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09 दिसंबर 2015

इस्लामाबाद से सुषमा का एलान- भारत-पाक के बीच सभी मुद्दों पर बातचीत शुरू होगी

नवाज शरीफ से मुलाकात करतीं सुषमा स्वराज।
नवाज शरीफ से मुलाकात करतीं सुषमा स्वराज।
इस्लामाबाद. पाकिस्तान के दौरे पर पहुंचीं विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने बुधवार शाम को एलान किया कि दोनों देशों के बीच सभी मुद्दों पर कॉम्प्रिहेंसिव बायलैटरल डायलॉग (समग्र बातचीत) का सिलसिला फिर से शुरू होगा। 2008 के मुंबई हमलों के बाद यह बातचीत थम गई थी।
सुषमा ने कहा कि वे गुरुवार को संसद में इस बारे में पूरा बयान देंगी। वे बुधवार रात नई दिल्ली वापस आ गई। बता दें कि सुषमा हार्ट ऑफ एशिया कॉन्फ्रेंस में हिस्सा लेने इस्लामाबाद गई थीं।
आगे क्या होगा?
सुषमा ने पाकिस्तान के पीएम नवाज शरीफ के विदेश मामलों के एडवाइजर सरताज अजीज से मुलाकात के बाद साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इसमें उन्होंने कहा कि दोनों देशों के फॉरेन सेक्रेटरीज मिलकर बातचीत का रोडमैप तैयार करेंगे। इसमें यह तय होगा कि बातचीत कब और किन-किन स्तरों पर होगी।
सितंबर 2016 में पाकिस्तान जाएंगे मोदी

- अगले साल सितंबर में सार्क समिट में हिस्सा लेने मोदी पाकिस्तान जाएंगे।
- बुधवार को सुषमा ने इस खबर को कन्फर्म किया।
- अगर ऐसा होता है तो 12 साल बाद किसी पीएम का पाकिस्तान दौरा होगा।
- पिछली बार अटल बिहारी वाजपेयी जनवरी 2004 में पाकिस्तान गए थे।
क्या है कॉम्प्रिहेंसिव बायलैटरल डायलॉग?
- इसके तहत भारत-पाकिस्तान के बीच आतंकवाद, कारोबार, सर क्रीक, कश्मीर समेत तमाम मुद्दों पर बीच कई लेवल पर बातचीत होगी।
- सुषमा ने इसे कॉम्प्रिहेंसिव बायलैटरल डायलॉग नाम दिया है।
- उनके मुताबिक पहले इसे कंपोजिट डालयॉग और 2008 के बाद रिज्यूम्ड डायलॉग कहा जाता था।
- 1998 में कंपोजिट डायलॉग का सिलसिला शुरू हुआ था जो 2008 में मुंबई हमले के बाद थम गया था।
ज्वाइंट स्टेटमेंट में भारत का पलड़ा कैसे है भारी?
भारत के फेवर में क्या? पाक के फेवर में क्या हो सकता है?
1
स्टेटमेंट में आतंकवाद शब्द का जिक्र 4 बार है।
साझा बयान में जम्मू कश्मीर का जिक्र है।
2 तीन महीने पहले जब भारत बातचीत के एजेंडे में आतंकवाद को रखना चाहता था, तब पाकिस्तान इससे पीछे हट गया था। सितंबर में जब एनएसए लेवल की बातचीत के एजेंडे में पाकिस्तान कश्मीर शब्द जोड़ना चाहता था, तब भारत ने सख्त एतराज जताया था।
3
- स्टेटमेंट कहता है कि इसमें कहा गया है कि दोनों देश आतंकवाद की निंदा करते हैं।
- दोनों देशों के एनएसए के बीच आतंकवाद पर बात हुई थी।
- दोनों देश आतंकवाद खत्म करने की दिशा में काम करते रहेंगे।
- दोनों देश काउंटर टेररिज्म पर बात करेंगे।
स्टेटमेंट कहता है कि जम्मू-कश्मीर, सियाचिन, सर क्रीक जैसे मुद्दों पर बातचीत का तरीका तय करने के लिए फॉरेन सेक्रेटरीज जल्द ही मीटिंग करेंगे।
4
- पाकिस्तान मुंबई हमलों के आरोपियों के खिलाफ मुकदमे को आखिरी पड़ाव तक ले जाएगा।
- बता दें कि मुंबई हमलों के बाद भी भारत ने पाकिस्तान से बातचीत रोकी थी।
क्या कहते हैं EXPERT?

