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09 दिसंबर 2015

राजस्थान का नेतृत्व विहीन वकील समुदाय ,हो गया है ,,बात कड़वी ,,,लेकिन सच्ची है

राजस्थान का नेतृत्व विहीन वकील समुदाय ,हो गया है ,,बात कड़वी ,,,लेकिन सच्ची है ,,जी हाँ दोस्तों ,,दस दिसम्बर,,, मानवाधिकार दिवस है,, देश में ही नहीं विश्व में ,,,जिओ और जीने दो ,,ना काहू से दोस्ती ,,ना काहू से बेर ,,,के सिद्धांत पर,,, मानवाधिकार संरक्षण ,,,,का बखान किया जा रहा है ,,लेकिन ,,,अफ़सोस ,,, हिंदुस्तान में खासकर ,,,राजस्थान में क़ानून बनाये हुए ,,,,चौबीस साल का वक़्फ़ा होने के बाद भी ,,,,आज तक ज़िलों में मानवाधिकार न्यायालय ,,,गठित नहीं किये गए है ,,पहले गुलाम देश को ,,,आज़ाद कराकर ,,,अंग्रेज़ो को भगाने ,,,फिर आज़ाद भारत में,,, काले अंग्रेज़ो को ,,,,सबक सिखाने के लिए ,,,,वकीलों की बिंदास भूमिका ,,वकीलों की ,,आज़ाद क़ानून की पकड़ ,,,प्रशंसनीय थी ,,हर मज़लूम को इ,,,न्साफ दिलाने की लड़ाई ,,,लड़ने वाले का नाम वकील था ,,,हर शख्स ,,,जिसके मानवाधिकार का उलंग्घन हुआ हो ,,,उसे इन्साफ दिलाने वाली शख्सियत का नाम वकील था ,,लेकिन दोस्तों ,,,,दुसरो को न्याय दिलवाने वाला यह तब्क़ा ,,,,आज खुद पशोपेश में है ,,,खुद पीड़ित और परेशान है ,,,हमारे देश में ,,,,एडवोकेट एक्ट के तहत ,,,वकीलों का एक अध्यक्ष होता है ,,,राजस्थान में भी ,,,,,बार कोंसिल है ,,,इसके गठन में ,,,राजस्थान के सभी ज़िलों से ,,,पच्चीस सदस्य निर्वाचित होकर ,,,एक अध्यक्ष चुनते है ,,जो करोडो के बजट से,,, वकीलों के कल्याण ,,एकेडमिक ,,,उनकी सुरक्षा ,,उनके हित संवर्धन का काम करते है ,,,उन्हें मान सम्मान दिलवाने ,,उनके मान सम्मान की रक्षा करने का काम करते है ,,लेकिन दोस्तों ,,,अफ़सोस की बात है के एक वर्ष के लगभग होने को आया ,,,,वकीलों की इस संस्था बार कोंसिल को भंग कर रखा है ,,कोई चुनाव नहीं है ,,कार्यवाहक प्रशासक के रूप में ,,,,,महाधिवक्ता को बिठाया गया है ,,राजस्थान के वकील इतिहास का ,,,यह काला अध्याय है ,,,वोह भी तब,,, जब वकील संघर्ष के दौर से गुज़र रहे है ,,,वकीलों की बार कोंसिल के चुनाव उलझ गए है ,,,इतना ही नहीं ,,,जिला स्तर की ,,,,,बार की आज़ादी छीन ली गई है ,,उनका जिला स्तर का संविधान है ,,क़ानूनी संविधान है ,,,भंग नहीं किया गया है ,,,लेकिन ज़िलों और कस्बो के ,,,वकीलों के चुनाव भी ,,,मनमाने नियमों से करवाने का दबाव बनाया गया है ,,राजस्थान में मनमाने तोर पर ,,,,चुनाव करवाने के प्रयास है ,,,अदालत में कार्यवाही पेंडिंग है ,,,,,अदालत को दूध का दूध पानी का पानी करना है ,,अभी सुनवाई चल रही है ,,लेकिन सच तो यह है ,,,,के मानवाधिकारों के संरक्षण की लड़ाई लड़ने वाला वकील तबक़ा ,,,,,आज खुद संघर्ष के दौर में ,,,,अपने हको को लेकर आशंकित है ,,एक जिला अभिभाषक परिषद ,,,,उनके स्थानीय विधान से ,,,चुनाव कराये ,,,तो बार कोंसिल को ऐतराज़ क्यों ,,,,,,यह बात समझ के बाहर है ,,वकीलों को बंधक बनाने की तैयारी है ,,उनके हको को सीमित कर ,,,,उनकी आज़ादी छीनने की कोशिशे ,,,,अंतिम चरणो में है ,,राजस्थान का हर वकील,,, इस व्यवस्था को समझ रहा है ,,लेकिन कुछ मठाधीशों के आगे ,,,यह वकील समुदाय खामोश सब कुछ सह रहा है ,,अपने हक़ों की लड़ाई के लिए,,, ना संघर्ष कर सकता है ,,ना अपने निर्वाचित भाई ,,,जिन्होंने वकीलों को गुलामी की इस आग में धकेला है ,,,उनसे कुछ कह सकता है ,,,बात अजीब है ,,सोचने की बात है ,,जब वकील अपने हक़ हांसिल नहीं कर पा रहा है ,,,तो फिर वोह दूसरे लोगों को कैसे,,, उनका हक़ दिला पायेगा ,,,यह एक ज्वलंत सवाल है ,,जिसका जवाब हमारे सभी वकील साथियों और समर्थको को ,,,,अपने ज़मीर को टटोल कर ,,,,खुद से पूंछना होगा ,,,कोटा अभिभाषक परिषद में भी ,,,,चुनाव होने वाले है ,,यहां भी स्थिति पशोपेश की है ,,,,देखते है क्या होता है ,,,वकील कब अपने हक़ के लिए ,,,,अपने अपने निजी स्वार्थो को छोड़कर ,,,, एक जुट होकर,, संघर्ष कर फिर से ,,,,आज़ादी का हक़ हांसिल करते है ,,वक़्त का इन्तिज़ार है ,,,अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

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