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19 मई 2015

प्रताप को मिले खजाने से 12 साल तक चल सकता था 25000 सैनिकों का खर्च

प्रताप को मिले खजाने से 12 साल तक चल सकता था 25000 सैनिकों का खर्च

उदयपुर. राजकाज में जितनी जरूरत ताकत की थी, उतनी ही धन की भी। मेवाड़ के धन को सुरक्षित रखने वाले भामाशाह ने उस समय प्रताप को खजाना दिया, जब प्रताप मुश्किल घड़ी से गुजर रहे थे। यह खजाना इतना था कि प्रताप के 25 हजार सैनिकों का खर्च 12 साल तक चलया जा सकता था। धन देने के कारण भामाशाह प्रताप के परम सहयोगी कहलाए। वे न सिर्फ सहयोगी थे, बल्कि प्रताप के बचपन के मित्र भी थे। बताया जाता है कि भामाशाह अलवर के निवासी भारमल कावड़िया के बेटे और ताराचंद के भाई थे।
भारमल महाराणा उदयसिंह के समय चित्तौड़गढ़ आ गए थे। चित्तौड़गढ़ दुर्ग के पास स्थित हवेली में रहे। जब रानी जयवंता प्रताप को षड्यंत्र से बचाने के लिए दुर्ग से नीचे आकर रहने लगी। वे जिस हवेली में रही, वह भामाशाह की हवेली के पास ही थी। ऐसे में प्रताप और भामाशाह का साथ बचपन से ही रहा। भामाशाह और उनके पिता मेवाड़ राज्य के सच्चे स्वामिभक्त सेवक हुए। कई किताबों में पढ़ा जाता रहा है कि संपत्ति नहीं बचने के कारण प्रताप को मेवाड़ छोड़ना पड़ा।

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