- पूर्व डिप्लोमैट विवेक काटजू ने मीडिया को बताया- कंपोजिट डायलॉग की तैयारी 1997 में शुरू हुई थी। यह डायलॉग 1998 में अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार के वक्त से लागू हुआ था।
- पाकिस्तान जो चाहता था, उसे मिल गया। लेकिन अब सवाल यह है कि भारत को इस शुरुआत के बदले में क्या मिलेगा?
जल्दबाजी में दबाव से भरा है ये फैसला
- विदेश मामलों के एक्सपर्ट रहीस सिंह बताते हैं- कम्पोजिट डायलॉग पर रजामंदी जल्दबाजी तो है, बेहद चौंकाने वाली भी है। क्या सरकार ने बातचीत के सभी आठों मुद्दों की गंभीरता परखी?
- ये सही है कि दोनों मुल्कों का भविष्य कश्मीर, सियाचीन, सरक्रीक समेत 8 मुद्दों से तय होगा। लेकिन पाक का रुख इन पर ट्रेडिशनल रहा है। और भारत का भी। फिर आखिर इन पर बातचीत की पहल किस आधार और किस शर्त पर की जा रही है?
- ऊफा में मोदी-नवाज के बीच बनी रजामंदी को चंद महीनों में हुर्रियत को बुलाकर पाक ने तोड़ दिया था। क्या पाक ने हुर्रियत मुद्दा छोड़ दिया? कुछ भी साफ नहीं है। फिर मोदी
सरकार के 180 डिग्री घूम जाने का राज क्या है?
- सच तो यह कि भारत की पाकिस्तान पॉलिसी साफ नहीं है। यह अहम मुद्दों पर भटकी हुई रही है। यही खासियत आज भी देखने को मिल रही है।
- यह भी कहा जा सकता है कि भारत इस्लामाबाद में बाहरी दबावों के कारण झुकता हुआ दिखा। यह भारत की प्रो-एक्टिव और रीयल पाॅलिटिक्स पर बेस्ड फॉरेन पॉलिसी नहीं दिखाता। इसलिए भारत को इससे कोई फायदा होने वाला नहीं है।
WHAT NEXT

