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30 मई 2018

दोस्तों मुझे माफ़ करना ,आज हिंदी पत्रकारिता दिवस था ,में किसी पत्रकार साथी को मुबारकबाद भी नहीं दे सका

दोस्तों मुझे माफ़ करना ,आज हिंदी पत्रकारिता दिवस था ,में किसी पत्रकार साथी को मुबारकबाद भी नहीं दे सका ,किसे देता ,और क्यों देता ,,हिंदी पत्रकारिता के लिए वर्तमान हालातों में शर्मिंदगी के सिवा चल क्या रहा है ,विज्ञापन ,सुविधाएं ,,व्यवस्थाएं ,प्रेसकॉन्फ्रेंस की गिफ्ट ,महत्वपूर्ण यात्राएं ,चुनावी पैकेज ,पेड़ न्यूज़ ,,सच को छुपाना ,झूंठ को दिखाना यही सब हो रहा है इन दिनों ,,कम्पोज़ होकर ट्रेडिल पर छपने वाले अख़बार ,,रेडियो की खबरों से छपने वाले अख़बार ,,टेलीग्राम से दूरदराज़ की आने वाली खबरे ,टेलीप्रिंटर से खबरे प्रकाशित करने की परम्परा ,कर्फ्यू पास लेकर ,युद्ध रणनीति की रिपोर्टिंग ,,,ब्लॉक बनवाकर फोटो छापने की तकनीक से लेकर ,कलर्ड अख़बार ,,मल्टी कलर ,,मशोनो से छपने वाले धुआंधार अख़बारों का हाल मेने खुद व्यक्तिगत व्यवहारिक रूप से देखा है ,रिपोर्टिंग के उतार चढ़ाव ,रिपोर्टर्स के लेखन में बदलाव ,,प्रकाशन की व्यवस्था के तहत मेने देखा ,,देश के मोदी राज में ,हिंदी पत्रकारिता की नैतिकता पर सर्जिकल स्ट्राइक हुआ है ,अख़बार पम्पलेट बन गए ,,टी वी पत्रकार प्रचारक भोंपू बन गए ,किसी अख़बार वाले की हिम्मत नहीं के एक प्रधानमंत्री से एक अन्ना हज़ारे ,से ,,एक बाबा रामदेव से लाइव ज्वलंत सवालो ,वायदों ,जनता के घोषणा वायदों पर एक लाइव साक्षात्कार कर ,ले बस भाषण की रिपोर्टिंग ,ट्वीट की रिपोर्टिंग ,,अजीब बात है एक वक़्त था ,राजीव गाँधी खुद अपने हस्तलेख से सवालों का जवाब पत्र साक्षात्कार के रूप में भेजा करते थे और उनके प्रधानमंत्री कार्यकाल में राजीव गांधी का पहला पत्र साक्षात्कार छापने का अवसर मुझे मिला ,पार्टी विचारधाराओं के अख़बार है ,मेगज़ीने है ,,चेनल्स है ,,विज्ञापन खबरों की दिशा बदल रहे है ,राष्ट्र हित के ,जनहित के मुद्दे उठाने की जगह सिर्फ पार्टियों का प्रचार ,पार्टियों की आलोचना एक मात्र हिंदी पत्रकारिता में देखने को मिल रहा है ,रविश कुमार उनके चैनल को घर बैठा दिया गया है ,रजत शर्मा जिनकी कभी गर्माहट थी उन्हें पूर्व विचारधारा ,पदम् श्री की रिश्वत के साथ प्रवक्ता पत्रकार बना दिया गया है ,,किसकी बात करे किस्से बात करे ,लेकिन में ऐसे माहौल में भी मेरे कोटा के कुछ साथियों ,,धीरेन्द्र राहुल ,,मनोहर पारीक ,,विजय नारायण सक्सेना ,जय नारायण सक्सेना ,मरहूम असलम शेर खान ,,क़य्यूम अली ,सलीम खिलजी ,जग्गू भाई धाकड़ ,,आशीष जैन ,,जयप्रकाश सिंह ,,संजय शर्मा ,धीरज तेज ,,दादा मदन मदीर ,,स्वर्गीय भंवर शर्मा अटल ,स्वर्गीय सुनील सिंह ,,विजय माथुर ,,स्वर्गीय