हमें चाहने वाले मित्र

11 नवंबर 2016

उसके हाथों पर

उसके हाथों पर
अपना नाम देखा
तो मैं बहूत खुश था..
फिर वो बडे मासूम से
लहजे में बोली-
तेरे हमनाम ओर भी है..

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

दोस्तों, कुछ गिले-शिकवे और कुछ सुझाव भी देते जाओ. जनाब! मेरा यह ब्लॉग आप सभी भाईयों का अपना ब्लॉग है. इसमें आपका स्वागत है. इसकी गलतियों (दोषों व कमियों) को सुधारने के लिए मेहरबानी करके मुझे सुझाव दें. मैं आपका आभारी रहूँगा. अख्तर खान "अकेला" कोटा(राजस्थान)

Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...