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30 जुलाई 2016

तुम्हारी मौसीक़ी

तुम्हारे गीत
तुम्हारी आवाज़
तुम्हारी मौसीक़ी
तुम्हारी नफरत
तुम्हारा प्यार
तुम्हारी नाराज़गी
तुम्हारी बदतमीज़ी
वायदों से
तुम्हारा मुकरना
तुम्हारे तीखे तेवर
तुम्हारी खूबसूरती
तुम्हारे दिलकश अंदाज़
तुम्हारी गर्माहट
तुम्हारी शर्माहट
खुद तुम
हां तुम
मेरी ज़िंदगी
मेरा सरमाया हो
सच कड़वा सच
यही है ,,हां यही है ,,,,,,,,,,,,,,,,अख्तर

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