आपका-अख्तर खान

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26 अप्रैल 2011

तितली की तरह ....

वोह आये और 
तपाक से 
कुछ लिपटे 
मुझसे 
इस तरह 
जेसे 
लिपटती है 
तितली 
किसी गुल से 
रस चूसने के लियें 
में भी 
एक गुल की तरह 
ठगा सा 
बस यूँ ही 
उसे देखता रहा .............................. अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

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