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20 अक्तूबर 2011

अफसरों में बैठ गया है डर, नहीं खोल रहे हैं जबान


जयपुर. पदोन्नति में आरक्षण मामले में हाई कोर्ट की तल्ख टिप्पणी के बाद अफसर सीधे तौर पर कुछ भी कहने से बच रहे हैं, लेकिन अवमानना के डर से अंदरूनी तौर पर नई वरिष्ठता सूचियां भी तैयार कर रहे हैं। उनका मानना है कि अगर ऐसी नौबत आई तो कोर्ट में कुछ वरिष्ठता सूचियां पेश करके बाकी सूचियों के लिए समय मांग सकते हैं। तर्क यह होगा कि नए सिरे से वरिष्ठता सूचियां बनाने, डीपीसी कराने और पदोन्नति की लंबी प्रक्रिया में समय लगने की संभावना है।

इस मामले में हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट ने भी उचित ठहराया था। इसके बाद याचिकाकर्ताओं ने अवमानना याचिका भी लगा दी। सरकार ने फैसला लेने के लिए सेवानिवृत्त आईएएस केके भटनागर की अध्यक्षता में कमेटी बनाई, उसकी रिपोर्ट भी आ गई, लेकिन अभी स्थितियां वैसे ही है।

क्यों हो रही है देरी

समता आंदोलन समिति और मिशन-72 से जुड़े लोगों का आरोप है कि सरकार तुष्टिकरण की नीति अपनाने और वोट बैंक को खुश रखने के लिए देरी करके समय को टालना चाहती है। अगर कोर्ट अवमानना पर कोई पैनल्टी, सजा या अन्य ऐसा कोई आदेश देती है तो राज्य सरकार को सुप्रीम कोर्ट जाने का बहाना मिल जाएगा और मामला फिर से लटक जाएगा। कोर्ट भी जानता है कि इस विषय को लेकर कर्मचारियों के आंदोलन चल रहे हैं, इसीलिए स्थिति बिगड़ सकती है।

कोर्ट के मामले में हम कुछ नहीं कहेंगे

मुख्य सचिव एस. अहमद और कार्मिक विभाग के प्रमुख सचिव खेमराज से जब इस मामले में सरकार की आगे की रणनीति के बारे में जानना चाहा तो उन्होंने कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। मुख्य सचिव ने गुरुवार को प्रमुख विधि सचिव और प्रमुख कार्मिक सचिव के साथ और प्रमुख कार्मिक सचिव ने अपने विभागीय अधिकारियों के साथ इस मामले को लेकर राय-मशविरा किया।

इनका कहना है

कोर्ट की टिप्पणी गंभीर है। सरकार को उसके आदेश का पालन करना चाहिए। अगर नहीं किया तो मिशन-72 के कार्यकर्ता पहले तो क्रमिक अनशन और उसके बाद आमरण अनशन करेंगे।
-पूरण चंद झरीवाल, महासचिव, मिशन -72

कोर्ट को कहना पड़ा है कि उसे उसकी शक्ति का इस्तेमाल करने के लिए मजबूर नहीं किया जाए। ऐसा इसलिए क्योंकि सरकार आदेश की पालना नहीं कर न्याय करना ही भूल गई। लेकिन अब हम भी आक्रामक रुख अपनाएंगे।
-पाराशर नारायण शर्मा, अध्यक्ष, समता आंदोलन समिति

संविधान के अनुच्छेद 215 के तहत हर तरह के अधिकार हैं। इसमें कोर्ट अवमानना करने वालों को जेल भेज सकता है, जुर्माना कर सकता है, संबंधित अधिकारियों की एसीआर में विपरीत टिप्पणी करवा सकता है।
-शोभित तिवाड़ी, समता आंदोलन समिति के वकील

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