पुलिस को खुफिया जानकारियां एकत्र करने के लिए मुस्लिम समुदाय के बीच भेजा गया। 2001 के आतंकवादी हमले के बाद से ही पुलिस ने खुफिया अभियान में तेजी लाई थी। वर्ष 2006 के दौरान पुलिस दस्तावेजों में कहा गया कि 250 से अधिक मस्जिदों की पहचान किए जाने के बाद कई संगठनों पर पुलिस ने निगरानी शुरू कर दी थी।
तुम अपने किरदार को इतना बुलंद करो कि दूसरे मज़हब के लोग देख कर कहें कि अगर उम्मत ऐसी होती है,तो नबी कैसे होंगे? गगन बेच देंगे,पवन बेच देंगे,चमन बेच देंगे,सुमन बेच देंगे.कलम के सच्चे सिपाही अगर सो गए तो वतन के मसीहा वतन बेच देंगे.
07 September 2011
न्यूयॉर्क में खुफिया तरीके से रखी जा रही थी मुसलमानों पर नज़र !
पुलिस को खुफिया जानकारियां एकत्र करने के लिए मुस्लिम समुदाय के बीच भेजा गया। 2001 के आतंकवादी हमले के बाद से ही पुलिस ने खुफिया अभियान में तेजी लाई थी। वर्ष 2006 के दौरान पुलिस दस्तावेजों में कहा गया कि 250 से अधिक मस्जिदों की पहचान किए जाने के बाद कई संगठनों पर पुलिस ने निगरानी शुरू कर दी थी।
सुलझते मामले तो मिलती ‘लीड’ और रुकते धमाके
नई दिल्ली. दिल्ली पुलिस, आईबी और राष्ट्रीय जांच एजेंसी अगर समय रहते विभिन्न आतंकी हमलों के तार सुलझाने में सफल रहती तो हाईकोर्ट के बाहर हुए धमाके को रोका जा सकता था। ये एजेंसियां अगर संजीदगी से पिछले दो साल के दौरान हुए छह मामले में किसी तरह की लीड हासिल करती तो अगले धमाकों को लेकर उसके हाथ बड़ी सूचनाएं लग सकती थी। जिससे इस धमाके को रोका जा सकता था।
पुणे जर्मन बेकरी बम धमाका फरवरी 2010-17 की मौत, जामा मस्जिद विस्फोट सितंबर 2010, वाराणसी धमाका दिसंबर 2010, चिन्ना स्वामी स्टेडियम धमाका अप्रैल 2010, दिल्ली हाईकोर्ट धमाका मई 2011, और मुंबई बम धमाका 13/7 ऐसे मामले हैं जिनमें पुलिस-जांच एजेंसियां साजिश की कड़ी और विभिन्न साक्ष्यों के तार जोडऩे में विफल रही। पुणे बम धमाके में प्रारंभिक स्तर पर आईएम का नाम लेने के बाद से जांच एजेंसियां अंधेरे में हैं। जामा मस्जिद बम धमाके में भी पुलिस के हाथ में कुछ नहीं है। उसे यह तक मालूम नहीं है कि इसमें किसका हाथ है। वाराणसी धमाके में भी आईएम (इंडियन मुजाहिदीन) का नाम लिया गया। लेकिन इस मामले में इससे आगे एक कदम भी जांच नहीं बढ़ पाई।
दिल्ली हाईकोर्ट धमाके में भी पुलिस किसी किनारे तक नहीं पहुंच पाई है। चिन्नास्वामी स्टेडियम धमाके में जांच एजेंसियों ने एक सलमान उर्फ छोटू को संदिग्ध करार दिया था। लेकिन इस मामले में भी उसे या फिर आईएम को कठघरे में खड़ा करने का कोई साक्ष्य एजेंसियों के हाथ नहीं लगा। 13/7 मुंबई धमाके के मामले भी पुलिस खाली हाथ है। रोचक यह है कि पुलिस-जांच एजेंसियों की यह हालत उस समय है जब केंद्रीय गृह मंत्री पी चिदंबरम लगातार सूचना एजेंसियों के आपसी तालमेल के साथ ही उनके बीच बेहतर संवाद और कार्यप्रणाली में सुधार का दावा कर रहे हैं।
आतंकवाद को पैसा मुहैया कराने वालों की धरपकड़ की कवायद
नई दिल्ली. केंद्र ने आतंकी कार्रवाई के लिए वित्त उपलब्ध कराने वाले संगठनों और लोगों को सुरक्षा एजेंसियों के राडार पर लाने का जिम्मा अब एक और एजेंसी को दिया है। सूत्रों ने बताया कि वित्त मंत्रालय के अधीन गठित होने वाला आपराधिक जांच निदेशालय (डीसीआई) के कार्यों में सभी गैर-कानूनी फंड के स्त्रोत पर निगाह रखना है। इसमें आतंकवादी व नक्सल घटनाओं को अंजाम देने से संबंधित फंड पर निगाह रखना भी शामिल है। यह दायित्व क
कांग्रेसी मंत्री ने कहा- अन्ना जैसे बनें पंच-सरपंच, सांसद ने वापस लिया नोटिस
कांग्रेसी मंत्री ने कहा- अन्ना जैसे बनें पंच-सरपंच, सांसद ने वापस लिया नोटिस
जयपुर. राजस्थान के पंचायती राज मंत्री भरतसिंह ने प्रदेश के पंच-सरपंचों से अन्ना हजारे की राह पर चलने की अपील की है। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों को अन्ना की निष्ठा-ईमानदारी से सीख लेते हुए क्षेत्रों में विकास योजनाओं को क्रियान्वित करना चाहिए। ‘द हंगर प्रोजेक्ट’ की ओर से बुधवार को आयोजित राज्य के महिला पंच-सरपंचों के सम्मेलन में भरतसिंह ने अन्ना की तारीफ की।
उन्होंने कहा कि अन्ना ने अपने गांव में घर-घर जाकर खामियां ढूंढी और उसका समाधान निकाला। उनकी ईमानदारी से सीखते हुए हमें भी विकास योजनाओं को क्रियान्वित करना चाहिए। सिंह के इस बयान से सभागार में कुछ देर के लिए सन्नाटा पसर गया, लेकिन बाद में खूब तालियां बजीं।
