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07 सितंबर 2015

सुप्रीम कोर्ट जो कानून खत्‍म कर चुका है, उसके तहत केस दर्ज कर रही पुलिस

प्रतीकात्मक फोटो।
प्रतीकात्मक फोटो।
नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट ने इसी साल मार्च में आईटी एक्ट के सेक्शन 66 (ए) को खत्म कर दिया था। लेकिन पुलिस की नजर में यह कानून आज भी मौजूद है। यही वजह है कि पुलिस ने महाराष्ट्र और झारखंड में इसी सेक्शन के तहत दो मामले में दर्ज किए हैं।
अलग हो चुकी पत्नी को आपत्तिजनक मैसेज भेजने पर केस
नासिक में 34 साल के सिरसत नाम के शख्स पर आरोप है कि उसने वॉट्सऐप पर अलग हो चुकी पत्नी को मैसेज भेजे। उनके खिलाफ नासिक के भद्रकाली थाने में शिकायत की गई तो पुलिस ने आईटी एक्ट के सेक्शन 66 (ए) के तहत 8 अगस्त मुकदमा दर्ज कर लिया। महाराष्ट्र पुलिस ने आईटी एक्ट के सेक्शन 66 ए के खत्म होने को लेकर सुप्रीम कोर्ट के आदेश आने के बाद इस बारे में सर्कुलर जारी किया था। लेकिन बावजूद इसके भद्रकाली पुलिस थाने के पुलिस इंस्पेक्टर मधुकर काड ने कहा कि सेक्शन 66 (ए) के तहत केस दर्ज करना गलत नहीं है।
झारखंड में भाजपा नेता ने दर्ज कराया मामला
झारखंड के चक्रधरपुर में सोशल मीडिया में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ कमेंट करने पर झारखंड एजुकेशन प्रोजेक्ट के एक कर्मचारी के खिलाफ मामला दर्ज कराया गया है। ब्लॉक प्रोग्राम अफसर (बीपीओ) अजय कुमार के खिलाफ बीजेपी नेता अशोक षाड़ंगी ने रविवार को साइबर एक्ट के सेक्शन 66 (ए) के तहत एफआईआर दर्ज कराई। षाड़ंगी ने बताया कि बीपीओ ने पीएम के नाम पर आपत्तिजनक बातें लिखीं और अश्लील फोटो भी पोस्ट किया।
EXPERT VIEW: फंस सकती है पुलिस
एडवोकेट और साइबर सिक्युरिटी लॉ एक्सपर्ट प्रशांत माली ने कहा, 'सेक्शन 66 ए के तहत केस दर्ज करने से पता चलता है कि पुलिस को बदलते कानून की जानकारी नहीं है। इससे कोर्ट के कंटेम्ट (अवमानना) का भी केस बन सकता है। सिरसत के केस में पुलिस को आईटी एक्ट के तहत लगाए गए आरोप हटाने होंगे।' सिरसत ने इस मामले को लेकर महाराष्ट्र सरकार के पोर्टल पर शिकायत की है।
क्या था सेक्शन 66 (ए) और क्यों हटाया गया?
आईटी एक्ट का सेक्शन 66 (ए) सोशल नेटवर्किंग साइट्स और मोबाइल फोन जैसे कम्युनिकेशन के डिवाइसेज के जरिए नफर फैलाने वाले या आपत्तिजनक मैसेज भेजने पर लागू होता था। इसमें 3 साल तक की सजा और जुर्माना हो सकता था। लेकिन इसी साल मार्च में सुप्रीम कोर्ट ने यह कहते हुए कि यह सेक्शन अभिव्यक्ति की आजादी (फ्रीडम ऑफ स्पीच एंड एक्सप्रेशन) के खिलाफ जाता है, इसे खत्‍म कर दिया था।

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