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21 अप्रैल 2011

शब्द और दिल

शब्द और दिल
दोनों धड़कते हैं
दिल धड़कता है
तो जिंदगी चलती है
शब्द धडकते हैं
तो समाज धड़कता है
शब्द ही हैं
जो समाज को
जिंदगी का
अहसास कराते हैं
दिल है
जो
शरीर को
ज़िंदा साबित करता है
लेकिन दोस्तों
दिल और शब्द
बहुत बहुत नाज़ुक होते हैं
जब दिल टूटा है
तो जमाना रूठता है
जब शब्द बिगड़ता है
तो समाज में
प्रलय सी स्थिति हो जाती है
अराजकता आजाती है
इसलियें दोस्तों दिल हो
चाहे शब्द
इनका इस्तेमाल
बढ़ी देखभाल से करो
ताकि शब्द और दिल के सही इस्तेमाल से
जियों और जीने दो का सिद्धांत
आप और हम समाज,देश में
लागु कर सकें .
...अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

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