राजकुमार ग्वालानी जी एक सहज ह्रदय के म्रदु भाषी संस्कारिक लेखक हें ग्वालानी जी पिछले १५ वर्षों से देशबन्धु समाचार पत्र में पत्रकार रहे हें और वर्तमान में भी रायपुर जो छत्तीसगढ़ की राजधानी हे वहां के एक प्रतिष्ठित समाचार पत्र के खोजी पत्रकार सम्पादक हे , पत्रकार होने के नाते निरंतर लेखन से जुड़े रहने के अकारण ग्वालानी जी के पास मुद्दों की कमी नहीं हे पत्रकारिता में कई लोग दुश्मन भी होते हें लेकिन ग्वालानी जी की पत्रकारिता एक ऐसी आदर्श पत्रकारिता हे के उन्हें लोगों का प्यार ही प्यार मिला हे रायपुर में पत्रकारिता के अखाड़े में सभी को चित करने के बाद ग्वालानी जी ने फरवरी २००९ में ब्लोगिंग की राह पकड़ी और फिर उन्होंने पीछे मूढ़ कर नहीं देखा . ग्वालानी जी ने पत्रकारिता के कमाल और हुनरमंदी के खेल ब्लोगिंग में दिखाए ब्लोगिंग की दुनिया को एक करने का प्रयास किया अपने सुझावों अपनी पोस्टों से ग्वालानी जी ने ब्लोगर्स को एक नया सन्देश दिया अपनापन दिया .ग्वालानी जी ने फरवरी २००९ में ब्लोगिंग शुरू कर सबसे तेज़ बढ़ते अखबार की तरह केवल ११ माह में दिसम्बर २००९ तक ९०५ पोस्टें पूरी कर ली थी . राजतन्त्र के नाम से ब्लोगिंग की दुनिया में झंडे गाढ़ने वाले पहले ऐसे ब्लोगर हे जो भाईचारा और सद्भावना की ब्लोगिंग करते हें अपने ब्लॉग पर खुद के अलावा अपने साथियों के लिंक ब्लॉग भी शामिल हे चर्चा के नाम पर ग्वालानी जी की शख्सियत ब्लोगिंग की दुनिया में किसी के परिचय की मोहताज नहीं रही हे और इसीलियें इंडिया ब्लोगिंग रेंक में भी यह आगे हें जबकि इनके २१ लिंक और खेल्गढ़,स्वप्निल,ललित.कॉम.अमीर धरती गरीब लोग , शरद कोकास , चर्चा पान की दुकान पर जेसे ब्लॉग भी उन्होंने राजतन्त्र का हिस्सा बना रखे हे इस वर्ष इनकी ७३१ प्रविष्टियों पर अब तक ५२११ टिप्पणियाँ इन्हें मिल चुकी हे लाखों लोग इनके ब्लॉग के पाठक हे और इतना सब होने पर भी ग्वालानी जी हे के बस ब्लोगिंग के झगड़ों तकरारों से अलग थलग अपने लेखन के माध्यम से ज्ञान और प्यार बाँट रहे हें ऐसे ब्लोगर को मेरी तरफ से सलाम ................. अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान
तुम अपने किरदार को इतना बुलंद करो कि दूसरे मज़हब के लोग देख कर कहें कि अगर उम्मत ऐसी होती है,तो नबी कैसे होंगे? गगन बेच देंगे,पवन बेच देंगे,चमन बेच देंगे,सुमन बेच देंगे.कलम के सच्चे सिपाही अगर सो गए तो वतन के मसीहा वतन बेच देंगे.
