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15 सितंबर 2015

RSS की मैगजीन ने वाइस प्रेसिडेंट पर लिखा- माइनॉरिटी ही शुरू करती है दंगे

फाइल फोटो- मजलिस-ए-मुशावरत के जलसे में उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी (बाएं)
फाइल फोटो- मजलिस-ए-मुशावरत के जलसे में उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी (बाएं)
नई दिल्ली. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के माउथपीस (मुखपत्र) पांचजन्य ने देश के उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी को कम्युनल (सांप्रदायिक) मुस्लिम करार दिया है। मैगजीन में छपे आर्टिकल में अंसारी के एक भाषण का जिक्र करते हुए तीखे हमले किए गए हैं। 'पिछड़ने की वजह और बेमौसमी राग' हेडिंग से छपे इस आर्टिकल को सतीश पेडणेकर ने लिखा है।
मैगजीन के मुताबिक, 'हामिद अंसारी मुसलमानों की सुरक्षा का मामला उठाते हैं। वह कहते हैं कि मुसलमानों को बहुसंख्यक समाज से खतरा है? उनका इशारा शायद दंगों की तरफ था, लेकिन दंगे तो ज्यादातर अल्पसंख्यक (माइनॉरिटी) ही शुरू करते हैं। जब बहुसंख्यकों की उस पर प्रतिक्रिया होती है तो उसे मुस्लिम सिक्युरिटी का मुद्दा बना लेते हैं।' बता दें कि कुछ दिन पहले मजलिस-ए-मुशावरत के जलसे में उपराष्ट्रपति ने मोदी सरकार से मुस्लिमों के कल्याण और उन्हें बराबरी का हक दिलाने पर ध्यान देने की बात कही थी।
हामिद अंसारी पर पांचजन्य ने और क्या लिखा:
-उपराष्ट्रपति काफी पढ़े-लिखे और विद्वान व्यक्ति हैं। मजलिस-ए-मुशावरत के जलसे में दिया गया उनका बहुचर्चित भाषण से बहुत निराशा हुई। उनका भाषण एक सांप्रदायिक मुस्लिम नेता का जैसा है। उपराष्ट्रपति को किसी एक समुदाय विशेष की तरफदारी करने के बजाय सबके हित की बात करनी चाहिए।
-मुसलमानों को हज यात्रा करने के लिए सब्सिडी दी जाती है। ऐसी हालत में समझ नहीं आता कि विशेष अधिकार मिलने पर भी उपराष्ट्रपति को कैसे लगता है कि मुसलमान-अस्मिता को खतरा है? इससे तो बहुसंख्यक हिन्दू समाज को खतरा है। देश के पंथनिरपेक्ष चरित्र को खतरा है। लेकिन उपराष्ट्रपति अपने मजहब से ऊपर उठकर यह बात नहीं कह सके।

-दंगे केवल मुस्लिम सुरक्षा का सवाल नहीं हैं, हिन्दू सुरक्षा का सवाल भी हैं। देश के 7 राज्यों में हिन्दू भी अल्पसंख्यक हैं। इसके अलावा देशभर में हुई इस्लामी आतंकवाद की घटनाओं में सैकड़ों हिन्दू मारे गए हैं। क्या उनका खून पानी है?
- हामिद अंसारी ने भाषण में विभाजन का मुद्दा उठाया। कहा कि मुसलमानों को उन राजनीतिक घटनाओं और समझौतों का बोझ भी उठाना पड़ रहा है जो देश विभाजन का कारण बनीं। लेकिन हामिद अंसारी भूल जाते हैं कि मुस्लिम विभाजन के शिकार नहीं, उसकी वजह हैं। उनके इस कारनामे के नतीजे आज सारे गैर-मुस्लिम झेल रहे हैं।
- हामिद अंसारी को आम मुस्लिम नेताओं की तरह अपने समुदाय को भेदभाव का शिकार बताने करने के बजाय इस्लाम की रूढ़िवादिता और कट्टरपन के बारे में मुसलमानों से खरी-खरी सुनानी चाहिए थीं, जिससे मुसलमान बाकी भारतीय समाज से तालमेल नहीं कर पाते हैं और संघर्ष का कारण बनते हैं।

- हामिद अंसारी का भाषण मुस्लिम संस्थाओं के मांगपत्र जैसा था। इसमें कई बार आधुनिकता जैसे शब्द भी आए हैं, लेकिन यह बात तो अंसारी ही बता सकते हैं कि कोई समुदाय अपनी 1400 साल पुरानी पोथियों की बातों को आज भी जैसे के तैसे लागू करने पर भी कैसे आधुनिक हो सकता है?

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