कांग्रेस की ओर से टीम अन्ना के लिए एक और राहत भरी खबर आई। पार्टी के सांसद प्रवीण सिंह ऐरन ने अन्ना हजारे टीम के सदस्यों किरण बेदी, अरविंद केजरीवाल और प्रशांत भूषण के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का नोटिस वापस ले लिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि ये लोग इस नोटिस के जरिए ‘सस्ती लोकप्रियता’ पाने की कोशिश कर रहे हैं।
लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार को लिखे पत्र में बरेली के सांसद ऐरन ने कहा कि वे बेदी, केजरीवाल और भूषण के अलावा अभिनेता ओमपुरी के खिलाफ अपना विशेषाधिकार नोटिस वापस ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि वे इन लोगों को विशेषाधिकार नोटिस के जरिए दंडित करने की बजाय उनका ‘असली चेहरा’ लोगों के सामने लाएंगे। ऐरन ने कहा कि बेदी, केजरीवाल और भूषण ने हाल में जो बयान दिए हैं उससे पता चलता है कि उन्होंने कांग्रेस को निशाना बनाने के लिए ‘सस्ती राजनीति’ का हथकंडा अपनाया है। ये लोग जनता की आवाज उठाने की आड़ में अपने हितों या फिर कुछ बहुराष्ट्रीय कंपनियों के हितों के लिए काम रहे हैं। इसके लिए भ्रष्टाचार के खिलाफ जनता की भावना को भुना रहे हैं। उन्होंने कहा कि वे टीम अन्ना के सदस्यों के आरोपों का जवाब ‘लोकतांत्रिक तरीके’ से देंगे।
इस बीच, पुणे में अन्ना हजारे के वकील मिलिंद पवार ने बुधवार को बताया कि वे इसी हफ्ते कांग्रेस सांसद व प्रवक्ता मनीष तिवारी को कानूनी नोटिस भेजने जा रहे हैं। अन्ना के खिलाफ की गई टिप्पणी के लिए तिवारी से लिखित माफी की मांग की जाएगी। तिवारी ने अन्ना को भ्रष्टाचार में लिप्त बताया था। हालांकि बाद में उन्होंने मौखिक माफी मांग ली थी।
विस्फोट से तीन घंटे पहले ही 'पाकिस्तानी' ने बना ली थी ईमेल आईडी, गूगल के पास पहुंची एनआईए
नई दिल्ली. बुधवार को दिल्ली हाईकोर्ट के बाहर काउंटर पर हुए विस्फोट के तीन घंटे बाद मीडिया संस्थानों को जो ईमेल भेजा गया था, उसका कोई सुराग अब तक हाथ नहीं लगा है। मदद के लिए अमेरिका में गूगल मुख्यालय को चिट्ठी लिखी गई है। अब तक की जांच से बस इतना पता चला है कि harkatuljihadi2011@gmail.com (जिस आईडी से मेल भेजा गया) आईडी बुधवार सुबह 7.30 बजे ही बनाई गई थी। इसे ऑटो डिलीट मोड में बनाया गया था, ताकि एक सप्ताह बाद (14 सितंबर को) यह आईडी अपने आप डिलीट हो जाए। आईडी बनाते समय बनाने वाले ने देश के कॉलम में पाकिस्तान भरा था। हालांकि इस बारे में कोई अंतिम नतीजा निकालने से पहले एनआईए की टीम गूगल की रिपोर्ट का इंतजार कर रही है।
एनआईए के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक वे अभी इंटरनेट प्रोटोकॉल (आईपी) एड्रेस पता करने की कोशिश में हैं और इसके लिए गूगल से भी मदद मांगी है। धमाके के कुछ घंटे बाद ही इसकी जांच एनआईए को सौंप दी गई है। एनआईए ने इसके लिए 20 सदस्यों की टीम बनाई है। इसके महानिदेशक एससी सिन्हा ने बताया कि हूजी के धमाके की जिम्मेदारी लेने के दावे की जांच जारी है। विस्फोट स्थल से बरामद मलबा सीएफएसएल दिल्ली जांच के लिए भेजा गया है। गांधीनगर सीएफएसएल की एक टीम भी जांच में साथ है। सीएफएसल की रिपोर्ट आज आ सकती है।
दिल्ली हाईकोर्ट के बाहर बुधवार की सुबह हुए शक्तिशाली बम धमाके में 11 लोगों की मौत हो गई। 76 लोग घायल भी हुए हैं। यह बम एक सूटकेस में रखा गया था। विस्फोट हाईकोर्ट परिसर के बाहर गेट नंबर 4 और 5 के बीच सुबह 10:14 बजे हुआ। तब सैकड़ों लोग व वकील परिसर में प्रवेश के लिए इंतजार कर रहे थे। संसद का सत्र जारी रहने की वजह से दिल्ली में हाई अलर्ट था। इसके बावजूद विस्फोट हुआ। गृह मंत्रालय ने इसे आतंकी हमला करार दिया है। देशभर में अलर्ट जारी किया गया है। घायलों में से चार की हालत गंभीर है। घायलों को राम मनोहर लोहिया, एम्स और अन्य अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। गौरतलब है कि दिल्ली हाईकोर्ट के बाहर गत २५ मई को भी आतंकियों ने धमाका किया था।
बुधवार को हुए धमाके की तीव्रता का अंदाजा इसी से लग जाता है कि इसकी चपेट में आए कुछ लोगों के हाथ व पैर धड़ से अलग हो गए। कुछ ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। धमाके की गूंज मौके से लगभग दो किमी दूर विजय चौक तक सुनाई दी। विस्फोट से करीब एक फुट गहरा और चार फीट चौड़ा गड्ढा हो गया। गृहमंत्री पी चिदंबरम ने संसद में एक बयान में इस हमले को आतंकी कार्रवाई बताया। उन्होंने कहा कि इस भीषण जुर्म के पीछे जिन लोगों का हाथ है उन्हें कठघरे में खड़ा किया जाएगा।
