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03 दिसंबर 2015

राजस्थान में प्रदेश कां,,ग्रेस अध्यक्ष ,,,सचिन पायलेट के नेतृत्व में ,,प्रभारी गुरुदास कामत ,,सह प्रभारी मिर्ज़ा इरशाद बेग के पर्यवेक्षण में प्रदेश कांग्रेस का चेहरा मज़बूत होगा

राजस्थान में प्रदेश कां,,ग्रेस अध्यक्ष ,,,सचिन पायलेट के नेतृत्व में ,,प्रभारी गुरुदास कामत ,,सह प्रभारी मिर्ज़ा इरशाद बेग के पर्यवेक्षण में प्रदेश कांग्रेस का चेहरा मज़बूत होगा छत्तीस क़ौमों को साथ लेकर चलने वाला होगा ,,नाराज़ वोटर्स को अपने साथ जोड़ने वाला होगा ,,,कोटा संभाग सहित कोटा ज़िले में भी इस कवायद के बाद सकारात्मक और आश्चर्य जनक किन्त सत्य वाले परिणाम आएंगे ,,,,राजस्थान में बहतर कल्याणडकरी ,,जनहितकारी कार्य करने के बाद भी ,,गोपालगढ़ ,,फूल मोहम्मद सहित ,,कार्यकर्ताओं की उपेक्षा सहित कई ऐसे मुद्दे थे जो बेवजह कांग्रेस के खिलाफ हवा बनने से कांग्रेस जीती हुई बाज़ी हार गई थी ,,कांग्रेस में राजपा समर्थन के नाम पर बगावत हुई ,,,भीतरघात हुई ,,नतीजा हम जीते हुए थे ,,लेकिन जीत न सके ,,,सचिन पायलेट के नेतृत्व और अशोक गेहलोत के प्रबंधन से राजस्थान में कांग्रेस उपचुनाव जीती ,,पंचायत ,,,जिला परिषद और नगरपालिका चुनाव में बेहतर प्रदर्शन हुए ,,,,,अब प्रभारियों की मशक़्क़त ,,सचिन पायलेट ,,अशोक गेहलोत सहित ,,,वरिष्ठ नेताओ के समांजस्य से ,,,राजस्थान में एक बार फिर ,,,कांग्रेस को ज़िंदाबाद करने के लिए ,,,,कुशल प्रबंधकों ,,जांबाज़ नेतृत्व को जिला स्तर पर,,, नेतृत्व मिलने की कवायद अंतिम चरणो में है ,,राजस्थान में प्रदेश कार्यकारिणी में भी,,, संशोधन होगा ,,,,तो प्रकोष्ठों का भी गठन होगा ,,जिला अध्यक्षों सहित,,, दूसरे पदों को भी भरना है ,,सभी अपने कोशिशो में है ,,छोटे कार्यकर्ताओें को देखकर बढ़े नेता कहते भी है की,,,, चीटियों के भी पंख निकल आये है ,,लेकिन ,,जो बूढ़ा बरगद ,,,छायाँ ना दे सके ,,,वोह भी तो किसी काम का नहीं ,,,ऐसे में तो चीटियाँ भी उड़ ले ,,,तो आकाश छू लेती है ,,बस ,,,इसी फार्मूले पर,,,, राष्ट्रिय स्तर पर,,, चिंतन मंथन अंतिम चरणो में है ,,,,कोंग्रेसियों में ,,अनावश्यक काना फुंसी ,,अनावश्यक विवाद ,,,मिल बैठ कर लगभग खत्म होने लगा है ,,कोटा में भी ,,,,राजस्थान के दूसरे ज़िलों की तरह,,,, छत्तीस कोमो को साथ लेकर ,,,चलने वाले,,,, अल्पसंख्यक और छत्तीस क़ौमों को साथ लेकर ,,,,चलने वाले बहुसंख्यक ,,नेतृत्व देने की प्रक्रिया ,,,अंतिम चरणो में है ,,यहां कई दिग्गज,,, जिनमे दूरिया थी ,,उनके दिल मिल गए है ,,,वोह कांग्रेस के हित में अपने निजी मतभेद भुलाकर एक दूसरे के गले मिल रहे है ,,भविष्य में कांग्रेस का बटवारा ना हो ,,भीतरघात न हो इसलिए आपसी सामजस्य से कोटा शहर और कोटा देहात मज़बूत से मज़बूत उपयुक्त नेतृत्व की तलाश लगभग अंतिम चरणों में है ,,,,राजस्थान के सभी ज़िलों में कमोबेश स्थिति यही है ,,,अखिल भारतीय कांग्रेस कार्यालय में अध्यक्ष के उम्मीदवारों ,,उनके समर्थको की रोज़ भीड़ जुटी है ,,राहुल गांधी ,,सोनिया गांधी ,,सचिन पायलेट ,,गुरुदास कामत सहित ,,कई नामधारी वरिष्ठ कोंग्रेसियों के समक्ष लोग अपना अपना पक्ष रख रहे है ,,,गुरुदास कामत ,,अपने कार्यालय में बैठकर चिंतन मंथन कर रहे है ,,वोह राजस्थान के पूर्व सांसदों ,,वरिष्ठ नेताओं ,,पूर्व मंत्रियो ,,,सहित कई ज़िम्मेदारो से बात कर उनकी राय ले रहे है ,,,,,सोनिया गांधी अमेरिका इलाज के लिए गई है ,,अगले हफ्ते उनकी वापसी के बाद ,,,,राजस्थान में जिला अध्यक्ष और अदाधिकारियो ,,प्रकोष्ठ अध्यक्षों की प्रस्तावित सूचि ,,अंतिम अनुमोदन के लिए भेजी जायेगी ,,,जो कुछ दिनों तक,, चिंतन मंथन के बाद,,कमोबेश दिसम्बर के अंतिम सप्ताह या फिर जनवरी के प्रथम सप्ताह में अनुमोदित होकर जारी हो जायेगी ,,,राजस्थान में नयी नियुक्तियों और फेरबदल को लेकर भारी उत्साह और चर्चा का माहोल बना हुआ है ,,कोटा कांग्रेस कार्यकर्ताओं और समर्थित लोगों में भी बेचैनी के साथ,,,उत्साह का माहोल है ,,,कोटा में एक अच्छी बात यह रही के ,,,ज़मीन से जुड़े हुए ,,,भीड़ जुटाने और वोटर्स में अपनी ताक़त दिखाने वाले छत्तीस क़ौमों को साथ लेकर चलने वाले दो नेतृत्व में पिछले दिनों काना फुंसी और गुटरगूँ वाले कार्यकर्ताओें की चुगलखोरी से हुए गीले शिकवे लगभग दूर हो गए है और अब कोटा सहित राजस्थान की कांग्रेस तू तू ,,में ,,में ,,वाली कांग्रेस नहीं ,,यहां में के स्थान पर हम वाली कांग्रेस हो गयी है ,,,,,,,,अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

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