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07 January 2011

नरेगा कार्यक्रम में भ्रस्ताचार

राजस्थान में बारां जिले के अन्ता कस्बे में नरेगा कार्यक्रम में भ्रस्ताचार की शिकायतों के बाद जब जाँच की गयी तो ३४ लाख रूपये का घोटाला सामने आया हे , अधिकारीयों ने अधीनस्थ अधिकारीयों को इसका दोषी मानकर उनसे ३४ लाख रूपये की रिकवरी के आदेश दिए हें , नरेगा कार्यक्रम में सरकार की लापरवाही के कारण यह सब घोटाले हो रहे हें क्योंकि केंद्र और राजस्थान सरकार ने नरेगा काम काज की समीक्षा के लियें विधिक प्रावधान के तहत समितियां अभी तक गठित नहीं की हे मजेदार बात तो यह हे के केंद्र के पंचायत मंत्री सी पी जोशी ने आज तक भी इस दिशा में कोई पहल नहीं की हे ताकि जनहित में नरेगा भ्रस्ताचार रुक सके ।
नरेगा और महा नरेगा नियमों के तहत देश में केंद्र सरकार ने कानून बनाया हे जिसके तहत प्रत्येक जिले में इस कार्य की समीक्षा और मोनिटरिंग के लियें आवश्यक रूप से समितियों के गठन की बाध्यता हे जिसमें क्षेत्र के वकील,पत्रकार,समाजसेवक सहित कुछ अधिकारीयों को सदस्य बनाने का प्राव्धना हे लेकिन सरकार जानती हे के वकील और पत्रकार दो ऐसे समाज हें जो सरकार के अधिकारीयों की कठपुतली नहीं बनेंगे इसलियें दो वर्षों में अरबों रूपये खर्च हो गया हे लेकिन इस खर्च की वैधानिक समीक्षा के लियें विधि अनुसार समितियों का गठन कर समीक्षा नहीं की गयी हे क्योंकि आज कल नेता और अधिकारी चोर चोर मोसेरे भाई का नारा लगा रहे हें और इसीलियें जनता को समाज सेवकों को पत्रकारों को वकीलों को इस समिति से दूर रखा गया हे जबकि इससे कानून की धज्जियां उढ़ रही हे । अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग भी विवाद में

देश में आम नागरिकों के अधिकारों की सुरक्षा करने के लियें बनाया गया राष्ट्रिय मानवाधिकार आयोग इन दिनों विवाद के घेरे में हे हालात यह हें के वर्ष १९९३ से आज तक पहली बार राष्ट्रिय मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष विवादों के घेरे में आये हें ।
वर्तमान में सेवानिव्रत्त सुप्रीमकोर्ट के न्यायधीश के जी बल्लाक्र्ष्ण राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष हे और उन पर सुप्रीम कोर्ट का जज रहते पद के दुरूपयोग के आरोप लगाये गये हें उन पर पद पर रहते अपने रिश्तेदारों को विधि विरुद्ध नियुक्तिया दिलवाने के आरोप हे इन आरोपों के चलते के जी बालकृष्ण के भाई ने स्वास्थ कारणों से इस्तीफा दे दिया हे । देश में पहली बार इतने बढ़े पद पर बेठे लोग विवादों के घेरे में आये हे वेसे यह विवादों का ही काल हे यहाँ हाईकोर्ट सुप्रीम कोर्ट के जज से लेकर प्रधानमन्त्री केन्द्रीय मंत्री, राज्यों के मुख्यमंत्री और वरिष्ठतम अधिकारीयों सहित भ्रस्ताचार की जांच करने वाली संस्था सतर्कता आयुक्त के अधिकारी भी विवादों के घेरे में रहे हे यह सब नियुक्तियों में भ्रस्ताचार का नतीजा हे । अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

स्कुल बंद करने की नाफरमानी महंगी पढ़ी

तेज़ गलन और सर्दी के चलते बच्चों के स्वास्थ को देखते हुए राजस्थान सरकार ने निजी और सरकारी स्कूलों की जब छुट्टी कर दी और परीक्षाएं स्थगित कर दी तब भी कोटा के एक निजी स्कुल द्वारा अर्द्ध वार्षिक परीक्षाएं लेने के मामले में सरकार ने गम्भीरता से लिया हे और जाँच शुर कर दी गयी हे ।
कोटा के मकबरा इलाके में स्थित नवभारत स्कुल में अवकाश के दोरान स्कुल अध्यापकों ने बच्चों को बुला कर परीक्षाएं ले लीं इसकी शिकायत जब कोटा जिला शिक्षा अधिकारी के पास पहुंची तो उसे पता चला के इस स्कुल में परीक्षा लेने के कारण आठवीं के पेपर आउट हो गये हे क्योंकि यही पेपर दुसरे स्कूलों में भी जाना थे और इस कार्य से शिक्षा विभाग को काफी नुकसान हुआ हे साथ ही शिक्षा विभाग को अब पराने पेपर रद्दी की टोकरी में डालकर नये पेपर छपवाने पढ़ेंगे इस लियें इस स्कुल की अब शामत आ गयी हे और दो दिन से अधिकारी विधि नियमों के तहत इस स्कुल की जांच प्ध्तल कर रहे हे तो इस तरह से इस स्कुल के संचालक को स्कुल बंद करने की नाफरमानी महंगी पढ़ गयी हे । अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

जज एम्पायर नहीं जज होता

कोई भी जज किसी अभियुक्त के खिलाफ पर्याप्त सबूत होने के बाद भी उसे तकनीकी कारणों से अगर अपराध मुक्त करता हे तो ऐसा जज जज नहीं केवल सिटी बजाने वाला एम्पायर होता हे यह डाइलोग कोई फिल्म का डाइलोग नहीं बलके एक अपराधिक मामले में एक अधिकारी को बरी करने के खिलाफ अपील में सुनवाई के बाद दिए गये एक दिल्ली हाईकोर्ट के जज के उदगार हें ।
दिल्ली हाईकोर्ट के जज ने एक मेट्रोपोलिटन जज द्वारा एक अधिकारी के खिलाफ पर्याप्त सबूत होने पर भी जब उसे तकनीकी कारण बता कर बरी कर दिया तो इस मामले की अपील की सुनवाई के दोरान हाईकोर्ट के जज साहब न गम्भीर टिप्पणी करते हुए कहा के यह क्या हो रहा हे जज जज होता हे जज कोई रेफरी नहीं होता उसे पत्रावली में सबूत देख कर मूकदर्शक नहीं बने रहना चाहिए और सही फेसला करना चाहिए किसी भी तकनीकी कारणों से दोषी व्यक्ति को छोड़ा जाना न्यायसंगत नहीं हे अब तक सरकारी अधिकारीयों , नेताओं और प्रभावशाली लोगों को अदालतों द्वारा पर्याप्त सबूत होने के बाद भी तकनीकी कारणों से छोड़े जाने की एक लम्बी श्रंखला हे जिस पर हो सकता हे इस फेसले से रोक लगे और दोषी चाहे छोटा हो चाहे बढा हो उसे दंड मिलना शुरू हो जाए । अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

राजस्थान में विधवा परित्यक्ताएँ अब मुसीबत में

राजस्थान में विधवा और परित्यक्ता महिलाओं को अब अपना परिवार पालने के लियें नोकरी करना महंगा पढ़ गया हे राजस्थान सरकार ने ऐसी उपेक्षित और पीड़ित महिलाओं को नोकरी देने के मामले में जो उदार नियम बनाये थे अब उन्हें नोकरी देने के लियें उदारता छोड़ कर सरकार ने कठोर निर्णय लिया हे और पीड़ित को सार्वजनिक आम लोगों के साथ जोड़ कर एक अलग नियम बना दिया हे । इस नये नियम के तहत अब तलाकशुदा महिलाओं और विधवाओं को भी आम अभ्यर्थी कीतरह पहले परीक्षा देना पढ़ेगी फिर कहीं उसे अलग से आरक्षित कोटे की मेरिट में आने पर नोकरी दी जायेगी जबकि इसके पहले विधवा और तलाकशुदा महिलाओं को राजस्थान सरकार तत्काल नोकरी देती रही हे इसके लियें कोई परीक्षा नहीं ली गयी हे और अध्यापक पद पर तेनात महिलाओं से तो नोकरी देकर बाद में बी एड वगेरा का प्रशिक्ष्ण करवाया जाता रहा हे लेकिन सरकार की इस योजना से राजस्थान की पीड़ित उपेक्षित और तलाकशुदा विधवाएं परेशान हो गयी हें क्योंकि अब समाज में उन्हें खुद को स्थापित करने के लियें कठिन अमानवीय दोर से गुजरना होगा वी तो इस मामले में राजस्थान की ही कोंग्रेसी नेता गिरजा व्यास जो राष्ट्रीय महिला आयोग की चेयरमेन हें उन्हें हस्तक्षेप कर सरकार को रोकना चाहिए वरना सरकार की इस बेवकूफी को फिर अदालतें तो रोकेंगी ही सही । अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

प्याज खोरों की धरपकड़

दोस्तों सुनने बढ़ा अजीब लगता हे के देश में अब प्याज़ खोर पैदा हो गये हें जो प्याज़ की जमाखोरी कर प्याज के मूल्यों को आसमां पर ले गये हें इस मामले में सरकार ने जमाखोरों और प्याज्खोरों के खिलाफ जनता को दिखने के लियें कथित अभियान तो चलाया हे लेकिन नतीजा सिफर हे , प्याज खोरों को सरकार को सब पता हे कोन प्याज व्यवसाय से जुड़ा हे कोन प्याज का स्टोक रखता हे इसकी सुचना देश के सभी जिलों की क्रषि मंडियों और रसद अधिकारीयों रसद निरीक्षकों को हे लेकिन देश के नेताओं को इसकी जानकारी नहीं हे ।
एक तरफ तो देश की जनता प्याज के आंसू रो रही हे और दूसरी तरफ प्रधानमन्त्री , किर्षिमंत्री ,वित्तमंत्री सहित युद्ध में उलझे हुए हें अख़बारों से ही प्याज के दाम बढ़ रहे हें वायदा व्यापार बंद नहीं किया जा रहा हे स्टोक की जांच नहीं की जा रही हे और बस जनता को उल्लू समझ कर अखबारी बयान दिए जा रहे हे तो दोस्तों इन सब सरकारी हरकतों से तो जनता को एक और क्रान्ति के लियें तय्यार रहना होगा वरना देश और देश की जनता को तो यह प्याज्खोर जमाखोर और नेता मिल जुल कर तबाह और बर्बाद कर देंगे । अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