धमाके के करीब तीन घंटे बाद हरकत-उल-जिहादी इस्लामी (हूजी) ने कुछ मीडिया समूहों को भेजे ई-मेल में इस हमले को अंजाम देने का दावा किया। ई-मेल के अनुसार अफजल गुरु को फांसी की सजा माफ कराने के लिए यह विस्फोट किया गया। हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट उसके निशाने पर हैं। संसद पर हमले के मामले का मुजरिम अफजल फिलहाल जेल में बंद है।
आतंकवाद रोकने के लियें देश में अलग से आतंकवाद निरोधक मंत्रालय स्थापित करना आवश्यक
नेताओं पर भड़का गुस्सा: राहुल के खिलाफ नारेबाजी, मल्होत्रा को बोलने से रोका
नई दिल्ली. देश की राजधानी दिल्ली में हाईकोर्ट के बाहर हुए आतंकी हमले के बाद कांग्रेस और सरकार के प्रति लोगों का जबरदस्त गुस्सा नजर आ रहा है। कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी राम मनोहर लोहिया अस्पताल घायलों को देखने पहुंचे तो वहां लोगों ने उनके और कांग्रेस के खिलाफ नारे लगाना शुरू कर दिया। वहीं, बीजेपी अध्यक्ष नितिन गडकरी और भाजपा नेता विजय कुमार मल्होत्रा भी जब अस्पताल पहुंचे तो एक मृतक के पिता ने उन्हें बोलने से रोक दिया। मृतक के पिता ने कहा कि उन्हें नेताओं के भाषण की जरूरत नहीं है।
केंद्रीय गृह मंत्री पी. चिदंबरम को भी नेता-अभिनेता सभी सार्वजनिक रूप से कोस रहे हैं। सवाल कई मुद्दों को लेकर उठ रहे हैं। बम धमाके में मारे गए और घायल लोगों के प्रति संवेदना दिखाने के लिए संसद की कार्यवाही स्थगित करने पर तो सत्ताधारी कांग्रेस के सांसद ने ही सवाल उठाया है। शशि थरूर ने कहा है कि कार्यवाही स्थगित करने के बजाय संसद के काम करते रहने से आतंकवादियों को कड़ा संदेश जाता।
थरूर ने ट्वीट कर कहा, 'दिल्ली धमाका पीड़ितों के प्रति संवेदना व्यक्त करने के लिए संसद की कार्यवाही स्थगित कर दी गई है। देश का काम चलने देने से ज्यादा मजबूत संदेश जाता। दुनिया को पता चलता कि आतंकी हमले हमें रोक नहीं सकते।' प्रीतीश नंदी सहित कई हस्तियों ने शशि थरूर की राय से सहमति जताई। उन्होंने ट्वीट किया, 'मैं शशि जी आपकी बात से सहमत हूं। संसद चलती रहनी चाहिए थी। हम आतंक से डर नहीं सकते।'
उधर, सदन के भीतर जद (यू) अध्यक्ष शरद यादव ने कहा, 'गृहमंत्री जी यहां से एक किलोमीटर दूर यह घटना हुई है। कभी हमसे भी राय ले लीजिए। हम आपके सहयोग में खड़े हैं। पूरा देश आपके साथ खड़ा है। सबकी राय लें।'
शेखर कपूर ने भी निकाली भड़ास, 'नेताओं को वोट के साथ चाहिए जनता का मांस'
नई दिल्ली. दिल्ली हाईकोर्ट के बाहर आज सुबह हुए धमाके को लेकर आम लोगों का गुस्सा तो सामने आ ही रहा है, मशहूर हस्तियां भी अपनी भड़ास निकालने में पीछे नहीं हैं। कई फिल्मी हस्तियों ने देश के राजनेताओं और गृह मंत्री पी चिदंबरम को कोसा है।
मशहूर फिल्मकार शेखर कपूर का कहना है कि भारत का राजनीतिक तंत्र सिर्फ अपनी सुरक्षा में लगा है। इसलिए आतंकवादी आसानी से देश को निशाना बनाते हैं। शेखर ने ट्वीट किया है, ‘राजनेता आम जनता पर ध्यान ही नहीं देते हैं। यदि आम भारतीय मरता है तो ही राजनेताओं को उनकी याद आती है, ऐसे में नेताओं की नजर में आने के लिए लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ेगी।’
शेखर ने अस्पतालों का दौरा करने वाले नेताओं पर टिप्पणी करते हुए कहा, ‘अब इन नेताओं को देखिए। ये देश की राजधानी को मृतकों और घायलों की राजधानी बनाना चाहते हैं। चुनावों में उन्हें वोट देना ही अब काफी नहीं है बल्कि आपको अब अपना एक पौंड मांस भी देना होगा।’
मशहूर अभिनेता अनुपम खेर ने ट्वीट किया है, 'गृहमंत्री जी जाग जाइए। कृपया इस देश के लोगों की जान बचाइए। बेगुनाह और आम लोगों का जीवन भी महत्वपूर्ण होता है।'
फिल्म निर्माता अशोक पंडित ने कहा, ‘चिदंबरम से अब किसी बयान की उम्मीद नहीं है। जब हाईकोर्ट के बाहर सुरक्षा के ये हालात हैं तो अन्य जगहों की क्या उम्मीद की जा सकती है।’
हुजी ने लिया अफजल को सजा-ए-मौत का बदला, वकील के वेश में रखा बम! 12 की मौत
हुजी ने लिया अफजल को सजा-ए-मौत का बदला, वकील के वेश में रखा बम! 12 की मौत
