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23 जुलाई 2018

सरकार ने राजस्व अपील अधिकारी का स्थांनांतरण तो कर दिया ,लेकिन ऐ सी एम ,एस डी एम ,,आज भी यथावत जमे बैठे ,है

कोटा की राजस्व अदालतों में ,,राजस्व अपील अधिकारी ,ऐ सी एम मुख्यालय ,एस डी एम ,पर मुक़दमो के निस्तारण में अभिभाषक परिषद द्वारा खुलेआम भ्रष्टाचार की शिकायतों के बाद राजस्थान सरकार ने राजस्व अपील अधिकारी का स्थांनांतरण तो कर दिया ,लेकिन ऐ सी एम ,एस डी एम ,,आज भी यथावत जमे बैठे ,है ,,कोटा अभिभाषक परिषद में राजस्व वकीलों ने आज राजस्व अपील अधिकारी के स्थानांतरण पर लालचौक में पठाखे छोड़े ,,,अभिभाषक परिषद के एस डी एम ,,,ऐ सी एम ,,राजस्व कोर्ट का का बहिष्कार पूर्ववत जारी रहेगा ,,विदित रहे के काफी समय से अभिभाषक परिषद की निर्वाचित कार्यकारिणी को उक्त न्यायालयों में भ्रष्टाचार फैलाकर ,,मुक़दमों के निस्तारण की कई शिकायतें थी ,,खुद अभिभाषक परिषद अध्यक्ष मनोज पूरी ,उपाध्यक्ष अतीश सक्सेना ,, महासचिव जितेंद्र पाठक ने कई बार व्यक्तिगत रूप चेतावनी देकर उन्हें ईमानदारी से ,निष्पक्ष कार्य करने की सलाह दी थी ,,लेकिन लगातार मिल रही शिकायतों के बाद ,,वकीलों को हड़ताल करना पढ़ी ,और उक्त तीनो अदालतों का इनके स्थानांतरण होने तक ,बहिष्कार का फैसला लिया गया आंदोलन के दौरान राजस्व न्यायलय मे भ्रष्टाचार के बैनर टाँके गए ,,स्थानीय नेताओं के वरदहस्त उक्त अधिकारियों में से एक राजस्व अपील अधिकारी का स्थानांतरण तो हो गया ,लेकिन एस डी एम और ऐ सी एम को स्थानांतरण की जगह ,,शायद अभिभाषक परिषद नेतृत्व से मांडोली की सलाह दी गयी ,,इस मामले में प्रयासकर्ता अधिकारी को फोन पर पदाधिकारी ने खरी खोटी भी सुनाई है ,,राजस्व मामलों के निस्तारण में खुले आरोपों के बाद भी सरकार ने कोई क़दम नहीं उठाया है ,जबकि जिलाकलेक्टर को खुद एक समिति बनाकर ,ऐसे अधिकारियो के छह महीने की निस्तारित सभी पत्रावलियों का विधि विशेषज्ञ टीम से जाँच करवाकर ,,विधिरूध किये गये फैसलों में कार्यवाही को लेकर भ्रष्टाचार निरोधक पुलिस में मुक़दमा दर्ज करवाना चाहिए और ,,फैसलों में जो भी दलाल बीच में हो उन्हें भी दंडित करवाना चाहिए ,,खुद मुख्यमंत्री को इस तरह के गंभीर आरोपों पर कठोर क़दम उठाना चाहिए ,,लेकिन स्थानीय नेताओं के वरदहस्त उक्त अधिकारी कई सामाजिक संस्थाओ से जुड़कर आम नागरिक की तरह से उनमे शामिल है ,और इन रिश्तों का ही उन्हें फायदा मिलने से अभी तक ऐसे अधिकारियो के खिलाफ कोई प्रशासनिक स्तर पर जांच आयोग बिठाने की कार्यवाही अमल में नहीं लायी गयी है ,न ही ऐसे आरोपित अधिकारियो को उनके पद से जांच होने तक हटाया गया है ,,एक तरफ इन अधिकारियो की कोर्ट का सम्पूर्ण बहिष्कार है दूसरी तरफ यह लोग बिना किसी कामकाज के अदालती कामकाज में जुटे है ,सरकार को ऐसे गंभीर मुद्दों पर तत्काल क़दम उठाकर पुरानी सभी निस्तारित पत्रावलियों के फैसलों की निष्पक्षता ,विधिक विश्वसनीयता की जांच अभिभाषक परिषद के अध्यक्ष वरिष्ठ राजस्व विधि विशेषज्ञ ,,जांच अधिकारियो द्वारा समयबद्ध कार्य्रकम तय कर करवाना चाहिए ,ताकि पत्रावलियों में छुपे भ्रष्टाचार की पोल खुल सके ,और अगर भ्रष्टाचार ,,अनियमितता साबित हो तो आरोपी अधिकारियो को क्लीन चिट मिल सके ,क्या राजस्थान सरकार भ्रष्टाचार के प्रमाणित आरोपियों के खिलाफ ऐसी जांच करवाने को तैयार है ,या फिर वोह भी इस मामले में अधिकारीयों की समर्थक होकर ,, उनकी ,,उनके कारनामों की मददगार है ,स्थानीय जनप्रतिनिधि जिनकी डिज़ायरों ,पर यह अधिकारी कोटा में उक्त पदों पर टिके हुए ,,,है ,,खुद जिलाकलेक्टर भी संदेह के घेरे में निष्पक्ष कार्यवाही नहीं करवा पाने से आ जाते है ,अभिभाषक परिषद के अध्यक्ष मनोजपुरी इस मामले में गंभीर भी है और सख्त भी ,,उन्होंने साफ़ कहा है ,,राजस्व मामलों के निस्तारण में भ्रष्टाचार क़तई बर्दाश्त नहीं होगा ,भ्रष्टाचार के खिलाफ यह लड़ाई जारी रहेगी ,,अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

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