आपका-अख्तर खान

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29 सितंबर 2011

शायर चाँद शेरी की खुदा से एक दुआ इस तरह है

तू ना अम्रत का प्याला दे हमें
सिर्फ रोटी का निवाला दे हमें ...
जिस को पढकर एक हो एहले वतन
वोह मोहब्बत का रिसाला दे हमें ...
ढूंढ ले ज़ुल्मत में मंजिल के निशाँ
या खुदा ..इतना उजाला दे हमे ...
सीख़ पायें हम जहाँ इंसानियत
कोई ऐसी पाठशाला दे हमें .....
दिल मगर उजला हो पारस की तरह
जिस्म गोरा दे कि काला दे हमे ....
और कुछ चाहे ने दे शेरी मगर
शायरी का फन निराला दे हमें ........................संकलन अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

1 टिप्पणी:

  1. बेहतरीन रचना।
    इंशा अल्‍लाह... दुआ कुबूल हो......
    आमीन..........................

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