25 मार्च 2011
पत्रकारिता से ब्लोगिंग की सफलता तक का ग्वालानी जी का सफ़र
राजकुमार ग्वालानी जी एक सहज ह्रदय के म्रदु भाषी संस्कारिक लेखक हें ग्वालानी जी पिछले १५ वर्षों से देशबन्धु समाचार पत्र में पत्रकार रहे हें और वर्तमान में भी रायपुर जो छत्तीसगढ़ की राजधानी हे वहां के एक प्रतिष्ठित समाचार पत्र के खोजी पत्रकार सम्पादक हे , पत्रकार होने के नाते निरंतर लेखन से जुड़े रहने के अकारण ग्वालानी जी के पास मुद्दों की कमी नहीं हे पत्रकारिता में कई लोग दुश्मन भी होते हें लेकिन ग्वालानी जी की पत्रकारिता एक ऐसी आदर्श पत्रकारिता हे के उन्हें लोगों का प्यार ही प्यार मिला हे रायपुर में पत्रकारिता के अखाड़े में सभी को चित करने के बाद ग्वालानी जी ने फरवरी २००९ में ब्लोगिंग की राह पकड़ी और फिर उन्होंने पीछे मूढ़ कर नहीं देखा . ग्वालानी जी ने पत्रकारिता के कमाल और हुनरमंदी के खेल ब्लोगिंग में दिखाए ब्लोगिंग की दुनिया को एक करने का प्रयास किया अपने सुझावों अपनी पोस्टों से ग्वालानी जी ने ब्लोगर्स को एक नया सन्देश दिया अपनापन दिया .ग्वालानी जी ने फरवरी २००९ में ब्लोगिंग शुरू कर सबसे तेज़ बढ़ते अखबार की तरह केवल ११ माह में दिसम्बर २००९ तक ९०५ पोस्टें पूरी कर ली थी . राजतन्त्र के नाम से ब्लोगिंग की दुनिया में झंडे गाढ़ने वाले पहले ऐसे ब्लोगर हे जो भाईचारा और सद्भावना की ब्लोगिंग करते हें अपने ब्लॉग पर खुद के अलावा अपने साथियों के लिंक ब्लॉग भी शामिल हे चर्चा के नाम पर ग्वालानी जी की शख्सियत ब्लोगिंग की दुनिया में किसी के परिचय की मोहताज नहीं रही हे और इसीलियें इंडिया ब्लोगिंग रेंक में भी यह आगे हें जबकि इनके २१ लिंक और खेल्गढ़,स्वप्निल,ललित.कॉम.अमीर धरती गरीब लोग , शरद कोकास , चर्चा पान की दुकान पर जेसे ब्लॉग भी उन्होंने राजतन्त्र का हिस्सा बना रखे हे इस वर्ष इनकी ७३१ प्रविष्टियों पर अब तक ५२११ टिप्पणियाँ इन्हें मिल चुकी हे लाखों लोग इनके ब्लॉग के पाठक हे और इतना सब होने पर भी ग्वालानी जी हे के बस ब्लोगिंग के झगड़ों तकरारों से अलग थलग अपने लेखन के माध्यम से ज्ञान और प्यार बाँट रहे हें ऐसे ब्लोगर को मेरी तरफ से सलाम ................. अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान
में पतझड़ हूँ तू हरियाली हे
में पतझड़ हूँ
इसीलियें तो
तेरी सख्त शाखों से
यूँ टूट टूट कर
बिखर रहा हूँ
तुझ से
यूँ अलग होकर
रोज़ नीचे
जमीन पर
गिर रहा हूँ
बस
तू ही हे
जो हरियाली हे
इसीलियें तो
मासूम कोपलों की तरह
खुबसूरत हरे भरे
पत्तों की तरह
यूँ इन कठोर
टहनियों के
सीने से लगे बेठे हो ..................................
अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान
उफ़ ... यह हालत प्यार बांटने वाले की
यह जो
कोने में
घुटनों के बल
दोहरा हुआ बेठा
सिसक रहा हे
यह वही हे
जो कल
हंसता मुस्कुराता
लोगों को हंसाता
दुनिया में
अपनापन ,प्यार
बांटने चला था
दुनिया में खुशिया
मुस्कुराहटें बांटने चला था ...............
अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान
खिदमतगार को कुछ इनाम दे दो
तुम्हें पता हे
कई वर्षों से
में तुम्हारा
खिदमतगार हूँ
कई सालों से
में तुम्हारा
सिर्फ तुम्हारा
तलबगार हूँ
मेरी इस
चाहत के बदले
आज मुझे
बस इतना इनाम दे दो
वोह देखो
आशियाना जल रहा हे
तुम्हारी याद में मेरा
थोड़ा जल्दी जल जाए
इसलियें उठो
बस वहां थोड़ी से हवा दे दो
में तुम्हारा खिदमतगार
तुम्हारा तलबगार रहा हूँ
बस मुझे माँगा हे जो मेने
वोह इनाम दे दो ...................
अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान
मेरे अपनों का पत्थर दिल पर लगा ...............
प्यार
अमन चेन
सुकून
अपनापन
खोजने
जब में चला
इस खोज में
पत्थर तो मुझे
बहुत लोगों ने मारे
बहुत लोगों ने
किया
मुझे लहू लुहान
लेकिन
एक पत्थर
जिसने
मेरे दिल को चीरा हे
वोह किसी और ने नहीं
मेरे अपनों ने
मुझ पर
उच्छाला था यारों
मेरे अपनों ने
मुझ पर
हां मुझ पर
मेरे अपनों ने
यही पत्थर उछाला था ................... अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान
ब्लोगिंग में टीका टिप्पणी की दुनिया भी अजीब हे
दोस्तों यह ब्लोगिंग की दुनिया भी अजीब हे ब्लोगिंग की इस दुनिया में कभी ख़ुशी कभी गम तो कभी दोस्ती कभी दुश्मनी का माहोल गरम हे ब्लॉग की दुनिया में कई अच्छे अच्छे ऐसे लेखक हे जो स्थापित नहीं हो सके हें बहतरीन से बहतरीन लेखन बिना टिप्पणी का अनटच पढ़ा रहता हे जबकि एक सामान्य से भी कम घर गृहस्ती का न समझ में आने वाला लेखन दर्जनों टिप्पणिया ले जाता हे .
ब्लोगिंग की दुनिया यह पक्षपात या रोग हे जिसे अपनी अपनी ढपली अपना अपना राग भी कहा जा सकता हे मेरे एक दोस्त जो हाल ही के नये ब्लोगर हें उन्होंने बहतर से बहतर लेखन पर भी टिप्पणिया नहीं आने का राज़ जब मुझसे पूंछा तो में निरुत्तर था इन ब्लोगर जनाब की खुद की कम्पुटर की दूकान हे साइबर केफे हे सो इन्होने सभी ब्लोगर्स जो रोज़ अपने लेखन पर दर्जनों टिप्पणियाँ प्राप्त करते हें प्रिंट आउट निकलवाकर कई साहित्यकारों पत्रकारों से जंचवाया सभी ने जो लेखन दर्जनों टिप्पणी प्राप्त कर चुके थे उन्हें स्तरहीन ,व्यक्तिगत और मनमाना लेखन माना लेकिन जो लेखन एक भी टिप्पणी प्राप्त नहीं कर सका था उसको बहतरीन लेखन बताया यह ब्लोगर जनाब मेरे पास सभी की राय और सेकड़ों प्रिंट आउट लेकर आये में खुद सकते में था में समझ नहीं पा रहा था के इन नये जनाब ब्लोगर भाई को बेहतरीन लेखन के बाद भी टिप्पणियाँ क्यों नहीं मिल पा रही हे में सोचता रहा ब्लोगिंग की दुनिया में फेले जिस रोग से में भी पीड़ित हूँ में भी गिव एंड टेक के एडजस्टमेंट का बीमार हूँ और मेरी जिन पोस्टों को अख़बार की दुनिया ने सराहा हे पाठकों ने सराहा हे उन्हें भी प्रारम्भ में ब्लोगिंग की दुनिया में किसी ने देखना भी मुनासिब नहीं समझा खेर में तो लिखने के जूनून में व्यस्त हूँ में पीछे मुड़कर देखना नहीं चाहता लेकिन मुझे इन नये काबिल पत्रकार ब्लोगर को तो जवाब देना था उनका सवाल में एक बार फिर दोहरा दूँ आखिर बहतर लिखने वाला अगर पूल में शामिल नहीं हे तो उसे वाह और टिप्पणिया क्यूँ नहीं मिलती और जो स्तरहीन निजी लेखन हे उन पर भी पूल होने के बाद दर्जनों टिप्पणियाँ केसे मिल जाती हे तो जनाब इस सवाल का जवाब देने के लियें मेने एक तकनीक अपनाई और वोह नीचे अंकित हे.