एक आतंकवादी स्वामी का कुबुलनामा

जी हाँ दोस्तों एक स्वामी जो साधू संत होने का ढोंग करता हे , जो धर्म के आधार पर समाज सेवा की बात करता हे जो सुख शांति के उपदेश देने का नाटक करता हे वही स्वामी असीमानंद अगर दरगाह पर ,ट्रेन में , सार्वजनिक स्थानों पर बम विस्फोट कर निर्दोष लोगों की जान लेने की बात कुबूल करता हे तो कुछ अजीब सा लगता हे लेकिन इस देश में हिन्दू हो या मुस्लिम सिक्ख हो या इसाई सभी धर्मों की तरबियत में कहीं ना कहीं इतनी गड़बड़ियां और व्यवसायीकरण हो गया हे के अधिकतम लोगों ने धर्म का चोला ओढ़ कर धर्म के नाम पर आतंकवाद बरपाना शुरू कर दिया हे ।
दोस्तों स्वामी असिमान्न्द जेसे कितने ही हिन्दू मुस्लिम धार्मिक नेता हें जो धर्म का मुखोटा ओढ़ते हें धर्म के लियें अपना सब कुछ त्याग करने की बात करते हें लेकिन फिर सुख सुविधाओं के मोह में राजनीति में आ जाते हें और फिर राजनीति इन्हें गंदा करती हे या यह राजनीति को गंदा करते हें यह तो सियासत से जुड़े लोग ही बता पायेंगे लेकिन यह सच हे के स्वामी जी ने कल अजमेर दरगाह बम विस्फोट मामले में खुद अपने बयान मजिस्ट्रेट के समक्ष एक अपराध कुबुल्नामे के रूप में दर्ज कराए हें और उन्होंने साफ़ तोर पर आर एस एस सहित भाजपा को इस आतंकवाद के लियें उनके कारनामों के साथ जुड़ा होना बताया हे देश के लियें धर्म के नाम पर आतंकवाद एक शर्मसार कर देने वाला मसला रहा हे जो मोलवी जो साधू धर्म को सुख शान्ति की दिशा देकर भाईचारे सद्भावना का पाठ पढ़ाने के लियें वचनबद्ध हे वही लोग अगर आग के शोले और बम लेकर निकल पढ़ेंगे तो फिर इस देश का और इस देश की जनता का क्या होगा दोस्तों यह कहने को तो एक सामान्य सी घटना हे लेकिन अब देश को देश के लोगों को इस मामले में सोचना होगा देश के मन्दिर हो चाहे मस्जिद हो गिरजा हों चाहे गुरूद्वारे हों अगर उनसे जुड़े लोगों की और उनके प्रबंधकों गुरुओं सन्यासियों मोलवियों की सरकार एक जांच रिपोर्ट तय्यार करे तो निश्चित तोर पर इस मामले में रोक तो लगेगी ही और जनता और धर्म से जुड़े लोगों को भी देश के हित में इस व्यवस्था में मदद करना चाहिये खेर अभी स्वामी असिमान्न्द के बम विस्फोत्र कुबुल्नामे ने भाजपा और आर एस एस की नींद उदा दी हे और उन्होंने इसे राजनितिक स्टंट करार दिया हे देखते हें आगे क्या होता हे लेकिन यह जो कुछ भी हो रहा हे यह सब मेरे देश की महानता को नष्ट करने की एक साज़िश हे जिसे में और आप तो कमसे कम बर्दाश्त नहीं करेंगे तो दोस्तों उठो जाग्रति पैदा करो ऐसे लोगों के खिलाफ जो देश और समाज को बाँटने के लियें धर्म की आढ़ लेते हें ऐसे लोगों को तो समाज खुद ही नंगा कर देश हित में अगर बिजली के खम्बे पर लटका दे तो मेरे देश की महानता को को छीन नहीं सकता करेंगे ना हम सब मिलकर ऐसा ............... ? अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

अब सरकारी खर्च पर वकील देने का कानून

देश में राष्ट्रिय विधिक न्यायिक प्राधिकरण का कानून बनाकर अब गरीबों को न्याय प्राप्त करने के लियें एक विशेष कानून बना कर सुप्रीम कोर्ट से लेकर ताल्लुका स्तर तक सरकारी खर्च पर वकील उपलब्ध कराए जायेंगे ।
नये संशोधित राष्ट्रीय विधिक न्यायिक प्राधिकरण अधिनियम के प्रावधानों में सुप्रीम कोर्ट , हाईकोर्ट और जिला न्यायालयों के स्तर पर वकीलों का एक पेनले बनेगा जिसमें सुप्रीम कोर्ट में बीस,हाईकोर्ट में पन्द्राह,जिला न्यायालयों में दस और ताल्लुका न्यायालयों में पांच वकील स्थायी पेनल के रूप में चयनित किये जायेंगे जो चयनित गरीबों को न्याय दिलाने के लियें हमेशा न्यायालय में उपलब्ध रहेंगे इसके लियें बनाये गये इस कानून में विशिष्ठ प्रक्रिया अपनाकर पहले तो प्रस्तुत प्रार्थना पत्र पर पीड़ित को गरीब घोषित किया जायेगा और फिर उसे आवश्यकतानुसार पेनल से वकील उपलब्ध कराया जायेगा जिसमे सुप्रीमकोर्ट में पन्द्राह हजार रूपये प्रतिमाह, हाईकोर्ट में दस हजार रूपये प्रतिमाह , जिला सेशन न्यायधीश में पांच हजार रूपये प्रतिमाह और ताल्लुका स्तर पर तीन हजार रूपये प्रतिमाह सरकार वकीलों को भत्ता देगी सरकार की शर्त हे के ऐसे चयनित वकील इमादारी से गरीबों के इयें हमेशा न्यायालय वक्त पर उपस्थित रहेंगे और गरीब पक्षकारों का मुकदमा लड़ेंगे ।
संविधान के प्रावधानों के तहत मुफ्त विधिक सहायता प्रावधनों को देखते हुए पहले प्रति मुकदमा वकीलों को शुल्क दिए जाने का प्रावधान था लेकिन अब इस नियम से वकील एक मुश्त भत्ता प्राप्त कर पक्षकार के प्रति जवाबदार भी रहेगा देखते हें इस कानून को सरकार अब किस तरह से जिला स्तर तक के न्यायालयों में लागू करती हे । अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

केलेंडर फिर लोट आया हे

दोस्तों
यह एक सच हे
जो बहुत लोगों को पता हे
बहुत लोगों को पता नहीं
के वक्त लोट कर आता हे
और हाँ
वर्ष २००५ का वक्त एक बार फिर
लोट आया हे
नहीं समझे ना
जनाब आप मोबाइल उठाइये
वर्ष २००५ का केलेंडर निकालियें और वर्ष २०११ से मिलाईयें
कोई फर्क हो तो बताइयें
फर्क नहीं हे ना
इसलियें भाई
वक्त को अपना वफादार बनाइए इसकी कीमत समझिये
जो कम जिस बक्त पर करना हो उसी वक्त पर कर डालियें
इन्तिज़ार मत कीजिये टिप्पणी का बटन दबाइए
जो मन में हो मुझे और मेरे मित्रों को बताइए ।
अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

06 January 2011

कडाके की ठंड लेकिन मजदूर सडकों पर रेनबसेरे नहीं

दोस्तों यह राजस्थान हे यहाँ चाहे केंद्र का कल्याणकारी आदेश हो चाहे हाईकोर्ट का कल्याणकारी आदेश हो बस सरकार ने जनता को न्याय नहीं देने का मानस बना लिया हे और इसीलियें ठिठुरती सर्दी में राजस्थान के गरीब लोग सडकों पर रात गुज़ारने को मजबूर हे । राजस्थान की हाईकोर्ट ने १५ वर्ष पूर्व इस मामले में एक आदेश जारी करते हुए सरकार को निर्देश दिए थे की वोह सडको पर रात गुज़ारने वाले गरीबों के लियें स्थायी रूप से रेनबसेरों की व्यवस्था करे जिसमे सर्दी में रजाई गदेले टीवी वगेरा की स्थायी पक्का भवन बना कर सुविधा दी जाये और गर्मी में कूलर वगेरा लगाकर इस सुविधा को स्थायी रूप से चालु रखा जाए , कोटा में ह्यूमन रिलीफ सोसाइटी की तरफ से कोटा न्यायालय में एक जनहित याचिका दायर कर कोटा की सडकों पर रातों को भटक रहे गरीबों को रेनबसेरा देने के लियें आबिद अब्बासी एडवोकेट,पंकज लोढा और मुजीब आज़ाद की तरफ से मुकदमा पेश किया गया अदालत ने एक आदेश जारी कर कोटा कलेक्टर ,निगम मुख्य कार्यकारी अधिकारी को पाबन्द किया एके एक वर्ष में वोह स्थायी रेनबसेरों की व्यवस्था लागू करें लेकिन कोटा के अधिकारीयों ने अदालत के आदेशों को रद्दी की टोकरी में डाला और जनता को सडकों पर सर्दी और गर्मी में मरने के लियें छोड़ दिया पहले मिडिया थोडा चिल्लाया फिर मिडिया के भोंकते हीं उसके मुंह में विज्ञापन नुमा हड्डी के टुकड़े डाले और मीडिया यानि टी वी और अख़बार खामोश हो गये जनता की फरियाद लेकर अदालत पहुंचे आबिद अब्बासी एडवोकेट पंकज लोढ़ा की तरफ से मेने कलेक्टर और मुख्य कार्यकारी अधिकारी को जेल भेजने का प्रार्थना पत्र पेश किया क्योंकि उन्होंने न्यायालय के आदेश की पालना नहीं की थी अधिकारीयों को क्यूँ जेल नहीं भेजा जाये इस मामले का नोटिस मिलते ही अधिकारी घबराए और उन्होंने मामले की अपील की अपील में मामला यथावत रहा लेकिन न्यायालय में उपस्थिति के लियें तहसीलदार और आयुक्त को निर्देश दिए गये इन सब के बावजूद भी कोटा नगर निगम ने आज तक भी कोटा में रेंब्सेरे स्थायी रूप से चालू नहीं किये हें और कोटा के अख़बार टी वी चेनल हें के उन्हें तो सडक पर ठंड की ठिठुरन से मरते लोगों का दर्द देखने को ही नहीं मिलता हे ना मजेदार बात राजस्थान में मुख्यमंत्री करोड़ों के विज्ञापन जयपुर के रेनबसेरों के लियें दे रहे हे लेकिन कोटा में कई सरकारें आयीं और कई चली गयीं लेकिन गरीबों के लियें आसरा स्थायी रेनब्सेरों की व्यवस्था नहीं की गयी हे इस मामले में विपक्ष भाजपा भी हाथ पर हाथ धर कर बेठा हे ।एक भाजपा के विधायक ओम क्रष्ण जी बिरला हें जो खुद बेचारे सडकों पर रातों को घूमते हें और ठंड से ठिठुरते लोगों को कपड़े जर्सी और कम्बल देते हे । अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

