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28 जून 2011

भडकी है आग

जो आग लगी थी 
सीने में मेरी 
उसे तो तुम्हारे आंसुओं से 
बुझा दिया था तुमने ...
इलाही आज 
उनके आंसुओं से 
भडकी है आग 
अब तू ही बता 
इस आग को 
बुझाऊं में केसे ................अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

2 टिप्‍पणियां:

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