नई दिल्ली. देश की राजधानी दिल्ली में हाईकोर्ट के बाहर बुधवार सुबह सवा दस बजे हुए धमाके में 12 लोग मारे गए हैं जबकि 65 घायल हुए हैं। घायलों में कई की हालत गंभीर है। विस्फोट इतना जबरदस्त था कि घटनास्थल पर 3-4 फुट गहरा गड्ढा हो गया है। अदालत के गेट नंबर पांच के पास हुए इस धमाके की जिम्मेदारी आतंकी संगठन हरकत उल जिहाद इस्लामी (हूजी) ने ली है। मीडिया को भेजे ई मेल में कहा गया है, ‘हम दिल्ली हाईकोर्ट के पास हुए बम धमाके की जिम्मेदारी लेते हैं। हमारी मांग है कि मोहम्मद अफजल गुरु की फांसी की सजा तत्काल वापस ली जाए। नहीं तो हम बड़े उच्च न्यायालयों और सुप्रीम कोर्ट को भी निशाना बनाएंगे।’
दिल्ली में आज जिस सूटकेस में विस्फोटक रख कर हाई कोर्ट के बाहर धमाका कराया गया, उसे वकील बन कर आए किसी शख्स ने रखा था। खुफिया एजेंसी के एक सूत्र के मुताबिक, 'जिस तरह का ब्रीफकेस वकील रखते हैं, वैसे ही ब्रीफकेस में विस्फोटक रखा गया था। शायद इसलिए कि इस ब्रीफकेस को लावारिस देख कर भी किसी को शक नहीं हो।' दिल्ली पुलिस चश्मदीदों के बयान के आधार पर दो संदिग्धों के स्केच तैयार कर रही है।
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) के प्रमुख एस सी सिन्हा के मुताबिक एनआईए के 20 सदस्यों की विशेष टीम को ब्लास्ट की जांच सौंपी गई है। एनआईए चीफ ने कहा कि यह कहना जल्दबाजी होगी कि इस धमाके में हूजी का हाथ है। हालांकि हूजी की ओर से भेजे गए मेल पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है।
महाराष्ट्र एटीएस की टीम भी जांच में सहयोग करने के लिए दिल्ली आ रही है। एनएसजी के जवान भी घटनास्थल पर जांच के लिए पहुंचे। एनएसजी और फॉरेंसिक की टीम ने हालांकि कुछ सैंपल ले लिए हैं लेकिन इसके बाद बारिश की वजह से कुछ सबूत धुल जाने की आशंका है। डॉग स्क्वॉयड को भी अभी तक कुछ हाथ नहीं लगा है। गृह सचिव के मुताबिक धमाके में आईईडी और टाइमर का इस्तेमाल किया गया है। अमोनियम नाइट्रेट का भी इस्तेमाल किए जाने की खबर है। बांग्लादेश दौरे पर गए पीएम मनमेाहन सिंह ने बम धमाके की निंदा करते हुए इसे कायराना हरकत करार दिया है।
हाईकोर्ट में 25 मई को भी एक छोटा धमाका हुआ था। केंद्रीय गृहमंत्री पी. चिदंबरम ने कहा है कि खुफिया एजेंसियों ने 20 जुलाई को दिल्ली पुलिस को अलर्ट दे दिया था। इसके बावजूद आतंकी वारदात को अंजाम देने में कामयाब रहे। सरकार ने आज धमाके के बाद दिल्ली सहित पूरे देश में अलर्ट जारी कर दिया है। संसद भवन की सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गई है। संसद भवन घटनास्थल से ज ढाई किलोमीटर की दूरी पर है। हाईकोर्ट के आसपास की इमारतों पर सेना के जवान तैनात कर दिए गए हैं
06 September 2011
ऐ मेरे देश के सांसदों थोड़ा शर्म करों क्या यही है संसद के विशेषाधिकार
नल कटा आर एस एस का हाथ ..बिजली गुल आर एस एस का हाथ ..पेट में दर्द मुस्लिम तुष्टिकरण या फिर दाउद इब्राहिम का हाथ हां हाह
ईश्वर ने किया इस कुत्ते के साथ अनोखा 'करिश्मा'

आठ साल के इस कुत्ते के कान 12.25 इंच लंबे हैं। हैरत की बात यह है कि इसके दाहिने कान की लंबाई 13.5 इंच है जो कि बांये कान से लंबा है। साल 2012 के लिए 15 सितंबर को रिलीज होने वाली गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में इसका नाम दर्ज किया गया है।
तस्वीरों में देखिए इसके लंबे कान वाले हार्बर को...



वफादार' के साथ ऐसा व्यवहार, मालिक ने की क्रूरता की हदें पार

1 वर्षीय अलबर्टो कास्टानेडा और 59 वर्षीय मारिया बेनुएलो को उस वक्त गिरफ्तार किया गया जब पशु नियंत्रण अधिकारियों ने उनके घर पर एक साल के काले लैब्राडोर को घायल अवस्था में पाया।
अलबर्चो के अनुसार उनके पालतू कुत्ते को एक कार ने टक्कर मार दी थी, जिसके कारण उसका बायां पैर बुरी तरह कुचला गया था। अलबर्टो ने बताया कि वे उसके इलाज के लिए वेट्रनेरीअन डॉक्टर का मंहगा इलाज खर्च नहीं उठा सकते थे इसलिए उन्होंने उसका इलाज नहीं करवाया।
पशु नियंत्रण विभाग के अधिकारियों ने बताया कि इस लैब्रडोर के घावों पर किसी भी तरह की मरहम-पट्टी नहीं की गई थी। यहां तक कि उसे किसी भी तरह का पेनकिलर इंजेक्शन भी लगाया गया था या नहीं, इस बात पर भी संशय बना हुआ है।
केर्न काउंटी पशु नियंत्रण के मैनेजर मेथ्यू मास ने बताया "किसी भी जानवर, इंसान और जानवर के प्रति ऐसा क्रूर व्यवहार नहीं किया जाना चाहिए, जितना कि इस कुत्ते के साथ किया गया है। फिलहाल केर्न पशु शेल्टर फाउंडेशन द्वारा इस कुत्ते के इलाज के लिए पैसे इकट्ठा कर लिए गए हैं और अब इसे सर्जरी के लिए लॉस एंजिल्स भेजा जाएगा। इसके इलाज में लगभग 8,000 पाउंड का खर्च आएगा।