कोटा दिल्ली की ट्रेने पटरी पर

दोस्तों राजस्थान में अराजकता का माहोल खत्म हो गया हे जनता को सरकार ने गुर्जर आन्दोलन के नाम पर जो खुली जेल में डाला था अब इस जेल से गुर्जर समझोते के बाद जनता आज़ाद हे , कोटा से दिल्ल्ली रेल मार्ग १८ दिनों बाद फिर आम जनता की आवाजाही के लियें खुल गया हे । राजस्थान की करोड़ों जनता को तो परेशानी हुई ही सही साथ ही देश के लेल विभाग को लगभग एक अर्ब रूपये का इस आन्दोलन से नुकसान हुआ हे , यय्तायत की आवाजाही बंद होने से राजस्थान में रोडवेज़ से लेकर जनता को काफी नुकसान पहुंचा हे लेकिन अब किस्मत अच्छी हे के राजस्थान की जिंदगी फिर से पत्री पर हे लेकिन सर्दी हे के इस बार राजस्थान को चेन नहीं लेने दे रही हे बीकानेर से लेकर कोटा तक ठिठुरन से पारा नीचे गिर गया हे और राजस्थान एक बार फिर सियासत के दोर पर आ खड़ा हुआ हे क्योंकि गुर्जर आन्दोलन खत्म होने के बाद आब राजस्थान को एक तो प्रदेश कोंग्रेस अध्यक्ष की जरूरत हे दुसरे यहाँ जितने भी बोर्ड और आयोग खाली पढ़े हें उन में भी नियुक्तिया होनी हे । अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

कोटा के इंजीनियर छात्रों की बल्ले बल्ले

कोटा में आई आई टी के नाम पर चाहे राजस्थान सरकार और केंद्र सरकार ने कोटा के साथ धोखा किया हो , चाहे कोटा के साथ कोटा का दोहन कर कोचिंग गुरु बने कोचिंग संचालक कोटा छोड़ भाग कर कोटा के साथ धोखा कर रहे हों लेकिन कुदरत हे के कुदरत कोटा को प्लेसमेंट के नाम पर कोटा को फिर नम्बर वन पर ला कर खड़ा कर देना चाह्हती हे ।
कोटा में राजस्थान तकनीकी विश्वविध्याल;य से इंजीनियरिंग कर रहे छात्रों के लियें एक बहुत बहुत अच्छी खबर हे और वोह खबर यह हे के कोटा में एयर कनेक्टिविटी नहीं होने पर भी यहाँ के इंजीनियरिंग ब्रेन को अपने संस्थानों में नोकरी देने के लियें संस्थाएं आतुर हें और इसीलियें टाटा सहित दूसरी कम्पनिया कोटा में डेरा डाले बेठी हें और कोटा के इंजीनियरिंग कर रहे छात्रों को लाखों का पैकेज देकर तोल मोल कर रही हें कोटा के लियें यह अच्छी खबर हे और इस खबर से कोटा की एक बार फिर बल्ले बल्ले हे कहते हें ना खुदा एक हाथ से छीनता आहे तो दुसरे हाथ से छप्पर फाड़ कर देता हे वही कहावत यहाँ चरितार्थ हो रही हे । अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

यह महंगाई डायन हे के कम ही नहीं होती हे

दोस्तों हमारे देश के प्रधानमन्त्री मनमोहन सिंह की खासमखास महंगाई इनकी निकटतम रिश्तेदार हे इसलियें यह महंगाई बेरी देश की जनता के लियें डायन बन गयी हे , भये देह के नेताओं को तो सर्किट हाउस सुविधा हे और सर्किट हाउस में सभी नेताओं को मुफ्त में या टोकन मनी में खाना और ठहरना मिलता हे इसलियें उन्हें रसोई और आवश्यक वस्तुओं के भाव का पता नहीं पता अतो जब चलता हे जब चंदा देने आये व्यापारी उनसे कहते हे के सरकार इस बार तो बहुत फायदा हुआ हे खेर यह तो लूट पात राजनीती किस सिफत हे लेकिन देश में महंगाई इन दिनों चरम सीमा पर हे और हालात यह हें के महंगाई को अगर विश्व स्तर पर देखा जाए तो तेज़ी से बढ़ी इस महंगाई की चाल को गिनीज़ रिकोर्ड और लिम्का बुक में दर्ज किया जा सकता हे हमारे देश में आवश्यक कहां पान वस्तुओं पर महंगाई ३.८८ थी जो अल्प समय में ही बढ़ कर १८.३२ हो गयी हे इस पर तुर्रा यह हे के केंद्र सरकार ने महंगाई नियन्त्रण के लियें महत्वपूर्ण उपाय किये हें पहले मनमोहन,फिर शरद पंवार अब प्रणव दा देश और देश की जनता का सत्यानास करने में जुटे हें देखते हें जनता आगे आगे और महंगाई पीछे पीछे हे अब देश का क्या होता हे ..... । अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

गधे सरकार चलाते हें

एक
अंतर्राष्ट्रीय सेमीनार में
एक अमेरिकन ने कहा
हमारे कुत्ते फ़ुटबाल खेलते हें
जापानी चुप क्यूँ रहता
जापानी बोला बस इतनी सी बात
हमारी तो मछलियाँ डांस करती हें
चीन बीच में बोला
भाई हमारे हाथी तो
साइकल चलाते हें
बस फिर मेरा भारत महान
कहने वाला हिन्दुस्तानी चुप क्यूँ रहता
बोल पढ़ा
आपके यहाँ तो जो कुछ करता हो करता हो
हमारे हिन्दुस्तान में तो
गधे हें जो सरकार चलाते हें ।
अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

एक प्यारी सी हकीकत

एक प्यारी सी हकीकत
जो इंसान
ह्मेशाना सब को
खुश रखने की
कोशिश करता हे
बोह इन्सान
जो हर वक्त
अपने परायों की
देखभाल करता हे
वोह इंसान
सोर्फ़ और सिर्फ
मेरी तरह
अकेला और अकेला
रह जाता हे ।
अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

05 January 2011

अपना केरियर बनाओ

लडकी से
नशा होता हे
नशे से
होता हे जूनून
और जूनून के बाद ही
होती हे महनत
महनत से होती हे
पढाई
और पढाई से
बनता हे केरियर
इसलियें दोस्तों
केरियर बनाने के लियें
लडकी
पटाना
अब तो बहुत
जरूरी हो गया हे ।
अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

सोचा था ....

सोचा था
अब बहुत हो गयी
अब तो उनको
हर तरह से
भूल जायेंगे
सामने आये भी वोह अगर
तो उनको देख कर भी
उन्हें अनदेखा कर जायेंगे
लेकिन
सामने आया
जब चेहरा उनका
दिल कमबख्त चीख पढ़ा
बोला इस बार तो
जी भर कर देख लो
मोका मिला तो
अगली बार जरुर भूल जायेंगे
अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

वक्त की आंच में

वक्त की
जलती हुई
आग में
लोहा हो
या हो पत्थर
सभी
पिघल जाते हें
कोन करेगा
हमें याद
वक्त के साथ
ख्यालात भी
बदल जाते हें ।
अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

दिल का दर्द

दिल के दर्द को
जुबां पर
हरगिज़ मत लाना
तकलीफ में हो जितने भी
फिर भी
आँखों से
आंसू मत बहाना
दिल के जख्म
चाहे कितने भी गहरे हों
ड्रेसिंग करे
रिश्तों का डिटोल
जरुर लगाना ।
अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

रिश्ते अपने

अपने
रिश्ते पर
नाज़ हे हमें
कल जितना भरोसा था
उतना ही भरोसा
आज भी हे हमें
रिश्ते वोह नहीं
जो मतलब से
एक दुसरे का साथ दें
बस हर रिश्ते में
इंसानियत का एहसास हे ।
अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

जरूरत एक एग्रीगेटर की

भाइयों अदालत सहित अनवरत सहित किया महत्वपर्ण ब्लोगों के जनक जनाब एडवोकेट और मेरे बढ़े भाये दिनेश राय जी द्विवेदी जी ने कहा चलो चाय पियेंगे हमारे साथ रामस्वरूप जी शर्मा सहित और कई वकील भी थे जिनमें एक महिला वकील भी शामिल थीं भाई द्विवेदी जी चाय इसलियें नहीं पीते क्योंकि वोह समझदार हें और वोह जानते हें के चाय के प्याले में कभी भी तुफान आ सकता हे इसलियें वोह कोफ़ी पीते हें ,खेर चाय और कोफ़ी तो बहाना था अदालत में चल रही निरंतर हडताल के माहोल में आपस में बेठ कर चर्चा करना था इसीलियें टेबल वार्ता शुरू हुई और बात ब्लोगिंग फिर ब्लोगिंग से एग्रीगेटर की कमी तक पहुंच गयी भाई द्विवेदी जी ने बताया के अदालत के नाम से उन्होंने एक एग्रीगेटर तय्यार कर रखा हे क्योंकि इन दिनों ब्लोग्वानी.चिट्ठाजगत तो बंद हो चुके हे और एक दुसरे से एक दुसरे का परिचय नहीं हो पा रहा हे ब्लोगर्स परेशानी के डोर से गुजर रहे हें इसलियें एक बेहतरीन एग्रीगेटर की जरूरत हे मेने कहा जब एग्रीगेटर तय्यार हे तो फिर देर किस बात की शुरू किया जाये लेकिन द्विवेदी जी ने सहज भाव से पावला जी की डिजायनिंग क्षमता पर भरोसा जताते हुए कहा के में पहले पावला जी से निवेदन करूंगा के वोह इस अदालत एग्रीगेटर को अच्छे से डिजायन कर दें फिर इसको शुरू किया जाएगा दोस्तों चाय की टेबल पर ब्लोगिंग की यह चर्चा चाहे सहज रही हो लेकिन यह तो सही हे के हमें आज ब्लोगर्स के मिलन के लियें रचनात्मक सहयोग के लियें एक एग्रीगेटर और वोह भी निष्पक्ष एग्रीगेटर की जरूरत आन पढ़ी हे तो दोस्तों वेसे तो बहुत हें जो एग्रीगेटर की दुनिया में अपना काम करना चाहते हें लेकिन अगर दिनेश द्विवेदी जी पर दबाव बनाया जाए और पावला जी ललित जी सहित सभी वरिष्ठ ब्लोगर भाई इस सपने को साकार करने के लियें मदद करें तो में समझ सकता हूँ किसी भी ब्लोगर भाई को एतराज़ नहीं होगा तो दोस्तों अगर आप मेरी बातों से सहमत हें तो जनाब द्विवेदी जी पर और दुसरे ब्लोगर्स पर इतना और इतना दबाव बना डालें के सब मजबूर हो जाएँ और एग्रीगेटर जो एक सपना बनता जा रहा हे वोह जल्दी ही हमारे सामने हो तो जनाब शुरू हो जाए भाइयों पर दबाव बनाने का आन्दोलन अगर ऐसा होता हे और सपना सच होता हे तो सभी ब्लोगर्स की बल्ले बल्ले हे ....... । अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

