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10 सितंबर 2015

मुबारक हो तुम जीत गए हम हार गए

तुम्हारी मेरी दुआओ में
कितना था टकराव ,,
मुबारक हो
तुम जीत गए हम हार गए
खुदा का शुक्र है
हम हारे तो तो सही
लेकिन हार कर भी जीत गए
तुम्हारी दुआ थी
हम से हमारे प्यार से
तुम्हारा पीछा छूटे
हमारी दुआ थी
तुम हमे मुकम्मल मिल जाए
ना मिल सको अगर
तो हम यूँ ही मर जाए
लो खुश हो लो
तुम्हारी दुआ क़ुबूल हुई
तुम्हारा पीछा यूँ छूट रहा है
हमारी दुआ क़बूल है क़ुबूल है
तुम ना भी मिल सके तो क्या
देखो हम आखरी पड़ाव पर
हमारी दुआ
तुम ना मिल सको तो हम मर जाए
वोह क़ुबूल है क़ुबूल है ,,
तुम सोचते हो हमसे पीछा छूटा
दुआ तुम्हारी क़ुबूल है
नहीं नहीं
तुम गलत सिर्फ गलत सोचते हो
तुम न मिल सको तो हम मरजाये
यही दुआ थी हमारी
इसलिये लो
हमारी दुआ क़ुबूल है क़ुबूल है ,,
मिल जाओ तुम अगर
तो शायद
ज़िंदगी मिल जाए
लेकिन नहीं शायद नहीं
दुआ  हमारी क़ुबूल है हमारी क़ुबूल है ,,अख्तर

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