नोट के बदले वोट: अन्ना ने की फांसी की मांग, आज निशाने पर होंगे पीएम
नई दिल्ली. गांधीवादी अन्ना हजारे ने मांग की है कि संसद या विधानसभा में पैसे लेकर वोट देने वाले जनप्रतिनिधि को फांसी दी जाए। रालेगण सिद्धि के पद्मावती मंदिर में संवाददाताओं से बातचीत में उन्होंने यह टिप्पणी की। लोकपाल के मुद्दे पर अनशन कर सरकार को झुकाने वाले हजारे ने कहा कि संसद और विधानसभाओं के उन भ्रष्ट सदस्यों को दंडित करने के लिए भारत को कठोर कानूनों की जरूरत है जो सवाल पूछने या सदन में अपने कर्तव्य निर्वहन के लिए रिश्वत लेते हैं।
अमर सिंह की गिरफ्तारी के बारे में हजारे ने कहा कि यह दर्शाता है कि निहित स्वार्थ रखने वाले कुछ लोग हमारे लोकतंत्र के पवित्र मंदिर में प्रवेश कर गए हैं। उन्होंने कहा, ‘अगर केंद्र सरकार इस मामले की ईमानदारी से जांच करे तो इससे हमारी राजनीतिक व्यवस्था के मूल्यों में आई कमी की वास्तविक तस्वीर सामने आ जायेगी।’
उन्होंने कहा कि उनके किसी भी राजनीतिक दल या आरएसएस जैसे संगठनों से संबंध नहीं हैं। उन्होंने कहा, ‘जनलोकपाल आंदोलन में शामिल हर एक व्यक्ति में भारत को भ्रष्टाचार मुक्त और समस्याओं से मुक्त बनाने का जज्बा है।’
उधर, नोट के बदले वोट कांड में मंगलवार को अमर सिंह व दो पूर्व पार्टी सांसदों की गिरफ्तारी के बाद भाजपा इस मुद्दे को लेकर एक बार फिर आक्रामक हो उठी है। बुधवार को पार्टी संसद में इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाने की तैयारी में है और उसके निशाने पर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह होंगे।भाजपा महासचिव और मुख्य प्रवक्ता रविशंकर प्रसाद ने कहा कि सिंह की गिरफ्तारी सही दिशा में लिया गया कदम है मगर इस बात की जांच भी होना जरूरी है कि सांसदों का वोट खरीदने में असली लाभार्थी कौन थे। प्रसाद ने हैरानी जताई कि एक तरफ केंद्र व्हिसल ब्लोअर यानी भ्रष्टाचार को उजागर करने वालों के संरक्षण के लिए कानून बनाने जा रही है तो दूसरी ओर ऐसा करने वालों को जेल भेजा जा रहा है। पार्टी की दलील है कि दिल्ली पुलिस केंद्रीय गृहमंत्रालय के अधीन हैं और पुलिस की छानबीन उससे सीधे प्रभावित नजर आती है।
सूत्रों ने बताया कि बुधवार को संसद में हंगामा तय है क्योंकि एक तरफ गुजरात के लोकायुक्त के मामले पर भाजपा अपने कड़े रुख पर कायम है तो दूसरी ओर नोट के बदले वोट कांड से उसे और ताकत मिल गई है।
विक्लिंक्स के असान्जे और पागलखाना ......
पेंसिलों से लिखो यह जरूरी नहीं ..इनसे बिना लिखे भी काफी कुछ बना सकते है हम जरा देख लो
तिमंजिला मकान ढहा, मां-बेटी की मौत, रोते हुए कटी रात
हादसा ठाकुर पचेवरजी के रास्ते में मकान नंबर 570 में हुआ। इसके पिछले हिस्से में पदमचंद जैन परिवार के साथ रहते हैं। निजी कंपनी में कार्यरत जैन सुबह नौकरी पर चले गए थे। उनकी पत्नी रानी (50) व बेटी छवि उर्फ आशिमा (20) घर पर थीं। दोपहर करीब पौने 2 बजे तिमंजिला मकान भरभराकर ढह गया। तेज धमाके की आवाज से घबराकर आसपास के लोग घरों से बाहर आए और रामगंज पुलिस को सूचना दी। मकान में मौजूद चार-पांच जनों के दबे होने की सूचना मिलने पर अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त बीजू जार्ज जोजफ, नागरिक सुरक्षा के उपनियंत्रक फूलचंद चौधरी, सीएफओ ईश्वर लाल व निगम के कार्यवाहक सीईओ एमपी मीणा मय जाब्ते घटनास्थल पर पहुंचे।
पौने 4 बजे शुरू हुआ राहत कार्य
पड़ोसियों से मलबे में रानी व उनकी बेटी छवि के दबे होने का पता चलने पर दोपहर 3:30 बजे इमरजेंसी रिस्पांस टीम (ईआरटी) के कमांडो बुलाए गए। उन्होंने ह्यूमन डिटेक्टर व वायब्रो स्कोप से मलबे में दबी मां-बेटी के जिंदा होने की संभावना जाहिर की। पौने 4 बजे से नागरिक सुरक्षा व आपदा प्रबंधन के कर्मचारियों ने पहली मंजिल पर मलबा हटाना शुरू किया। कुछ देर बाद मलबे में छवि का शव दिखाई पड़ा। आपदाकर्मियों ने 4.30 बजे शव को मलबे से निकालकर एंबुलेंस से एसएमएस पहुंचाया।
फफक पड़े पदम चंद
हादसे के बाद पड़ोसियों ने मोबाइल फोन पर पदम चंद को घटना की जानकारी दी। वे दोपहर 3:30 बजे घर पहुंचे। बेटी व पत्नी के मलबे में दबे होने का पता चलने पर पदम चंद फफकते हुए बदहवास हो गए। परिजनों ने उन्हें संभाला। उनका बेटा अनुराग गाजियाबाद में एक कंपनी में इंजीनियर है। उसे सूचना दे दी गई है।