गुर्जरों का आतंक सरकार का निकम्मापन खत्म हुआ लगता हे

जी हाँ दोस्तों यह मेरा राजस्थान हे यहाँ कानून नाम की कोई चीज़ भी हे या नहीं मुझे पता नहीं हाँ गरीबों के लियें और कमजोरों के लियें मेने हर जगह शिद्दत से कानून लागू होते देखा हें लेकिन ताकत के आगे हमेशा मेरी सी सरकार ने निकम्मा बता कर सलाम ही किया हे , अभी १७ दिन चले गुर्जर अस्न्वेधानिक गेर कानूनी आन्दोलन को सरकार ने हवा दी और जो पहले दिया गया था उससे अधिक कुछ नहीं दिया , दोस्तों गुर्जर आन्दोलन राजस्थान में इसके पहे भी हुआ था तब भी सरकार ने राज्य के करोड़ों लोगों को अपनी नाकामयाबी से अघोषित जेल में बंधक बनवा दिया था आम आदमी का साँस लेना और अपने मन मर्जी से कहीं आना जाना भी मुश्किल था तब गुर्जर नेता किरोड़ी सिंह बसला और कोंग्रेस सरकार के मुख्यमंत्री के बीच सहमती बनी थी और इस सहमती में जो कल बात हुई हे उन्हीं मुद्दों पर बात करना था ।
सरकार ने गुर्जरों से किया अपना वायदा वक्त पर नहीं निभाया साइड लाइन मांगें जिनमें म्रतक आश्रितों को नोकरी ,घायलों को पेंशन ,देवनारायण बोर्ड की राशि में व्रद्धी , मुकदमों की वापसी मुख्य मांगें थी सरकार ने वायदा किया लेकिन निभाया नहीं गुर्जरों ने एक बार फिर आरक्षण का हव्वा खड़ा किया और आरक्षण का जिन्न बोतल में से निकला दिया वोह जानते थे के आरक्षण अभी सम्भव नहीं हे लेकिन उन्होंने आरक्षण को मुख्य्मुद्दा बनाकर अपनी साइड लाइन मांगें साथ में रखीं और वोह राजस्थान को सरकार के निकम्मेपन के कारण जब जेल में बदल चुके थे तब सरकार को अपनी भूल का एहसास हुआ सरकार को हाईकमान और हाईकोर्ट का डर सताने लगा इसीलियें सरकार ने फिर पत्री पर प्रतिनिधि भेजे ,गुर्जरों को पत्री से टेबल पर बुलाया और फिर एक नया समझोता कर लिया लेकिन हालात वोह के वोह ही हें यह सरकार आन्दोलन कारियों से समझोते तो करती हे लेकिन उसको वक्त पर नहीं निभाती और इसीलियें यहाँ अनावश्यक वातावरण में गंदगी फेल रही हे । पुरे १७ दिन राजस्थान में अराजकता रही जनता परेशान रही लोगों की शादियाँ, साक्षात्कार,परीक्षाएं सब खराब हो गये लेकिन इस सरकार ने जनता की कोई सुद्ध नहीं ली अभी भी कुछ नहीं बिगड़ा हे सरकार फिर से अपने वायदों को याद करे और जिन आन्दोलनकारियों से जनता से जो वायदे किये हें उन्हें तुरंत प्रभाव से लागू करे ताकि अराजकता की स्थिति खत्म हो और राजस्थान शांत क्षेत्र बन सके पुरे १७ दिन की अराजकता और जनता के आंसुओं भरी पीड़ा का जवाब और हिसाब कोन देगा कोई नहीं जानता । अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

एक सबक

जिंदगी जीने का
एक खास सबक
परवाह करो उसकी
जो आपकी प्रवाह करे ,
जिंदगी में आपको
कभी रुसवा ना करे ,
जान बन कर
उतर जाओ
उसकी जिंदगी में
जो
खुद की
जान से भी
ज्यादा तुमको
प्यार करे ।
अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

कोटा सडक मामले में तीन इंजीनियर निलम्बित

कोटा में नगरविकास न्यास के तीन इंजीनियरों को घटिया सडक निर्माण के लियें ज़िम्मेदार मानकर नोकरी इ निलम्बित कर दिया गया हे जबकि ठेकेदार के खिलाफ भी कठोर कार्यवाही के निर्देश दिए गये हें ।
कोटा के रामपुरा इलाके में पचास लाख के लगभग की लागत से सडक बनाई जाना थी लेकिन सडक में घटिया निर्माण , और सडक निर्माण के बाद भी गड्डों की शिकायत जब स्वायत शासन मंत्री शांति धारीवाल जी को पता चली तो उन्हने इसकी रिपोर्ट मंगवाई और तथ्य प्रमाणित होने पर इसे गम्भीरता से लिया तथा इस काम में लगे तीन इंजीनियरों को तुरंत प्रभाव से निलम्बित कर दिया गया जबकि ठेकेदार के खिलाफ फोजदारी अर्य्वाही कर उसे ब्लेक लिस्टेड घोषित करने के निर्देश दिए गये हें । कोटा में पिछले कुछ दिनों से ठेकेदार और अभियंताओं की मिलीभगत से घटिया निर्माण के चलते सरकार को लाखों करोड़ों का चुना लग रहा हे जबकि इस घटिया निर्माण से आम जनता दुखी हे पहली बार इस कठोर कार्यवाही से भ्रष्ट ठेकेदार और अभियंता को सार्वजनिक रूप से दंडित किया गया हे । अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

दिग्विजय सिंह की महाराष्ट्र के गृह मंत्री को ललकार

कोंग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव दिविजय सिंह शुरू से किसी ना किसी बयान के बहाने सुर्ख़ियों में रहते हें पिछले दिनों उन्होंने मुंबई ऐ टी एस के शहीद पुलिस अधिकारी करकरे की शहादत के कुछ देर पहले उनसे बात होने और उनके द्वारा हिन्दू आतंकवादियों से खतरा होने की बात कहने की बात कही थी जिसे भाजपा ने सिरे से नकार दिया था और फिर बाद में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री के अधीनस्थ गृह मंत्री आर आर पाटिल ने साफ़ तोर पर दिविजय सिंह के दावे को झुट्लाते हुए कहा था के ऐसा कोई रिकोर्ड हमारी जांच में नहीं आया हे जेसे दिग्विजय सिंह ने कहा हे , महाराष्ट्र के गृह मंत्री के इस अधिक्रत ब्याने के बाद दिग्विजय सिंह की विपक्ष ने बहुत किरकिरी की थी बस तभी से दिग्विजय सिंह नाराज़ थे और अपनी बात को साबित करने के सबूत एकत्रित कर रहे थे ।
कल दिग्विजय सिंह ने आखिर खुद की और शहीद करकरे की फोन पर बात होने का सबूत हांसिल कर ही लिया और उन्होंने कोल डिटेल निकलवाकर एक प्रेस कोंफ्रेंस में इस तथ्य को उजागर करते हुए अपनी नाराजगी अपनी ही पार्टी की कोंग्रेस की महाराष्ट्र सरकार के गृहमंत्री पाटिल के ज़ाहिर करते हुए कहा हे के पाटिल को गलत बयानी के लियें उनसे यानि दिग्विजय सिंह से माफ़ी माँगना चाहिए बात सही हे के अगर करकरे की फोन कोल डिटेल में दिग्विजय के नम्बर थे तो उसे महाराष्ट्र के गृह मत्री को छुपाना नहीं चाहिए था और अगर छुपाना नहीं चाहते थे तो फिर उनको झुंट नहीं बोलना चाहिए था इस गलत बयानी शहीद करकरे की म़ोत के कुछ तथ्यों को छुपाने का प्रयास किया जा रहा हे इस बात का संदेह होने लगा हे । अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

एक फुल ..

एक फुल भी
अक्सर बाग़
सजा देता हे
केवल एक
सितारा ही
संसार को
चमका देता हे ,
जहां नहीं
काम आते
दुनिया भर के रिश्ते
वहा इस मोड़ पर
बस एक दोस्त
साथ निभा कर
बिगड़ी
जिंदगी
बना देता हे ।
अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

कोटा अभिभाषक परिषद का शपथ ग्रहण हुआ . अपनी मांगों को सभी वकील और जन प्रतिनिधि भूले

दोस्तों आज कोटा अभिभाषक परिषद का शपथ ग्रहण समारोह सम्पन्न हुआ, यह शपथ ग्रहण दुसरे शपथ ग्रहणों से अलग इसलियें हे के यहाँ कोटा में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत द्वारा एक वर्ष पूर्व स्वीक्रत मांगों को लेकर उनकी क्रियान्विति के मामले में सरकार की हठधर्मिता के खिलाफ आन्दोलन यानि हडताल कर रहे हें और शपथ ग्रहण में मुख्य मुद्दों पर को बात नहीं हुई ।
दोस्तों इस समारोह के मुख्य अतिथि राजस्थान सरकार में पूर्व संसदीय सचिव और कोटा दक्षिण के भाजपा विधायक ओम बिरला जो खुद इससे पहले वकीलों के आन्दोलन हडताल में साथ थे उन्होंने भी अपना रुख बदलते हुए वकीलों को हडताल नहीं करने की सलाह दी लेकिन मुख्यमंत्री की स्वीक्रत मांगो की क्रियान्विति अगर सभी प्रयासों के बाद भी नहीं हो पा रही हे तो वकील क्या करें इसका सुझाव भी उन्होंने नहीं दिया । पूर्व केन्द्रीय मंत्री भुवनेश चतुर्वेदी ने तो कोंग्रेस की सरकार में वकीलों की सारी समस्याओं का समाधान भाजपा विधायक ओम बिरला में खोजा हे भुवनेश चतुर्वेदी ने अपने उद्बोधन में करीब एक दर्जन बार ओम बिरला का नाम लेकर वकीलों की समस्यों के समाधान ओम जी करवायेगे कहा हे , अब आप भी देखिये के वकील जिस समस्या जिस हडताल के दोर से गुजर रहे हें सरकार बातचीत नहीं करना चाहती जो मांगे स्वीक्रत हो गयी हें उनको भी सरकार ने अब तक क्रियान्वित नहीं किया हे उस मामले में इस मोके पर सभी प्रतिनिधियों और निर्वाचित वकीलों ने अपना पडला झाड लिया हे ।
अभिभाषक परिषद के लियें इस माहोल में मांगों के बारे में कोई हल निकला हो या ना हो लेकिन भाजपा विधायक ओम जी बिरला ने परिसर हित में महत्वपूर्ण घोषणाएं की हे । ओम जी बिरला के विधायक कोष से कोटा न्यायालय परिसर में एक लाइब्रेरी बनाई गयी हे टीन शेड लगाये गये हें लेकिन अभी जो समस्याएं हें उनके निराकरण के लियें भी ओम जी बिरला ने महिला अभिभाषक कक्ष की व्यवस्था सुधार के लियें दो लाख रूपये और टीन शेड के लियें दो लाख रूपये की घोषणा की हे जबकि अभिभाषक परिषद का सभाकक्ष पूर्ण रूप से वातानुकूलित करने की भी घोषणा की गयी हे ओम जी बिरला ने सभी वकीलों के लियें गर्मी से पूर्व टीन शेड के नीचे खुद अपने स्तर पर जनसहयोग से पंखे भी लगवाने का वायदा किया हे । अपने ज़ोरदार लच्छेदार उद्बोधन में ओम बिरला ने वकीलों को मोह लिया हे और न्यायालय परिसर को मल्टीस्टोरी सुख सुविधायुक्त बनाने के लियें विधि मंत्री और कोटा के विधायक शांति धारीवाल से मांग की हे उन्होंने वकीलों को उनकी गरिमा और पक्षकारों के प्रति उनके कर्तव्यों को भी याद दिलाया हे । नई कार्य कारिणी में अध्यक्ष राजेश शर्मा और महासचिव नरेश शर्मा ने आज से कार्यभार सम्भाल लिया हे , आज के कार्यक्रम में उप महापोर राकेश सोरल ने भी अदालत परिसर को साफ़ सुथरा रखने में मदद का आश्वासन दिया हे देखते हें के अब इस वर्स २०११ अभिभाषक परिषद का क्या भविष्य रहता हे लेकिन स्वीक्रत मांगे जिनमें राजस्व मंडल की डबल बेंच ,उपभोक्ता की राज्य सर्किट बेंच और वकीलों को कोलोनी देने के मामल में आगे क्या होता हे यह तो वक्त ही बताएगा फिलहाल तो नये लोग हडताल खत्म करने के लियें सम्मानजनक हल खोजने के लियें कुलबुला रहे हें । अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

