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31 जुलाई 2016

आमिर को पर्रिकर का जवाब- देश के खिलाफ बोलने वालों को सबक देना जरूरी; राहुल का रक्षा मंत्री पर पलटवार- कायर करते हैं नफरत



नई दिल्ली. डिफेंस मिनिस्टर ने इशारों में ही आमिर खान पर निशाना साधा। कहा कि देश के खिलाफ बोलने वालों को सबक सिखाना जरूरी है जैसे एक एक्टर्स से ऑनलाइन कंपनी ने अपना रिश्ता तोड़ लिया था। बता दें कि पिछले साल आमिर ने इन्टॉलरेंस को लेकर बयान दिया था। इसके बाद स्नैपडील ने एक्टर से बतौर ब्रॉन्ड एम्बेसडर करार को आगे नहीं बढ़ाया। पर्रिकर ने उसी ओर इशारा किया। इस बीच, रविवार को राहुल गांधी ने रक्षा मंत्री पर पलटवार किया। ट्वीट किया- ''आरएसएस और पर्रिकर जी सबको सबक सिखाना चाहते हैं। ये आपके लिए सबक है- कायर नफरत करते हैं। कभी नहीं जीतते।'' पर्रिकर ने एक्टर के बयान को बताया ऐरोगेंट...
- मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, एक बुक लॉन्चिंग इवेंट में पर्रिकर ने कहा, ”मैं केवल यह इशारा करने की कोशिश कर रहा हूं, यदि कोई ऐसे बोलता है तो उसे उसके जीवन का सबक सिखाना चाहिए।''
- ''जब एक्‍टर्स (आमिर खान) ने ऐसा किया तो जिस कंपनी को वह एंडॉर्स कर रहे थे वह ऑनलाइन ट्रेडिंग कंपनी थी। हमारे कुछ लोग काफी स्‍मार्ट हैं। एक टीम थी जो इस पर काम कर रही थी। वे लोगों को कह रहे थे कि आप ऑर्डर दो और सामान लौटा दो। कंपनी को सबक सीखना चाहिए। उन्‍हें अपना ऐड वापस लेना पड़ा।”
- पर्रिकर ने कहा कि एक्टर का बयान निराशाजनक था।
- कहा, "हमें हमारे देश से प्‍यार करना चाहिए। उनका बयान एरोगेंट था।”
कांग्रेस ने कहा- पाकिस्तान से लड़ने की बजाए आमिर को धमकी दे रहे हैं रक्षा मंत्री

- कांग्रेस स्पोक्सपर्सन रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा, '' रक्षा मंत्री को ऐसे बयान देने के बजाय जो काम दिया गया है उसे करना चाहिए। पाकिस्तान से लड़ने की बजाए वे आमिर खान जैसे नागरिकों को डरा रहे हैं।''
- ''मनोहर पर्रिकर का चौंकाने वाला खुलासा किया है कि बीजेपी सपोर्टर्स ने आमिर खान के मामले पर स्नैपडील को कैसे परेशान किया!''
- ''पर्रिकर के बयान से साबित होता है कि कैसे दलितों और अल्पसंख्यकों को कुचलने की साजिश की जा रही है। क्या ये राजधर्म हो सकता है?''
आमिर ने क्या कहा था?
- पिछले साल एक अवॉर्ड फंक्शन में आमिर से पूछा गया था कि इन्टॉलरेंस पर विरोध करने का तरीका सही है क्या?
- इस पर उन्होने कहा था, ''कई लोगों को लगता है कि उनके आसपास इन्टॉलरेंस, असुरक्षा और निराशा का माहौल बढ़ता जा रहा है। हम अखबारों में पढ़ते हैं कि क्या हो रहा है।''
- ''मुझे भी इस बारे में कई बार सतर्क किया जा चुका है। कोई गलत करता है, तो उसे सजा मिलनी चाहिए। 1984 में जो हुआ वो भयानक था, पर उसका हवाला देकर आज को सही नहीं ठहराया जा सकता।''
- ''चाहे केंद्र के हों या राज्य के, हम जन प्रतिनिधियों से ऐसे बयानों की उम्मीद करते हैं, जिनसे लोगों के मन में कानून के प्रति आस्था पैदा हो। पर जिन लोगों को हमने चुना है, उनके रवैये से असुरक्षा की भावना पैदा होती है। पिछले 6-8 महीनों में असंतोष और असुरक्षा बढ़ी है। पहली बार मेरी पत्नी किरण ने बहुत बड़ी और डरावनी बात कही - क्या हमें देश छोड़ देना चाहिए? वह अपने बच्चे के लिए डर रही हैं।''

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