,उनके टी ऐ डी ऐ पर खर्च ,फिर तलाक़ का बिल बनवाने के लिए अतिरिक्त फीस ,फिर अध्यादेश की ज़िद पर कर्मचारियों ,अधिकारीयों ,राष्ट्रपति महोदय का वक़्त बर्बाद ,फिर दुबारा अध्यादेश यही बर्बादी ,,,इस बिल पर अलग अलग वक़्त में बहस के नाम पर ,लोकसभा ,,राजयसभा के कई घंटे बर्बाद ,, मीडिया मैनेजमेंट पर खर्च ,,राज्यों में पार्टियों ,मुस्लिम प्रतिनिधियों से सकारात्मक टिप्पणियों पर खर्च ,वीर लोकसभा ,राज्यसभा में बार बार बहस पर खर्च ,इन दोनों सदनों का बेशक़ीमती वक़्त इस मुद्दे पर बर्बाद ,,भारत के अर्थशास्त्रियों का अगर हिसाब हो तो इस छोटे से मामले की ज़िद पर चाहे दूसरे मदद ,भूख ,,गरीबी ,,,रोटी ,रोज़गार ,,सहारा जैसी संस्थाओं द्वारा आम लोगों के रूपये खाकर सुकून से बैठ जाने की घटनाये दबा दी गयी हो ,लेकिन नतीजा ढाक के वही तीन ,पात ,,अध्यादेश में कुछ और क़ानून था ,जो बिल पास हुआ उसमे बहुत कुछ बदल दिया गया ,,पहले अध्यादेश में तलाक़ ऐ बाईंन तीन बार एक साथ तलाक़ आपराधिक मामला था ,अब इसके अलावा अतिरिक्त शब्द जोड़कर सभी तरह के इरोवोकेबल तलाक़ शब्द जोड़ दिया गया है ,पहले यह अपराध खुले रूप में अजमानतीय अपराध अंकित किया गया था ,अब सिर्फ संज्ञेय अपराध लिखा गया है ,मजिस्ट्रेट को इच्छित समझौता करवाने का अधिकार दिया गया है ,,तीन साल तक की सजा का प्रावधान है ,यानी सी आर पी सी की अनुसूची में दूसरे क़ानूनों में सात साल तक की सजा के प्रावधान वाले आपराधिक मामले जमानतीय अपराध है ,फिर लिख दिया गया के मजिस्ट्रेट ऐसे मामलों में ज़मानत के पूर्व पीड़िता को सुनेगा ,,,अब अगर बोलकर ट्रिपल तलाक़ दिया तो मौखिक गवाह के बाद अपराधी अदालत में मुकर जाएगा ,,के प्रताड़ित झूंठ बोल रही है ,तो इन्साफ कैसे मिलेगा ,खेर करोडो करोड़ ,अरब रूपये फ़िज़ूल खर्च कर ,,लोकसभा ,राज्यसभा सहित सियासी पार्टियों के क़ीमती वक़्त को खर्च करने और मीडिया के भोंपुओं को भों भों करने के बाद यह नतीजा निकाला है ,जो अभी अधिसूचित नहीं हुआ है ,,लेकिन इस ज़िद के पीछे देश का क़ीमती वक़्त ,रुपया बर्बाद होने के अलावा संस्कृति ,विरासत ,,ईमानदारी भी तबाह बर्बाद हुई है ,राज्य सभा में इस बिल को पारित करवाने के लिए बेहिसाब लालच देकर सदस्य को इस्तीफा दिलवाना पढ़ा ,,पार्टी से इस्तीफा देकर भाजपा में शामिल करवाने की घोषणा करवाना पढ़ी ,,,कई समझौते करना पढ़े ,फिर भी देश का अभिन्न अंग कश्मीर है का नारा देने वाली इस सरकार का बनाया गया सिर्फ एक मात्र क़ानून इतने सारे फ़िज़ूल खर्चों के बाद भी ,जम्मू कश्मीर के अलावा पुरे भारत में लागू होना लिखा गया है ,यानी कश्मीर को इस बिल के माध्यम से फिर भारत सरकार ने अलग दर्शाया गया है ,,यानी कोई पति पत्नी कश्मीर घूमने गए और वहां जाकर पति ने पत्नी को ट्रिपल तलाक़ दे दिया तो फिर पति के खिलाफ कोई भी क़ानूनी कार्यवाही नहीं हो सकती ,क्योंकि ट्रिपल तलाक़ क़ानून जम्मू कश्मीर के अलावा पूरे भारत में लागू है ,और क़ानून जो बनाया है उसमे जहाँ तलाक़ दिया गया है ,,जहाँ घटना हुई है उसका क्षेत्रीय मजिस्ट्रेट को अधिकृत किया गया है ,तो जनाब ऐसे क़ानून को सिर्फ ज़िद ,सिर्फ ज़िद ,वक़्त की बर्बादी ,रूपये की बर्बादी ही कहा जाएगा ,,अपने गिरेहबान में झांके बिना ,अपने गिरेहबान का मेल गंदगी साफ़ किये बिना ,दूसरों के गिरेहबान पर हाथ डालने की ज़िद है ,फिर क़ानून बना है ,तो अदालतों की स्थिति सभी को पता यही ,अदालतों को समयबद्ध मुक़दमों के निस्तारण की सीमा निर्धारित नहीं ,विशिष्ठ ,न्यायालय ,विशिष्ठ लोकअभियोजक की घोषणा नहीं ,क़ानून बना भी और फायदा भी नहीं ,,,यह सर दिवालियापन ही है ,क्योंकि कोटा में ट्रिपल तलाक़ का एक मामला गिरफ्तारी के बाद एक साल होने को आया लेकिन अध्यायदेश के आदेश अनुसार मुक़दमों की संख्या ,अभिययुक्त की आँख मिचोली व्यवस्था के तहत अभी तक चार्ज भी नहीं लग सका है और वोह ज़मानत पर आज़ाद है ,प्रताड़ित परेशांन है कोई खर्च नहीं ,,कोई सज़ा नहीं एक साल के लगभग होने के बाद भी ,तो ऐसा क़ानून जिसमे मुक़दमे के निस्तारण की समय सीमा नहीं हो ,विशिष्ठ जिला न्यायालय ,विशिष्ठ थाने नहीं हो ,विशिष्ठ लोक अभियोजक नहीं हो ,,बनाकर भूल जाना ,ज़िद पूरी करना और देश की लोकसभा ,राज्यसभा ,सरकारी अधिकारीयों ,मीडिया ,महामहीम ,राजनितिक दलों का वक़्त बर्बाद करने ,अरबों रूपये बर्बाद करने की प्रर्किया से ज़्यादा कुछ भी तो नहीं ,,कुछ भी तो नहीं ,,,,,अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

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