04 January 2011

जरूरत

संगीत की
जरूरत
महफिल में होती हे
इंसानियत की
जरूरत जिंदगी में होती हे
दुनिया ठीक से
तभी चलती हे
जब हर पल
इधर उधर
इंसानियत
होती हे ।
अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

एक मासूम जिसे इलाज कराने की जगह बेड़ियाँ से जकड़ दिया


जी हाँ दोस्तों बेड़ियों से जकड़ा हुआ यह एक मासूम हे जिसे कोटा राजस्थान उद्योगनगर थाने की बोरखेडा चोकी में रहने वाले एक ग्रामीन ने बोझ समझ कर बेड़ियों और हथकड़ियों से जकड़ रखा हे इसकी खबर तीन जनवरी की राजस्थान पत्रिका कोटा में प्रकाशित हुई हे लेकिन अफ़सोस अब तक इस मामले में कोई भी समाज सेवक या प्रशासनिक अधिकारी इसका इलाज करवाने के लियें आगे नहीं आया हे , अफ़सोस तो इस बात का हे के कोटा में एक मेंटल दबाव में आने वाले लोगों के लियें एक सहायता ग्रुप बना हे उन्होंने भी इस बच्चे के इलाज में अब तक कोई मदद नहीं की हे हाँ पत्रिका अख़बार के संवाददाता को इन लोगों ने यह जरुर कहा हे के यह बीमारी ला इलाज नहीं हे और इलाज करवाने पर यह बच्चा ठीक हो सकता हे , इस बच्चे के बाप और परिजन इसका इलाज कराना चाहते हें लकिन उनके पास इलाज के लियें रूपये नहीं हे , इस मामले में कोटा जिला प्रशासन और समाज सेवी संस्थानों ने कोई मंद की पहल नहीं की हे , देखो मेने ह्यूमन रिलीफ सोसाइटी के जरिये इस ममाले की शिकायत राज्य मानवाधिकार आयोग और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को भेजी तो हे और सरकारी स्तर पर इस बच्चे की हथकड़ियाँ खुलवाकर इलाज की प्रार्थना की हे देखे क्या होता हे , आप बन्धुओं से गुजारिश हे के आप भी इस मामले में अपने स्तर पर प्रयास करें अगर प्रयास नहीं कर सकें तो महरबानी करके कमसे कम दुआ तो करें । अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

कोटा मेले में भ्रस्टाचार के पुख्ता सुबूत

राजस्थान में कोंग्रेस नगर निगम बोर्ड का कोटा में आयोजित किया गया पहला राष्ट्रीय मेला दशहरा भ्रस्टाचार और अव्यवस्था की भेंट चढा हे और इस मामले में राजस्थान सरकार द्वारा कोटा कलेक्टर से करवाई गयी जांच में गम्भीर अनियमितताएं मानी गयी हें ।
कोटा मेले दशहरे के आयोजन के लियें विधि नियम बनाये गये हें और कार्यक्रम केसे तय होंगे इसके लियें आयोजन समिति बनाई गयी हे कितना बजट होगा और केसे बजट खर्च होगा इसके विशिष्ट प्रावधान निर्धारित किए गये हें इस मामले में महापोर रत्ना जेन और मेला आयोजन अध्यक्ष ने मिलकर मनमानी की इसकी काफी शिकायतें हुईं और अख़बारों में भी खबरें प्रकाशित हुई मजबूरी में राज्य सरकार को कोटा कलेक्टर से इसकी जाँच करवाना पढ़ी अब जांच रिपोर्ट जयपुर बंद लिफ़ाफ़े में भेज दी गयी हे लेकिन कोटा नगर निगम को इस मामले में गम्भीर अनियमितता का दोषी माना हे अब देखते हें किस अधिकारी और किस जनप्रतिनिधि के खिलाफ किया कार्यवाही होती हे या फिर लापरवाही हो जाती हे यह तो वक्त ही बताएगा । अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

अपना करियर ऐसे बनाओ

अपना केरियर बनाओ

लडकी से
नशा होता हे
नशे से
होता हे जूनून
और जूनून के बाद ही
होती हे महनत
महनत से होती हे
पढाई
और पढाई से
बनता हे केरियर
इसलियें दोस्तों
केरियर बनाने के लियें
लडकी
पटाना
अब तो बहुत
जरूरी हो गया हे ।
अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

किसने कहा

किसने कहा
हमें
आपकी
याद नहीं आती ,
आपका ख्याल ना हो
ऐसी कोई
रात नहीं जाती ,
वक्त चाहे
कितना ही बदल जाए
जो आदत याद करने की
आपको पढ़ी
हे कमबख्त
हरगिज़ नहीं जाती
आप ही हें
हमारे खासम खास
यह बात
किसी से
कही नहीं जाती ।
अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

03 January 2011

बोफोर्स का भूत पीछा नहीं छोड़ता

कोंग्रेस और कोंग्रेस की मुखिया सोनिया का देश में बोफोर्स दलाली का भूत पीछा नहीं छोड़ता हे य्हना कोंग्रेस के शासन में आने के बाद सी बी आई ने सभी आरोपियों को क्लीन चिट दे दी थी विन चड्डा और क्वात्रोची को भी बेगुनाह करार देते हुए फ़ाइल बंद कर दी गयी थी कोंग्रेस के शासन में बढ़ा दूरसंचार घोटाला आया और पिछले घोटालों को सब भूल गये थे लेकिन इन दिनों वित्त मंत्रालय की बेवकूफी के चलते आयकर ट्राइब्यूनल ने एके मामले की सुनवाई के दोरान घोषणा की हे के बोफोर्स मामले में ४१ करोड़ रूपये की दलाली ली गयी थी जिसकी आमदनी भारत में होने से इस राशी पर विन चड्डा के स्वर्गवास के बाद उनके परिजन और क्वात्रोची से लिया जाना हे ।
आयकर ट्रिब्यूनल पूरी तरह से वित्त मंत्री के अधीनस्थ आता हे और वित्त मंत्री की इन दिनों प्रधानमन्त्री तक से नहीं बन रही हे वोह राहुल भक्त तो हें लेकिन किसी ना किसी तरह से वोह देश की सत्ता हथियाने के लियें बेताब भी नजर आते हें वित्तमंत्री मुखर्जी बंगाल छोड़ कर पुरे देश के प्रधानमन्त्री बनने का सपना देख रहे हें और उनका यह सपना जब राहुल और सोनियां ने चकना चूर कर दिया तो शायद बोफोर्स का यह जिन उनके इशारे पर ही निकाला गया लगता हे खेर भाजपा को तो इस मुद्दे के बाद ऑक्सीजन मिल गयी हे और अब देखते हे के राजनीती किस मोड़ पर जाती हे पहले ही संचार घोटाले मामले में कोंग्रेस जे पीसी का गठन नहीं करने की जिद पर अढी हुई हे इस कारण संसद में गतिरोध जारी हे । अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

राजस्थान में सर्दी के डर से स्कूलों में छुट्टी

राजस्थान में पहली बार सर्दी की ठिठुरन से लोग अस्त व्यस्त हुए हें और स्कूलों में स उभ सवेरे बच्चों की ठंड में परेशानी और सम्भावित बिमारियों को देखते हुए मुख्मंत्री अशोक गहलोत ने कल देर रत को राजस्थान के सभी स्कुल रविवार तक बंद रखने के निर्देश दिए हें जिन स्कूलों में परीक्षाएं हें वहां परीक्षाएं यथावत चलेंगी ।
राजथान में इस बार बे हिसाब सर्दी से लोग परेशान हें यहाँ माउंट आबू कश्मीर बन गया हे तो कोटा में ४१ वर्षों की रिकोर्ड तोड़ सर्दी पढ़ी हे , राजस्थान में पहले भी इन दिनों स्वाइन फ्ल्यू के डर से अवकाश घोषित किया गया था इस बार भी बच्चों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए सरकार का यह निर्णय जनहित में माना जा रहा हे । आज से निजी और सरकारी स्कूलों में बच्चों की छुट्टी की घोषणा से बच्चे बल्ले बल्ले हें । अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

