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26 अक्तूबर 2015

बहुत गुरुर है तुम्हे

बहुत गुरुर है तुम्हे
अपनी खूबसूरती पर
तुम्हारी ज़ुल्फो पर
तुम्हारी मुस्कुराहट पर
तुम्हारी अदाओ पर
तुम्हारे लबो पर
तुम्हारे गालों पर
तुम्हारी सुराहीदार गर्दन पर
तुम्हारी कजरारी आँखों पर
तुम्हारी पुरकशिश चाहत पर
तुम्हारे पुर लुत्फ़ ख्वाहिशात पर
तुम्हारी चाहत पर
तुम्हारी चाहत की ताबेदारी पर
लेकिन आज
तुम्हारे इस गुरुर को
देखो मेने तोड़ दिया
तुम्हारी खूबसूरती
तुम्हारे साथ है
नहीं है अगर कोई
साथ तुम्हारे
तो वोह तुम्हारी चाहत है
ज़रा टटोलों खुद को
इतनी नियामतों के बाद
ऐसी कोनसी कमी है आखिर
जो सब कुछ ,,सब कुछ
तुम्हारे पास है
नहीं है तो सिर्फ चाहत ,,चाहत
चाहने वाला ,,
तुम पर मर मिटने वाला
नहीं है ,,नहीं है
ऐसा क्यों
ज़रा सोचना ज़रूर ,,,अख्तर

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