वीरेंद्र सिंह बग्गा ,दिलीप शाह मधुप ,,स्वर्गीय रामचरण सितारा ,,स्वर्गीय गजेंद्र सिंह सोलंकी ,, स्वर्गीय पंडित रामानंद शर्मा ,,महेंद्र नाथ चतुर्वेदी ,, मामा रूपनारायण पारीक ,,,,सुबोध जैन ,,भंवर शर्मा अटल ,बाबूजी हुकम चंद जैन ,आदरणीय गयाप्रसाद बंसल , ओम कटारा ,,डॉक्टर प्रभात कुमार सिंघल ,,स्वर्गीय सीताशरण देवलिया ,ओम नारायण सक्सेना ,,रजत खन्ना ,मुल्कराज अरोरा ,,हरिमोहन शर्मा ,,शम्भू लाड़पुरी ,,हिमांशु ,,के के शर्मा ,मरहूम सालार एम खान ,,डॉक्टर प्रभात कुमार सिंघल ,,स्वर्गीय मास्टर श्यामनारायण सक्सेना ,चंद्र शेखर त्रिशूल ,,अनिल भारद्वाज ,,ईश मधु तलवार ,सहित कुछ ऐसे नाम है जिनको में मुबारकबाद देना चाहता हूँ ,के हर हाल में इन लोगों ने विकट परिस्थितियों में भी क्षणिक रूप से ही सही लेकिन हिंदी पत्रकारिता के स्वाभिमान ,सम्मान को ज़िंदा रखा है ,और भी कई ऐसे नाम है जिनकी कार्यशैली मेने नहीं देखी जो आज भी जीवंत पत्रकारिता का उदाहरण ,है ज़िंदा पत्रकार है ,कुछ पत्रकार तो ऐसे स्वाभिमानी है के वोह किसी बिकाऊ ,पम्पलेट मालिक के यहाँ कार्यरत है लेकिन फिर भी अपने स्वाभिमान के तहत मौक़ा लगते है ओरिजनल हिंदी पत्रकारिता के स्वाभिमान को जीवित रखते हुए ,ज़िंदा खबर प्रकाशित कर वाहवाही लूट लेते है ,हिंदी पत्रकारिता को ज़िंदा रखने वाले ,,हिंदी पत्रकारिता के स्वाभिमान को जीवित रखने वाले सभी साथियों को मेरा सेल्यूट ,,मेरा सलाम ,,वैसे इन दिनों जो सरकार की गायेगा वोह खायेगा ,,जो सरकार की नहीं गायेगा वोह विज्ञापन ,सुविधाओं से वंचित कर दिया जाएगा का नारा छोटे मंझोले समाचार पत्रों ,,हिंदी पत्रकारिता के लिए दमनकारी साबित हुआ है और कसाई की तरह से छुरी लेकर अधिकारी ओरिजनल हिंदी पत्रकारिता का गला तराशने में लगे है ,हालत यह है के क्षेत्रीय ,छोटे ,मंझोले ,लघु समाचार पत्रों पर पुलिस ,,प्रशासनिक अधिकारीयों की थानेदारी ज़बरदस्त है और स्वाभिमानी पत्रकारों का संघर्षः मुश्किल हो गया है ,,
हिन्दी पत्रकारिता के इतिहास में आज का दिन सुनहरे अक्षरों में लिखा गया है। आज ही के दिन जुगल किशोर शुक्ल ने दुनिया का पहला हिन्दी साप्ताहिक पत्र "उदन्त मार्तण्ड" का प्रकाशन कलकत्ता से शुरू किया था और इस दिन को पत्रकारिता दिवस के रूप में भी मनाया जाता है। इस प्रकार भारत में हिंदी पत्रकारिता की आधारशिला पंडित जुगल किशोर शुक्ल ने डाली थी। उदन्त मार्तण्ड का प्रकाशन 30 मई, 1826 को कलकत्ता से एक साप्ताहिक पत्र के रूप में शुरू हुआ था। यह पत्र हर मंगलवार को प्रकाशित होता था। उस समय की बात करें तो अंग्रेज़ी, फारसी और बांग्ला में तो अनेक पत्र निकल रहे थे किंतु हिंदी में एक भी पत्र प्रकाशित नहीं होता था।

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