कोटा के कोचिंग बर्बाद होकर जोधपुर में आबाद होंगे

राजस्थान की शिक्षा नगरी कोटा से पहले आई आई टी जोधपुर ले जाया गया , कोटा से आई आई टी और आई ट्रिपल के परीक्षा केंद्र छीने गये ,यहाँ हवाई सेवा शुरू नहीं की गयी , उद्योग बंद हुए कई विभाग कोटा से जोधपुर भिजवाये गये यहाँ का पानी भीलवाड़ा तो बिजली देश भर में भिजवाई गयी , अब कोटा के लगों का एक मात्र रोज़गार का जरिया चोर दरवाजे से कोचिंग गुरुओं को लालच देकर जोधपुर आमंत्रित किया गया हे , कोटा के कई कोचिंग गुरु कोटा से अपने संस्थान का मुख्यालय जोधपुर में शुरू करने जा रहे हे मुख्यालय का मतलब खुद कोचिंग गुरु जिस कोचिंग में पढ़ाएंगे वही मुख्यालय कहलायेगा इसके लियें सरकार ने कोटा से कोचिंग मामले में सुविधाएं छिनी हें तो जोधपुर में कोचिंग गुरुओं से गुप्त मुलाक़ात कर इन्हें सब्ज़ बाग़ दिखाए हें देखते हें के कोटा के कोचिंगों का अब देश में क्या स्तर रह जाता हे क्योंकि बंसल हो या फिर रेजोनेंस हो या फिर कोई भी कोचिंग हो सब बिखर रहे हें और अपने अपने जुगाड़ में लगे हें के जोधपुर में मुफ्त की जमीन और दूसरी सुविधाएँ केसे हथियाई जाये इसके लियें कई कोचिंग गुरुओं ने जोधपुर में अपना काम भी शुरू कर दिया हे राजनीती तो कोटा की बेवफा हे लेकिन कोटा के कोचिंग गुरु जिन्हें कोटा ने धन दोलत नाम दिया हे अब वोह अगर कोटा से बेवफा हुए तो फिर कोटा का क्या होगा यह तो वक्त ही जाने ................. अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

कोटा के कोचिंग बर्बाद होकर जोधपुर में आबाद होंगे

राजस्थान की शिक्षा नगरी कोटा से पहले आई आई टी जोधपुर ले जाया गया , कोटा से आई आई टी और आई ट्रिपल के परीक्षा केंद्र छीने गये ,यहाँ हवाई सेवा शुरू नहीं की गयी , उद्योग बंद हुए कई विभाग कोटा से जोधपुर भिजवाये गये यहाँ का पानी भीलवाड़ा तो बिजली देश भर में भिजवाई गयी , अब कोटा के लगों का एक मात्र रोज़गार का जरिया चोर दरवाजे से कोचिंग गुरुओं को लालच देकर जोधपुर आमंत्रित किया गया हे , कोटा के कई कोचिंग गुरु कोटा से अपने संस्थान का मुख्यालय जोधपुर में शुरू करने जा रहे हे मुख्यालय का मतलब खुद कोचिंग गुरु जिस कोचिंग में पढ़ाएंगे वही मुख्यालय कहलायेगा इसके लियें सरकार ने कोटा से कोचिंग मामले में सुविधाएं छिनी हें तो जोधपुर में कोचिंग गुरुओं से गुप्त मुलाक़ात कर इन्हें सब्ज़ बाग़ दिखाए हें देखते हें के कोटा के कोचिंगों का अब देश में क्या स्तर रह जाता हे क्योंकि बंसल हो या फिर रेजोनेंस हो या फिर कोई भी कोचिंग हो सब बिखर रहे हें और अपने अपने जुगाड़ में लगे हें के जोधपुर में मुफ्त की जमीन और दूसरी सुविधाएँ केसे हथियाई जाये इसके लियें कई कोचिंग गुरुओं ने जोधपुर में अपना काम भी शुरू कर दिया हे राजनीती तो कोटा की बेवफा हे लेकिन कोटा के कोचिंग गुरु जिन्हें कोटा ने धन दोलत नाम दिया हे अब वोह अगर कोटा से बेवफा हुए तो फिर कोटा का क्या होगा यह तो वक्त ही जाने ................. अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

सडक सुरक्षा सप्ताह या जनता के साथ लूट

दोस्तों जनवरी का महिना गया हे और इसी महीने के पहले सप्ताह में सडक सुरक्षा सप्ताह देश भर में मनाये जाने की परम्परा हे ,परम्परा इसलियें कहूँगा के हमारे देश में इसे मात्र परम्परा के बटर ही मनाया जाता हे और अब तो इलाके की पुलिस ने इसे यातायात सुरक्षा सप्ताह में बदल कर वाहन चालकों से लुट का जरिया बना लिया हे और इस सप्ताह में हजारों हजार वाहन चालक पुलिस कर्मियों और यातायात कर्मियों की लुट के शिकार होते हें जिसमें मंत्री से लेकर संतरी यानि अधिकारी भी शामिल रहते हें
दोस्तों सडक सुरक्षा सप्ताह भारत सडक सुरक्षा निति के तहत देश भर की सडकें ऍम आदमी और वाहनों की आवाजाही के लियें जनहित में सुरक्षित करने के लियें मनाया जाता हे इस सप्ताह को जनवरी माह में इसलियें मनाया जाता हे के इस कार्यकाल में भारतीय सडक निति बनी और फिर मोटर वाहन अधिनियम , मोटर वाहन नियम बनाये गये , इसी दोरान राष्ट्रिय राजमार्ग अधिनियम और राज्य राजमार्ग अधिनियम बने कुल मिलाकर इस सप्ताह का केवल एक मकसद रहता हे और इसके लियें जिला स्तर पर समितियां भी गठित होती हें जिसमे जिले के कलेक्टर,सार्वजनिक निर्माण विभाग के अधिकारी,नगरनिगम,पंचायत,और न्यास के अधिकारी रहते हें जो वर्ष भर में एक बार आवश्यक रूप से अभियान के रूप में शहर के भीतरी भाग और राज्य व् राष्ट्रिय राजमार्ग की सडकों की मरम्मत करने की ज़िम्मेदारी लेते हें इस दोरान सडकों के खड्डे भरना, उनका लेवल सही करना ,स्पीड ब्रेकर मोटर वाहन नियमों के तहत कम ऊँचाई के बनाना ,रेड लाईट की व्यवस्था करना उनकी टाइमिंग देख कर मरम्मत करना रात्री में लाइटें देखना ,यातायात संकेतक चिन्ह लगाना , सडकों से अवरोध हटाना जिसमे अतिक्रमण आवारा जानवर अनावश्यक विधिविरुद्ध वाहनों का जमाव भी शामिल हे कुल मिलाकर सडकों को ऍम आदमी की आवाजाही के लियें पूर्ण रूप से इस तरह से मरम्मत कर सुरक्षित बनाना हे के को भी नगरी खुले रूप से सडकों का इस्तेमाल कर सके इस दोरान द्रष्टि भ्रम वाले विज्ञापन जिन्हें देखने और पढने की कोशिश में आहन दुर्खना ग्रस्त हो सकते हें और ड्राइवर का ध्यान बताने वाले विज्ञापन हो तो उन्हें भी हटवाने का कार्य इस दोरान होता हे
दोस्तों आप भी जानते हें और हम भी देखते हे के इस दोरान मेरे जिले से लेकर आपके जिले और गाँव तक कहीं भी कभी भी सडकों से इस दोरान अतिक्रमण नहीं हटाये जाते ,सांकेतिक चिन्ह और स्पीड ब्रेकर नियमानुसार नहीं होते सडकों की मरम्मत नहीं होती नाली पटान ठीक नहीं होते सडकों के अस पास ड्राइवर का ध्यान बताने वाले विज्ञापन और होर्डिंग्स नहीं हटाये जाते यहाँ तक सडकों पर आवारा जानवर जमे रहते हें ,सडकों पर बेतरतीब वाहन चलते हें जिन वाहनों का परमिट स्टेज केरिज का हे वोह टिकती लेकर वाहन रोडवेज़ की तरह चलाते हें सडकों पर अवेध जीपों अवेध वाहनों की सवारियां ढोने की भरमार रहती हे कुल मिलाकर सडकें आम जनता के लियें खुनी और जानलेवा बन जाती हे लेकिन जिला समिति इस पर ध्यान नहं देती हालात यह होती हे के यातायात पुलिस और प्रशासन मिलकर सडकों पर कागजात चेकिंग और लाईटें पोतने सिट बेल्ट के नाम पर चलन बुक लेकर जनता को परेशान करते देखे जा सकते हें तो दोस्तों अपने जिलों में सडक की सुरक्षा के लियें इस सप्ताह को मनवाओ और जनता को इस सप्ताह में लुटने से बचाओ। मेरी कोई कानूनी मदद की जरूरत हो तो में आपकी खिदमत में हाज़िर हूँ अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

मेरा भारत महान

एक वैज्ञानिक ने
चोर पकड़ने की
एक मशीन बनाई
अमेरिका में
एक दिन में
नो चोर पकड़े गये,
चाइना में तीस और जापान में
पचास पकड़े गये
भारत के आंकड़े देखेने आये
तो पता चला
मशीन ही चोरी हो गयी
क्यूंकि
मेरा भारत महान हे ।
अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

आप सावधान रहिये ....

ब्लोगर दोस्तों
अब आप
जरा सावधान रहिये
क्यूंकि
आपके सामने
कभी भी
पांच चीजें
सकती हें ,
एक तो हम
दुसरे
पढने के लियें
हमारा उबाऊ
यह ब्लॉग
तीसरे
हमारा कोल
चोथे हमारे ब्लॉग
के लियें सुझाव
पांचवे
हमारे ब्लॉग पर
टिप्पणी नहीं
करने का पछतावा
दोस्तों
इन पांच
ख्याल
और आने वाली
इन पांच यादों से
सावधान रहिये
अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

कुत्ता बिजली के लियें नाचने लगा

रात के अँधेरे से
जूझ रहे
एक गाँव में
बिजली कनेक्शन
लगने की
खबर जब
ग्रामीणों ने सुनी
तो वोह ख़ुशी से
नाचने गाने लगे
उनके साथ साथ
एक कुत्ता भी
नाचने लगा
लोगों ने
कुत्ते से पूंछा
तू क्यूँ
नाच रहा हे
कुत्ते ने कहा
के गाँव में
जब बिजली आएगी
तो खबे भी तो लगेंगे ।
अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

किसने कहा

किसने कहा
हमें
आपकी
याद नहीं आती ,
आपका ख्याल ना हो
ऐसी कोई
रात नहीं जाती ,
वक्त चाहे
कितना ही बदल जाए
जो आदत याद करने की
आपको पढ़ी
हे कमबख्त
हरगिज़ नहीं जाती
आप ही हें
हमारे खासम खास
यह बात
किसी से
कही नहीं जाती
अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

सोचो ...

सोचो
विश्व अगर
बिना लडकी के हो जाये
तो क्या होगा
गलियाँ सुनसान
दुनिया परेशान
तन्हा इंसान
ना जनु
ना जान
हर तरफ
बस जय हनुमान जय हनुमान
अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

हर कोई तडपता हे

हर कोई
यहाँ
प्यार में
तडपता हे
यहाँ कुछ को छोड़ कर
हर कोई
अपने
प्यार के लियें
रोता हे
दोस्त यह दोस्ती
सदा कायम रखना
क्यूंकि
प्यार का लुत्फ़
सबसे ज्यादा तो
बस
दोस्ती के
प्यार में ही होता हे ।
अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

हो तो भेजो नहीं तो बेच दो

आज मेरे पास
कम्प्यूटर हे
लेब्तोब हे
इंटरनेट हे
लिखने का शोक हे ,
आपके पास किया हे
अगर हें कोई टिप्पणियाँ
तो ब्लोगरों को भेजों
नहीं तो
इंटरनेट कनेक्शन कटवा दो
और कम्प्यूटर लेब्टोब
बेच दो ।
अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

हंसी हंसी में ...

