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31 जुलाई 2016

,उनका आलेख ,,सलमान खान के हिरन मामले में बरी हो जाने से व्यथित था ,

अभी हाल ही में मेरे आदर्श लेखक ,,मेरे आदर्श पत्रकार ,,वेदप्रताप वैदिक ,,जिनकी पुस्तके पढ़कर ,,जिनके लेक्चर सुनकर में पत्रकारिता में पी जी कर सका था ,,उनका आलेख ,,सलमान खान के हिरन मामले में बरी हो जाने से व्यथित था ,,,उन्होंने कई मामलो के हवाले दिए ,,लेकिन देश में लगातार हुए मानव नरसंहार ,,चाहे वोह गुजरात में हुआ हो ,,मुम्बई में हुआ हो ,,चौरासी के दंगो में सिक्खो के नरसंहार हुए हो ,,बमविस्फोट में कई लोगो के मारने के बाद भी आरोपी छूट गए हो ,,अशोक सिंघल सहित कई ऐसे लोग है जिनके मुक़दमे सरकार ने अदालत में चलाने के पहले ही वापस ले लिए हो ,,,आज भी कई मामले सरकार द्वारा वापस लिए जा रहे है ,,उस पर कोई टिप्पणी को ध्यान नहीं ,,महात्मागांधी को अंग्रेज़ो ने मारा सुब्रमण्यम ,स्वामी ने कह डाला ,,मीडिया ने कोई पोस्टमार्टम नहीं किया कह डाला ,,,किसी भी मामले में रिसर्च रिपोर्ट तैयार करने के पहले बहुप्रशिक्षित होना चाहिए ,,सभी पहलुओं पर विचार होना चाहिए ,, जयपुर बम विस्फोट कांड ,,अजमेर दरगाह विस्फोट ,,,बेस्ट बेकरी काण्ड हो ,,,सांसद जाफरी हत्याकांड हो ,,मुम्बई ब्लास्ट हो उन मामले में इतनी मशक़्क़त किसी ने नहीं की क्यों नहीं की ,,यह तो मिडिया वाले ही जाने ,,लेकिन दोस्तों अदालत को ,,क़ानून को अंधा बताने के पहले लोग यह सोचे ,,क्या हम हमारे पड़ोस में कोई हत्या हो ,,कोई दुर्घटना हो तो गवाह बनने को तैय्यार होते है ,,गवाह बन भी जाते है तो हम नहीं कहते के में काम में व्यस्त था ,,मुझे पता ही नहीं क्या हुआ ,,,क्या बलात्कार की शिकार एक महिला रोज़ अदालतों में आकर यह नहीं कहती ,,मेरे तो पुलिस ने बयान गलत लिख लिए थे ,,मेने ऐसा नहीं कहा ,,क्या जिस के परिजन की हत्या होती है वोह लोग अदालत में आकर नहीं कहते के हमने कुछ नहीं देखा ,,यह हस्ताक्षर मेरे नहीं है ,,अगर ऐसा होता है तो बताइये ,,आज तक इन मुद्दों पर क्यों नहीं लिखा ,,क्यों होता है ,,क्योंकि आप इन मुद्दों पर चुप हो ,,हमारा क्या हम लिखेंगे तो कोई ध्यान नहीं देगा ,,लेकिन वेदप्रताप सर आप तेज़ी से बढ़ते अख़बार में लिख रहे है ,,आपके लिखने पर चर्चा होगी ,,,क्या आपको पता है ,,सुप्रीम कोर्ट ने सेकड़ो बार सरकार को गवाहों को सुरक्षा देने की बात कही है ,,क्या आप को पता है दंड प्रक्रिया संहिता में प्रति दिन मामले की सुनवाई का प्रावधान है ,,आगे की तारीख बदलने का प्रावधान नहीं है ,,क्या आपको पता है ,,हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने सरकार की पुलिस जांच एजेंसियों ,,सरकार द्वारा बनाये गए गवाहों पर ऊँगली उठाते हुए देश भर में अभियोजन पक्ष की ज़िम्मेदारिया तय की है जिस पर सरकार ने अब तक कोई कार्यवाही नहीं की है ,,शायद यह भी पता नहीं के सरकार ने तो कई अदालतों में सरकारी वकील नियुक्त ही नहीं कर रखे ,,जजों की कमी है ,,सेठी आयोग के हिसाब से अदालतों की संख्या आधी भी नहीं है ,,जजों को बैठने की जगह नहीं ,,पत्रावलियां रखने की जगह नहीं ,,सरकारी गवाहों को कैसे तलब करे ,,गवाहों को कहा बुलाकर समझाये ,,,पुलिस जो मुक़दमे बनाती है वोह सही है ,,प्रमाणित है या नहीं इसकी पृथक से की क़ानूनी तस्दीक़ नहीं है ,,सरकारी वकील कैसे ब्रीफ़ बनाते है ,,कैसे गवाह करवाते है ,,,,आप और हम सभी जानते है क्या कभी कोई स्टिंग ऐसे मामलो में क्या है ,,नहीं ना ,,सरकार अभियोजन पक्ष को सुविधाएं उपलब्ध क्यों नहीं कराती है ,,क्यों बढे बढे मुक़दमे राजनितिक कारण बताकर दण्ड प्रक्रियीं संहिता की धरा 321 के तहत विड्रॉल कर लिए जाते है ,,अमित शाह क्यों गिरफ्तार हो जाते है ,,क्यों जेल जाते है और फिर बरी हो जाते है ,,जो लोग जेल में रहते है वोह कैसे जेल में रहकर करोडो के कारोबार करते है ,,शाहबुद्दीन जेल में रहकर कैसे हत्या करवा देते है ,,,,,कभी इन मसलो को सोचो ,,सरकार को ललकारो ,,,जो मुक़दमे सरकार ने जनहित बताकर वापस लिए है उनकी सूचि ज़रा देखो ,,,,कितने मामलो में अंतिम प्रतिवेदन पेश होकर मंज़ूर किये गए है उन्हें देखो पता चलेगा ,,सलमान तो सिर्फ एक सेलेब्रिटी है ,,हज़ारो हज़ार सेलेब्रेटी सरकार के सिस्टम का फायदा उठाते है ,, क्या कोई उद्योग पति आजतक जेल गया है ,,सुब्रतरॉव सहारा से जुड़े है उन्हें सरकार ने जेल नहीं भेजा उन्हें अदालत ने क़ानून ने जेल भेजा है ,,व्यापम पर गवाह मर रहे है ,,आसाराम के गवाहों को मारा जा रहा है ,,सभी पहलुओं पर हमे गोर करके ,,इस सिस्टम को सुधारना होगा ,,,,शायद आपलोगो को यह पता नहीं वन अधिनियम में अगर पुलिस का हस्तक्षेप होता है तो क़ानूनन वोह मामला धारा पचास के तहत खारिज होने योग्य हो जाता है ,,ऐसे क़ानूनों में संशोधन की हमे मांग करना चाहिए ,,आओ हम हर पहलू पर विचार करे ,,एक सलमान नहीं हज़ारो हज़ार सलमान है उनको भी खोजे ताकि यह न लगे के हम सिर्फ पीछा कर रहे है ,,इन्साफ नहीं कर रहे ,,,अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

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