आपका-अख्तर खान

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23 अप्रैल 2011

यह मेने क्या कर डाला ................

अपनी 
नादानी के होश में 
आज मेने 
यह क्या कर डाला ,
फलक में देखा तो 
अपनी जन्नत के 
सितारे ना मिले 
हम तो 
साथ थे उनके 
मगर वोह 
हमारे कहां  हो सके ,
फिर भी 
देख लो 
एक छोटी सी 
नाव होने पर भी 
आज हम 
उफनते समुंदर में 
उतर गए 
जिस समंदर में 
दूर दूर तक 
नहीं 
दिख रहा है किनारा .......................................... अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

4 टिप्‍पणियां:

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