हंसी हंसी में
हमने कितनों को
हंसा दिया ,
इसी हंसी में
खुद को
खून के आंसू रुला कर
ना जाने
हमारे कितने
गमों को
दुनिया से
छुपा लिया
हमारी इस अदा पर
कोई हंस कर गया
इस कद्र
के उम्र भर
के लियें
हंसना
हमें भुला दिया ।
अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

भारत में सिगरेट पीलो लेकिन स्पेन में नहीं

सिगरेट के शोकीन भाइयों
आप खुश किस्मत हें जो
भारत जेसे देश में पैदा हुए हें
यहाँ सिगरेट पीना स्वास्थ के
लिए हानिकारक हे कहकर
खूब सिगरेटों की बिक्री हो रही हे
इतना ही नहीं जो लोग सिगरेट नहीं
पीते हें उन्हें भी अगर सार्वजनिक स्थानों पर
आप सिगरेट पी कर प्रताड़ित करते हें
तो सरकार को कोई एतराज़ नहीं
सरकार ने कानून तो बनाया हे
लेकिन इसकी क्रीयान्विती नहीं हे
अगर इस कानून की क्रियान्विति भी हो
तो कितना जुरमाना हे केवल सो रूपये
अधिकतम तीन सो रुपुये , लेकिन
यही अपराध अगर स्पेन में किसी ने किया तो
वहन ३.५८ करोड़ रूपये का जुरमाना देना होगा
देखो हेना भारत और स्पेन की सरकार और
नागरिकों की स्वतन्त्रता में फर्क ।
अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

सुप्रीम कोर्ट पर पहले भी था दबाव

देश के सुप्रीम कोर्ट के जजों पर सरकार के नेताओं का प्रभाव आज से पहले भी रहा हे , खुद सुर्प्रिम कोर्ट ने आपात स्थति के दोरान हेबियस कोर्पस की एक रिट की सुनवाई के दोरान आपात स्थिति के दोरान दिए गये सुप्रीम कोर्ट के एक निर्णय को गलत करार दिया हे , सुप्रीम कोर्ट ने एक मामले में तानाशाही कार्यवाही के तहत जब एडी एम जबलपुर द्वारा हिरासत में लियें गये एक पीड़ित की याचिका सुनी तो सुप्रीम कोर्ट ने बहुमत के आधार पर इस मामले में संविधान की भावना के विपरीत आदेश दिया और इस आदेश का विरोध करने वाला एक मात्र सुप्रीम कोर्ट जज जस्टिस एच आर खन्ना को बाद में पदोन्नति मामलों सहित अन्य मामलों में परेशानी के दोर से गुजरना पढ़ा ।

ताज्जुब हे के सुप्रीम कोर्ट का भी आपात स्थिति में सरकार का पूरा दबाव था और इस तानाशाही कार्यवाही को सुरिम कोर्ट ने जिस तरह से क्लीन चिट देने का प्रयास किया था अब वर्तमान में एक मामले की सुनवाई के दोरान इस फेसले की समीक्षा के वक्त यह पोल खुली हे जो इस देश का और इस देश की न्यायिक व्यवस्था का अंग्रेजों के काले कानून से भी बुरा हाल दर्शाती हे । अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

हमारी दूकान नहीं ...

जो प्यार ना समझे
वोह इन्सान नहीं
दुनिया में बताओ
ऐसा कोन हे
जो परेशान नहीं
जब सुझाव वाली
टिप्पणियाँ दोगे
तभी तो हम
ब्लॉग लिखेंगे
वरना हमारी भी
कोई ब्लॉग की
दूकान नहीं ।
अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

बलिराम भगत के निधन का अवकाश या मजाक

राजस्थान में हाईकोर्ट जजों को शपथ दिलवाने वाले पद महामहिम राज्यपाल रहे बलिराम भगत को लोकसभा में अध्यक्ष भी बनाया गया था जो जजों के महाभियोग की कार्यवाही सुनने के लियें अधिक्रत थे ऐसे महामहिम के निधन पर राजस्थान सरकार ने अनमने मन से अवकाश की घोषणा की और अवकाश भी ऐसा के सरकारी दफ्तर बंद थे तो स्कुल परीक्षाओं के लियें खुल रहे थे निजी सभी स्कुल खुले थे जबकि राजस्थान हाईकोर्ट ने तो इस दिन अवकाश करना मुनासिब ही नहीं समझा । यह सच हे के छटे वेतन आयोग के बाद अवकाश के मामले में निर्णय बदल दिए गये थे लेकिन किसी की म्रत्यु पर अवकाश को ओपचारिक कर उसका जो मजाक उधाया गया हे वोह शायद पुरे देश में यह पहली अनूठी घटना हे । अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

राजस्थान में कमिश्नर प्रणाली शुरू

कहावत हे कव्वा चले हंस की चाल अपनी भी चाल भूल जाये और राजस्थान में कमिश्नर पुलिस प्रणाली लागु करने के मामले में राजस्थान सरकार ने कुछ ऐसा ही किया हे जयपुर राजस्थान की राजधानी हे यहाँ की आबादी और पुलिस प्रशासन निश्चित तोर पर कमिश्नर प्रणाली की मांग करता हे और इसीलियें जयपुर में कमिश्नर प्रणाली लागु करने की प्रक्रिया शुरू की गयी इस प्रणाली में मुख्यमंत्री का विधानसभा क्षेत्र जोधपुर होने के कारण जोधपुर में भी कमिश्नर प्रणाली की प्रक्रिया शुरू की गयी , जोधपुर जो कोटा सी भी बहुत छोटा और पिछड़ा शहर हे वहां अपराधों की संख्या भी कोटा से कम हे फिर भी कोटा को नजर अंदाज़ कर जोधपुर को जयपुर के साथ दंड प्रक्रिया संहिता के प्रावधानों के तहत मेट्रो सिटी घोषित किया और अचानक जोधपुर में भी कमिश्र पुलिस प्रणाली लागु कर दी ।
एक जनवरी २०११ से जयपुर जोधपुर में कमिश्नर प्रणाली लागु की गयी हे पुराने आई जी को पुलिस कमिश्नर का पद दिया गया हे जबकि वरिष्ठता को इसमें आधार नहीं बनाया हे वफादारी को ही केवल आधार बनाया गया हे अब आज ३ दिसम्बर खत्म हो गयी हे लेकिन एक जनवरी से लागु इस प्रक्रिया में जयपुर या जोधपुर के कमिश्नर पुलिस ने कोई कार्यवाही नहीं की हे करते भी केसे उनकी अचानक नियुक्ति होने से वो खुद हतप्रभ हे और उन्होंने खुद ने दुसरे राज्यों की कमिश्नर प्रणाली की कार्यवाही का प्रशिक्ष्ण भी नहीं लिया हे इसलियें अभी वर्तमान में तो बस यही स्थिति हे के कव्वा चले हंस की चल और अपनी चल भी भूल गया हे और इसी लियें अभी पुलिस तमाशा बनी हे । अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

वक्त की आंच में

वक्त की
जलती हुई
आग में
लोहा हो
या हो पत्थर
सभी
पिघल जाते हें
कोन करेगा
हमें याद
वक्त के साथ
ख्यालात भी
बदल जाते हें ।
अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

केवल दो आंसू थे वोह भी गये ..

जो दो थे वोह भी गये ...

किसमत रूठी
दिल के तार टूटे
जो देखे थे सपने
वोह सब
पुरे होने के
पहले ही टूटे
आंखों में
बेशकीमती थे
सिर्फ दो आंसू
वोह भी कमबख्त
याद उनकी आई
तो आँखों से बह गये ................. ।
अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

02 January 2011

इज़हार होना चाहिए

इश्क हे तो
छुपाओ ना कभी
इसका
इज़हार होना चाहिए
आराम के लिएँ
एक दिन
आदमी को
बीमार भी
होना चाहिए
ऐ यादों
तुम भी सुन लो
एक दिन की
छुट्टी दे दो
इश्क हो चाहे हो प्यार
इसमें भी
कमसे कम
एक तो इतवार
होना चाहिए
और प्यार को
देना हे
अगर लम्बी
जिंदगी
तो फिर
एक दुसरे पर
एक दुसरे का
एतेबार भी होना चाहिए ।
अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

सोचा था ....

सोचा था
अब बहुत हो गयी
अब तो उनको
हर तरह से
भूल जायेंगे
सामने आये भी वोह अगर
तो उनको देख कर भी
उन्हें अनदेखा कर जायेंगे
लेकिन
सामने आया
जब चेहरा उनका
दिल कमबख्त चीख पढ़ा
बोला इस बार तो
जी भर कर देख लो
मोका मिला तो
अगली बार जरुर भूल जायेंगे
अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

एक बार मुस्कुराओ जरा

एक बार मुस्कुरा दो .....

