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27 अक्टूबर 2011

न फेरा-न सिंदूर फिर भी एक दूजे के हो गए दूल्हा-दुल्हन

हिसार. शहर के एक मैरेज पैलेस में पिछले महीने एक ‘खास’ शादी संपन्न हुई। यह शादी अपने आपमें बिल्कुल अनोखी थी। इसमें न तो दुल्हन ने मांग भरा और न ही दूल्हे ने फेरा लिया।

दोनों परिवारों की सहमति से होने जा रही यह शादी अंतरजातीय है और परंपरागत रीति रिवाजों से अलग दहेज मुक्त भी। दुल्हन पूनम यादव एमएससी है, दूल्हा सतविंदर सैनी एक बड़ा कारोबारी। इसी के चलते दोनों परिवारों ने इसे ‘रिवोल्यूशनरी वेडिंग’ का नाम दिया और विवाह के कार्ड पर छपवाया।

लड़की के पिता हरपाल सिंह ने बताया कि यह शादी दो आनंद मार्गी परिवारों की बीच हुई, जो समूचे विश्व को अपना परिवार मानता है। उन्होंने कहा कि हमारे गुरु श्री श्री आनंदमूर्ति की आज्ञा है कि समाज को एक सूत्र में पिरोया जाए, वैमनस्य और जातिवाद, क्षेत्रवाद से ऊपर उठा जाए। इसके लिए विवाह एक अच्छा माध्यम है।

अगर दो अलग जाति के परिवार दो अलग क्षेत्र से आपस में विवाह संबंध करते हैं, तो दोनों वर्ग एक और क्षेत्र एक हो जाते हैं। यह प्रक्रिया जितनी तेजी से बढ़ती है, उतनी ही तेजी से विश्व एकता को मजबूत करने में बल मिलता है।

दूसरा सादे तरीके से शादी होने से अनावश्यक धन की बर्बादी, दहेज प्रथा और भ्रूण हत्या रोकने में सहायता मिलती है। दहेज के कारण लोग लड़कियों को कोख में ही मार देते हैं, अगर दहेज और शादियों में शाही खर्ची खत्म हो गई तो भ्रूण हत्या भी खत्म हो जाएगी। शादियों से बचा धन किसी के उपचार या कल्याणकारी काम में लगाया जा सकता है। सामाजिक मुद्दों पर चर्चा करने अन्ना आंदोलन को समर्थन देने वाले दिल्ली के न्यायाधीश अजय पांडे ने भी इस शादी में शिरकत की।

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