अक्सर बालकनी में खड़ी रहती थी
पदम चंद के पड़ोसी दीपक अग्रवाल ने बताया कि रानी जैन व उनकी बेटी छवि अक्सर मकान की बालकनी में खड़ी होकर बातें करती रहती थीं। सोमवार को बारिश होने से दोनों मां-बेटी शायद कमरे में थीं, अगर वे बाहर होतीं तो बच सकती थीं। जिस मकान में पदम चंद रहते हैं, उसी में चार परिवार और रहते हैं। पड़ोसी अनिल चांदवाड़ ने बताया कि छवि व उसकी मां मिलनसार व हंसमुख प्रवृत्ति की थीं।
लगा, बिजली आ गिरी
अनिल के बेटे मनीष ने बताया कि घटना के वक्त वह मकान की तीसरी मंजिल पर कमरे में बैठा था। एकाएक मकान के गिरने पर हुई तेज आवाज सुनकर लगा, मानो कोई बिजली आ गिरी हो। इस पर बाहर आकर देखा, तो धूल का गुबार उठ रहा था।
पुलिस की नाक में किया दम, सरकार के लिए सिरदर्द बनी यह महिला
जोधपुर। राज्य के एक कैबिनेट मंत्री की कथित सीडी को लेकर चर्चा में आई एएनएम भंवरी देवी की तलाश में पुलिस के आला अफसर दिन-रात एक करने में लगे हैं।
सीडी में मंत्री, विधायक समेत तीन नेताओं के नाम सामने आने के कारण रेंज आईजी और ग्रामीण एसपी रात तक बिलाड़ा थाने में डेरा जमा कर उसकी तलाश करवा रहे हैं और एएनएम से जुड़े प्रत्येक व्यक्ति को थाने लाकर पूछताछ कर रहे हैं। पुलिस को एएनएम की हत्या या आत्महत्या की भी आशंका है, इसलिए जोधपुर-पाली के कुओं, बावड़ियों में भी तलाश की जा रही है।
हालांकि एएनएम के पति ने उसके एक सितंबर से लापता होने की रिपोर्ट दी थी, लेकिन चिकित्सा विभाग के मुताबिक वह 25 अगस्त से नौकरी पर नहीं आ रही थी। पुलिस इन सात दिनों में एएनएम से मिलने व फोन पर बात करने वालों की छानबीन कर रही है।
सोमवार को पुलिस ने एएनएम का इश्तिहार जारी कर सूचना देने वाले को इनाम की घोषणा की है। साथ ही सुरक्षा के नाम पर उसके पति को भी पुलिस की निगरानी में रखा हुआ है। पुलिस ने पीएचईडी के उस कांट्रेक्टर को भी पकड़ रखा है जिससे पैसे लेने का कह कर एएनएम घर से निकली थी।
एक एएनएम, तीन नेता और पूरी पुलिस फोर्स
तीन सीडी, तीन नेता
भंवरी देवी को तलाश करना पुलिस के लिए चुनौती और सरकार का सिरदर्द बना हुआ है। सूत्रों के अनुसार भंवरी के पास तीन सीडी है। इन सीडी से संबद्ध व्यक्तियों में प्रदेश के एक कैबिनेट मंत्री, विधायक और पूर्व उप जिला प्रमुख भी शामिल हैं। इसलिए रेंज आईजी उमेश मिश्रा और ग्रामीण एसपी नवज्योति गोगोई एएनएम भंवरी की तलाश में पूरी ताकत झोंक रहे हैं और हर पल की जानकारी भी सरकार को भेज रहे हैं।
7 दिनों की गुत्थी में उलझी पुलिस
बोरुंदा में नियुक्तएएनएम भंवरी देवी के पति अमरचंद नट ने उसके एक सितंबर को लापता होना बताया है, जबकि जांच में पता चला है कि वह 24 अगस्त को अंतिम बार स्वास्थ्य केंद्र गई थी। उसके बाद वह बिना सूचना गैरहाजिर चल रही है। इन सात दिनों में वह कहां थी, इस संबंध में उसके पति से पूछताछ की जा रही है। पुलिस ने इन सात दिनों में उसके मोबाइल की कॉल डिटेल भी निकाली है तथा जिन लोगों से उसकी बात हुई थी, उनसे भी पूछताछ की जा रही है।
पीएचईडी ठेकेदार से सुराग की उम्मीद
अमरचंद के मुताबिक उसकी पत्नी भंवरी एक सितंबर को खेजड़ला में तिलवासनी निवासी सोहनलाल विश्नोई से मिलने गई थी। अमरचंद का कहना है कि वह सोहनलाल से स्विफ्ट कार बेचने पर बकाया राशि लेने गई थी। पुलिस ने सोहनलाल को भी थाने में बैठा दिया है। सोहनलाल पीएचईडी का ठेकेदार है और काफी समय से भंवरी के संपर्क में था। पुलिस सोहन की बातों को तस्दीक कर रही है।
इनाम घोषित किया
जोधपुर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक उमेश मिश्रा ने बताया कि एएनएम भंवरी देवी की तलाश के लिए कई जगह टीमें भेजी गई हैं। कॉल डिटेल, पति और सोहनलाल से पूछताछ में सामने आए लोगों से भी पूछताछ कर रहे हैं। पुलिस ने एएनएम का फोटो व पेंफ्लेट जारी कर उसकी सूचना देने वाले को इनाम की घोषणा कर दी है। भंवरी का कद 5 फीट 6 इंच और रंग गोरा है। उसने कत्थई रंग की डिजाइनदार साड़ी पहन रखी है और उसके दाएं हाथ पर ‘बी’ लिखा हुआ है।
मेरे सोने के दांत दिख जाते न।'
पुलिस वाला: 'तो आप चिल्लाएं क्यों नहीं?'
आदमी: 'अगर मैं चिल्लाता तो, मेरे सोने के दांत दिख जाते न।'
मिस कॉल कर देना !
भिखारी: बाबूजी भूखा हूँ ! थोड़ा सा खाना दे दो !
आदमी : खाना अभी नहीं पका !