- रहीस सिंह बताते हैं कि रही बात आगे की की, तो इसमें ट्रेडिशनल रिजल्ट्स ही मिलेंगे। किसी बड़े बदलाव की उम्मीद करना बेमानी होगा। सभी जानते हैं कि पाकिस्तान की भारत काे लेकर पॉलिसी इस्लामाबाद से नहीं रावलपिंडी (अार्मी हेडक्वार्टर्स) से होती है।
- पाकिस्तानी आर्मी की स्ट्रैटजी 1947 से लेकर अब तक वैसी है। इसलिए अच्छे नतीजों के प्रोपोगैंडा पर वक्त लगाना बेकार होगा।
मोदी के पीएम बनने के बाद भारत-पाक के रिश्तों में कैसा आया उतार-चढ़ाव?
1. मई 2014 में मोदी ने की पहल
- मोदी ने प्रधानमंत्री पद के शपथ ग्रहण समारोह में पाकिस्तान के पीएम नवाज शरीफ को न्योता दिया।
- अगले दिन दोनों के बीच 20 मिनट बातचीत भी हुई।
- भारत अपना विदेश सचिव इस्लामाबाद भेजने को राजी हुआ।
2. पाकिस्तान ने अलगाववादियों को बुलाया
- अगस्त 2014 में भारत की तरफ से विदेश सचिव भेजे जाने से पहले ही पाकिस्तान हाई कमिश्नर ने दिल्ली में कश्मीरी अलगाववादियों से मुलाकात की।
- इसके बाद मोदी सरकार ने विदेश सचिव का दौरा रद्द कर दिया।
3. सार्क समिट में नहीं हुई बात
नवंबर 2014 में मोदी-नवाज नेपाल में हुई सार्क समिट में मौजूद थे। दोनों ने एकदूसरे का अभिवादन किया। लेकिन बातचीत नहीं हुई।
4. रूस के उफा में हुई बातचीत
- जुलाई 2015 में रूस के उफा शहर में मोदी-नवाज के बीच बातचीत हुई।
- सितंबर 2015 में एनएसए लेवल की बातचीत शुरू करने पर सहमति बनी।
- लेकिन यह बातचीत होती, इससे पहले ही पाकिस्तान ने कश्मीर का मुद्दा उठा दिया। साथ ही अलगाववादियों से मुलाकात करने की शर्त पर भी रख दी।
- 4 दिन के ड्रामा के बाद पाक एनएसए ने अपना भारत दौरा ही रद्द कर दिया।
5. दिसंबर में हुआ क्लाइमेट चेंज
- इसी महीने पेरिस में क्लाइमेट चेंज समिट के दौरान मोदी-नवाज की मुलाकात हुई।
- इसी के बाद यह तय हुआ कि सुषमा हार्ट ऑफ एशिया कॉन्फ्रेंस में हिस्सा लेने इस्लामाबाद जाएंगी।
- इस्लामाबाद से ही सुषमा ने अब एलान किया है कि दोनों देशों के बीच कम्पोजिट डायलॉग शुरू होगा।
पाकिस्तान के पीएम से भी मिलीं सुषमा
- सुषमा ने बुधवार को पाकिस्तान के पीएम नवाज शरीफ से मुलाकात की। सुषमा ने शरीफ से कहा कि भारत अपने पड़ोसी देश से अच्छा रिश्ता चाहता है।
- बाद में सुषमा विदेश मामलों में नवाज शरीफ के एडवाइजर सरताज अजीज से भी मिलीं।
- इससे पहले सुषमा ने अफगानिस्तान से जुड़े मुद्दों पर हुई हार्ट ऑफ एशिया कॉन्फ्रेंस में स्पीच दी।
- उन्होंने कहा, ''आतंकवाद को कहीं भी पनाह नहीं मिलनी चाहिए।'' सुषमा ने नवाज शरीफ की मौजूदगी में यह बयान दिया।
सुषमा का बयान क्यों रहा अहम?
- सुषमा ने यह बयान ऐसे वक्त पर दिया, जब उनसे कुछ ही देर पहले नवाज ने अपनी स्पीच में पाकिस्तान मिलिट्री के ऑपरेशन 'जर्ब-ए-अज्ब' का जिक्र किया था।
- बता दें कि पाकिस्तान की मिलिट्री अफगानिस्तान बॉर्डर पर पिछले डेढ़ साल से 'जर्ब-ए-अज्ब' ऑपरेशन चला रही है। यह ऑपरेशन तालिबान के खिलाफ है।
- पाकिस्तान इसी ऑपरेशन की दलील देकर आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई का उदाहरण देता है। इसी आधार पर अमेरिका से मदद मांगता है। लेकिन वह पीओके में मौजूद भारत विरोधी आतंकियों पर कोई बात नहीं करता।
- भारत भी कई मौकों पाकिस्तान का नाम लिए बिना कहता रहा है कि कुछ देश आतंकियों को पनाह दे रहे हैं। इसी वजह से भारत क्रॉस-बॉर्डर टेररिज्म का शिकार हो रहा है।

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