आपका-अख्तर खान

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16 जून 2011

क्या यही प्यार है ............

तुमने 
मुझ से 
कहा था 
तुम्हे मुझ से 
प्यार है ..
तुन्हें पता है 
में डूब रहा था 
समुन्द्र में 
तुम किनारे पर 
खड़ी खिलखिलाती थी 
मेने मेरी जाना बचाने के लियें 
तुम्हारा हाथ मागा था 
लेकिन तुमने 
इंकार किया था ..
ना जाने केसे 
समुन्द्र की लहरों की 
वफाई से 
मुझे जिंदगी मिली 
तुमने फिर मुझे देखा 
और मुझ से 
फिर तुमें कह दिया 
हाँ 
तुम्हें 
मुझ से प्यार है 
में पागल 
बदहवास सा 
सोचता हूँ 
एक प्यार है 
एक सच्चा प्यार है 
और एक 
अँधा प्यार है 
अप ही जरा बताओं 
वोह जो कहती है 
क्या यही प्यार है ................
अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

4 टिप्‍पणियां:

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