इंडस्ट्री ने यह भी ऑफर किया है कि भिखारियों को अन्य कर्मचारियों की तरह ईएसआई, प्रोविडेंट फंड और बोनस की सुविधाएं भी मिलेंगी। काम करने के इच्छुक भिखारियों को सरकार की ओर से निर्धारित न्यूनतम वेतन दिया जाएगा। उद्यमियों ने यह प्रस्ताव भिखारियों के पुनर्वास के लिए काम करने वाले स्वयं सेवी संगठनों और जिला प्रशासन के सामने अपना यह प्रस्ताव प्रस्तुत कर दिया है। इंडस्ट्री ने यह भी कहा है कि वह स्वस्थ व 18 वर्ष से आयु से अधिक भिखारियों को रोजगार देने में सक्षम हैं।
फोकल प्वाइंट फेस 4 एसोसिएशन के प्रधान, फोकल प्वाइंट फेस 8 एसोसिएशन के चेयरमैन रजनीश आहूजा के अनुसार जवान व स्वस्थ लोगों को भीख मांगते देखकर दुख होता है। इस उद्यमशील शहर में जहां रोजगार के इतने अवसर हैं, वहां भिखारियों का होना अच्छा नहीं है। वह अपनी इंडस्ट्री में भिखारियों को रोजगार देने के लिए तैयार हैं। उनकी एसोसिएशन के सदस्य भी अपनी इंडस्ट्री में भिखारियों को प्रशिक्षण व रोजगार देने पर सहमति दे चुके हैं।
दीपक बिल्डर्स के चेयरमैन दीपक सिंघल के अनुसार उन्होंने भी भिखारियों को रोजगार देने का प्रस्ताव दिया है। उनका लुधियाना, बठिंडा, मोहाली व चंडीगढ़ आदि शहरों में काम चल रहा है। वह कितने भी भिखारियों को काम दे सकते हैं। वह अपनी बात प्रशासन और स्वयं सेवी संगठनों के सामने रख चुके हैं।
धार्मिक स्थलों के बाहर ज्यादा भिखारी
दिल्ली में कॉमनवेल्थ गेम्स के आयोजन के दौरान कुछ राज्यों में हुए सर्वे के आंकड़ों के मुताबिक लुधियाना में भिखारियों की संख्या 26 हजार के करीब है। लुधियाना में भिखारियों की ज्यादा संख्या उन धार्मिक स्थलों के बाहर है, जहां श्रद्धालुओं की संख्या ज्यादा है। लुधियाना में श्री दुर्गा माता मंदिर जगराओं पुल, नव दुर्गा मंदिर सराभा नगर, श्री कृष्णा मंदिर माडल टाउन, सिद्ध पीठ दंडी स्वामी, संगला वाला शिवाला, गोविंद गोधाम, गीता मंदिर शनि धाम के अलावा भारत नगर चौक, भाई बाला चौक, समराला चौक आदि में इन भिखारियों का जमावड़ा कभी भी देखा जा सकता है।
एनआरआई भी प्रभावित
इंगलैंड में बसे एनआरआई सुभाष सूथर भी इंडस्ट्री के इस ऑफर से प्रभावित हैं। उनका इंगलैंड में अपना व्यवसाय हैं। वह निजी दौरे पर भारत आए हुए हैं। सुभाष सूथर के अनुसार उन्हें एक स्वयं सेवी संगठन के समारोह में इंडस्ट्री के इस कदम का पता चला है। वह इस मसले पर लुधियाना के डीसी से मिल चुके हैं। उनके कई परिचितों की लुधियाना में बड़ी इंडस्ट्री है। अगर प्रशासन ऐसा कोई प्रयास शुरू करता है तो वह भिखारियों को अपने परिचितों की इंडस्ट्री में जगह दिला सकते हैं।
लुधियाना, अमृतसर व जालंधर में प्रस्तावित हैं बैगर होम
केंद्र सरकार की योजना के मुताबिक लुधियाना, जालंधर और अमृतसर में बेगरी होम प्रस्तावित हैं। प्रत्येक बैगर होम में 50 भिखारियों को रखने का प्रावधान है। इन बेगरी होम का संचालक किसी स्वयं सेवी संगठनों को दिया जाना है। इनमें भिखारियों के लिए टीवी व मनोरंजन के साधन भी उपलब्ध कराने का प्रावधान है।
सरकार की योजना भिखारियों को निठल्ला करने की
भिखारियों को इस पेशे से हटा कर अपने पैरों पर खड़ा करने के प्रयास में जुटी संस्था नोबल फाउंडेशन के चेयरमैन राजिंदर शर्मा के अनुसार भिखारियों के पुनर्वास के लिए केंद्र सरकार की योजना जिला प्रशासन के पास आई है। इसमें 50 भिखारियों के लिए पुनर्वास केंद्र स्थापित करने की योजना है, जिसका करीब 50 लाख रुपये का बजट है।
इस योजना की बजाए उन्होंने 18 से 60 वर्ष के भिखारियों को रोजगार दिलाने, छोटे बच्चों की शिक्षा का प्रबंध करने और वृद्ध भिखारियों को सीनियर सिटीजन होम भेजने वाला प्रस्ताव दिया था। उन्होंने इस काम में जिला प्रशासन को हर संभव मदद देने का प्रस्ताव भी दिया था। यह प्रस्ताव दिए एक महीना बीत चुका है, लेकिन किसी भी अफसर से कोई रिस्पांस नहीं आया है।

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