फुल को देखो
वोह खिल कर भी
उदास हे
कल टूट जाएगा
माली के हाथों
उसे
इसका
एहसास हे
समुन्द्र को देखो
कितनी नदिया
गिरती हें
उसमें
खुद का
खरा पानी होने से
फिर भी उसे
मीठे पानी की प्यास हे
इस खुबसुरत चेहरे पर
नाज़ुक से इन होंटों से
जरा थोड़ा सा
मुस्कुरा दो
क्योंकि
कहते हें
के खुदा को
इस दुनिया में
सबसे
प्यारी हंसी की
तलाश हे ।
अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

इस बार मकर सक्रांति भी दो दिन मनाई जाएगी

देश में मकर सक्रांति का त्यौहार इस बार दो दिनों तक याने १४ और १५ जनवरी को मनाया जाएगा लोग दो दिन पूजा पाठ तिल चट्टे और पतंगबाजी का मजा ले सकेंगे , सूरज मकर सक्रांति के दिन ६.१४ बजे राशि में प्रवेश करेंगा और इसी के साथ ही सूरज जो प्रथ्वी से काफी दूर चला गया था अब प्रथ्वी के नजदीक आ जायेगा ,इस दिन सूरज दक्षिण से उत्तर के तरफ आता हे जिसे धार्मिक रूप से सूरज को देवलोक की तरफ आना कहते हें और इसी के साथ एक माह से रुके पढ़े सभी शुभ कार्य लोग करना शुर कर देते हें । दुसरे शब्दों में कुछ लोग सूरज को बाल्यावस्था से व्र्द्धाव्स्था की तरफ भी जाना कहते हें और इसीलियें इस दिन से ही ठंड की कमी और गर्मी की शुरुआत सी होने लगती हे । दिन बढ़े रातें छोटी होने लगती हे, धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन सूर्य स्नान स्वास्थ के लियें लाभदायक हे और आँखों की रौशनी के लियें भी ठीक रहता हे इसीलियें इस दिन पतंगबाजी होती हे ताके आसमां पर पतंग के नाम पर लोगों की निगाहें सूरज के सामने हों और आँखों को फायदा पहुंचे इस लियें दो दिन की मकर सक्रांति पर सभी को अग्रिम हार्दिक बधाई ...... । अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

01 January 2011

कोटा एस पी प्रफुल कुमार प्रफुल्लित हुए

राजस्थान के कोटा में तेनात आई पी एस अधिकारी प्रफुल कुमार बखूबी कोटा पुलिस अधीक्षक के पद पर रहकर अपना काम अंजाम दे रहे हें , चाक चोबन्द और दुरुस्त कानून व्यवस्था के लियें कोटा में उन्होंने दिन रात एक कर काम किया हे , पीड़ितों को न्याय देकर उन्होंने उनकी दुआएं ली हे और इसीलियें नये साल की नई दशाब्दी के शुभ अंक की घड़ी में इश्वर ने उन्हें पुत्र रत्न का एक नायाब तोहफा दिया हे ।
दोस्तों नये साल की नई शुरुआत के दिन वर्ष २०११ के ११ बजे की घड़ी पर यानि ११.५५ मिनट पर पुलिस अधीक्षक प्रफुल कुमार की पत्नी श्रीमती वर्षा ने एक सुंदर और चंचल स्वस्थ पुत्र को जन्म दिया उनके इसके पूर्व एक सुंदर सी प्यारी से लक्ष्मी हे जिस पुत्री का नाम उन्होंने उसकी खुशनुमा आवाज़ से प्रभावित होकर पीहू रखा हे , ज्योतिष विद्या के अनुसार भी इस ११ की शुभ घड़ी में और नई दशाब्दी की शुरुआत घड़ी में किसी का जन्म शुभ मन गया हे इसी लियें कोटा पुलिस अधीक्षक प्रफुल कुमार अब लोगों की मुबारकबाद ले रहे हें और प्रफुल्लित भी हें । अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

रक्षा सोदे की फाइलें अब सडको पर

दोस्तों देश में वायुसेवा के रक्षा सोदों की खरीद की फाइलें भरत की सडकों पर पड़ी मिले तो हमें समझ लेना चाहिए के हमारा देश और हमारे देश के रक्षक हमारी और हमारे देश की सुरक्षा को लेकर कितने चिंतित हें , यह हमारा देश हे इसलियें यहाँ तो इस प्रकार की गोपनीय फाइलों का सडकों पर मिलना गम्भीर बात नहीं हे आम बात हे लेकिन दुसरे देशों में अगर ऐसा होता तो अब तक तो तख्ता पलट गया होता यह भी उस वक्त हुआ हे जब अमेरिका देश को बार बार गोपनीय फाइलें इंटरनेट से हटाने और हेक करने के खतरे की चेतावनी दे रहा हे हमारे देश के अपने वरिष्ठ अधिकारी रोज़ जासूसी के गम्भीर मामलों में पकड़े जा रहे हे ।
दोस्तों अब बताओं जब महत्वपूर्ण पत्रावलियां सडकों पर उपलब्ध हो जाती हे तो फिर हमारे देश की जासूसी के लियें आई एस आई और सी आई ऐ को महनत करने की जरूरत कहां हे , इस लापरवाही के लिए हमारे देश के लड़ाकू विमानों की खरीद का सच तो दुश्मनों के सामने तो आ ही गया हे लेकिन ना जाने ऐसी कितनी फाइलें हें जो अभी सडकों पर पढ़ी होंगी या फिर सडकों पर उनकी सोदेबाज़ी की जारही होगी , दोस्तों यह मेरा देश हे यहाँ इस गम्भीर मामले को पक्ष और विक्ष ने गम्भीरता से नहीं लिया हे बस एक आयोग बनेगा जांच होगी सरकार आयेगी सरकार जाएगी लेकिन एक दो अधिकारीयों के खिलाफ प्रतीकात्मक कार्यवाही के आलावा इस ग्म्बिर मामल में कोई भी गम्भीर कदम नहीं उठाया जाएगा जरा सोचो देश में अगर ऐसा ही कुछ चलता रहा तो फिर हमारे विदेशियों का फिर से गुलाम बनने में कितने दिन कितने साल बाकी रह जाते हें इसलियें दोस्तों उठो ,जागो देश और समाज में जाग्रति पता करो और देश के इन दुश्मनों को फांसी पर लटकवा कर ऐसा उदाहरण पेश करो के ऐसे लोग फिर इस देश की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ न कर सकें । अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

चाइना ने पुल निर्माण में भी अपना सिक्का जमाया

विश्व भर में आर्थिक तंगी और भुखमरी के दोर से गुजर रहे चीन ने चाइना मेड उत्पाद विश्वभर में सस्ते दामों में उपलब्ध कराकर खुद अपने देश की आर्थिक स्थिति मजबूत कर ली हे और चप्पे चप्पे पर सस्ते दामों पर बेहतरीन उत्पाद देकर बाज़ार से महंगे दामों में सामान बेचने वाले देशों के लियें मुसीबत पैदा कर दी हे और खुद को गरीब और गरीब देशों का मसीहा साबित किया हे ।
चीन ने अब खुद को मजबूत बनाए के बाद अपने देश को अंतर्राष्ट्रीय राजमार्ग से जोड़ने के लियें विश्व के सबसे लम्बे पुल का निर्माण कम वक्त और कम कीमत में तय्यार किया हे एक समुन्द्र पर ४२.५० किलोमीटर लम्बे इस पुल निर्माण का कार्य वर्ष २००६ में शुरू किया गया और वर्ष २०१० के एंड में यानि चार वर्षों में पूरा भी कर लिया गया इस पुल के निर्माण को समय से पहले और गुणवत्ता आधारों पर निर्मित करने के कारण इसका खर्च ३८१ अरब रूपये आया हे चीन का यह पुल अब विश्व का सबसे लम्बा पुल बन गया हे इसके पहले अमेरिका का सबसे लम्बा पुल ३६ किलोमीटर का था लेकिन दूर द्रष्टि ,कड़ी मेहनत , लगन और इमानदारी के संकल्प के चलते चीन ने आज चाइना मेड के साथ साथ चाइना पुल के नाम पर भी विश्व में अपना सिक्का जमा लिया हे । एक हमारे देश में खासकर खुद हमारे कोटा में चम्बल नदी के दो किनारों को पाटने वाला बनाया जाने वाला पुल हे जिसमें दो बार हदसा हो गया एक बार बढ़ा हादसा हुआ जिसमें अरबों रूपये के नुकसान के साथ देश के ५० से भी अधिक इंजीनियर और कर्मचारी मारे गये और पुल निर्माण को कई दशाब्दी गुजर गयी हे लेकिन पुल हे के बनने का नाम ही नहीं ले रहा हे । अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

नये साल में कानून की पालना के लियें रोकना महंगा पढ़ा

दोस्तों जब पुराने २०१० की विदाई और नये २०११ के आगमन के मिलन की रात लोग जश्न मना रहे थे तब जयपुर के एक वरिष्ट प्रशासनिक अधिकारी को यह पता नहीं था की जश्न की यह रात उनके लियें काली रात साबित होगी , जयपुर में नियुक्त सम्भागीय आयुक्त जनाब आर पी जेन को जब पता चला के एक कार्यक्रम में दस बजे बाद डिस्को म्युज़िक बंद करवाने पुलिस और ऐ डी एम पहुंच गये हें तो इन जनाब अधिकारी जी ने दस बजे बाद माइक और गाने बजाने की रोक के कानून का ध्यान नहीं रखा और ऐ डी एम जयपुर को इस मामले में कार्यवाही करने से रोक दिया लेकिन आदेश अदालत का था इसलियें पुलिस के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक और थानाधिकारी खुद को बचाने के लियें कार्यक्रम रुकवाने पर अड़ गये बात आगे बढ़ी और फिर शिकायत मुख्यमंत्री कार्यालय तक पहुंची ।
कानून व्यवस्था लागु करवाने वाले अधिकारी जब कानून व्यवस्था तोड़ने के लियें और इससे नजर अंदाज़ कर चले जाने के लियें जब निर्देश दें तो इससे खतरनाक बात और क्या हो सकती हे इसलियें मुख्यमंत्री जी ने इसे गम्भीरता से लिया और सम्भागीय आयुक्त जयपुर की जश्न की नये साल की पहली सुहावनी रात को काली घटाटोप वाली अँधेरी रात बना दिया ,मुख्यमंत्री जी ने तुरंत प्रभाव से सम्भागीय आयुक्त आर पी जेन को हटाने के आदेश देकर आदेश की प्रतीक्षा में रख दिया हे अब जब इतने बढ़े अधिकारी को सबक सिखाया जा सकता हे तो फिर छोटे बढ़े अधिकारीयों को तो सोच ही लेना चाहिए । अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

कोटा कलेक्टर को हटाने से जनता परेशान

Friday, December 31, 2010

कोटा कलेक्टर टी रविकांत को मुख्यमंत्री जी ने विशिष्ठ सचिव बनाया

राजस्थान के कोटा में पिछले कुछ दिनों से कोटा में कलेक्टर रहे टी रविकांत की प्रशासनिक क्षमता और कार्यशेली को देख कर राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कोटा में सफलतम कार्य कर रहे हर दिल अज़ीज़ बने कोटा कलेक्टर टी रविकांत को जयपुर मुख्यमंत्री भवन में बुला लिया हे ।
नये साल की इस पहली खबर में टी रविकांत को तो उनकी क्षमता का पुरस्कार मिलना था लेकिन कोटा के पीड़ित और गरीब लोगों को तो इस खबर से सदमा लगा हे क्योंकि कोटा की जो कार्य योजनायें हें और जो चुस्त दुरुस्त प्रशासन हे अब अगर वोह ढर्रा बिगड़ गया तो गरीब और पीड़ित को त्वरित नया मिलने के ख़्वाब को टी रविकांत ने जो हकीकत में बदल दिया था उसका क्या होगा । दोस्तों आज के इस कलियुग में बहुत कम ऐसे अधिकारी हें जिनकी कार्यशेली के मुक्त कंठ से प्रशंसा की जाती हो में खुद भी इस मामले में कंजूस हूँ लेकिन किया करूं टी रविकांत कलेक्टर कोटा की कार्यशेली ने मुझे भी अपना फेन बना लिया था और लगता था की अब कोटा का प्रशासन , कर्मचारी और व्यवस्थाएं ट्रेक पर आने लगी हें निष्पक्