हमें चाहने वाले मित्र

05 जुलाई 2015

पहली बार

पहली बार किसी पोस्ट को पढ़कर आंसू आ गए ।,शख्सियत, ए 'लख्ते-जिगर, कहला न सका ।"जन्नत,, के धनी "पैर,, कभी सहला न सका ।.'दुध, पिलाया उसने छाती से 'निचोड़कर,मैं 'निकम्मा, कभी 1 ग्लास पानी पिला न सका ।.बुढापे का "सहारा,, हूँ 'अहसास, दिला न सका ।पेट पर सुलाने वाली को 'मखमल, पर सुला न सका ।.वो 'भूखी, सो गई 'बहू, के 'डर, से एकबार मांगकर,मैं "सुकुन,, के 'दो, निवाले उसे खिला न सका ।.नजरें उन 'बुढी, "आंखों,, से कभी मिला न सका ।वो 'दर्द, सहती रही में खटिया पर तिलमिला न सका ।.जो हर "रमज़ान,, 'ममता, के रंग पहनाती रही मुझे,उसे "ईद,, पर दो 'जोड़, कपडे सिला न सका ।."बिमार,, बिस्तर से उसे 'शिफा, दिला न सका ।'खर्च, के डर से उसे बडे़ 'अस्पताल, ले जा न सका ।."माँ" के बेटा कहकर 'दम, तौडने बाद से अब तक सोच रहा हूँ,'दवाई, इतनी भी "महंगी,, न थी के मैं ला ना सका ।.

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

दोस्तों, कुछ गिले-शिकवे और कुछ सुझाव भी देते जाओ. जनाब! मेरा यह ब्लॉग आप सभी भाईयों का अपना ब्लॉग है. इसमें आपका स्वागत है. इसकी गलतियों (दोषों व कमियों) को सुधारने के लिए मेहरबानी करके मुझे सुझाव दें. मैं आपका आभारी रहूँगा. अख्तर खान "अकेला" कोटा(राजस्थान)

Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...