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11 अक्तूबर 2015

नरेंद्र दामोदर मोदी के व्रत पर बीस करोड़ स्वाहा..!


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राजनेताओं की ड्रामेबाजी सरकारी खजाने पर कितनी भारी पड़ती है इसका अंदाजा है तो हम सभी को है पर सूचना के अधिकार से यह कड़वी हकीकत धीरे-धीरे सरकारी तौर पर भी सामने आने लगी है। इस हथियार के उपयोग से यह सच सामने आ ही गया है की मोदीजी जब मुख्यमंत्री थे तब उनके एक सार्वजनिक व्रत आयोजन पर राजकोष को 20 करोड़ की चपत लगी थी। गुजरात सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग को तीन साल की टालमटोल के बाद यह जानकारी देनी ही पड़ी।
आरटीआई कार्यकर्ता कीर्ति राठौर ने तीन साल पहले जानकारी मांगी थी कि तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा साल-2011-12 मे रखे गए सदभावना मिशन व्रत पर कितना खर्च हुआ था।उनके नेत्रत्व मे राजधानी के साथ-साथ जिलों मे भी ऐसे सदभावना व्रत रखे गए थे।तीन साल तक राठौर के आवेदन को लटकाए रखने के बाद सामान्य प्रशासन विभाग के प्रोटोकाल प्रभाग ने गुजरात के मुख्य सूचना आयुक्त बलवंत के सामने खर्च का ब्योरा पेश किया। इसके मुताबिक 19.96 करोड़ रूपए खर्च हुए थे। जानकारी से यह दिलचस्प तथ्य सामने आया कि जिलों द्वारा इसके लिए आकस्मिक फंड से रकम खर्च की गई। इस फंड का उपयोग अचानक आने वाली आपदा के समय किया जाता है।[यह खबर पत्रिका अखबार ने पहले पेज पर सबसे ऊपर छापी है]

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