भिखारी: आप नम्बर लिख लो जब खाना पक जाये तो मिस कॉल कर देना !
नोट के बदले वोट कांड में अमर सिंह गिरफ्तार: नहीं चली बीमारी की दलील, 19 तक जेल
नई दिल्ली. 'नोट के बदले वोट' मामले में राज्यसभा सांसद और समाजवादी पार्टी के पूर्व महासचिव अमर सिंह पर शिकंजा कस गया है। दिल्ली की एक अदालत ने अमर सिंह की जमानत याचिका खारिज करते हुए उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेजने का हुक्म दिया। इस मामले में अमर सिंह के साथ दो अन्य अभियुक्तों बीजेपी के पूर्व सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते और महावीर सिंह भगोरा को भी न्यायिक हिरासत में भेजा गया है। कोर्ट ने इन अभियुक्तों से कहा है कि वो चाहें तो 19 सितंबर को नियमित जमानत की अर्जी दाखिल कर सकते हैं। वैसे अमर सिंह की अंतरिम जमानत पर 8 सितंबर को सुनवाई होगी।
चूंकि अदालत ने 19 सितंबर को इन अभियुक्तों को बेल के लिए आवेदन करने को कहा है, ऐसे में अमर सिंह को 19 सितंबर तक तिहाड़ जेल में रहना पड़ सकता है। उनके वकील 19 सितंबर को ही जमानत अर्जी दायर कर सकते हैं। इस तरह ‘नोट के बदले वोट कांड’ में अब तक पांच गिरफ्तारियां हो गई हैं। पहली गिरफ्तारी संजीव सक्सेना की हुई थी जिस पर अमर सिंह के घर से एक करोड़ रुपये भाजपा के दो सांसदों के घर पहुंचाने का आरोप है। सक्सेना पर आरोप है कि उसने उस दिन अमर सिंह के घर पर कई बार फोन किया और इन पैसों को दोनों सांसदों तक पहुंचाने के लिए अमर सिंह की कार का इस्तेमाल किया। दूसरी गिरफ्तारी बिचौलिए सुहैल हिंदुस्तानी की थी।
इससे पहले अदालत के कड़े रुख के बाद अमर सिंह को कोर्ट में पेश होना पड़ा । तीस हजारी कोर्ट में पेश हुए अमर सिंह ने कहा, ‘मैं कमजोर हूं, छिपने की कोशिश नहीं कर रहा था। टीवी पर मैंने जो कुछ देखा, उसे देखकर बेहद व्यथित हुआ। इसके बाद मैंने फैसला किया कि अब मुझे कोर्ट में पेश होना चाहिए। मुझे गंभीर इंफेक्शन है। मुझे इलाज के लिए हर तीन महीने पर विदेश जाना पड़ता है।’
इससे पहले अमर के वकील ने अपने मुवक्किल की तबियत का हवाला देकर कोर्ट में पेशी से छूट मांगी थी। हालांकि इस पर कोर्ट ने अमर सिंह से सभी मेडिकल रिकॉर्ड मांगे। कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को भी फटकार लगाई है। अदालत ने पुलिस से पूछा कि अब तक अमर सिंह को इस मामले में गिरफ्तार क्यों नहीं किया गया।
विशेष न्यायाधीश संगीता ढींगरा सहगल ने आज मामले की सुनवाई करते हुए पहले इसे दोपहर तक के लिए टाल दिया। वकील असगर खान ने बताया कि उनके मुवक्किल की तबियत खराब है इसलिए वो कोर्ट में निजी तौर पर उपस्थित नहीं हो सकते। कोर्ट ने इस मामले में अमर सिंह से मेडिकल रिपोर्ट मांगी। अमर के वकील ने कोर्ट को बताया कि उनके मुवक्किल का गुर्दा प्रत्यारोपित हुआ है। जब कोर्ट ने पूछा कि यह कब हुआ तो वकील का जवाब था कि करीब साल भर पहले। इस पर अदालत संतुष्ट नहीं हुआ और बेल के लिए अमर की इस बीमारी को कोई आधार नहीं मानते हुए अर्जी खारिज कर दी।
दरअसल में टीवी रिपोर्ट के मुताबिक अमर सिंह ने हाल में मुंबई स्थित लालबाग के राजा के पंडाल गए थे। ऐसे में जब अमर के वकील 19 सितंबर को बेल के लिए अर्जी दायर करेंगे तो यह सवाल उठ सकता है कि यदि अमर को ‘गंभीर बीमारी’ है तो वो किस तरह मुंबई चले गए और भीड़ भाड़ वाले गणपति मंडप में पूजा अर्चना की।
भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी के पूर्व सहयोगी सुधींद्र कुलकर्णी भी अदालत में पेश नहीं हुए। वे इनदिनों अमेरिका में हैं। कुलकर्णी ने भी कोर्ट में पेश होने से छूट मांगी है।
2008 में विश्वास मत के दौरान संसद में नोट की गड्डियां उछाली गई थीं। बीजेपी के सांसदों को आरोप था उन्हें घूस देकर यूपीए के पक्ष में वोट देने को कहा गया है। इस घटना के कारण संसद में भारी हंगामा हुआ था। इस मामले में दिल्ली पुलिस ने आरोपपत्र दाखिल किया है। विशेष न्यायाधीश संगीता ढींगरा सहगल ने 25 अगस्त को अमर सिंह, बीजेपी के पूर्व सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते, महावीर भगोरा और सुधींद्र कुलकर्णी को समन जारी किया था। दिल्ली पुलिस की दलील को स्वीकार करते हुए न्यायाधीश ने आरोपियों को समन भेजकर छह सितम्बर को अदालत में पेश होने को कहा था।
05 September 2011
अब दिल्ली में गूंजी आवाज