जनाब हमारे कोटा में एक गुमानपुरा इलाका हे यहाँ एक मिठाई की और इसी नाम से नमकीन की मशहूर दूकान हे इस दूकान पर ब्रांड नेम बिकता हे दूकान के नाम से ही मिटाई बेशकीमती होती हे और लोग लाइन में लग कर इस दूकान से महंगी मिठाई खरीद कर ले जाते हें में इन ब्लोगर भाई को पहले इस दूकान पर मिठाई खिलाने ले गया वहन की दो तीन मिठाइयाँ टेस्ट की और भाव ताव किया एक कागज़ पर हर मिठाई का नाम और कीमत लिखी , फिर में इन जनाब को इंदिरा मार्केट ब्रिज्राज्पुरा एक दूकान नुमा कारखाने पर ले गया उनकी मिठाई की भी दूकान हे और मकबरा थाने के सामने एक ठेला भी लगता हे लेकिन सारी मिठाई इसी कारखाने में कारीगर बनाते हें मेने और इन जनाब ब्लोगर भाई ने इस दूकान पर वही महंगी दुकान वाली मिठाइयों के भाव पूंछे टेस्ट किया मिठाई वही थी लेकिन कीमत आधी थी जो मिठाई यहाँ दो सो से तीन सो रूपये किलो की थी वोह मिठाई इस गुमानपुरा की दूकान पर ६०० से एक हजार रूपये किलो थी मेने इन जनाब को बताया देखो मिठाई वही हे ब्रांड का फर्क हे जो मिठाई कम कीमत में भी कोई नहीं पूंछ रहा वही मिठाई महगी दुकान पर लोग लाइन लग कर ले रहे हें हम बाते कर ही रहे थे के इतनी देर में एक जनाब आये और वोह इस कारखाने का बना सारा माल एक टेम्पो में भर कर यहाँ से इसी सस्ते दामों में अपनी महंगी दूकान पर ले गये यानी इस कारखाने में जो मिठाई बन रही थी वही मिठाई कम कीमत देकर अपने ब्रांड से अपने डिब्बे में महंगे दामों में बेचीं जा रही थी मेरी इस तरकीब से नये ब्लोगर भाई को तुरंत बात समझ में आ गयी के ब्लोगर की दुनिया में भी अच्छा और बेहतर लेखन नहीं केवल और केवल ब्रांड ही चलता हे पूल बनता हे ग्रुप बनता हे और एक दुसरे को उठाने एक दुसरे को गिराने का सिलसिला चलता हे लेकिन मेने उनसे कहा के में आपकी बात से सहमत नहीं हूँ यहाँ कुछ बुरे हें तो बहुत सरे लोग इतने अच्छे हें जिनकी मदद से आप जर्रे से आफताब बन सकते हो और मेने उन्हें कुछ मेरे अनुभव मेरे अपने गुरु ब्लोगर भाईयों के किस्से मदद के कारनामे सुनाये तो यह जनाब थोड़े संतुष्ट हुए अब हो सकता हे के यह जनाब भी मेरे गुरु ब्लोगरों से सम्पर्क करे अगर ऐसा हुआ तो मुझे यकीन हे के मेरे गुरु ब्लोगर इन जनाब की मदद कर मेरे भरोसे को और मजबूत बनायेंगे और एक ऐसा वातावरण तय्यार करेंगे जिससे कोई अच्छा लिखें वाला छोटा ब्लोगर खुद को उपेक्षित और अकेला न समझे तभी इस ब्लोगिंग के कुछ दाग हट सकेंगे ............................. . अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान
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