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11 अक्तूबर 2015

कहा हो तुम

कहा हो तुम
किधर हो तुम
किसके साथ
किसके पास
हो तुम ,,
किसकी बाहों में हो
किसकी नज़रों में हो
चेहरे पर
मेरे लिए गुस्सा
दिल में
मेरे लिए नफरत
कुछ भी
सोच लो तुम
फिर भी
हमारा दिल
आपके पास है
हमारे दिल में
तुम सिर्फ तुम
रहते हो ,,
धड़कते भी तुम हो
साँसे भी तुम हो
ख्याल भी तुम
दीदार भी तुम
कहा हो तुम
किधर हो तुम
कुछ फ़र्क़
नहीं पढ़ता
ज़िंदगी बनकर
सीने में धकड़ते हो
तुम सिर्फ तुम ,,,,,अखतर खान अकेला

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