सिंह ने दिल्ली से फोन पर ‘भास्कर’ को बताया कि एमएचआरडी के उच्चाधिकारियों ने उन्हें आश्वस्त किया है कि एआई ईईई,2012 के परीक्षा केंद्रों की सूची में कोटा का नाम फिर से शामिल करने पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है। इसके साथ ही आईआईटी-जेईई,12 का परीक्षा केंद्र भी फिर से बहाल करने पर विचार किया जाएगा। वे पहले भी ध्यानाकर्षण के जरिए इस मुद्दे को लोकसभा में उठा चुके हैं।
सांसद ने अधिकारियों को बताया कि देश-विदेश में कोटा की ख्याति शैक्षणिक नगरी के रूप में है। वहां देश के कोने-कोने से लाखों छात्र-छात्राएं एआई ट्रिपल ई और आईआईटी-जेईई की तैयारी करने कि लिए आते हैं। ये विद्यार्थी पूरे साल कोटा में ही रहते हैं, इसलिए उन्हें यहां की अनुकूल परिस्थितियों में ही परीक्षा देने का अवसर मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह कोटा के आम नागरिकों की आवाज है। पूर्व पार्षद बृजेश शर्मा नीटू ने बताया कि इस मुद्दे पर कोटा के नागरिक व छात्र शक्ति सांसद के साथ हैं।
महापौर व कांग्रेस प्रवक्ता भी आगे आए
इधर, एआई ट्रिपल ई का परीक्षा केंद्र बहाल करने की मुहिम में सोमवार को महापौर डॉ.रत्ना जैन ने भी हस्ताक्षर करके अपना समर्थन दिया। राजीव गांधी नगर में 500 से ज्यादा स्टूडेंट्स ने परीक्षा केंद्र खोलने के समर्थन में बैनर पर हस्ताक्षर किए। इस मौके पर महापौर ने कहा कि कोटा देश में एजुकेशन सिटी के नाम से जाना जाता है, ऐसे में यहां प्रमुख प्रवेश परीक्षाओं के सेंटर न होना दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने आईआईटी,मुंबई के निदेशक को पत्र भेजकर यहां जेईई,2012 का सेंटर भी बहाल करने की मांग की। कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता पंकज मेहता ने कहा कि वे प्रधानमंत्री, एचआरडी मंत्री और मुख्यमंत्री स्तर पर निरंतर इस मुद्दे को उठाते आ रहे हैं, सीबीएसई को गंभीरता से विचार करना चाहिए।
वीडियोगेम के शौकीन हैं तो यहां ज़रूर जाएं

1990 के दशक अंत में ये म्यूजियम कुछ समय के लिए खोला गया था और 2000 में बंद हो गया था। इसके बाद जनवरी 2011 में इसे दोबारा शुरू किया गया है। म्यूजियम का मकसद 1951 से लेकर अब तक वीडियो गेम्स से संबंधित सभी क्षेत्रों की जानकारी लोगों को देना है। म्यूजियम की एक दीवार पर 50 हैंडहेल्ड और होम वीडियो गेम्स प्रदर्शित हैं। गेम्स के शौकीन यहां कॉमोडोर 64, द गेम बॉय और 1990 का पॉपुलर गेम निंटैंडो भी देख सकते हैं।





नौकरी से निकालने पर बना लिया गिरोह
मोहाली में तैयार करते थे फर्जी सर्टिफिकेट
उन्होंने जाली सर्टीफिकेट बनाने के लिए मोहाली स्थित घर में कंप्यूटर व अन्य उपकरण लगा लिए। बाद में सुखदेव सिंह की मौत हो गई तो बलबीर ने गुरप्रीत सिंह के साथ मिलकर जाली सर्टीफिकेट बनाने का काम जारी रखा और अपने गिरोह को मजबूत कर लिया। उसने पंजाब सहित अन्य राज्यों में जाली सर्टीफिकेट सप्लाई करने शुरू कर दिए।
परीक्षा कंट्रोलर बदलने पर दस्तखत भी बदले
आरोपी जाली सर्टीफिकेट तैयार करने के लिए हर बारीकी पर ध्यान रखते थे। वे संबंधित यूनिवर्सिटी में परीक्षा कंट्रोलर बदलने पर असल सर्टीफिकेट पर किए कंट्रोलर के हस्ताक्षरों की हूबहू कॉपी करते थे। इसके लिए उन्होंने कई यूनिवर्सिटीज के स्टाफ से संपर्क बना रखे थे।
एसएसपी गुरप्रीत सिंह गिल ने कहा कि आरोपियों से पता लगाया जा रहा है कि उनके विभिन्न यूनिवर्सिटी के किस स्टाफ के साथ संपर्क हैं। विभिन्न राज्यों में सप्लाई का सूत्र बनने वाले आरोपियों को भी काबू करने का प्रयास किया जा रहा है। आरोपियों से बरामद कंप्यूटर व अन्य उपकरणों को साइबर लैब में जांच के लिए भेज दिया है।
पंजाबी यूनिवर्सिटी में जांच : पंजाबी यूनिवर्सिटी पटियाला के परीक्षा कंट्रोलर पवन कुमार सिंगला ने कहा कि उनके पास सीआईए स्टाफ के कुछ अधिकारी आए थे। उन्होंने जाली सर्टीफिकेट्स की बारीकी से जांच की है। इसमें पता चला कि ये सर्टीफिकेट्स स्कैन करके तैयार किए गए।
आगे क्या : फर्जी सर्टीफिकेट बनाने वाले गिरोह के दो सदस्य गिरफ्त में आने के बाद अब पुलिस तीसरे फरार आरोपी जसविंदर की तलाश कर रही है जो ग्राहक ढूंढ़कर लाता था। उसके काबू में आने के बाद इस गिरोह के विभिन्न राज्यों में फैले नेटवर्क का खुलासा होगा। गिरोह ने जिन लोगों को फर्जी सर्टिफिकेट बांटे हैं, उनमें से कई वर्तमान में सरकारी विभागों में कार्यरत हैं। इन पर भी गाज गिरना तय है। पुलिस पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़ व पंजाबी यूनिवर्सिटी पटियाला के स्टाफ से पूछताछ कर यह भी पता लगा रही है कि आरोपियों के साथ यूनिवर्सिटीज के कौन कर्मचारी मिले हुए थे।
















