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05 अक्तूबर 2015

प्राकृतिक आपदा ,,भूकम्प ,,,बाढ़ वगेरा से प्रभावित लोगों के मनोविज्ञान पर आजीवन असर रह जाता है

हमारे देश में प्राकृतिक आपदा ,,भूकम्प ,,,बाढ़ वगेरा से प्रभावित लोगों के मनोविज्ञान पर आजीवन असर रह जाता है और उनमे एक विशेष खतरनाक सिंड्रोम जन्म ले लेता है जिसके कारण उनका जीवन डर और खौफ के माहोल में रहता है ,,इसी मनोविज्ञान को समझने ,,इसी मनोविज्ञान के बेहतर इलाज के लिए हाल ही में श्रीनगर जम्मुकश्मीर में एक अंतर्राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन रखा गया जिसमे कोटा के मनोचिकित्स्क डॉक्टर जुज़र अली ,,डॉक्टर एम एल अग्रवाल ,,डॉक्टर सी पी विजयवर्गीय ,,डॉक्टर राठोड भी शामिल हुए वोह आज सुबह ही सेमिनार के बाद कोटा लोटे है ,,,,,,,,,,,,,,,,,सेमिनार से वापसी पर डॉक्टर जुज़र अली ने बताया के वर्तमान में विश्व स्तर प्राकर्तिक आपदाओ भूकम्प ,,बाढ़ वगेरा का प्रकोप चल रहा है ,,इस त्रासदी में फंसे लोग जो बच जाते है वोह एक ख़ास तरह के डर ,,खौफ के वातावरण में रहते है ,,तबाही का वोह दृश्य ऐसे लोग भुला नहीं पाते है और इसीलिए इनको एक विशेष तरह का सिंड्रोम घेर लेता है जो एक मनोवैज्ञानिक बीमारी होती है जिसका इलाज कैसे सम्भव है इन सब पर विचारविमर्श ,चिंतन मंथन के लिए कश्मीर के श्रीनगर में इस सेमिनार का आयोजन रखा गया था ,,सेमिनार में बाढ़ से तबाह हो रहे बांग्लादेश और हाल ही में भूकम्प की त्रासदी झेलने वाले नेपाल देश के विशेसग्य चिकित्सक अपने अनुभवों के साथ मनोचिकित्सा के इस चिंतन मंथन कार्यशाला में आये थे ,,सभी चिकितसकों ने एक दूसरे का ज्ञान बांटा ,,,कोटा में पुरे हिंदुस्तान ,,पुरे विश्व के विभिन्न हिस्सों के लोग मौजूद है ऐसे में इस सेमीनार से कोटा में प्रभावित मरीज़ो को इलाज में काफी फायदा पहुंचेगा ,, ऐसे मरीज़ जो ऐसे खतरनाक हादसे से प्रभावित होकर बेवजह घबराते है ,,निराशावाद की तरफ जाते है ,,डर और के माहोल में रहते है ,,पुरानी त्रासदी को याद कर डर जाते है ,,उसे भुला नहीं पाते ,,,उनका अतीत ,,उनके अतीत का खौफनाक मंज़र उनके वर्तमान को एक मनोवैज्ञानिक प्रभाव के कारण बर्बाद करता है ऐसे मरीज़ों को इस सेमिनार के अनुभवों के लाभ से इलाज में फायदा मिलेगा ,,,,,अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

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