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01 मई 2018

जादूगर सब मूसा के सामने सजदे में गिर पड़े

(आखि़र) सबने मुत्तफिक़ अलफाज़ (एक ज़बान होकर) कहा कि (ऐ फिरआऊन) उनको और उनके भाई (हारून) को चन्द दिन कै़द में रखिए और (एतराफ़ के) शहरों में हरकारों को भेजिए (111)
कि तमाम बड़े बड़े जादूगरों का जमा करके अपके पास दरबार में हाजि़र करें (112)
ग़रज़ जादूगर सब फिरआऊन के पास हाजि़र होकर कहने लगे कि अगर हम (मूसा से) जीत जाए तो हमको बड़ा भारी इनाम ज़रुर मिलना चाहिए (113)
फिरआऊन ने कहा (हा इनाम ही नहीं) बल्कि फिर तो तुम हमारे दरबार के मुक़र्रेबीन में से होगें (114)
और मुक़र्रर वक़्त पर सब जमा हुए तो बोल उठे कि ऐ मूसा या तो तुम्हें (अपने मुन्तसिर (मंत्र)) या हम ही (अपने अपने मंत्र फेके) (115)
मूसा ने कहा (अच्छा पहले) तुम ही फेक (के अपना हौसला निकालो) तो तब जो ही उन लोगों ने (अपनी रस्सियाँ) डाली तो लोगों की नज़र बन्दी कर दी (कि सब सापँ मालूम होने लगे) और लोगों को डरा दिया (116)
और उन लोगों ने बड़ा (भारी जादू दिखा दिया और हमने मूसा के पास वही भेजी कि (बैठे क्या हो) तुम भी अपनी छड़ी डाल दो तो क्या देखते हैं कि वह छड़ी उनके बनाए हुए (झूठे साँपों को) एक एक करके निगल रही है (117)
अल किस्सा हक़ बात तो जम के बैठी और उनकी सारी कारस्तानी मटियामेट हो गई (118)
पस फिरआऊन और उसके तरफदार सब के सब इस अखाड़े मे हारे और ज़लील व रूसवा हो के पलटे (119)
और जादूगर सब मूसा के सामने सजदे में गिर पड़े (120)

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